सफर में हुई कमसिन हसीना से दोस्ती (Safar Me Hui Kamsin Haseena Se Dosti)

सफर में हुई कमसिन हसीना से दोस्ती (Safar Me Hui Kamsin Haseena Se Dosti)  

मेरा नाम आनन्द राज सिंह है, घर में मुझे प्यार से अन्नी बुलाते हैं। मेरे परिवार में मेरी मां और पिताजी है। मैं घर में अकेला और उनका लाड़ला बेटा हूं। मेरे पिताजी वकील हैं उनका नाम सुरजीत सिंह है। मेरी मां का नाम वैशाली है।

मैं सॉफ्टवेयर इंजीनियर हूं। मैं हमेशा अपनी कार से ऑफिस जाया करता हूं और घर आने के बाद अगर समय मिलता है तो मैं अपनी मां को घुमाने लेकर जाता हूं। मेरे पिताजी तो अपने कामों में व्यस्त रहते हैं, वे मां को इतना टाइम नहीं दे पाते इसलिए मैं ही कभी कभार मां को घुमाने ले कर जाया करता हूं।

एक दिन ऑफिस जाते समय मेरी कार रास्ते में खराब हो गई फिर मुझे बस से जाना पड़ा। जब मैं बस में चढ़ा तो वहां पर एक भी सीट खाली नहीं थी. अगले स्टेशन पर एक औरत बस से उतरी और मैं वहां पर बैठ गया।
तभी एक लड़की उसी स्टेशन से बस पर चढ़ी। पहले तो मेरा ध्यान उस पर नहीं गया। पर जब वह खड़े खड़े इधर उधर देख रही थी तो मुझे उसे देखकर कुछ अच्छा नहीं लगा। मैंने उसे अपनी सीट दे दी और फिर खुद खड़े-खड़े ऑफिस तक गया।

आते समय भी मैं बस से घर वापस आया। अभी मेरी कार ठीक होने में कल तक का समय लगना था।

दूसरे दिन भी मैं बस से गया और उस दिन भी वैसे ही हुआ जैसे पिछले दिन हुआ था। उसी दिन की तरह मैंने उस लड़की को अपनी सीट दी और खुद खड़े खड़े सफर किया।

फिर तीसरे दिन मैं खुद ही जानबूझकर बस से गया। लेकिन उस दिन वह लड़की नहीं आई थी। मैं उसे इधर-उधर उसे देखता रहा लेकिन वह मुझे कहीं नहीं दिखी।
और फिर मैं ऑफिस पहुंचा। शाम को ऑफिस से अपना काम निपटा कर मैं अपनी गाड़ी लेता हुआ घर लौट आया।

घर लौटने के बाद मैंने अपनी मां और पिताजी के साथ खाना खाया फिर मैं अपना ऑफिस का काम करने लगा। लेकिन काम करते करते मुझे अचानक उस लड़की का ध्यान आया। फिर मैं सोचता मुझे उसका ध्यान क्यों आ रहा है? ऐसा कहने के बाद मैं फिर अपने काम पर लग गया।

दूसरे दिन जैसे ही मैं घर से ऑफिस के लिए निकला, तभी मुझे बस स्टैंड पर वह लड़की खड़ी दिखी। वह मुझसे लिफ्ट मांग रही थी, उसने कहा कि उसकी बस मिस हो गई है और उसको कॉलेज के लिए देरी हो रही है।
मैंने उसे गाड़ी में बैठने को कहा। उसके बाद मैंने उससे उसका नाम पूछा उसका नाम सलोनी था।
उसने मेरा नाम पूछा तो मैंने अपना नाम बताया। वह कॉलेज की स्टूडेंट थी। उसका कॉलेज मेरे ऑफिस के बगल में ही था। तो मैंने उसे कॉलेज तक छोड़ा और ऑफिस चला गया।

फिर अगले दिन ऑफिस जाते समय मैंने उसे खुद ही लिफ्ट दी और बैठने को कहा।
उसने कहा- मेरी बस आने ही वाली होगी, आप क्यों तकलीफ कर रहे हो।
मैंने कहा- मैं भी ऑफिस जा रहा हूं, तुम्हें कॉलेज तक छोड़ दूंगा।
और वह मेरे साथ आगे वाली सीट पर बैठ गई।

