चाची ने दिलाया नई चूत का मजा (Chachi Ne Dilaya Nayi Choot Ka Maja)

चाची ने दिलाया नई चूत का मजा (Chachi Ne Dilaya Nayi Choot Ka Maja)


मैं आपका दोस्त ज़ीशान अपनी चुदाई कहानी का नया भाग लेकर आया हूँ। ये कहानी बड़ी है, क्योंकि ये सच्ची घटना है. आप सब मज़े लीजिये.

अब तक आपने पढ़ा कि रेशमा चाची की मदद से मैंने उनकी बहन परवीन आंटी को भी चोद दिया था और दूसरे दिन उनसे गाँड मारने की बात भी तय हो गई थी.

लेकिन आंटी की चुदाई के चक्कर में रेशमा चाची को हम दोनों ने भुला दिया था. जिस वजह से चाची उदास थीं.

मैंने चाची का दुःख समझ लिया और उनसे कहा- चाची, आज रात मैं यहीं पर रुकूँगा, आप चिंता न करो.
चाची- थैंक्यू … लव यू बेटा.

इतने में दरवाजे की घंटी बजी, चाचा आ गए थे.
अब आगे:

उस रात मैं रेशमा चाची के घर ही रुका था. रात को मैं छत पर सो रहा था. चाचा चाची अन्दर सो रहे थे.

आधी रात में चाची छत पर आईं. मैं आज दिन की चुदाई से कुछ ज्यादा ही थक गया था … इसलिए मुझे गहरी नींद आ गई थी.
चाची मुझे बिना जगाए ही मेरे लन्ड को चूसने लगीं और लन्ड खड़ा होते ही मेरे लन्ड पर चूत फंसा कर चढ़ गईं. चाची मुझे चोदने लगीं. मैं जाग चुका था. हम दोनों छत पर ही सेक्स कर रहे थे, जिस वजह से ज़ोर से आवाज भी नहीं कर पा रहे थे.

चाची का दिल खुश था, क्योंकि उनकी चूत को भी मेरे लन्ड से चुदने का मौका मिल गया था. फिर चाची चुदने के बाद नीचे चली गईं.

सुबह हुई, मैंने एक्सरसाइज की और दूध पिया.

अभी तक मुझे आदत थी, हर दिन दो बार झड़ने तक स्ट्रांग रहने की. अगर मैं 2 बार झड़ जाता हूँ, तो तीसरी बार के लिए मुश्किल हो जाता था. मैं अपने आपको उस दिन के लिए तैयार करने लगा … जिस दिन मैं इन तीनों बहनों को मिलकर एक साथ चोदूंगा. उस दिन तो शायद मुझे 4 या 5 बार झड़ना होगा. मेरे को अभी और मजबूत बनना था. इसके लिए मैं रोज ज्यादा एक्सरसाइज करने लगा.

सुबह चाचा काम पर निकल गए. मैं घर में तैयार हो रहा था. चाची रसोई में काम कर रही थीं. चाची को चलने में थोड़ी तकलीफ हो रही थी.

मैं- चाची … क्या हुआ? आपको चलने में तकलीफ क्यों हो रही है?
चाची- एक हफ्ते से मैं ऐसे ही चल रही हूँ … और तुझे अब दिखी चाची की तकलीफ!
मैं- मैंने तो ध्यान नहीं दिया. बताओ क्या हुआ?
चाची- तुझे चूत और गाँड के अलावा कुछ और ध्यान ही कहां रहता है. हमेशा नई चूत और गाँड की तलाश में रहता है.

मैं- चाची … यार अब बता भी तो दो, क्या हुआ?
चाची- ये तेरी बेरहमी से गाँड मारने का नतीजा है. देख मेरी गाँड अब कैसे मटक रही है.
मैं- सॉरी चाची … अब तो आपकी गाँड भी परवीन आंटी के जैसी बड़ी हो गयी है.

मैंने चाची के चूतड़ों पे एक ज़ोर से चपत मार दी. चाची दर्द से आह भरने लगीं.
चाची- अब जा तू … वहां तेरी लिए दीदी की गाँड तैयार होगी.

चाची की जलन मुझे अच्छी लगने लगी. मैं चाची को झट से पीछे से पकड़ने लगा और उनके गले पे चूमने लगा, उनके मम्मों को दबाने लगा.

मैं- चिंता न करो चाची … मैंने प्लान बना लिया है. हिना आंटी की चूत जल्दी दिला दो. फिर हम चारों लोग मिलकर मजे करेंगे. मैं आपको एक और मज़ा देने वाला हूँ.
चाची- मैं भी उसी के इंतज़ार में हूँ. तू दीदी से बात कर लेना, वो दोनों ज्यादा क्लोज हैं … और जल्दी प्लान बना. मैं भी तैयार रहूंगी.

इतने में परवीन आंटी का फ़ोन आ गया.

मैं- हैलो.
परवीन- हैलो ज़ीशान, मैंने सब सैट कर लिया है … अभी घर पर कोई नहीं है, तू आ जा. अगर रेशमा फ्री है, तो उसको भी लेकर आ जा.

