विधवा औरत के जिस्म की हवस (Vidhwa Aurat Ke Jism Ki Hawas)

विधवा औरत के जिस्म की हवस (Vidhwa Aurat Ke Jism Ki Hawas)


नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम राजेश है और मैं 36 साल का शादीशुदा मर्द हूँ. बात करीब 3 साल पहले की है जब मेरा तबादला रायपुर से मनाली हो गया था। बता दूं कि पेशे से मैं एक इंजीनियर हूं और एक प्राइवेट कंपनी में काम करता हूं। मैं उस समय 33 साल का था और मेरी शादी को 2 साल हो चुके थे।

मेरी जॉब ऐसी है कि मुझे हर दिन कहीं न कहीं दूसरे शहर जाना पड़ता है काम की वजह से। इसी कारण मेरी पत्नी मेरे साथ नहीं रहती बल्कि गाँव में मेरे माता-पिता की सेवा करती है। पत्नी शहरी नहीं है इस वजह से सेक्स में उसे कुछ अलग करने में कोई दिलचस्पी नहीं रहती है और न ही मैं उसके साथ जोर-जबरदस्ती कर सकता हूं क्योंकि अगर बात हम दोनों के बीच से निकल गयी तो मेरे परिवार और उसके घरवालों के बीच बहुत बखेड़ा हो सकता है। इसी वजह से मैं अपनी मर्ज़ी का काम बाहर ही कर लेता हूं।

ऐसी बात सबको बताना सही नहीं लगता किंतु जीवन के कुछ अच्छे पल किसी को बता कर और अधिक मजा आता है यही कारण है कि मैं ये कहानी लिख रहा हूं। उम्मीद करता हूं आप सब को ये कहानी पसंद आएगी।

मैं मनाली में नया-नया था और मेरी जॉब की वजह से मुझे ऐसे कमरे की तलाश थी जहाँ मैं जब चाहे आ जा संकू क्योंकि मैं कभी-कभी सुबह जल्दी चला भी जाता था और कभी-कभी देर रात को लौटता था तो मुझे कोई ऐसी जगह चाहिए थी जहाँ कोई रोक टोक न हो।

अकेले होने की वजह से कहीं बढ़िया जगह कमरा कोई देने को तैयार नहीं होता था। एक हफ्ते के बाद आखिरकार मेरे साथ काम करने वाले एक दोस्त की वजह से एक अपार्टमेंट में कमरा मिल गया। मकान मालिक वहाँ नहीं रहता था बल्कि वो पूरी बिल्डिंग किराए के लिए दी हुई थी और आने जाने की पूरी आजादी थी। पूरी बिल्डिंग फैमिली वाली थी लेकिन मैं शादीशुदा था और दोस्त के कहने पर मुझे वहाँ कमरा मिल गया।

अधिकांश समय मैं बाहर ही रहता था और बिल्डिंग में बहुत कम लोग ही मुझे जानते थे। मैं छुट्टी के दिन भी काम पर ही रहता था तो न किसी से जान-पहचान ही थी और न कोई लेना-देना होता था। केवल मेरे दोस्त और उसकी पत्नी से ही कभी-कभार बात होती थी।

बहुत मुश्किल से हफ्ते या दो हफ्ते में एक बार ऑफिस जाना होता था तो थोड़ा आराम मिलता था। मैं अपने कमरे में अकेला मस्त पड़ा रहता था. जब कभी पत्नी से बात होती थी तो अकेले में तो अंदर से कुछ कमी सी महसूस होती थी और फिर उसके फ़ोन रखते ही मोबाइल में ब्लू फिल्म देखने लगता था।

शादीशुदा होने के बाद भी मुझे मुठ मारने की जरूरत पड़ती थी लेकिन मैंने कभी नहीं सोचा था कि शादी के बाद मैं अपनी पत्नी के अलावा भी किसी दूसरी औरत के साथ संबंध रखूंगा। हालांकि ऐसा नहीं था कि पत्नी से पहले मैंने किसी के साथ सेक्स नहीं किया था। कॉलेज के समय से ही मुझे लड़कियों में बहुत ज्यादा रुचि थी तो इसी तरह बहुत सी लड़कियों के साथ मैंने पहले भी सेक्स किया था.

आज जिस औरत के बारे में बताने जा रहा हूं वो उन सब में से बिल्कुल अगल है। मैंने उससे पहले किसी लड़की या औरत में वैसी बात नहीं देखी थी। मुझे 3 महीने हो चुके थे उस जगह फिर भी केवल इक्का दुक्का लोग ही मुझे पहचानते थे। मेरा ऑफिस करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर था और इसी वजह से मैंने एक बाइक ले ली थी.

एक दिन मुझे ऑफिस जाना था, सो मैं 9 बजे तैयार होकर निकल रहा था. मेरा दोस्त सबसे नीचे वाले फ्लोर के कमरे में रहता था. उस दोस्त के बारे में भी कुछ बता देता हूं आपको. वो मुझसे उम्र में बड़ा है और जिस कंपनी में मैं हूँ वो उसमें मुझसे सीनियर पोस्ट पर है. इसलिए मैं उसको भैया ही बुलाता था.
मैंने सोचा कि उससे भी पूछ लेता हूं कि वो भी ऑफिस पर जायेगा या साइट पर जायेगा. इस कारण से मैं उसके कमरे की तरफ गया. उसका कमरा बाउंडरी के बिल्कुल पास था और गेट के पास ही एक औरत खड़ी हुई थी. न चाहते हुए भी पता नहीं क्यों मेरी नजर उस पर जा रही थी.

हल्की गुलाबी रंग की साड़ी, चेहरा साफे से ढका हुआ था धूप से बचने के लिए, केवल माथा और आंखें दिख रही थीं, लंबाई करीब 5 फ़ीट और 3 या 4 इंच होगी। माथे और हाथ देख कर पता लग रहा था कि अंदाजन उम्र करीब 40 के ऊपर होगी, भरा बदन, बड़े गोल दूध, चौड़े चूतड़ और गोरी इतनी कि मानो कोई अंग्रेजन हो।

कंधे पर एक बड़ा बैग लिए वो किसी से बात कर रही थी। थोड़ा आगे बढ़ा तो देखा मेरी दोस्त की पत्नी अपने घर के दरवाजे पर खड़ी थी और उसी से बात कर रही थी।
मैंने भाभी जी से पूछा- क्या भैया घर पर है?
भाभी जी ने कहा- वो तो सुबह 6 बजे ही साइट पर चले गये थे.

मैं भाभी जी की बात सुन कर वापस जाने लगा. तभी भाभी जी ने पीछे से आवाज दी और मुझसे पूछने लगी कि मैं किस रास्त से ऑफिस जाऊंगा तो मैंने उनको अपना रास्ता बता दिया.
फिर भाभी जी ने कहा कि जो औरत सामने गेट पर खड़ी है मैं उसे भी अपने साथ ही लेता चलूं और उसे रास्ते में छोड़ दूं तो मैंने उनकी बात मान ली.

मैंने उसे पीछे बिठा लिया और चलने लगा। कई बार बीच में ठोकर आने की वजह से वो उछल कर मेरे पास ही सरक आई थी. उसका बदन मेरे बदन से सट गया था. जब उसकी चूचियां मेरी पीठ पर स्पर्श होने लगीं तो फिर मेरे अंदर भी हलचल सी मचने लगी.

करीब 7 महीने के बाद किसी औरत के बदन की गर्मी मैंने महसूस की थी। थोड़ी दूर जाते ही उसने मुझसे पूछा कि उसने उस बिल्डिंग में पहले कभी नहीं देखा मुझे तो मैंने अपनी कहानी बता दी. वैसे मैंने भी इतने महीने में पहली बार ही उसे देखा था।

बातों ही बातों में पता चला कि वो एक स्कूल में टीचर है और उसका नाम रागिनी शर्मा है. फिर मैंने भी अपना परिचय दे दिया। इससे ज्यादा उससे कोई बात नहीं हुई और फिर उसका स्कूल आ गया और वो उतर कर जाने लगी.

