कुंवारी चूत को चुदने की तड़प (Kunwari Choot Ko Chudne Ki Tadap)

कुंवारी चूत को चुदने की तड़प
(Kunwari Choot Ko Chudne Ki Tadap)


दोस्तो, मेरा नाम समीरा है और मेरी उम्र अभी 26 साल की है। दोस्तो, सबसे पहले आपको बता दूँ अपने बदन के बारे में … मैं गोरी हूँ फिगर 30-28-32 का था तब। मैं नार्मल सी लड़की थी न मोटी और न पतली … मेरे दूध भी ज्यादा बड़े नहीं थे, छोटे ही थे।

कालेज में मेरी ज्यादा सहेलियां नहीं बनी थी। उस समय बस शालिनी नाम की ही मेरी अच्छी सहेली थी, हम दोनों ही एक दूसरे से खुल कर हर बात किया करती थी। वो भी दिखने में काफी सुन्दर थी।

हम दोनों को ही बहुत सारे लड़के लाइन मारा करते थे। मगर शालिनी ने मुझे साफ़ साफ़ कह दिया था कि यहाँ किसी भी लड़के से दोस्ती मत करना।

वैसे भी इन सब से मुझे बहुत डर लगता था कि घर वालों को पता लगा तो क्या होगा और बदनामी अलग होगी। इसलिए मैं ज्यादा किसी लड़के की तरफ ध्यान नहीं देती थी, बस अपने काम से काम रखती थी।

शालिनी की उम्र मुझसे 1 साल ज्यादा थी और वो चुदाई का मजा ले चुकी थी। मगर किसी को पता नहीं लगता था।

एक दिन बातों बातों में उसने मुझे बताया कि मैं डेटिंगबुक में एक लड़के से मिली थी। वहीं से चुदाई तक बात गई और किसी को पता भी नहीं चला। हम दोनों सहेलियों में अक्सर सेक्स से जुड़ी बातें हुआ करती थी।

एक दिन हम दोनों ऐसे ही बात कर रही थी और उसने मुझे अपनी चुदाई के बारे में बताया। मैं भी नई नई जवान हुई थी, उसकी वो बात हमेशा याद आती थी। अब मुझसे भी रहा नहीं जाता था सच कहूँ तो ऐसा उस उम्र में होता ही है। अब मैं हमेशा उससे सेक्स के विषय पर बात किया करती थी।

वो भी जान चुकी थी शायद मेरी भावनाओं को … तो एक दिन बोली- अगर तुझे भी करना है तो बोल, मैं कुछ करूँ?

मगर मेरे दिल में जो डर था, उसके कारण मैं मना करती रही। मगर वो एक दिन बोली- क्यों न तू भी डेटिंगबुक में जा और वहाँ किसी को तलाश कर ले और अपनी इच्छा को पूरा कर ले।

और उसने मुझे भी डेटिंगबुक में जोड़ लिया, मेरी कुछ अच्छी फोटो भी उसमें लगा दी। बस उसमें मेरा नाम असली नहीं था और न ही मेरा पता।

उसमें मुझे लड़कों के बहुत सन्देश आते थे. मगर कुछ तो पसंद नहीं आते और कुछ को मैं अपने डर के कारण जवाब नहीं दे पाती थी.

बहुत दिनों तक ऐसा ही चलता गया।

फिर एक रात मैं डेटिंगबुक चला रही थी, तभी एक सन्देश आया. उसके आईडी को ओपन करके देखा तो किसी अक्षय नाम का आदमी था उम्र 45 साल.
कुछ देर सोचने के बाद मैंने भी पहली बार उसका जवाब दे दिया. इस तरह हम दोनों के बीच बात शुरू हुई.

उन्होंने अपने बारे में बताया और मैंने अपने बारे में. वो दिल्ली के रहने वाले थे.

उस रात हम दोनों ने करीब 2 घंटे बात की और फिर मैं सो गई.

अगले दिन कालेज में मैंने शालिनी को ये बात बताई।
उसने कहा- अरे ये तो अच्छा है. तू उस अंकल को ही पटा ले क्योंकि वो यहाँ के रहने वाले भी नहीं हैं और वो ये सब बात गुप्त भी रखेंगे, तेरे को मजा भी बहुत देंगे क्योंकि वो काफी अनुभव वाले भी होंगे!

