चुदाई की तड़प ने रण्डी बना दिया (Chudai Ki Tadap Ne Randi Bna Diya)

चुदाई की तड़प ने रण्डी बना दिया (Chudai Ki Tadap Ne Randi Bna Diya)

हैलो फ्रेंड्स, मैं जैस्मिन आज मैं आप सभी के साथ अपनी प्यासी जवानी की सच्ची कहानी साझा करने जा रही हूँ. मैं रायपुर की रहने वाली हूँ. मेरी उम्र 22 साल है, मेरा रंग इतना अधिक गोरा है मानो दूध में एक चुटकी सिंदूर मिला दिया गया हो. मेरे इस रंग रूप को कोई भी मुझे पहली नजर में देखकर चोदने के लिए बेचैन हो उठे. मेरी फिगर साइज 32-30-32 की है. मेरे बूब्स उभरे हुए और काफी सुडौल हैं.

दोस्तो, आज मैं आप सबके साथ अपनी कॉलेज की उस वक्त की कहानी साझा कर रही हूँ, ज़ब मैं कॉलेज में अपनी ग्रेजुएशन के फर्स्ट ईयर में थी. कॉलेज लाइफ के बारे में बड़ा रोमांच था और चढ़ती जवानी मुझे कुछ बहकाने में लगी थी.

उन दिनों मुझे गणित के सर बहुत अच्छे लगते थे. यूं समझिए कि मैं उनके ऊपर पूरी फ़िदा थी. लेकिन एक टीचर और स्टूडेंट की तरह आगे बढ़ने का मैंने सोचा नहीं था.

मेरी एक सहेली निधि भी थी, वो भी सर को लाइन मारने में कमी नहीं करती थी. सर पढ़ाने के मामले में बहुत स्ट्रिक्ट थे. मैं उनका बताया हुआ सब काम करती थी, उनकी सब बात भी मानती थी.
मुझे खुद से ऐसा लगता था कि मेरा गणित का विषय कमजोर है और मुझे इस विषय में नंबर भी कम आते हैं. इसलिए मैं पूरी शिद्दत से सर की तरफ अपना ध्यान देती थी. उनसे बार बार अपनी बात को कहना और उनसे सवाल आदि हल करने के लिए उठना. इससे मेरे दोनों काम हल हो जाते थे. एक तो सर से मुझे करीब से बात करने का मौक़ा मिल जाता था और दूसरे मेरी गणित भी ठीक होने लगी थी. मैं उन सर के आगे पीछे घूमने लगी थी.

मेरे इस रवैये से क्लास की बाकी लड़कियों को बड़ी दिक्कत थी. उनको ये बिल्कुल पसन्द नहीं था. लेकिन इससे मुझे कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ता था. मुझे तो बस कॉलेज के एग्जाम अच्छे से देना था और अच्छे नंबर लाना था.

इस वजह से मैंने सर से भी कोचिंग की भी बात की, लेकिन सर मना करने लगे.
सर बोले- मैं कोचिंग नहीं पढ़ाता हूँ.
परन्तु मेरे जिद करने पर सर ने हां बोल दी. मैं दूसरे दिन कॉलेज से शाम को कोचिंग के लिए सर के घर गयी. सर के घर से मेरा घर पास में ही था, तो मुझे कोई दिक्कत नहीं हुई.

मैं पहले दिन जैसे ही सर के घर गयी, वो अकेले रहते थे, तो मेरा ही इंतज़ार कर रहे थे. मैं जैसे ही अन्दर गयी, उस वक्त मैं हाफ जींस और टॉप पहने हुई थी.
सर मुझे इस रूप में देख कर भौंचक्के रह गए. वो मुझे घूरे जा रहे थे. सर की आंखें इस वक्त बड़ी कामुक लग रही थीं. मेरे बूब्स टॉप के ऊपर से ही झलक रहे थे.
खैर … हमने उस दिन की पढ़ाई खत्म की,

फिर दूसरे दिन कॉलेज गयी, तो सर मुझसे बोलने लगे- कल तो तुम बहुत अच्छी लग रही थी.
सर के मुँह से ये सुनकर निधि भी मुझे देखने लगी कि सर ने आज तेरी तारीफ की.
मैंने भी ‘थैंक्यू सर..’ करके हल्की सी स्माइल कर दी.

उस दिन मैं बहुत खुश थी कि सर ने मेरी तारीफ की. उस दिन कॉलेज के बाद ज़ब मैं कोचिंग गयी, तो मैं सलवार सूट पहन कर गयी. मैं आज बिल्कुल पंजाबी कुड़ी की तरह दिख रही थी. सर मुझे देख कर स्माइल करने लगे.

उन्होंने मुझे प्यार से बैठने को कहा और मैं पढ़ाई में लग गई. थोड़ी देर पढ़ाई करने के बाद मेरा पैन टेबल से गिर गया था, तो मैं अपने पैन को उठाने के लिए नीचे झुकी.

उसी समय सर ने भी मेरा पैन उठाने की कोशिश की. हम दोनों ही नीचे झुके थे. उसी समय अचानक उनकी आंखें मेरे झुके हुए होने से बूब्स की तरफ देखने लगीं. मेरे गहरे गले वाले कुरते से मेरे बड़े बड़े चूचे देख कर कोई भी फिसल जाता था, तो ये तो सर ही थे.

मेरी चूचियों की झलक पाते ही सर की पेंट से उनके लन्ड में हलचल होना शुरू हो गई और सर का लन्ड हल्का सा खड़ा हो गया.
मैंने सर से पूछा- क्या देख रहे हो सर?
उनका बेख़ौफ़ जवाब मिला- तुम्हारे बूब्स.

मैं एकदम से उनके इस जबाव को पाकर अचकचा गई.
मैंने पूछा- क..क्या सर?
सर कुछ झेंप कर बोले- कुछ नहीं.
सर की इस झेंप पर मैंने कहा- आपने अभी बूब्स कहा था न!