जब वो उतर कर चलने लगी तो उसने अपने चेहरे के ऊपर से वो साफा हटाया. मैंने उसका चेहरा सामने से तो नहीं देखा लेकिन साइड से देख सकने में कामयाब हो गया. वैसे मैं भी कोई हैंडसम इन्सान नहीं हूं. देखने में आम ही व्यक्ति हूं. मेरा रंग भी सांवला है और मेरी लम्बाई भी पांच फीट और सात इंच है. इस वजह से मैं भी अपनी औकात में ही रहता था. मगर अपनी किस्मत और व्यवहार के कारण कुछ लड़कियों के साथ सेक्स करने में कामयाब हो चुका था.

तो कहानी पर वापस आते हैं. उस दिन फिर शाम को जब मैं अपने कमरे पर वापस जा रहा था. मेरा कमरा दूसरे माले पर आखिर में था. मेरे रूम से पहले चार और कमरे थे. जब मैं वहां से गुजर रहा था तो मैंने देखा कि एक औरत अपने कमरे के बाहर झाड़ू लगा रही थी. वो भीतर जाने ही वाली थी कि मेरी नजर उस पर पड़ गई. मुझे देख कर वो हल्के से मुस्करा दी. मैंने ध्यान दिया तो ये वही औरत थी जिसको मैं सुबह अपनी बाइक पर लेकर गया था. बदले में मैं भी मुस्करा दिया.

यह औरत चेहरे से ज्यादा सुंदर तो नहीं थी लेकिन उसके चेहरे पर एक सादगी थी. चेहरे की बनावट भी जंच रही थी. अगर उत्तेजक शब्दों में कहा जाये तो मेरे हिसाब से उसका चेहरा सेक्सी था. उसने एक ढीली सी नाइटी पहन रखी थी. जिसमें वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी.

मैंने अपना ध्यान हटाने की कोशिश की और अपने कमरे में जाने लगा तो उसने मुझे आवाज दी.
मैं मुड़ा तो उसने मुझे चाय पीने के लिए टोका.
मैंने मना कर दिया लेकिन फिर वो रिक्वेस्ट करने लगी. मैं भी उसके कहने पर उसके घर चला गया.

अंदर जाकर देखा तो कुछ खास सामान नहीं था. जो भी था सब कुछ पुराना सी ही लग रहा था. उसका एक बेटा नीचे चटाई पर बैठ कर पढ़ाई कर रहा था. वहीं बगल में प्लास्टिक की कुर्सी व टेबल थी. मैं जाकर वहां पर बैठ गया. मैं लड़के से हाय हैल्लो करने लगा और रागिनी जी मेरे लिए किचन में चाय लेने के लिए चली गई

जब वो वापस आई तो उसके साथ में एक लड़की भी थी.
उन बच्चों के चेहरे से ही पता लग रहा था कि ये इसी के बच्चे हैं. चाय पीने के साथ ही बातें भी शुरू हो गईं. बात करने पर पता चला कि उनके पति का स्वर्गवास हो चुका था. इस घटना को लगभग नौ साल बीत चुके थे. वो लोग पास के ही शहर हरदा के रहने वाले थे. पति के जाने के बाद रागिनी ससुराल वालों से तंग आकर यहां पर रहने लगी थी मनाली में.

वो स्कूल में टीचर के पद पर काम करते हुए अपने बच्चों को खुद ही पाल रही थी. उसकी दर्द भरी कहानी सुन कर मेरे मन के अंदर से सेक्स जैसी घटिया बातें एकदम से जैसे कहीं उड़न छू हो गईं.

कुछ देर बातें होने पर मैंने भी उनको अपने बारे में बता दिया कि मैं भी शादीशुदा हूं. चाय खत्म होते ही मैंने वहां से जाने का फैसला कर लिया.

वहां आने के बाद मेरे मन में उसके लिए सेक्स जैसा कोई विचार नहीं आ रहा था. मैं अपने काम में व्यस्त रहने लगा. दो हफ्ते बीत गये.

फिर एक दिन उसको लिफ्ट देने का संयोग हुआ. फिर उस दिन भी शाम को उसने पहले की तरह मुझे अपने घर पर बुला कर चाय पिलाई. अब हमारी दोस्ती सी होने लगी थी. मगर उसकी सादगी देख कर मेरे मन में अभी सेक्स के विचार नहीं आ रहे थे. वैसे जहां तक मुझे लगता है कि उसकी सादगी को देख कर शायद ही किसी के मन में उसके साथ सेक्स करने का विचार आता होगा.

वो मुझसे वैसे ही उम्र में बड़ी थी और मैं तो था भी शादीशुदा। इसी तरह थोड़ी बातचीत होती रही. अब मेरे पास उसका व्हाट्स ऐप नम्बर भी आ गया था. पहले एक महीने तो सुबह सवेरे गुड मॉर्निंग या रात को गुड नाइट जैसे मैसेज ही होते थे. फिर दिन में एकाध बार एक-दूसरे का हाल भी पूछने लगे. एक दिन ऐसे उसने मुझे एक डबल मीनिंग मैसेज किया. मैंने भी बदले में वैसा ही मैसेज किया कि शायद उसके मन में कुछ चल रहा होगा.

उधर से कोई जवाब नहीं आया तो मैं डर गया और फिर कोई मेसेज उसे नहीं किया मैंने। दिन भर बेचैनी रही कि आखिर क्या सोचती होगी वो मेरे बारे में। उस रात मैं देरी से घर लौटा था और सुबह जल्दी निकल गया।

बस में वाट्सएप्प खोला तो उसका जवाब केवल हँसी में था। मुझे बड़ी राहत मिली कि उसे बुरा नहीं लगा। पर मेरे मन में एक बात आ गयी कि वो मेरे बारे में क्या सोचती है कम से कम मैं ये तो पता करूं। मैं अब फूंक-फूंक कर कदम रखने लगा, मैं किसी भी हाल में ये पता लगाना चाहता था क्योंकि इसमें मेरा खुद का फायदा था।

दिमाग में ये बात तो थी कि इतने साल से अकेली रह रही है. इसने किसी न किसी के साथ तो सेक्स किया ही होगा. अब मुझे बस यही पता लगाना था कि उसके मन में मेरे लिए भी कुछ चल रहा है क्या. अगर वो ऐसा सोच रही है तो फिर उसने और किसके साथ सेक्स किया होगा. यही सोच कर मैं बात की गहराई तक पहुंचने की कोशिश कर रहा था. अब ये बात तो वही जानती थी. बस मुझे कुछ ऐसा करना था जिससे उसके दिल की बात मुझे पता चल जाये।

इसी बात को लेकर हम करीब एक महीने ऐसे ही दोस्ती और हँसी मजाक के साथ चलते गए। मैंने धीरे-धीरे अपनी पत्नी के साथ सेक्स की बातें उसको बतानी शुरू कर दी और जैसे कि वो मुझसे बड़ी थी तो मैं उससे बीच-बीच में सुझाव भी लेने लगा। लगभग हम बहुत खुल गए थे लेकिन आमने सामने कभी बात नहीं होती थी. केवल फ़ोन या वाट्सएप्प पर ही बात होती थी।

मैं उससे ज्यादा सेक्स की बात भी नहीं करता था ताकि वो मुझे गलत न समझे। फिर एक रात फ़ोन पर बहुत देर बात हुई और फिर सेक्स के बारे में बातें होने लगीं तो उस दिन मैंने उससे पूछ लिया कि पति के जाने के बाद उसने कभी सेक्स किया या नहीं।

उसने मुझे साफ-साफ कह दिया कि उसने न कभी किया और न ही कभी इस तरह से सोचा. केवल अपने बच्चों की चिंता में रही वो पूरे जीवन भर।
मैंने सोचा कि ज्यादा हाथ-पांव मारने से कोई फायदा नहीं। ये औरत उस तरह की नहीं है। फिर मैंने कोशिश ही करनी बंद कर दी।

वो पंद्रह अगस्त का दिन था और मैं छुट्टी वाले दिन आराम से सो रहा था. मैं उस दिन 11 बजे तक सोया रहा. फिर मेरे फोन की रिंग बजी तो देखा कि उसी का कॉल था. पहले तो वो दिन में इस तरह से कॉल नहीं करती थी. फोन उठाने पर उसने पूछा कि अगर आप घर पर ही हो तो आ जाओ, साथ में बैठ कर चाय पीते हैं.

