कर्ज चुकाने के लिए बॉस के साथ चुदाई (Karz Chukane Ke Liye Boss Ke Sath Chudai)

कर्ज चुकाने के लिए बॉस के साथ चुदाई
(Karz Chukane Ke Liye Boss Ke Sath Chudai)

मेरा नाम संजीव है, जयपुर में रहता हूँ. मेरा कद 5 फुट 11 इंच, उम्र 31 वर्ष है। पर यह कहानी मेरी पत्नी सुलेखा की है जिसकी उम्र 27 वर्ष, रंग सांवला, बूब्स साइज 34B, कद 5 फुट 2 इंच, एकदम दुबला छरहरा कामुक शरीर … मेरी बीवी सुलेखा को जो कोई एक बार भी देख लें वो गच्चा खा जाये कि यह लड़की शादीशुदा भी हो सकती है क्या!

सीधा कहानी पे आता हूँ। बात करीबी एक वर्ष पुरानी है. मेरे कंप्यूटर बिज़नेस में बहुत घाटा हो चला था, मेरे ऊपर दो लाख रुपये का कर्ज चढ़ गया था। मासिक किस्त भी भर पाना मुश्किल हो गया था।
तभी सुलेखा ने मुझे सुझाव दिया कि वो अगर कहीं कुछ महीने नौकरी कर लेगी तो मुझे मदद मिल जाएगी.
मैंने काफी देर सोच कर उसे हाँ कह दिया।

अब सुलेखा ने एक प्रमुख ऑनलाइन रोजगार साइट पे आवदेन शुरू कर दिए। तभी एक सप्ताह बाद सुलेखा मुझे बताया कि एक प्रमुख प्राइवेट कंपनी ने उसे इंटरव्यू के लिए बुलाया है।
मैंने खुश होते हुए कहा- यह तो बहुत अच्छी बात है.
पर सुलेखा ने उदास होते हुए कहा- पर पोस्टिंग गुरुग्राम में है।

मैंने काफी देर मौन रहते उसे पूछा- सैलरी कितनी दे रहे हैं?
सुलेखा बोली- 30,000 रुपये मासिक।
मैंने उसका उत्साह बढ़ाते हुए कहा- ठीक है, कर लो इंटरव्यू।

सुलेखा गुरुग्राम चली गयी और नसीब का खेल देखो उसको जॉब भी मिल गयी। देखते देखते एक महीना बीत गया, हम लोग रोज़ाना मोबाइल चैट से संपर्क में थे।

अचानक मेरे दिल को धक्का लगा जब सुलेखा मेरे कॉल को कट करने लगी। पूछने पे बोलती थी ‘ऑफिस का काम रहता है। बॉस फ़ोन करते रहते हैं।’
अब मुझे अपनी हालत पर गुस्सा बहुत आ रहा था।

इस तरह 3 महीने निकल गए। किश्तें चुकने लगी।

एक दिन मैं शाम को चाय दूकान पे बैठा था, तभी मैंने देखा सामने से सुलेखा चली आ रही और उसके हाथ में बड़ा बैग है।
पिछले 1 हफ्ते से बात नहीं हुई थी और उसका अचानक से दिखना मुझको छलावा लगा।

पर वो तुरंत मेरे पास आयी और बोली- बहुत भारी है बैग … उठा लीजिये।
तभी मुझको यकीन हो चला ‘हाँ ये सुलेखा ही है।’

मेरे मन में जैसे बारिश होने लगी और मोर नृत्य करने लगे बड़े उत्साह के साथ मैंने उसका बैग लिए और हम घर को चल दिए।

रात को खाना हमने बाहर से मंगवा लिया, फिर हम सोने की तैयारी करने लगे। मुझे लगा कि सुलेखा खूब बात करेगी जैसा उसका स्वभाव है चुलबुला … पर वो शाम से बिलकुल चुप थी।
मुझे लगा थकी होगी तो कुछ बोलना उचित न समझा और हम सो गए।

सुबह रोज की तरह मैं अपनी शॉप पे गया। तभी शाम को चार बजे मुझे बैंक से एक मेसेज मिला कि मेरा पूरा दो लाख क़र्ज़ चुकती हो गया है।
मेरा दिमाग ख़राब हो गया, कुछ समझ नहीं आया. मुझे लगा कि बैंक की तरफ से कोई गलती हो गयी होगी।
क्यूंकि बैंक अभी होने वाला बंद था तो मैंने अगले दिन पता करना उचित समझा।