यही बात मैंने चाची को बताई. लेकिन चाची मना करने लगीं.

चाची- अगर अभी आऊँगी, तो तेरे प्लान में शामिल नहीं हो पाऊंगी. चाचा को डाउट होने मत दो. तुम जाओ मज़े करो और जल्दी प्लान बनाओ, सब मिल के मज़े करेंगे.

मैं चाची को किस करके वहां से निकलने लगा. आंटी का घर उसी टाउन में था और बाइक से सिर्फ 10 मिनट का रास्ता था.

मैं दस मिनट में वहां पहुंच गया. मैंने दरवाजे की घंटी बजायी. दरवाजा खुला था, लेकिन कोई दिख नहीं रहा था. मैं धीरे धीरे अन्दर जाने लगा.

मैं- आंटी … कहां हो?
तभी फट से दरवाजा बंद होने लगा. मैं पीछे मुड़ कर देखा, तो आंटी दरवाजे के पीछे छुपी थीं.

वो तुरंत मेरे पास आकर मुझे किस करने लगीं. उनकी इस तेजी से मैं नीचे गिर गया. आंटी मेरे ऊपर चढ़ गईं और बहुत अन्दर तक जीभ डालने लगीं. आज वो कल का बदला ले रही थीं. मैं मज़े ले नहीं पा रहा था. वो 75 किलो की औरत थीं और वो मेरे ऊपर लदी हुई थीं. मुझे सांस लेने के लिए तकलीफ हो रही थी.

मैं झट से उन्हें अपने ऊपर से हटा दिया और हांफने लगा.

मैं- मार दोगी क्या मुझे … मेरी जान चली जा रही थी.
परवीन- हा हा हा … कल मुझे यही हो रहा था. वैसे ये सब मज़े हैं … तू मज़े लेते रहना.

आंटी आज नाइटी में थीं. मैं आंटी को कभी नाइटी में देखा नहीं था. उनको देखते ही लन्ड खड़ा हो गया था. आंटी की वो मोटी गाँड मुझे पागल कर रही थी. मैं सिर्फ गाँड को सहला रहा था और उनके मोटे मम्मों को मुँह से मसल रहा था. आंटी आज सेक्स की परी जैसी लग रही थीं.

परवीन- तू मेरी गाँड को इतना पसंद क्यों करता है?
मैं- सिर्फ मैं नहीं … हर कोई जो आपको देखेगा, वो पहले आपकी गाँड मारने का ही सोचेगा. आपकी गाँड इतनी मस्त है … और आपके ये चुचे … आह जितने बड़े, उतना अधिक मज़ा आता है. ये अभी भी तने हुए हैं आंटी … आप गजब की माल हो.

परवीन मुस्कुरा दीं- लेकिन इसको इस्तेमाल करने वाला कौन है. तू मुझे अब मिला है. पिछले दो साल में मैं सिर्फ 10 बार चुदी हूँ मैं. तू ही समझ ले मेरी प्यास. तेरी चाची को रोज़ लन्ड मिलता है, फिर भी तेरा लेती हैं … और जलन भी दिखाने लगती है.

मैं- चाची चुदती तो हैं, लेकिन उनको सैटिस्फैक्शन नहीं होता है. चाचा का सिर्फ 4 इंच का लन्ड है … और वे 5 मिनट में झड़ जाते हैं. चाची उंगली करके सोती हैं.
परवीन- बेचारी … च्चच … अब हम दोनों का सहारा सिर्फ तू ही है. लगता है हिना को अच्छी खासी खुशी मिलती होगी.

मैं- उनको और खुश करना है … मुझे हिना आंटी की चूत दिला दो.
परवीन- मैं कोशिश तो करूँगी ज़ीशान. तुझे वो इतनी अच्छी लगती है?
मैं- मुझे तो तुम तीनों बहुत अच्छी लगती हो. मैं तुम तीनों को एक साथ एक ही बिस्तर पर चोदना चाहता हूँ.

परवीन- क्या तेरे में इतना दम है, जो तीनों को खुश कर सकेगा?
मैं- सच कहूं … तो मैं दो बार अच्छे से चुदाई कर लेता हूँ. तीसरी बार तो अभी मुश्किल है.
परवीन- तो कैसे कर पाएगा?

मैं- इसीलिए दवाई मंगवाई है. ये दवा इम्पोर्टेड है … इससे 6 से 7 बार कर तक चुदाई सकते हैं … और बहुत देर देर तक … वो दवा जल्द ही आने वाली है.
परवीन- वाह रे … तू तो सब तैयार कर चुका है.

मैं- बस 15 दिन में मेरी एंट्रेंस एग्जाम का रिजल्ट आने वाला है, उसके बाद तो हम शायद एक महीने में सिर्फ एक बार ही मिल पाएंगे.
परवीन- यही तो चिंता हो रही है … तू यहीं पे नज़दीक वाले कॉलेज में एडमिशन ले ले और रोज आने जाने का तय कर ले.
मैं- ऐसा नहीं होगा, क्योंकि मैं अच्छे कॉलेज में पढ़ना चाहता हूँ.
परवीन- हां पता है … और वहां की लड़कियों को भी चोदना चाहता है.

