सविता की पहली चुदाई (Savita Ki Pehli Chudai)

सविता की पहली चुदाई
(Savita Ki Pehli Chudai)

हैलो दोस्तो, मेरा नाम जय है, नागपुर का रहने वाला हूँ, मैं 21 साल का हूँ और मेरी हाइट 6 फ़ीट है। बात उन दिनों की है, जब मैंने हाई स्कूल पास किया और इंटर में एडमिशन लेने के लिए कोशिश कर रहा था। हालांकि मेरे मार्क्स अच्छे थे, पर मैं जिस कॉलेज में एडमिशन लेना चाहता था उसके हिसाब से कुछ कम थे। मेरे सब दोस्त एडमिशन ले चुके थे, पर मैं उसी कॉलेज में एडमिशन लेना चाहता था।

एक दिन मैं फॉर्म सब्मिट करने की कोशिश कर रहा था… कि एक लड़की मेरे पास आई। उसने कहा- हैलो जय !

मैंने उधर पलटकर देखा वो ही आँखें वो ही सीना वो ही मुस्करता चेहरा। अब आप सोच रहे होंगे यह कौन है और कहाँ से आई। तो ये है वो आज की इस स्टोरी की हिरोइन। जी हाँ ‘सविता’!

दरअसल हम लोग तीसरी क्लास से एक साथ एक ही स्कूल में पढ़ रहे थे, पर हम लोगों मैं कभी बात नहीं हुई, लेकिन आज उसने मुझे ‘हैलो’ बोला, तो कुछ देर तक मेरे मुँह से कुछ नहीं निकला।

फिर उसने कहा- फॉर्म सब्मिट करना है?

मैंने कहा- हाँ !

तो उसने कहा- फॉर्म मुझे दे दो और मेरे साथ आओ।

मैं बिना कुछ बोले उसके पीछे हो लिया। तब वो मुझे साइंस के डिपार्टमेंट में ले गई और अपने अंकल से मिलाया और कहा- मैं इनको फॉर्म दे देती हूँ, आपका काम हो जाएगा।

पर मैंने कहा- मेरे मार्क्स कुछ कम हैं !

तो अंकल ने कहा- कोई बात नहीं.. सविता तुम्हें अप्रोच कर रही है, तो तुम्हारा काम हो जाएगा।

हम लोग डिपार्टमेंट से बाहर आए तो मैं सविता से बोला- सविता धन्यवाद !

उसने कहा- किस बात के लिए?

मैंने कहा- तुमने एडमिशन में मेरी हेल्प की इसलिए।

उसने कहा- हम लोग एक-दूसरे को काफ़ी टाइम से जानते हैं, तो दोस्त हैं और सच पूछो मेरी सभी फ्रेंड्स ने एडमिशन अलग-अलग कॉलेज में ले लिया और यहाँ मैं अकेली थी। अंकल की वजह से मैंने यहाँ एडमिशन लिया, लेकिन कोई परिचित का ना होने की वजह से मैं चाह रही थी कोई ऐसा हो जिसे मैं यहाँ जानती होऊँ ताकि क्लास अटेंड करने में बोरियत महसूस ना हो। तभी तुम मुझे दिखे और मैं आपके मार्क्स जानती थी, इसलिए मैंने सोचा आप दोस्त भी हैं और जिस तरीके से आप एडमिशन ले रहे हैं, वैसे तो एडमिशन होना नहीं है। इसलिए मैं और आपको अपने अंकल के पास ले गई, तो नाउ वी आर फ्रेंड्स।

तब मैंने अपना हाथ मिलाने के लिए उसकी तरफ बढ़ाया और कहा- श्योर… वाइ नॉट !

जब इतनी बातें हम दोनों के बीच में हो गईं, तब मुझमें कुछ हिम्मत जागी और मैंने कहा- सविता, क्या तुम मेरे साथ कॉफी पीने चलोगी?

