रेशमा ने आंटी को चुदते हुए पकड़ा (Reshma Ne Aunty Ko Chudte Hue Pakda)

रेशमा ने आंटी को चुदते हुए पकड़ा
(Reshma Ne Aunty Ko Chudte Hue Pakda)


मैं आप सबका दोस्त जीशान इस सच्ची घटना का आज मैं नया भाग लेकर आया हूँ. इस भाग में सब पाठिकाओं की चूत पानी छोड़ने वाली है और सब पाठकों के लण्ड पानी छोड़ने वाले हैं.

अब तक आपने पिछले भाग पूल में की देसी चूत की चुदाई (Pool Me Ki Desi Choot Ki Chudai) मेंपढ़ा कि मैं चाचीजान को अपने फ़ार्म हाउस पर ले आया था. उनको नंगी करके उनके साथ पूल में मस्ती की और इसके बाद सबसे पहले चाची की चूत की झांटें साफ़ कीं. इसके बाद उनके ऊपर शहद डाल कर चुसाई का मजा लेने लगा.
अब आगे:

चाची- कैसे नए नए तरीके ढूंढ कर लाया है मादरचोद … और कितने मज़े देगा.
चाची ज़ोर ज़ोर से चीखने लगीं. उनकी आवाज से मैं और उत्तेजित हो रहा था. मैं और ज़ोर ज़ोर से चाटने लगा.

अब तक चाची सब मज़े ले रही थीं. अब मेरी बारी थी. मैं लण्ड लेकर चाची के मुँह के पास चला गया.

चाची- मैंने साफ मना कर दिया था. ये मुझसे नहीं होगा.
मैं- इसी लिए तो चॉकलेट और हनी है.
चाची- मुझसे नहीं होगा.
मैं- अभी तक तो इतने मज़े ले लिए, लेकिन मुझे मज़े नहीं दोगी?
चाची- तुझे जो मज़े लेना है ले ले, लेकिन ये नहीं होगा मुझसे.
मैं- मुझे ये ही चाहिए. एक बार ट्राय तो कीजिये … अगर आपको पसंद नहीं आएगा, तो नहीं करेंगे.
चाची- सिर्फ एक बार करूँगी, मुझे अच्छा नहीं लगा, तो नहीं करूंगी.

मैं लण्ड उनके मुँह के ऊपर रखने लगा. चाची मेरे लण्ड को झट से हटा दिया और चॉकलेट सीरप को लण्ड के ऊपर डालने लगीं … फिर धीरे से लण्ड को एक बार मुँह में ले लिया.
चाची- मुझसे नहीं होगा जीशान, छोड़ दे.

ये बात सुनते ही मुझे थोड़ा गुस्सा आया. मैं चाची के मुँह को जोर से चोदने लगा.
उनकी चीख मुँह में लण्ड होने के कारण अन्दर ही रुक गयी ‘आआंमम्म..’
मैं रुका ही नहीं और ज़ोर से लण्ड को अन्दर तक डालने लगा.

करीब दो मिनट उनके मुँह को चोदने के बाद मैं लण्ड बाहर निकालने लगा. चाची अब ऊपर उठ गईं और मुझे मारने लगीं- साले चूतिये … तुझे मैंने अपनी चूत दी, मेरा सब कुछ दिया, फिर भी तू मुझे रंडी की तरह मेरा मुँह चोदने लगा … रानी बोल रहा था. आखिर रंडी ही बनाया मुझे. मेरे पति ने मुझे आज तक सेक्स के लिए फ़ोर्स नहीं किया और तू मुझसे ये सब करवा रहा है.
मैं- आपने तो अपने मज़े ले लिए … बदले में मुझे मज़े नहीं दोगी? तुम मेरी जान हो, मुझे जो चाहिए वो मैं करूँगा.

मैं चाची पर आक्रमण करने लगा और उन्हें नीचे गिरा कर अपना लण्ड उनकी चूत के ऊपर रख दिया.
चाची अभी भी गुस्सा थीं.
मैं- लण्ड नहीं चाहिए? ये सब ज़िन्दगी के मज़े हैं … मज़े लेने दो और मज़े ले लो.

चाची तना हुआ लण्ड देख कर मान गईं. मैं लण्ड चूत के ऊपर रगड़ने लगा.
चाची- अब अन्दर भी डाल भोसड़ी के, तेरे लण्ड की आरती उतारूं क्या?

मैंने बिना देर किए लण्ड को एक झटके में अन्दर डाल दिया. इस तेज झटके में मेरा पूरा लण्ड अन्दर घुस गया था, चाची कांप उठीं और दर्द से चिल्लाने लगीं- आआआह मैं मर गयी … ये गधे का लण्ड मेरी चूतफाड़ कर ही दम लेगा.

मैं हंसते हुए ज़ोर ज़ोर से चूत धक्के मारने लगा. चाची मस्ती से चीखने लगीं, चुदाई के मज़े लेने लगीं. चाची आज इस सुनसान जगह में बेखौफ होकर अजीब अजीब तरह की तेज आवाज में सिसकारियां लेने लगीं- आआह … यस … मररर गईई … ऊम्म … तेरा बहुत बड़ा लण्ड है … मादरचोद … बच्चेदानी तक ठोकर मार रहा है उम्म्ह… अहह… हय… याह…

कोई 5 मिनट की चुदाई के बाद मैंने लण्ड बाहर निकाल दिया.
चाची- अरे क्या हुआ?
मैं- एक ही पोजीशन में कितनी देर तक चोदूं … अब ऊपर उठो.

