बहन की सील तोड़ चुदाई के बाद माँ की प्यास बुझाई (Bahen Ki Seal Tod Chudai Ke Baad Maa Ki Pyaas Bujhai)

बहन की सील तोड़ चुदाई के बाद माँ की प्यास बुझाई
(Bahen Ki Seal Tod Chudai Ke Baad Maa Ki Pyaas Bujhai)


मैं एक शादीशुदा खातून हूँ. मेरा एक ही बेटा है, उसका नाम अब्बास है. एक बेटी भी है, उसका नाम अज़मी है. उस समय मैं 38 साल की थी और अब्बास 22 का था. अज़मी काफी छोटी थी, वो कई साल बाद पैदा हुई थी. अज़मी सिर्फ 20 साल की थी, तब मेरे पति पैसा कमाने के लिए 2 साल के लिए दुबई चले गए थे. मेरा बेटा अब्बास ही खेती बाड़ी देखता था, वो काफी तंदरुस्त और गठीला था.

मेरे पति को गए हुए 3 महीने बीत गए थे. कभी कभी मेरी उनसे फ़ोन पर बात हो जाती थी. मैं और अज़मी एक कमरे में सोते थे और अब्बास दूसरे कमरे में. दोनों कमरों के बीच में एक शीशे की खिड़की थी, जो थोड़ी सी टूटी हुई थी.

जून का आखिरी दौर था और हल्की हल्की बारिश शुरू हो गयी थी. अज़मी एक चारपाई पर सोई हुई थी और एक दूसरे पर मैं लेटी थी.

रात के लगभग 11 बजे होंगे, तभी अब्बास की आवाज मेरे कानों में पड़ी.

उसने मुझे कहा- अम्मी, आज अज़मी मेरे साथ सोएगी.

मैं उसकी बात सुनकर हैरान रह गयी, मैंने सोचा कि मेरा बेटा मजाक कर रहा है, पर उसके मुँह से दारू की गंध आ रही थी.

अज़मी दिए की रोशनी में किताब पढ़ रही थी. अज़मी ने भी ये सब सुना अब्बास तहमद और सैंडो कट बनियान में हमारे सामने खड़ा था.

मैंने उससे कहा- बेटा ये तेरी बहन है.
लेकिन उसने अज़मी का हाथ पकड़ा और उसे खींचता हुआ अपने कमरे में ले गया.

उसकी आंखों में कामवासना झलक रही थी. उसकी बड़ी बड़ी आंखें और तावदार फड़कती मूछें देख कर मैं उसे रोकने का साहस नहीं कर सकी.

तभी मुझे दरवाजा बंद करने की आवाज आयी, मैं उसके कमरे में जाने की हिम्मत नहीं जुटा पायी.

बहन की सील तोड़ चुदाई

मैंने दिए की रोशनी बंद कर दी और फिर उस खिड़की के पास बैठ गयी. मुझे अज़मी की बहुत फ़िक्र हो रही थी. अब्बास के कमरे में भी मिट्टी के तेल का दिया जल रहा था. मुझे कमरे में दोनों की धुंधली सी परछाई दिखाई दी. वो अज़मी को अपनी बांहों में पकड़े हुए था, वो अज़मी के गाल चूम रहा था. तभी अज़मी की आवाज आयी- भाई जान उफ़्फ़ … इतने जोर से मत दबाओ.
वो शायद अज़मी की छातियां दबा रहा था और फिर कपड़ों की सरसराहट हुई.

अब्बास नीचे झुक कर उसका सलवार खोलने की कोशिश करने लगा. तभी अब्बास ने उसका नाड़ा तोड़ दिया, जिसके चट से टूटने की आवाज आई.

अज़मी की सलवार नीचे गिर गई, अब्बास ने अज़मी को अपनी गोद में उठाया और बिस्तर पर धकेल दिया. वो अज़मी की छोटी छोटी चूचियां चूसे जा रहा था.

फिर अब्बास अज़मी की जांघों के बीच में बैठ गया और कुछ सेकंड बाद उन दोनों के सिसकारने की आवाज आने लगी. मैं सिहर गयी क्योंकि अब्बास काफी लम्बा चौड़ा था.