उसकी बात में तो दम था, मेरे मन में अब तो उनके प्रति वासना जाग गई थी. मेरी नई नई जवानी को लन्ड की बहुत जरूरत महसूस होती थी, मैं भी वासना में अन्धी हो चुकी थी.

उस रात मैं 9 बजे से उनके सन्देश का इन्तजार करने लगी मगर उनका सन्देश नहीं आ रहा था. मुझे तो जैसे वासना ने बहका दिया था, मेरी आँखों से नींद गायब हो चुकी थी.

तभी करीब 11 बजे उनका सन्देश आया. मैंने तुरंत ही उसका जवाब दिया और हम दोनों की बात शुरू हो गई।
उस रात जैसे वो भी मुझसे सेक्स की बात करना चाहते थे.

उन्होंने ही शुरुआत की, मेरा फिगर पूछा और मेरी कुछ फोटो मांगी. मेरी फोटो देखकर तो वो भी गर्म हो गए,
उस रात हम दोनों ने ही खुल कर सेक्स की बात की. सुबह के 4 बजे तक हम दोनों ने बात की. और ये सब अब तो रोज का काम हो गया.

ऐसे ही 2 महीने बीत गए। अब वो मुझसे मिलना चाहते थे। मैं भी तो यही चाह रही थी मगर उनसे कहाँ मिलूं, ये समझ नहीं आ रहा था.

इसके लिए मैंने फिर शालिनी का सहारा लिया.
उसने ही बताया कि किसी अच्छे से होटल में तुम दोनों मिल लो और तुझे घर से लाने की जिम्मेदारी भी मेरी।

कुछ ही दिनों में शालिनी के भाई की शादी थी. उसने कहा कि मौका अच्छा है, उनको बुला ले. तू शादी के बहाने मेरे घर आ जाना और यहाँ से ही उनसे मिलने भी चली जाना.
यह प्लान मुझे पसंद आया,  ये सब बात अपने दोस्त अक्षय को बता दी.
वो भी तैयार हो गए और फिर हम दोनों का मिलना तय हुआ 22 दिसम्बर।

अब तो मुझे बस मिलने की जल्दी थी मेरी जवानी को अब मुझे सम्भालना मुश्किल हो रहा था। दिन रात बस मैं सोचती रहती कि क्या होगा क्या नहीं?

और ऐसे करते करते 20 दिसम्बर का दिन आया. उस दिन मुझे शालिनी के यहाँ जाना था. मैंने अपने सभी जगह के बाल साफ़ किये और बिल्कुल तैयार होकर घर में थी.
शालिनी मेरे घर आई, मम्मी पापा से इजाजत ली और मुझे अपने साथ अपने घर ले गई.
वो पहले से चुदाई कर चुकी थी इसलिए उसने और अच्छे से मुझे सब बात समझाया. 2 दिन मैं उसी के साथ थी.

और 22 दिसम्बर को शाम को उनकी ट्रेन आई, मैं और शालिनी रेलवे स्टेशन गई।
वहाँ उनसे पहली मुलाकात हुई, वो काफी लम्बे चौड़े कद के थे.

शालिनी ने हम दोनों को ऑटो में बैठाया और अपने घर चली गई।
हम दोनों एक होटल पहुंचे, वहाँ उन्होंने एक शानदार रूम लिया और हम दोनों रूम में चले गए।

काफी शानदार कमरा था वो, मुझे तो ऐसा लग रहा था कि मेरी सुहागरात होने जा रही है।
मेरे मन में बहुत सारा डर और कई सवाल घूम रहे थे कि जैसे क्या मैं सही कर रही हूँ? एक अजनबी के साथ ऐसे मिलना क्या सही है? ये मेरे पापा के उम्र के हैं क्या इनके साथ सोना मेरे लिए अच्छा है या नहीं?

