दबी हुई हवस जगा कर मस्त चूत की चुदाई (Dabi Hui Hawas Jaga Kar Mast Choot Ki Chudai)

दबी हुई हवस जगा कर मस्त चूत की चुदाई
(Dabi Hui Hawas Jaga Kar Mast Choot Ki Chudai)

कैसे हो दोस्तो, मैं राजीव दिल्ली में एक कम्पनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूँ. कुछ समय पश्चात मैंने नोएडा की एक कंपनी में जॉइन कर लिया था। नोएडा में मेरी बीवी की बड़ी बहन यानि मेरी बड़ी साली भी अपने परिवार के साथ रहती थी. मेरे साढू साहब एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में सुपरवाइजर हैं और उनकी एक 2 साल की बेटी भी है, मैंने उन्हीं की बिल्डिंग में उनके ठीक ऊपर वाले फ्लोर पर शिफ्ट कर लिया.

मेरे वहाँ पहुंचने से मेरी बीवी और उसकी बहन बहुत खुश हो गईं क्योंकि मेरी बीवी को अपनी बहन का साथ जो मिल गया था. हम लोग खुशी-खुशी वहां रहने लगे।

इसी दौरान मेरी बीवी की तबियत काफी खराब रहने लगी. उसे वहां का मौसम सूट नहीं कर रहा था जिस वजह से उसे मुझे अपने पुराने घर पर छोड़ना पड़ा।

बीवी के जाने के बाद मैं अब बिल्कुल अकेला था इसलिए घर का सारा काम जैसे खाना बनाना, साफ-सफाई करना और यहां तक कि अपने कपड़े भी मुझे खुद ही धोने पड़ते थे. कई बार घर आने में देरी भी हो जाती थी तो खाने की भी समस्या हो जाती थी। मेरी बीवी की बहन जिन्हें मैं भाभी कहता था वो बहुत ही अच्छे स्वभाव की महिला थी, वो मेरा काफी ख्याल रखती थीं.

अक्सर सुबह निकलते समय और शाम को वापस आने के समय वो मेरे लिये चाय बना कर दे जाती थीं, कई बार शाम को देर होने पर मेरे लिए खाना भी बना देती थीं. मैंने उन्हें कई बार संकोचवश मना भी किया लेकिन वो मानती नहीं थीं।
इसी बहाने से कई बार हम दोनों का एक साथ बैठना हो जाता था.

चूंकि वो मेरा ख्याल रखती थी इसलिए मैं भी उसकी बेटी के लिए कई बार चॉकलेट या आइसक्रीम ले जाता था, जिससे वो बहुत खुश होती थी. अक्सर आफिस से लौट कर कुछ पल उसकी बेटी के साथ थोड़ी देर खेल कर और चाय पीकर मैं अपने रूम में जाता था, इस बहाने हम लोगों में थोड़ी थोड़ी नजदीकियां बढ़ने लगीं।

उनके पति हमेशा रात में 10 बजे के बाद ही आते थे और कई बार तो उनकी नाईट ड्यूटी भी होती थी. आफिस से आने के बाद कई दफा हम लोग काफी देर तक साथ बैठ कर बातें करते थे। उनके पति बेहद लापरवाह और अजीब मानसिकता के व्यक्ति थे जिससे वो बहुत परेशान रहती थी.

यह बात उसकी बीवी ने मुझे तब बताई जब हम लोगों की दोस्ती बढ़ने लगी. इस वजह से मैं भाभी का और अधिक ख्याल रखने लगा था जैसे कि उनके बाजार के छोटे-मोटे काम कर देता था. कई बार फोन में बैलेंस रिचार्ज करवाने चला जाता था. उसका भरोसा मुझ पर बढ़ता जा रहा था.

