माँ बनने की चाहत में दो पतियों की बीवी बनी (Maa Banne Ki Chahat Me Do Patiyon Ki Biwi Bani)

माँ बनने की चाहत में दो पतियों की बीवी बनी (Maa Banne Ki Chahat Me Do Patiyon Ki Biwi Bani)

दोस्तो, मेरा नाम तृप्ति है. मैं गुजरात की रहने वाली हूं. शादीशुदा हूं और अपने पति से बहुत खुश हूं. लेकिन मुझे वो मां बनने का सुख नहीं दे सकते हैं, इसलिए यह घटना घटी थी.

पहले आप सभी को मैं अपने बारे में बता दूँ कि मैं अभी 25 साल की हूं. मेरे पति के हिसाब से मैं बहुत सेक्सी हूं और मेरा फिगर 32-28-34 का है. ज्यादातर में साड़ी ही पहनती हूं, लेकिन कभी कभी विलायती पहनावे वाले कपड़े जैसे जींस शर्ट, लॉन्ग स्कर्ट, लॉन्ग वन पीस ड्रेस, भी पहन लेती हूं.

एक दिन पति का एक दोस्त कोई कारणवश हमारे शहर में ही शिफ्ट हुआ. उसके पास रहने को कोई घर भी नहीं था. बड़े शहर में एकदम से घर मिलना कितना मुश्किल होता है, ये तो आप जानते ही हो.

पति के दोस्त के बारे में बताऊं तो वो तक़रीबन छह फुट सात इंच की हाइट होगी उसकी … और उसकी छाती भी काफी लंबी चौड़ी थी, एकदम गठीला बदन था. उसके आते ही मैं उसकी तरफ आकर्षित हो गई, लेकिन मैं चाहती थी कि पहल वो ही करे.

मेरे पति रोजाना जल्दी जॉब पे चले जाते थे और उसके दोस्त राजीव देर से उठता था. मैं उसको जगाने जाती थी … तो उस वक्त एक बेबी डॉल टाइप की नाइटी पहन कर जाती थी. उसे जगाने के बहाने और उसको चाय और ब्रेकफास्ट देने जाती थी, तो उसके सामने पूरा झुक के अपने मम्मों का दीदार कराती थी. वो भी मेरे मस्त मम्मे देख कर मुस्कुरा देता था, लेकिन मैं उसकी भाभी थी, इसलिए शायद वो मेरे बारे में कुछ ग़लत नहीं सोचना चाहता था.

कुछ दिनों में हम दोनों की आँखों ने एक दूसरे की चाहत को समझ लिया था. वो मुझसे खुल कर मजाक करने लगा था और मुझे भी उसका मजाक करना बहुत पसंद आने लगा था.

हम दोनों एक दूसरे को बहाने से टच भी करने लगे थे. इसकी शुरुआत भी मैंने ही की थी. मैं उसको जब जगाने जाती तो उसको हिला कर उसे जगाती और वो भी मेरा हाथ पकड़ कर कह देता कि अभी और सोने का मन है … प्लीज़ मत जगाओ न!
तो मैंने उसके हाथों में अपने उस हाथ को फंसा रहने देती और दूसरे हाथ से उसे बांह पर चिकोटी काट कर उठने का कहती.

एक दिन उसने सुबह सुबह अपनी चादर हटाई हुई थी और उसका लन्ड खड़ा हुआ था. वो इस वक्त एक ढीला सा बॉक्सर पहने था, जो सोने की वजह से एक तरफ से खुला सा था. मैंने ध्यान दिया कि उसने अन्दर फ्रेंची नहीं पहनी हुई थी. उसका मोटा लन्ड देख कर मेरी आह निकल गई और मैं उसके लन्ड को एकटक देखने लगी.

उसी दिन मैंने जाल बिछाया और उसको उठा कर चाय आदि देने के बाद बाथरूम में चली गई उधर उसके खड़े लन्ड के नाम से अपनी फुद्दी में उंगली की और हस्तमैथुन करके नहायी. नहाने के बाद मैं सिर्फ तौलिया लपेट कर राजीव के सामने आ गई और उसके साथ हंसी मजाक करने लगी.

राजीव मेरी आधी चूचियों को तौलिये से देख रहा था. मैंने आँख मारी और कहा- ओ हैलो … किधर नजर है?
वो सकपका गया और झेंप कर बोला- आप बहुत सेक्सी लग रही हो.
मैंने उसकी तरफ वासना से देखा और कहा कि तुम भी बहुत हॉट हो राजीव.

बस इसके बाद हम दोनों का नजरिया बदल गया था. अब वो मुझे बड़ी हसरत भरी निगाह से देखने लगा था. सुबह मम्मों को दिखाने का अंदाज और भी ज्यादा बिंदास हो गया था. मैं उसके बगल में बैठ कर उसे जगाने लगी थी. वो भी मेरी कमर को छूते हुए मेरे साथ मस्ती करने लगा था.

मतलब हम दोनों अब बस शर्मो-हया के बाँध के टूटने का इन्तजार कर रहे थे.

