पहली बार चुदाई की शुरुआत-2 (Pehli Baar Chudai Ki Shuruaat-2)

पहली बार चुदाई की शुरुआत-2
(Pehli Baar Chudai Ki Shuruaat-2)

अभी तक आपने पिछले भाग पहली बार चुदाई की शुरुआत-1 (Pehli Baar Chudai Ki Shuruaat-1) में पढ़ा कि मेरी स्कूल की दोस्त मुझे कोचिंग क्लास के बाहर मिली. मैंने क्लास में ही उसे प्रोपोज कर दिया.
अब आगे:

मैंने सोचा सबसे आखिर में निकलूंगा मगर सुहानी ने उठते हुए कहा- चलना नहीं है क्या?
तब मैं उठा और उसके पीछे बाहर निकलने लगा।
बाहर निकले तो अगला बैच अंदर हुआ और हमारी बैच के ज़्यादातर अपने रास्ते निकल गए.

तब सुहानी बोली- तुम इतने सहमे हुए क्यों हो? जवाब तुम्हें मिल तो गया, तुम्हें तो खुश होना चाहिए आर्यन!
मैं- वो बात नहीं है, बस पहली बार इतनी हिम्मत जुटाई और प्रोपोज़ किया मगर जोश में कर तो दिया सबके सामने फिर …

सुहानी- बस वही गलती करी तुमने सबके सामने प्रोपोज़ करके … वो ठीक नहीं हुआ। बात कुछ और नहीं है माय डिअर, बस ये बात हमारे बीच की है, हमारे रिलेशन की है और मैं नहीं चाहती कि कोई इसका मज़ाक बनाये। तुम समझ सकते हो। चलो अब चलती हूँ, सिम्मी वेट कर रही है, शाम को बात करते हैं।
ओके बाय बोलकर उसने अपनी स्कूटी निकाली और चली गई।

मैं भी घर पहुंचा, कुछ खाया और आराम करने लगा। मैं तो बस सुहानी के मैसेज का इंतज़ार कर रहा था कि कब वो फ्री हो और हम बात करें मगर इंतज़ार करते करते शाम भी निकल गयी और सुहानी का कोई मैसेज भी नहीं आया।
फिर मैंने 2-3 बार ???? मैसेज किया। फिर भी कोई जवाब नहीं आया। फिर मैंने सोचा कि कल मिलेगी तो खबर लूंगा।

मगर रात 10 बजे बाद सुहानी का मैसेज आया- हाय सॉरी डियर, बिजी थी। वैसे, क्या कर रहे हो?
मैं- सोच रहा हूं, तुम पर गुस्सा होऊं या प्यार करूं तुमसे।
सुहानी- तो सोच लो, सोचने के बाद बात कर लेंगे। क्या यार, बिजी थी इसलिए बात नहीं कर पाई, अब पूरी रात पड़ी है, जितनी चाहे बात कर लें।

मैं- चलो ठीक है, पहला दिन है, पूरा दिन तुम्हारे लिए वेट करूं फिर न मिलो तो गुस्सा तो आएगा ना।
सुहानी- अच्छा बेटा, पहले दिन ही इतनी बैचैनी, क्या बात है। वैसे ये कोई पहला दिन नहीं है रिलेशन का, पहले का पार्ट-2 है।

मैंने गुस्सा छोड़ते हुए और मक्खन लगाते हुए कहा- अच्छा, वैसे एक बात तो है, किस्मत वाले को ही तुम जैसी परी मिलती हो, मेरी तितली मुझे इस रूप में मिलेगी सोचा नहीं था। बोल्ड एंड ब्यूटीफुल।
सुहानी- यही सोच लो कि तुम्हारे लिए ही खुद को निखारा है।

मैं- एक बात फिर से पूछूं, सच बताना, सच में इन 2 सालों में तुम्हारा किसी से कोई रिलेशन नहीं रहा, मतलब कोई बॉयफ्रेंड नही?
सुहानी- सच में यार, नहीं रहा।

मैं- इतनी सुंदर लड़की का कोई बॉयफ्रेंड नहीं रहा, विश्वास नहीं होता। किसी ने प्रोपोज़ नहीं किया क्या मेरी तितली को?
सुहानी- प्रोपोज़ तो बहुतों ने किया है। कइयों ने तो चांस मारने का भी सोचा है और सच कहूं तो मैंने भी सोचा था कि किसी को बना लूं बॉयफ्रेंड मगर रहने दिया। बोर्ड एग्ज़ाम थे, रिलेशन में रहती तो पढ़ नहीं पाती इसलिए भी … एक बात बताओ, तुम्हें इतना डाउट क्यों है।
मैं- यार, इतनी निखर गयी हो, ऊपर से नीचे तक पूरी की पूरी! सुना भी है कि लड़की की बॉडी में निखार सेक्स होने के बाद ही आता है, और जिस तरह तुम्हारा फिगर है तो मुझे भी लगा शायद इसी से निखरी हो।