एक दिन की बात है जब मैं ऑफिस से लौटा तो वो बुरी तरह बुखार से तप रही थी, उन्होंने अपने पति को कॉल किया तो उन्होंने आने से मना कर दिया. उसकी हालत काफी खराब थी और वो रो रही थी. उसकी हालत मुझसे देखी न गई और मैं उसको डॉक्टर के पास ले गया और दवाई दिलवा कर ले आया.

फिर वापस आकर मैंने उनके लिए व उनकी बेटी के लिए खाना तैयार करके दिया। अगले दिन भी उनके पति के जाने के बाद उनके लिए बाजार से फल लाकर दिए. बीच-बीच में कॉल करके मैं भाभी का हाल- चाल भी पूछता रहा. शाम तक वो ठीक हो चुकी थीं.

मेरे इस व्यवहार से वो बहुत खुश हुई. उसने मेरे वापस आते ही मुझे चाय पिलाई और मेरे पास बैठ कर काफी देर तक बातें करती रही और उनके पति के बारे में बात करते हुए रोई भी. वो अपने पति की बेदर्दी से काफी दुखी थी. फिर मैंने उनको समझाया तो वो शांत हुई.

रात का खाना हम लोगों ने साथ में ही खाया. अगले दिन ऑफिस की छु्ट्टी थी. उस दिन सुबह नाश्ते से लेकर लंच तक हमने साथ ही किया. फिर वो कहने लगी कि उसे कुछ रोज़ की जरूरतों का सामान चाहिए है इसलिए हम लोगों ने बाजार जाने का प्लान किया.

हमने साथ में ही शॉपिंग की और फिर गोल गप्पे भी खाये. उसके बाद हम दोनों ने पार्क में साथ बैठ कर काफी सारी बातें भी कीं. उस दिन हमने बाहर खाना भी खाया. वापस घर आकर उसने अपने पति के लिए खाना बना दिया.

अगले दिन उनके पति की नाईट शिफ्ट थी इसलिए वो दिन भर घर पर ही रहे. फिर शाम को 8 बजे वो ड्यूटी पर चले गए. जब मैं आफिस से लौटा तो उनकी बेटी को खाना खिलाने के बहाने वहीं रुक गया. उन्होंने फिर मुझे जाने ही नहीं दिया. हमने एक साथ बैठ कर खाना खाया और काफी देर साथ में बैठ कर बातें करते रहे.

हम एक दूसरे के साथ बातचीत में काफी खुल गए थे तो बातों ही बातों में मैंने मजाक में उनसे पूछा कि आपके हस्बैंड सुबह 8 बजे चले जाते हैं और रात में 10-11 बजे आते हैं, कई बार नाईट शिफ्ट भी करनी पड़ती है, तो फिर आप लोग ‘वो’ कब करते हैं?
पहले तो वो मेरी बात का मतलब नहीं समझ पायीं और बोलीं- वो क्या?

इस पर मैंने मुस्कुराते हुए अपने दोनों हाथों की उंगलियों को मिलाते हुए चुम्बन का इशारा किया. मेरे इस इशारे पर वो एकदम से शरमा गयीं और एकदम से बोलीं- हो… ये क्या कह रहे हो आप! मैं तो आप को सीधा साधा समझती थी और आप … !
उनका चेहरा शर्म से बुरी तरह लाल था और हल्की सी मुस्कान फैल गई थी.

मैंने भी मजे लेते हुए कहा- क्यों सीधे लोग मजाक नहीं कर सकते क्या? और फिर आप तो …!
वो बोली- आप रुक क्यों गये?
मैंने कोई जवाब नहीं दिया तो वो कहने लगी- मैं तो आपसे बड़ी हूँ, मेरे साथ ऐसा मजाक कैसे कर लिया आपने?
इस पर मैंने भी तुरन्त कहा- आप तो मेरी भाभी हैं न.