एक दिन मेरे पति दो दिन के लिए आउट ऑफ़ सिटी गए हुए थे. उस दिन दोपहर को जब मैं खाना बना रही थी, तब राजीव किचन में आया और उसने मुझे पीछे से कस के पकड़ लिया. मैं एकदम से हड़ाबड़ा गई- ये तुम क्या कर रहे हो? कोई देख लेगा.
राजीव- अपनी भाभी को प्यार कर रहा हूं … और वैसे भी मेरे अलावा यहां पे कौन है, जो आपको और मुझे देखेगा.
मैं- लेकिन ये सब गलत है.
राजीव- भाभी को प्यार करना तो देवर का हक है.
ऐसा बोल कर वो अपना लन्ड मेरी गाँड़ पे फिराने लगा.

मैं भी धीरे धीरे गर्म हो रही थी. उसने मुझे गोदी में उठाया और अपने बेडरूम में ले गया. मैं उससे झूठ मूठ में कहे जा रही थी कि ये सब गलत है ऐसा मत करो.
लेकिन मुझे भी उसके साथ सेक्स का मजा लेना था … इसलिए मैंने उसको कुछ भी नहीं कहा. वो भी समझ रहा था कि मैं उसके साथ सेक्स करना तो चाहती हूँ लेकिन नारी सुलभ विरोध कर रही हूँ.

उसने मुझे एक खिलौने जैसे अपनी गोद में उठाया हुआ था. मैं उसकी गोद में काफी सुकून महसूस कर रही थी. वो मुझे चूमे जा रहा था और उसका मर्दाना चेहरा मेरी चूचियों को मसले दे रहा था.

उसने कमरे में ले जाकर मुझे बेड पे लिटा दिया और खुद भी मेरे ऊपर आकर कुछ इस तरह से छा गया कि मैं पूरी की पूरी उसके नीचे ढक गई थो. वो मेरे होंठ को चूसने लगा और एक हाथ से मेरे मम्मों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाने लगा.

सच में उसकी बड़ी सी हथेली से मेरे मम्मे एकदम से मसले जा रहे थे.
आह … उम्म म्म्म म्मम … बड़ी ही मस्त फीलिंग थी … मैं आपको उस अनुभव को शब्दों में बता ही नहीं सकती. मैं भी धीरे धीरे अपने झूठे विरोध को छोड़ कर उसका साथ देने लगी थी और उसके सीने पर हाथ फेरते हुए उसकी शर्ट के बटन खोलना शुरू कर दिए. जल्दी ही मैंने उसकी शर्ट को उतार दिया.

शर्ट हटते ही उसका चौड़ा सीना मेरे सामने था. आह … क्या बॉडी थी उसकी … मैं कुछ भी सोचे समझे बिना, उसे चूमने लगी. हम दोनों सेक्स के मदहोश होने लगे थे. अगले कुछ ही पलों में उसने मेरे सारे कपड़े उतार दिए. अब बस मेरे तन पर सिर्फ ब्रा और पैंटी रह गए थे, मैंने भी उसके सारे कपड़े उतार दिए.

उसने बिस्तर के नीचे खड़े होकर अपना लन्ड मेरी तरफ दिखाते हुए हिलाया. क्या गजब का मूसल लन्ड था. उसके खड़े लन्ड की लम्बाई लगभग सात इंच की रही होगी. मैंने उसके लन्ड को देखा और फिर उसकी आंखों की तरफ देखा. उसने अपने लन्ड को हिलाते हुए अपने खुद के होंठों पर जीभ फिराई. मैं उसका इशारा समझ गई और मैंने राजीव के लन्ड को अपने हाथ से छुआ. जैसे ही मेरा स्पर्श उसके लन्ड पर हुआ, उसका लन्ड एकदम से फनफना उठा. मैंने उसके लन्ड को सहलाया और उसकी टोपी को आगे की चमड़ी से आजाद कर दिया.

उसके सुर्ख गुलाबी सुपारे पर एकदम से कांच जैसी चमक थी, जो कि उसके लन्ड के प्रीकम के कारण लन्ड को लिसलिसा बना चुकी थी. उसने अपने लन्ड को मेरे होंठों की तरफ किया तो मैं भी लन्ड चूसने का इशारा समझ कर खुद से लन्ड चूसने को आतुर हो उठी थी. चूंकि मैं अपने पति का लन्ड हमेशा चूसती रहती हूँ इसलिए लन्ड चूसने में मुझे कोई गुरेज नहीं था. मैं उसके लंबे 7 इंच के लन्ड पे टूट पड़ी और सुपारे पर जीभ फिराना शुरू करते हुए उसके बड़े और मोटे लन्ड को जोर जोर से चूसने लगी.

वो भी अपने लन्ड पर मेरे मुँह की गर्माहट पाकर मस्त हो उठा और आगे पीछे करते हुए लन्ड से मुँह की चुदाई करने लगा.