मैं सर हिलाते हुए उनकी बात से हामी भर दी.

फिर मैं उनको चूमते हुए बेडरूम में ले गया. आज मैं आंटी की गाँड मारने वाला था.

दोस्तो, अगर मैं आपको एक सच बात बता दूँ … तो ये कि औरत को गाँड मरवाने से कुछ भी संतृप्ति नहीं होती है. असली आग तो चूत में लगी होती है. गाँड मारना तो सिर्फ मर्द की चाहत होती है, क्योंकि गाँड टाइट होती है और इससे औरत को ज़्यादा दर्द भी होता है, वो ज़ोर ज़ोर से चीखती है. 

इससे उत्तेजित होकर मर्द और ज़ोर से चुदाई का सुख महसूस करते हैं और अपने आपको खुश करते हैं. अगर आप किसी की गाँड मारने वाले हैं, तो पहले औरत को खुश कीजिएगा, फिर ही उसकी गाँड मारना. मतलब उसकी चूत चाट कर और थोड़ी चूत की चुदाई भी करके पहले उसको झड़ने दो. फिर आराम से गाँड मार लो.

मैं भी आंटी को खुश करना चाहता था. इसलिए पहले मैं उन्हें अच्छे से चूमने लगा. आंटी की मादक सिसकारियां निकलने लगीं. फिर मैंने उनकी नाइटी को निकाला. आंटी अब मेरे सामने ब्रा और पैंटी में रह गयी थीं. मैंने बिना समय गंवाए, उनकी ब्लू कलर की रेशमी जालीदार ब्रा को भी निकाल दिया. आंटी के मोटे मोटे मम्मों से बिना खेले भला मैं कैसे छोड़ सकता था. मैं आंटी के मम्मों को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा.

परवीन- आआह ऊऊऊह … धीरे..
मैं- इतने बड़े मम्मों को, आंटी, कोई कैसे छोड़ सकता है.

मैं दीवानों की तरह आंटी के मम्मों को चूसने लगा. आंटी के दोनों चुचे एकदम लाल हो गए थे. फिर मैं उनका पूरा बदन चूमने लगा और चूसने लगा. उनके कड़क निप्पलों को काटने लगा.

परवीन- आआह … साले इतना ज़ोर से कोई काटता है कमीने … धीरे चूस ऊऊऊफ्फ … जालिम..

अब तक आंटी पूरी गर्म हो चुकी थीं. मैंने बिना देर किए उनकी पैंटी उतार दी और उनकी चूत को मसलने लगा. आंटी की सिसकारियां बढ़ने लगीं. उनकी चूत में आग लगी थी. मैं नीचे बैठ गया और उनकी चूत को चूमने लगा.

आंटी मचल उठीं- मेरे मर्द ने कभी मेरी चूत को चाटा ही नहीं है. … आह मेरी ख्वाइश तू अब पूरी कर दे.

मैं आंटी की मखमली चूत चाट रहा था. चूत काफी नमकीन थी. अब शहद ढूंढने का समय भी नहीं था.
परवीन- आआह ऊह … ऊम्म …

आंटी मेरे बाल खींचने लगीं और तरह तरह की हरकतें करने लगीं. उनका बदन पूरा मचल उठा था.
औरत को जितना लन्ड मजा देता है, उससे कहीं ज़्यादा मज़ा आपकी जीभ देता है.

परवीन- वाओ … क्या चूस रहा है. मेरे लाल … दाने तक चला गया … शाबाश..

मैं और अन्दर जीभ को धकेलने लग. करीब 5 मिनट चूत चाटने के बाद आंटी झड़ने वाली थीं.

परवीन- आह … मैं झड़ने वाली हूँ … आआह ऊम्म्म..
उन्होंने मेरे सर को चूत के और करीब दबा दिया और चूत ने पानी छोड़ दिया. मेरे मुँह में उनका पानी आ गया था. मैं बाथरूम जाकर मुँह धोकर आया.

आंटी खुश थीं. लेकिन मेरी खुशी अभी बाकी थी.

परवीन- अब तू जो बोलेगा, मैं वो करूँगी.
मैं- पहले मेरा लन्ड को चूस लो.

आंटी लन्ड चूसने को एकदम रेडी थीं. मैं बेड पर बैठ गया और वो नीचे बैठ कर लन्ड को हिलाने लगीं. फिर आंटी ने एकदम से पूरा लन्ड अन्दर ले लिया.

मैं- बाप रे … आपने तो पूरा अन्दर ले लिया.

उनकी लन्ड चुसाई देख कर मेरे तो होश उड़ गए. आंटी एक पोर्न स्टार के जैसे लन्ड चूस रही थीं. लन्ड को खाए जा रही थीं. मेरी सिसकारियां और आंटी की चूसने का साउंड मिलकर मज़ा आने लगा.

