पुरानी दोस्त की नाजुक चूत का लुत्फ़ उठाया (Purani Dost Ki Najuk Choot Ka Lutf Uthaya)

पुरानी दोस्त की नाजुक चूत का लुत्फ़ उठाया
(Purani Dost Ki Najuk Choot Ka Lutf Uthaya)

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम राजेश है और मेरी उम्र 30 साल है. मैं दिल्ली में एक प्राइवेट कंपनी में काम करता हूं. मेरा लन्ड 5.5 इंच का है.

यह बात आज से दो साल पहले की है. मुझे फेसबुक पर मेरे साथ स्कूल में पढ़ने वाली एक लड़की मिली, जिसका नाम श्रेया है.

पहले मैं आपको श्रेया के बारे में बता दूं, वो 27 साल की एक भरे हुए शरीर की गोरे रंग की लड़की है. उसका 36-32-36 करीब का बड़ा ही कातिल फिगर है, जिसे देखकर कोई भी मुठ मारने को मजबूर हो जाए. उसकी आंखें ऐसी कि किसी को भी नशा हो जाए और उसकी गाँड बड़ी, कसी हुई एवं गोल है.

मैंने उसे फ़्रेंड रिक्वेस्ट भेज दी. अगले दिन जब फेसबुक को खोला, तो उसने रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर ली थी और ऑनलाइन थी.

मैंने उसे मैसेज भेजा, इस तरह हमारी बातों का सिलसिला चालू हुआ. बातों बातों में पता चला कि उसकी शादी हो चुकी है. उसका एक बेटा भी है और वो अपने पति से खुश नहीं है क्योंकि उसके पति को दारू पीने की लत है. इस बात को लेकर उन दोनों में अक्सर झगड़े होते है, उसका पति उसके साथ मारपीट करता है.

ये सब सुनकर मुझे बड़ा दुख हुआ. मैं उसका दुख बांटने लगा, उसको ढांढस बंधाने लगा. उसको मेरा ये स्वभाव बहुत पसंद आया.

काफी दिनों तक हम दोनों फेसबुक के जरिए एक दूसरे से अपने मन की बात कह लेते थे. उसको मेरा साथ बहुत पसंद आने लगा था. पता ही नहीं चला कि कब एक दूसरे के बहुत करीब आ गए.

धीरे धीरे हम दोनों के बीच सेक्स की बातें चालू हो गईं. हम एक दूसरे को इंटरनेट से नग्न तस्वीरें भेजते और सेक्स की बातें करते.

ऐसा कुछ दिनों चला. फिर एक दिन जब उसका पति घर पर नहीं था, तो मैंने उसे वीडियो कॉल किया. उस समय वो मैक्सी पहने हुए थी और बला की खूबसूरत लग रही थी. उससे बातें करते करते हम फ़ोन सेक्स करने लगे.

इसी दौरान मैंने उससे उसक़ी मैक्सी निकालने को कहा, उसने शर्माते हुए अपनी मैक्सी निकाल दी. अब वो मेरे सामने ब्रा पैंटी में थी. मैंने उससे ब्रा पैंटी भी निकालने को कहा, तो शुरू में तो उसने शर्म के मारे नहीं निकाली. पर थोड़ा रिक्वेस्ट के बाद उसने जब अपने ब्रा पैंटी निकाले, तो उसको नंगा देख कर मेरा लन्ड ऐसे तन गया कि मानो अभी चड्डी फाड़ के बाहर आ जाएगा.

इसके बाद हम दोनों वीडियो सेक्स करने लगे और वो अपनी गुलाबी गुलाबी चूत में उंगली डाल कर आह आह कर रही थी, कामुक सिसकारियां ले रही थी. मैं भी उसकी उन कामुक आवाजों को सुनकर और उसे देखकर मुठ मार रहा था.