फिर मैंने उसका हाथ अपने हाथ में ले लिया और कहा- और आप बड़ी हो तो क्या हुआ, मेरी दोस्त भी तो हो. मेरा तो हक बनता है आपसे मजाक करने का.
फिर मैंने थोड़ा सीरियस होकर कहा- आपको बुरा लगा क्या मेरी बात का?
वो बोली- नहीं, बुरा तो नहीं लगा लेकिन थोड़ा अजीब लगा क्योंकि मेरे साथ किसी ने ऐसा मजाक किया नहीं था इससे पहले.

मैं भी तपाक से बोल पड़ा- मगर मैं तो कर सकता हूं न! मेरे अलावा किसी और की हिम्मत है जो आपके साथ ऐसा मजा कर सके?
इस बात पर हम दोनों ही हंस दिये.

फिर मैंने दोबारा से पूछा- मगर मुझे अभी भी मेरे सवाल का जवाब नहीं मिला है?
मेरे ऐसा कहने पर उसने मेरे हाथ को नोचते हुए कहा- अभी बताती हूं तुम्हें, बेशर्म कहीं के! बहुत मार पड़ेगी अगर ऐसी बातें की तो मेरे साथ!
कहते हुए उसका चेहरा शर्म से लाल हो गया.

अब मैंने भी जिद करते हुए पूछा- मार लो, लेकिन जवाब तो दे दो?
वो शर्माते हुए बोली- ये भी कोई बताने की बात है.
मैंने कहा- लेकिन दोस्तों को तो बताई ही जा सकती है.
मेरी बात सुन कर वो एकदम से शांत हो गई.

फिर कुछ सोचकर बोली- आप खुद ही समझ लीजिये.
मैंने पूछा- क्या समझ लूं?
उसने कहा- जब वो इतने बिजी रहते हैं तो फिर आप खुद ही समझ लीजिये कि कुछ होता होगा या नहीं.
मैंने कहा- बिजी रहने का मतलब ये कब से होने लगा कि प्यार भी नहीं किया जायेगा?

फिर मैंने दूसरा सवाल किया- अच्छा ये तो बता दो, कितने दिन से नहीं किया है?
वो बोली- पिछले एक महीने से.
मैंने हैरान होते हुए कहा- सच में? एक महीने से आप लोग कैसे रुके हुए हो?

वो बोली- मतलब?
मैंने कहा- मतलब ये कि आपका मन तो मचलता ही होगा तो फिर बिना किये कैसे रह लेते हो?
मेरी इस बात पर वो बुरी तरह से शरमा गयी और कहने लगी- मेरे बारे में तो सब कुछ पूछ लिया और अपने बारे में कुछ नहीं बता रहे.

मैंने कहा- मैं क्या बताऊं, मैं भी बहुत टाइम से बिना (सेक्स) किये रह रहा हूं. ऐसे ही मन को बहला लेता हूं.
वो बोली- मन बहलाने का क्या मतलब है?
मैंने कहा- बस मोबाइल में कुछ-कुछ देख कर अपने मन को बहला लेता हूं और खुद को संतुष्ट कर लेता हूं.

मेरी इस बात पर उसने अन्जान बनते हुए पूछा- मोबाइल में ऐसा क्या देख लेते हो जो संतुष्ट हो जाते हो?
अब मैंने भी शर्म छोड़ते हुए अपना मोबाइल फोन निकाला और पॉर्न वीडियो चला कर उसके सामने कर दिया. वो उसे देख कर बुरी तरह शरमा गयी और उसने अपने दोनों हाथों से अपना चेहरा ढक लिया.

फिर बोली- आप ये सब भी देखते हो? मैंने तो आपको बहुत ही शरीफ इन्सान समझा था.
मैंने कहा- क्यूं? इसको देखने में क्या बुराई है? सीधे सादे लोग मजा नहीं ले सकते क्या?

वो मेरी बात सुन कर कुछ नहीं बोली और बस नजर को नीचे झुका कर बैठी रही. फिर कुछ देर तक हम दोनों में कुछ बात नहीं हुई. मैंने उसको गुड नाइट कहा और फिर अपने कमरे में चला गया.