आआआह ऊऊम्म पप्पपच …

मैं झड़ने वाला था. मैंने आंटी को तुरंत हटा दिया. मैं जल्दी नहीं झड़ना चाहता था.

परवीन- क्यों हटा दिया?
मैं- मैं झड़ने वाला हूँ.
परवीन- कोई बात, नहीं मैं रस पी लूंगी.
मैं- मैं पूरा माल आपके मुँह में दूंगा … लेकिन इतना जल्दी मैं झड़ना नहीं चाहता हूँ.

मुझे मालूम था कि ज़्यादा देर तक करने की ये एक कला है.

परवीन- तुम तो बहुत कुछ सीख गए हो … बदमाश.

मैं आंटी को ज़ोर से हग किया और उन्हें पेट के बल लेटा दिया. फिर मैं उनकी कोमल गाँड को सहलाने लगा.
मैं- आंटी तेल कहां है.
परवीन- मैं लेकर आती हूँ.
मैं- आप कहीं नहीं जाओगी … मैं लेकर आऊंगा … आप बस बता दो.
परवीन- ड्रेसिंग टेबल के पास कोकोनट आयल रखा है.

मैं तेल लेकर आया. आंटी बिल्कुल वैसे ही लेटी थीं. मैं एकदम से उनके ऊपर लेट गया. मेरा लन्ड उनकी गाँड के छेद में लग रहा था. मैं तेल से गाँड को मसाज करने लगा. आंटी तो मज़े ले रही थीं.

मैंने आंटी को कुतिया बनाया और मैं शुरू हो गया.

परवीन- धीरे करना बेटा … गाँड की चुदाई करे 5 साल हो गए हैं.

मुझे यही चाहिए था. मैंने ये बात सुनते ही एक ज़ोर का झटका दे मारा. आधा लन्ड गाँड में घुस गया था. आंटी की चीख इतनी तेज थी कि क्या बोलूँ … यूं समझो कि कोई औरत बच्चे को जन्म देने के वक़्त चीखती है … वैसी चीख निकली थी. मुझे डर था कि कहीं बगल वाले घर के लोग ना आ जाएं.
चाची ने दिलाया नई चूत का मजा (Chachi Ne Dilaya Nayi Choot Ka Maja)
चाची ने दिलाया नई चूत का मजा (Chachi Ne Dilaya Nayi Choot Ka Maja)
परवीन- मुझे इतना दर्द कभी नहीं हुआ था. साले अपने मूसल को बाहर निकाल मादरचोद … मुझसे नहीं होगा. तुझे जितना चाहिए, तू उतनी मेरी चूत मार ले .. उसके अलावा भी तू जो बोलेगा, वो करूँगी. मुझे बक्श दे.

लेकिन एक बार लन्ड जो अन्दर घुस गया, मैं कहां रुकने वाला था.

मैं- कुछ भी करोगी … सोच लो?
परवीन- कुछ भी करूँगी.
मैं- हिना आंटी की चूत दिलाओगी?
परवीन- हां मंज़ूर है.
मैं- तेरी बड़ी बेटी आशना की चूत दिलवाएगी?
परवीन- साले मादरचोद, मेरी बेटी के ऊपर भी नज़र डाल रखी है. तेरे मूसल से जो मैं दर्द सह रही हूँ, वो काफी है. मैं अपनी बेटी को भी इतना दर्द नहीं दे सकती.

ये सुनते ही मैंने एक और ज़ोर से धक्का मारा. मेरा पूरा लन्ड आंटी की गाँड में चला गया था. आंटी तो मुझसे दूर जाने की नाकाम कोशिश करती रहीं और चीखती रहीं.

परवीन- आआह … ऊऊऊफ्फ … मर गयी मैं … पहले वो रंडी रेशमा को मारूँगी, फिर तेरी माँ को ये सब बोलूंगी.

मैं- क्या बोलेगी रंडी … यही कि तुमने मुझे अपने घर बुलाया था चुदाई के लिए.
मैं ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा.

परवीन- अब निकाल भी दो … मैं किसी को कुछ नहीं कहूंगी. मेरी बेटी को भी कनविंस करूँगी.
मैं- ज़रूरत नहीं है … तेरी बेटी तो आलरेडी सैट है … मैं उसे खुद पटा लूँगा.

मैं ज़ोर ज़ोर से चोदने लगा. आंटी आगे पीछे कर रही थीं. इसके कारण थोड़ा तकलीफ होने लगी. इसलिए उनके बाल मैंने हाथ में पकड़ लिए और खींचने लगा. साथ ही उनके चूतड़ों को बजाने लगा.

परवीन- मादरचोद, मार क्यों रहा है … साले मुझे छोड़ दे प्लीज. एक और विनती है, तू तो मेरी बेटी को लेकर ही रहेगा. लेकिन उसे ऐसा बेरहमी से चोदना मत.
मैं- जहां दर्द आता है, वही तो मज़ा आता है.
परवीन- अब बस भी कर दे … और कितनी देर पेलेगा मुझे … आह..
मैं- अपना माल तेरे मुँह में छोड़ दूँ?
परवीन- हां … तू प्लीज जल्दी लन्ड निकाल दे.