वो मदहोशी में चिल्ला रही थी- राजेश, मुझे तेरा लन्ड अपने मुँह में लेना है और चूत में भी डलवाना है, तुझसे जी भर के चुदना है.
थोड़ी देर बाद उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया और इधर मेरे लन्ड से भी बौछार निकल गई.
उस दिन के बाद से जब भी वो अकेली होती थी, हम ऐसे ही वीडियो कॉल पर सेक्स करते रहे.

फिर एक दिन मैंने उससे कहा- मैं सच में तुझे चोदना चाहता हूँ.
हम दोनों ही सेक्स की आग में जल रहे थे इसलिए वो भी राजी हो गई. वो पूछने लगी- हम कहां मिलेंगे?
मैंने उससे बोला- तुम अपने मायके आ जाओ, आगे का कार्यक्रम मैं बाद में बता दूंगा.

करीब एक सप्ताह बाद वो अपने मायके यानि मेरे गृहनगर आ गई और मैं भी अपने घर पहुंच गया. वहां पर मेरा एक और घर था, जो अभी बिल्कुल खाली पड़ा हुआ था. ये वाला घर गांव से थोड़ा बाहर भी था, तो वहां ज्यादा लोग नहीं दिखते थे.

इसीलिए मैंने उससे बोला- तुम अपने बच्चे को उसकी नानी के पास छोड़ के दोपहर में आ जाना. मैं तुम्हारा वहीं इंतज़ार करूंगा.

करीब दोपहर एक बजे वो मेरे उस घर पर पहुंच गई और सीधे अन्दर आके दरवाजा बंद कर दिया. जैसे ही उसने दरवाजा बंद किया, मैंने पीछे से जाकर उसे जोर से पकड़ लिया और उसे पलटा के अपने सीने से लगा लिया. वो भी मुझसे चिपक गई.

थोड़ी देर बाद जब हम दोनों अलग हुए तो मैंने उसे अच्छे से देखा, उसने साड़ी पहन रखी थी. उसकी गोरी कमर देख कर मेरे अन्दर वासना की आग भड़कने लगी. ब्लाउज में बंद उसके बड़े बड़े गोल गोल स्तन देख कर ऐसा लग रहा था कि उसका ब्लाउज फाड़ के दोनों स्तन अपने मुँह में भर के चूस लूं.

मैंने उसे अपने पास किया और उसकी आंखों में आंखें डाल कर ‘आई लव यू …’ बोला तो उसने नजरें झुका कर ‘आई लव यू टू …’ बोला.

फिर मैंने उसके गुलाब की पंखुड़ियों जैसे आकार वाले और अंगूर से ज्यादा रस भरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और चूसने लगा. वो भी मेरा उतना ही साथ दे रही थी. उसके होंठों को चूसते चूसते मैंने उसकी साड़ी का पल्लू गिरा दिया और ब्लाउज के अन्दर हाथ डाल कर उसके मम्मों को दबाने लगा. उसको मजा आने लगा, तो मैंने उसकी साड़ी और ब्लाउज भी निकाल दिए. साथ ही साथ उसका पेटीकोट भी निकाल दिया.

अब वो मेरे सामने ब्रा पैंटी में थी. वो बहुत ही शर्मा रही थी.

फिर उसने धीरे से कहा- अपने भी कपड़े तो निकालो.
मैंने उससे कहा- तुम ही निकाल दो न.

वो मेरे पास आई और मुझे चूमते हुए मेरी टी-शर्ट निकाल दी, फिर नीचे बैठ कर उसने मेरी जीन्स निकाल दी. अब मैं उसके सामने सिर्फ चड्डी मैं था और चड्डी के अन्दर मेरा लन्ड फुंफकार मार रहा था. चड्डी में तंबू बना देखकर वो नजरें नीचे करके मुस्कुराने लगी.

मैंने उसका हाथ पकड़ा और चड्डी के ऊपर से लन्ड पर रख दिया, तो उसने मेरा लन्ड पकड़ लिया और फिर उसे चड्डी से बाहर निकाल कर उसे चूमने लगी. उसने मेरी चड्डी उतार दी और लन्ड मुँह में लेकर चूसने लगी, चूमने लगी.
वो इतने अच्छे से लन्ड चूस रही थी कि ऐसा लग रहा जैसे मैं सातवें आसमान पर हूँ.