वो मेरी बात को टालने लगे, लेकिन मैं कहां मानने वाली थी. मैंने भी प्यासी जवानी की सुनी और जिद करके पूछ ही लिया- मैं आपको अच्छी नहीं लगती क्या?
सर बोले- हां तुम मुझे बहुत अच्छी लगती हो … पर …

मैंने उनकी हिचक को दूर करते हुए हिम्मत दिखाई और तुरंत आगे बढ़ कर उनके होंठों को किस करना शुरू कर दिया.
मैं एक पल के लिए अचानक रुक गई. अब मैं सर से कहने लगी- सर आप मुझे अच्छे लगते हो … आई लव यू.
मैंने ये कह कर उनके जबाव का इन्तजार किए बिना उनको हग कर लिया.

मेरे शरीर की गर्मी से सर का उठा हुआ लन्ड और भी अधिक मचल गया. अब सर भी मेरा पूरा सहयोग करने लगे. सर ने भी मुझे अपनी बांहों में भर लिया. सर ने मुझे आलिंगन में भरने के बाद मुझे चूमना शुरू कर दिया. वे मेरे गाल, माथे को गले के पास खूब चूमने लगे. मैं तो जैसे सर के चुम्बनों में खो सी गयी थी. मेरे मुँह से बस ‘अहह अहह..’ निकलने लगा था. मैं इतनी बेकाबू हो गई थी कि सर भी मुझे कण्ट्रोल नहीं कर पा रहे थे.

दोस्तो, उस समय मुझे समझ नहीं आ रहा कि क्या सही है और क्या गलत … बस मुझे अच्छा लग रहा था.
सर भी मेरे इस बेकाबू अंदाज को देख मुझे खूब प्यार करने लगे थे. मुझे किस करते करते कब उनका हाथ मेरे मम्मों पर चला गया था, मुझे पता नहीं चला.

मैं इस मदहोशी के आलम में बस ‘अहह आह …’ कर रही थी. सर ने मुझे अपनी बांहों में समेटे हुए टेबल पर लेटा दिया और मेरी कुर्ती को ऊपर से निकालना शुरू कर दिया. उनका लौड़ा पैंट के ऊपर से तम्बू की तरह सलामी देने लगा था.

मेरे पूरे कपड़े उतारते ही सर मेरी चूचियों पर टूट पड़े. मैं भी पागलों की तरह ‘अहह अहह …’ करते हुए सर को अपने मम्मों का मजा देने लगी. सर ने मेरे मम्मों को चूस चूस कर पूरी तरह टाइट कर दिया. उनके तेज तेज चूसने से मुझे मेरे मम्मों में बहुत ज्यादा दर्द भी होने लगा था, लेकिन बड़ा मीठा मजा भी आ रहा था.

मेरा मन कहता था कि मैं जिसको पसंद करूंगी, उसी से चुदवाऊँगी. आज सब कुछ मेरे मन का हो रहा था. मुझे सर ही पसंद आए थे और आज सर ही मेरे शरीर का भोग लगा रहे थे.

दोस्तो, मैं आपको बता नहीं सकती, लेकिन मुझे इस वक्त जन्नत जैसा लग रहा था.

सर का लन्ड इतना ज्यादा खड़ा हो गया था कि उन्होंने जरा भी देर न करते हुए अपना पूरे कपड़े उतार कर फेंक दिए. उनका मूसल सा तनतनाता हुआ लौड़ा देख कर एक पल के लिए तो मैं डर ही गयी थी. क्या मोटा लम्बा लन्ड था. सर बिल्कुल सांड जैसे गरमा गए थे.

अपने सर से इश्क करने के पहले मुझे इस बात का अंदाजा ही नहीं था कि उनका लन्ड इतना लम्बा होगा.

नंगे होते ही सर ने मेरे मम्मों को अपनी मजबूत हथेलियों में दबा लिया. वे अपना फनफनाता हुआ लन्ड मेरे मुँह के पास लाये और मुझसे लन्ड चूसने का बोलने लगे.

मैंने पहले कभी लन्ड ही नहीं देखा था, चूसने की बात तो अलग थी. मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि लन्ड कैसे चूसूं. फिर भी मैंने कोशिश की, लेकिन जब मुझसे नहीं हुआ, तो सर मुझे समझाने लगे- पहले इसे सहलाओ.
उनसे खुद भी रहा नहीं जा रहा था, तो वे खुद ही मेरी चूत को चाटने लगे.

मैं फिर से मदहोश हो गयी थी. सर मेरी चूत चूसते हुए बोले- अब ले मेरा लौड़ा चूस ले.
मैं समझ गयी थी कि कैसे लन्ड चूसना है.

मैंने अपनी हल्की जीभ बाहर निकालते हुए सर के लन्ड की नोक पर चलाना शुरू कर दिया. सर भी मेरे पूरे बाल पकड़ कर मेरे सर को अपने लन्ड पर दबाने लगे. सर का लन्ड मेरे मुँह में घुस गया.

सर मुझे जकड़े हुए सिसियाने लगे- अहह अहह मेरी जानेमन … चूस ले लन्ड … आह पूरा चूस ले.

सर मुझसे लन्ड चुसवाने का मजा ले रहे थे. जैसे जैसे मैं सर का लन्ड चूस रही थी, उनका लन्ड मुझे और भी बड़ा दिखाई देने लगा था.

मैं अभी भी टेबल पर ही लेटी थी और सर टेबल के नीचे खड़े होकर मुझसे लन्ड चुसवा रहे थे.

कुछ मिनट बाद सर ने मेरे मुँह से अपना लन्ड निकाल लिया और फिर से मेरी चूत चाटने लगे. इसके बाद सर ने मेरी दोनों टांगों को पूरा फैला दिया और मेरी खुली हुई सीलपैक चूत की फांकों में हल्के से अपना लन्ड घिस दिया. लन्ड की गर्मी से मेरी आंखें चुदाई के नशे में डूब गईं.

तभी सर ने मेरी चूत में लन्ड डाल दिया. सर के मोटे लन्ड के घुसते ही मेरी दर्द से भरी हुई तेज आवाज पूरे रूम में गूंजने लगी. मैं रोने लगी और सर से मिन्नतें करने लगी- उई माँ मर गई … आह सर इसे बाहर निकालो … मुझे बहुत दर्द दे रहा है.

लेकिन सर कहां मानने वाले थे. वे मेरी चूत में अपना मूसल लन्ड घुसेड़े पड़े रहे.