मैंने गाँड से लन्ड निकाला और तुरंत आंटी के मुँह में लगा दिया. आंटी लन्ड चूस नहीं रही थीं. इसीलिए मैं ही उनका मुँह चोदने लगा. दो मिनट तक मैं उनके मुँह में लन्ड आगे पीछे करता रहा. फिर उनके मुँह में ही झड़ गया.

परवीन- क्या तूने रेशमा की गाँड भी ऐसे ही मारी है?
मैं- फार्म हाउस में तो रेशमा चाची की गाँड इसे भी बहुत बुरी तरह से मारी है.
परवीन- उसने कुछ नहीं कहा?
मैं- पहले तो चीखती रहीं, फिर सहयोग करने लगीं. आपकी तो 42 की गाँड है, फिर भी आप इतना क्यों मचल रही थीं.
परवीन- सच कहूं … तो मुझे इतना दर्द नहीं हुआ. लेकिन ऐसा चीखने से तुझे और मज़ा आएगा ना … इसलिए ऐसे किया. तेरा लन्ड तो मूसल है.

मैं- इतनी फिक्र करती हो मेरी खुशी की?
परवीन- तू बाकी के सब मर्दों जैसा नहीं है … मैंने तुझे गाँड मारने बुलाया, लेकिन तूने मुझे पहले खुशी देकर खुश किया, फिर मेरी गाँड मारी. तू औरत की प्यास को समझता है. तुझे जो मदद चाहिए, वो मैं करूँगी. तू मेरी लाइफ में मिला हुआ सबसे बेहतर मर्द है. तेरे बीवी बहुत खुश नसीब है. तुझे हिना चाहिए, आशना चाहिए, मैं तेरी हेल्प करूँगी.

मैं आंटी को इमोशनल किस किया.

मैं- फिलहाल तो मुझे हिना आंटी चाहिए.
परवीन- तू प्लान बना ले, मैं उसे फ़ोन करती हूं. आंटी की गाँड की चुदाई और आंटी की खुशी से मैं भी खुश हो गया. उस दिन तो मैं एक ही बार झड़ा था. थोड़ा समय हम रेस्ट लेने लगे, फिर आंटी ने मुझे दुबारा चोदने का ऑफ़र दे दिया- आज मैं पहली बार खुल कर चुद रही हूं ... मुझे फिर से मजा दे दे. 

हम दोनों तो वैसे नंगे थे. आंटी ने मेरा लन्ड तुरंत अपनी चूत में ले लिया और ऊपर नीचे होने लगीं. उनके मोटे मोटे चूचे बेहद तेजी से उछल रहे थे. 

मैं- आपके चूचे इतने मोटे कैसे हुए? 

परवीन- एक तो तेरा अंकल पहले बहुत चूसता था. दूसरा मैं अच्छे से खाती पीती हूँ ... और तीसरा मेरे 4 बच्चे हैं. उन सबको दूध पिलाने की वजह से ये इतने मोटे हो गए हैं. 

मैं- अब मेरी वजह से ये और मोटे हो जाएंगे. आंटी मेरे लन्ड पर कूदती रहीं और दस मिनट की चुदाई के बाद झड़ गईं. वे झड़ने के बाद मेरे ऊपर ही ढेर हो गईं. लेकिन मैं अभी झड़ा नहीं था. 

मैं उनको थोड़ा ऊपर उठा कर ज़ोर ज़ोर से नीचे से चूत मारने लगा. अगर हम नीचे से ऊपर की ओर चूत चोदते हैं, तो अन्दर बच्चेदानी को ज़ोर ज़ोर से छूता है. 
इसके कारण आंटी और ज़ोर ज़ोर से सिसकारियां लेने लगीं- आआह ... उम्म्ह… अहह… हय… याह… 

फिर मैं उनके अन्दर ही झड़ गया. अपना लन्ड उनकी चूत के अन्दर ही डाल कर मैं सो गया. अभी तक हम दोनों ने लंच नहीं किया था. शाम के 4 बज गए थे. आंटी ने बहुत ही मस्त बिरयानी बनाई थी. मैंने पेट भर के खा ली और वहां से निकल गया. 

मैं अब दिन रात बस हिना आंटी के बारे में सोच रहा था कि मैं उनकी चूत कैसे चोदूं. हिना आंटी काफी लंबी हैं. मुझसे भी लंबी. उनका और जस्मीन आंटी कद 5 फुट 10 इंच का है. हिना आंटी के 36 के चूचे ... कमर 32 की और गाँड 40 की थी. वो बहुत ही सेक्सी थीं. दूध जैसा गोरा बदन था. 

थोड़ी मासूम सी दिखती थीं. मैं सोच रहा था कि उनको किस कैसे करूँगा, वो मेरे से लंबी थीं. शायद उनको झुकना होगा. मैंने प्लान बनाया कि उनको पोर्न वीडियो दिखाकर पटा लेता हूँ. मैंने बहुत इंतज़ार कर लिया था. मुझे 5 दिन हो गए थे. 
आखिर परवीन आंटी का कॉल आया- हैलो ज़ीशान. 