अगले दिन सुबह मुझे ऑफिस के लिए निकलना था. मैं सुबह उठ कर ऑफिस के लिए निकल गया और रात के 9 बजे वापस आया. आते हुए भाभी ने मुझे टोकते हुए पूछा- आज इतनी लेट?
मैंने कहा- काम थोड़ा ज्यादा था आज.

फिर उसने मुझे बैठने के लिए कह दिया और बोली- आ जाओ साथ में बैठ कर चाय पीते हैं.

मैं उसके पास चला गया और वो चाय बना कर ले आयी. आज उसकी आवाज में एक अलग ही खनक सी थी और चेहरे पर जैसे एक चमक थी.

उसको देख कर ऐसा लग रहा था कि जैसे वो मेरा ही इन्तजार कर रही थी. चाय लाने के बाद हमने साथ में बैठ कर चाय पी. फिर हम दोनों के बीच में रोज की तरह बातें शुरू हो गई. उसने बताया कि आज रात को भी उसके पति की नाइट शिफ्ट है.

वो बोली- तुम हाथ-मुंह धोकर बैठो, मैं तुम्हारे लिये खाना लगा देती हूं.
उसकी बातों को सुन कर आज ऐसा लग रहा था जैसे वो मुझ पर अपना हक सा समझने लगी थी.

मैं जल्दी से उठ कर अपने रूम में गया और फटाफट चेंज करके वापस आ गया. जब तक मैं वापस आया उसने खाना लगा दिया था.
हमने साथ में बैठ कर खाना खाया और कुछ यहां-वहां की बातें करने लगे. बीच-बीच में मैं उसके हाथ के बने हुए खाने की तारीफ भी कर रहा था. वो मेरी बातें सुन कर काफी खुश हो रही थी. उसके चेहरे पर एक अलग ही खुशी दिखाई दे रही थी आज.

मैंने कहा- आज तो आप बहुत खूबसूरत लग रही हो.
फिर वो मुझे छेड़ने के मकसद से बोली- आज से क्या मतलब है तुम्हारा? बाकी दिन मैं खूबसूरत नहीं लगती हूं क्या?
इस पर हम दोनों हंसने लगे.

फिर मैंने भी उसको छेड़ने के अंदाज में कहा- खूबसूरत तो आप हो ही लेकिन आज आपका चेहरा कुछ ज्यादा ही चमक रहा है. लगता है कि साढू साहब ने आज आपको दिन में ही खुश कर दिया है.
उसने मेरी बात पर शर्माते हुए मेरे हाथ पर चुटकी से काट लिया और हम दोनों साथ में हंसने लगे.

वो बोली- आप भी न! पता नहीं क्या-क्या बोलते रहते हो!
मैंने कहा- क्यूं, मैंने कुछ गलत कह दिया क्या?
मेरी बात पर वो थोड़ी गम्भीर होते हुए कहने लगी- अरे आपके साढू साहब को इतनी फुरसत कहां है!
इतना कहते-कहते वो उठ कर किचन की ओर जाने लगी.

उसके जाने के बाद मैंने पास में ही रखे हुए उसके मोबाइल को उठा कर देखा. उसकी सर्च हिस्ट्री में कुछ पॉर्न साइट्स के लिंक मुझे दिखाई दे गये. ये देख कर मैंने उसके फोन को चुपचाप वैसे ही रख दिया.

फिर मैं बिल्कुल अन्जान बन कर बैठ गया. वो जब वापस आई तो हमने फिर कुछ बातें कीं. कुछ देर इधर-उधर की बातें करने के बाद मैं उसको फिर से उसी विषय पर ले आया जिस विषय पर उसके जाने के पहले हम लोग बातें कर रहे थे.

मैंने उसको दोबारा से छेड़ते हुए कहा- आपने उस बात पर उदास सा चेहरा क्यों बना लिया था?
वो बोली- कौन सी बात पर?
मैंने कहा- वही साढू साहब के खुश करने वाली बात पर?