मैं खिड़की के और करीब सरक गयी, जहां शीशे के बीच से अब्बास और अज़मी दोनों दिख रहे थे. अब्बास के चूतड़ ऊपर नीचे होने लगे और अज़मी की सीत्कारें मेरे कानों में पहुँचने लगी.

मैं बेबस थी … क्योंकि एक तरफ कामवासना से तप्त मेरा बेटा था और उसके नीचे मेरी कमसिन बेटी दबी हुई थी.

बस इसके बाद अज़मी की सिसकारियाँ निकल रही थी. उसके कंठ से ‘उई अम्मी … उईई … मर गई … आह..’ की आवाज निकल रही थी.
बहन की सील तोड़ चुदाई
बहन की सील तोड़ चुदाई
अज़मी एकदम कुंवारी थी. भले ही वो दोनों मेरे पेट से पैदा हुए थे, पर ये नजारा देख कर मेरे मन में भी शैतान जाग उठा. अब मुझे अज़मी की तेज सिसकारियों में मजा आने लगा था. मेरा पति तो 3 महीने से बाहर था और उसे 2 साल बाद आना था. अब्बास अपने चूतड़ों की रफ़्तार बढ़ाने में लगा था और अज़मी उसके पलंग पर अपने भाई से चुद रही थी.

अब्बास ने अज़मी की करीब 15 मिनट तक बहुत चुदाई की और फिर अब्बास के चूतड़ उछलने बंद हो गए. साथ ही कमरे में अब अज़मी और अब्बास की तेज तेज सांसों की आवाज आ रही थीं.

अब्बास करीब 2 मिनट तक अज़मी के ऊपर लेटा रहा और फिर खड़ा हो गया.

अज़मी भी उठी और उसने जैसे ही अपनी सलवार को उठाया, मैं तुरंत ही अपनी चारपाई पर लेट गयी. अब्बास ने दिया बुझा दिया था.

दो मिनट बाद अज़मी जब कमरे में आयी, तो उसने मुझे जगाया.

मैं तो जाग ही रही थी, उसने अपनी सलवार को पकड़ रखा था. मैंने बहुत धीरे से उसके कान में पूछा- अज़मी क्या हुआ?
उसने बताया कि भाईजान ने मेरा नाड़ा तोड़ा और फिर …
मैंने पूछा- और फिर क्या अज़मी? बता न … अब्बास सो गया है … डर मत!
तब उसने कहा कि उसने मेरे अन्दर डाल दिया.
मैंने फिर पूछा- अरे ऐसा क्या था, जो उसने डाल दिया और तू इतने जोर जोर से क्यों चीख रही थी?
अज़मी ने कहा- अम्मी, उसका वो बहुत तगड़ा है.
मैंने उससे फिर पूछा कि अरे तगड़ा है, तभी तो उसने इतनी खेती बाड़ी संभाल रखी है.
अज़मी ने कहा- नहीं अम्मी आपको नहीं पता … उसका बहुत बड़ा है. मैं इसलिए चीख रही थी.

ये सुनते ही मेरी चूत में सुरसुराहट होने लगी. मैंने उससे पूछा कि अरी करम जली साफ साफ बता … उसका क्या बड़ा है?
तब अज़मी ने मेरे कान में धीरे से कहा- अम्मी उसका नीचे का बहुत बड़ा और सख्त है.
मैंने पूछा- तुझे अच्छा लगा या बुरा?
वो नीचे मुंह करके मुस्कुराने लगी.

मैंने उससे कहा- भूल कर भी अपनी किसी भी खाला या सहेली या अपने अब्बू को ये बात मत बताना … बहुत ज्यादा बदनामी होगी, कोई हमारे घर का पानी भी नहीं पिएगा.
ख़ैर इसके बाद मैंने उसे नई सलवार और कच्छी दी. फिर हम दोनों सो गई.

मगर मेरी आंखों से नींद गायब हो चुकी थी. मैं जैसे तैसे अज़मी के सोने का इंतजार करती रही और मुझे अब अब्बास के खर्राटों की आवाज भी सुनाई दे रही थी.

रात के करीब डेढ़ बजा होगा, जब मुझे यकीन हो गया कि अज़मी भी थक कर गहरी नींद में सो गयी है, तो मैं दबे पांव उठी और अब्बास के कमरे में चली गयी.