रात को डिनर करने के बाद मैं और सुलेखा सो रहे थे।
तभी मैंने पूछा- सुलेखा क्या बात है आजकल बड़ी गुमसुम रहती हो? पहले तो खूब बोलती थी.
सुलेखा चिढ़ते हुए- आप सो क्यों नहीं जाते, मैं बहुत थक गयी हूँ।
मैंने कर्ज वाली बात बतानी चाही पर उसके गुस्से को देखते हुए उस तरफ मुँह मोड़ के सो गया।

अगले दिन में फिर अपने शॉप गया, फिर दो बजे लोन वाली बात याद आ गयी, बैंक जाकर मैंने अधिकारी से पूछा- सर, मेरा लोन अकाउंट पूरा खत्म बता रहा है.
बैंक अधिकारी कंप्यूटर में देखते हुए- हाँ सर, आपका लोन पूरा पे हो गया है.
मैं चौंका और फिर पूछा- सर ठीक से देखिए कोई गलती हो गयी होगी।
बैंक अधिकारी- कमाल करते हो संजीव सर, आपकी वाइफ ही तो चेक लगा कर गयी है. क्यों परेशान कर रहे हो। कोई बकरा मिला नहीं आज आपको?

मेरा दिमाग सुन्न हो चला, इतने पैसे इतने कम समय में सुलेखा के पास कहाँ से आ गए? वो भी पूरे दो लाख!

मैं बाइक भगाते हुए घर गया, मुझे सुलेखा से बहुत सवालों के जवाब लेने थे।

जैसे ही मैं घर में घुसा, मैंने पाया कि सुलेखा घर पर है ही नहीं.
अब मेरी हालात टाइट हो गयी … आखिर कहाँ गयी मेरी सुलेखा? कहाँ से आये इतने पैसे?

मैंने उसे बहुत फ़ोन लगाए पर उसका फ़ोन स्विच ऑफ आया। दोस्तों और पड़ोस में भी उसका अता-पता नहीं था।
अब रात के 11 बज रहे थे, मुझे घबराहट सी होने लगी। अंत में अपने घर के अंदर थकान से गिर पड़ा।

रात के 11:30 बजे दरवाजे पे मैंने देखा सुलेखा खड़ी थी।

मैं दौड़ कर उसके पास गया और उसे बाँहों में भर लिया. वो रोने लगी।
मैंने उसे बिलकुल नहीं डांटा और हम रूम में चले गए।

मैंने उसे खाने को पूछा और किचन में जाकर कुछ फटफट नूडल बना लिए।
फिर हम सोने को हुए।
मैंने उसके सिर पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। उसका रोना बंद हो गया था।

मैंने उसे ह्ल्के से कहा- सुलेखा, अगर मन में कोई बात है, तो उसे फ़ौरन बता दो। मैं पति हूँ तुम्हारा अब मुझसे भी छुपाओगी?
सुलेखा- शुरू शुरू में ऑफिस में सब कुछ ठीक चल रहा था दो महीने तक … फिर बॉस की मुझ में कुछ ज्यादा दिलचस्पी होने लगी, वो मुझे खूब काम देते और तारीफ भी करते, मुझे तो बहुत अच्छा लगने लगा कि मेरी जल्दी तरक्की होगी।

मैं- हाँ …तो फिर क्या हुआ ऐसा?
सुलेखा- धीरे धीरे मुझे सहकर्मियों से उनके बारे में काफी कुछ पता लगने लगा.
मैं- अच्छा थोड़ा थोड़ा समझ में आ रहा है.

सुलेखा- फिर एक दिन उन्होंने कंपनी की कोई डील बताई और मुझे साथ में शिमला चलने को कहा. मैंने काफी मना भी किया. फिर उन्होंने मुझे इशारों में कहा की यह डील जरूरी है, नहीं तो आपका यह नौकरी का आखिरी महीना हो सकता है.
संजीव- फिर तुम चली गयी? इतनी बड़ी बात मुझे बतानी नहीं समझी?
सुलेखा- मुझे कुछ समझ नहीं आया, क्या करूँ … या ना करूँ! मैंने पता नहीं क्यों हाँ बोल दिया और चली भी गयी.