उसने कहा- अगर यह रिश्वत है तो नहीं और अगर एक दोस्त दूसरे दोस्त से पूछ रहा है तो श्योर !

मैंने कहा- रियली, एक दोस्त दूसरे दोस्त से पूछ रहा है।

फिर हम लोग कॉफी पीने गए और ढेर सारी पुरानी बातें की। कैसे आज तक मैं इतने सालों से उससे बातें करना चाहता था, पर ना कर सका। इस प्रकार हम दोनों में दोस्ती हुई, जो पिछले 8 सालों से सिर्फ़ एक-दूसरे को देख रहे हों, बातें ना करते हों और अचानक वो इतनी जल्दी दोस्त बन जाते हैं। है ना लक…

इसलिए मैंने यह सब रामकथा आप लोगों को सुनाई। चलो अब अगर आप बोर हो गए हों तो ज़रा अटेंशन हो जाए क्योंकि अब मैं सविता की जवानी के बारे में बताने जा रहा हूँ।

दरसल सविता एक नाटे कद की साँवली लड़की थी। उसका चेहरा साधारण था, मेरा मतलब एक आम लड़की के जैसा। उसके बावजूद वो ‘गुड-लुकिंग’ थी। लेकिन उसमें जो सबसे आकर्षक था, वो थे उसके मम्मे। उसकी छोटी सी बॉडी में छोटी फुटबॉल जितने बड़े मम्मे। सच बताऊँ.. मैं जब से उसे जानता था, उसको कम, उसके मम्मे ज्यादा देखता था।

यह सिर्फ़ मैं नहीं करता था, हर वो लड़का, टीचर, लड़की करते थे कि उसका चेहरा नहीं, उसके मस्त मम्मे देखते थे। क्यूँकि उसकी काया में अगर कुछ आकर्षक था तो वो थे उसके मम्मे। ये मम्मे ही उसे सेक्सी, हॉट और मज़ेदार बनाते थे। मैं अक्सर ख्यालों में उसके मम्मों को अपने हाथों में लेता था, पर कमबख्त आते ही नहीं थे। बहुत बड़े थे न !

इंटर की क्लासें शुरु हो गईं, हम दोनों अगल-बगल में बैठते थे और पढ़ाई के साथ मजाक भी करते, कैंटीन में जाते, बातें भी करते और एक-दूसरे के साथ मज़ाक भी करते। फिर मैं उसे कॉलेज से उसके घर और घर से कॉलेज लाने ले जाने लगा।

जब घर से वो निकलती अकेले, मैं कुछ दूर पर उसका इंतज़ार करता और वो आकर मेरी मोटरसाईकल पर बैठ जाती और कॉलेज घर जाते टाइम मैं उसे घर से पहले छोड़ देता।

एक दिन उसने अपनी जन्मदिन में मुझे अपने घर बुलाया और सबसे मिलाया। मैंने उसके मम्मी और पापा के चरण छुए और उसकी एक बड़ी बहन थी सुनीता, लेकिन उससे बिल्कुल अलग, पर एक चीज़ सेम थी मालूम है क्या? उसके मम्मे ! शायद सविता से भी बड़े क्योंकि वो सविता से दो साल बड़ी थी। उस दिन से मेरा उसके घर आना-जाना शुरू हो गया।

कुछ दो या तीन महीने निकल गए इन सब में। अब मैं कभी कभी पढ़ाई करने भी उसके घर जाने लगा। मेरा मतलब हम दोनों एक-दूसरे के क्लोज़ हो गए। हमने कभी ‘आई लव यू’ नहीं कहा। क्यों…! यह बात फिर कभी….पर बताऊँगा ज़रूर।

तो शायद अब आप लोग पूरी तरीके से समझ गये होंगे। तो अब मैं उस दिन की बात बताने जा रहा हूँ जिसके लिए आपने इतना सारा पढ़ा और मुझे शायद गाली भी दी होगी। तो मेरे बेसब्र दोस्तो, सब्र रखो क्योंकि सब्र का फल मीठा होता है। तो मैं शुरु करता हूँ।

उस दिन रविवार था, जब मैं उसके घर गया। मैंने कॉल-बेल दबाई.. अंदर से कोई आवाज़ नहीं आई। कुछ देर बाद मैंने दुबारा घण्टी बजाई, तभी अंदर से मधुर सी आवाज़ आई- कौन है?