वहां का नजारा देख कर मेरी आंखें फटी की फटी रह गईं. मैंने मोमबत्ती की रोशनी में देखा कि चादर पर कुछ खून के निशान थे और अब्बास सिर्फ बनियान में सीधा लेटा हुआ था. उसका मुरझाया हुआ लन्ड बीच में से थोड़ा सा घूमा हुआ था.

अब्बास का लन्ड देख कर मेरी आंखें तनी की तनी रह गईं. इतना मोटा और लम्बा लन्ड मैंने अपनी जिंदगी में कभी नहीं देखा था. मैं डरते डरते उसके करीब खड़ी हो गयी और उसका लन्ड गौर से देखने लगी.

मुरझाई हुई अवस्था में भी उसका लन्ड क्या गदराया हुआ था … साला मुरझाने के बाद भी करीब साढ़े छह इंच रहा होगा. उसकी मोटाई का तो मुझे अंदाजा ही नहीं हुआ. पर ये तय था कि अब्बास का तन्नाया हुआ लन्ड मेरी मुट्ठी में नहीं आ सकता था. वो ऐसा था जैसे कोई लम्बा मोटा खीरा हो. उसके लन्ड का सुपाड़ा चमड़ी से ढका हुआ था. अभी बस 1 रूपए के सिक्के के बराबर गोलाई नजर आ रही थी, जो पीछे की तरफ मोटी होती जा रही थी. मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि अब मैं क्या करूँ.

उसकी काली घुंघराली झांटें देख कर मेरी नियत ख़राब हो गयी थी. मैं जल्दी से बाहर आयी और सीधा गुसलखाने में घुस गयी. मेरी चूत गीली हो गयी थी, यहां तक कि उसमें से चाशनी जैसी टपकने लगी थी. इस वक्त मेरी चूत लन्ड मांग रही थी. मैंने जल्दी से अपनी एक उंगली चूत में घुसेड़ कर चलायी, पर आग बढ़ती गयी. मैं तेज तेज उंगली चलाने लगी और फिर मेरा पानी झड़ गया.

झड़ने के बाद जैसे मुझे होश आया. मुझे अपनी करनी पर बहुत शर्म आयी कि मैं अपने बेटे के लन्ड को देख कर ही कामुक हो गयी थी.

मैं थकी सी वापिस कमरे में आ गयी और सो गयी. सुबह कब हुई मुझे पता ही नहीं चला.

जब मैं सोकर उठी, तो घर में अब्बास नहीं था … वो खेतों की तरफ चला गया था. अज़मी रसोई में चाय बना रही थी. अज़मी ने मुझसे … और न मैंने अज़मी से कोई बात की.

दिन में अब्बास का खाना मैंने उसके कमरे में रख दिया था. तीन दिन तक हम तीनों में से किसी ने भी इस मुद्दे पर बात नहीं की. लेकिन मैं अब्बास का लन्ड देख चुकी थी … इसलिए अब मैं भी उसका स्वाद चखना चाहती थी.

मैं कोई ऐसी तरकीब सोचने लगी कि अब्बास मेरे जाल में फंस जाए, पर मैं उसे सीधे नहीं कह सकती थी. क्योंकि वो मेरा बेटा था.

इसलिए मैंने सोचा कि ऐसा काम किया जाए, जिससे उसका ध्यान मेरी तरफ आ जाए.

मैं चौथे दिन शाम को नहायी और पुराना पेटीकोट उतार कर खूंटी पर लटका दिया. अपनी उतारी हुई ब्रा को मैं रोज धो दिया करती थी. मैंने ब्रा धो कर सूखने टांग दी.

फिर मैंने अब्बास का दाढ़ी बनाने वाला रेज़र उठाया और अपनी चूत की झांटें साफ कर लीं. साफ़ की हुई झांटों को एक कागज में पुड़िया में बंद करके साबुनदानी के नीचे दबा दीं. मुझे पता था कि पुड़िया खुल जाएगी और अब्बास को मेरी झांटें दिख जाएंगी. क्योंकि झांटों के बाल देखने से जवान लड़के बहुत उत्तेजित हो जाते हैं.

ये दो काम करने के बाद मैं रसोई में खाना बनाने लगी. शाम को जैसा मैंने सोचा था, वैसा ही हुआ.