मैंने उससे कह दिया कि मैं सुबह-सुबह चाय नहीं पीता हूं. मैं तो दूध पीता हूं.
पता नहीं उसने क्या समझा और बोली- सुबह-सुबह क्या शरारत सूझी है तुम्हें?
मैंने उससे बोला– हां मैं सुबह-सुबह दूध पीता हूं.

वो बोली- तो ठीक है फिर, आ जाओ दूध पी लो.
यह सुन कर मेरे अंदर का शैतान जाग गया. पहले तो उसकी शरारत वाली बात और फिर उसका दूध पीने के लिए बुलाना. मैं जल्दी से फ्रेश होकर उसके घर पहुंच गया. दरवाजा खुला ही हुआ था. मैंने जाकर उनको आवाज दी.
किचन से आवाज आई- अंदर आ जाओ. दरवाजा बंद करते आना.

मैं आकर कुर्सी पर बैठ गया. अंदर जब वो निकल कर आई तो मेरी आंखें फटी रह गईं. मैं तो सोच में पड़ गया कि ये वही सीधी सादी औरत है या उसकी कोई हमशक्ल? उसको ऐसे रूप में देखने के बारे में मैंने कभी सोचा भी नहीं था.

कमसिन औरत की चुदाई का द्वार खुला

उसने सफेद पजामा पहना था. ऐडी से लेकर चूतड़ों तक पूरा चिपका हुआ था. हल्के गुलाबी रंग का टॉप था जिसकी बाजू भी नहीं थी. गला भी गहराई तक था. उसकी करीब आधा इंच तक चूचियां दिखाई दे रही थीं. गौर से देखने पर उसकी ब्रा का पता लग रहा था. उसका गोरा बदन अलग ही रंग में नहाया हुआ लग रहा था आज. आज वो हद से ज्यादा ही सेक्सी दिख रही थी और मेरे मन को ललचा रही थी।

मैं उसे एक टक देखता ही रहा तो उसने बोला- क्या हुआ? लो तुम्हारा दूध तैयार है.
मैंने अटकती जबान से कहा- आज तो आप अलग ही लग रही हो.
वो बोली- हां आज बच्चे घूमने के लिए गये हुए हैं. आज मैंने आलस की वजह से रात के कपड़े अभी तक नहीं निकाले हैं.

मैंने खुद पर कंट्रोल रखते हुए कहा- कोई बात नहीं. इस ड्रेस में तो आप कमाल लग रही हो. कमाल क्या सेक्सी कहूं तो ज्यादा सही लग रहा है.
उसे इस बात का जरा भी बुरा नहीं लगा, वो बोली- इस उम्र में सेक्सी?

ये बोल कर वो हंसने लगी. उसकी हंसी देख कर मैं समझ गया कि मेरा रास्ता कुछ हद तक साफ है. मुझे अंदाजा हो गया कि शायद इसी लिए इसने मुझे ऐसे वक्त पर बुलाया है जब बच्चे भी घर पर नहीं हैं. उसके तेवर आज मुझे बदले-बदले से लग रहे थे. मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि ये वही रागिनी है या कोई और।

उसने ट्रे को टेबल पर रख दिया जिसमें एक गिलास में दूध था और एक कप में चाय थी. वो मेरी बगल में कुर्सी पर बैठ गयी.

मैं धीरे-धीरे दूध पीने लगा और वो चाय पीने लगी. चाय पीते हुए वो मुझसे बातें करने लगी. मेरी नजर बार-बार उसकी मोटी जांघों पर जा रही थी. खासकर उस जगह पर जहां से स्वर्ग के आनंद का रास्ता खुला हुआ था.

मेरे मन में हवस की आग जल उठी थी. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं और क्या नहीं क्योंकि उसकी तरफ से मुझे कोई इशारा भी नहीं मिल रहा था. बस आज उसका अंदाज बदल गया था.

जब वो कप रखने के लिए नीचे झुकी तो उसके चिकने और बड़े चूचों की गहराई देख कर मैं अपना आपा खो बैठा. मैंने झट से गिलास टेबल पर रखा और उसकी जांघ पर हाथ रख दिया.
वो मेरी इस हरकत पर सकपका गई.

उसका ये चेहरा देख कर मैं भी डर सा गया और मैंने हाथ वापस खींच लिया. फिर वो चेहरा नीचे करके उठ गई और कप व गिलास लेकर किचन में चली गई. मैं भी घबरा गया कि हवस के जोश में ये क्या कर बैठा मैं. उसको बिना कुछ कहे ही मैं उठ कर जाने लगा. तभी उसने पीछे से आवाज दी- जा रहे हो क्या?

मैंने बिना उसकी तरफ मुड़े ही दरवाजा खोला और बाहर निकल गया. उसके घर से आने के बाद मैं अपने रूम पर आ गया था. मैं अपनी हरकत पर शर्मिंदा हो रहा था. इसलिए ध्यान को बंटाने के लिए मैं यहां-वहां की बातों में अपने मन को लगाने लगा.

दोपहर के एक बजे का समय हो चला था और मैं नहा कर बाथरूम से निकल आया था. मैंने अपनी कमर पर तौलिया लपेटा हुआ था. मैंने सोचा कि कपड़े पहन कर बाहर खाने के लिए जाऊंगा.

लेकिन तभी दरवाजे की बेल बजी. मैंने सोचा कि मेरे रूम पर कौन आ सकता है क्योंकि मेरी तो किसी से ज्यादा बोलचाल भी नहीं है इस बिल्डिंग में. मैंने दरवाजा खोला तो सामने रागिनी जी खड़ी हुई थी. उन्होंने पूछा- आपने खाना खा लिया क्या?
मैंने कहा- नहीं, बस अब खाने के लिए जा ही रहा था.

मैंने उसकी तरफ देखा तो वह कपड़े बदल चुकी थी. उसने वो रात वाले कपड़े नहीं पहने हुए थे. चूंकि मेरे रूम तक तो उसको चल कर ही आना था तो सोचा होगा कि शायद कोई देख लेखा इस वजह से उसने दूसरे कपड़े पहन लिये थे.

फिर रागिनी जी ने कहा कि मैंने भी आज खाना नहीं बनाया है. बच्चे तो घर पर हैं नहीं इसलिए मेरा मन भी नहीं किया खाना बनाने के लिए. क्या आप मेरे लिए भी पार्सल करवा कर ले आएंगे?
मैंने कहा- ठीक है, मैं ले आऊंगा.
फिर वो जाने लगी और कुछ कदम चलने के बाद बोली- यदि आपको सही लगे तो मैं आपके साथ ही चलूं क्या?
मैंने कहा- आपकी मर्जी है.

उसने मेरे साथ ही चलने का फैसला कर लिया. शायद वो मेरे द्वारा की गई हरकत को भूल चुकी थी या फिर वो जान बूझ कर नॉर्मल व्यवहार कर रही थी ताकि मैं भी नॉर्मल हो जाऊं.

वो साड़ी पहन कर पहले वाली रागिनी बन कर दस मिनट में मेरे यहां पर आ गई और हम खाने के लिए चले गये. हम आधे घंटे में ही खाना खाकर आ गये. अब तक शायद हम दोनों ही भूल चुके थे कि सुबह क्या हुआ था.
मैं अपने रूम में जाने लगा तो उसने कहा कि आपका कमरा कभी देखा नहीं है. आप मुझे अपने घर नहीं बुलाओगे?
मैंने कहा- इसमें पूछने की क्या बात है, आप जब चाहें आ सकती हैं.

विधवा को चढ़ी चुदने की हवस

वो मेरे रूम में मेरे साथ ही आ गयी. मैंने उसके अंदर आने के बाद कमरा बंद कर दिया. मेरे कमरे में ज्यादा सामान नहीं था. बस एक टीवी और एक बेड ही था. वो यहां-वहां मेरे कमरे की दीवारों पर देखने लगी और फिर बेड पर बैठ गई.

हम दोनों बातें करने लगे और फिर बातों ही बातों में हंसी मजाक भी होने लगा और उसको पता नहीं क्या शरारत सूझी कि उसने मेरे पेट में एकदम से गुदगुदी कर दी. मैंने भी बदला लेने के लिए उसके साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी और उसको कब बेड पर गिरा दिया मुझे पता नहीं चला. मैं उसके ऊपर आ गया था और वो मेरे नीचे लेटी हुई थी.