मैंने कहा- मैं… विक्की !

उसने कहा- एक मिनट।

मैं दरवाज़े के बाहर इंतज़ार करने लगा और कुछ सोचने जा ही रहा था कि दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आई और खुल गया, पर दरवाज़े पर कोई नहीं…!

मैं देख ही रहा था कि फिर से वो ही आवाज़ आई- अरे जल्दी अंदर आओ, क्या वहीं खड़े रहोगे !

मैं झट से अंदर घुसा और जैसे अंदर घुसा तभी दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आई और मैं पलटा और पलटते ही दंग रह गया..!

वो भीगे हुए बदन एक घुटनों से भी ऊपर तक के गाउन से डाले हुई थी और जाँघों के नीचे से नंगे पैर….! वो जो नज़ारा था या कोई कयामत था !

वो कोई और नहीं अपनी फिल्म की हिरोइन सविता थी। उसने मेरी तरफ देखा और कहा- तुम 5 मिनट वेट करो, मैं बस अभी आती हूँ।

और मुझे हतप्रभ सा वहीं छोड़ गई। मैं कुछ समय के बाद नॉर्मल हुआ और सोफे पर बैठ गया। कुछ देर बाद एक लो-कट टी-शर्ट और ब्लू रंग की स्किन टाइट जीन्स पहने हुए भीगे बालों को पोंछते हुए वो मेरे सामने आई और कहा- अरे ! क्या हुआ ठीक से बैठते क्यों नहीं हो…!

मैंने अपने आप को ठीक किया और नॉर्मल दर्शाने के लिए पूछा- आज कोई दिख नहीं रहा !

सविता ने कहा- दिखेंगे कैसे ! जब कोई होगा तब ना ! मम्मी-पापा और दीदी चन्द्रपुर गए हैं शादी में, देर रात को आएँगे। मेरा मन नहीं था इसलिए नहीं गई।

मैं अंदर ही अंदर बहुत खुश हुआ और अपने अंदर हिम्मत भी आ गई।

तो मैंने कहा- हम्म… तो आज तुम अकेली हो !

उसने कहा- अकेली ! नहीं तो, किसने कहा?

मैंने कहा- मम्मी-पापा और दीदी सब चले गये, फिर कौन है तुम्हारे साथ?

उसने कहा- तुम हो ना…!

मेरे मुँह से ज़ोर सी हँसी निकल गई… और वो भी हँस दी।

तभी उसने कहा- रियली !! मैं अभी तुम्हें फ़ोन करने वाली थी, मैं यहाँ अकेली हूँ तुम आ जाओगे तो साथ भी हो जाएगा, स्टडी भी हो जाएगी और समय भी कट जाएगा। अच्छा तुम दो मिनट बैठो मैं कॉफी ले के आती हूँ।

मेरी नज़र ना चाहते हुए भी बार-बार उसके मम्मों की तरफ जा रही थी। भीगे बालों में वो इतनी सेक्सी लग रही थी कि एक बारी तो मेरा लन्ड खड़ा होते होते बचा…! आज मैं सविता की चूचियाँ दबा कर ही मानूँगा चाहे जो हो जाए पर कैसे? कहीं चिल्ला दी तो? अरे नहीं इतने सालों से जानती हैं नहीं चिल्लाएगी ! लेकिन अगर कहीं बुरा मान गई तो दोस्ती टूट गई तो…? फिर क्या किया जाए… कैसे सविता की चुदाई करूँ…! कुछ समझ में नहीं आ रहा है…

मैं इन्हीं ख़यालों मैं डूबा था कि सविता की आवाज़ आई, “अरे विक्की क्या सोच रहे हो…!”
मुझे झटका लगा, क्या बोलूँ, बोलूँ कि न बोलूँ ! तभी सविता की आवाज़ दुबारा मेरे कानों में पड़ी, “विक्की तबीयत तो ठीक हैं…!”
मैंने कहा- तबीयत …! तबीयत को क्या हुआ ! ठीक तो है… बस कुछ सोच रहा था।
“क्या सोच रहे थे?” सविता ने पूछा।

मैंने कहा- कुछ खास नहीं !