सुहानी- अरे पागल, सेक्स से ही नहीं, अगर लड़की में सेक्स की इच्छा हो मतलब सेक्स हॉर्मोन्स पैदा हो जाये तो बॉडी अपने आप निखरने लगती है। इसका मतलब ये नहीं कि सेक्स किया हो। खुद को सैटिस्फाई करने से भी सेक्स हॉर्मोन्स बढ़ते हैं। समझे मेरे बुद्धू?
मैं- अच्छा, तुम खुद को ही?
सुहानी- हां डियर, तुम्हें पता ही है जब हमने पहली बार कोशिश किया था, तुमने मुझे हर जगह छुआ था। ठीक है हम कुछ कर नहीं पाए मगर तब से सेक्स की चाहत होने लगी थी मुझे और तब से अब तक खुद को ही खुश करना पड़ता है।

मैं शर्म छोड़ते हुए- कुछ ऐसा ही मेरा भी है। मगर अब तुम मिल गयी हो तो वो अधूरा काम जल्द की पूरा करूंगा। और तुम्हें पास पाकर तो वैसे भी कंट्रोल नहीं होता मुझसे।
सुहानी- वो तो मुझे पहले दिन से ही पता लग गया था बेबी। मगर अगर तुम्हारा किसी से रिलेशन होता तो तुम्हारे करीब नहीं आती मैं!

“मगर एक बात और आर्यन, हमारे रिलेशन की खबर किसी को नहीं होनी चाहिए, ना बाहर ना ही कोचिंग में। कुछ प्रॉब्लम हुई या बात घर में पता चल गई तो ठीक नहीं होगा।”
मैं- ओके डियर, आई प्रॉमिस, किसी को नहीं बताऊंगा। मगर सिम्मी को क्या कहोगी तुम?
सुहानी- उसकी चिंता तुम छोड़ दो, वो किसी को कुछ नहीं बताएगी। मुझे उसकी हर सीक्रेट्स पता है, वो भी रिलेशनशिप में है।

मैं ये जानकर सोच में पड़ गया, जिस सिम्मी को मैं सीधी साधी समझ रहा था उसका बॉयफ्रेंड भी है और जहां मुझे सुहानी पर शक था उसका कोई बॉयफ्रेंड नहीं है।
मैं सोच ही रहा था कि सुहानी का फिर मैसेज आया- सो गए क्या?
मैं- नहीं बेबी, बस ऐसे की कुछ सोच रहा था। वो सब छोड़ो, अभी क्या पहना है?

सुहानी- क्या, शार्ट और टॉप, क्यों, क्या हुआ?
मैं- क्या माल लग रही होंगी ना उनमें।
सुहानी- पागल मत बनो, सो जाओ वर्ना अभी शुरू हो जाओगे।
मैं- मतलब, क्या शुरू हो जाऊंगा?
सुहानी- ज़्यादा बनो मत, मुझे सोचकर तुम शुरू हो भी गए होंगे।

मैं सोचने लगा कि सुहानी को कैसे पता चला। मैं वाकई में सुहानी के ख्यालों में उससे बात करते हुए मुठ्ठ मार रहा था।
सुहानी का फिर मैसेज आया- क्यों आर्यन, सही है ना … होता है होता है, मैं हूं ही ऐसी ‘माल’
इससे लग गया था कि वो मुझे छेड़ रही है।

अब मैं भी कहाँ रुकने वाला था- ज़्यादा मत उड़। वर्ना पहले छोड़ दिया था, अब नहीं छोडूंगा।
सुहानी- ऊऊ, मैं डर गई।
और गुड़ नाईट मेरे फट्टू बोलकर चली गई।

मैंने भी रिप्लाई किया- सही है, इस फट्टू से ही फटेगी एक दिन।
इस पर सुहानी का मैसेज नहीं आया तो मैं समझ गया कि वो गयी।
उस रात मैं सुहानी को सोचकर मुठ्ठ मार कर ही सोया।

अगले दिन मैं कोचिंग के लिए तैयार हो रहा था तभी सुहानी का मैसेज आया- आर्यन जब तक मैं ना आऊं, क्लास में अंदर मत जाना।
मैं बाइक लेकर निकला और कोचिंग के बाहर बाइक पार्क की, सुहानी का इंतज़ार करने लगा।

इतने में मेरा दोस्त भी आ गया। मुझे वहीं खड़ा देखकर उसे लगा कि मैं उसके लिए ही रुका हूँ। उसने भी बाइक पार्क की और पास आकर बोला- चलें?
मैंने उसे बोला- तू चल, मैं आता हूं। कल के लिए सुहानी को सॉरी बोलना है। नाराज़ हो गयी थी कल। अंदर सबके सामने नहीं बोल सकता तो उसके लिए ही रुका हूँ। तू जा और मेरे लिए सीट रोक … मैं आता हूं। इसपर वो मान गया और अंदर चला गया।