मेरे ऊपर आने के बाद वो शरमाने लगी और मुझसे नजरें बचाती हुई नजरें झुकाने लगी. वो मुझे अपने ऊपर से हटाने के लिए एक तरफ धकेलने की कोशिश कर रही थी लेकिन मैं उससे हिल भी नहीं पा रहा था.

मेरे अंदर की हवस जाग गई और मैंने उसको जोर से किस कर दिया. लेकिन वो अपना मुंह इधर-उधर झटक दे रही थी और मेरे होंठ उसके होंठों से मिल नहीं पा रहे थे. फिर मैंने एक हाथ से उसके गालों को पकड़ लिया और उसके होंठों से अपने होंठ चिपका दिये.

मैं उसके होंठों को चूसने की कोशिश कर रहा था लेकिन वो अपने होंठों को आपस में चिपका कर भींच कर रखे हुए थी. उसने अभी तक अपना मुंह नहीं खोला था. वो बार-बार मुझे अपने ऊपर से हटाने की कोशिश कर रही थी. मेरा लन्ड मेरी पैन्ट में तन गया था और उसकी साड़ी के ऊपर उसकी जांघों के बीच में टकरा रहा था.

मेरे अंडरवियर के अंदर मेरा तना हुआ लौड़ा एकदम बेचैन हो उठा था और बार-बार झटके देने लगा था जिसके कारण मैं भी उसको चूमने और चूसने की पुरजोर कोशिशें करने लगा. मेरे अन्दर का जोश हर पल बढ़ता ही जा रहा था.

वो जितना विरोध कर रही थी मेरा लन्ड उसकी चूत को चोदने के लिए उतना ही बेचैन होता जा रहा था. मैंने सोच लिया था कि चाहे जो भी हो जाये, आज तो इसको चोद ही दूंगा. इसी प्रयास में मैंने रागिनी की साड़ी को उठा कर ऊपर उसके पेट पर पहुंचा दिया और उसकी जांघों को नंगी कर दिया.

उसकी गोरी जांघों को देख कर मेरे अंदर की वासना और भड़क गई. मैंने उसकी जांघों को अपने हाथों से सहलाना शुरू कर दिया. बहुत नर्म और कोमल जांघें थीं उसकी. मैंने उसकी जांघों को अलग करने की कोशिश की क्योंकि उसने साड़ी हटाने के बाद अपनी जांघों को आपस में चिपका लिया था.

वो मुझे अपने ऊपर से हटाने की कोशिशों में अब भी लगी हुई थी. लेकिन मैं उसकी शर्म खोलने की पूरी कोशिश कर रहा था. एक बार उसको गर्म कर देना चाहता था ताकि वो खुद ही अपनी चूत मेरे उतावले लन्ड के सामने परोस दे.

जब उसने जांघें नहीं खोलीं तो मैं उसकी पैंटी को खोलने लगा तो कहने लगी- नहीं राजेश, ये सब गलत है.
लेकिन मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा था. मैं उसकी असलियत जान चुका था. वो देखने में तो सीधी-सादी दिखती थी लेकिन उसके पहनावे से पता लग रहा था कि उसको भी कुछ चाहिये है. आज सुबह ही मैंने उसको मॉडर्न ड्रेस में देखा था और अब जब मेरी आंखों के सामने उसकी पैंटी थी तो मुझे बिल्कुल यकीन हो गया था कि जितनी सीधी ये दिख रही है उतनी असल में है नहीं. इसलिए मैं जल्दी से उसको नंगी कर देना चाह रहा था ताकि उसके मखमली जिस्म को भोग सकूं.

जब उसकी जालीदार पतली पैंटी नहीं खुली तो मैंने उसको खींच कर फाड़ ही दिया. उसकी चूत मेरे सामने नंगी हो गई थी. उसकी चूत बहुत ही कमाल की थी. उस पर हल्की सी झांटें थीं जिनको देख कर लग रहा था कि उसने अपने बाल कुछ दिन पहले ही बनाये होंगे. चूत के किनारे बहुत ही सुंदर थे. चूत की दरार भी हल्के भूरे रंग की थी. चूत के आस-पास चारों तरफ दूध जैसी सफेद चमड़ी थी.

किसी तरह मैंने उसकी जाँघे फैला दीं और उसके बीच में आ गया। वो बार बार मुझे कुछ भी करने से रोक रही थी, इस वजह से मैं अपनी पैंट भी नहीं खोल पा रहा था। कभी-कभी उसके चेहरे पर गुस्सा दिखता था और कभी शर्म। वो अपने सिर को यहां-वहां झटक रही थी और मेरे सिर के बालों को पकड़ कर खींच देती थी.

लेकिन मैं रुकने वाला नहीं था। मैंने अब दिमाग से काम लेने की सोची और अपने आप को संभाला।
मैं एकदम नॉर्मल हो गया और उसके ऊपर लेट गया और प्यार से उसके होंठों को चूम कर बोला- आइ लव यू …

मेरे मुंह से ये तीन जादुई शब्द सुन कर वो एकदम से शांत हो गई. मुझे भी अंदर से लगा कि अब मैंने एक समझदार मर्द की तरह काम लिया है.
वो लंबी-लंबी सांसें लेती हुए फिर बोली– ये ठीक नहीं है, मेरे दो बच्चे हैं और तुम पहले से शादीशुदा हो।

मेरे मुंह से कोई जवाब नहीं निकला, बस मैं उसे देखता ही रहा। कुछ देर ऐसे ही हम बिना कुछ बोले एक दूसरे को देखते रहे। अगले ही पल जब मैं उठने को हुआ तो उसने ऐसे पकड़ा मुझे जैसे मुझे रोकना चाह रही हो।

लेकिन मैं उठने की कोशिश करने लगा क्योंकि मुझे मेरी गलती का अहसास हो गया था. मुझे उसके साथ इस तरह से जोर आजमाइश नहीं करनी चाहिये थी. इस लिए मैं अब शान्त होने की कोशिश कर रहा था और अपने किये पर पछता रहा था कि मैंने ये क्या बेवकूफी कर दी कि एक औरत को पढ़ नहीं पाया.

इससे पहले भी मैंने कई लड़कियों के साथ सेक्स किया था लेकिन वो एक शादीशुदा औरत थी जिसका पति नहीं था और मुझे उसके साथ अपनी हवस के वश होकर इस तरह जबरदस्ती नहीं करनी चाहिए थी. औरत कभी भी खुल कर नहीं कह पाती है कि वो क्या चाहती है.

मैं उठने लगा तो एक बार उसने मुझे रोका. मैंने दोबारा से उसके होंठों को चूसने की कोशिश की लेकिन उसकी शर्म नहीं खुल पा रही थी. शायद चाहती तो वह भी थी कि मैं उसके साथ ये सब करूं लेकिन वो सारा का सारा इल्जाम मेरे सिर पर रखना चाह रही थी. मैंने उसको आई लव यू कहा और उसे कई बार चूमने की कोशिश की. अब मैं भी जान चुका था आग तो दोनों तरफ लगी हुई है.

इसलिए मैंने उसको चूमना जारी रखा. वो बार-बार मुझे ना करती रही लेकिन उसकी हर ना मुझे हां छुपी हुई दिखाई दे रही थी. मैं उम्र में उससे छोटा जरूर था लेकिन औरतों के बारे में इतना अनुभव तो मुझे भी हो ही चुका था.

मैं उसके सीने को चूमने लगा. उसकी गर्दन को किस करने लगा. उसकी छाती से मैंने पल्लू हटा दिया. पल्लू हटते ही उसके चिकने गोरे-गोरे उभार दिखने लगे, मेरे तो मुंह में जैसे पानी आ गया और मैं उन्हें ब्लाउज से बाहर निकालने को बेताब हो गया।

मैंने किसी तरह अपनी पैंट खोली और जांघिये को सरका कर लन्ड बाहर निकाला। वो बोल तो कुछ नहीं रही थी अब, लेकिन अपने हाथ पांव से मुझे रोकने की कोशिश कर रही थी। मैंने भी पूरा जोर लगा कर उसके दोनों हाथों को उसके सिर के पास ऊपर बिस्तर पर रखा और एक ही हाथ से उसे दबाए रखा। फिर अपना लन्ड दूसरे हाथ से पकड़ कर उसकी चूत ढूंढने लगा.