और उसके हाथों से बढ़ाया हुआ कॉफी का मॅग ले लिया और सिप लिया। वाकयी कॉफी बिल्कुल सविता की ज़वानी जैसी कड़क बनी थी।

तो मैंने कहा- मुझे नहीं पता था कि तुम इतनी अच्छी कॉफी बना लेती हो।
वो मुस्कराई और कहा- हाँ..आआं.. कभी-कभी, वरना दीदी ही बनाती है।

अब हम लोग खामोश होकर कॉफी सिप कर रहे थे और मेरी नज़र सविता के मम्मे की तरफ जा रही थी बार-बार लगातार। मैं कॉफी सिप करता जाता और उसके मम्मे देखता जाता। मुझे ये भी ख्याल नहीं रहा कि सविता जिसके मम्मे मैं देख रहा हूँ, वो मेरे सामने बैठे ही कॉफी सिप कर रही है।

दोस्तों एक बात बताऊँ, हम लड़के चाहें जितनी होशियारी क्यों न करते हों, पर लड़कियों की नज़रों से नहीं बच सकते कि आप क्या सोच रहे हो? क्या देख रहे हो? वो लड़की जो बचपन से ये देखती आ रही हो कि लोगों की नज़र मेरी तरफ कम मेरे मम्मों की तरफ़ ज्यादा जाती है, तो वो क्या सोचती होगी…!

तभी उसने मुझे टोका, “जय…क्या देख रहे हो?”

इस सवाल ने मेरा पसीना निकाल दिया और मैं बिल्कुल हकला गया, मैंने कहा- कुछ.. कुछ… भी तो नहीं !
लेकिन सविता आज कुछ और मूड में थी तो उसने कहा- नहीं कुछ देख रहे थे…!
उसके कहने के अंदाज़ ने मुझे और डरा दिया…।

उसने कहा- बोलो…क्या देख रहे थे…?

मैंने बड़ी हिम्मत करके उसके दोनों मम्मों की तरफ़ इशारा करते हुए कहा- वो..ओओओ… दोनों।

सविता ने मेरी ऊँगलियों का इशारा समझते हुए भी कहा- मैं समझी नहीं मुँह से बोलो, क्या देख रहे थे…?

अब मुझे ये नहीं समझ मैं आया कि मैं क्या बोलूँ, मैंने कहा- सीना….देख रहा था।
सविता ने कहा- सीना ! क्यों…सीने में क्या है…?

अब मैं चुप ! क्या बोलूँ !

उसने फिर कहा- अरे ! बोलते क्यों नहीं हो…!

तो मैंने कहा- तुम्हारी चूचियों को…!!
जिस प्रकार डरते हुए उसको मैंने ये वर्ड बोला …वो ज़ोर से हँस दी…और कहा- अरेएए यार … तो डर क्यों रहे हो? कौन आज पहली बार तुम इन्हें देख रहे हो या कौन से पहले तुम हो जो इसे देख रहे हो ! देखने वाली चीज़ है सब देखते हैं…! तो तुम देख रहे हो तो क्या अपराध कर रहे हो…!