मगर अगले ही पल मेरी वासना मेरे ऊपर हावी हो जाती और चूत में अज़ीब सी हलचल होने लगती. यही सब मेरे दिल और दिमाग में चल रहा था।

उन्होंने मुझे रूम में लाकर दरवाजा बंद कर दिया और अपना और मेरा समान आलमारी में रख कर मेरे पास आये और अपने दोनों हाथ मेरे कंधे में रख कर मेरी आँखों में देखते हुए बोले- समीरा मुझे अभी भी यकीन नहीं हो रहा कि तुम मेरे पास हो. मैंने कभी नहीं सोचा था कि तुम जैसी लड़की कभी मुझे मिलने आएगी।

उन्होंने बिल्कुल जल्दबाजी नहीं दिखाई, मुझे कहा- क्यों न हम दोनों आज कहीं घूमने चलें?
मैंने भी हाँ कह दी और हम दोनों ही तैयार होकर चल दिए।

सारा दिन हम दोनों मार्केट में घूमे, कुछ शौपिंग की, रेस्टोरेंट में खाना खाया और शाम को 7 बजे वापस होटल आ गए।

मुझे तो बस यही डर लग रहा था कि कोई हम दोनों को साथ में देख न ले.
मगर किस्मत मेरे साथ थी।

होटल में पहुंच कर वो बोले- समीरा, जाओ वो कपड़े पहन कर दिखाओ जो तुम्हारे लिए लिए हैं.
मैं बाथरूम में गई और अपने सारे कपड़े निकाल दिए और उनके दिलाये नये कपड़े पहन लिए।
लाल रंग की चड्डी, लाल ब्रा और लाल रंग की छोटी सी फ्राक … फ्राक तो इतनी ही थी कि किसी तरह मेरी जांघों को ढक रही थी। जालीदार होने के कारण मेरा गोरा बदन उसमें से झलक रहा था

जैसे ही मैं रूम में गई तो देखा कि अंकल ने वहाँ बीयर की 2 बोतलें मंगा के रखी हैं.
मुझे कुछ अज़ीब लगा तो पूछा- ये क्या है?
उन्होंने कहा- आज की रात हम दोनों के नाम रहेगी. आज तुम कुछ मना मत करना प्लीज।
मैं थोड़ी मुस्कुराती हुई बोली- ओके।

उन्होंने मुझे अपने पास बुलाया, अपने बगल में बैठा लिया, पूछा- समीरा सच सच बताओ … आज तक तुमने कभी सेक्स किया है?
“नहीं, आज तक नहीं किया है … आज जो होगा पहली बार ही होगा।”
वो थोड़ा मुस्कुराते हुए बोले- चलो पहले कुछ बीयर हो जाये।
और उन्होंने 2 ग्लास में बीयर डाली।

मैं पहली बात इसका सेवन कर रही थी इसलिए उसका स्वाद कुछ अज़ीब सा लगा मगर उन्होंने मुझे अपने हाथ से पूरा ग्लास पिला दिया.
इसी तरह से धीरे धीरे हम दोनों ने पूरी बीयर पी ली.

मुझे तो बहुत अज़ीब लग रहा था मगर मजा भी आ रहा था, डर का नामोनिशान नहीं था मेरे अन्दर … ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं खुल सी गई हूँ।
तभी उन्होंने अपना एक हाथ मेरी गोरी जांघों में रखा और कहा- समीरा जानती हो तुम्हें मैंने बीयर क्यों पिलाई क्योंकि तुम खुल कर मेरा साथ दो, बोलो दोगी ना मेरा साथ?
“हां क्यों नहीं…”

“तुम इतनी मस्त माल हो कि तुम्हें चोदने के लिए मैं कहीं भी जा सकता था। जितना खुश तुम मुझे करोगी, उससे कहीं ज्यादा मजा मैं तुम्हें दूँगा जान!”

वो पूरी तरह से नशे में थे और मैं भी। वो मेरी जांघों को सहलाते हुए मेरे पास आ गए। मेरी भी चूत में चुदाई का कीड़ा काटने लगा. मुझे खड़ा करके उन्होंने अपनी बांहों में ले लिया और अपने होंठ मेरे कापते होंठों पे रख दिए.