कुछ देर तक सोचने के बाद वो बोली- नहीं, आपने कुछ गलत नहीं कहा था. बस मैं ऐसे ही कुछ सोचने लगी थी.
मैं दोबारा से जोर देकर पूछा- कुछ ऐसी-वैसी बात है क्या?
वो कहने लगी- उनके पास मुझे देने के लिए वक्त ही कहां है.

मैंने अपनापन जताते हुए कहा- आप ऐसे दुखी मत होइये वरना मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगेगा.

इस पर वो उदास होकर अपनी सारी व्यथा मुझे बताने लगी, कहने लगी- सच कहूं तो उन्होंने कभी मेरी परवाह की ही नहीं. उनको मेरी खुशी से कुछ लेना-देना नहीं है.

मैं समझ गया था कि वो बहुत परेशान है अपने पति की बेरुखी से. इसलिए मैंने दूसरा विषय छेड़ दिया. फिर कुछ यहां-वहां की बातें करने के बाद उसके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आई.

फिर मैंने दोबारा से उसको छेड़ने के इरादे से कहा- मुझे पता चल गया था कि आज आपके चेहरे पर ये चमक कैसे आई आप इतनी खुश क्यों लग रही थीं!
वो तपाक से बोली- क्या पता लग गया आपको? मैंने तुरंत उसका मोबाइल उठाया और उसके फोन में उन्हीं लिंक पर जाकर वो पॉर्न साइट खोल कर उसको दिखाने लगा. अपने ही फोन में वो इस तरह सी पॉर्न सामग्री देख कर शरमाने लगी. उसकी चोरी पकड़ी गई थी.

अब मैंने मौके का फायदा उठाने की सोची और उससे कहा- इसका मतलब तो आपको मेरे वाला आइडिया पसंद आ गया था! मैंने ही तो आपको बताया था कि मैं मोबाइल में पॉर्न देख कर अपने आप को संतुष्ट कर लेता हूं. क्यूं सही कहा न मैंने?

वो मेरी बात को सुन कर वहां से उठ कर चलने लगी. जब वो उठ कर चलने लगी तो मैंने उसका हाथ पकड़ लिया.
मेरे द्वारा हाथ पकड़े जाने से वो एकदम से सिहर उठी. उसी पल मैंने उसको अपनी तरफ दोबारा से खींच लिया और उसको फिर से अपने पास में ही बेड पर बिठा लिया.

मैंने अब बेशर्म होते हुए पूछा- बताओ न भाभी, आपको मजा आया या नहीं? मैंने सही अंदाजा लगाया था न आपकी खुशी का? आपका चेहरा इसीलिये दमक रहा था आज? बोलो न भाभी, जवाब तो दो मेरी बात का?
पहले तो उसने कुछ नहीं कहा लेकिन फिर शरमाते हुए हां में अपना सिर हिला दिया. उसका चेहरा शर्म से बिल्कुल लाल हो गया था. उसके गाल एकदम टमाटर की तरह लाल हो गये थे. वो अभी भी नजर नीचे किये हुए बैठी थी और मैंने उसके हाथ को ऐसे ही पकड़ रखा था.

मैंने पूछा- अच्छा ये तो बता दो कि क्या क्या देखा आपने?
वो शर्म के मारे अपनी नजरों को नीचे झुकाए रही तो मैंने उसके कन्धे पर हाथ रख दिया. वो पीछे हटने की कोशिश करने लगी तो मैंने अपने दूसरे हाथ को भी उसके कन्धे पर रख दिया. अब मेरे दोनों हाथ उसके दोनों कन्धों पर थे. वो शर्म से जैसे गड़ी जा रही थी.

मैंने उसको समझाने वाले लहजे में कहा- क्या हुआ? इतना भी क्यों हिचक रही हो, इसमें कुछ गलत थोड़ी है. ये सब तो सामान्य सी क्रिया है. हम दोनों अच्छे दोस्त हैं. इन सब बातों के बारे में तो हम चर्चा कर ही सकते हैं. आपको इसमें कुछ गलत लग रहा है क्या?