मैं भी अब बैठ कर उसके लन्ड से खेल रही थी तो उसको भी मेरे मम्मों से खेलने का मौका मिल गया था. राजीव ने मेरी ब्रा को एक झटके से अलग कर दिया और मेरे चूचे हवा में फुदकने लगे. राजीव मेरे मम्मों के साथ खेलने लगा. उसने अपनी बड़ी हथेलियों से मेरी चुचियों का लगभग भुर्ता बना दिया था. तकरीबन दस मिनट तक अपने लन्ड को मुख मैथुन का सुख दिलाने के बाद उसने मेरी पेंटी उतार कर मुझे पूरी नंगी कर दिया और मेरी टांगें खींच कर मेरी चूत को अपने मुँह के नजदीक कर लिया. वो मेरी फुद्दी को अपनी लम्बी और खुरदुरी जीभ से ऐसे चाटने लगा … जैसे वो किसी आम की कली का गूदा चाट रहा हो. मुझे भी इतना मजा आ रहा था कि मैं चुदास की मस्ती में ख़ुशी के मारे चिल्ला रही थी.

बाद में उसने मुझे सीधा लेट जाने को कहा. उसने अपने लन्ड पर और मेरी फुद्दी के छेद पे थूक लगाया. फिर वो अपने लन्ड को मेरी फुद्दी के आसपास सहलाने लगा. उसके इस तरह से लन्ड घिसने से मुझे बड़ी कामुकता और व्याकुलता का अहसास हुआ जा रहा था. मैं इस वक्त ऐसे महसूस कर रही थी कि कब इसका लन्ड मेरी फुद्दी की खुजली को मिटाने के लिए अन्दर घुस जाए.

मैं अपनी गाँड़ उठा कर उसके लन्ड को अन्दर पेलने का इशारा किया, तो उसने मेरी फुद्दी के छेद पर लन्ड का सुपारा रखा और मेरी फुद्दी की फांकों में सुपारा रगड़ा. मुझे तो मानो तरन्नुम आ गई थी. हालांकि उसका टमाटर के आकार का सुपारा मेरी चूत को उत्तेजित कर रहा था, लेकिन बेचारी फुद्दी को इस वक्त अगले ही पल होने वाले दर्द का अहसास ही नहीं था.

फिर एक भूचाल सा आया और राजीव ने एक ही झटके में अपने लन्ड मेरी फुद्दी में अन्दर तक डाल दिया. मैं एकदम से चिल्ला उठी- आईई … मांआआआ … मर गई …

मेरी आंखें चौड़ी गई थीं. लम्बी चीख के कारण मेरा मुँह खुला का खुला रह गया था. सांस हलक में फंस गई थी. बहुत ही बड़ा लौड़ा था. उसने मेरी हालत देखी, तो वो रुक गया और मुझे चूमते हुए सहलाने लगा. कुछ पल यूं ही रुकने के बाद मेरी सांस लौटी और मैं जैसे ही दर्द से चिल्लाने को हुई, राजीव ने अपने होंठों का ढक्कन मेरे मुँह पर लगा दिया. उसके होठों ने मानो मेरे होठों को जकड़ सा लिया था. इस वक्त मैं पूरी तरह उसके शिकंजे में थी. कुछ देर के दर्द के बाद मुझे लन्ड अपना सा लगने लगा और मेरी गाँड़ ने उठकर उसको इशारा किया.

राजीव का लन्ड अभी बाहर था. उसने मेरे होंठ दाब कर अगला तेज झटका मारा और पूरा लन्ड मेर फुद्दी की जड़ से टकरा गया. मुझे फिर से दर्द हुआ, पर कुछ देर बाद सब कुछ सामान्य हो चला था.

अब वो मुझे जैसा चोदना चाहता था, वैसे ही मैं उसके साथ करती गई. उसने काफी देर तक भिन्न भिन्न आसानों में मेरी फुद्दी का भोसड़ा बनाने की पूरी क्रियाविधि को अंजाम दिया. उसने मुझे तकरीबन बीस मिनट तक चोदा. इस बीच में दो बार झड़ चुकी थी.

फिर राजीव मुझसे कहने लगा कि मैं झड़ने वाला हूं. मैंने भी उससे अपनी अधूरी इच्छा पूरी करने के लिए कहा कि हां राजीव आज तुम मेरी फुद्दी में ही अपना बीज निकाल दो … मुझे माँ बना दो.
यह सुनकर राजीव और भी तेजी से लन्ड को फुद्दी में अन्दर बाहर करने लगा. मैं भी गाँड़ उठा कर उसका साथ देने लगी थी, मैं हांफने लगी थी. तभी उसने एक तेज आह … भरते हुए अपने लन्ड का गर्म लावा मेरी फुद्दी के अन्दर ही छोड़ दिया. उसका थोड़ा सा रस अपनी मंजिल की ओर गया और बाकी का बाहर निकल गया.

बाहर निकला हुआ रस में उंगली से लेकर जीभ से चाटने लगी. वो मुझे चूमे जा रहा था. उसका लन्ड दो मिनट बाद सिकुड़ा और मेरी फुद्दी से बाहर आ गया वो उठ गया, लेकिन मैं नहीं उठी, अपनी चूत पसारे फैली पड़ी रही.