सर ने थोड़ी देर तक अपना लन्ड अन्दर पेलने से रोके रखा … ताकि मुझे दर्द कम हो. इस बीच वे मेरे होंठों को चूमते रहे. अपने हाथों से मेरे निप्पल मींजते रहे. इस सबसे मुझे दर्द कम होने लगा.

मैं मस्त होने लगी. तभी उन्होंने अचानक फिर से अपने हब्शी लन्ड का एक जोरदार धक्का और दे दिया. इस धक्के से सर का मूसल लन्ड मेरी छोटी सी चूत को फाड़ता हुआ अन्दर चला गया. उम्म्ह… अहह… हय… याह… मैं दर्द से कांपने लगी.

सर मुझे समझाने लगे- बेबी … प्लीज़ पहली बार में थोड़ा होता है … थोड़ी देर रुको … फिर तुम्हें भी अच्छा लगेगा.

कुछ देर के दर्द के बाद चूत लन्ड में दोस्ती हो गई और मुझे उनकी बात मुझे सही होते दिखने लगी. थोड़ी ही देर में मुझे भी बड़ा मजा आने लगा और मैं नीचे से उछल उछल चुदवाने लगी. सर भी मुझे धकाधक चोदे जा रहे थे. देखते ही देखते उनकी रफ़्तार बढ़ती चली गयी. मेरी भी सीत्कारें ‘आह्ह अह्ह्ह..’ कर चरम सीमा तक आ पहुंची.

करीब दस मिनट की जोरदार चुदाई के बाद सर ने अपना सारा माल मेरी चूत में गिरा दिया. मेरा रस भी उनके लौड़े से सन गया.

थोड़ी देर आराम करने के बाद मैं जब बाथरूम जाने के लिए उठी, तो मैं टेबल से उठ ही नहीं पा रही थी. मेरी चूत पूरी तरह सूज गयी थी. मैंने करवट लेकर देखा, तो वहां पे पूरा खून ही खून दिखाई दिया. ये देख कर मैं डर गई.

सर मेरे माथे पे किस करके बोले- पहली बार में सबके साथ ऐसा ही होता है … तुम डरो मत.

उन्होंने मुझसे सहारा दिया. फिर मैं फ्रेश होकर थोड़ी देर सर की गोद में सर रख कर आराम करने लगी. इससे सर का लौड़ा फिर से खड़ा हो गया. सर फिर से मेरे मम्मों को मसलने लगे.
सर बोले- मुझे तुम्हारे चूचे बहुत अच्छे लगे … क्या तुम इस बार मुझे अपने मम्मों के बीच में लन्ड रख कर चोदने दोगी.
मैंने भी हंस कर हामी भर दी.

फिर सर मेरे ऊपर आ गए. उन्होंने पहले अपना लन्ड हिलाते हुए मेरे मुँह में दे दिया. मैं उनके लन्ड को खूब मस्ती से चूसने लगी.

फिर सर ने मेरे मम्मों को दबाते हुए अपना लन्ड मेरी चूचियों की घाटी में फंसा दिया. वे मेरे मम्मों को चोदने लगे. मैंने भी अपनी जीभ बाहर निकाल दी थी. क्योंकि मेरे मम्मों को चोदते चोदते उनका लन्ड मेरे जीभ में टच करता, तो उनकी उत्तेजना और भी बढ़ जा रही थी.

सर- अहह अहह मेरी जानेमन.

कुछ देर सर ने मेरे चूचों को चोदा, फिर उन्होंने मुझे उल्टा कर मुझे डॉगी बनने को बोला. मैं कुतिया जैसी बन गई, तो सर ने मेरे पीछे से अपना लन्ड मेरी चूत में पेल दिया. मुझे एक बार फिर से उनके लन्ड से मीठा दर्द होने लगा. सर ने अपना पूरा लवड़ा मेरी चूत में ठोक दिया और धकाधक चोदने लगे.

इस बार मुझे जल्द ही मजा आने लगा और मैं उनका पूरा साथ देकर चुदवाने लगी. मुझे बड़ा मजा आ रहा था. डॉगी स्टाइल में मुझे सर का लन्ड अपनी चूत में पूरा अन्दर बाहर होता हुआ महसूस हो रहा था.

मैं सर से कहे जा रही थी- आह … सर और जोर से … मजा आ रहा है … और जोर से चोदो सर …
चुदाई की मस्ती में मैं पूरी तरह से चिल्लाने लगी थी. सर पीछे से मुझे धकाधक चोदे जा रहे थे.

सर ने मुझे चोदते चोदते मेरी चूत में ही फिर से अपने लन्ड का रस छोड़ दिया और हम दोनों पूरी तरह से संतुष्ट हो गए थे. सर मेरी पीठ पर ही गिर कर मुझे चूमने लगे. उनकी गर्म सांसें मुझे बड़ा मजा दे रही थीं.

दोस्तों मेरी हालत उठने लायक नहीं रह गई थी, इसलिए मैं थोड़ी देर आराम करने लगी. इसके बाद मैं घर चली आई.

अब जब भी मुझे सर से पढ़ने का टाइम मिलता, मैं सर से चुदवाने के लिए रेडी रहती हूँ.

कुछ दिन बाद सर का ट्रांसफर दूसरी जगह हो गया. लेकिन मेरी लन्ड लेने की प्यास अभी भी जारी है.

दोस्तो, मेरी सहेली निधि जिसके बारे में मैंने बताया था. उसकी और मेरी बहुत गहरी दोस्ती थी. एक दिन मैं उसके घर कुछ काम से गई थी.

मैं अचानक से उसके घर गई थी. मैंने पहले उसके घर की घंटी बजाने की सोची. लेकिन तभी मैंने देखा कि उसके घर का दरवाजा लॉक नहीं था. मैं अन्दर चली गई. अन्दर जाकर मैंने देखा कि उसका ब्वॉयफ्रेंड निधि के ऊपर चढ़ा हुआ था. निधि और उसका ब्वॉयफ्रेंड दोनों पूरी मस्ती से चूत चुदाई का खेल खेल रहे थे. मैं दबे पांव अन्दर जाकर देखने लगी कि निधि की धकापेल चुदाई हो रही थी और उसी मादक सीत्कारें पूरे कमरे में गूंजने रही थीं.