मैं- हां बोलो आंटी. 
परवीन- मैंने हिना को घर बुलाया है. वो कल सुबह आएगी ... तुम भी आ जाना. 

मैं- ओके आंटी और सुनो, आप भी साथ ही रहना. आंटी ने हामी भर दी. इसके बाद मैंने एक बी ग्रेड मूवी की डीवीडी खरीद ली. मूवी का नाम हवस था. दूसरे दिन मैं परवीन आंटी के घर निकल गया. 

मैंने अच्छे से परफ्यूम वगैरह सब लगा कर खुद को तैयार किया ... और अच्छे से बन संवर कर निकल पड़ा. मैं आंटी के घर के आगे पहुंच गया. मैंने देखा कि घर के बाहर दो लेडीज के सैंडल्स थे. मैं समझ गया कि हिना आंटी भी आ चुकी हैं. मैंने दरवाजे की घंटी बजा दी. 

परवीन आंटी दरवाजा खोलने आईं. 
परवीन- तुम लेट हो गए हो. हिना आ चुकी है. 
मैं- ओके आंटी, आप कैसे भी करके ये डीवीडी प्लेयर में लगा देना. मैंने डीवीडी को उनके हाथ दे दिया और मैं अन्दर जाने लगा. 

हिना- अरे जीशान ... तुम यहां कैसे! 

मैं- ऐसे ही दोस्त से मिलने आया था, आंटी का घर यहीं पर था, तो आ गया. 
हिना- मेरा घर भी यहीं पर है. 
मैं- हां, मैं जानता हूं. 
हिना- जब तुम छोटे थे, तब तुम किसी के घर नहीं आते थे. सिर्फ अपनी रेशमा चाची के घर ही रहता था. अब तो तू बड़ा हो गया है, सबके घर आया करो. 

मैं- हां ... तब तो मैं छोटा था. लेकिन अब काफी मैच्योरिटी आ गयी है. 
परवीन- मैं सबके लिए चाय बनाकर लाती हूँ. मैं हिना आंटी की बगल में बैठ गया. टीवी का रिमोट आंटी के उस साइड था. मैं बिना आंटी से पूछे उनके ऊपर से हाथ डाल कर रिमोट लेने लगा. मेरा हाथ उनके चुचे को टच करने लग. मैंने टीवी ऑन किया. पहले मैं यूँ ही बेकार में चैनल बदलता रहा. 

मैं- आंटी इसमें तो कुछ ढंग का प्रोग्राम नहीं आ रहा है. कोई डीवीडी है. 
परवीन- एक ही है ... उसपे कोई मूवी का नाम नहीं है. 

मैं- कोई भी हो ... ये बोरिंग टीवी प्रोग्राम से तो उसमें कुछ अच्छा ही तो होगा. मैं डीवीडी को ऑन किया और वो डिस्क लगाने लगा. मूवी शुरू होने लगीं ... पहले शुरुआत में वो फिल्म इतनी सेक्सी नहीं दिख रही थी. तभी आंटी चाय लेकर आ गईं. हम सबने मिलकर चाय पी और इधर उधर की बातें करने लगे. अब तक टीवी में थोड़े हॉट सीन आने लगे थे. 

मैं हिना आंटी का हाथ पकड़ने लगा. ये सब परवीन आंटी देख रही थीं, लेकिन उन्होंने कुछ नहीं कहा. हिना आंटी ने भी कुछ नहीं कहा ... 

वो बस टीवी की ओर देख रही थीं. तभी मूवी में एक सीन ऐसा आया, जिसमें पति के सन्तुष्ट नहीं करने के वजह से पत्नी ने किसी दूसरे लड़के से अफेयर रखा हुआ था. वो फिल्म की नायिका उस लड़के के साथ रोमांस करने लगी थी. उसी समय परवीन आंटी को कोई बाहर से बुला रहा था ... तो आंटी बाहर जाकर उससे बात करने लगीं. 

मैं बोला- अगर पति संतुष्ट नहीं करता है, तो ऐसे ही करना पड़ता है. इस मूवी में इस औरत की कोई गलती नहीं है. 
हिना- तू इतना बड़ा हो गया. संतुष्ट करने की बात भी करने लगा. तुझे इतना सब पता है? 
मैं- आंटी, अब मैं जवान भी तो हो गया हूँ. 
हिना- अच्छा ... तो तू मुझे बता कैसे संतुष्ट करते हैं. मैंने उनको अपने मोबाइल में पॉर्न वीडियो दिखाने लगा और बोलने लगा. 

मैं- औरत ज़्यादा टाइम तक हॉट रहती है, झड़ती नहीं है. इसकी वजह से पहले चूमना चूसना और चाटना करना चाहिए. हिना- तुझे इतना सब पता है. 

मैं- हां थोड़ा बहुत जानने लगा हूँ. 
हिना- लेकिन औरत को इन सब से भी संतुष्टि नहीं होती है. 
मैं- तो फिर क्या करना पड़ता है? 
हिना- तू अभी छोटा है. 
मैं- मैंने भी तो बहुत औरतों को खुश किया है. लेकिन जो आप बोल रही हो, वैसी औरत मुझे अब तक कोई नहीं मिली है. 