जब सविता ने ये वर्ड्स बोले, तब मेरी जान में जान आई और मैं मुस्कराए बगैर नहीं रहा सका…और अपनी झेंप मिटाने लगा।

उसी वक्त सविता सामने वाले सोफे से उठकर मेरे बगल में सटकर बैठ गई और मेरे हाथों से कॉफी का मॅग ले कर टेबल पर रख दिया और मेरी आखों की तरफ देखने लगी…और कहा- अब देखो… जो देखना है…!
मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूँ ! तभी उसने अपने होंठों को मेरे होंठों पर रख दिए और कहा- शायद अब तुमको देखने में आसानी होगी।

और ज़ोर से मेरे होंठों को चूसने लगी। थोड़ी देर में मैं गरमा गया और मेरे हाथ उसकी चूचियों को दबाने लगे और अब मैं भी उसके होंठों को चूस रहा था। ये मेरी लाइफ का सबसे बड़ा और हॉट दिन था। आज से पहले मैंने कभी ऐसा महसूस नहीं किया था। धीरे-धीरे हम दोनों की साँसें गरम हो रही थीं और मेरे हाथों का दबाव उसकी चूचियों पर बढ़ता ही जा रहा था और वो ज़ोर-ज़ोर से साँसें ले रही थी।

तभी वो मेरे बगल से उठ कर मेरे ऊपर दोनों घुटनों को मोड़ कर अपने हिप्स को मेरे ऊपर रख कर मेरी तरफ अपना सीना दिखाते हुए बैठ गई। मेरे ऊपर चढ़ कर मेरे होंठों को बदस्तूर दबाए जा रही थी। मैंने भी उसे अपनी बाहों में कस कर भर लिया और उसेके रसीलें होंठों को चूसने लगा।

जिस अंदाज़ से वो मेरे ऊपर बैठी थी, उससे उसके चूतड़ों का भार मेरे लन्ड पर पड़ रहा था, जिसकी वजह से मेरा लन्ड टाइट होने लगा और उसके चूतड़ों के बीच की दरार को छूने लगा।

सविता ने मादक आवाज में पूछा- जय ये मेरे नीचे कड़ा-कड़ा क्या लग रहा है?

मैंने भी उसी मदहोशी के आलम में कहा- सविता ये मेरा लन्ड है।

“क्या मैं इसे देख सकती हूँ?”
मैंने कहा- डार्लिंग ये सिर्फ़ तुम्हारे लिए ही है।

और वो सोफे से उतर कर नीचे ज़मीन पर घुटने के बल बैठ गई और अपने हाथों से मेरी पैंट के ऊपर से ही लन्ड पकड़ लिया और वो मेरी तरफ़ देखते हुए मेरा लन्ड मसलने लगी।

मैंने बढ़कर उसके होंठों को चूम लिया और हाथों से मैं अब उसकी टी-शर्ट उतारने लगा, तो उसने अपने दोनों हाथों को ऊपर कर दिया और मैंने उसकी टी-शर्ट उतार दी। वो अंदर ब्रा में अपने मिनी फ़ुटबाल जितनी चूचियों को दबाए हुए थी। वो बिना परवाह किए मेरे लन्ड को पैंट के ऊपर से मल रही थी। मैंने ब्रा के ऊपर से उन हिमालय जितनी विशाल चोटियाँ देख कर दंग हो गया।

जो कल तक मेरे सपना था, आज हक़ीक़त बनकर मेरे सामने खड़ा था। जिन्हें दबाने की मैं कल्पना किया करता था, आज मैं उन्हें रियल में दबा रहा हूँ। मैंने उन्हें खूब जमकर दबाया, उसके बाद उसकी ब्रा खोल दी। दो उछलती हुई गेंदें बाहर आ गईं। उन चूचियों को मैंने क़ैद से आज़ाद कर दिया और वो अब मेरे सामने सीना ताने खड़ी थी।

मैंने सविता को अपनी गोद में बैठा लिया और उसकी एक चूची को अपने मुँह में भर लिया और दूसरी को अपने हाथों से दबाने लगा।
अब सविता के मुँह से सिसकारियाँ निकलने लगीं, “आआआआआआ ईईईईईईई…।”

उसका बदन अंगारों की तरह तप रहा था। मेरा लन्ड पैंट से निकलने के लिए बेताब हो रहा था।
मैंने सविता से कहा- जानू अब मेरा हथियार अपने होंठों से चूसो !