कुछ दिन तक ऐसे ही हम दोनों साथ-साथ जाने लगे थे। और फिर एक दिन मैंने उससे उसका नंबर लिया और दूसरे दिन उसको फोन किया। हम दोनों की बातें फोन पर होने लगी थी। हम दोनों एक दूसरे से बात करने लगे थे। जब मैं ऑफिस से घर आता तो उसे फोन करता। और जब सुबह उठता तो सबसे पहले उसे ही फोन करता था। यह एक अजीब सा अहसास था जो मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। शायद उसे भी अच्छा लग रहा होगा।

मैं सलोनी के साथ बहुत सी बातें शेयर करने लगा था।

एक दिन ऐसे ही मैंने उससे फोन पर अश्लील बातें शुरू करने लगा। उसे इस बात से कुछ आपत्ति नहीं थी। वह भी मुझसे अश्लील बातें करने लगी और जैसे ही उससे मैं अश्लील बातें करते जाता, वह मुझे और बढ़ावा देती और मुझसे ऐसे ही बातें करने लगी।

मैंने उसका फिगर पूछ लिया और उसके बाद मैंने उसे यह भी पूछा कि तुमने अपनी चूत में कभी उंगली डाली है।
उसने कहा- नहीं, मैंने आज तक नहीं डाला क्योंकि अभी तक मेरी एकदम सील पैक चूत है। पहली बार मैं किसी लड़के से बात कर रही हूँ। मैंने आज तक कभी कोई बॉयफ्रेंड नहीं बनाया।

यह सुनकर मैं बहुत खुश हो गया और अंदर ही अंदर मैं यह सोच रहा था कि मैं उसकी चूत लूंगा। मुझे बहुत अच्छा लग रहा था यह सोच कर कि वह एकदम टाइट और फ्रेश माल है।

मैंने उसे कहा- हम लोग अगले दिन कहीं बाहर निकलते हैं।
वो कहने लगी- ठीक है, हम लोग कहीं घूमने चलेंगे।
मैंने उसे कहा- मैं कल अपने ऑफिस से छुट्टी ले लूंगा, हम लोग कहीं चलते हैं।
वह कहने लगी- ठीक है, मैं कल सुबह आपको बस स्टैंड पर ही मिलूंगी।

मैं ऑफिस के लिए निकला हूँ यह मेरे घर वाले सोच रहे थे। लेकिन मैं सलोनी के साथ जाने के लिए निकला था।

मैंने बस स्टैंड से उसे अपनी कार में बैठाया। हम लोग कहीं लॉन्ग ड्राइव पर निकल पड़े। उसने आज बहुत टाइट सलवार पहन रखी थी। जिसमें उसकी गांड के उभार साफ साफ दिखाई दे रहे थे। उसके स्तन के उभार भी मुझे साफ साफ दिखाई दे रहे थे।
मैं यह देखकर बहुत खुश हुआ और मैंने उसकी जांघों पर हाथ लगाना शुरू कर दिया। उसे अच्छा लग रहा था। उसने भी मेरे छाती पर हाथ रख दिया और मेरी छाती पर बड़े प्यार से हाथ फेरने लगी। मैं उसके स्तनों को भी बड़ी जोर से दबाने लगा।
सफर में हुई कमसिन हसीना से दोस्ती (Safar Me Hui Kamsin Haseena Se Dosti)
सफर में हुई कमसिन हसीना से दोस्ती (Safar Me Hui Kamsin Haseena Se Dosti)  
मैंने उसे कहा- एक काम करते हैं, हम लोग आगे कोई जगह देखकर वहां पर सेक्स करते हैं।
वो कहने लगी- ठीक है, आप जगह देख लीजिए।

मुझे आगे एक सुनसान जगह दिखाई दी जहां पर कोई आ नहीं रहा था। मैंने अपनी कार की सीट को फोल्ड कर दिया और उसे वहीं लेटा दिया। मैंने उसके कपड़े खोल दिए थे, वह एकदम नंगी हो चुकी थी और मैंने अपने कपड़े भी उतार दिए।