हिना- मिलेंगी ऐसी भी ... तब क्या करेगा? 
मैं- मुझे पता नहीं, इसीलिए तो आपसे पूछ रहा हूँ. मैं एक हाथ से हिना आंटी की गाँड सहलाने लगा. धीरे धीरे उनके पेट के ऊपर करने लगा. 

हिना- मुझे गर्म मत कर, फिर पछताएगा. इतना आसान नहीं है. 
मैं- मैं आपको भी संतुष्ट कर सकता हूँ. आप बस मुझे मौका तो दो. तभी हिना आंटी ने मेरे लन्ड को पकड़ लिया. 

हिना- तेरा तो काफी बड़ा है. बेशक तू अब जवान है. 
मैं- इसीलिए तो बोल रहा हूँ, मौका तो दो, तब पता चलेगा. 
हिना- मुझे इस सबसे तू खुश नहीं कर पाएगा. मेरी हसरत तो कुछ और है. 

मैं- वो क्या है? मैं जानना चाहता हूँ ... प्लीज मुझे भी बता दो. 
हिना- बड़े बड़े मर्द मुझे सन्तुष्ट कर नहीं पाए हैं ... तू कहां से करेगा. तू इन सबके लिए अभी बहुत छोटा है. इतने में परवीन आंटी आ गईं. मैं यही सोच रहा था कि हिना आंटी किसके बारे में बात कर रही थीं. मेरा प्लान कुछ और था. यहां कुछ और होने लगा है. मुझे किसी हाल में हिना आंटी चाहिए थी. उनकी वो क्या हसरत है, मैं ये जानना चाहता था. परवीन आंटी ने मुझे उदास देख लिया और पूछने लगीं. 

परवीन- अरे तुझे क्या हुआ? ऐसे कैसे बैठा है? 
मैं- कुछ नहीं है. मेरा हिना आंटी से सवाल करने मन कर रहा था. मैंने परवीन आंटी को बाहर जाने के लिए इशारा किया.

परवीन- मैं अभी आती हूँ. हिना तू जीशान को कंपनी दे. परवीन आंटी ये कहकर चली गईं. फिर हिना आंटी ने जाकर दरवाजा बंद कर दिया. मैं पीछे से गया और उन्हें पीछे से हग कर लिया और चूमने लगा. एक हाथ से उनके मम्मों को दबाने लाग. वे कुछ समझ पाती कि मैंने झट से उनकी साड़ी को खींच दिया. 

हिना- ये क्या कर रहा है? तुझे बोला न मैंने, तुझसे नहीं हो पाएगा. मुझे और गुस्सा आने लगा और मैं लिप टू लिप देने लगा. अन्दर तक उनकी जीभ चूसने लगा. वो मुझे धकेल रही थीं. मैं उनको ज़ोर से पकड़ने लगा और दबाने लगा. आंटी ने मुझे ज़ोर से धकेल दिया और बाहर जाने की कोशिश करने लगीं. 

हिना आंटी अपनी साड़ी नीचे से लेने लगीं. मैंने उन्हें और ज़ोर से खींच कर नीचे गिरा लिया और उनका ब्लाउज निकालने लगा. ब्लाउज जल्दी से निकल नहीं रहा था. मैंने ज़ोर से खींच दिया, तो हिना आंटी का ब्लाउज फट गया. 

आंटी बोलने लगीं- मुझे छोड़ दे प्लीज ... मुझे इन सबमें कोई इंटरेस्ट नहीं है ... प्लीज छोड़ दे. 

हिना- मादरचोद छोड़ मुझे ... मैं तेरी रंडी नहीं हूँ. मैंने बिना सुने झट से आंटी की ब्रा को खींच दिया और उनके मस्त मम्मों को ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा. उनके निप्पलों को ज़ोर ज़ोर से खींचने लगा. 

वो जोर से चीखने लगीं- आआआह ... मुझे छोड़ दे ... प्लीज. मैं कुछ नहीं कह रहा था. मुझे तो जवाब लन्ड से देना था. अब मैं उनके मम्मों को चूसने लगा और निप्पलों को काटने लगा. 

हिना- आआआह मैं मर गयी ... ऊऊऊउफ ... छोड़ दे. मैंने उनके पेटीकोट को ज़ोर से खींचते हुए निकाल कर दूर फेंक दिया. अब आंटी सिर्फ पैंटी में थीं. तभी हिना आंटी अपनी ब्रा और पेटीकोट को हाथ में लिए हुए बेडरूम में जाने लगी. आंटी बेड पर बैठी तो मैंने झट से उनकी पेंटी को निकाल कर फेंक दिया. मैं भी जल्दी करते हुए अपने कपड़ों को निकाल रहा था. 

हिना- मुझे अभी छोड़ दे, नहीं तो बहुत पछताएगा ... आआआह. मेरे पास आंटी की चूत को चाटने के लिए टाइम नहीं था. मैंने अपनी दो उंगलियां एक बार में आंटी की चूत के अन्दर डाल दीं. 