पहली बार किसी मर्द का चुम्बन पाकर मेरा बदन एकदम से काम्पने लगा। मेरे होंठ भी अपने आप उनका साथ देने लगे।
उन्होंने अपना एक हाथ मेरे कूल्हों पर लगा कर मुझे अपने से चिपका लिया। मेरी चूत पर उनका फड़फड़ाता लन्ड गुदगुदी करने लगा।

फिर उन्होंने मुझे ऐसे ही खड़े कर के एक झटके में मेरी फ्राक उतार फेंकी। मैं अब बस लाल रंग की ब्रा चड्डी में उनके सामने खड़ी थी।
मेरा गोरा बदन देख उनके मुँह से आअह निकल गई- वाअह … समीरा … तू तो मलाई है जान! इतना प्यारा बदन कहाँ छुपाया हुआ था? तेरे इस बदन की तो दुनिया दीवानी होगी. मगर मिली मुझे हो. मैं कितना किस्मत वाला हूँ।

अपनी इतनी तारीफ सुन मेरी तो बांछें खिल गई, मुझे अपने आप पर घमण्ड सा होने लगा, पहली बार मैं किसी मर्द से अपनी ऐसी तारीफ सुन रही थी।
वो मुझे ऊपर से नीचे तक घूरे जा रहे थे।

उन्होंने मेरी पीठ सहलाते हुए कहा- जानती हो, आज तक मैंने 10 से भी ज्यादा लड़कियों की चुदाई की है. मगर तुम उन सब से अलग हो तुमको तो जितना भी चोदे मन नहीं भर सकता।
अक्षय अंकल मुझे ऐसे ही खड़ी कर के मेरी जवानी की तारीफ किये जा रहे थे और मैं उनके इस तरह तारीफ करने से काफी अच्छा महसूस कर रही थी।

ऐसे ही बात करते करते उन्होंने मेरी ब्रा की क्लिप पीछे से खोल दी और धीरे से मेरी ब्रा मेरे जिस्म से अलग कर दी, मेरे दोनों दूध उछल कर उनके सामने आ गए।
उनको देख वो बोले- वाआह समीरा … आज तो लगता है तू मेरी जान ले लेगी. कितने प्यारे दूध है तेरे!

और सही में उनका कहना सही भी था, मेरे दूध ज्यादा बड़े तो नहीं थे मगर बेहद खूबसूरत थे, मेरे गोरे गोरे दूध और गुलाबी निप्पल किसी को भी पागल बना सकते थे।

वो अपने दोनों हाथों से दूध को सहलाने लगे मेरी तो आआ आअह्ह निकल गई। उनके सख्त कड़े हाथ मेरे मुलायम गोरे दूध पे बहुत तेज़ मजा दे रहे थे। उनके ऐसा करने से मेरे दोनों गुप्तांगों मतलब चूत और गांड के छेद में अज़ीब सी सनसनी फैल गई।

कुछ देर तक सहलाने के बाद उन्होंने झुक कर एक निप्पल को मुँह में भर लिया, मेरे जिस्म में तो बिजली कौंध गई. इतना सुखद अहसास पहली बार मुझे मिल रहा था।
मेरे दोनों निप्पल तन के खड़े हो चुके थे. सर्दी का मौसम था मगर मेरा जिस्म किसी आग की भट्टी की तरह गर्म था।
मेरी चूत ने भी पानी छोड़ना शुरु कर दिया था।

उनके चुम्बन करने से साफ़ तौर पर उनके अनुभव का पता चलता था। वो किसी भी तरह की जल्दबाजी नहीं कर रहे थे. खुद भी पूरा मजा ले रहे थे और मुझे भी उतना ही मजा दे रहे थे। काफी देर तक मेरे दोनों दूध से खेलने के बाद उन्होंने अपनी शर्ट और बनियान उतार दी उनका विशाल चौड़ा सीना और उस पे धुधराले बाल मुझे काफी पसंद आये। मुझे क्या हर लड़की को चौड़ी छाती वाला मर्द पसंद होता है।