मैंने चाची को ऊपर उठाया और उन्हें पेड़ के सहारे खड़े होने का बोला. चाची पेड़ को पकड़ कर खड़ी होने लगीं. मैं धीरे से पीछे से अपना लण्ड चाची के भोसड़े में डालने लगा. मैंने निशाना लगाकर एक ज़ोर से धक्का दे मारा. ज़ोर के धक्के की वजह से चाची नीचे गिर गईं. लण्ड जो अन्दर गया था, वो भी बाहर निकल गया.

चाची- मार ही देगा मुझे? क्या खाता है, इतनी ताकत है तेरे में … साले सांड.
मैं- तुम पेड़ को ज़ोर से पकड़ो.

मैंने फिर से कोशिश की, एक और ज़ोर का धक्का दे मारा. इस बार मेरा पूरा लण्ड अन्दर घुस गया, चाची की चूत को चीरते हुए लण्ड अन्दर चला गया.
चाची चीखते हुए चुदाई के मज़े ले रही थीं- आआह ऊऊम्म … और ज़ोर से कर, मुझे पूरी तरह से शांत कर दे … आह.

मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के मार रहा था. इस वक्त मैंने उनका एक पैर ऊपर करके अपने एक हाथ में पकड़ लिया था. इसकी वजह से लण्ड और अन्दर जाने लगा.

चाची- मुझे तो खिलौना बना लिया तूने, आह चोद दे … जैसे चाहे वैसे इस्तेमाल कर ले … मेरा … आआआह ऊऊम्म मेरी चूत को भोसड़ा बना दिया … साले मादरचोद.
मैं- साली रंडी कितना चीखेगी, गला फट जाएगा.

ये बात सुनते ही चाची हैरान हो गईं, मैं पहली बार उनको गाली दे रहा था. मैं और उत्तेजित होकर उनके चूतड़ों पर थप्पड़ मारने लगा.

चाची- थप्पड़ क्यों मार रहा है … और साले अपनी चाची को गाली दे रहा है … भैन के लौड़े शर्म नहीं आती तुझे.
मैं- साली कुतिया … लण्ड खा … मुझे कोई शर्म-वर्म नहीं आती है.

मैं और जोर से चुदाई करते हुए चाची के चूतड़ों पर थप्पड़ मारने लगा, उनके चूतड़ एकदम लाल हो गए थे.

ज़ोरदार 10 मिनट चुदाई के बाद मैं उनकी चूत में ही झड़ गया और मैं उनके ऊपर गिर गया. चाची भी नीचे गिर गईं और उन्होंने मुझे धक्का मार कर अलग कर दिया.

चाची- चल हट मादरचोद … इतना बड़ा लण्ड है, इतना दर्द होता है … उसके ऊपर तू मुझे मार भी रहा है.
मैं- जितना ज्यादा दर्द, उतना ज्यादा मज़ा.
चाची- तुझे तो दर्द नहीं हो रहा न … तू तो कुछ भी बोलेगा … यहां मेरी जान जा रही है.
मैं- सॉरी चाची … इस बार तुम मुझे दर्द दे देना.
चाची- नहीं रहने दे, तू तो मेरा आशिक़ है … तुझे जैसा मन करता है, वैसे कर ले, मैं तो तेरी हूँ. … और तू मेरी चूत की आग को ठंडा कर रहा है.

हम दोनों किस करने लगे.

चाची- और ये तेल किस लिए मंगवाया है.
मैं- ये मैं रात को बताऊंगा.
चाची- रात का रात को देखेंगे, पहले खाना तो खा ले … भूख लगी है मुझे.

दिन के 3 बज चुके थे. टिफिन में जो खाना लाये थे हम दोनों खाने लगे, मस्त बिरयानी बनी थी. हम दोनों एक दूसरे को प्यार से खिलाने लगे. मैं वो दिन याद करने लगा, जब मैं हर दिन चाची के हाथ से खाना खाता था.

चाची- मेरे हाथ से खाना खा रहा था … और अब मेरी चूत मार रहा है. वाह बेटा वाह … अगर ये बात किसी को पता चलेगी, तो मेरी और तुम्हारी कितनी बदनामी होगी.
मैं- किसी को पता नहीं चलेगा.

हम दोनों खाना खाने के बाद, एक दूसरे के बांहों में सोने लगे. हम दोनों एकदम नंगे पड़े थे. करीब 4 घंटे तक हम दोनों खूब चैन की नींद सोये.

बाद में चाची मुझे चूमते हुए उठाने लगीं- चलो अन्दर कमरे में चलते हैं.
मैं- ठीक है.
हम दोनों सब सामान लेकर फार्म हाउस के कमरे में चले गए.

मैंने फ़ोन चैक किया, तो चाचा के कई फ़ोन आए हुए थे. मैंने चाचा को फ़ोन लगाया, तो चाचा पूछने लगे कि अभी तक घर क्यों नहीं आए.
मैं बोला- गाड़ी पंक्चर हो गई है और काम वाले नहीं आए हैं.

चाचा बोले- वहीं पे सो जाओ, सुबह मैं गाड़ी भेजता हूँ.

फिर वो चाची से बात करने लगे. जीशान के लिए खाने के लिए कुछ बना दो. भूखे मत सोने देना.
चाची बोलीं- हम चिकन लाए हुए हैं. जीशान ग्रिल चिकन बनाने को बोल रहा है. हम वही बना कर खाएंगे.

चाचा से बात खत्म हुई.