फिर वो धीरे से बोली- नहीं, ऐसी कोई बात नहीं है.
मैंने कहा- तो फिर आप बताती क्यों नहीं कि आपने क्या-क्या देखा? प्लीज बताओ न भाभी. मेरे मन में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं आपकी पसंद के बारे में.
वो सकुचाते हुए बोली- वही सब।

मैंने कहा- वही सब क्या?
उसने मेरी बात का कोई जवाब न दिया तो मैंने शर्म की सारी हद पार करते हुए कह दिया- वही सब जो रात में किया जाता है?
उसने मेरी बात सुन कर मेरे हाथ पर जोर से नोंच लिया और नीचे मुंह करके मुस्कराने लगी.

अब मैंने फिर से छेड़ते हुए कहा- आपने पहली बार देखा था क्या ये सब?
उसने हां में सिर हिला दिया.
दोबारा पूछते हुए मैंने कहा- मजा आया कि नहीं?
वो धीमी सी आवाज में बोली- बहुत!

उससे इस तरह की कामुक बातें करते हुए अब मेरी जिज्ञासा और उत्तेजना दोनों बढ़ने लगी थी. मैंने फिर से पूछा- कितनी देर तक देखा आपने ये सब?
वो बोली- एक घंटे तक।
हैरान होते हुए मैंने कहा- एक घंटा! आपको इस दौरान कुछ हुआ नहीं क्या?
वो पूछने लगी- क्या नहीं हुआ?
मैंने कहा- बहुत मन किया होगा ना (सेक्स) करने का?

मेरी बात सुन कर उसकी सांसें और तेजी से चलने लगीं और मेरा दिल दिल भी जोर से धड़कने लगा था. अब मुझे मालूम हो गया था कि लोहा पूरी तरह से गर्म हो चुका है और उस पर हथौड़ा चला देने का ये बिल्कुल सही वक्त है. भाभी की सांसें तेजी के साथ चल रही थी और उसका चेहरा शर्म से लाल हुआ जा रहा था.

मुझसे भी अब कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था. मैंने उसके लाल हो चुके तमतमाये गालों को चूम लिया. उसके मुंह से गर्म सांस भांप की तरह निकल रही थी. तभी मैंने उसके दूसरे गाल पर भी एक चुम्बन जड़ दिया. उसकी आंखें बंद ही थीं.

वो बोली- ये क्या कर रहे हो?
ऐसा कहते हुए भाभी की आवाज में विरोध नहीं बल्कि मादकता भरी हुई थी. मैंने उसकी बंद आंखों को भी ऊपर से चूम लिया. मेरे ऐसा करते ही वो मचल सी गयी. वहां से उठने की कोशिश करने लगी. मगर मैंने उसको उठने नहीं दिया.

जब वो छुड़ाने की कोशिश करते हुए चलने लगी तो मैंने उसको वापस से अपनी तरफ खींच कर उसको अपनी बांहों में भर लिया. उसके मादक और मांसल शरीर यह मेरा स्पर्श था. जिसको छूने भर से ही मेरी उत्तेजना सातवें आसमान पर पहुंच गई थी.

वो बोली- छोड़ो मुझे!
मैं जानता था कि उसका ये विरोध केवल दिखावा मात्र था. उसके चेहरे के हाव-भाव बता रहे थे कि वह अंदर से गर्म हो चुकी है. मैंने उसको जोर से अपनी बांहों में जकड़ते हुए उसको गालों को जोर लगा कर चूम लिया. मेरी हवस बढ़ती ही जा रही थी.