मैं कुछ खोजने का नाटक करने लगी और बाथरूम की तरफ गयी. साबुनदानी के नीचे मेरे झांटों के बाल वाली पुड़िया गायब थी. अब्बास आंगन के किनारे खड़ा था और अज़मी जानवरों को चारा दे रही थी. अज़मी को इस बारे में कुछ भी पता नहीं था.

मैं पेटीकोट और ब्रा लेकर बाहर आयी, तो अब्बास हल्के हल्के से मुस्कुरा रहा था.
उसने मुझसे पूछा- अम्मी जान, क्या ढूंढ रही हो?

मैं उसकी बात दरकिनार करती हुई तेजी से कमरे की तरफ जाने लगी, तो अब्बास बोल पड़ा- अम्मी वो पुड़िया में क्या था?
मैंने कहा- मुझे नहीं पता कि कौन सी पुड़िया?

बहरहाल अब्बास समझ चुका था कि आज शाम को अम्मी ने अपनी चूत साफ की हैं. चूँकि आज चौथा दिन था, तो अब्बास का लन्ड भी जोर मार रहा होगा.

उस रोज जुलाई की 2 तारीख थी. मैंने खाना अब्बास के कमरे में रख दिया था. रात 9 बजे अब्बास ने पहले दारू पी. आज उसने एक क्वार्टर पूरा गटक लिया था और फिर खाना खाया.

अज़मी कमरे में सो गयी और इससे पहले कि अब्बास आता, तो हो सकता है वो अज़मी को पकड़ कर ले जाता … क्योंकि उसका हाथ अब खुल चुका था.

रात को 10 बजे मैं दालान में आकर चारपाई पर लेट गयी.

अज़मी सो चुकी थी, मैंने मैक्सी पहन रखी थी. बारिश तेज होने लगी. मैंने जानबूझ कर अपने पैर अब्बास के कमरे की तरफ कर रखे थे और बाहर घुप्प अंधेरा छाया हुआ था. मैंने अपनी मैक्सी कूल्हों तक उठा दी थी … ताकि अब्बास मेरी गोरी चौड़ी गाँड़ देख ले. मेरी चूत साली एकदम मक्खन की तरह चिकनी हो गयी थी. मैंने उस पर हल्का सा घी भी लगा दिया था.

मैं अब्बास के बारे में ही सोच रही थी कि वो कहीं अज़मी को उठा कर न ले जाए. पर मेरी किस्मत अच्छी थी कि मुझे अपने पास अब्बास के खड़े होने का अहसास हुआ.

वो सिर्फ बनियान और कच्छे में था. मेरा बदन पसीने से सराबोर हो गया. मैंने अब्बास के हाथ में एक छोटी सी टॉर्च देखी. उसने टॉर्च की रोशनी मेरी गाँड़ पर मारी, मैंने करवट लेकर अपनी बाईं जाँघ सीधी फैला रखी थी और दाईं जाँघ घुटने से मोड़ कर अपने पेट से सटा रखी थी. मैंने जानबूझ कर ऐसा किया था, ताकि वो चूत देख कर अपना आपा खो दे.

वो कुछ सेकंड मेरी गाँड़ घूरता रहा और फिर उसने मुझे अपने दोनों हाथों में ऊपर उठा लिया.

मैंने उसे हल्के से डाँटते हुए कहा- अरे कौन है ये?
हल्के स्वर में मैंने ऐसा कहा था, ताकि अज़मी की नींद न खुले.

अब्बास ने कहा- अम्मी मैं अब्बास … अन्दर चलो, सब बताता हूँ तुम्हें कि मैं कौन हूँ? तुम चुप रहना … वर्ना ठीक नहीं होगा.

बेटे ने फड़कती चूत को दिया बड़े लन्ड का मजा

मैंने जानबूझ कर उसके हाथों से निकलने की कोशिश की, लेकिन फिर उसने मुझे अपने कंधे पर डाल लिया और कमरे में ले गया.

उसने मुझे उसी पलंग पर धकेल दिया. जहां उसने मेरी बेटी अज़मी की चूत फाड़ी थी.

मैंने उससे कहा- अब्बास, मैं तुम्हारे अब्बू जान को तुम्हारे बारे में सब कुछ बता दूँगी.
उसने बेशर्मी से कहा- हां बताओगी तो तब … जब तुम बताने लायक रहोगी.
मैंने चौंकने का नाटक करते हुए कहा- अरे ऐसा क्या करोगे तुम?
अब्बास ने कहा- अम्मी बातों में मेरा टाइम मत ख़राब करो.