उसने मेरी तरफ देखा, तो मैंने अपने पेट पर हाथ फेर कर इशारा किया. वो समझ गया कि मैं लन्ड रस को गर्भाधान के लिए जज्ब कर रही हूँ.

कुछ देर बाद हम दोनों ने कपड़े पहने. राजीव ने मुझे एक प्यारी सी और लंबी सी किस की और मुझे अपनी बाहों में भर लिया. वो कहने लगा- मुझसे कभी दूर मत होना जान.

फिर मैंने खाना बनाया और हम दोनों ने एक ही प्लेट में खाना खाया. दोनों साथ में कमरे में आ गए और उसने मुझे दूसरी बार चोदा. इस बार मैं माहवारी से नहीं हुई थी. मुझे बड़ा सुकून हो रहा था. कुछ हफ्ते बाद मुझे सुबह से ही अजीब लग रहा था और एक बार वोमिट भी हुई तो मैंने प्रेग्नेंसी का रिपोर्ट करवाई, तो वो पॉजिटिव आई. ये बात सबसे पहले मैंने राजीव को बताई. आखिर मैं उसके लन्ड से चुदने की वजह से ही तो मां बन सकी थी. बाद में मैंने मेरे पति को भी बताया तो वे भी बहुत खुश हो गए.

अब जब भी मेरे पति नहीं होते, मैं और राजीव सेक्स का मजा लेते और साथ में टाइम स्पेंड भी करते. इस तरह में राजीव की वजह से मां बन सकी. इस बच्चे की चाहत के चलते हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार भी करने लगे थे. हम दोनों ही आपसी सहमति से ये रिश्ता बरकरार रखना भी चाहते थे, इसलिए हम लोग जब भी टाइम मिलता, साथ में वक्त गुजार लेते हैं. मैंने सोचा कि क्यों ना राजीव से शादी करके उसे भी यहां बुला लूं और सब कुछ मेरे पति (संजीव) को बता दूं. लेकिन मन में एक ऊहापोह थी कि क्या संजीव मेरी भावनाओं को समझेगा? अगर उसने कहीं मुझे घर से बाहर निकाल दिया या बच्चा गिराने को कहा तो क्या होगा.

मुझे ये सब सोच कर बहुत डर लग रहा था. फिर मैंने सोचा कि जब संजीव का मूड एकदम खुशनुमा होगा, तब उनको बताऊंगी. तब भी मुझे डर बहुत लग रहा है.

ये सब बताने से पहले मैंने इस बाबत राजीव से बात करना ठीक समझा. मैं इस बारे में बताने के लिए उसको कॉल किया और कहा- मुझे तुम्हारी जरूरत है और बहुत याद भी आ रही है जान.
उसने भी मस्ती में कहा- आपका ये दीवाना थोड़ी देर में आपकी खिदमत में हाजिर हो जाएगा जानेमन.

थोड़ी देर बाद वो आया और उसने डोरबेल बजाई. मैंने जाकर दरवाजा खोला और उसे देख कर मुस्कुरा पड़ी.
अगले ही पल उसने मुझे गोद में उठा लिया और बोला- हमारे होते आप चलने की तकलीफ़ क्यों उठा रही हो जानेमन.

मैंने भी उसे प्यारी सी स्माइल देकर चूम लिया. वो मुझे उठाए हुए ही बहुत ही प्यार से मेरी चुम्मी का आनन्द लेने लगा. साथ ही वो मुझे चूमते हुए मेरे रूम में ले गया. कमरे में ले जाकर राजीव ने मुझे बेड पर लेटा दिया और मेरे साथ लिपट कर बैठ गया.

उसने कहा- हां अब बताओ जान कि आपने मुझे क्यों याद किया था?
मैंने राजीव को सब कुछ बताया कि मैं तुमसे शादी करना चाहती हूं और हम दोनों अपने होने वाले बच्चे के बारे में संजीव को बता देते हैं.

वैसे भी राजीव ने अब एक किराए का मकान ले लिया था. मकान क्योंकि परिवार के बिना घर नहीं होता, वो सिर्फ एक इमारत या सिर्फ बना हुआ मकान होता है. जब तक उसमें गृहस्वामिनी न हो तब तक उस मकान को मकान कहना अनुचित होता है.

राजीव से मेरा मिलना अब बहुत ही कम मिलना हो पाता था, परंतु हम दोनों के बीच मैसेज वगैरह तो पूरे दिन चालू ही रहते थे. वो भी अब अच्छे खासे पैसे कमाने लगा था. उसकी एक बात बहुत ही अच्छी थी कि वो और मेरे पति आपस में बहुत ही अच्छे दोस्त थे, तो राजीव कभी भी हमारे घर आ जा सकता था. उसके आने से मेरे पति भी उसे कुछ नहीं कहते थे.

मैं कभी कभी बाजार भी उसके साथ ही चली जाती या घर का कोई काम होता, तो भी उसे बुला लेती थी.