रात को ग्रिल चिकन बना कर खाया. इसके बाद मैंने ऊपर छत पर सोने के लिए बोला. चाची और मैंने ऊपर छत पर बिस्तर लगा दिए. इस वक्त चाची ब्रा और पैंटी में थीं और मैंने अंडरवियर पहना हुआ था. छत पर बड़ी ठंडी हवा चल रही थी और चांद का उजाला था. चाची शहद, चॉकलेट और तेल ऊपर लेकर आयी थीं.

हम दोनों सेक्स की बातें करने लगे.

मैं- चाची आप अपनी दोनों बहनों से मुझे कब चुदाई का मजा दिलवाओगी.
चाची- ये सब मुझसे नहीं होगा बाबा. तू उनको भूल जा.

मैंने कुछ जवाब नहीं दिया. जवाब तो मैं चुदाई में दूंगा. रात के दस बज गए थे. अब कामक्रीड़ा शुरू होने वाली थी. मैंने चाची को नंगी कर दिया, उनकी ब्रा और पैंटी को निकाल दिया. चाची भी मेरे अंडरवियर को निकाल कर लण्ड सहलाने लगीं. मैंने ढेर सारा तेल उनकी बॉडी पे डाल दिया. अपने हाथों चाची के शरीर पर हर जगह मम्मों पर, गाँड़ के छेद पर, चूतड़ों पर, पेट पर पीठ पे, जांघों पर मतलब सब जगह तेल मल दिया.

चाची- इतना तेल क्यों?
मैं- आपकी मसाज करने के लिए … आप भी मुझे तेल लगा कर मालिश कर देना.

चाची मेरे पूरे बदन पर तेल लगाने लगीं. वे लण्ड पर भी तेल डाल कर मुठ मारने लगीं, तो मैं मना कर दिया.

हम दोनों एक दूसरे के शरीर को करीब आधा घंटे तक मसाज करते रहे. चांदनी रात छत के ऊपर चाची का बदन तेल में चमक रहा था और मेरा लण्ड भी चमक रहा था.

मैं- चाची आपके बदन में मुझे सबसे पसंद आने वाली जगह कौन सी है? पता है आपको?
चाची- नहीं..! तू ही बता दे!
मैं- ये मोटे मोटे चूचे और बड़ी सी गाँड़.
चाची- अरे यार इतनी भी बड़ी नहीं है. मेरी दीदियों की गाँड़ मेरी गाँड़ से भी बड़ी हैं और उनके मम्मे भी बड़े हैं.
मैं- इसीलिए तो मैं उन्हें चोदना चाह रहा हूँ. आप चिंता न करो आपकी गाँड़ भी बड़ी हो जाएगी.
चाची- वो कैसे?

मैंने चाची की पूरी गाँड़ को तेल से भर दिया. इससे चाची समझ गईं कि गाँड़ का फीता काटने वाला है.
चाची- इधर दर्द नहीं होगा ना?
मैं- थोड़ा होगा … फिर मज़ा आएगा.
चाची- ध्यान से मारना, कहीं मेरी गाँड़ फट न जाए.

मैंने चाची को डॉगी पोजीशन में बैठाया और मैं पीछे से लण्ड को गाँड़ के निशाने पर रख कर धक्का मारा. लेकिन लण्ड अन्दर नहीं गया, फिसल गया. मैंने 3-4 बार कोशिश की, मगर खेल नहीं हुआ.

फिर मैंने चाची से अपने दोनों हाथों से गाँड़ को फाड़ कर पकड़ने को बोला. चाची ने दोनों चूतड़ों को अपने हाथों से फैलाया जिससे चाची की गाँड़ का छेद थोड़ा दिखने लगा था.

मैंने लण्ड का सुपारा छेद पर टिकाया और इस बार एक ज़ोर का धक्का मार दिया. लण्ड का टोपा अन्दर घुस गया. चाची दर्द से तड़पने लगीं. उन्होंने अपने दोनों हाथों को दर्द के चलते आगे कर दिए और दूर होने लगीं. मैंने तुरंत अपने हाथों से उन्हें पकड़ लिया. चाची इतना ज़ोर से चीखीं कि पूरा फार्म हाउस गूंजने लगा.

चाची- प्लीज बाहर निकाल दे लण्ड, मैं मर जाऊँगी प्लीज … मैं तेरा लण्ड भी चूस लूँगी लेकिन ये गाँड़ चुदाई … आह नहीं होगी मुझसे … निकाल प्लीज.

अगर मैंने अभी लण्ड निकाल दिया, तो चाची की गाँड़ जीवन में कभी नहीं मिलने वाली थी. मैंने उनके मम्मों को सहलाते हुए एक और धक्का दे दिया, मेरा आधा लण्ड अन्दर चला गया. चाची ऊपर उठने की कोशिश कर रही थीं. लेकिन मैंने उन्हें पकड़ा हुआ था. चाची की आंखों में आंसू आने लगे.

चाची- छोड़ दे बेटा मुझे प्लीज. मैं मर जाउंगी. मुझसे नहीं होगा ये. आआआह … ऊफ … कोई बचाओ मुझे इस गधे के लण्ड से … मादरचोद छोड़ दे!
मैंने एक और धक्का दे दिया, अब मेरा पूरा लण्ड गाँड़ के अन्दर था. चाची की गाँड़ फट गई थी.

चाची- आह मेरी गाँड़ फट गई … हरामी … छोड़ दे … ऊह … आआआह. मेरे पर तुझे रहम भी नहीं आई साले … भड़वे … मादरचोद … तेरी माँ को चोदूं हरामी … विदेशियों के साथ रह कर ये सब सीख कर आया भैनचोद … तेरी पत्नी तो तेरे को हाथ मारेगी … आआह ऊऊह..

मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा. मुझे चाची की चीखों से मजा आ रहा था- अब बोल चाची भैन की लौड़ी … अपनी दोनों बहनों की चूत मुझको कब दिलाओगी.
चाची- मेरी गाँड़ का ये हाल कर दिया. भोसड़ी के, अब उनकी चूत और गाँड़ का भी ऐसा ही हाल करेगा, मैं होने नहीं दूंगी.

मैंने ज़ोर से धक्का मारा और लण्ड कप गाँड़ की जड़ तक पहुंचा दिया.

चाची- अच्छा मदद करूँगी … दोनों की चूत गाँड़ दिलाऊंगी … तू धीरे कर प्लीज.

आखिर चाची मान गईं. मैं धीरे धीरे उनकी गाँड़ मारने लगा. अभी मैं चाची की गाँड़ में लण्ड पेले हुए उनकी चूत को भी सहला रहा था, इसकी वजह से उन्हें दर्द कम हो गया. चाची गाँड़ मरवाने का थोड़ा मजा लेने लगीं. कोई 15 मिनट गाँड़ चुदाई के बाद मैं चाची की गाँड़ में ही झड़ गया. मेरी ‘आआआह..’ निकल गई और लण्ड को बाहर निकाल दिया.

चाची- आह मैं आज एक गधे के लण्ड से चुदी … तेरे को सौ सलाम … मगर अगली बार मैं तुझे मिलूंगी ही नहीं.
मैं- ऐसे कैसे जाने दूंगा मैं … और तुम भी मुझे छोड़कर जा नहीं सकती, अब तो आपको भी मेरे लण्ड की सख्त ज़रूरत है.
चाची- वो तो है … लेकिन ऐसे कुतिया बन कर चुदना … मुझसे नहीं होगा. मैं उंगली करके शांत हो जाउंगी, लेकिन ऐसे नहीं.

मैं उनको समझाने लगा. कुछ देर में सब नार्मल हो गया. हम दोनों थक गए थे, इसलिए जल्दी सो गए.

अचानक मेरी नींद में खलल हो गयी. उस वक्त सुबह के करीब 4 बजे होंगे. मैंने देखा कि चाची मेरा बदन चूम रही थीं और मेरे ऊपर चढ़ी जा रही थीं.

मैं- इतनी शानदार चुदाई के बाद भी आप मूड में आ गईं चाची … कैसे?
चाची- तुमने तो गाँड़ मारी है … चूत कैसे ठंडी होगी … आग लगी है अन्दर.
मैं- लेकिन अब मुझसे नहीं होगा. मैं पूरा थक गया हूं.
चाची- तुम सो जाओ, मैं ही खुद कर लूंगी.

चाची ने काफी सारा शहद मेरे ऊपर डाल दिया और मुझे चाटने लगीं. मुझे मज़ा आने लगा. इस बार चाची की हरकतें देख कर मैं हैरान हो गया. चाची खुद चॉकलेट डाल कर मेरा लण्ड चूसने लगीं.

मैं- चाची ये क्या कर रही हो? आपको तो लण्ड चूसना पसंद नहीं है.
चाची- कभी कभी कुछ पाने के लिए करना पड़ता है. वैसे अब आदत हो गयी है तेरे लण्ड की. मैं भी मज़े ले रही हूँ.
मैं- वाह रे चाची.

चाची के लण्ड चूसने की वजह से लण्ड खड़ा हो गया और चाची लण्ड के ऊपर बैठ गईं. एक दो पल के बाद चाची लण्ड पर नीचे ऊपर बैठने लगीं. मुझको मज़ा आ रहा था. पहली बार चाची मुझे चोद रही थीं.

मैं- और ज़ोर से करो चाची … वाओ कितने मस्त झटके दे रही हो … आआआआह!
चाची- अब तू चुपचाप मज़े ले मादरचोद, चाचीचोद.

दस मिनट चुदाई के बाद मैं झड़ने वाला था. मैंने चाची को पकड़ कर अपने नीचे लिया और मैं ऊपर चढ़ के ज़ोर ज़ोर से चाची को चोदने लगा.

चाची- आह अब आया मजा … मैं कितना भी चुद लूँ … मगर अभी जो तू चोद रहा है … उसके बराबर कोई मजा नहीं है.

कोई 5 मिनट तक और ज़ोर ज़ोर के धक्कों के बाद चाची एक ज़ोर चीख मारते हुए झड़ गईं.

चाची- वाओ हर एक चुदाई से दूसरी चुदाई में और ज़्यादा मज़ा आने लगा है.
इसके बाद मैं भी झड़ गया.

चाची- अगले हफ्ते बड़ी दीदी परवीन को अकेली घर बुलाऊंगी, तू आ जाना.
मैं- थैंक्यू सो मच चाची … आप दुनिया में सबसे बेस्ट चाची हो.
चाची- मैं मेरी बात निभा रही हूँ. तू अपनी निभा, हर हफ्ते मुझे आकर चोदना.

फिर चाची रेडी हो गईं, कुछ देर बाद चाचा को आना था. उनका फोन आ गया था. वे आए और चाची को घर ले गए. मैं अगले हफ्ते का इंतज़ार करने लगा और प्लान बनाने लगा. चाची के निकलने के बाद मैं उदास हो गया. मुझे चाची की बहन, परवीन आंटी को चोदने के लिए एक हफ्ते रुकना पड़ रहा था. मैं उनके नाम से मुठ मार रहा था. इस हफ्ते के बीच में मैंने उनके घर जाकर दो बार चाची को चोदा.