संजीव ठण्डे मन से- अच्छा फिर क्या हुआ?
सुलेखा ने पूरी बात बतायी:

हम लोग शिमला पहुंच गए और वाकई में वहां ऑफिस का कोई काम था. मुझे खुद पे पछतावा हुआ कि मैंने बेकार ही बॉस पे शक किया और मुझे भरोसा करना चाहिए था।

दूसरे दिन फिर हम लोग होटल में अपने-अपने रूम में थे तभी बॉस का मैसेज आया- डिनर करते हैं साथ में!
तो मैंने हां कर दी।

मैं एक दम सज धज के काली जीन्स और लाल कुर्ती में नीचे गयी। मैंने मंगलसूत्र भी पहना हुआ था, सिंदूर, लाल लिपस्टिक और शृंगार भी किया था।
बॉस- क्या बात है मैडम, आप तो पूरी क़यामत लग रही हो!
सुलेखा- सर, आप कुछ भी बोलते हैं। रोज के जैसे ही तो है.
बॉस- अरे हम झूठी तारीफ भी मुफ्त में नहीं करते हैं, पूरा दाम वसूल लेते हैं.
सुलेखा- क्या मतलब? मैं समझी नहीं!

बॉस- अरे बाबा! छोड़ो ना … बताओ कैसा लग रहा है? शिमला पहले कभी आयी हो पति के साथ?
सुलेखा- कहाँ सर … इनका तो शॉप है कंप्यूटर की … आजकल पूरा वक़्त उसी में दे देते हैं.
बॉस ठंडी आह भरते हुए- हाँ समझ सकता हूँ, तो क्या पियोगी आप?
सुलेखा- माफ़ करियेगा सर, मैं दारु नहीं पीती.
बॉस- ओह सुलेखा … अब ऐसे ना बोलो. एक तो इतनी मुश्किल से तुम हाँ बोलकर शिमला आयी हो और फिर वाइन को दारू बोल रही हो। शो सम क्लास डार्लिंग!

मैं- ओके, आगे क्या हुआ?

सुलेखा- पता नहीं, वो माहौल वो जगह मैं खुद को रोक ना सकी और मैंने पीना शुरू कर दिया.
बॉस- देखा, कुछ तो नहीं होता। आप लोग ऐसे ही डरते हो।
सुलेखा- फिर मुझे याद है हमने कुछ खाना खाया फिर मेरे रूम में बॉस छोड़ने गए.

मैं धीरे से- आगे?

सुलेखा- बॉस ने मुझे रूम में ले जाते ही बिस्तर पर लिटाया और मेरे ऊपर आ गए.
संजीव को मन ही मन गुस्सा आ रहा था पर साथ में उत्तेजना भी होने लगी थी- फिर आगे क्या हुआ, बताओ मुझे पूरा एक-एक शब्द नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं!

सुलेखा डरते हुए- फिर वे मेरी गर्दन पर चुम्बन करने लगे, पता नहीं मैंने विरोध क्यों नहीं किया, उल्टा साथ देने लगी, मुझे उनका स्पर्श अच्छा लगने लगा। वो अपने हाथों से मेरे बूब्स ऊपर से दबाने लगे और फिर अंदर मेरी कुर्ती में हाथ डाल कर पूरा जिस्म सहलाने लगे.

सुलेखा ने मेरी आँखों में वासना का अनुभव किया फिर इतराते हुए बोली- उन्होंने मेरी कुर्ती उतार दी, मैं गुलाबी ब्रा में थी। वो पागलों जैसे मेरे बूब्स दबाने लगे, फिर मेरी ब्रा खोल दी और मेरे बूब्स चूसने लगे, मेरे निप्पलों को हल्के हल्के चाटने लगे और बीच-बीच में काटने भी लगे.
कर्ज चुकाने के लिए बॉस के साथ चुदाई (Karz Chukane Ke Liye Boss Ke Sath Chudai)
कर्ज चुकाने के लिए बॉस के साथ चुदाई (Karz Chukane Ke Liye Boss Ke Sath Chudai)
मुझे बहुत तेज़ उत्तेजना होने लगी. फिर मेरी उन्होंने मेरी जीन्स उतार दी और पैंटी के ऊपर से मेरी चूत सहलाने लगे। एक झटके में उन्होंने मेरी पेंटी उतार दी और अपनी जीभ मेरी चूत पे लगा दी.