फिर मैंने उनके माथे को चूमना शुरू कर दिया और अपने हाथों से उनकी पीठ और चूतड़ों को रगड़ कर सहलाने लगा. कुछ पल ऐसे ही चूमने पर वो और भी मदहोश हो गयीं और अपना दिखावटी प्रतिरोध छोड़ कर उन्होंने भी मेरी पीठ को सहलाना शुरू कर दिया. मेरी पीठ को प्यार से अपनी बांहों से सहलाते हुए वो मुझसे और जोर से लिपट गयीं. मैंने मौका देखते ही उनके होंठों को अपने होंठों में दबा लिया और हम एक दूजे में खो गए.

काफी देर तक हमने एक दूसरे के होंठों को चूसा और इस बीच मैं बराबर उसके चूतड़ों को मसलता रहा. उनको बांहों में लिये हुए ही मैं उनको बिस्तर के पास ले गया और उसको आहिस्ता से बेड पर लिटा कर खुद भी उसके ऊपर लेट गया. मेरी छाती उसके चूचों पर रखने के कारण उसके चूचे मेरी छाती के नीचे दब गये जिनका स्पर्श मुझे पागल करने लगा.

अपने बदन को मैंने उसके बदन से जोर से रगड़ना शुरू कर दिया. अब तो जैसे दोनों ही वासना के सागर में डूब से गये थे. उसके चेहरे को चूमते हुए उसकी गर्दन और उसके ऊपरी हिस्से को मैं चूमता रहा और वो मुझे अपनी बांहों में लपेटती रही.
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उसके बाद मैंने अपना सिर उसके सीने पर रख दिया और उसके भारी बूब्स को ऊपर से ही दबाने लगा. फिर मैंने एक-एक करके उसके ब्लाउज के सारे हुक खोल दिये और उसका ब्लाउज निकाल दिया. उसने नीचे से एक प्रिंटेड ब्रा पहनी हुई थी.

देर न करते हुए मैंने उसकी ब्रा को भी खोल दिया और उसके स्तन मेरे सामने नंगे हो गये. पहले मैंने उसके बूब्स को जोर से दबाया और फिर बारी-बारी से मुंह में लेकर उनका रस चूसने लगा. मेरी जीभ जब उसके निप्पलों पर लग रही थी तो उसके मुंह से सिसकारियां निकल रही थीं.

इसके बाद मैंने एक-एक करके उसकी साड़ी और पेटीकोट को भी निकाल दिया. अब मेरी भाभी मेरे सामने एकदम से नंगी लेटी हुई थी. मैंने भी जल्दी से अपने सारे कपड़े निकाल दिये और हम दोनों के बदन अब बिल्कुल नंगे हो गये थे. मैं उसके बदन से लिपट गया.

हमारे बदन इतने गर्म हो चुके थे कि मानो दोनों के बदन से जैसे अंगारे निकल रहे हों.

कुछ देर तक अपने नंगे शरीर को उसके नंगे बदन पर रगड़ने के बाद मैंने उसकी जांघों के पास हाथ कर लिया. मैं उसकी जांघों के पास जाकर बैठ गया और उसकी चूत में उंगली डाल दी. उंगली डालते ही वो उछल पड़ी.

जैसे ही उंगली उसकी चूत में गई तो उसके मुंह से जोर से आह्ह निकल गई. मैं उसकी चूत को धीरे-धीरे करके मसलने लगा. उसकी चूत को मसलने और सहलाने के बाद मैंने उसकी चूत से टपक रहा रस अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया.

थोड़ी देर उसकी चूत को चाटने के बाद मैंने उसको अपने बदन पर लिटा लिया और वो मेरे सीने पर आकर जोर से मुझसे लिपट गई. वो मेरे सीने को चूमने लगी. मैं अपने दोनों हाथों से उसके चूतड़ों को सहलाता रहा. वो काफी देर तक मेरे सीने को चूमती रही और चूसती रही.

उसके बाद मैंने उसको अपने बदन पर नीचे सरका दिया और अपने लन्ड को उसके मुंह की तरफ कर दिया. मेरा इशारा वो समझ गयी थी लेकिन उसने ना में गर्दन हिलाते हुए मेरा लन्ड चूसने से मना कर दिया. मैंने भी उसके साथ किसी प्रकार की जबरदस्ती नहीं की.