मुझे परवीन आंटी की याद आ रही थी. मैं उनके फोटोज देखने लगा. परवीन आंटी सेक्सी माल थीं. उनकी 42 इंच की गाँड़ थी. चाची के तीनों बहनों में सबसे बड़ी गाँड़ और सबसे बड़े चुचे थे.

मैं आपको उनके परिवार के बारे में बताऊं, तो परवीन का पति शराबी है. उस कमीने ने बेटे के चाह में 4 बेटियां पैदा कर दी हैं. आंटी के बेटा नहीं देने के कारण वो उनसे ठीक से पेश नहीं आता था और शराबी बन गया था.

आंटी की दो बेटियों की शादी हो गयी थी. तीसरी और चौथी अभी हॉस्टल में रह कर पढ़ाई कर रही थीं. परवीन आंटी की पहली बेटी बहुत मस्त है. उसका नाम आशना है. एकदम दूध जैसी गोरी है. उसका आकार बहुत मस्त है. उसके 30 के मम्मे, 24 की कमर और 32 की गाँड़ है. उसकी अलग कहानी है. आशना की शादी आंटी के रिश्तेदार से ही हुई है. उसका पति एक नंबर का चूतिया है, अंकल के जैसा ही दिखता है. खैर उसका जिक्र अभी छोड़िये. अभी तो परवीन आंटी की बात हो रही है.

आखिर वो दिन आ ही गया, जब चाची परवीन आंटी के आने का बोली थीं. मैं सुबह खूब सज धज कर चाची के घर पहुंचा. दरवाजे की घंटी बजाई, चाची ने दरवाजा खोला.

मैं अन्दर जाकर पूछने लगा- कहां हैं आंटी?
चाची- रुक जा ठरकी … इतनी भी जल्दी क्यों?
मैं- आपको पता नहीं … मैं कब से आंटी का इन्तजार कर रहा हूं.
चाची- देख देख … साले को … कैसे दीदी को चाह रहा है. … अब तू मुझे पक्का भूल जाएगा.
मैं- कभी नहीं चाची, तुम मेरी पहली ख्वाहिश हो.

मैं चाची को किस करने लगा. इतने में दरवाजे की घंटी बजने लगी. मैं चुपचाप सोफे पर बैठ गया. चाची जाकर दरवाजा खोलने लगीं.

मेरी बांछें खिल गईं, जिसका इंतज़ार था … वो परवीन आंटी आ गयी थीं.

चाची- तुम्हारा ही इन्तजार कर रही थी दीदी.
परवीन- सॉरी थोडा लेट हो गई. तुम्हारे जीजू के लिए खाना बनाकर आने में देर हो गयी.

इतने में आंटी मुझे देखकर हाथ हिलाने लगीं- जीशान, तुम कब आए?
मैं- अभी अभी आया आंटी.

हम सब सोफे पे बैठ गए. इधर उधर की बातें करने लगे.

मैं- अंकल कैसे हैं आंटी.
परवीन- तेरा अंकल तो हमेशा नशे में रहता है. पता नहीं मैंने क्या गलती की, जो अल्लाह ने मुझे ऐसा पति दिया.

चाची उनको संभालने लगीं.

चाची- सब लोग टीवी देखोगे.

सबने हां बोला, चाची टीवी में हिना खान की मूवी लगा दी. आंटी हिना खान की बड़ी फैन हैं. चाची को मैं जाने का इशारा करने लगा. मूवी चालू हो चुकी थी.

चाची- मैं थोड़ी देर में आती हूँ. कुछ सामान लेने जा रही हूँ.
परवीन- कहां जा रही है? कब आएगी? मुझे बुला कर अब अकेली छोड़कर जा रही है.
चाची- आधा घण्टे में आ जाउंगी दीदी. अकेली थोड़ी छोड़ जा रही हूँ, जीशान है ना.

ये बोल कर चाची एक ताला हाथ में लेकर गईं, मैं पीछे से दरवाजा बंद करने चला गया, लेकिन मैंने कुंडी नहीं लगाई. चाची बाहर से लॉक करके गई थीं.

मैंने बोला- मिस कॉल दूंगा, तब आ जाना.
चाची बोलीं- ठीक है.

उधर टीवी में बॉडीगार्ड मूवी चल रही थी. आंटी को फिल्म्स बहुत पसंद हैं … और सांग्स डांस भी बहुत पसंद है. वो थोड़ा फ़िल्मी टाइप की हैं.

परवीन- आई लव हिना खान, ये मूवी बहुत पसंद है. वो ‘तेरी मेरी …’ वाला गाना बहुत पसंद है.
मैं- हां आंटी, वो गाना मुझे भी बहुत पसंद है.

इतने में वो गाना आने लगा. मैं आंटी का हाथ पकड़कर बोला- आओ आंटी, चलो डांस करते हैं.

आंटी इधर उधर देख कर डांस के लिए उठ गईं. मैंने उनकी कमर में हाथ डाल दिया और दूसरे हाथ से उनका हाथ पकड़ कर सालसा जैसा डांस करने लगा.

मैं- आप अभी भी मस्त डांस करती हो आंटी.
परवीन- थैंक्यू बेटा … और तुम भी बहुत मस्त कर रहे हो.
मैं- आप अभी भी इतनी सुंदर हैं. शादी की उम्र में तो अंकल का होश उड़ गया होगा.
परवीन- तुम तो काफी चालू हो गए हो और जवान भी.