जब वो मेरा लन्ड चूस रही थी, तभी मैंने थोड़ा सा झुककर उसकी ब्रा खोल दी और उसके बड़े बड़े चुचे उछल कर बाहर आ गए. मैंने उसके दोनों मम्मों को दबाना चालू किया, तो वो मदहोश होने लगी और मादक सिसकारियां भरने लगी. वो मेरा लन्ड चूसती रही.

थोड़ी देर बाद मेरा लन्ड जब पानी छोड़ने वाला था. मैंने उसे बताया कि मेरा निकलने वाला है तो उसने मुँह से लन्ड निकाल कर मुठ मारना चालू कर दी और थोड़ी ही देर में मैं झड़ गया.
पूरे फर्श पर और उसके हाथों पर मेरे पानी की बौछार पड़ी थी.

फिर वो बाथरूम गई और हाथ धोकर जैसे ही वापस आई, मैंने उसे गोद में उठाया और बेडरूम में ले जाकर उसे बिस्तर पर लिटा दिया. उसके ऊपर आकर उसके होंठों को, फिर गर्दन को, फिर धीरे धीरे उसके मम्मों को चूसने लगा. कभी कभी उसके निप्पल दांतों में दबा कर हल्के से काट लेता.

वो पागलों के जैसे चिल्ला रही थी- आह राजेश … काट लो, चूस लो, मसल दो इनको अपने हाथों से … ये मुझे बहुत परेशान करते हैं … आह … राजेशशश … आह आह … उम्म उम्म …

मैं धीरे धीरे चूमते हुए नीचे की तरफ बढ़ता गया और उसकी नाभि में अपनी जीभ डाल कर चूमने लगा. इससे वो और गर्म होने लगी. फिर मैंने उसकी पैंटी निकाल दी और अब उसकी प्यारी सी गुलाबी गुलाबी चूत मेरे सामने थी. चिकनी चूत को देखकर समझ आ रहा था कि आज ही उसने शेव की है.

उसकी चिकनी चूत को अपनी दो उंगलियों से फैला कर मैंने उसके दाने को चाटना चालू किया, तो वो तड़प गई और अपने हाथों से मेरा सिर अपनी चूत में दबाने लगी. फिर मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ डाली और चाटने लगा. वो बड़बड़ाने लगी, आह आह करने लगी.

वो बोल रही थी कि राजेशशश … अब और मत तड़पाओ … जल्दी से अपना लन्ड चूत में डाल दो, बहुत दिनों से ये चूत प्यासी है, इसकी प्यास बुझा दो.
मैं उठा और उठ कर उसके मुँह में अपना लन्ड डाल दिया, जिसे वो तुरंत चूसने लगी. मेरा लन्ड उसके मुँह में ही तन गया. उसके बाद मैं उसकी टांगों के बीच में आ गया और अपना लन्ड उसकी चूत के दाने पर रगड़ने लगा.
पुरानी दोस्त की नाजुक चूत का लुत्फ़ उठाया (Purani Dost Ki Najuk Choot Ka Lutf Uthaya)
पुरानी दोस्त की नाजुक चूत का लुत्फ़ उठाया (Purani Dost Ki Najuk Choot Ka Lutf Uthaya)
वो जोरों से तड़पने लगी और बोलने लगी- प्लीज डाल दो इसे अन्दर … मेरी प्यास बुझा दो जान. काफी दिनों से इस चूत को लन्ड नहीं मिला है, मेरा पति तो दारू के नशे में घर आकर सो जाता है. बहुत प्यासी बुर है मेरी … अपने लन्ड से इसकी प्यास बुझा दो.