इतने में मैंने अपना एक हाथ सुलेखा के बूब्स पे रखा और कहा- फिर आगे क्या हुआ?

सुलेखा- मैंने तो जैसे अपने आप को उनको पूरा सौंप दिया था। इतने दिनों बाद पुरुष के स्पर्श और उस वाइन ने मुझे मदहोश कर डाला था। मैं पूरी नंगी थी। बदन पे सिर्फ मेरा मंगलसूत्र था और कुछ नहीं।
इतने में वो 69 की अवस्था में आ गए। अब उनके लण्ड का सुपारा मेरे होंठों पे लगने लगा और वो मेरी चूत को चाटे जा रहे थे। मुझ में हवस सवार हो गयी और मैंने वो लण्ड का बड़ा सुपारा अपने मुँह में ले लिया।

मैं चूत में उंगली करते हुए- अच्छा और तूने चूस लिया? मेरे से क्या बड़ा था क्या साले का?
सुलेखा- ना! औसत था, रहा होगा कुछ 5-6 इंच के आसपास, मोटा शरीर था, उम्र लगभग 40 के आसपास होगी।
15-20 मिनट तक हमने 69 किया, फिर वो मेरे ऊपर आ गए, अपने लण्ड पर कंडोम चढ़ाया और मेरी चूत पर लण्ड को सेट कर दिया.

मैं अपनी बीवी की चूत में तेज उंगली करते हुए- फिर क्या हुआ?
सुलेखा- होना क्या था … फच्च से लण्ड अंदर घुस गया और वो धक्के लगाने लगे। शुरू शुरू में धीरे धीरे धक्के लगाए और बड़बड़ाने लगे ‘इंटरव्यू के समय ही मैंने सोच लिया था कि रंग बेशक सांवला है पर क्या जोरदार फिगर है, क्या सेक्सी माल है। मस्त चुदाई करूँगा साली की … इसलिए नौकरी पे रखा तुझे!

मैंने उनकी फालतू बातों को नजर अंदाज़ किया और सेक्स का आनन्द लेने लगी।

फिर उनके धक्के तेज़ होने लगे। मेरी सिसकारियां चीखों में बदल गयी। वो धक्का लगाते … मैं जोरदार चीखती ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’
मेरे बूब्स ऊपर से दबा-दबा के जोर-जोर से चोदने लगे। मैं भी कमर हिला-हिला कर साथ देने लगी। मेरे पूरे जिस्म का जैसे इस्तेमाल किया जा रहा था और मैं बेशर्मी से होने दे रही थी।

फिर मैंने उन्हें रुकने को कहा तो वो बोले- क्या हुआ डार्लिंग? मज़ा नहीं आया?
मैंने उन्हें लिटाया और उनके ऊपर आ गयी। उनके लण्ड को अपनी चूत पर सेट किया और बैठ गयी। मैं उनके लण्ड पर कूदने लगी। आह आह ओहो ओहो!
वो बोले- लव यू स्वीट हार्ट … चोद चोद … तेज तेज!

काफी देर हमने इस पोजीशन में सेक्स किया होगा। फिर उन्होंने मुझे घोड़ी बनने को कहा।
मैं उलटी हुई और वो पीछे से आये फिर लण्ड घुसा कर मेरी चूत को पीछे से तेज़ तेज़ चोदने लगे।
आह आह … क्या बताऊँ … मुझे तो आपकी याद आने लगी थी संजीव! मैं चिल्लाने लगी ‘और तेज चोद मुझे साले और तेज! मर्द नहीं है क्या? दम लगा साले!’