मैं उनको और करीब करने लगा. आंटी थोड़ा असहज महसूस करने लगीं. फिर भी उन्होंने कुछ नहीं बोला. मैंने अपना हाथ कमर से हटा कर उनके बड़े चूतड़ों के ऊपर रख दिया और उन्हें सहलाने लगा. आंटी की तरफ से कुछ प्रतिक्रिया नहीं थी. मैंने हिम्मत करते हुए अपना दूसरा हाथ उनके मम्मों पे रख दिया.

आंटी अब विरोध करने लगीं. मैंने ज़ोर से दोनों हाथों से उन्हें पकड़ लिया.
परवीन- ज़ीशान ये तुम क्या कर रहे हो? छोड़ो मुझे.

मैंने कुछ नहीं कहा, बस उनको चूमने के लिए आगे हुआ. आंटी ने पीछे सरकती गईं. मैं उनके साथ आगे होता गया. आंटी अब दीवार से टकरा गईं … उनके पीछे दीवार थी, आगे मैं था. मैं अपने दोनों हाथों से उनका चेहरा पकड़कर उन्हें चूमने लगा. वो बिल्कुल सहयोग नहीं कर रही थीं.

मैं- मैं तुम्हें बहुत चाहता हूँ आंटी, प्लीज किस मी.
परवीन- हो क्या गया है तुमको जीशान? इतने अच्छे बच्चे थे तुम … मैं तुम्हारी अम्मी की उम्र की हूँ.
मैं- प्यार में उम्र बाधा नहीं होती है.

ये कहते हुए मैं उनको ज़ोर से चूमने लगा. दोनों हाथों से उनका चेहरा पकड़ कर मुँह में मुँह लगा दिया और उनकी जीभ को चूसने लगा. मुझे बड़ा मजा आ रहा था. आंटी ने मुझसे छूटने की नाकाम कोशिशें की. मैं और ज़ोर से चूमने लगा.

करीब 5 मिनट तक मैं ऐसे ही चूमता रहा. मैं एक बात पर ध्यान दिया. चाची अब विरोध नहीं कर रही थी. इससे मैं थोड़ा ढीला पड़ गया लेकिन तभी अचानक से एक ज़ोर से धक्का देकर आंटी ने मुझे गिरा दिया.

परवीन- मेरी सांस रुक गयी … इतनी भी देर कोई लिप टू लिप करता है … आआह..

आंटी हांफने लगीं. दो मिनट सांस लेने के बाद मैं आंटी के पास फिर आ गया और उनके मम्मों को छूने लगा और साड़ी के अन्दर हाथ डालकर पेट को सहलाने लगा.

परवीन- ये सब गलत है … तुम जाओ … मुझसे दूर जाओ, नहीं तो तुम्हारी चाची को बोलूंगी.
मैं- नहीं आंटी ऐसा मत कीजिये. प्लीज़ आंटी, प्लीज आंटी. मैं कब से आपको अपने सपनों में देखता चला आ रहा हूँ. आई लव यू आंटी.

ये कहते कहते मैं फिर से उनको चूमने लगा. अब आंटी सहयोग करने लगीं. अब वे धीरे धीरे सिसकारियां भरने लगीं ‘ऊऊऊह ऊऊम्म..’
परवीन- कोई देख लेगा, रेशमा आ जाएगी.
मैं- अगर चाची आ जाएंगी, तो पहले दरवाजे की घंटी बजेगी … उन्हें देख लेंगे.

ये कहते हुए मैंने उन्हें चूमते चूमते उनकी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया. आंटी लाल रंग के ब्लाउज में मस्त दिख रही थीं. मैं उनके पेट को सहलाने लगा और नीचे बैठकर उनका पेट चूमने लगा.
आंटी की कामुक सिसकारियां बढ़ने लगीं ‘ऊऊऊम्म्म्म … आआह..’

तभी मैंने ज़ोर से साड़ी को खींच दिया.
परवीन- ये क्या कर रहा है … रेशमा आ जाएगी.
मैं- आने पर मालूम हो जाएगा.

अब आंटी ब्लाउज और पेटीकोट में थीं. मैं आंटी को चूमते चूमते बेडरूम ले जाने लगा. बेडरूम में ले जाकर मैंने उन्हें धक्का देकर बेड पे गिरा दिया और मैं उनके ऊपर चढ़ गया. उनका ब्लाउज खोलने लगा.

परवीन- किसी को पता चलेगा, तो क्या होगा? खास करके तेरी चाची को. वो मुझसे कभी बात नहीं करेगी.
मैं- किसी को पता नहीं चलेगा आंटी.

यह सुनकर आंटी ब्लाउज खोलने में मदद करने लगीं. मैंने पेटीकोट का नाड़ा खोल दिया. अब सिर्फ आंटी ब्रा और पैंटी में रह गई थीं. आंटी तो कयामत लग रही थीं. मैं देखते रह गया. इतने बड़े बड़े बूब्स, इतनी मोटी मोटी जांघें.

परवीन- क्या देख रहा है?
मैं- आपका जिस्म … आप बहुत ही सेक्सी हो आंटी.
परवीन- देखो हम जो कर रहे हैं, ये एक बड़ी गलती है, इससे हमें बहुत प्रॉब्लम आएगी. तुम प्लीज़ किसी को बताना मत. तुझे जो भी करना है, जल्दी कर ले. फिर रेशमा आ जाएगी. तो हम शायद नहीं कर पाएंगे.
मैं- ऐसा मत बोलो आंटी … आई लव यू. मैं आपको मिलने हर हफ्ते आऊंगा.

इतना कहते हुए मैं उनके मम्मों को ब्रा के ऊपर से मसलने लगा और पैंटी के ऊपर से चूत को सहलाने लगा.

