हवसी दीदी ने चुदाई के लिए बहुत तड़पाया (Hawasi Didi Ne Chudai Ke Liye Boht Tadpaya)

हवसी दीदी ने चुदाई के लिए बहुत तड़पाया (Hawasi Didi Ne Chudai Ke Liye Boht Tadpaya)

यह देसी सेक्स कहानी है एक भाई बहन के बीच हुए वासना के उस आकर्षण की, जिसने प्रेम का रूप ले लिया. मेरे घर में केवल 3 लोग हैं. पिता के गुजरने के बाद मेरी माँ को उनकी जगह नौकरी मिल गई. माँ के काम के चलते ज्यादातर समय हम दोनों भाई बहन घर पर अकेले रहते थे. 

मेरी दीदी का नाम निधि है. उनकी उम्र 24 साल है, वो मुझसे ढाई साल बड़ी हैं. उनकी लम्बाई 5 फुट 4 इंच है, रंग गोरा है और भरा हुआ शरीर है. वो बहुत सेक्सी दिखती हैं. उनका फिगर 38-28-36 का है. उनकी अभी शादी नहीं हुई है. वो एकदम काम की देवी का रूप लगती हैं. उनकी बड़ी सी गाँड़ इतनी जबरदस्त मटकती है, जब वो जीन्स पहनकर चलती हैं कि सब देखने वालों के गाँड़ खड़े हो जाते हैं.

तो आप ये तो जान ही चुके हैं कि मेरी निधि दीदी बला की खूबसूरत हैं.

दीदी मेरे साथ बहुत ही घुलमिल कर रहती थीं. हम दोनों अक्सर देर रात तक अकेले गप्पें मारते और मजाक करते रहते थे. दीदी के बारे में अपने दिल की एक बात बताऊँ.. तो वो मुझे बहुत अच्छी लगती थीं, पर उनको मैंने कभी गलत नजरिए से नहीं देखा था.

लेकिन उस दिन की घटना के बाद से दीदी के लिए मेरा नजरिया ही बदल गया. उस दिन दीदी अपनी सहेली की शादी में जाने के लिए तैयार हो रही थीं. जब वो तैयार होकर अपने कमरे से बाहर आईं तो एक पल के लिए मेरी साँसें थम गईं.

गोरे बदन पे लाल रंग की साड़ी, जिसका पल्लू जालीदार था. जालीदार पल्लू होने की वजह से पूरा ब्लाउज साफ दिखाई पड़ रहा था. उभरी हुई छाती, गहरे गले का ब्लाउज पहने हुए दीदी एकदम मादक माल लग रही थीं. दीदी ने साड़ी नाभि के नीचे बांधी ताकि उनकी नाभि की रिंग एकदम साफ दिखाई दे. दीदी स्वर्ग की अप्सरा रंभा के समान लग रही थीं.

दीदी ने मुझसे उन्हें अपनी सहेली के घर तक छोड़ने को कहा. इतना कह कर दीदी आगे बढ़ गईं. जैसे ही मैंने पीछे से उनकी गदराई हुई गाँड़ को ठुमकते हुए देखा तो मेरे होश उड़ गए.
मैं दीदी को छोड़ कर घर वापस आ गया.

रात के करीब दस बज चुके थे. माँ ने मुझे खाना दिया और अपने कमरे में सोने चली गईं. मैं खाना खाकर अपने कमरे में गया, पर मेरा ध्यान मेरी दीदी से हट ही नहीं रहा था. मैं उनके कमरे में गया, लाईट जलाई और सीधा उनके बाथरूम में घुस गया. बाथरूम में एक किनारे पे उनकी नाईटी रखी थी, जैसे ही मैंने उसको उठाया, उसमें से उनकी ब्रा और पैन्टी नीचे गिर गई. दीदी की ब्रा और पैन्टी को देख कर मुझपे मदहोशी सी छाने लगी. मैंने ब्रा और पैन्टी को सूंघा. सूंघते ही मुझे नशा सा होने लगा. मैंने पहली बार दीदी को सोचकर मुठ मारी और सारा मुठ उनकी ब्रा और पैन्टी पे गिरा कर सोने चला गया.

अगले दिन जब दीदी वापस आईं तो मैं सो रहा था. जब उठा तो फ्रेश हो कर नाश्ते की टेबल पे गया. दीदी पहले से ही वहां थीं और मुझे घूर रही थीं. मैं समझ गया कि दीदी ने ब्रा और पैन्टी में लगे मेरे मुठ को देख लिया है. दीदी ने कुछ नहीं बोला और अपने कमरे में चली गईं.