उन्होंने मुझे अपने सीने की तरफ खींचा और मुझे अपने सीने से चिपका लिया। सर्दी के मौसम में दो गर्म जिस्म का ऐसा चिपकना काफी सुखद अहसास होता है।

अब तो वो मेरे पूरे बदन को अपने हाथों से सहलाने लगे और चुम्बन की झड़ी लगा दी।

धीरे से उन्होंने भी अपनी पैंट उतार दी. हम दोनों अब बस चड्डी में ही थे. उनका लन्ड मेरी जांघों पर तो कभी चूत पर ठोकर मार रहा था।
मैं तिरछी नज़र से उनके लन्ड को देखने की कोशिश कर रही थी, चड्डी के अन्दर से ही वो काफी विशाल लग रहा था।

मैंने आज तक बस वीडियो में ही लन्ड देखा था, आज पहली बार अपनी आँखों से देखने वाली थी।

वो बहुत तेज़ी से मुझे चूमने लगे, मेरे पूरे नंगे बदन पे उनका हर चुम्बन तीर जैसा लग रहा था।

उन्होंने बहुत प्यार से पूछा- समीरा तुम कितने किलो की हो?
“जी 38 किलो की … क्यों?”
“जानती हो मैं कितने का हूँ? 85 किलो का!”
“उफ्फ बाप रे …”
“चिंता मत करो, तुमको दबा नहीं दूँगा। इतने प्यार से चोदूँगा कि तुम मस्त हो जाओगी.”

“छीईईई ईईई!”
“क्या छीईईई?”
“कितनी गन्दी बात बोलते हैं आप?”
“क्यों … चुदाई करना गन्दी बात है क्या?”
“पता नहीं?”

वो मुस्कुराते हुए बोले- शर्माओ मत, खुल कर बात करो. इससे चुदाई का मजा दुगना हो जाता है। अभी तो शुरुआत है, आज रात भर में तुम भी खुल जाओगी.
“क्या रात भर करोगे?”
“तो क्या … आज रात न मैं सोऊँगा, न तुमको सोने दूँगा. आज तेरे इस बदन को चाट चाट के चुदाई करूँगा। आज तेरी पहली चुदाई है मेरी रानी … इसको तू हमेशा याद रखेगी कि कोई अंकल मिले थे जिसने तेरी चूत की सील तोड़ी थी।”

“दर्द भी होगा न?”
“हां होगा तो … मगर बस एक बार! उसके बाद तो तू जिंदगी के मजे लेने लगेगी. बस एक बार किसी तरह से दर्द सह लेना … बोल सहेगी न दर्द?”
“हां … बस आप आराम से करना।”
“अरे तू उसकी चिंता मत कर जान … तुझे तो प्यार से ही चोदना पड़ेगा, अभी तो तू फूल की कली है। बस मेरा साथ देती जाना … तुझे चुदाई का वो मजा दूँगा कि हमेशा याद करेगी मुझे!”

“बस अंकल … आप किसी को ये बात मत बताना!”
“अरे पागल है क्या? जो ये बात बताऊँगा किसी को? बस हम दोनों तक ही रहेगी ये बात … और जब भी तू कहेगी, मैं आ जाया करूँगा तेरी चुदाई करने!”
ऐसा कहते हुए मुझे अंकल ने अपनी गोद में उठा लिया और बोले- चल अब तैयार हो जा, अब रुका नहीं जाता तुझे देख कर!

उन्होंने मुझे पलंग पर प्यार से लेटा दिया और एक बार हाथ से पूरे जिस्म को सहलाते हुए कहा- सच में यार, माल है तू! आज का दिन याद रहेगा मुझे भी हमेशा!

मेरी बगल में खुद भी लेटते हुए मुझे अंकल ने अपनी आगोश में ले लिया और मेरे होंठों पे जोरदार चुम्बन करने लगे. मैं भी उनका पूरा साथ दे रही थी. उनका एक हाथ मेरे दूध को सहला रहा था और दूसरा हाथ मेरी जाँघों को!

धीरे धीरे वो मेरे ऊपर आ गए और उनके सीने से मेरे दोनों दूध दब गए. उनका लन्ड चड्डी के अन्दर से ही मेरी चूत को सहला रहा था. उनके वजन से मैं दबी जा रही थी. मेरा जिस्म उनके इस वजन के लायक था भी नहीं!