उसने तुरंत मेरी पैंट की ज़िप खोल कर लन्ड बाहर निकाल लिया और उसे देख कर मेरी तरफ़ मुस्कराई और उसे चूसने लगी। मैं सोफे पर से उतर गया और पैंट पूरी उतार दी। अब मेरा पूरा लन्ड सविता के सामने था और वो मज़े से चूस रही थी। अब मैंने अपने बचे कपड़े भी उतार दिए और सविता मेरा लन्ड चूसने में मस्त थी।

अब मैंने उसको खड़ा करके उसे अपनी बांहों में भर लिया और उसकी जींस उतार दी। वो बिल्कुल नंगी मेरे सामने खड़ी थी और मैं उस नंगे बदन को निहार रहा था।

उसकी चूत की घाटी पे उगे छोटे-छोटे बाल मुझे बिल्कुल फूलों जैसा अहसास दे रहे थे। मैंने तभी एक हाथ से उसकी चूची पकड़ी और दूसरे हाथ की ऊँगली उसकी चूत में डाल दी। उसकी चूत बिल्कुल गीली हो चुकी थी। उसने लिसलिसा पानी छोड़ दिया था। मैंने अच्छी तरीके से अपनी ऊँगली को उसकी चूत में डाल दी। धीरे से मैंने दो ऊँगली उसकी चूत में डालीं, तो वो सिहर उठी।

जब मेरी दोनों उँगलियाँ चूत के पानी से गीली हो गईं, तो मैंने उन दोनों ऊँगलियों को अपने मुँह में डाल लीं। फर्स्ट टाइम मुझे जन्नत के स्वाद का अहसास हुआ। अब मैंने उसे सोफे पर लिटा दिया। हम दोनों पूरी तरह से नंगे हो चुके थे। जल्दी कोई थी नहीं क्योंकि अभी तो दोपहर थी और सबको आना था रात में। मैंने उसके पूरे बदन को अपनी जीभ से चाटने लगा और चूचियों को लगातार दबा रहा था। उसका बदन पूरे तरीके से भभक रहा था… वो बुरी तरीके से गरम हो चुकी थी।

मैंने अपनी उँगलियों से उसकी चूत को चोद रहा था। उसके मुँह से सिसकारियाँ निकल रही थीं, “ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्छ ईईईईईईईईए जय अब मुझे चोद दो मैं बर्दास्त नहीं कर पा रही हूँ।”

अब मैंने उसे अपने बदन के ऊपर लेता हुआ सोफे पर लेट गया और 69 की पोजीशन बना ली। मैंने बहुत सी ब्लू फिल्म्स में ऐक्टर और ऐक्ट्रेस को इस तरीके से मज़ा लेते देखा था, इसलिए मैंने सविता को बताया उसे क्या करना है?
सविता की पहली चुदाई (Savita Ki Pehli Chudai)
सविता की पहली चुदाई (Savita Ki Pehli Chudai)
वो मेरा लण्ड लेकर उसे चूसने लगी और मैं उसकी चूत को चाटने लगा। मैं उसकी चूत को कभी ऊँगलियों से, तो कभी जीभ से चोद रहा था। उससे रहा नहीं गया वो मेरे लन्ड को खा जाने वाली स्टायल से चूस रही थी और मैं उसकी चूत को बड़े प्यार से जीभ से चोद रहा था।

वो मेरा लन्ड चूसना छोड़ कर मादकता से भरी कराह निकालने लगी और मेरी तरफ़ याचना की नज़र से देखने लगी, जैसे कह रही हो, बस करो जय खेलना ! जो बाँध टूटने वाला है ! अब मुझसे नहीं रुक रहा है…..!