मैंने देखा कि यह लड़का राहुल था और अब ये निधि का ब्वॉयफ्रेंड बन गया था. राहुल निधि के मम्मों को जानवरों की तरह मसल रहा था और चूस रहा था, जिससे निधि पूरी तरह पागल होकर अपनी चूत में उसका लन्ड ले रही थी.

चुदाई की तड़प ने रण्डी बना दिया (Chudai Ki Tadap Ne Randi Bna Diya)
चुदाई की तड़प ने रण्डी बना दिया (Chudai Ki Tadap Ne Randi Bna Diya)
निधि की इन कामुक सीत्कारों से मेरी तो आंखें जैसे फटी की फटी रह गई थीं. मुझे भी अपने मम्मों को दबवाने का मन होने लगा था. लेकिन मैं आवाज ना करते हुए उन लोगों की चुम्मा चाटी को देखती रही.

कुछ ही देर की उन दोनों की चुदाई से मेरी चूत में चींटियां रेंगने लगीं. मेरे हाथ की उंगलियां मेरी जींस के अन्दर मेरी फुद्दी में चली गईं. मैं अपनी चूत को सहलाने लगी. मेरे मुँह से हल्की सी सिस्कारियां निकलने लगीं. इसी के साथ मेरे मुँह से एक तेज स्वर में ‘अहह … अहह …’ निकल गया.
मुझे सच में इस वक्त की वासना के कारण ज़रा सा भी होश नहीं था.

निधि की चुदाई की आवाजों से मेरे शरीर में रोंगटे खड़े हो गए थे. मैं लगातार अपनी चूत सहलाने लगी थी. उधर राहुल भी अपने लौड़े को निधि की चूत से बाहर निकाल कर हिलाने लगा. उसका लन्ड लगभग 7 इंच का था. मेरा भी मन लन्ड चूसने को होने लगा था, पर राहुल निधि के मुँह के पास चला गया.

निधि राहुल के लन्ड से खेलने लगी और उसका लन्ड पकड़ कर चूसने लगी.

राहुल भी पूरे जोश में आ गया और अपने लन्ड को धकाधक निधि के मुँह में पेलने लगा. लगभग 5 मिनट तक निधि के मुँह को चोदने के बाद राहुल के लन्ड का पूरा वीर्य निधि के मुँह में गिर गया. शायद निधि वीर्य पीना पसंद नहीं करती थी, इसलिए वो अपना मुँह हटाने लगी.

लेकिन राहुल ने जबरदस्ती करते हुए अपना वीर्य निधि के मुँह में डाल दिया.

ये अब देख कर मेरी हालत तो जैसे खराब ही हो उठी थी. मेरी चूत से लगातार पानी निकलने लगा था. मैं भी अपने एक हाथ को अपने चूचों पर रख कर दबाने लगी. मेरे दूसरे हाथ की उंगलियां अब भी मेरी चूत में चल रही थीं. इसी वजह से मुझे हल्का दर्द भी महसूस होने लगा था लेकिन इस सब पर ध्यान न देते हुए मैं निधि की चूत चूसना देख रही थी.

राहुल निधि की चूत चाट रहा था.

इसी दौरान मैंने देखा कि अचानक मेरे पीछे से राहुल के दो फ्रेंड्स सीमान्त और हनी आ गए थे. जिनको मैं कॉलेज से जानती हूँ. वे दोनों मेरे क्लासमेट थे. वे दोनों पीछे से आए थे. उन दोनों ने मुझे ऐसी हालत में देखा, तो एकदम से शॉक्ड हो गए.

उन दोनों ने मेरे हाथ पकड़ कर मुझे खींच लिया. मैं इस अचानक हुए हमले से हक्की-बक्की रह गई. वे दोनों मुझे खींचते हुए निधि और राहुल के सामने ले गए. मैं चुदासी और सकपकाई सी हालत में निधि के सामने खड़ी हो गई. मेरी तो जैसे हालत खराब ही हो गयी थी. मैंने वासना से मारी जा रही थी, चाहर रही थी कि ये दोनों मुझे चोद चोद कर अधमरी कर दें.

तभी मेरी ओर आते हुए सीमान्त ने मुझे राहुल और निधि के सामने ही अपनी बांहों में जकड़ लिया. मैं एकदम से तड़प उठी और उससे अपने आपको छुड़ाने का दिखावा करने लगी. लेकिन तभी राहुल ने मुझे पीछे से आकर मुझे कसके पकड़ लिया. अब मैं हिल भी नहीं पा रही थी.

मैं बस उन लोगों से सामने बोले जा रही थी- जो तुम लोग कर रहे हो, ये गलत है. मुझे छोड़ दो.

इतने में निधि मेरे पास आई और मुझे सलाह देने लगी- काहे तड़फ रही हो जानेमन … आज चुदवा लो यार … लन्ड लेने में सच में बड़ा मजा आता है.

मेरा मन तो चुदने का पहले से ही था. सर से चुदने के बाद एक अरसा हो गया था, मेरी चूत को लन्ड नसीब नहीं हुआ था. इस समय निधि की बातों से तो मैं बहक गयी और मेरा भी मन चुदाई के लिए तड़प उठा.

लेकिन उन लोगों को दिखाने के लिए मैं मना कर रही थी. मैं निधि से बोली- नहीं … मुझे नहीं करना ऐसा कुछ …
मैं फिर से अपने आपको छुड़ाने की कोशिश करने लगी. लेकिन सीमान्त और राहुल तो जैसे पागल ही हो गए थे.

उनके साथ जो हनी था, वो भी बस मुझे घूरे जा रहा था. कॉलेज में वो साला मुझे बहुत लाइन मारता था, लेकिन मैं उस पर कभी ध्यान नहीं देती थी. शायद इसलिए आज उसको मुझे ऐसे देखने का मौका मिल गया था. मैं उससे भी रिक्वेस्ट कर रही थी कि मुझे जाने दो.

वो राहुल और सीमान्त को समझाने लगा कि इसके साथ जबरदस्ती मत करो … जो करना है प्यार से करो. मुझे भी करने दो.