इसके बाद मैं उसके ऊपर आ गया और मैंने अपना लन्ड उसकी चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया. वो एकदम से सिहर उठी. मैंने उसकी गर्दन को चूमना शुरू किया और फिर एक झटके में नीचे से अपना लन्ड उसकी चूत में धकेल दिया. उसके मुंह से एक जोर की आह्ह निकल गई.

अब मैं धीरे-धीरे उसकी चूत में धक्के लगाने लगा और उसके गालों और होंठों को चूमते-काटते हुए उसकी चूत का चोदन करने लगा. वो भी अपने चूतड़ उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी. मैंने भाभी को अपनी बांहों में कस कर जकड़ रखा था.

कुछ देर तक इसी पोजीशन में उसकी चुदाई करने के बाद मैंने उसको उठा दिया और उसको अपनी गोद में बिठा कर उसकी चूत में धक्के देने शुरू कर दिये. उसने अपनी बांहों को मेरे गले में डाल रखा था. मैं उसके बूब्स को मुंह में लेकर चूसते हुए उसकी चूत को चोद रहा था.

हम दोनों ही चुदाई के आनंद में खो गये थे. उसके मुंह से जोर से आह्ह … आह्हह की आवाजें निकल रही थीं और मेरा हाल भी कुछ ऐसा ही था. कुछ देर ऐसे ही उसकी चूत की चुदाई करने के बाद मैंने उसको अपने ऊपर बिठा लिया और वो मेरे ऊपर बैठ कर उछलने लगी. मैं उसकी चूत में नीचे से धक्के लगाने लगा.

वो मेरा पूरा लन्ड अपनी चूत में ले रही थी. बहुत मजा आ रहा था. वो जोर से सिसकारियां लेते हुए चिल्ला रही थी- मर गई … उईई … आह्ह … हाय रे दैया! उसके आनंद को मैं उसके चेहरे पर साफ-साफ देख रहा था. उसके चेहरे को देख कर मेरा जोश और बढ़ता जा रहा था.

जब वो थक गई तो मैंने उसको फिर से अपने नीचे लिटा लिया और उसके बूब्स को मुंह में लेकर चूसते हुए उसकी चूत में धक्के देने लगा. अब उसने मेरी कमर को अपनी टांगों से जकड़ लिया था. मेरे धक्कों की रफ्तार और बढ़ गई थी. तभी वो जोर से सिसकारियां लेते हुए झड़ने लगी.

झड़ने के बाद जब उसका पानी निकल गया तो चूत में लन्ड के चोदन करने से पच-पच की आवाज होने लगी. उस आवाज ने मुझे आनंद के शिखर पर पहुंचा दिया. मेरा लन्ड अकड़ने लगा. मैंने दो-तीन धक्के खूब जोर लगा कर मारे और मेरा पूरा बदन अकड़ने लगा.

मैं झटके देते हुए उसकी चूत में झड़ने लगा. इस कामुक चुदाई के बाद हम दोनों ही निढाल हो गये थे. कुछ देर तक ऐसे ही एक दूसरे से चिपके पड़े रहे. मैं उसके बदन से लिपटा रहा और वो मेरी पीठ पर अपने हाथों से सहलाती रही.

फिर हमने उठ कर अपने कपड़े पहने और मैंने उसको एक बार फिर से बांहों में लेकर चूमा और गुड नाइट बोल कर अपने कमरे में चला गया.
दबी हुई हवस जगा कर मस्त चूत की चुदाई (Dabi Hui Hawas Jaga Kar Mast Choot Ki Chudai) दबी हुई हवस जगा कर मस्त चूत की चुदाई (Dabi Hui Hawas Jaga Kar Mast Choot Ki Chudai) Reviewed by Priyanka Sharma on 10:52 PM Rating: 5

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