मैंने आव देखा न ताव … अपना फनफनाता लन्ड उसकी चूत में डाल दिया. उसकी चूत वाकयी बहुत ही गर्म और कसी हुई थी. ये लन्ड डालने पर पता चल रहा था कि सच में उसकी चूत में बहुत दिनों से लन्ड नहीं गया था.

मैं धीरे धीरे अपना लन्ड उसकी चूत में अन्दर बाहर करने लगा. वो ‘आह आह सीसीसी … मम्मम उहम्म्म..’ करने लगी. मचलते हुए अपने मम्मों को मसलने लगी.
वो बोली- जान मेरे इनको चूसो न.
मैं उसके ऊपर झुक गया और उसके मम्मों को चूसने लगा और तेज़ तेज़ उसकी चूत चोदने लगा.

अब वो पागलों की तरह अपनी गाँड उठाते हुए मुझे मजा दे रही थी. उसने उत्तेजना में मेरे कंधे पर काट लिया था. वो अपने हाथ मेरी पीठ पर अपने हाथ चला रही थी. वो अपने नाखूनों से मेरी पीठ पर नोच रही थी.

थोड़ी देर ऐसे ही चोदने के बाद मैं उठा और उसे मेरे ऊपर आने को कहा. वो झट से जल्दी से मेरे ऊपर आ गई और मेरा लन्ड पकड़ कर अपनी चूत में डाल कर मेरे ऊपर बैठ गई. अब वो अपनी बड़ी गोल गाँड हिला हिला कर चुदाई का मजा लेने लगी.

मैं कभी उसकी गाँड से खेल रहा था, तो कभी उसकी गाँड पर चांटें मार रहा था, तो कभी उसके मम्मों को दबा रहा था. इससे वो और भी उत्तेजित होकर तेज़ तेज़ अपनी गाँड उठा-उठाकर चुदने लगी. पूरे कमरे में हमारी चुदासी सिसकारियां और उसकी गाँड की ठप ठप की आवाजें गूंज रही थीं.

उसने ऐसे ही चुदते हुए अपने मम्मों को मेरे मुँह में दे दिए और मैं उनको बारी बारी से चूसने लगा. थोड़ी देर बाद उसकी ऊपर नीचे होने की रफ्तार बढ़ने लगी और वो मेरे सीने पर अपने नाखून गड़ाते हुए अकड़ने लगी.
वो थरथराती आवाज में बोलने लगी- राजेशशश … मेरा पानी निकल रहा है … आह हह … जान मैं निकल रही हूं.

फिर एक लंबी आहहह के साथ उसका बदन अकड़ने लगा और वो निढाल होकर मेरे ऊपर लेट गई. वो बहुत तेज हांफ रही थी.

कुछ पल बाद मैंने उसे उठाया और बेड के नीचे खड़ा करके उसे दोनों हाथ बेड पर रखकर घोड़ी बनने को कहा. वो घोड़ी बन गई. मैंने उसके पीछे आकर अपने लन्ड को पकड़ कर पीछे से उसकी चूत में डाल दिया. इसके बाद मैंने उसकी गाँड पर थप्पड़ मारते हुए उसकी कमर पकड़ कर उसे तेज़ तेज़ चोदना चालू कर दिया.

थोड़ी देर ऐसे ही चुदाई करने के बाद मेरी रफ़्तार बढ़ने लगी और लन्ड अकड़ने लगा. मैंने उससे कहा- श्रेया मैं निकलने वाला हूं … कहां निकालूं?
तो वो बोली- जहां तेरी मर्ज़ी हो, निकाल ले अपना पानी.

मैंने उसकी चूत से अपना लन्ड बाहर निकाला और सारा पानी उसकी गाँड पर निकाल दिया और बेड पर लेट गया.

उसने अपनी गाँड साफ की और वैसे ही नंगी मेरे ऊपर आकर लेट गई. वो मुझे चूमने लगी और कहने लगी- मैं आज पहली बार इतने प्यार से चुदी हूँ. पहली बार मुझे संतुष्टि मिली है. मेरा पति जब भी मुझे चोदता था, तो बस अपना पानी निकाल कर सो जाता था और अधिकतर बार मैं तड़पती रह जाती थी.

