माँ को चढ़ा चुदने का बुखार (Maa Ko Chadha Chudne Ka Bukhar)

माँ को चढ़ा चुदने का बुखार (Maa Ko Chadha Chudne Ka Bukhar)


दोस्तो, मेरा नाम वैभव है और मैं दिल्ली का रहने वाला हूं. यह कहानी तब की है जब मैं बारहवीं कक्षा में पढ़ता था। यह सेक्सी कहानी मेरी माँ की है.

मेरी माँ का नाम वेलम्मा है। उनकी उम्र 39 साल है पर इस उम्र में भी अच्छी-अच्छी लड़कियों को फेल कर देती हैं. मोटी मोटी चूची खरबूजे की तरह और बाहर को निकली हुई मोटी गांड। कोई भी एक बार देख ले तो मेरी माँ का दीवाना हो जाए!

मेरे पापा की मौत एक साल पहले बीमार होने के कारण हो गई थी।

हमारा एक पड़ोसी है हितेश जिसकी उम्र 28 साल है। चौड़ी छाती, लंबा कद सांवला रंग का है उसका! बांका जवान है. मैं उसे हितेश भैया बोलता हूं।
हितेश ने हमारे पड़ोस की कई औरतों को चोदा है। उसने मेरे एक दोस्त की माँ को भी चोदा है। यह बात मुझे दोस्त ने ही बताई थी, उसने खुद ही अपनी माँ की चुदाई देखी थी.

पर मैं फिर भी हितेश भैया के साथ रहता हूँ क्योंकि हितेश भैया मेरा काफी ध्यान भी रखते हैं। कभी मुझे चॉकलेट, कभी आइसक्रीम खिलाते हैं।
मुझे खिलाने पिलाने के बाद वो मेरी माँ के बारे में पूछता रहता है- वैभव, तुम्हारी माँ क्या कर रही है? आज क्या पहन रखा है?
और मैं उसे सब बता देता था।
हितेश भैया किसी ना किसी बहाने हमारे घर आते रहते हैं.

मुझे पता था कि मेरी माँ भी चुदाई के लिए तड़प रही थी क्योंकि पापा के बिना उनकी चूत प्यासी रहती थी.

एक दिन जब मैं स्कूल से आ रहा था तो अचानक मुझे रास्ते में हितेश भैया मिल गये. वे बोले- वैभव, चल मैं तुझे घर पर छोड़ देता हूं।
रास्ते में एक दुकान पर से मुझे चॉकलेट दिलाई.

जब हम घर पे आये तो मैं घर में घुसा, मैंने देखा कि माँ कमरे में कपड़े बदल रही थी. माँ ब्रा और पेटीकोट में थी, ब्लाउज पहन रही थी.
तभी हितेश भैया भी घर के अंदर आ गये.

उन्हें देखकर माँ ने जल्दी से साड़ी पहनी और हमारे पास आ गई। माँ ने मेरे हाथ में चोकलेट देखी तो हितेश से बोली- हितेश, तुम मेरे बच्चे का कितने अच्छे से ध्यान रखते हो।
हितेश बोले- अरे यह सब तो मैं आपके लिए ही करता हूं. वेलम्मा तुम आज ज्यादा ही खूबसूरत लग रही हो!

माँ मुस्कुरा गई और चूत को हल्के हाथ से खुजली करने लगी।

हितेश- वेलम्मा, आपको इस खुजली का कुछ इंतजाम करना होगा।
माँ- हितेश, तुम जानते हो कि अगर औरत का पति ना हो तो औरत को कितनी खुजली होती है और कितनी प्यासी होती है। और मैं तो एक विधवा हूं।
हितेश अपना लन्ड को मसलते हुए बोला- वेलम्मा, कभी जरूरत हो तो मुझे याद करके देखो।
माँ ने हां में सिर हिलाया एक मुस्कान के साथ।
और फिर हितेश भैया अपने घर चले गये।

जब दिसंबर की कड़ाके की ठंड पड़ रही थी, एक दिन रात के 11 बजे अचानक माँ की तबीयत खराब हो गई.
माँ ने आवाज देकर मुझे बुलाया.