अब वो धीरे धीरे नीचे की तरफ जाने लगे और मेरी पतली कमर पे अपने गर्म होंठों से चूमने लगे. मेरी नाभि को अपने जीभ से कुरेदने लगे.
मुझे तो अब बहुत ही मजा आ रहा था.

ऐसा करते हुए वो मेरी चड्डी तक पहुँच गए और ऊपर से ही मेरी चूत पे एक चुम्बन किया. मुझे कुछ शर्म आ रही थी और मैंने हाथों से चूत को छुपाने की कोशिश की पर उन्होंने मेरे हाथ को हटा दिया और मेरी चड्डी की इलास्टिक पकड़ के धीरे धीरे नीचे सरकाने लगे.

कुछ ही पल में मेरी फूली हुई चूत उनके सामने थी. वो बोले- वाआआआह … जन्नत है.
मैं तो शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी.

वो अपने एक हाथ से मेरी गुलाबी चूत को सहलाते हुए बोले- क्या मस्त चूत की मालकिन हो तुम! मैं तो बहुत किस्मत वाला हूँ जो ये मुझे मिल रही है।
कुंवारी चूत को चुदने की तड़प (Kunwari Choot Ko Chudne Ki Tadap)
कुंवारी चूत को चुदने की तड़प (Kunwari Choot Ko Chudne Ki Tadap)
उन्होंने मेरे दोनों पैरों को फैला दिया और मेरी चूत की गुलाबी पंखुड़ियां फ़ैल कर उनका स्वागत करने लगी।
अपनी एक उगली से चूत के छोटे से छेद को छूते हुए बोले- बाप रे … पता नहीं तुम सह पाओगी या नहीं! पर तुम चिंता मत करो, सब हो जायेगा।
और अपना सर मेरी चूत पर झुका दिया.

अंकल ने अपनी जीभ को जैसे ही मेरी चूत पर रखा, मेरे मुँह से आअह्ह निकल गई. वे बहुत प्यार से वो मेरी चूत को चाटने लगे।

मेरी आँखें अपने आप बंद होती चली गई, मुझे पहली बार स्वर्ग सा आनन्द प्राप्त हो रहा था। मेरे मुँह से अपने आप ‘सी सी’ की आवाज निकलने लगी, मेरी पूरी चूत चिपचिपे पानी से सराबोर हो गई. उनके चूत चाटने से ही मुझे ऐसा लग रहा था कि उनको चुदाई का कितना तजुर्बा है।

मुश्किल से दो मिनट में ही मेरी चूत ने पहली बार पानी छोड़ दिया।

वो फिर भी नहीं रुके और लगातार चूत की चुसाई चालू रखी।

मुझसे तो बर्दाश्त ही नहीं हो पा रहा था, मैं अपने पूरे शरीर को बिस्तर पर यहाँ से वहाँ पटक रही थी.

कुछ ही पल में मैं फिर से गर्म हो चुकी थी।

अब उन्होंने मेरी चूत को छोड़ दिया और अपनी चड्डी को उतारने लगे. जैसे ही उनकी चड्डी निकली, उनका काला मोटा लन्ड मेरी तरफ होकर मुझे सलामी देने लगा. उसे देख कर तो मेरी सांस ही रुक गई जैसे … उसका गुलाबी रंग का मोटा सा सुपारा मेरी आँखों में झूलने लगा।

अब पहली बार मुझे डर लगा, मैं सोचने लगी कि कहीं मैंने गलत कदम तो नहीं ले लिया।
उनका लन्ड तो मेरी सोच से भी कही लम्बा और मोटा था।
मैं ऐसा सोच ही रही थी कि तब तक वो मेरे ऊपर आ गए। मेरी तो अब जैसे आवाज ही बंद हो चुकी थी। उनका गर्म लोहे जैसा लन्ड मेरी बिनचुदी चूत को सहला रहा था।