आंटी की चीख निकल गयी- निकाल बहनचोद निकाल बाहर. मैंने उनकी इन सब बातों को अंदाज़ नहीं करते हुए, झट से अपना लन्ड उनकी चूत के अन्दर पेल दिया. पूरा लन्ड एकदम अन्दर चला गया. वो चिल्लाने लगीं- आह मादरचोद ... आआह. ... मुझे चोद दिया. मैं और उत्तेजित हो गया और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा. 

हिना- तू मुझे क्या संतुष्ट करेगा बहनचोद. ऐसा ही तो सब मर्द करते है. अब पानी छोड़कर निकल जा साले, इतना ही तो तू कर सकता है, मादरचोद. इस रंडी की ये अकड़ काम नहीं हो रही थी. मुझे मारने के लिए और प्रेरित कर रही थी. मैं और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा. इस बार मैं उनके पैर ऊपर उठा कर ज़ोर ज़ोर से पेलने लगा. 

हिना- मत कर ऐसे. लन्ड की ताकतवर चोटें पड़ने से उनकी आवाज धीमी हो गयी थी. हिना आंटी की अकड़ अब दिख नहीं रही थी. कोई पांच मिनट में ही वो झड़ने वाली हो गई थीं. आंटी ने मुझे ज़ोर से पकड़ लिया और प्यार से सीत्कारने लगीं. 

हिना- आह मर गयी रे मैं ... आआआह उफ्फ ... ऊऊऊह.. ये कहते हुए वे निकल गईं. मेरा भी दो मिनट में होने ही वाला था. मैं भी आंटी की चूत में ही झड़ गया. 

मैं- अब बात रंडी ... सन्तुष्ट किया कि नहीं. हिना आंटी ने कराहते हुए कहा- हां ... कुछ ऐसी ही थी मेरी हसरत.

मैं आंटी के बदले हुए रुख को समझ नहीं सका. तभी आंटी मेरे ऊपर आने लगीं और प्यार से ज़ोर ज़ोर से चूमने लगीं. जहां उनके काटने के वजह मुझे खून आ रहा था, वहां आंटी चूसने लगीं और बोलने लगी- तूने तो दीदी को भी चोदा है ना? 

मैं- आपको कैसे पता? 
हिना- अगर मैं घर आती हूँ, तो दीदी कहीं नहीं जाती हैं. पहली बार आज मुझे अकेला तेरे साथ छोड़ कर गयी हैं. तू जो इशारे कर रहा था, वो भी मैंने देख लिया था. 
मैं- आप बहुत ही स्मार्ट हो. 

हिना- दीदी को चोदा है, तो तूने पहले रेशमा को पटाया होगा ... नहीं तो तुझे दीदी कहां से मिलती. उस दिन तू फार्म हाउस के लिए जो बुला रहा था, उसी दिन मुझे सब पता चल गया था. 

मैं- रंडी आंटी ... तू तो मेरे से भी स्मार्ट है. इतने में दरवाजे की घंटी बजी. मैंने आंटी से जल्दी से कपड़े पहनने को कहा. 

हिना- दीदी ही होगी ... टेंशन मत ले. मैं जाती हूँ. वो ऐसे ही नंगी दरवाजा खोलने चली गईं. खोलने के पहले वो की-होल में से देखने लगीं. बाहर परवीन आंटी को देख कर कन्फर्म करके दरवाजा खोलने लगीं. जैसे परवीन आंटी अन्दर आईं, हिना आंटी ने डोर बंद कर दिया. 

परवीन- हिना ... ये क्या कर रही थी तू? 

मैं- ड्रामा की कोई ज़रूरत नहीं, उनको सब पता है. 
परवीन- मैं सब वहां विंडो से देख रही थी. हिना तेरे अन्दर ऐसी नई नई हसरतें कब से शुरू हो गईं? 
हिना- और भी बहुत सारी हसरतें हैं दीदी. कभी मेरे घर आओ, सब बताती हूँ. 

मैं- कोई नहीं आएगा ... सिर्फ मैं आऊंगा. मुझे सब सिखाना. मुझे जहां जहां नाखून के निशान बन गए थे, परवीन आंटी वहां क्रीम लगाने लगीं. हिना आंटी के गाल तो लाल हो गए थे. मैंने उन्हें काफी जोर से मारा था. उस दिन की इस चुदाई के बाद हम तीनों सामान्य होकर बैठ गए. कुछ देर बाद हिना आंटी ने मुझे दूसरे दिन घर आने को कहा. वहां जाकर मैंने उनसे बहुत कुछ ज्ञान हासिल किया. वो सब मैं आपको अगले भाग में लिखूंगा.
चाची ने दिलाया नई चूत का मजा (Chachi Ne Dilaya Nayi Choot Ka Maja) चाची ने दिलाया नई चूत का मजा (Chachi Ne Dilaya Nayi Choot Ka Maja) Reviewed by Priyanka Sharma on 1:30 AM Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.