आंटी गरमागरम सिसकारियां लेने लगीं- आह … ऊऊह …
वो मेरे शर्ट के बटनों को खोल रही थीं. मैंने भी अपना पैंट निकाल दिया और बनियान भी. अब मैं सिर्फ अंडरवियर में था. आंटी मेरे लण्ड का उभार देख कर चौंक गईं.

परवीन- रुको … मुझे जरा इसे देखने दो.
ये कहते हुए आंटी ने लण्ड को अंडरवियर के ऊपर से पकड़ लिया और फट से अंडरवियर को नीचे खींच दिया. लण्ड देखते ही आंटी हैरान हो गईं.

परवीन- जीशान, तू इतना जवान कब हो गया. मैंने तो सोचा था कि तेरी 4 इंच की लुल्ली होगी … ये तो उसका दोगुना है. बाप रे. और इतना मोटा … याल्लाह.

आंटी मेरा लण्ड आगे पीछे करने लगीं … मैंने उसी वक्त चाची को मिस कॉल कर दिया. इधर परवीन आंटी मेरे लण्ड को प्यार से मुठ मारने लगीं. मैं आंटी के बूब्स का दीवाना था. मैंने भी तुरंत आंटी की ब्रा को खोल दिया.

आंटी के चूचे इतने बड़े थे कि मेरे दो हाथों की पकड़ में ही नहीं आ रहे थे. मैं खुशी के मारे एक को दबाने में लग गया और दूसरे को चूसने लगा.

आंटी की ‘ऊऊह आआह …’ की सिसकारियां तेज़ होने लगीं.

परवीन- जीशान इस सभी के लिए अभी समय नहीं है … जो भी करना है, जल्दी से कर दे.

इतने में रेशमा चाची डायरेक्ट हमारे सामने आ गईं. उन्होंने इतने दबे पांव आने की कोशिश की थी कि दरवाजा खुलने की आवाज भी नहीं आयी.

जब रेशमा चाची सामने आईं, उस वक्त मेरे मुँह में आंटी की एक चुची दबी थी और दूसरी मेरे हाथ में थी.

चाची ये सब देख कर ड्रामा करने लगीं.

चाची- ज़ीशान ये क्या कर रहा है तू? मैंने तुमको कितना मासूम समझा था और तुम दीदी … ये सब क्या है? इसके साथ ऐसा करने में आपको जरा भी शर्म नहीं आई. अगर ये सब बाहर वालों को पता चलेगा, तो क्या होगा?

चाची की एक्टिंग देख कर मैं भी ड्रामा करने लगा.

मैं- चाची प्लीज़ … ये बात तुम किसी से मत कहना प्लीज.

उधर परवीन आंटी तो एकदम से डर ही गई थीं. उनको काटो तो खून नहीं था- रेशमा … प्लीज़ ये बात किसी को मत बताना. ये सब कुछ मुझसे अनजाने में गलती हो गयी है … प्लीज़ माफ कर दे, इसमें जीशान की गलती नहीं है.
चाची- अब फटाफट उठो और जल्दी कपड़े पहनो.
मैं- दस मिनट रुक जाओ चाची … अभी कुछ नहीं हुआ है.
परवीन- तू चुप रह ना.
चाची- वाह रे बदमाश इतना बड़ा हो गया तू?

चाची मेरा कान पकड़कर खींचने लगीं. मैंने चाची को खींच कर बेड पे लेटा दिया.

मैं- बस कर रंडी … खत्म कर अपना ये ड्रामा. तेरे को भी मेरे लण्ड से चुदना है, तो जल्दी आ जा.

ये देख कर परवीन आंटी चौंक गईं. आंटी को पता नहीं चल रहा था कि ये सब क्या हो रहा है.

तभी चाची मुस्कुराते हुए आंटी को जाकर लिप टू लिप किस करने लगीं.

परवीन- ये क्या कर रही है? और हो क्या रहा है ये?
चाची- कुछ नहीं … तुम अच्छे से मज़े लो.
परवीन- नहीं मुझे अभी बात बताओ.
मैं- आपके से पहले ही मैं चाची को चोद चुका था. अब चाची की मदद से मैंने आपको पटाया.

आंटी गुस्सा होकर मुझे और चाची को गाली देने लगीं- साले मादरचोद, साली रंडी. अब समझ में आ रहा है कि तू मुझे और हिना को भी क्यों फार्म हाउस बुला रहा था.
मैं और चाची हँसने लगे.

परवीन- मतलब हिना को भी?
मैं- अभी तक नहीं, प्लान बना रहा हूँ.

चाची मेरा लण्ड पकड़कर बोलने लगीं- कोई पता नहीं, इस मादरचोद के लण्ड के नसीब में कितनी चूत चुदना बाकी हैं.
परवीन- रेशमा, कभी सोचा था कि ये जीशान इतना बदमाश बनेगा.

चाची- इसकी बदमाशी अभी तक तुमने नहीं देखी है. मैंने तो बहुत सह लिया है और बहुत मज़े भी ले चुकी हूँ. अब तुम्हारी बारी है.
परवीन- वो क्या सह लिया तूने … और कौन से मजे ले लिए?
चाची- तुम्हें सब पता चल जाएगा. हमारे पास एक घंटे का समय है. जल्दी करो.