इतने में सीमान्त और राहुल ने मुझे छोड़ दिया और हनी मेरे पास आ गया. वो मेरी आंखों से आंसू पौंछने लगा. अब मुझे थोड़ा ठीक लगा. इतने में हनी ने मुझको गले से लगा लिया और अपने प्यार का इजहार करने लगा. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं.

मैंने फिर उससे हाँ करके अपने प्यार का इज़हार कर दिया- तुम मुझे अच्छे लगते हो.
इतने में राहुल और निधि की चुम्मा-चाटी शुरू हो गई थी. उन दोनों के साथ सीमान्त भी पीछे से निधि के गले को किस करने लगा.

मैं भी उन तीनों को सेक्स करते देख कर फिर से बेकाबू होने लगी थी. इतने में हनी ने मेरे होंठों पर किस करना शुरू कर दिया. एक पल को तो मैं अकबका गई, लेकिन फिर मैं भी उसका साथ देने लगी.

उधर मैंने देखा कि राहुल निधि के मम्मों को जोर से दबा बैठा, जिससे निधि तड़प उठी. उसकी एक तेज आवाज पूरे रूम में गूंज गई. उसके चूचे बड़ी बेदर्दी से चूसे जाने से पूरे लाल दिखाई पड़ने लगे थे. निधि की चूत को नीचे की तरफ से सीमान्त चूमे जा रहा था. निधि एकदम से सिहर उठी थी. उसकी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ की आवाज निकलने लगी थी.

इधर मेरे होंठों पर किस करते करते हनी का हाथ मेरे मम्मों पे आ गया था और वो मेरे कपड़ों के ऊपर से ही मेरे मम्मों को सहलाने और दबाने लगा. मैं तो जैसे पागल हो गयी थी. इतने दिनों बाद मेरे मम्मों को किसी ने छुआ था. मुझे बड़ा मजा आने लगा था. मेरी आंखें बंद हो गई थीं. दो पल बाद मेरी आँखें खुलीं तो देखा कि सीमान्त ने अपना लन्ड निधि के हाथ में दे दिया था.

एक तरफ निधि के बूब्स को किस करते राहुल भी चुदाई के लिए भूखा हो गया था. सीमान्त ने निधि की गाँड़ को सहलाना शुरू कर दिया था. आगे से राहुल किस करते हुए निधि की चूत में उंगली करने लगा. फिर राहुल ने अपने लन्ड का सुपारा हिलाया और निधि की चूत में डाल दिया.

शायद सीमान्त ने भी पीछे से निधि की गाँड़ को बजाने की सोच लिया था. मेरी सोच सही निकली. पीछे से सीमान्त निधि के बाल पकड़ कर उसकी गाँड़ में अपना लन्ड डालने लगा, जिससे निधि को बहुत दर्द होने लगा. वो दर्द होने के बाद भी चुदाई की भूख में ये सब सह रही थी.

मेरी तो ये सब देख कर हालत ख़राब हो रही थी. मैं डर कर कहने लगी- अब निधि की गाँड़ फट ही जाएगी.
पीछे से मेरे ऊपर चढ़े हनी ने मुझे समझाया- कुछ नहीं होगा.

हनी मेरे नंगे मम्मों को देखने की ज़िद करने लगा. मैं उसकी बात मान गई. मैंने अपनी टी-शर्ट उतारने का मन बना लिया.

मेरे मम्मों का साइज 32 इंच है, ये बहुत ही जबरदस्त टाइट हैं. मेरे मम्मे दिखने में बहुत खूबसूरत हैं. इनको देख कर किसी के भी मुँह में पानी आ जाएगा.

फिर धीरे से मैं अपने टॉप को उतारने लगी. मेरी लाल कलर के ब्रा में मेरे आधे से ज्यादा चूचे बाहर से ही झलक रहे थे. हनी मेरे मम्मों को देखने लगा. फिर उसने मेरे पास आकर ऊपर से मेरे निप्पल अपने होंठों में दबा लिए. उसने मेरे मम्मों को चूसते हुए मेरी ब्रा को खोल दिया. मैं आधी नंगी हो गई थी.

उसी दौरान सीमान्त ने निधि की गाँड़ में जबरदस्ती अपना 7 इंच का लन्ड पूरा डाल दिया. राहुल भी नीचे से उसकी चूत को चोदने लगा. निधि की आहों से पूरा रूम गूंजने लगा था.

इतना गरम माहौल देख कर हनी को तो जैसे रसमलाई मिल गई थी. वो मेरे मम्मों को ऐसे घूर रहा था मानो खा जाएगा. उसकी तड़प को देखने का मजा ही कुछ और था. उसके हाथ मेरे मम्मों की ओर बढ़ रहे थे. मुझे भी अब इस सामूहिक चुदाई में भाग लेना था, तो मैंने हनी को भी किसी भी चीज के लिए नहीं रोका.

राहुल निधि और सीमान्त का चूत चुदाई का सिलसिला जारी था. निधि की गाँड़ से खून निकलने लग गया था. फिर भी उसको चुदाई में बड़ा मजा आ रहा था.

इधर हनी ने मुझे उत्तेजित होते देखा तो उसने अपने सारे कपड़े निकाल कर दूर फेंक दिया. उसका लन्ड 6.5 इंच का था … लेकिन मोटा बहुत ज्यादा था. मुझे तो हनी का मोटा लन्ड देख कर मजा आ गया. आज तो मुझे खुद से उसका लन्ड चूसने की बेताबी था.

मैं उसके लन्ड के पास हो गयी और उसके लन्ड को चूसने लगी.
हनी को तो मानो जन्नत मिल गई थी. वो पूरा बेकाबू होकर मस्ती में गाली देने लगा- अहह मेरी रंडी … कितना अच्छा लन्ड चूस रही है. … मेरा लन्ड खाले साली रांड … चूस और जोर से चूस अहह.

उधर सीमान्त और राहुल ने निधि की चूत और गाँड़ का पूरा भोसड़ा बना दिया था. निधि एक रंडी की तरह सीमान्त और राहुल से चुदवा रही थी. न जाने निधि का कितनी बार पानी निकल गया था.