सूखी चूत की जबरदस्त चुदाई

मैं तो पहले से ही उसकी जांघों के बीच में था। किसी तरह मुझे उसकी चूत का रास्ता मिल ही गया। उसकी चूत के पास मुझे एकदम गर्म गर्म महसूस हुआ और मैंने झट से अपना लन्ड उसकी चूत में घुसाने की कोशिश शुरू कर दी।

उसकी चूत सूखी थी तो जैसे ही मेरा सुपारा घुसा तो वो तिलमिला उठी और कराहती हुई अपने हाथ छुड़ा कर मेरे सिर के बालों को पकड़ कर ऐसे खींचने लगी कि जैसे मुझे मार ही डालेगी. मैं भी जोश में था तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। मैं पूरी ताकत से लन्ड को अंदर घुसाने की कोशिश कर रहा था मगर मेरा सुपारा ही घुस पाया था और उससे आगे लन्ड नहीं घुस पा रहा था.

मेरे लन्ड में दर्द होने लगा था और ज्यादा जोर लगाने से ऐसा लग रहा था जैसे मेरे लन्ड की पूरी खाल छिल कर अलग हो जाएगी। मैं समझ सकता था कि उसे भी ऐसा ही खिंचाव चूत में लग रहा होगा. लेकिन वो खुल कर मुझे कुछ करने भी तो नहीं दे रही थी. लन्ड वहीं पर अटका हुआ था.

फिर मुझे एक तरकीब सूझी. मैंने उसके पेट पर गुदगुदी कर दी और जैसे ही वो उचकी उसकी जांघें खुल गईं और मेरा लन्ड एकदम से अंदर चला गया. वो कराह उठी लेकिन मैंने उसी वक्त अपने होंठ उसके होंठों पर सटा दिये.
विधवा औरत के जिस्म की हवस (Vidhwa Aurat Ke Jism Ki Hawas)

विधवा औरत के जिस्म की हवस (Vidhwa Aurat Ke Jism Ki Hawas)

लन्ड चूत में उतर गया था और मैं तो जैसे स्वर्ग की सैर करने लगा था. लन्ड जब चूत में चला गया तो उसका हल्का फुल्का विरोध भी ढीला पड़ गया और उसने अपने बदन को ढीला छोड़ दिया. मैंने उसके होंठों को जोर से चूसना शुरू कर दिया.
फिर वो बोली- दर्द हो रहा है.
मैंने सोचा कि अब ये तैयार हो गई है और अब कोई परेशानी नहीं होगी. मैंने सोचा कि लन्ड को बाहर निकाल कर थोड़ा थूक लगा लेता हूं.

जैसे ही मैंने लन्ड बाहर निकाला तो उसने मेरा लन्ड पकड़ लिया.
मैंने अपने हाथ पर थूक लिया और उसकी चूत पर ही उस थूक को मलने लगा. उसकी सिसकारी निकल गई. मैंने तेजी से उसकी चूत के मुंह पर अपना हाथ चलाना जारी रखा और बार-बार थूक लेकर उसकी चूत पर रगड़ता रहा. उसने अभी भी मेरे लन्ड को अपने हाथ में पकड़ा हुआ था.

फिर मैंने मौका देख कर रागिनी की चूत पर लन्ड रखा और एक धक्का दे दिया. आधे से अधिक लन्ड घुस गया था मेरा और उसकी चूत अंदर से गीली महसूस हुई मुझे. मुझे समझ आ गया कि काफी देर से मन तो इसका भी कर रहा था लेकिन बस ये शुरूआत मेरी तरफ से चाह रही थी. लन्ड को घुसा कर मैं पूरी तरह से उसके ऊपर लेट गया.

उसने अपने हाथ छोड़ दिये. मैंने एक और झटका मारा तो उसकी आह्ह निकल गई. मैंने लन्ड को चूत में चला कर देखा तो पूरा लन्ड उसकी चूत के रस से गीला हो चुका था. अब रास्ता बिल्कुल साफ था और उसकी मोटी मोटी चिकनी मुलायम जांघों को सहलाते हुए मैंने धक्के मारना शुरू कर दिया।

मुझे नहीं पता वो दर्द से कराह रही थी या मजे से, किंतु मैं अपनी मस्ती में उसको चोद रहा था.

ऐसी चूत मुझे पहली बार मिली थी. लग रहा था कि जैसे किसी ने मेरे लन्ड को अपनी मुट्ठी में पकड़ रखा हो. शायद पति के जाने के बाद उसने किसी का लन्ड नहीं लिया था. इसलिए उसकी चूत इतनी टाइट हो गई थी. मैं उसकी चूत को मस्ती से चोदता रहा और पांच मिनट के बाद उसने खुद ही अपनी टांगों को उठा कर मेरे कंधे पर रख दिया.

मैं धक्के मारता हुआ कभी उसके होंठ चूसता तो कभी वो चूसती, कभी जुबान से जुबान लड़ाते तो कभी जुबान चूसते एक दूसरे की। बहुत मजा आ रहा था और अब तो उसकी चूत से चिपचिपा पानी रिस-रिस कर चूत के आस पास फैल गया था और पच-पच की आवाज निकलने लगी थी।

इतनी मस्त और कसी हुई चूत थी रागिनी की कि अब तक तो मुझे झड़ जाना चाहिए था मगर पता नहीं क्यों मैं आज झड़ नहीं रह था। उसने अब पूरा साथ देना शुरू कर दिया था. इसलिए उसे चोदते हुए मैंने उसकी चूचियों को ब्लाउज के ऊपर से ही दबाना शुरू कर दिया। थोड़ी देर में मैंने उसके ब्लाउज का हुक खोल दिया और और ब्रा को ऊपर सरका दिया।

सच में आज ऐसा लग रहा था कि मानो कोई जन्नत की परी मिल गयी, एकदम गोरे चिकने और गोल-गोल बड़े-बड़े दूध थे उसके और निप्पल एकदम गुलाबी. मुझसे तो रहा नहीं गया और बड़े ही प्यार से मैं बारी-बारी दोनों ही निप्पलों को चूसने लगा.

पंद्रह मिनट तक ऐसे ही मैं उसे धक्के मार-मार कर चोदता रहा. उसकी सिसकारियां बढ़ती गईं. फिर मैं थक गया लेकिन उसको छोड़ने के मूड में अभी भी नहीं था.
वो भी कहने लगी थी- बस अब रुक जाओ.

लेकिन मेरा वीर्य अब शायद उबल चुका था और किसी भी समय बाहर निकल कर उसकी चूत में भरने वाला था.
इसलिए मैं और तेजी के साथ धक्के मारने लगा और एकाएक मेरे आंडों से मुझे महसूस हुआ कि मेरा वीर्य निकलने के कगार पर है. मैंने कस कर उसको पेल दिया और एकाएक मेरे लन्ड से वीर्य की पिचकारी छूटने लगी.

पूरे बदन में झनझनाहट सी भर गई. चार या पांच पिचकारियों में मैंने अपने वीर्य की थैली उसकी चूत में खाली कर दी. उसकी चूत मेरे वीर्य से लबालब भर गई और मैं काफी हल्का महसूस करने लगा. मेरा बदन ढीला पड़ने लगा और मैं उसके ऊपर ही गिर गया. मैंने अपनी आंखें बंद कर लीं और राहत की सांस लेने लगा. ऐसी औरत मुझे कभी नहीं मिली थी.

जब कुछ देर उसके ऊपर ही पड़े हुए मुझे हो गई तो उसने धक्का देकर मुझे अपने ऊपर से हटाया और एक किनारे कर दिया.