वो आकर मेरे होंठों को चूमते हुए बोले- तैयार हो न जान?
“नहीं!”
“क्यों?”
“इतना मोटा कैसे जायेगा?”
“सब चला जाता है … तुम बस डरो नहीं। मैं हूँ न … चिंता मत करो।”

वो उठे और मेरी कुंवारी चूत के पास बैठ गए और लन्ड के सुपारे को मेरी चूत पर ऊपर नीचे रगड़ने लगे. चूत पे थोड़ा सा थूक लगाया और फिर अच्छे से चूत में ऊपर नीचे करने लगे।
मेर भी आहें फिर से निकलने लगी- आह्ह ओओह ऊउह्ह्ह

अब फिर वो मेरे ऊपर आ गए और मुझे अपनी बांहों में भर लिया. मेरे गालों को जोर जोर से चूमने लगे, अपने सीने से मेरे दूध को दबाने लगे.
फिर एक हाथ से अपने लन्ड को मेरी अनचुदी चूत पर सेट किया और मुझे कसके जकड़ लिया और धीरे धीरे चूत में लन्ड का दबाव बढ़ाने लगे.

पर लन्ड अन्दर घुस ही नहीं रहा था। और फिर छिटक के पेट की तरफ चला गया।
उन्होंने कई बार कोशिश की पर लन्ड अन्दर जा ही नहीं रहा था. उनका सुपारा इतना बड़ा था कि छेद में घुस नहीं पा रहा था.

अंकल ने मेरी तरफ देखा और बोले- थोड़ा दर्द सह लोगी?
“नहीं नहीं … रहने दो नहीं जा रहा तो!”
“ऐसी बात नहीं … बस एक बार चला गया तो सब ठीक हो जायेगा।”
“नहीं … आपका बहुत मोटा है, नहीं जायेगा। मैं मर जाऊँगी … रहने दो, बाद में कर लेना।”

मेरे ऐसा कहने पर वो कुछ देर रुके और कुछ सोचने के बाद अपने बैग में से तेल की शीशी ले आये और बोले- बस एक बार और कोशिश करते हैं.
लन्ड में और चूत में खूब तेल लगा कर उन्होंने मुझे अपनी बांहों से जकड़ लिया और एक हाथ से चूत पर लन्ड सेट कर के अपने दोनों पैरों से मेरी जाँघों को दबा लिया.

“अब तैयार रहना तुम!” ऐसा बोल के अपने मुँह से मेरे मुँह को बंद कर लिया.
मैं समझ गई थी कि ये अब जरूर लन्ड पेल देंगे. मैंने अपनी आँखों को जोर से बंद कर लिया.

और उतने में ही उन्होंने जोरदार धक्का लगा दिया. मेरे पूरे बदन में दर्द की तेज़ लहर उठी. मैं उनसे छूटना चाह रही थी मगर हिल भी नहीं पा रही थी।
उनका आधा लन्ड मेरी चूत को चीरता हुआ अन्दर घुस गया था।

मेरी आँखों से आंसुओं की धारा बह निकली. मैं अपने नाख़ून उनकी पीठ पे गड़ा चुकी थी.

इतने में ही दूसरा धक्का भी लग गया और लन्ड चूत को फाडता हुआ पूरा अन्दर तक चला गया.
दर्द के मारे मेरा तो बुरा हाल हो चुका था। मेरी आँखों में अन्धेरा छा गया। ऐसा लग रहा था कि मैं होश में ही नहीं हूँ।

काफी देर तक वो मेरे ऊपर ही लेटे रहे, बीच बीच में थोड़ी थोड़ी लन्ड अन्दर बाहर कर लेते.
अब मुझे कुछ कुछ राहत मिली और दर्द कम हुआ. अब अंकल ने भी समझ लिया कि मेरा दर्द कम हो गया है तो वे लन्ड को मेरी कसी चूत के अन्दर बाहर करने लगे.
मेरी अभी भी आह्ह्ह् निकल जा रही थी मगर दर्द कम था।

उनकी पकड़ भी कम हो चुकी थी और कमर की रफ़्तार तेज़!
मुझे भी अब सुखद अहसास हो रहा था, मेरी आहें अब तेज़ हो रही थी.