वैसे भी राजीव ने अभी तक शादी नहीं की थी और वो करना भी नहीं चाहता था क्योंकि राजीव किसी लड़की को लाईक करता था और उस लड़की ने दूसरे किसी लड़के से शादी कर ली थी. इससे राजीव उदास हो गया था और उसी के प्यार में पूरी जिंदगी कुंवारा बैठने वाला था. बाद में जब मैं उसकी जिंदगी में आयी और राजीव को भी उसकी माशूका की तरह टाइम देने लगी. तो वो भी उस लड़की के गम से बाहर आ गया.

लेकिन उसने मुझसे कहा था कि मैं आपके अलावा किसी और से प्यार नहीं करूंगा और शादी भी नहीं करूंगा.

बाद में हमने फैसला किया कि हम दोनों शादी कर लेंगे, लेकिन पहले संजीव को सब कुछ बता देते हैं.

मैंने भी मन ही मन सोच रखा था कि किसी न किसी तरह मैं राजीव को वापिस घर ले आऊंगी और उसकी अधूरी दुनिया पूरी कर दूंगी.

आज वो मेरे पास आकर मेरे मम्मों का मजा लेने लगा. फिर मैंने उसे रोकते हुए शराराती अंदाज में कहा- अब जो भी होगा, वो शादी के बाद होगा राजीव जी.
राजीव ने मेरे दूध दबाते हुए कहा- अन्दर बाहर का खेल रहने भी दो, तो कम से कम इनसे तो खेलने दो ना.

मैंने भी हामी भर दी. आखिरकार मेरी जान उसी में तो बसती थी न, तो उसे मना कैसे कर सकती थी.

रात को हमने साथ में डिनर किया और फिर वो चला गया.

दो दिन बाद मैंने देखा कि संजीव का मूड बहुत अच्छा है और आज उसको छट्टी भी थी. तो मैंने राजीव को कॉल करके बुला लिया. मैंने उसको फोन पर ही कह दिया था कि आज हम दोनों संजीव को सब कुछ बता देते हैं.

वो मेरे घर आया, तो हम दोनों संजीव के पास गए. मैं संजीव की गोद में बैठ गई और उसके कान के पीछे उंगली घुमाने लगी.

मैं- संजीव, मुझे तुमसे एक बहुत ही जरूरी बात करनी है.
संजीव- मेरी जानू को क्या तकलीफ़ है?
ये कह कर वो मेरे बालों में उंगलियां फेरने लगा.

मैं- मैं जब आज डॉक्टर के पास अपने दोनों के टेस्ट रिपोर्ट लेने गई थी, तो उसने कहा था कि तुम्हारे शुक्राणु कम हैं.

संजीव ने हंसते हुए कहा- मतलब कि डॉक्टर ने तुमको मेरी झूठी रिपोर्ट दी थी. क्योंकि मैं तो बाप बनने वाला हूं . … सही है ना?
राजीव- नहीं … वो तुम्हारा बच्चा नहीं है.
संजीव ने थोड़े गुस्से के साथ मेरे सामने देखते हुए पूछा- क्या … क्या ये सच कह रहा है?

मैंने सिर्फ हां में अपना सिर हिलाया और इसी शर्म के कारण मेरी नजर नीचे झुक गई.

संजीव ने मेरे सिर को उठाते हुए मुझसे पूछा- सब कुछ साफ़ साफ़ बताओ ना.
मैं- जब मैंने ये रिपोर्ट पढ़ी थी, तो मुझे बहुत दुख हुआ था और मैं रोने लगी क्योंकि इस हिसाब से तो मैं कभी मां नहीं बन सकती थी. फिर मैंने सोचा कि क्यों न मैं किसी और के साथ सेक्स करके मां बन जाऊं … लेकिन किसी अपने के साथ ही ऐसा करना ठीक रहेगा. तो मैंने सोचा कि राजीव ही ठीक रहेंगे.

संजीव राजीव के सामने गुस्से की नजर से देखने लगा.

मैं संजीव का मुँह उंगलियों से मेरी तरफ करते हुए बोली- उसमें उसकी कोई गलती नहीं है. उसको मैंने ही कहा था. क्या तुम नहीं देखना चाहते थे कि मैं भी दूसरी औरतों की तरह मां बनूं?

इसके बाद संजीव गुसा होता या कुछ कहता, मैंने औरतों वाला ड्रामा शुरू कर दिया और उसे बांहों में भर कर रोने लगी.

संजीव- रुको, मुझे कुछ सोचने दो.
मैं- मैं सब ठीक कर दूंगी जानू … मैं उससे शादी कर लूंगी और तुम्हें कोई ऐतराज ना हो, तो हम तीनों एक साथ रहें लेंगे. वैसे भी वो बेचारा मेरे सिवा किसी और लड़की को देखता भी नहीं है. आगे तुम्हारा फैसला … जैसा तुम कहोगे … हम लोग वैसा ही करेंगे.

इतना कह कर मैं वहां से रोते हुए अपने कमरे में चली गई.

थोड़ी देर बाद संजीव कमरे में आया.
संजीव- अच्छा तुम बताओ कि तुम क्या चाहती हो?
मैं- सिर्फ मुझे माफ कर दो और इस नन्हीं सी जान को इस दुनिया में आने दो. इसमें इसकी और राजीव की कोई गलती नहीं है. मैंने ही उसे ये सब करने के लिए उकसाया था. तुम्हें जो सजा देनी है मुझे दे दो.