मैं ऐसे ही आंखें बंद करके लेटा रहा. जब मेरी आंख खुली तो वो उठ कर जा चुकी थी. नीचे जमीन पर उसकी फटी हुई पैंटी पड़ी थी. मैंने पैंटी को उठा कर देखा तो वो गीली थी. मुझे इस बात का अंदाजा लगाते देर नहीं लगी कि मेरे वीर्य ने जो उसकी चूत को भर दिया था तो फिर वीर्य उसकी चूत से बाहर आ रहा होगा और जरूर उसने अपनी चूत को इसी पैंटी से साफ किया होगा.

मगर उसके जाने के बाद मुझे बेचैनी सी होने लगी. मैं सोच रहा था कि आखिर वो मुझे इस तरह से बिना कुछ कहे क्यों चली गयी. मेरे ख्याल से तो मैंने उसके साथ कोई जबरदस्ती नहीं की थी. सेक्स की ये घटना जो आज हुई थी उसमें उसकी भी सहमति थी.

लेकिन फिर उसने ऐसा क्यों किया. कहीं कुछ कोई कमी तो नहीं रह गई मुझमें? वो तो पूरी तरह से मेरा साथ दे रही थी.
मगर शायद वो झड़ नहीं पाई थी. मैंने तो अपना वीर्य निकाल लिया लेकिन उसके बारे में तो मुझे ख्याल ही नहीं आया. मैं बेड पर पड़ा हुआ यही सब सोच रहा था. बार-बार उसकी सांवली चूत और उसके गुलाबी निप्पल मेरे ख्यालों में आ रहे थे. लग रहा था कि जैसे कुछ रह गया है. मैं उसके नंगे बदन के बारे में सोचने लगा. मैं उसको पूरी नंगी करना चाह रहा था अब.

मैं उठा और अपने कमरे से बाहर निकल कर उसके कमरे की तरफ चलने लगा. दोपहर के तीन बजे थे और मैं जानता था कि उसके बच्चे आज शाम तक ही वापस आयेंगे. मेरे लन्ड में उसके मखमली बदन को सोच कर फिर से करंट सा दौड़ने लगा था. अब उसके पास जाते हुए मुझे कोई डर या भय नहीं लग रहा था.

उसके कमरे के पास जाकर मैंने दरवाजा खटखटाया और उसने जल्दी ही दरवाजा खोल दिया. मैंने देखा कि वो अभी अभी नहा कर निकली है. उसने एक मैक्सी पहनी हुई थी. वो मुझे कुछ हैरानी से देख रही थी.

मैंने कदमों को आगे बढ़ाया तो वो पीछे हट गयी. मैं भीतर चला गया और उसने दरवाजा बंद कर दिया. इससे पहले की वो मुझसे कुछ कहती मैंने उसको अपनी तरफ खींचा और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिये.

उसने मेरा जरा सा भी विरोध नहीं किया. हम दोनों वहीं पर खड़े हुए एक दूसरे से लिपटने लगे. वो मुझे चूसने लगी और मैं उसको चूसने लगा. उसके बदन से ताज़ा खुशबू आ रही थी.

मैं अब पहले से ज्यादा कामुक होकर उसको चूसने में लग गया था. मैंने उसकी गर्दन को चूसा, उसकी गाँड़ को अपने हाथ से दबाया और फिर उसकी कमर के पास नीचे बैठ कर उसकी मैक्सी को उठा दिया. उसकी गीली सी चूत पर मैंने किस किया तो उसने मेरे सिर को पकड़ कर अपनी जांघों के बीच में दबा लिया. मैंने उसकी चूत को चाट लिया. वो मेरे बालों को सहलाने लगी.

मैं उसको चूसते हुए पीछे बेड की तरफ ले गया और उसे नीचे गिरा लिया. मैंने उसकी मैक्सी को ऊपर कर दिया और जैसा मैंने सोचा था कि वो उसने नीचे से कुछ भी नहीं पहना होगा तो वो बिल्कुल ही नंगी थी.

मैंने उसकी मैक्सी को एक तरफ निकाल कर उसे नंगी कर दिया. उसका गोरा बदन चमक उठा और वो एक परी की तरह दिख रही थी. मैंने उसको देखता रहा तो वो बोली- ऐसे क्या देख रहे हो?
मैंने कहा- मैंने आज से पहले ऐसा तराशा हुआ खूबसूरत बदन कभी नहीं देखा.
वो मेरी बात पर अंदर ही अंदर खुश होकर फूली नहीं समा रही थी. बिस्तर पर जिस अंदाज से वो बिना कपड़ों के लेटी हुई थी उसको देख कर ऐसा लग रहा कि मेरे सामने काम की देवी लेटी हुई है.
उसने मुझे कहा– कितना देखते रहोगे मुझे?
मैंने जवाब दिया– आप मुझे रोको मत, जी भर कर देख लेने दो. बस आप खड़ी हो जाओ।

मेरे कहने के मुताबिक वो बिस्तर पर खड़ी हो गयी और जैसा मैं कह रहा था वैसा ही वो घूम-घूम कर अपना हर अंग मुझे दिखाने लगी.

रागिनी जी बहुत ही ज्यादा गोरी थी, बदन भरा भरा था मगर मोटी नहीं कह सकते थे उसको, पेट भी समतल था. केवल थोड़ी चर्बी थी नाभि से लेकर चूत तक जिसकी वजह से चूत भी बहुत सुंदर और फूली हुई लग रही थी। खुले बाल कमर तक, गोल सुडौल चूचियां करीब 40 डी के साइज की थी, उस पर 2 इंच का गुलाबी घेरा और हल्के भूरे रंग में लंबी निप्पल, कमर न तो ज्यादा पतली न मोटी, चूतड़ बड़े-बड़े और गोल, चूत एकदम पावरोटी की तरह फूली हुई और मुलायम।

उस पर हल्के घने बाल थे। जांघें मोटी मोटी और आपस में यूं चिपकी हुई थी मानो चूत छुपाना चाह रही हों। उसे देख कर मुझे ऐसा लगने लगा कि क्या किस्मत पाई है मैंने आज। आज तो इसे खा ही जाऊंगा। बहुत देर तक निहारने के बाद मैं उसके पास गया और उसे कमर से पकड़ कर अपने पास खींच लिया. उसकी नाभि को चूसने लगा.

मेरे चुम्बन से उसके भीतर ठंडी हो रही काम की आग फिर से भड़क उठी। उसका बदन गर्म होने लगा और वो सिसकारी भरने लगी।

उसकी नाभि को चूमते हुए मैं नीचे बढ़ने लगा और उसकी चूत को चूमने लगा। वो तो जैसे पागल सी होने लगी और मेरे सिर के बालों को नोचते हुए अपनी जाँघें फैलाने लगी। मैंने अपनी जुबान को सीधा उसकी चूत के ऊपर दाने में लगा दिया।
जैसे ही मैंने जीभ से उस दाने को छेड़ा वो बेकाबू होकर बिस्तर पर गिर गयी।

मैं तो पहले ही समझ गया था कि अब ये मेरे वश में है इसलिए कोई जल्दबाजी नहीं की मैंने। उसके गिरते ही इत्मिनान से मैंने उसे सही स्थिति में लिटाया, बिस्तर पर सीधा करके एक तकिया उसकी गाँड़ के नीचे रख दिया और आराम मैं उसकी दोनों जाँघें खोल कर अपना मुंह उसके पास रख, पेट के बल लेट गया. पहले तो उसकी चूत का अच्छे से मुआयना किया।

कितनी मस्त चूत थी उसकी, दोनो पंखुड़ियां आपस में चिपकी हुई और फूली मानो गेहूँ का बड़ा सा दाना हो। मैंने झांटों को हाथ से किनारे किया तो एकदम हल्के भूरे रंग की दरार दिखी और लग ही नहीं रहा था कि कुछ देर पहले मैंने अपना लन्ड इसमें डाला था. जैसे किसी कुँवारी लड़की की चूत होती है ठीक वैसी ही दिख रही थी.