उन्होंने पूछा- अब ठीक हो न?
“हाँ ठीक हूँ!”
“तो फिर चुदाई शुरू करूँ?”
मैंने शरमाते हुए अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया.

वो मेरी इजाजत पा चुके थे।

अब उन्होंने मेरी दोनों हाथ से मेरी गांड को पकड़ के थोड़ा ऊपर उठाया और तेज़ी से धक्के देना शुरू कर दिए.
“ऊऊ ऊऊईई माँआआ आऊउच उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओओओ ओह मम्मीईई आआआ नहीईई रुकोओओ आआअह्ह”
बस मैं यही बोले जा रही थी और मेरी चुदाई होती जा रही थी. दर्द भी था … मजा भी था … बहुत अज़ीब सा अनुभव था वो!

उनका मोटा लन्ड दनादन अन्दर बाहर हो रहा था। मेरी चूत से बहुत गन्दी सी आवाज आ रही थी. पूरा पलंग जोर जोर से हिल रहा था. हर धक्का चूत में तेज़ आवाज के साथ पड़ रहा था.

वो अपने होंठ मेरे होंठ तक लाकर मेरी गर्म सांस को महसूस कर रहे थे. अब तो अपने आप मेरी कमर चलना शुरू हो गई. मुझे बहुत शर्म आई कि पता नहीं वो क्या सोचेंगे.
पर मुझे भी अब चुदाई का मजा मिल रहा था. मेरी नई नई जवानी आज लुट चुकी थी. वो भी मेरी इस जवानी का भरपूर आनंद ले रहे थे.

कुछ ही पल में मेरा पूरा गोरा बदन लाल हो चुका था. वो किसी चुदाई मशीन की तरह मेरी चुदाई कर रहे थे.

अब तो उनके धक्के बर्दाश्त नहीं हो रहे थे तो मैं बोल पड़ी- बस धीरे करो।
“नहीं जान … अभी तो मजा आ रहा है!”

पता नहीं मेरी चूत का आज क्या होने वाला था?

कुछ ही देर में मेरी चूत की तेज़ गर्म धार फूट पड़ी, मैं तेज़ आअह आआअह आआआ अह करती हुई उनके सीने से चिपक गई। वो दनादन चोदते जा रहे थे।

और कुछ देर बाद उनका भी पानी निकला, उन्होंने लन्ड बाहर निकाल कर मेरे पेट पर गर्म गर्म वीर्य निकाल दिया। उनकी पिचकारी इतनी तेज़ थी कि एक धार सीधा मेरे चेहरे में आकर पड़ी.
उन्होंने अपनी चड्डी से मेरे पेट को साफ़ किया और मेरे ऊपर ही लेट गए।

आज मैंने अपना कुंवारापन खो दिया था। जिस वासनापूर्ति के लिए मेरा मन भटक रहा था, आज वो पूरी हो गई थी।
मेरी जवानी को उसका असली मजा मिलना शुरू हो चुका था।

काफी देर तक हम दोनों लेटे रहे और फिर एक बार उन्होंने कहा- फिर हो जाये?
मैं फिर से मुस्कुराते हुए चेहरा छुपा लिया.
और वो फिर से शुरू हो गए।

इस तरह उस रात 3 बार मेरी चुदाई हुई और हम दोनों 2 दिन साथ में रहे।

उसके बाद तो मैं जैसे चुदाई की आदी हो गई … या यों कहें कि मेरी वासना और बढ़ गई. वो मुझसे मिलने आने लगे और हम दोनों यों ही चुदाई का मजा लेने लगे।

फिर एक रात मेरे साथ ऐसी घटना हुई कि मेरी जिंदगी ही अलग मोड़ में आ गई थी।
वो कहानी भी आपको जरूर बताऊँगी अगली बार!
अभी के लिए अपनी समीरा को इजाजत दीजिये।
कुंवारी चूत को चुदने की तड़प (Kunwari Choot Ko Chudne Ki Tadap) कुंवारी चूत को चुदने की तड़प (Kunwari Choot Ko Chudne Ki Tadap) Reviewed by Priyanka Sharma on 12:46 PM Rating: 5

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