थोड़ी देर में चोदते चोदते राहुल का पानी निकलने वाला था, तो उसने अपना लन्ड निकाल कर निधि के मुँह में लगा दिया और पूरा पानी उसके मुँह में ही निकाल दिया.

निधि के पीछे से लगा सीमान्त उसकी गाँड़ की चुदाई में धकापेल लगा हुआ था. उसकी चुदाई अभी पूरी नहीं हुई थी. उसने निधि की गाँड़ को इतना बजाया कि निधि की गाँड़ में जलन होने लगी थी. तभी सीमान्त ने अपने लन्ड का पानी निधि की गाँड़ में डाल दिया, जिससे निधि को मानो लज्जत मिल गई थी.

उन लोगों का चूत गाँड़ चुदाई का खेल लगभग खत्म हो गया था. वे तीनों लोग एक दूसरे की बांहों में पड़े थे. यहां मैं और हनी एक दूसरे को चूम रहे थे. हनी ने मेरे दूध चूस चूस कर एकदम लाल कर दिए थे. उसने मेरे मम्मों को खूब चूसा, फिर मेरे मम्मों में लन्ड फंसा कर चुदाई भी की. इस तरह से मम्मों को चुदवाते समय भी मुझे भी हनी का लन्ड अपने मुँह में लेना अच्छा लग रहा था. उसका लन्ड वाकयी बहुत टेस्टी था.

इसके बाद हम दोनों 69 के पोज में आ गए. मैं उसका लन्ड चूस रही थी और वो मेरी चूत चाट रहा था. मेरे मुँह से ‘अहह आह..’ की सीत्कार गूंज रही थी.

लगभग 5 मिनट बाद हनी सीधे होकर मेरी चूत में उंगली करने लगा. उसने दूसरे हाथ से अपना लन्ड मेरी चूत में घुसेड़ दिया. मेरी तो जैसे जान ही निकल गयी थी. इतने में सीमांत और राहुल मुझे ऐसे देख रहे थे, जैसे खा ही जाएंगे. वे दोनों सोच रहे थे कि साली रंडी जैस्मिन पहले तो इतना मना कर रही थी, अब देखो कैसे उछल उछल के लन्ड से चुदवा रही है.

इतने में वो दोनों मेरे पास आ गए. मेरे मम्मों को सीमान्त दबाने लगा और राहुल मेरे होंठों को किस किए जा रहा था.

करीब दस मिनट की चुदाई के बाद हनी का और मेरा स्खलन एक साथ हो गया हनी का वीर्य मेरी फुद्दी में ही निकल गया. हम दोनों थक कर एक दूसरे की बांहों में लिपट कर शिथिल होकर पड़े रहे. चुदाई का मदमस्त माहौल हम सभी को कामुक किए हुए था. मुझे आज जिस तरह से चुदने की उम्मीद थी, उससे कहीं बेहतर चुदाई का मजा मिल गया था. मेरी और हनी की चुदाई के बाद राहुल और सीमांत भी मुझे चोदने की फिराक में थे.

वे मेरी चुदाई देख कर उत्तेजित हो गए थे और मेरी ओर बढ़ने लगे थे. मैं तो खुद चुदाई से इतनी ज्यादा पागल हो गई थी कि आज मुझे सर के लन्ड की जरा भी याद नहीं आ रही थी, मुझे खुद फिलहाल चुदाई के अलावा कुछ नहीं दिख रहा था.

सीमान्त मेरे पास आकर बोला- देख साली रंडी कैसे उछल उछल कर चुदवा रही थी. मेरी जान, अब चुदाई की बारी हमारी है.
मैं भी गाली देते हुए बोली- मादरचोद तू भी चोद ले आज … मैं भी तो देखूँ भोसड़ी के तेरे लन्ड में कितनी दम है.

मेरी इस चुनौती को सुनकर वो एकदम से गर्म हो गया और वो जानवर जैसे मेरे ऊपर टूट पड़ा.

मेरे होंठों को किस करते हुए उसने अपनी दो उंगलियां एक झटके के साथ मेरी चूत के अन्दर डाल दीं. मुझे थोड़ा दर्द होने लगा. वो मेरी परवाह किए बिना ही मेरी चूत में उंगलियों को आगे पीछे करने लगा.

इतने में हनी निधि के पास अपना लन्ड हिलाते हुए गया और उसे गाली देते बोला- ले रंडी मेरा लन्ड भी चूस ले.
निधि ने मुस्कुरा कर उसके लन्ड को हाथ में लिया और अपना मुँह खोल दिया. हनी ने अपना लन्ड निधि के मुँह में पेल दिया. निधि भी हनी का लन्ड खूब मजे लेकर चूसने लगी.

उधर राहुल ने बियर की बोतल खोली और पीना शुरू कर दी. बियर पीते पीते वो मेरे पास आया और बियर मेरे मम्मों में डाल दी. नीचे मेरी चूत में उंगलियां जलवा खींच रही थीं और ऊपर मेरे मम्मों पर बियर डाल कर राहुल ने चूसना चालू कर दिया था.

राहुल मेरे मम्मों को अपने होंठों में दबाते हुए खूब जोर जोर से चूसने लगा. साथ में वो मुझे भी बियर पिलाने लगा. बियर तेज नशे वाली थी. तभी सीमान्त ने भी एक बियर की बोतल ले ली और मेरे पेट की नाभि में डालने लगा. मैं लेटी हुई थी. वो मेरी नाभि से टपकती हुई पूरी बियर पीने लगा. मैं कुछ तो बियर के नशे से मस्त होने लगी थी और कुछ मेरे जिस्म से बहती बियर के नशे से मस्त होने लगी थी.

मैं उन दोनों को मेरी नाभि और मम्मों को चूसते देखते हुए गर्म होने लगी. मेरे मुँह से बस ‘अहह अह्ह्हम उहह अह्ह्ह अह्ह्ह और चूसो मादरचोदो …’ निकल रहा था.