यकीन से कह सकता हूं कि इतने सालों में उसने शायद ही किसी से चुदवाया होगा। मैंने उसकी चूत को एक हाथ से फैलाया. एकदम गुलाबी और गीली थी भीतर से। मैंने एक उंगली डाल कर उसमें अपनी उंगली को अंदर बाहर किया और फिर अपनी जीभ से उसके दाने को सहलाने लगा।

वो एकदम मदहोश होकर मजे से मेरे सिर के बालों को सहलाने व नोंचने लगी. साथ ही उसके मुंह से मादक सिसकारियां निकलनी शुरू हो गयीं।
थोड़ी देर बाद मैंने उसकी चूत में जीभ घुसा-घुसा कर चाटना शुरू किया तो वो पागल हो गयी और मुझे कहने लगी- बस करो प्लीज, बस करो।

किंतु मैंने ठान लिया था कि आज इसको संतुष्ट किये बगैर नही जाऊंगा। इससे पहले जो गलती की थी वो मैं दोहराना नहीं चाहता था और अगर मुझे आगे भी मजा लेना है तो इसे अपने काबू में करना ही होगा।

वो शायद अब झड़ने को थी, तभी पूरी ताकत से उसने मेरे बालों को नोंचते हुए अपनी जांघों से मेरे सिर को दबा लिया. मैं जोर लगा कर उसकी चूत को चाटता रहा. मैंने उस पर कोई रहम नहीं किया जब तक कि उसने मुझे झटक कर अलग न कर दिया।

वो झड़ चुकी थी और हांफ रही थी.

मैंने फ़ौरन उसे वापस पकड़ा और उसके होंठों को चूमते हुए मैंने अपने एक हाथ से अपनी पैंट की जिप खोल कर लन्ड बाहर निकाल लिया और उसके एक हाथ में थमा दिया। उसने मेरा लन्ड मुट्ठी में भर लिया और तेजी से हिलाने लगी। मेरा लन्ड तुरंत खड़ा हो गया.

थोड़ी देर उसके होंठों को चूसने के बाद मैंने उसे इशारा किया कि वह भी मेरा लन्ड चूसे. वो मना करने लगी. मैंने उठ कर जबरदस्ती अपना लन्ड उसके मुंह के पास उसके गालों पर रगड़ना शुरू कर दिया. वो तब भी नहीं मानी तो मैं अपना लन्ड उसके मुंह में घुसाने की कोशिश करने लगा.

वो कहती रही कि उसे ये सब करना नहीं आता. मगर मैं उसके मुंह में लन्ड को देना चाहता था. मैंने कहा- तुम बस एक बार मुंह खोल लो और बाकी का काम मैं खुद कर लूंगा.

उसने काफी कहने के बाद अपना मुंह खोला और मैंने अपना लन्ड उसके मुंह में घुसा दिया.
फिर उसके मुंह में ही लन्ड पेलने लगा। उसका मुंह पूरा थूक से भर गया और लार किनारों से चूने लगी। सच में ही उसे लन्ड चूसना नहीं आता था. मैंने बस अपने तरीके से उसके मुंह को चोद कर छोड़ा और फिर तैयार हो गया।

मैंने सोच लिया था कि अबकी बार लम्बी पारी खेलनी है. उसकी गाँड़ के नीचे तकिया पहले से ही था. मुझे केवल उसकी जाँघें फैला कर बीच में जाने की देरी थी। आराम से मैंने आसन लिया और फिर लन्ड हाथ से पकड़ कर उसकी चूत पर टिका कर हल्का सा धकेलते हुए उसके ऊपर लेट गया.

लन्ड की एक-एक नस और चमड़ी खिंचते हुए पीछे की तरफ जा रही थी. मेरा पूरा सुपारा खुल कर लन्ड भीतर चला गया. उसके चेहरे पर अजीब सी तड़प थी मानो कि वो भी इसी पल के इंतजार में थी.

मैं पूरे यकीन के साथ कह सकता हूं कि रागिनी को मेरे लन्ड से आनन्द मिल रहा था.

पूरा लन्ड घुसने के बाद मेरा चेहरा उसके चेहरे के बिल्कुल पास आ गया. उसने बड़े ही प्यार से मेरे होंठों को चूमा और अपने दोनों हाथों से मुझे पकड़ लिया. उसने अपनी गाँड़ थोड़ी सी उचकाई और फिर अपनी टांगें मेरी जांघों के ऊपर रख कर अपनी चूत को फैलाते हुए अपने आप को उसने मेरे हवाले कर दिया.

मैंने लन्ड को उसकी चूत में दबाते हुए पूछा- कैसा लग रहा है मेरी जान?
वो एक लम्बी सी सांस भरते हुए बोली- बस पूछो मत, ऐसे ही प्यार करते रहो मुझे।

बस मुझे इतना ही तो सुनना था. मैंने अपने होंठ उसके होंठों से चिपकाए और चूमते हुए उसकी चूत में धक्के देने लगा. मेरे धक्के बहुत ही हल्के थे लेकिन फिर भी रागिनी के मुंह से सिसकारी निकल रही थी. मैं भी महसूस कर पा रहा था कि बरसों के बाद उसकी चूत को आज लन्ड का सुख मिल रहा है.

मेरे धक्के धीरे-धीरे बढ़ते गए और हम दोनों के बदन गर्म होने लगे. मेरी छाती से उसकी छाती, मेरे पेट से उसका पेट और मेरी जांघों से उसकी जांघें चिपक गईं और बीच में पसीना आना शुरू हो गया था. उसकी चूत से पानी इस तरह रिस रहा था कि मुझे ये पता भी नहीं लग रहा था कि मेरा लन्ड चूत की चमड़ी में रगड़ खा रहा है या कहीं मक्खन में घुसा जा रहा है.

वो पूरी मस्ती में आ गयी थी. वो भी मुझे चूमने और नोंचने लगी. कभी-कभी अपनी गाँड़ को इस तरह उचकाती थी कि ऐसा लगता था कि मेरे लन्ड को और अंदर तक लेना चाहती हो. उसके बाद कुछ पल तक शान्त हो जाती और फिर से मेरा साथ देने लगती.

बीस मिनट से ज्यादा समय हो गया था उसकी चूत चोदते हुए मुझे। मैं तो अपने रूम में पहले भी झड़ चुका था इसलिए मेरा जोश इतनी जल्दी ठंडा होने वाला नहीं था.

मगर थकान तो महसूस होने लगी थी. लगातार धक्के मारने की वजह से मेरी कमर में अकड़न सी महसूस होने लगी थी.
मैंने उसे बोला- चलो, अब तुम ऊपर आ जाओ!

उसने जरा सा भी नखरा नहीं दिखाया और फ़ौरन मेरे उठने के बाद वो भी उठ बैठी। मेरा लन्ड एकदम टनटना रहा था और चिपचिपे झाग की तरह हो चुके पानी में डूबा हुआ था। रागिनी ने अपनी टांगें पहले थोड़ी सीधी कीं फिर मेरे ऊपर टांगें फैला कर आ गयी। मैं समझ सकता था कि उसकी जांघों में भी अकड़न हो गयी होगी इतनी देर फैलाये रखने में।

मगर अभी भी वो गर्म थी, वरना ज्यादातर औरतें सुस्त होकर लेट जाती हैं। उसकी झाटें पूरी तरह से भीग गयी थीं और चूत के किनारे गोल आकार में आ गये थे. मैंने उसकी मैक्सी से लन्ड पौंछा और उसने भी अपनी चूत पौंछी, फिर सीधा मेरे लन्ड को पकड़ कर अपनी चूत की तरफ करके बैठ गयी।

मेरा लन्ड थोड़ा खिंचाव सा महसूस करता हुआ उसकी चूत में घुस गया। हम दोनों को हल्का सा दर्द महसूस हुआ. मगर जब वो दो-तीन बार उछली तो मजा आ गया. अब लगने लगा था कि चमड़ी से चमड़ी रगड़ा खा रही है.

वो सिसियाते हुए धक्के मार मार कर चुदवाने लगी। मस्त तरीके से आगे की तरफ धकेल रही थी अपनी चूत मेरे लन्ड पर। मुझे कुछ गोल मांस का छोटा सा टुकड़ा लन्ड पर महसूस हो रहा था जब जब वो अपनी चूत को आगे धकेलती थी और हम दोनों मजे से एक दूसरे को पकड़ते हुए जोर लगा रहे थे.

इतना मजा मुझे चुदाई करने में आज तक किसी लड़की के साथ नहीं आया था जितना इसके साथ आ रहा था। वो भी मस्ती से भर गई थी और थोड़ी ही देर में उसे जैसे मर्ज़ी होती थी वैसे धक्के मारते हुए अपनी चूत में लन्ड को मस्ती से लेने लगती थी.