उसने मेरे होंठ चूसने शुरू कर दिए. मेरा रोम रोम कांप रहा था क्योंकि मेरा खुद का बेटा मेरी चूत की प्यास बुझाने वाला था.

मैंने जानबूझ कर उससे कहा- अब्बास, अगर अज़मी को हम माँ, बेटे के बारे में मालूम चल गया … तो वो क्या सोचेगी?

उसने तड़ से मेरी गालों की 5 -6 चुम्मियां ले लीं. उसके मुँह से दारू की गंध आ रही थी.

उसने मेरी मैक्सी उठा कर मेरी चूचियां अपनी हथेली में जैसे ही कसीं, मेरा रोम रोम आनन्द से कांपने लगा.

उसने मुझे खींचा और खुद पलंग पर उकडूँ बैठ गया. उसने मेरी गाँड़ के नीचे अपनी हथेलियां रख दीं और मेरी गाँड़ अपनी छाती पर टिका ली. उसकी चौड़ी छाती पर मेरी गाँड़ टिकी हुई थी. तभी उसने अपना मुँह मेरी सफाचट चूत पर रख दिया. मेरे तन बदन में काम वासना की आग लग गयी.

अब्बास ने मेरी चूत को पहले सूंघा और फिर अपनी जीभ से चाटने लगा. वो मेरी चूत के अन्दर जीभ डालने की कोशिश करने लगा. मेरी टांगें उसके कन्धों पर टिकी थीं.

मैं आनन्द में आकर अपने चूतड़ों उठाने लगी. बीच बीच में मैं बेहद धीरे धीरे कह रही थी- अब्बास मुझे जाने दो … तुम्हारे अब्बू बहुत नाराज होंगें.
उसने फुसफुसा कर कहा- अब्बू ने अम्मी जान … ऐसा मजा कभी नहीं दिया होगा.

वो सही कह रहा था … क्योंकि उसके अब्बू मुझे 3 मिनट से ज्यादा नहीं चोद पाते थे. वो उतनी देर में ही झड़ कर सो जाते थे.

अब्बास ने मेरी चूत चाटी और फिर अपना कच्छा निकाल दिया. जैसे ही मेरी नजर उसके बड़े लौड़े पर पड़ी, मेरी हवा निकल गयी. उस दिन तो मैंने उसका मुरझाया लौड़ा देखा था … पर इस समय उसका लौड़ा फुंफकार रहा था.

अब्बास मेरे ऊपर चढ़ गया और उसने मुझसे कहा- अम्मी मुँह खोलो.
मैंने कहा- नहीं अब्बास, ये सब पाप है.

उसने तुरंत मेरे गाल पचकाये और मेरे खुले हुए मुँह में अपना लौड़ा पेल दिया. मेरे मुँह में उसका लौड़ा ढंग से नहीं आ रहा था, पर फिर भी वो जोर लगा रहा था. मैंने उसका लौड़ा हटाने के बहाने हाथ में पकड़ा … आह क्या शानदार सख्त लौड़ा था … और साइज! मैंने नापने के लिए अपनी हथेली को फैलाया, तो उससे भी करीब एक इंच लम्बा था. इसका मतलब उसका लन्ड करीब नौ से दस इंच के बीच का रहा होगा.

मैंने मुश्किल से उसका लौड़ा एक मिनट ही चूसा होगा कि उसने मेरे दोनों पैर पकड़े और घसीट कर पलंग से नीचे लटका दिए. इससे मेरी मैक्सी उलट गयी थी.

इस वक्त उसका लौड़ा ऐसा दिख रहा था जैसे कुठले का बिंटा हो.

अब्बास मेरे करीब आया. मैं न ना करती रही … पर तभी उसने मेरे दोनों पैर अपने हाथों से हवा में उठा दिए और मेरी चूत को सहला कर लौड़े को मेरी चूत पर टिका दिया. फिर उसने मेरी चूत की फांकों में अपने सुपारे को फंसाया और एक जोरदार धक्का दे मारा.