संजीव- साफ़ साफ़ बताओ, तुम क्या चाहती हो?
मैं- यही कि मैं राजीव से शादी कर लूं ताकि वो भी लाइफ का मजा ले और जिंदगी भर कुंवारा ना रहे. मैं इससे हमारे रिश्ते पर कोई आंच नहीं आने दूंगी बल्कि हम तीनों को साथ में रहने में और भी ज्यादा मजा आएगा. जानू अगर तुम चाहो, तो ये सब हो सकता है.

संजीव थोड़ी देर सोचते हुए बोला- ठीक है मैं तुम्हारी राजीव से शादी कराऊंगा.
मैं- उसे तो बुलाओ, वो अपनी गलती है ऐसा सोच कर वहीं का वहीं हॉल में खड़ा है. उसे भी तो ये खबर सुना देते हैं न.

फिर हमने राजीव को ये खबर सुनाई. वो तो सिर्फ मुझे ही देखता रहा. फिर हम लोग शादी के तैयारी में जुट गए.

पूरे विधि विधान के हिसाब से मूहर्त निकाला, जो कि एक हफ्ते के बाद का था. मैं बहुत खुश थी कि मेरे पति हमारी शादी के लिए मान गए थे.

हम सब शादी की तैयारी करने लगे. शादी का जोड़ा, गहने और भी बहुत कुछ खरीद लिया.

आखिरकार वो दिन आ ही गया, जब मैं राजीव की होने जा रही थी. मैं बिल्कुल दुल्हन की तरह तैयार हुई और जब बाहर आई, तो संजीव ने मुझे देखते ही एक प्यारा सा चुम्बन किया ताकि मुझे अहसास हो जाए कि वो हर वक्त मेरे साथ है. मैंने भी जबाव में उसे एक प्यारा सा लंबा सा किस किया.

फिर मैं शादी वाली जगह संजीव के साथ आ गई और उससे मिलने के बाद मैं बाजू के कमरे में पंडितजी के बुलावे का इंतज़ार करने लगी.

जब पंडित जी ने बुलाया, तो संजीव मुझे लेने आया और राजीव के पास ले गया.

जब मैं बाहर आई, तो राजीव मुझे देख कर दंग रह गया और धीरे से बोला- ऊम्म … आहह … मेरी तृप्ति को किसी की नजर ना लगे.
मैं भी शर्मा गई.
वो भी बड़ा ही सेक्सी लग रहा था.

विधि विधान के अनुसार शादी शुरू हुई. हम दोनों ने अग्नि को साक्षी मानकर सात फेरे लिए. बाद में पंडित जी ने राजीव से मेरी मांग में सिंदूर भरने को कहा. तभी मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं और सिर्फ इस पल का आनन्द उठाने लगी. वो फीलिंग ऐसी थी कि मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकती.

बाद में हम दोनों ने इस हसीन पल की बहुत सारी सेल्फ़ी भी लीं.

रात को तकरीबन 9 बजे हम सब घर आए और घर के गेट से ही राजीव ने संजीव के सामने मुझे अपनी गोद में उठा लिया.

संजीव ने स्माइल करते हुए कहा- आज तुम्हारा दिन है राजीव, जी लो इस दिन को.
राजीव ने संजीव का धन्यवाद किया.

संजीव ने भी कहा- तुमने हमारे खानदान को वारिस दिया है, तो मैं इतना तो कर ही सकता हूं ना अपने सबसे करीबी दोस्त के लिए. अब हम दोनों मिल कर अपनी पत्नी का मजा लेंगे.
वे दोनों मुस्कुराने लगे.

राजीव मेरे सामने देख कर कहने लगा कि मेरा बस चले तो मैं तुम्हारे पांव जमीन पर छूने ही ना दूं.
मैंने उसकी इस बात पर उसको सामने से नजर भर कर देखते हुए एक प्यारी सी स्माइल दे दी.

मुझको बहुत सारे मर्दों ने अपनी गोद में लिया है … लेकिन राजीव की गोद में जो मजा आता था ना … वो मुझे कभी किसी और की गोद में कभी नहीं आया था.

प्रिय पाठक आप यदि मेरी इस बात का अर्थ न समझे हों, तो इसको मैं बाद में कभी आपको लिखूँगी.

बाद में हम राजीव के कमरे में चले गए उसने कमरा एकदम बहुत ही अच्छी तरह से सजा रखा था. मैं एक नई नवेली दुल्हन की तरह ही जाकर बेड पर बैठ गई. मैंने घूंघट मुँह तक ले लिया.

थोड़ी देर बाद राजीव कमरे में आया. वो संजीव से कुछ बात करके आया था. उसके साथ संजीव भी कमरे के दरवाजे तक आया था. संजीव ने हम दोनों को बेस्ट ऑफ लक कहा और वहां से अपने कमरे में सोने चला गया.

अब हमारी सुहागरात प्रारंभ हो गई.