जब मैं माँ के कमरे में गया तो माँ रजाई में लेटी थी। उस वक्त माँ ने पेटीकोट और छोटी सी समीज पहन रखी थी जिसमें माँ की चूची गोल और मोटी लग रही थी।

माँ- वैभव मुझे बहुत ठंड लग रही है और मेरी तबीयत भी ठीक नहीं है।
मैं बोला- ठीक है माँ, मैं किसी डॉक्टर को बुलाकर लाता हूं।
माँ- नहीं वैभव, इतनी रात में तुम्हें कोई डॉक्टर नहीं मिलेगा। तुम एक काम करो, हितेश को बुला कर लाओ.
“ठीक है माँ!” कहकर फिर मैं हितेश भैया को घर से बुलाकर लाया।

जब मैं माँ के कमरे में आया तो माँ का पेटीकोट एक कोने में पड़ा था, माँ ने शायद उतार दिया था. अब माँ नीचे से पूरी नंगी रजाई में लेटी थी।

हितेश भैया माँ के पास गये, उन्होंने मेरी माँ का हाथ पकड़ कर चेकअप किया.
वो बोले- वेलम्मा, तुम तो बुखार है!
माँ- पर हितेश … मुझे तो ठंड लग रही है, कुछ करो हितेश!

माँ ने हितेश भैया का एक हाथ पकड़ा और रजाई के अंदर डाल लिया और चूत के पास ले गई. हितेश भैया ने शायद एक उंगली मेरी माँ की चूत में डाल दी थी। माँ के मुंह से आआ आआह की आवाज आई।
मेरी माँ ने फिर हितेश की तरफ़ वासना भरी निगाहों से देखा और बोली- हितेश कुछ करो … नहीं तो मैं आज मर जाऊँगी।
हितेश भैया ने पजामा और टीशर्ट पहन रखा था.

फिर माँ मुझे बोली- बेटा वैभव, तुम अपने कमरे में जाकर सो जाओ. अब हितेश मेरा ख्याल रखने के लिए है रात में! तुम सो जाओ।
मैं काफी कुछ समझ चुका था तो मैं बोला- ठीक है माँ।

मैं अपने कमरे में जाकर लेट गया. काफी देर मैं लेटा रहा पर मुझे नींद नहीं आ रही थी. फिर 15 मिनट के बाद मैंने सोचा कि देख कर आता हूं कि हितेश भैया माँ के साथ क्या करते हैं।
जब मैं माँ के कमरे के पास गया तो कुछ जोर जोर से सांसें चलने की आवाज़ आ रही थी और माँ के कमरे का दरबाजा बन्द था.

फिर मैं खिड़की के पास गया जिससे अंदर का साफ साफ दिखाई रहा था.

मैंने अंदर देखा तो हितेश भैया नंगे खड़े थे और माँ घुटनों के बल बैठकर हितेश भैया का लन्ड चूस रही थी. भैया का लन्ड 8 इंच का तो होगा ही … और 3 इंच मोटा।

माँ ने भैया का लन्ड अपने हाथों में ले लिया और उसने बिना देर किये सीधा अपने मुंह में ठूंस लिया. हितेश भैया ने अपनी आँखें बंद करके अपना लन्ड माँ के मुंह में अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

और हितेश बीच बीच में माँ के बालों को पकड़कर उसके मुंह को अपनी तरफ दबा देता जिससे लन्ड माँ के गले तक उतर जाता माँ की आँखों से आँसू निकालने लगे तो लन्ड मुंह से बाहर निकाल दिया।

अब मेरी माँ बोली- हितेश, तुम्हारा लन्ड चूस कर मुझे आज मजा आ गया.
हितेश बोले- आ आ मेरी रानी और चूस … वेलम्मा यार तुम कितना अच्छा लन्ड चूसती हो।

मेरी माँ ने भैया का लन्ड फिर अपने मुंह में ठूंस लिया. माँ एक हाथ से अपनी चूत को भी मसल रही थी.
करीब 10 मिनट तक माँ ऐसे ही लन्ड चूसती रही।

फिर भैया ने कहा- वेलम्मा अब मुझे तेरी चूत की चुदाई करनी है।

माँ एकदम से बोली- यार … तो किस बात की देर है? मेरी चूत गर्म है, अपना लन्ड डाल दो।
फिर माँ पलंग पर लेट गई और उन्होंने अपनी टांगों को चौड़ी करके फैला दी। हितेश भैया माँ के ऊपर आ गये और अपने लन्ड को माँ की चूत पे सेट किया।

तभी माँ बोली- जल्दी करो हितेश ! फाड़ दो इसे उम्म्ह… अहह… हय… याह… बहुत सालों से प्यासी है मेरी ये चूत।

हितेश ने एक जोर का झटका मारा और उनका लम्बा लन्ड मेरी माँ की गीली चूत फाड़ता हुआ पूरा अंदर चला गया।
माँ को चढ़ा चुदने का बुखार (Maa Ko Chadha Chudne Ka Bukhar)
माँ को चढ़ा चुदने का बुखार (Maa Ko Chadha Chudne Ka Bukhar)
माँ जोर से चिल्ला उठी और कहने लगी- उफ़ हितेश निकाल ले इसे … नहीं तो मैं मर जाऊँगी। मेरी चूत फाड़ दी इसने!
हितेश- शांत हो जा वेलम्मा … थोड़ी देर बाद तेरा दर्द अपने आप कम हो जयेगा।
माँ ने रोते हुए कहा- बहुत दर्द हो रहा है हितेश! मेरी फट गयी है.