बॉस के धक्कों की स्पीड तेज़ हो गयी जैसे राजधानी एक्सप्रेस!
‘आह आह … चोद मुझे! और तेज़!’
फिर एक तेज़ धक्का आया और उन्होंने पूरा कंडोम वीर्य से भर दिया।

मेरी तो जैसे जान ही निकल गयी थी।
और हम दोनों बिस्तर पर निढाल होकर सो गए।

मैं- इस बॉस ने तो पूरा काम ही कर डाला, पर तुम्हारे पास इतने पैसे आये कहाँ से? यह मुझे समझ नहीं आया।
सुलेखा- सुबह सुबह 6 बजे मोबाइल बज रहा था। मैं नींद में थी, मैंने बिना देखे, अब मुझे लगा आपने किया होगा. तो मैंने उठा लिया और बोली ‘हेलो’
तो उधर से किसी महिला की आवाज़ आयी, वो गुस्से से बोली- कौन है?
मैंने अपना नाम बताया और कहा- मैं इनकी ऑफिस स्टाफ हूँ कोई काम है तो बतायें!
इस महिला ने गुस्से में फोन कट कर दिया. मैंने नाम पढ़ा तो उसमें वाइफ लिखा था।
मेरी हालात ख़राब हो गयी मैंने बॉस को कुछ नहीं बताया और चुपचाप बाथरूम चली गयी।
उसी दिन हम वापस गुरुग्राम आ गए फिर अगले दिन मैं ऑफिस में गयी। मुझे बहुत शर्म और खुद पे गुस्सा आ रहा था। मैं बॉस से नजर चुरा रही थी।

जैसे ही दिन ख़त्म हुआ सारा स्टाफ चला गया, बॉस ने मुझे रुकने कहा और अपने केबिन में बुलाया और गुस्से से बोले की मुझे यह जॉब छोड़नी होगी, उनकी वाइफ को सब पता चल गया है.
मैंने गिड़गिड़ाते हुए कहा- सॉरी! इसमें गलती मेरे अकेले की नहीं थी, आप भी बराबर के कसूरवार हो।
बॉस- सुलेखा तुम्हें जाना ही होगा, अपना इस्तीफा दो और निकलो.
सुलेखा- नहीं, मैं नहीं जा सकती.

बॉस- क्या लोगी मेरा पीछा छोड़ने का?
सुलेखा कुछ देर सोचते हुए- अच्छा ठीक है, दो लाख दे दीजिए, चली जाऊँगी.
बॉस- बस इतनी सी बात!

मेरी बीवी बोली- उन्होंने फटाफट मेरे बैंक खाते में दो लाख ट्रांसफर कर दिए। और फिर मैं सब कुछ छोड़कर आपके पास चली आयी। बाकी सब तो आप जानते ही हो। मुझसे गलती हो गयी मुझे माफ़ कर दीजिए। किसी को भी मुँह दिखाने लायक नहीं रही मैं तो!

मैं अब पूरा उत्तेजित हो चला था, मैंने बस इतना कहा- अरे सुलेखा, हो जाती हैं ऐसी नादानियाँ! तुम होश में नहीं थी। आगे पूरा जीवन पड़ा है.
इतना बोलते हुए मैंने अपनी पत्नी सुलेखा को सम्पूर्ण नग्न किया फिर दो घण्टे तक उसके जिस्म का पूरा आनंद लिया।

पर उस रात 3 बजे तक मैं सो नहीं पाया, मेरे मन में एक बात बार-बार खटक रही थी। ये बॉस वाली चुदाई की बात तक तो ठीक थी … पर सुलेखा आज पूरे दिन से कहाँ गयी थी?

अब इतना कुछ हो जाने के बाद भी मैं हिम्मत नहीं जुटा पा रहा था की सुलेखा से सब पूछूँ।
मैंने अपने मन को समझाते कहा ‘अब जो हुआ सो हुआ … इसे अब बदला तो जा नहीं सकता। बात की खाल निकालने से कोई फायदा नहीं!’
और चादर औढ़ कर सुलेखा से चिपक कर सो गया।

तो मित्रो कैसी लगी मेरी यह काल्पनिक कहानी?
आखिर सुलेखा गयी कहाँ थी सारा दिन?
कर्ज चुकाने के लिए बॉस के साथ चुदाई (Karz Chukane Ke Liye Boss Ke Sath Chudai) कर्ज चुकाने के लिए बॉस के साथ चुदाई (Karz Chukane Ke Liye Boss Ke Sath Chudai) Reviewed by Priyanka Sharma on 6:53 PM Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.