अब मेरी हालत ऐसी हो गयी थी मानो कि अब किसी भी समय मैं वीर्य की पिचकारी छोड़ दूंगा। मैंने किसी तरह खुद को रोके रखा था.

और फिर जब वो बहुत ज्यादा थक गयी तो मैंने अपना आसन बदलने की सोची। वो हल्के-हल्के सुस्त होने लगी थी और बीच-बीच में पूछने लगी थी कि मेरा निकला या नहीं, मैं हर बार उसको बोलता था कि निकलेगा तो तुम्हें पता चल ही जायेगा।

मैंने उसे उठने को कहा और बोला- झुक कर गाँड़ उठा लो।
उसने कहा- थोड़ा सुस्ता लेने दो!
मेरे लिए भी सही मौका था कि थोड़ा रुक कर चोदने से और अधिक देर चुदाई होगी।

इसलिए मैंने अपना लन्ड उसके हाथ में थमा दिया. उसने अपनी मैक्सी से उसे पोंछा और लेट कर लन्ड को सहलाती रही।
कुछ देर के बाद उसने खुद ही बोला- कर लो जल्दी से, शाम हो जाएगी तो बच्चे आ जाएंगे।

मैं तो कब से तैयार ही था बस उसके कहते ही मैंने उसे घोड़ी की तरह झुकने को कहा और उसने झुक कर अपनी गाँड़ उठा दी।

इस स्थिति में उसकी चूत कितनी मस्त लग रही थी. मानो दो पाव रोटी जांघों के बीच फंसी हो।

मैंने अपने फनफनाते हुए लन्ड को सीधा उसकी चूत में घुसेड़ दिया और कमर पकड़ कर उसे फकाफक चोदना शुरू कर दिया।

एक तरफ मेरे धक्कों से थप-थप-थप की आवाजें निकल रही थीं तो दूसरी तरफ उसके मुंह से आह उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह्ह … ओह्ह की आवाज निकल रही थी।
मैंने अपना वीर्यपात रोकने की कोशिश की तो रागिनी समझ गई कि मैं जानबूझ कर स्खलित नहीं हो रहा हूं. फिर रागिनी ने मुझे कड़े शब्दों में कहा कि जल्दी करो नहीं तो बच्चे आ जायेंगे।

मैं उसकी बात को नजरअंदाज करता रहा और काफी देर उसे ऐसे ही चोदता रहा.
वो कहने लगी- अब मुझे परेशानी हो रही है.
मगर उसकी गाँड़ देख कर मेरा रुकने का मन नहीं कर रहा था. वो जोर देकर अपनी जगह से उठने लगी. मैंने उसे उठने दिया और फिर बिस्तर पर से नीचे खड़ी कर दिया और एक टांग बिस्तर पर चढ़ा कर फिर से उसे पीछे से चोदना शुरू कर दिया।

रागिनी जी का शायद अब मन भर गया था और वो थकान महसूस करने लगी थी इस वजह से वो मेरा अब खुल कर साथ नहीं दे रही थी।

5 मिनट की चुदाई में वो चिड़चिड़ी होने लगी और मुझे जल्दी झड़ने को कहने लगी। मैं उसे थोड़ा और थोड़ा और कह कर चोदता रहा. फिर मैं भी थकने लगा था. उसे बिस्तर पर सीधा लिटा दिया पहले की तरह और उसके ऊपर चढ़ गया। मैंने उसकी जाँघे फैला कर जैसे ही अपना लन्ड घुसाने की कोशिश की तो वह बोली- कितना करोगे, मार ही डालोगे क्या मुझे?

मैं बोला- बस अब निकलने वाला है.
और लन्ड झट से उसकी चूत में घुसा कर धक्के मार-मार कर उसे चोदना शुरू कर दिया।

थोड़ी ही देर की चुदाई में उसके चेहरे के आव-भाव और हाथो पैरों की हरकतें बदल गयीं। वो मुझे फिर से कस के पकड़ने लगी और मुंह से सिसकारियां निकलने लगीं। मैं समझ गया कि इसे बहुत मजा आ रहा है अब और मैं तेज़ी से उसे चोदने लगा.

उसकी आंखें नशीली सी होने लगीं और मुंह से गर्म सांसें छोड़ने लगी वो। मैंने इतनी मस्ती में किसी औरत को आज तक नहीं देखा था. उसे अब इतना मजा आने लगा था कि वो मुझे बार-बार चूमने लगी और प्यार करने लगी. मेरा बांध भी अब टूटने की कगार पर था तभी वो अपनी टांगें मेरी गाँड़ के ऊपर रख कर दोनों टांगों को लपेट मेरी गाँड़ पर रखते हुए मुझसे चिपकने लगी.

अपने हाथों में उसने मुझे कस कर भींच लिया और अपनी गाँड़ उछालने लगी. उसकी ऐसी हालत देख कर अब मैं भी खुद को रोक नहीं पा रहा था. मैंने पूरी ताकत लगा कर धक्के मारना शुरू किया और वो चिल्लाने लगी। मेरा मन अब ऐसे होने लगा कि अब इसकी चूत फाड़ ही डालूं, वो दर्द में भी मजे लेने लगी.

और अचानक मेरा वीर्य अंडों से तेज़ी से निकलते हुए लन्ड के रास्ते सीधा उसकी चूत में उतर गया। मैं तब तक उसकी चूत में धक्के मारता रहा जब तक कि मेरे वीर्य की आखरी बूंद उसकी चूत में न झड़ गई.

मैं पूरी तरह झड़ चुका था और उसके ऊपर निढाल हो कर गिर पड़ा था। मैं शांत हो गया मगर रागिनी अभी भी कराह रही थी।
जैसे जैसे मैं ढीला पड़ता गया वैसे वैसे उसका भी कराहना कम होता चला गया।

5 मिनट के बाद मुझे होश आया तो मैंने अपना सिर उठा कर उसे देखा, वो भी मुझे देख कर मुस्कराते हुए शर्म सी महसूस कर रही थी.
मैंने उससे पूछा- मजा आया या नहीं?
उसने शर्माते हुए बताया- बहुत मजा आया, आज से पहले ऐसा मजा कभी नहीं आया था. ऐसा लग रहा है मानो तुमने मेरा पूरा बदन तोड़ कर रख दिया है।

ये कहते हुए हम दोनों ने फिर से एक दूसरे को थोड़ी देर चूमा और फिर उसने मुझे जल्दी से जाने को कहा। उसका वो गोरा बदन छोड़ कर जाने का मेरा मन अभी भी नहीं कर रहा था लेकिन मुझे मजबूरन उठना पड़ा. वो उठ कर मेरे वीर्य को साफ करने लगी.

बिस्तर की हालत भी बुरी हो चुकी थी. जिस जगह पर उसकी गाँड़ टिकी हुई थी वहां से पूरा बिस्तर गीला हो गया था. जाते हुए उसने बताया कि वो कई बार झड़ गई है. मैंने समय का अन्दाजा लगाया तो लगभग डेढ़ घंटे हमारी चुदाई चली.

इसमें करीब पौन घण्टा तो कम से कम मैंने लन्ड उसकी चूत में रखा ही होगा। ये भी पता चला कि जब जब वो पूरे जोश में मुझे पकड़ कर अपने चूतड़ हिला रही थी, तब-तब वो झड़ रही थी.
रागिनी की चुदाई करने के बाद अब मेरा रास्ता साफ हो गया था. अब मैं जब चाहूं उसकी चूत को आकर चोद सकता था. लेकिन फिर भी मौके की तलाश तो करनी ही पड़ती थी.

आपको मेरी यह कहानी पसंद आई या नहीं … मुझे अपनी प्रतिक्रिया दें ताकि मैं अपने जीवन के कुछ और रोचक किस्से आप सब के साथ बांट सकूं.
विधवा औरत के जिस्म की हवस (Vidhwa Aurat Ke Jism Ki Hawas) विधवा औरत के जिस्म की हवस (Vidhwa Aurat Ke Jism Ki Hawas) Reviewed by Priyanka Sharma on 12:34 PM Rating: 5

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