मेरी माँ की आँखों से आँसू गिर रहे थे।

अब हितेश फिर से माँ के गालों और होठों को चूमने लगे एक चूची को मुँह में लेकर चूसने लगे।

फिर थोड़ी देर बाद मेरी माँ की चूत का दर्द कम हुआ तो माँ वासना से अपनी गांड को ऊपर नीचे करने लगी। फिर हितेश भी धीरे-धीरे लन्ड को अंदर बाहर करके मेरी माँ की चुदाई करने लगा।
अब माँ आहें भरने लगी- उहहह … ओह हहह … अऊऊऊ हितेश आराम से … हहह हितेश … अंदर तक डालो … अहह … ऊऊऊऊ … ईईईई! हितेश तेजी से … मजा आ रहा है!

हितेश- अहहह … क्या मुलायम चूत है वेलम्मा तेरी … ले अंदर तक ले … तेजी से ले ले।

फिर अचानक हितेश ने धक्कों की गति तेज कर दी। कमरे में मेरी माँ की सिसकारियाँ गूँज रही थी- ऊह … आह हह हहह … और तेज … फाड़ दे इसे … ईस्स … बहुत मजा आ रहा है … ईहह … आहहह हहहह … आज तो मैं मर ही जाऊँगी … उहह … अअ मेरा आने वाला है … और तेज … उउउहह … तेज हितेश … निकल गया … मजा आ गया।

फिर एक मिनट बाद माँ बोली- अब बस भी करो हितेश!
हितेश भैया बोले- हुउउन … तुमने तो अपना पानी निकाल लिया लेकिन मुझे भी अभी बहुत टाइम है।
माँ ने कहा- थोड़ी देर रुक जाओ जान … तुम्हारा लन्ड बहुत सख्त है. इतनी आसानी से नहीं थकता।

अब हितेश भैया ने माँ को खड़ा किया और एक पैर पलंग पर तो दूसरा पैर जमीन पर रख दिया। हितेश भैया ने अपना लन्ड माँ की चूत पर रख और जोर जोर से लन्ड को अंदर बाहर करने लगे।

माँ हितेश की बांहों में समा गई. फिर से कमरे में माँ की सिसकारियाँ गूँज उठी- उहह हहह हहह अहह मर गई रे … रे जोर से!
हितेश- क्या चूत है तुम्हारी … चूत के अंदर तक … आहह अहह क्या मजा आ रहा है .. मेरा पानी आने वाला है … कहाँ निकालूँ जल्दी बोलो?
माँ- मुझे तुम्हारा वीर्य पीना है। मेरे मुंह में निकाल दो।

फिर माँ घुटनों के बल बैठ गई और हितेश भैया के लन्ड को हाथों से सहलाने लगी।
कुछ ही सेकेंड में हितेश भैया ने अपनी वीर्य की धार माँ के मुंह में निकाल दी जिसे माँ पूरा पी गई.

माँ बोली- हितेश मुझे आज तुम्हारे साथ चुदाई करके मजा आ गया. इतना मजा तो मुझे अपने पति के साथ भी नहीं आया था।
फिर हितेश भैया की बांहों में समा कर मेरी ताजी ताजी चुदी माँ अपने यार के होठों को चूमने लगी.
माँ बोली- मेरे हितेश, और चोद मुझे!

फिर माँ और हितेश भैया की चुदाई पूरी रात चलती रही।
पर मुझे तो नींद आने लगी थी तो मैं अपने कमरे में जाकर सो गया.
उसके बाद तो हितेश भैया अक्सर रात को मेरी मां चोदने आने लगे थे.

दोस्तो, मेरी माँ की प्यासी चूत की चुदाई कहानी आपको कैसी लगी? मुझे जरूर बताना।
माँ को चढ़ा चुदने का बुखार (Maa Ko Chadha Chudne Ka Bukhar) माँ को चढ़ा चुदने का बुखार (Maa Ko Chadha Chudne Ka Bukhar) Reviewed by Priyanka Sharma on 3:01 PM Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.