मैंने अपने होंठ भींच लिए. उसने एक ही झटके में करीब 3 इंच लौड़ा घुसा दिया था … जो कि सीधे मेरी बच्चेदानी की गांठ पर लगा. इससे मेरे बदन में एक आनन्ददायक टीस उठने लगी.
बेटे ने फड़कती चूत को दिया बड़े लन्ड का मजा
बेटे ने फड़कती चूत को दिया बड़े लन्ड का मजा
इसके बाद अब्बास ने अपने चूतड़ आगे पीछे करने शुरू किए और मैं मीठे मीठे दर्द के साथ ही आनन्द में गोते लगाने लगी.

बाहर बहुत जोर से बारिश लग गयी थी और इधर मेरी चूत को अब्बास अपने बड़े लौड़े से बुरी तरह चोद रहा था. उसके लन्ड की ऐसी करारी चोट मेरी बच्चेदानी पर आज तक उसके अब्बू भी नहीं मार सके थे.

मेरी भी वासना में डूबी सिसकारियां निकलने लगीं. साथ साथ मेरी चूत भी चीखने लगी. लन्ड के अन्दर बाहर होने से मांस के रगड़ने की साफ आवाज आ रही थी. उसका बड़ा लन्ड मेरी नाभि तक मार कर रहा था.

अब्बास का बेजां मोटा लन्ड मेरी बच्चेदानी को बार बार पीछे धकेल रहा था. अब्बास मस्ती में आकर मेरे तलुए चाट रहा था और मेरी चूचियां तो इतना अधिक उछाल मार रही थीं कि मुझे बार बार पकड़नी पड़ रही थीं. मुझे ऐसा लग रहा था, जैसे कोई रबर का सख्त मोटा डण्डा मेरी चूत में डाल और निकाल रहा हो.

मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि मैं बस अब मूतने वाली हूँ और अब…

अचानक अब्बास के चूतड़ों की रफ़्तार बहुत बढ़ गयी और उसने एक झटके से अपना लौड़ा बाहर निकाल लिया. तभी न चाहते हुए भी मेरी पेशाब की तेज धार अब्बास की छाती पर पड़ी. पहले एक फिर दो और फिर तीन पिचकारियां उसके सीने पर जा लगीं.

मैंने सोचा था कि शायद अब्बास झड़ने वाला है, पर इसके साथ ही उसने फिर से मेरी चूत में लौड़ा पेल दिया. मेरी चूत से झाग बाहर आने लगा था. उसने मेरी चूत को, जो बिना लन्ड के कई महीनों से सूखी पड़ी थी, एकदम मक्खन की तरह मुलायम कर दी थी.

अब्बास मुझे इसी पोजीशन में करीब 20 मिनट तक चोदता रहा. उसने अच्छी तरह मेरा बैंड बजा दिया था. फिर मेरा मुँह खुल गया, उसने अपने दोनों आंड मेरी गाँड़ के छेद पर सटा दिए थे. मेरी टांगें आनन्द में थरथराने लगी थीं. अब्बास की आंखें एकदम बंद हो गयी थीं, वो एकदम भी नहीं हिल रहा था.

हम दोनों ऐसे ही करीब 15 सेकंड तक रहे होंगें और फिर जो गरम गरम 10 -12 धारें उसके लौड़े ने मेरी बच्चेदानी के मुँह पर मारीं, मैं शब्दों में उस आनन्द का जिक्र कर ही नहीं सकती.

इसके बाद अब्बास ने मेरे पैर नीचे लटका दिए और मेरे ऊपर झुक गया. अब्बास थक चुका था, मुझे उस पर दया आ रही थी क्योंकि उसकी हालत हारे हुए जुआरी की तरह हो गयी थी.

मैंने उसके सिर पर हाथ फेरा … वो पसीने में बुरी तरह नहाया हुआ था. उसके मुँह से बस एक ही शब्द निकला- अम्मी, अब्बू को मत बता देना.
मैं तो खुद ही चाह रही थी कि कहीं ये बात सुनकर उसके अब्बू का भरोसा न टूट जाए.
खैर मैंने उससे कहा- अब्बास कोई बात नहीं, जवानी में ऐसा ही होता है, बस अब उठ और आराम कर.

अब्बास उठा उसका लौड़ा आधा मुरझा चुका था. मेरी चूत लबालब भर चुकी थी और मेरी आग ठंडी हो चुकी थी.