फिर सीमान्त बियर की बोतल के मुँह को मेरी चूत में लगा कर चूत में बियर भरने लगा. बियर एकदम ठंडी थी, जिससे मैं एकदम से झनझना गई ‘अह्ह्ह अहह अह्ह्ह …’

सीमान्त ने मेरी उत्तेजना को देखा तो उसने पूरी बियर की बोतल मेरी चूत में टपकाना शुरू कर दी. एक तो ठंडी बियर से चूत में सनसनी के साथ थोड़ी जलन हो रही थी और ऊपर से वो चूत से टपकती बियर को चाट चाट कर पीने में लगा.

सीमान्त मुझे चुदास के शिखर पर चढ़ाए जा रहा था. मुझे इस वक्त जन्नत का सुख मिल रहा था.
किसी भी लड़की के दूध और चूत जब एक साथ दो मर्दों के द्वारा चूसे और चाटे जा रहे हों, तो उस लड़की की वासना का स्तर आप खुद समझ सकते हैं.
मेरी चूत पूरी लाल हो गई थी.

उधर हनी का लन्ड चूसने के बाद हनी ने निधि को उल्टा करके उसको डॉगी स्टाइल में ला दिया था. उसने अपना लन्ड निधि की गाँड़ में पेल दिया और उसकी गाँड़ मारते हुए वो मेरे पास तक आ गया.
निधि कुतिया बनी हुई धीरे धीरे आगे मेरी तरफ बढ़ रही थी … और उसके पीछे से लगा हुआ, हनी मुझ तक आ गया था.

निधि मेरे करीब आ कर जबरदस्ती मेरे होंठों को चूसने लगी. एक तरफ राहुल मेरे मम्मों को चूस रहा था, सीमान्त मेरी चूत चूस रहा था और निधि लेस्बियन सेक्स के जैसे मेरे होंठों को चूसने लगी थी.

मुझे ऐसा लग रहा था मानो पोर्न वीडियो बनाने का खेल चल रहा हो. हम सभी एक साथ ग्रुप सेक्स की तरह खूब एन्जॉय कर रहे थे.

सीमान्त की चूत चाटना खत्म हुआ और वो मेरे ऊपर आकर अपना लन्ड हिलाने लगा. निधि ने मेरे होंठों को किस करना बंद करके पीछे से राहुल का लन्ड चूसने लगी.

सीमान्त जैसे ही मेरे सामने आया, मैं उसके लन्ड का टोपा ऊपर करके उसका लन्ड देखने लगी. सीमान्त के लन्ड का सुपारा एकदम गुलाबी था, मैं जीभ से उसके लन्ड को चाटने लगी.

मेरे मुँह में सीमान्त का लन्ड गया, तो सीमान्त की आह निकलने लगी. उसे मुझसे लन्ड चुसवा कर मानो जन्नत की हूर मिल गई थी. इस उत्तेजना में उसका लन्ड एकदम से रॉड बन गया था. लन्ड चूसते चूसते ही काफ़ी बड़ा हो गया था. मैं बीच बीच में उसके टट्टों को भी सहलाती जा रही थी.

सीमान्त इस वक्त अपनी चुदास के शिखर पर था. वो मुझे गन्दी गन्दी गाली देने लगा था.

सीमान्त- आह साली … लन्ड चूस माँ की लौड़ी … आज तो तेरी गाँड़ को पूरा फाड़ दूंगा … साली तुझे बाजारू रंडी बना दूंगा … अह्ह्ह अह्ह्ह मेरी जान और जोर से लन्ड चूस अह्ह्ह …
मुझे उसकी उत्तेजना देख कर पता नहीं क्या हुआ, मैं उसका एक गोटा पूरा मुँह में लेकर चूसने लगी, इससे वो और भी ज्यादा पागल हो गया.

कोई पांच मिनट बाद वो मुझसे अपना लन्ड छुड़ाते हुए मेरे चूत की तरफ आ गया. मैं भी अब चुदने के लिए एकदम गर्म हो गई थी. सीमान्त ने अपने लन्ड को मेरी चूत की फांकों में फंसाया और एकदम से एक जोर का झटका दे मारा.

उसके इस अचानक प्रहार से मैं एकदम से चिल्ला उठी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… मादरचोद धीरे चोद भोसड़ी के..
इतने में उसका लन्ड पूरा का पूरा मेरी चूत में समा गया. एक दो झटके में ही मेरी चूत ने उसके लन्ड को सैट कर लिया और मुझे इतना अधिक मजा आने लगा, जैसे मैं ज़न्नत में होऊं.

अब धकापेल चुदाई का खेल शुरू हो गया था. सीमान्त अपनी पूरी ताकत से मुझे चोदने में लगा था. मैं खुद चुदाई से पूरी मदहोश हो गई थी और मेरे मुँह से ‘अहह अहह उह्ह्ह अह्ह्ह म्मा …’ निकल रहा था.

सीमान्त अब मुझे और भी जोर जोर से चोदने लगा था. मेरे मुँह से और जोर से आवाज निकलने लगी थी- आह और जोर से चोद माँ के लौड़े … आह पूरा पेल दे. मेरी गालियों से सीमान्त इतना अधिक कामुक हो गया था कि उसने मुझे चोदते चोदते ही उठा लिया. फिर खुद खड़े रह कर वो मुझे गोदी में ही लटका कर चोदने लगा. उसकी बलिष्ठ भुजाओं में मछली सी तड़फते हुए चुदाई का मजा ले रही थी.

किसी भी लड़की को फौलादी ताकत वाला मर्द मस्त कर देता है.

सब लोग हम दोनों को इस तरह से चुदाई करते हुए देखने लगे. तभी राहुल पीछे से आ गया. सीमान्त ने और मुझे कसके पकड़ लिया. वो मेरी चूत में लन्ड पेले हुए पीछे से मेरी गाँड़ को उछाल रहा था. उसी वक्त उसने मेरी गाँड़ में उंगली करना शुरू कर दी.

मुझे लन्ड से मजा आ रहा था. मुझे इतनी उत्तेजना में पता ही नहीं चल रहा था कि मेरी गाँड़ में क्या हो रहा है.

सीमान्त ने मेरे दोनों चूतड़ों को अपनी हथेलियों में पकड़े हुए फैला दिया. तभी पीछे से राहुल ने अपना पूरा लन्ड मेरे गाँड़ में डाल दिया.
मेरी गाँड़ की सील अभी टूटी नहीं थी. राहुल का लन्ड जैसे ही गाँड़ में घुसा, तो मैं दर्द से कलप गई. मैं पीछे मुड़ कर देखने को हुई कि तभी सीमान्त ने मुझे अपनी छाती से चिपका लिया.