फिर थोड़ी देर में सुहानी और सिम्मी भी आ गई। अपनी ही स्कूटी में सुहानी पीछे बैठी थी। दोनों ने अपना चेहरा ढक रखा था। सिम्मी ने गाड़ी पार्क नहीं की और सुहानी ने इशारे से मुझे बाइक निकालने को बोला।

जैसे ही मैंने बाइक निकाली, सुहानी स्कूटी से उतरी और मेरी बाइक में पीछे बैठ गई और बोली- अब चलो यहां से जल्दी।

वो दोनों जानबूझकर देर से आई थी कि कोई हमें साथ में न देखे।

मैं भी बाइक स्टार्ट करके वहां से निकला। कुछ दूर जाकर मैंने सिम्मी से रुकने को बोला।
दोनों रुके, तब मैंने सुहानी से पूछा- चलना कहाँ है?
वो मज़ाक में बोली- जहां तुम ले चलो।

इस पर सिम्मी पहली बार मुझसे बोली- दोनों साथ हो। किसी ऐसी जगह जाओ जहां तुम दोनों रोमांस कर सको।
मैं- तुम साथ नहीं चलोगी?
सिम्मी- तुम दोनों बताओ, मुझे कोई दिक्कत नहीं है।
मैंने सुहानी को देखा तो उसने अपनी भौंहें ऊपर कर ली। मतलब था कि मैं ही बोलूं सिम्मी को कुछ।
तो मैंने बोल दिया- चलो साथ।

हमने एक जगह का प्लान किया और वहां के लिए निकल गए। अब वहां जाते वक्त सिम्मी ने मुझे बांहों में भरके अपना सिर मेरे पीठ में रख लिया। मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी मगर अच्छा भी महसूस हो रहा था।
पहली बार चुदाई की शुरुआत-2 (Pehli Baar Chudai Ki Shuruaat-2)
पहली बार चुदाई की शुरुआत-2 (Pehli Baar Chudai Ki Shuruaat-2)
फिर कुछ 10 मिनट में हम वहां पहुंचे और दोनों ने गाड़ी पार्क की। अब सुहानी और मैं एक-दूसरे का हाथ पकड़े हुए चल रहे थे और सिम्मी हमारे पीछे पीछे चल रही थी। धूप थी तो हम पेड़ की छांव में बैठ गए.
सिम्मी ने मेरे दोस्त के बारे में पूछा तो मैं बोला- बेचारा मेरे लिए सीट रोक कर बैठा होगा।
और जो मैंने उसको बोला, वो भी बता दिया।

इस पर सिम्मी बोली- क्या बात है … अच्छा चूतिया बनाया अपने दोस्त को।
मैंने उससे पूछा- दोस्त मानती हो तो एक बात यों ही पूछूं?
सिम्मी- सुहानी के बॉयफ्रेंड हो, सीधी सी बात है, दोस्त हो ही, पूछो।

मैंने सुहानी का हाथ पकड़ते हुए सिम्मी से बोला- कुछ नहीं, बस यूंही पूछ रहा हूँ कि हम दोनों अगर साथ कुछ देर घूमें तो तुम बोर नहीं होगी यहां बैठे-बैठे?
इस पर सिम्मी बोली- बिल्कुल नहीं यार, वैसे भी यहां इतने लोग है और हुई भी तो इधर-उधर घूम लूंगी।
मैं- अरे नहीं यार, ऐसे ही पूछ रहा था। वैसे मन तो है सुहानी के साथ अकेले में मिलने का मगर यहां ठीक नहीं रहेगा।

सुहानी कुछ नहीं बोल रही थी, बस मेरी और सिम्मी की बातें सुन रही थी।

सिम्मी फिर बोली- तुम दोनों चाहो तो हो सकता है, मैं आस-पास नज़र रख लूंगी। कोई डिस्टर्बेंस जैसा होगा तो मैं बता दूंगी। टाइम निकल रहा है।

मैं उठा और सुहानी को भी हाथ देकर उठाया और सिम्मी को बोला- चलो फिर, नज़र रखो।

फिर हम वहां से उठकर पार्क में थोड़ा अंदर की ओर गए जहां पेड़-पौधे और फूलों से भरी हुई जगह थी। और उन्हीं के बीच कुछ जानवरों की मूर्ति भी थीं। तो मैंने वहां एक जगह रुककर सिम्मी को बोला- तुम यहीं रुको और आस-पास ही रहना। कुछ खतरा लगे तो इन्फॉर्म कर देना।