अब मैं अपनी दीदी को बहन की नजर से नहीं बल्कि एक जवान लड़की की नजर से देखने लगा. मेरा पूरा ध्यान अब दीदी पे ही रहने लगा. मैं उनकी जवानी की झलक पाने का कोई मौका नहीं गंवाता था. झाडू पोंछा करते वक्त जब वो झुकती थीं तो मैं उनकी चूचियों को गौर से देखता. शायद उन्हें भी पता था कि मेरा ध्यान उन्हीं पर है, इसलिए वो जानबूझ कर ऐसी हरकतें करती थीं, जिससे मेरा ध्यान उन पर जाए.

माँ के बाहर काम करने की वजह से दीदी को आजादी मिल गई. अब वो और भी भड़कीले कपड़े घर में पहनने लगीं और अपनी मादक जवानी से मुझे सम्मोहित करने लगीं. मैं उनकी वासना को भड़काने के लिए रोज उनकी ब्रा पैन्टी में मुठ मारकर वैसे ही रख देता था. दीदी को भी और मुझे भी दोनों को पता था कि हम क्या कर रहे हैं और क्यों कर रहे हैं.

एक दिन दीदी के रूम का एसी खराब हो गया, जिसकी वजह से उन्हें मेरे कमरे में सोने की वजह मिल गई. उनकी हवस से भरी आँखें साफ चमक रही थीं. माँ, दीदी और मैं खाना खाकर उठे. माँ को सुबह ऑफिस जाना था, इसलिए वो खाना खाकर सोने चली गईं. मैं भी अपने कमरे में चला गया. आधे घण्टे के बाद दीदी मेरे कमरे में आईं.

मैंने दीदी को देखा तो हैरान रह गया. उन्होंने एक काले रंग की पारदर्शी सिल्की फ्रॉकनुमा नाईटी, जो सिर्फ उनकी जाँघों तक आ रही थी.. उसे पहनी थी. उसके अन्दर की ब्रा और पैन्टी साफ साफ दिखाई दे रही थी. सिंगल बेड होने के कारण वो मेरे एकदम करीब आकर लेट गईं. दीदी के शरीर से निकलती मादक महक से मेरे गाँड़ का बुरा हाल हो गया था. दीदी लेटते ही नींद के आगोश में चली गईं. पर उनके शरीर की खुशबू से मेरी नींद उड़ गई थी.

रात करीब एक बजे दीदी ने जब करवट बदली तो उनकी गदराई गाँड़ मेरी तरफ थी. अब मुझसे काबू नहीं हुआ तो मैंने अपना गाँड़ दीदी की गाँड़ के पास कर दिया और धीरे धीरे दबाव बढ़ाने लगा. दीदी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.
मैंने हिम्मत न होने के कारण आगे कुछ नहीं किया और सो गया. ऐसा करीब 3 दिन चलता रहा.

एक दिन मैंने कोशिश की, वो गहरी नींद में सो रही थीं. दीदी ने 2 पीस वाला गाउन पहना था और अन्दर ब्रा भी पहनी थी. रात के 2 बजे की बात है, मैं उठा और कमरे की लाइट जला दी. निधि दीदी सो रही थी, उनकी चूचियां साफ दिखाई दे रही थीं. मुझे थोड़ा सा डर भी लग रहा था कि वो मुझे देख ना लें, पर मैंने हिम्मत करके उनकी चूची पर हाथ रखा. पहले मैंने गाउन के ऊपर रखा.. फिर धीरे से दीदी की एक चूची दबाई और फिर दोनों हाथ से दोनों चूचियों को दबाने लगा. सच में मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

अब मैंने उनके रसीले होंठों को चूमा, फिर उनकी गर्दन पर चूमा. इतने में मुझे लगा कि शायद दीदी जाग गई हैं और सोने का नाटक कर रही हैं. मुझे इससे और हिम्मत मिल गई, मैंने उनका गाउन नीचे से ऊपर किया, तो उनकी गोरी और चिकनी जांघें मुझे दिखने लगी थीं.

इतने में वो उठ गईं और बोल पड़ीं- यह क्या कर रहा है तू?
मेरे तो जैसे होश उड़ गए.
मैं बोला- दीदी, मैंने कभी किस नहीं किया, मुझे नहीं पता कि किस कैसे करते हैं.

पहले तो वे मुझे देखती रहीं फिर दीदी मुस्कुरा कर बोलीं- मुझे भी नहीं पता, आज करके देखते हैं.

मैं दीदी के पास जाकर बैठ गया, दीदी ने मुझे अपनी बाँहों में ले लिया. मैंने भी दीदी को बाँहों में ले लिया और उनके रसीले होंठों को चूमने लगा. लगभग 5 मिनट तक हम एक दूसरे को चूमते रहे.

तभी एकदम से दीदी बोलीं- अमित, अब बस करो. मुझे कुछ अजीब सा लग रहा है.
मैं समझ गया कि दीदी गर्म होने लगी हैं, मैंने कहा- दीदी, मुझे आपसे किस करके बहुत अच्छा लग रहा है.