तो मैंने उसे अब सोफे पर लिटा दिया और अपने लन्ड का सुपाड़ा उसकी चूत के मुँह पर रख दिया और बाहर से ही उसके ऊपर लन्ड का लाल वाला हिस्सा जिसे सुपाड़ा कहते है रगड़ने लगा। हम दोनों को एक जलन सा अहसास होने लगा, जो कभी तो ठंडा लगता और कभी भट्टी की तरह गरम।

जब मुझसे भी रहा नहीं गया, तब मैंने अपना लन्ड पकड़ के उसकी चूत के अन्दर डाला। लेकिन चूत बहुत टाईट थी। मैंने थोड़ा जोर लगाया तो सविता चिल्ला उठी। मैंने उसके होंठों पर अपने होंठों को रख दिया और चूसने लगा। कुछ सेकेंड बाद मैंने एक जोर का धक्का दिया तो मेरा आधा लन्ड चूत में चला गया।

उसने चीखना चाहा, पर मेरे होंठों ने उसकी चीख रोक दी। मैंने उसके होंठों चूसना बदस्तूर जारी रखा। जब उसे थोड़ा आराम मिला, तो फिर एक जोर का धक्का और लगाया उसकी चीख के साथ ही खून की एक धार भी निकल पड़ी चूत से, पर मैंने परवाह नहीं की क्योंकि ये तो होता ही जब नई चूत फटती है।

मैंने धीरे-धीरे अपने लन्ड को अन्दर-बाहर करना शुरु किया। पहले तो उसके मुँह से “ऊँ…ऊँ” की आवाजें आती रहीं, फिर कुछ देर बाद वो भी अपनी कमर उठा-उठा कर मेरा साथ देने लगी। अब हम दोनों हवा में उड़ रहे थे। कमर एक ताल में चल रही थी।

जब मैंने देखा सविता को अब कोई दर्द नहीं है, तो हमने अपनी स्टायल को बदल लिया और डॉगी-स्टायल में आ गए। मैं उसे पीछे से खड़ा करके चोद रहा था और एक हाथ से उसके बाल पकड़े हुए था और दूसरे हाथ से उसकी ‘बमपिलाट चूचा’ दबा रहा था। अपने लन्ड से सविता की चूत चोद रहा था और सविता के मुँह से आवाजें आ रही थीं।

वो लन्ड पहली बार खा रही थी, इसलिए शोर ज्यादा मचा रही थी, पर मैं परवाह किए बगैर उसे हचक कर चोद रहा था। तभी सविता का बदन अकड़ने लगा और वो एकदम से ढीली हो गई। मैंने दुबारा उसे जल्दी से तैयार किया और अबकी बार उसे अपनी गोद में लेकर चोदा।

उस दिन हमने एक-दूसरे को 3 बार चोदा। वो दिन मेरी लाइफ का सबसे हसीन दिन था। मुझे मेरी जवानी का अहसास सविता ने ही कराया था। हम दोनों ने फर्स्ट टाइम जन्नत की सैर की। उसके बाद हम दोनों ने एक साथ बाथरूम में शावर लिया और काफ़ी पीने बैठ गए।

मैंने सविता को आज के लिए ‘थैंक्स’ कहा तो सविता ने मुस्कराया और कहा- नहीं जय, तुम नहीं जानते, आज मैंने तुमसे क्या पाया, इसका अगर तुम्हें अहसास होता, तो तुम मुझे ‘थैंक्स’ न कहते बल्कि मुझे तुम्हें ‘थैंक्स’ कहना चाहिए।

फिर थोडी देर हम लोगों ने नॉर्मल होने के लिए कुछ इधर-उधर की बातें की और दुबारा इसी तरीके से मौका मिलने पर एक-दूसरे को चोदने का वादा किया !
आपको मेरी ये कहानी कैसी लगी। 
सविता की पहली चुदाई (Savita Ki Pehli Chudai) सविता की पहली चुदाई (Savita Ki Pehli Chudai) Reviewed by Priyanka Sharma on 9:01 PM Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.