आह … क्या बड़ी ही मस्त फीलिंग थी. मेरा घूंघट उठाकर राजीव मेरी गोद में लेट गया और मेरे चेहरे को काफी देर तक देखता रहा. उसने एक हाथ से मेरे चेहरे को नीचे की तरफ झुकाया और मुझे किस करने लगा. वो कभी मेरे गाल पर चुम्बन लेता, तो कभी होंठ पर चूमता, तो कभी गले पर … तो कभी कान के पीछे.

मैं लगातार एक अलग अहसास से गर्म होती जा रही थी. मैंने भी उसे बहुत ही टाईटली अपनी बांहों में भर लिया.

राजीव ने मेरी चूचियों को कपड़ों के ऊपर से मसलते हुए मुझे बेड पर लेटा दिया. बेड पर लेटाने के बाद उसके हाथ मेरे ब्लाउज के हुक खोलने में व्यस्त हो गए. मेरा ब्लाउज खुलते ही ब्रा में कसी हुई मेरी चूचियां उसकी आंखों के सामने उछलने लगी थीं.
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वो मेरी रसीली चूचियों को अपने हाथों से सहलाने लगा. फिर झुक कर उसने अपने होंठ मेरी चूचियों के बीच बनी दरार पर रख दिए और जीभ से मेरी दूध घाटी को ऐसे चाटने लगा जैसे वो किसी मक्खन के गोले को चाट रहा हो.

मैंने उसके बालों में हाथ फेरते हुए उसके मुँह को अपनी चूचियों पर दबा लिया. उसके हाथ मेरी चूचियों के साथ साथ मेरे नंगे पेट पर भी घूम घूम कर मेरे मखमली शरीर का आनन्द ले रहे थे.
उसके हाथों में ना जाने कैसा जादू था कि मैं उत्तेजना के मारे हमेशा सिसकारियां भरने लगती थी.

तभी उसने मेरी चूचियों को मेरी खुली हुई लटकती ब्रा से बाहर निकाल लिया. अब वो मेरी दायीं चूची के निप्पल को अपने होंठों में दबा कर चूसने लगा. मुझे भी मज़ा आने लगा था. तभी मेरी चूत में भी पानी आने लगा था.

कुछ देर चूचियों का मर्दन करने के बाद वो उठा और उसने अपने कपड़े उतारने शुरू किए.

मैं उत्सुक निगाहों से उसके लन्ड के दर्शन की प्रतीक्षा करने लगी. जब उसने अपना अंडरवियर नीचे किया, तो उसका फनफनाता लन्ड देख कर मेरी तो बांछें खिल उठीं. शायद यह उन सब लंडों से ज्यादा लम्बा और मोटा था, जो मैंने आज से पहले अपनी चूत में लिए थे.

राजीव का लन्ड देख कर ही मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया था. पूरा नंगा होने के बाद उसके हाथ अब मेरे कपड़ों का बोझ कम करने में व्यस्त हो गए. कुछ ही सेकंड्स में ही उसने मुझे भी नंगी कर दिया.

उसने झुक कर मेरी जांघों और नाभि को अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया. तभी मैंने हाथ बढ़ा कर उसके मूसल जैसे लन्ड को अपने हाथों में पकड़ कर सहलाना शुरू कर दिया.

राजीव तो जैसे सातवें आसमान पर पहुँच गए. मुझे लन्ड मसलता देख, वो भी मेरी चूत के आसपास अपनी उंगली घुमाने लगा. फिर उसने अपनी बीच वाली उंगली मेरी चूत में घुसा ही दी.

मैंने उसके लम्बे लन्ड को पकड़ कर अपनी तरफ खींचा, तो उसने अपना लन्ड मेरी तरफ कर दिया. मैंने बिना देर किये उसके लन्ड के सुपारे को अपनी जीभ से चाट लिया और उसको अपने होंठों में दबा लिया.

अपने लन्ड पर मेरे होंठों के स्पर्श मात्र से उसके मुँह से एक मदभरी ‘आह …’ निकल गई.

जब मैंने उसके लन्ड को अपने मुँह में भर कर चूसना शुरू किया, तो उसने भी 69 में आकर अपनी जीभ मेरी चूत पर रख दी और वो मेरी चूत से निकल रहे कामरस को नमकीन शहद की तरह चाटने लगा.

“आह्ह्ह … चाटो मेरे राजा … बहुत तड़पाया है तुमने … आज खा जाओ मेरी चूत … बना लो मुझे अपनी रानी …” मैं मस्ती के मारे बड़बड़ाने लगी थी. आज राजीव के लन्ड का स्वाद सच में लाजवाब लग रहा था.

अगले लगभग पंद्रह मिनट तक मैं राजीव का लन्ड चूसती रही और वो भी मेरी चूत का शहद चाटता रहा. इसी दौरान मेरी चूत दो बार पानी छोड़ चुकी थी, जिसे वो चाट गया था.

अब वो मेरी टांगों के बीच में आ गया और अपने लन्ड का सुपारा मेरी चूत पर रगड़ने लगा. मेरी चूत भी मुँह खोल कर उसके लन्ड को खा जाने के लिए तैयार हो गई थी.