मैंने उसके होठों को पहले किस किया. उसके बाद मैंने उसके स्तनों को चूसना शुरू किया। मैं उसके स्तनों को चूस रहा था तो मैंने उसके निप्पल को भी चूसना शुरु कर दिया। मैंने उसके चूचों के ऊपर अपने दांत से निशान लगा दिए और लव बाइट दे दी थी। उसने भी मेरी गर्दन पर लव बाइट दे दी।

मैंने उसके पेट को भी अपनी जीभ से चाटना शुरू किया और धीरे-धीरे उसके चूत को चाटने लगा। थोड़ी देर बाद मैंने अपने लण्ड को उसके मुंह में डाल दिया और उसे कहा- तुम इसे अच्छे से चूसो। तो उसने पहले मुझे मना किया क्योंकि वह उसका पहली बार था। वह मुझे कहने लगी- नहीं, मैं यह नहीं करूंगी।

लेकिन मैंने उसे मना लिया और उसके मुंह में अपना लण्ड डाल दिया। अब मैं उसके मुंह में लण्ड अंदर बाहर कर रहा था। वह थोड़ी देर बाद अपने आप ही लण्ड चूसने लगी।

थोड़ी देर बाद मैंने उसकी चूत में अपने लण्ड को डालना शुरू किया। जैसे ही मेरा लाल टोपा उसकी चूत में घुसा तो वह बहुत दर्द से चिल्ला उठी और कहने लगी- उम्म्ह… अहह… हय… याह… मुझसे नहीं हो पाएगा।
मैंने उसे मनाया दोबारा से लण्ड डालना शुरू किया। इस बार मैंने पूरे लण्ड अंदर बड़ी तेजी से डाल दिया। जैसे ही मैंने अंदर डाला तो उसकी चूत से खून निकल गया। मैं ऐसे ही अपना लण्ड अंदर बाहर करता करता रहा। अब वह भी मेरा साथ दे रही थी। मैंने उसकी टांगों को थोड़ा चौड़ा किया और मैंने अब बड़ी तेजी से धक्का मारना शुरू कर दिया।

मैं जैसे-जैसे उसे चोदता, वह मुझे कहती- आप बड़े अच्छे से कर रहे हैं।
मैंने उसे अपनी बांहों में पूरा तरह भर लिया था और उसकी बुर में तेज तेज धक्का मारा। वह बहुत ही खुश हो रही थी, उसके मुंह से उसकी मादक आवाज निकलती तो मैं खुश हो जाता और वह भी मुझे कहती- आप बड़ी ही अच्छे तरह चोद रहे हैं.

क्योंकि उसका पहली बार था तो उसका जल्दी ही झड़ गया।

लेकिन मेरा पहली बार नहीं था। मैंने ना जाने इससे पहले कितनी लड़कियों और औरतों के साथ सेक्स किया था। मैं ऐसे ही धक्के मारता रहा, 20 मिनट तक मैंने उसकी चूत को रगड़ता रहा। लेकिन उसकी चूत बहुत टाइट और गोरी थी मेरा मन उसे छोड़ने का हो ही नहीं रहा था.

अब मैंने सलोनी से कहा- मैं अंदर ही डाल दूंगा।
उसने कहा- ठीक है, आप अंदर डाल देना लेकिन कल मेरे लिए दवाई ले आना नहीं तो मैं प्रेग्नेंट हो जाऊंगी।
मैंने कहा- ठीक है, मैं अंदर ही डाल रहा हूं और तुम्हारे लिए दवाई ले आऊंगा।

मैंने अपने माल को उसकी चूत के अंदर ही डाल दिया।

उसके बाद मैंने थोड़ा सा उससे सकिंग करवाई। उसने बहुत अच्छे से सकिंग की और अब मैं और वह घर के लिए निकल गए।
सफर में हुई कमसिन हसीना से दोस्ती (Safar Me Hui Kamsin Haseena Se Dosti) सफर में हुई कमसिन हसीना से दोस्ती (Safar Me Hui Kamsin Haseena Se Dosti)  Reviewed by Priyanka Sharma on 2:40 PM Rating: 5

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