मैं और अब्बास दोनों एक दूसरे की बांहों में खो गए. मैंने उसकी चुम्मियां लीं, क्योंकि अब्बास ने मुझे नशे में वो दे दिया था, जो एक जवान औरत को किसी मर्द से चाहिए होता है.

अब्बास ने कच्छा पहना और इसके बाद मैंने दिया बुझा दिया और चुपचाप दबे पाँव अपने कमरे में आकर चारपाई पर लेट गयी. कब मेरी आंख लगी, मुझे पता ही नहीं चला.

जब सुबह मैं उठी, तो मेरी चूत सूजी हुई थी. मैंने अपनी जांघ उठा कर नीचे शीशा लगा कर देखा. अब्बास ने मेरी चूत का भोसड़ा बना दिया था. मेरी चूत के होंठ बाहर निकल आये थे. मुझे बहुत शरम आयी कि अब्बास से कैसे सामना करूंगी.

अब्बास और मैं आमने सामने आने से कतरा रहे थे. वो उठा और खेतों में चला गया.

मैं 2 घंटे बाद अज़मी को कह कर गयी कि बेटी मैं अब्बास को चाय देने जा रही हूँ.

मैं हिम्मत करके अब्बास के पास गयी और उसे आवाज लगायी. पहले तो उसने अनसुनी कर दी.

फिर कहा- अरे अम्मी, तुम!
मैंने कहा- अब्बास घर में अज़मी के सामने बात नहीं हो सकती थी, इसीलिए यहां आयी हूँ.
उसने नजरें नीचे करके कहा- अम्मी कहो.

मैंने उससे कहा- अब्बास रात जो कुछ भी हम दोनों के बीच में हुआ है, उसमें जितने कसूरवार तुम हो, उतनी ही मैं भी हूँ. तुम जवान हो और मुझे खुले में नहीं सोना चाहिए था.

उसने कहा- अम्मी खुदा के वास्ते ये सब मत कहो … रात को मैं नशे में था.
मैंने उससे कहा- अब्बास तुमने चार रोज पहले भी अज़मी को नशे में कली से फूल बना दिया था … पर शर्माओ मत, मुझे तुम बहुत पसंद हो. रही बात अब्बू की, तो उन्हें न अज़मी बताएगी और न मैं … हां बस तुम्हारी सेहत के लिए कह रही हूँ कि अब तुम दारू छोड़ दो और हम दोनों को तुम जब तुम्हारा मन करे, अपने कमरे में ले जाना. मैं कुछ दिन में ही अज़मी को बता दूंगी कि मैं भी अब्बास के पलंग पर सो चुकी हूँ. इसलिए अब तुम शर्म छोड़ो और चाय का मजा लो.

ये सुनकर अब्बास के चेहरे पर लालिमा आ गयी. वो शर्मा रहा था.
फिर उसने कहा- ठीक है अम्मी हम दोनों यहीं चाय पिएंगे … पर पहले मैं पेशाब कर लूँ.

ये कह कर वो खड़ा हुआ और उसने अपना तहमद उठा कर अपना औजार बाहर निकाला और मेरी बगल में खड़ा होकर मूतने लगा.

उसका खड़ा लन्ड देख कर मैं भी मूतने बैठ गयी.

फिर हमने चाय पी, उसने मुझे एक पेड़ की आड़ में ले जाकर चुम्मी ली और कहा- अम्मी अब जाओ … अज़मी शक कर रही होगी … बस इतना ध्यान रखना कि अज़मी के बच्चा न ठहर जाए.

मैं घर आ गयी और सोचने लगी कि रात अब्बास ने कैसे मेरी प्यास बुझाई थी. मैं हैरान थी कि आखिर इतना बड़ा लन्ड भी होता होगा लड़कों का.

पर खैर मेरी और अज़मी की किस्मत बेहत अच्छी रही कि हम दोनों माँ बेटी एक ही लन्ड से जिंदगी भर चुदती रहीं.
बहन की सील तोड़ चुदाई के बाद माँ की प्यास बुझाई (Bahen Ki Seal Tod Chudai Ke Baad Maa Ki Pyaas Bujhai) बहन की सील तोड़ चुदाई के बाद माँ की प्यास बुझाई (Bahen Ki Seal Tod Chudai Ke Baad Maa Ki Pyaas Bujhai) Reviewed by Priyanka Sharma on 11:04 PM Rating: 5

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