चाची मुझे चूमने लगीं और मैं उनके कपड़े उतारने लगा. आंटी चाची को नंगी करने में मदद करने लगीं.
रेशमा ने आंटी को चुदते हुए पकड़ा (Reshma Ne Aunty Ko Chudte Hue Pakda)
रेशमा ने आंटी को चुदते हुए पकड़ा (Reshma Ne Aunty Ko Chudte Hue Pakda)
कुछ ही पलों में हम तीनों नंगे थे. आंटी अभी भी पैंटी पहनी हुई थी. मैंने झट से उनकी पैंटी को भी खींच दिया. आंटी की चूत एकदम साफ थी. छोटे छोटे से थोड़े बाल थे. मैं आंटी की चूत में उंगली करने लगा.
परवीन- आआआह ऊऊऊह ऊऊम्म्म्म.

चाची और आंटी दोनों अपने मम्मों को अपने ही हाथों से सहला रही थीं. मैं देर न करते हुए आंटी की चूत चाटने लगा. जीभ को अन्दर तक डालने लगा.

आंटी- ऊऊऊफ आआआह … ये तो कमाल कर रहा है रेशमा … आआआह
चाची- और बहुत कुछ है इसके पास … थोड़ा मुझे भी तो मज़े ले लेने दो.

चाची आंटी के मुँह के ऊपर बैठ गईं. आंटी चाची की चूत चाटने लगीं. पोजीशन ऐसी बन गई थी कि नीचे आंटी. आंटी के ऊपर चाची 69 में लेटी थीं. चाची का मुँह मेरे तरफ था और उनकी चूत आंटी के मुँह के ऊपर. मैंने 5 मिनट आंटी की चूत को चाटा.

हम तीनों लोगों के कामुक और गरमागरम कामुक सिसकारियों से कमरा एक पॉर्न मूवी के सैट जैसा लग रहा था.

परवीन- अब लण्ड भी डाल दे बेटा.
आंटी की चूत चाची से बड़ी थी. मैं लण्ड चूत के ऊपर रगड़ने लगा.
परवीन- किसका इंतज़ार कर रहा है. पेल दे मुझे.

मैंने एक ज़ोरदार धक्का दे दिया, मेरा पूरा लण्ड उनके अन्दर घुसता चला गया.
परवीन- आई मैं मर गई. … तेरा अंकल पहले ऐसा ही मर्द था … पर अब तो वो शराब के नशे में नामर्द हो गया. उसका लण्ड लुल्ली हो गया है. अब मुझे तेरे लण्ड का ही सहारा चाहिए … आह जल्दी से पेल दे मुझे.

मैं जोरदार धक्के मारने लगा, आंटी मेरे सब धक्कों का जवाब अपनी गाँड़ उछाल कर दे रही थीं- उम्म्ह… अहह… हय… याह… और ज़ोर से चोद … कितना मज़ा देने लगा.

चाची बीच में आकर मुझे किस करने लगीं. मैं उनकी चूत में उंगलियां करने लगा. मानो जन्नत जैसे लग रहा था. दो दो हूरें मुझे नसीब हो गई थीं. लेकिन असली जन्नत तो हिना आंटी के पास थी.

मैं- मुझे अब हिना आंटी की चूत कौन दिलवाएगा?
परवीन- हिना को पाना इतना आसान नहीं है.
मैं- इसीलिए तो आप दोनों से मदद मांग रहा हूँ.

परवीन और चाची सहमति दे दी. मैं मस्त हो कर आंटी का जी भर के चोदने लगा.

मैं- आंटी, मेरा लण्ड आपकी गाँड़ देख कर खड़ा हो जाता था. आज मुझे आपकी गाँड़ मारनी है … पहले कभी गाँड़ मरवाई है?
परवीन- इतनी बड़ी गाँड़ है … तुम्हें क्या लगता है … बिना मरवाए हो गई. तेरे अंकल पहले बहुत कुछ करते थे, लेकिन अब कुछ नहीं करते.
मैं- लेकिन आंटी आपकी गाँड़ मारने के लिए अभी समय नहीं है.
परवीन- कल मेरे घर आ जाना, मैं सब इंतज़ाम करती हूं … आआआह..

कोई पांच मिनट में ही आंटी एक बार झड़ चुकी थीं. मैं लगा रहा और आंटी भी जल्दी ही दुबारा गरम हो गईं. इस बार मैं और आंटी दोनों एक साथ एक दूसरे के बांहों में झड़ गए.

हम दोनों एक बार चीख उठे- आआह ऊऊह … बहुत मज़ा आया …
परवीन- कैसा मस्त लण्ड पकड़ा है तूने रेशमा … थैंक्यू जीशान.

आंटी मुझे किस करने लगीं. मैंने जोश में आकर उनका एक होंठ काट लिया. आंटी की चीख निकल गई.

मैं- आंटी अभी बहुत कुछ बाकी है.

चाची उदास थीं. क्योंकि हम दोनों ने उनको नज़रअंदाज़ कर दिया था.

मैं- चाची रात यहीं पे रुकूँगा, तुम चिंता न करो.
चाची- थैंक्यू … लव यू बेटा.

इतने में दरवाजे की घंटी बजी, चाचा आ गए थे. हम सभी ने जल्दी जल्दी कपड़े पहने. मैं कपड़े पहनते वक्त भी सोच रहा था कि कल तो परवीन आंटी की मोटी गाँड़ मिलने वाली है ही.

कल परवीन आंटी की मोटी गाँड़ की चुदाई होगी. आपको कहीं जाना नहीं है.
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रेशमा ने आंटी को चुदते हुए पकड़ा (Reshma Ne Aunty Ko Chudte Hue Pakda) रेशमा ने आंटी को चुदते हुए पकड़ा (Reshma Ne Aunty Ko Chudte Hue Pakda) Reviewed by Priyanka Sharma on 11:20 PM Rating: 5

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