उसके थोड़ी देर बाद फिर एक बार फिर उसने मेरा लन्ड पकड़ा और अपने मुलायम मुलायम हाथों से सहलाने लगी. फिर उठ कर उसने लन्ड चूसना चालू कर दिया.

मेरा लन्ड फिर से तन गया और उसकी चूत में जाने के लिए तैयार हो उठा. पर इस बार मेरे दिमाग में उसकी चूत नहीं, उसकी गाँड मारने का प्रोग्राम चल रहा था. मैंने उससे बोला- लन्ड को अच्छे से चूसो और अपने थूक से पूरा नहला दो.

उसने वैसा ही किया. उसे पता नहीं था कि उसकी अब प्यारी सी गाँड फटने वाली है. वो बेड पर सीधी लेट गई तो मैंने उससे कहा- श्रेया, डॉगी पोजीशन में करते हैं.

वो झट से डॉगी पोजीशन में आ गई और मैं उसके पीछे हो गया. मैंने पहले अपना लन्ड उसकी चूत में डाला और थोड़ा सा थूक लेकर उसकी गाँड के छेद में लगाया और अच्छे से मालिश कर दी.

फिर अपना लन्ड उसकी चूत से निकाल कर अपने लन्ड के सुपारे पर थूक लगाया. फिर उसकी कमर पकड़ कर जोर लगाते हुए अपना लन्ड उसकी गाँड में डाल दिया. जैसे ही मेरा आधा लन्ड उसकी गाँड में घुसा, तो वो ज़ोर से चीखने लग गई, छूटने की कोशिश करने लगी.

पर उसकी कमर पर मेरी मजबूत पकड़ थी, तो वो छूट नहीं पाई.
वो बोली- कमीने, तुमने गलत छेद में डाल दिया है.
मैंने बोला- नहीं श्रेया, मैंने सही जगह डाला है, मेरा मन तुम्हारी गाँड मारने का कर रहा था.

मैंने थोड़ा सा और दम लगाकर पूरा का पूरा लन्ड उसकी गाँड में डाल दिया, उसकी गाँड फट गई और खून निकलने लगा. उसकी आंखों से आंसू आ गए. दर्द के मारे उसका बुरा हाल हो गया.

मैं थोड़ी देर ऐसे ही लन्ड डाले रहा और एक कपड़े से उसकी गाँड पर लगा खून साफ करने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने अपना लन्ड उसकी गाँड में अन्दर बाहर करने लगा. उसकी गाँड इतनी टाइट थी कि मेरे लन्ड में भी दर्द होने लगा.

मैं थोड़ी देर तक उसकी गाँड चोदता रहा औऱ अपना सारा पानी उसकी गाँड में निकाल दिया. वो वैसे ही उल्टी लेटी रही, उसको गाँड में बहुत दर्द हो रहा था. फिर मैंने उसको एक दर्द की दवाई दी, उससे माफी मांगी और उसे मना लिया.

थोड़ी देर बाद जब उसका दर्द खत्म हुआ तो हम दोनों तैयार होकर अपने अपने घर निकल गए.

उसके बाद वो एक सप्ताह वहां रुकी और हमने रोज़ चुदाई की. आज भी जब भी मौका मिलता है, तो मैं उसके घर पर जाकर उसे चोदता हूँ.

दोस्तो, आपको मेरी चुदाई की सेक्स कहानी कैसी लगी, जरूर बताएं. आगे मैंने कैसे श्रेया की ननद को चोदा उसकी कहानी भी बताऊंगा.
पुरानी दोस्त की नाजुक चूत का लुत्फ़ उठाया (Purani Dost Ki Najuk Choot Ka Lutf Uthaya) पुरानी दोस्त की नाजुक चूत का लुत्फ़ उठाया (Purani Dost Ki Najuk Choot Ka Lutf Uthaya) Reviewed by Priyanka Sharma on 10:34 AM Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.