वो कुछ नहीं बोलीं. मैंने फिर से उन्हें चूमना शुरू कर दिया. मैं समझ गया कि वो चुदवाने के मूड में आ गई हैं. मैं दीदी की चूचियों को जोर से मसलने लगा. दीदी के मुँह से कामुक सिसकारियाँ निकलने लगीं. मैंने धीरे से दीदी की गाउन खोला और चूची चूसने लगा.

दीदी के कुछ भी न बोलने पर मैंने कहा- दीदी, गाउन उतार दो न प्लीज.
वो बोलीं- अमित मुझे डर लग रहा है, किसी को पता चल गया तो?
मैं बोला- दीदी कुछ नहीं होगा, किसी को पता नहीं चलेगा.

वो मान गईं. मैं दीदी की चूत सहलाने लगा, दीदी की चूत एकदम गीली हो चुकी थी, दीदी बोलीं- देखो अमित हम जो कर रहे हैं, ये सही नहीं है.
मैं कुछ नहीं बोला तो दीदी ने कहा- अब बस करो.

पर मैंने दीदी की एक न सुनी. उनको चूमने के बाद मैंने अपनी पैंट उतारी और अपना 7 इंच का गाँड़ निकाला तो दीदी के होश उड़ गए.

मैंने कहा- दीदी एक बार डालने दो.
दीदी बोलीं- इतना बड़ा.. मुझे मारना है क्या?
मैं बोला- तुम एक बार डलवाओ तो सही, कुछ नहीं होगा.

दीदी के मन में उत्सुकता और डर दोनों था. मैंने दीदी को बेड पर लिटाया और अपना गाँड़ उनकी चूत में धीरे धीरे डालने लगा. वो दर्द से कसमसाने लगीं. फिर मैं जोर जोर से झटके मारने लगा. दीदी चीखने लगीं. 
हवसी दीदी ने चुदाई के लिए बहुत तड़पाया (Hawasi Didi Ne Chudai Ke Liye Boht Tadpaya)
हवसी दीदी ने चुदाई के लिए बहुत तड़पाया (Hawasi Didi Ne Chudai Ke Liye Boht Tadpaya)
दीदी कराहते हुए बोलीं- बस करो, बहुत तेज दर्द हो रहा है.
लेकिन मैं कहाँ सुनने वाला था. मैं दीदी की चूत में गाँड़ पेलता चला गया. दीदी की सील टूट गई थी. दीदी की चूत से हल्का हल्का खून निकल रहा था. मैं उनको हचक कर चोदने लगा. दीदी भी मस्ती से चुदवाने लगी थीं

अभी 15 मिनट हुए थे कि मेरा सारा जोश दीदी की चूत में निकल गया. मैं हांफता हुआ दीदी की चूचियों पर गिर गया. दीदी भी झड़ चुकी थीं.

फिर मैंने दीदी की नाभि को चूमना शुरू किया. नाभि को चूमने से दीदी फिर से गरम हो गईं और उन्होंने मेरा गाँड़ चूसना शुरू कर दिया, जिससे हम दोनों दुबारा चुदाई के लिए तैयार हो गए. फिर दीदी ने मुझे लेटने को कहा और खुद अपनी गाँड़ के छेद को मेरे गाँड़ पर रख कर अपनी गाँड़ मरवाई. शायद दीदी पहले भी किसी से गाँड़ मरवा चुकी थीं.

जब मैंने उनसे इस बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि नहीं मैंने अभी तक किसी से गाँड़ नहीं मरवाई है, वो तो ब्लू-फिल्म देखते हुए मैंने मूली वगैरह से अपनी गाँड़ को ढीला कर लिया था.
मैंने पूछा कि चूत में मूली क्यों नहीं की?
तो बोलीं- मैं चूत की सील गाँड़ से ही खुलवाना चाहती थी.

अब मैं बेफिक्र होकर दीदी की गाँड़ मारने लगा. मुझे उनकी चूत से ज्यादा मजा गाँड़ मारने में आ रहा था.
करीब दस मिनट के बाद दीदी की गाँड़ में ही मेरा पानी निकल गया और हम दोनों उसी तरह एक दूसरे से लिपट कर सो गए.

इसके बाद तो माँ के ऑफिस जाने के बाद दीदी और मैं नंगे ही घर में चूत चुदाई का सुख भोगने लगते थे. 
हवसी दीदी ने चुदाई के लिए बहुत तड़पाया (Hawasi Didi Ne Chudai Ke Liye Boht Tadpaya) हवसी दीदी ने चुदाई के लिए बहुत तड़पाया (Hawasi Didi Ne Chudai Ke Liye Boht Tadpaya) Reviewed by Priyanka Sharma on 2:50 PM Rating: 5

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