तभी उसने अपना लन्ड मेरी चूत पर दबा दिया. राजीव का लन्ड बहुत मोटा था, जिस कारण मेरी चूत खुल गई थी. उसने अगले ही एक जोरदार धक्का लगा दिया और लगभग आधा लन्ड मेरी चूत में समा गया.

उसका ये धक्का बहुत करारा था, तो मेरी चीख निकल गई- हाय्य … फट … गईईई मेरी तो … धीरे मेरे राजा.

पूरा लन्ड जाते ही वो रुक गया और मेरी चूचियों को मसलते हुए मेरे होंठ चूसने लगा. कुछ पल बाद मैंने नीचे से अपनी गाँड़ उछाल कर उसको आगे बढ़ने का इशारा कर दिया.

मैं- अब किस बात का इंतज़ार है मेरे पतिदेव … अब शुरू हो जाओ और मिटा दो सारी खुजली मेरी चूत की … और बुझा लो प्यास अपने लन्ड की.

ये सुनते ही राजीव शुरू हो गया और पहले धीरे धीरे … फिर लम्बे लम्बे धक्के देने लगा. उसका मोटा मूसल मेरी चूत में धमाल मचा रहा था.

लगभग हर धक्के पर मैं कराह उठती थी, पर इतना मज़ा आ रहा था कि लिख कर बताना बहुत मुश्किल है.

“उम्म्ह… अहह… हय… याह… चोदो मेरे राजा … जोर से चोदो … फाड़ दो अपनी दुल्हन की चूत … मना लो सुहागरात … आह्ह्ह्ह … फाड़ डालो …”

मैं मस्त हुई गाँड़ उछाल उछाल कर उसके लन्ड को अपनी चूत में ले रही थी. वो भी मस्त होकर मुझे चोद रहा था. सच में मेरे नए पति राजीव मेरी क्या मस्त चुदाई कर रहे थे … मेरी चूत को तो मज़ा ही आ गया था.

मोटे लन्ड का एहसास भी मुझे मेरी पहली सुहागरात पर हुई चुदाई की याद दिला रहा था.

राजीव का मोटा लन्ड फंस फंस कर मेरी चूत में जा रहा था. चूत की चिकनी दीवारों को रगड़ता हुआ अन्दर बाहर हो रहा था.

आखिर दस मिनट की चुदाई के बाद उसके धक्कों की स्पीड बहुत तेज हो गई, मैं समझ गई कि अब राजीव अपने लन्ड के रस से मेरी चूत की प्यास बुझाने ही वाला है.

लगभग पंद्रह बीस धक्के और लगे और मेरी चूत से झरना फ़ूट पड़ा, साथ ही राजीव के लन्ड से गर्म गर्म वीर्य की बरसात मेरी चूत के अन्दर होने लगी थी.

मैं तो प्यार के मारे राजीव से लिपट गई और उसको अपनी बांहों और टांगों में जकड़ लिया. मैं उसके लन्ड से निकले रस को अपनी चूत की गहराइयों में महसूस करना चाहती थी. उसके लन्ड से बहुत पानी निकला था … मेरी पूरी चूत भर गई थी.

हम दोनों थक कर चूर हो गए थे, दोनों एक दूसरे की बांहों में लिपट कर लेटे रहे.

कुछ देर बाद वो उठा और बाथरूम में जाकर फ्रेश होकर आ गया. कमरे में आते ही राजीव मेरे होंठ चूसने लगा. फिर उसने मुझे भी फ्रेश होकर आने को कहा, लेकिन मैंने मना कर दिया.

मैंने उसे बताने के लिए कातिल सी और सेक्सी सी स्माइल दी कि मैं अब क्या चाहती हूं.

वो भी समझ गया और हम दोनों का दूसरा दौर शुरू हो गया. भरपूर चुदाई के बाद थकान होना लाजिमी था. सो उसके बाद में हम ऐसे ही सो गए.

जब मैं उठी, तो घड़ी की ओर देखा, सुबह हो गई थी. वो भी मेरे साथ ही जग चुका था.

बाद में मैं नहा कर तैयार हुई और उसके नाम का और मेरे पहले पति दोनों के नाम का सिंदूर मांग में भर लिया. हमारी तीनों की जिंदगी ऐसे ही सुख से बीतने लगी. माफ़ करना तीनों की नहीं चारों की, मेरे पेट में जो अभी प्यारा सा बच्चा है, उसे कैसे भूल सकती हूं.

दोस्तो, कैसी लगी मेरी दो पति के साथ वाली सेक्स कहानी, मुझे जरूर बताइए और कोई सुझाव हो तो वो भी बिना संकोच के जरूर भेजिए. 
माँ बनने की चाहत में दो पतियों की बीवी बनी (Maa Banne Ki Chahat Me Do Patiyon Ki Biwi Bani) माँ बनने की चाहत में दो पतियों की बीवी बनी (Maa Banne Ki Chahat Me Do Patiyon Ki Biwi Bani) Reviewed by Priyanka Sharma on 2:09 AM Rating: 5

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