सिम्मी बोली ‘ठीक है’ और मैं सुहानी के साथ पार्क के कोने में हाथी के पीछे चला गया।

वहां तक तो सुहानी खुशी खुशी चुपचाप चली मगर साइड में होते ही मुझे चूंटी मार के बोली- सिम्मी से बड़ी बातें हो रही हैं, पसन्द आ गयी क्या? प्लान मेरा, सब मैंने किया, काफी टाइम हो गया यहां आए और मुझसे ज़्यादा उससे बातें कर रहे हो।
मैं सुहानी के हाथ थामकर- कहाँ यार, कहाँ वो और कहां तुम। ऐसी कोई है जो मेरी तितली जितनी खूबसूरत हो। उसको पटाना था और यहां भी इसलिए लाया ताकि वो नज़र रखे और हम प्यार करें।
सुहानी- रहने दो तुम! तुम बस यहां लाये हो और ये सब हम घर से ही सोच कर आए थे, ऐसा ही कुछ।
मैं- वो सब छोड़ो, हम क्या यहां बातें करने आये हैं?
सुहानी- और क्या करें?
मैं- वो भी मैं ही बताऊं?
और सुहानी से एक ‘किस’ करने को बोला।

सुहानी ने कोई ऐतराज नहीं किया और मुझे अपनी आंखें बंद करने को बोली।
मैंने कहा- क्यों?
तो सुहानी बोली- तुम बस बन्द करो।

मैंने उसकी बात मान ली और अपनी आँखें बंद की। सुहानी ने मेरी आँखें अपने उल्टे हाथ से ढक ली और अपना एक हाथ मेरे सिर में पीछे से पकड़कर अपने होंठों से मेरे निचले होंठ में एक बहुत ही प्यारा ‘किस’ किया।
उसके ‘किस’ करने से साथ ही उसकी साँसों की गर्माहट और उसकी महक ने जैसे मुझे मदहोश ही कर दिया। मुझे उसके ‘किस’ करने का वो अंदाज़ बहुत पसंद आया।

फिर मेरी आँखों से हाथ हटाकर बोली- बस?
मैं- कहाँ यार … एक मिनट भी ‘किस’ नहीं किया और बस बोल रही हो। एक बार और प्लीज़ मगर इस बार मैं करूँगा।
सुहानी बोली- तो मैं आँखें बंद करूं?

मैंने ‘ना’ बोला और अपने होंठों को सुहानी के होंठों के करीब ले जाकर उससे अपने होंठ खोलने का इशारा किया। सुहानी ने अपने होंठ खोले तो मैंने उसके ऊपरी होंठों को अपने होंठों के बीच रखकर उसे स्मूच करना शुरू कर दिया। मैं उसके होंठों को ऐसे ‘किस’ कर रहा था जैसे किसी मीठी चीज़ से उसका रस चूस रहा था।

कुछ पल में सुहानी ने भी अपने निचले होंठ बन्द किये और मेरे बालों को पकड़ कर मुझे कस कर ‘किस’ करने लगी। हम दोनों किसिंग में इतना खो गए थे. तभी सुहानी का मोबाइल बजने लगा। कॉल सिम्मी का था, यह देखकर सुहानी बोली- ये लड़की भी ना!

बोलकर फ़ोन उठाया तो सिम्मी बोली- इस तरफ कुछ लोग आ रहे हैं, अगर तुम दोनों का हो गया हो तो आ जाओ वरना कोई उस तरफ आ गया तो तुम्हें देख लेगा।
सुहानी ने ‘ओके बेबी’ बोलकर फ़ोन काटा और मेरी तरफ प्यार से देखा।
मैंने उसे गाल में ‘किस’ किया और बोला- सुन लिया, चलें।

तभी सुहानी ने अपने रुमाल से मेरे होंठों के आस पास साफ किया। उसके होंठों की चमक मेरे होंठों के आस पास लग गयी थी, उसे साफ कर रही थी, फिर बोली- अब चलो।
हम दोनों एक-दूसरे का हाथ पकड़कर वहां ने वापस सिम्मी के पास आ गए। फिर थोड़ा बहुत घूमकर हम वहां से निकल गए। कुछ दूर तक तो सुहानी मेरी बाइक में ही मुझे पकड़कर बैठी फिर सिम्मी के साथ अपने घर चली गई।

कहानी जारी रहेगी.
अगला भाग: पहली बार चुदाई की शुरुआत-3 (Pehli Baar Chudai Ki Shuruaat-3)
पहली बार चुदाई की शुरुआत-2 (Pehli Baar Chudai Ki Shuruaat-2) पहली बार चुदाई की शुरुआत-2 (Pehli Baar Chudai Ki Shuruaat-2) Reviewed by Priyanka Sharma on 1:52 AM Rating: 5

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