मेरे मुँह से चीख निकल गई- अह्ह्ह कौन है … लन्ड बाहर निकाल मादरचोद … मेरी गाँड़ फट जाएगी.
मैं तेज स्वर में बकने लगी. अब तक मैंने राहुल को देख लिया था.

राहुल भी कहने लगा- तुझे तो हमारा लन्ड देखना था ना साली कि कितनी दम है हमारे लन्ड में, तो देख ना साली रंडी!
उसने अपना पूरा लन्ड मेरी गाँड़ में डाल दिया. मैं कुछ नहीं कर पाई, सामने से सीमान्त और पीछे से राहुल मुझे धकाधक चोदने लगे थे. मेरी चटनी सी पिसने लगी थी. आगे चूत में लन्ड मजा दे रहा था और पीछे से गाँड़ में लन्ड एक मूसल सा घुसा हुआ दर्द कर रहा था.

थोड़ी देर की खूब चुदाई के बाद मेरा रस निकल गया और तभी राहुल का भी वीर्य मेरी गाँड़ में निकल गया.

फिर मैं सीमान्त से बोली- मुझे बाथरूम जाना है.
वो मुझे नीचे उतारता हुआ बोला- ठीक है.

मैं बाथरूम में जैसे ही फ्रेश होने के लिये गई कि सीमान्त भी पीछे से सूसू के लिए आ गया. हम दोनों एक साथ बाथरूम करने लगे.

तभी सीमान्त ने शॉवर चालू कर दिया. हम दोनों पानी में भीगने लगे. थकान के बाद शरीर पर पानी की बूंदें बड़ी अच्छी लग रही थीं.

मैं एक दो मिनट बाद बाहर की ओर जाने लगी, तो सीमान्त ने किसी फ़िल्मी हीरो की तरह पीछे से मेरे हाथ पकड़ लिए. फिर उसने मुझे खींच कर अपनी बांहों में भर लिया.

उसका लन्ड अभी झड़ा नहीं था. उसका लन्ड पूरी तरह खड़ा था, जो मेरी गाँड़ को पीछे से टच कर रहा था. वो मेरी गाँड़ में लन्ड लगाए हुए मेरे बदन को चूमने लगा. उसके लन्ड से मैं फिर से सिहर उठी.

मैंने उससे छूटने का प्रयास किया, लेकिन उसकी मजबूत भुजाओं से बच कर निकल पाना मुश्किल था. उसने मुझे किसी मिमयाती बकरी की तरह खींच कर डॉगी बना दिया और राहुल की तरह सीमान्त ने भी अपना लन्ड मेरी गाँड़ में डाल दिया.

मुझे अब गाँड़ मरवाने में बड़ा मजा आने लगा था. सीमान्त ने पीछे से मेरी गाँड़ में शैम्पू डाल दिया था, मेरी गाँड़ मी चिकनाई हो जाने के कारण उसका लन्ड बड़ी तेजी से अन्दर बाहर होने लगा था. वो मेरी गाँड़ को बहुत देर तक मारता रहा.

सीमान्त- अह्ह्ह तू तो मेरी रंडी है … तुझे ऐसे ही रंडी की तरह चोदूँगा साली …
मैं- आह तो चोद ना मादरचोद … तेरा लन्ड मुझे हमेशा ऐसे ही अपने गाँड़ में लेना है.
मैंने एक उंगली सामने से अपनी चूत में डाल ली- आह चोद अह्ह्ह अहहह

मुझे चोदते चोदते सीमान्त ने मेरी गाँड़ से लन्ड बाहर निकाला और मेरी चूत में धांस दिया. मुझे मजा आ रहा था. अब वो कभी मेरी गाँड़ में अपना लन्ड डालता था और कभी मेरी चूत चुदाई करने लगता था.

इस मस्त चुदाई से मुझे अजीब सा करेंट सा लगने लगा था. ये मेरे लिये नया अनुभव था.

करीब दस मिनट तक चोदने के बाद सीमान्त ने अपना पूरा माल मेरी गाँड़ में निकाल दिया. मेरा भी पूरा माल उसके लन्ड के साथ ही निकल गया.

फिर हम दोनों फ्रेश होकर बाहर आ गए. बाहर आकर देखते हैं कि हनी ने तो निधि की गाँड़ को चोद कर भुर्ता बना दिया था. उन लोगों की चुदाई हमारे सामने जारी थी. कुछ देर बाद हनी ने निधि को चोदते चोदते उसके मुँह में ही अपना पूरा वीर्य निकाल दिया.

ना चाहते हुए भी निधि को उसका वीर्य पीना पड़ा. मैंने देखा कि हनी ने निधि गाँड़ चोद कर पूरी लाल कर दी थी.

सीमान्त ने भी मेरी गाँड़ इतनी ज्यादा मारी थी कि हल्का सा रक्त भी निकलने लगा था.

राहुल मेरे पास आया और प्यार से मेरे होंठ किस करने लगा. मुझे थोड़ा अच्छा लगा. इसके बाद तो जैसे मैं घर जाने की हालत में नहीं थी, तो उस दिन मैं निधि के यहां ही आराम करने लगी. वे तीनों उसके घर से चले गए.

लगभग एक हफ्ता होने के बाद मुझे फिर से चुदवाने का बड़ा मन करने लगा था. उन सभी लोगों से अभी भी मेरी बात होती है, लेकिन मुझे अब किसी नए लन्ड की तलाश है.
आगे की सेक्स स्टोरी में मैं बताऊँगी कि कैसे अपनी चूत की भूख को मिटाने के लिए अपने मामा के यहां जाकर रंगरेलियां मनाईं.
चुदाई की तड़प ने रण्डी बना दिया (Chudai Ki Tadap Ne Randi Bna Diya) चुदाई की तड़प ने रण्डी बना दिया (Chudai Ki Tadap Ne Randi Bna Diya) Reviewed by Priyanka Sharma on 4:19 PM Rating: 5

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