पुरानी दोस्त की जबरदस्त चुदाई-2 (Purani Dost Ki Jabardast Chudai-2)

पुरानी दोस्त की जबरदस्त चुदाई-2
(Purani Dost Ki Jabardast Chudai-2)

मेरी कॉलेज फ्रेंड के साथ अब तक की चुदाई की कहानी के पहले भाग कॉलेज फ्रेंड के साथ शादी के बाद मुलाकात-1 में आपने पढ़ा था कि मैं चारू को चोदने के लिए होटल में ले गया था और उसको नंगा करके चूसना शुरू कर दिया था.

अब आगे..

दोस्तों लड़कियों के बड़े बड़े चूतड़ ही मेरी सबसे बड़ी कमजोरी रही है. मुझे लड़कियों की शक्ल सूरत से इतना मतलब नहीं रहता है, जितना उनके चूतड़ और मम्मों की साइज से मजा आता है. क्योंकि सेक्स का मजा तो इन्हीं से आना होता है.

दूसरी बात यह भी है कि लड़की के चूतड़ बड़े हों, तो सेक्स के टाइम पर जब लंड से शॉट मारते वक्त, जो आवाज आती है, वो काबिले तारीफ है. उस वक्त समझ आ जाता है कि लड़की भी लंड को काफी टाइम तक झेल पाएगी. नहीं तो दुबली पतली लड़की की तो हड्डियां ही हमको चुभने लगेंगी.

तो दोस्तो, इस समय मैं अपनी कॉलेज फ्रेंड चारू के साथ होटल के रूम में पूरे मजे लेते हुए उसके चूतड़ दबा रहा था और काट रहा था. चारू भी मजे से दोहरी होती जा रही थी.

तभी मैंने चारू के कान में धीरे से बोला- बेबी आइस क्रीम खानी है क्या?
उसने एकदम से मेरी तरफ देखा.
मैंने अपने हाथ से लंड की तरफ इशारा किया. चारू ने एकदम गर्दन झटकते हुए कहा कि उसने कभी ये सब नहीं किया है.

मैंने उसको समझाया कि सेक्स का असली मजा लेने से पहले ये भी लेकर ट्राई कर लो.
मैंने उसको जांघों से पकड़ कर बेड पर घुमाया और मुँह उसकी जांघों के बीच में दे दिया. जैसे ही मेरी जीभ उसकी चूत पर लगी, तो उसके मुँह से ‘इ … स्सस …’ की आवाज निकल गई. फिर वो ऐसे शांत हो गई जैसे कहीं उसकी वो गले में ही घुट कर रह गयी हो.

फिर जब मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया, तो उसका हाथ भी मेरे लंड पर घूमने लगा. जो कि बिल्कुल उसके मुँह के सामने था.

पहले पहले तो उसने अपना हाथ धीरे धीरे फेरना शुरू किया, लेकिन थोड़ी देर बाद ही उसके होंठ मेरे लंड पर मुझे महसूस हुए. जब तक मैं इस पल को देख पाता, तब तक तो मेरा पूरा लंड उसके मुँह के अन्दर तक जा चुका था.

अब हम दोनों एक दूसरे को ज्यादा से ज्यादा मजा देने में लगे थे. हालांकि मेरा मोटा लंड उसके मुँह में बड़ी मुश्किल से जा पा रहा था, क्योंकि उसको शायद लंड चूसने का अनुभव नहीं था. तब भी वो अपनी तरह से पूरी कोशिश कर रही थी.

लंड चुसाई के बीच में मैंने जब अपनी गर्दन घुमा कर देखा, तो उसकी लिपस्टिक मेरे लंड पर लगी हुई थी. अब मेरा लंड भी झटके मारने लग गया था और कभी भी खाली हो सकता था. उसकी चूत भी भरपूर पानी छोड़ने लग गयी थी, जिसको मैं पूरा का पूरा अपने मुँह में समाने में लगा था.

मैंने जोश में उसके दाने को भी होंठों से चुभलाना शुरू कर दिया. तभी वो भलभला कर झड़ गयी. मैंने उसका पूरा पानी अपने मुँह में ले लिया, जबकि वह अभी भी मेरे लंड को चूसे ही जा रही थी और एक हाथ से मेरी गोलियों को भी सहला रही थी.

उसकी यह अदा मैं सह नहीं पाया और मेरा भी पानी निकलने को हो गया, तो मैंने अपना लंड बाहर खींचना चाहा, लेकिन उसके होंठों की पकड़ इतनी मजबूत थी कि मैं लंड बाहर निकाल ही नहीं पाया और पूरा पानी उसके मुँह में ही निकल गया.

इस वक्त चारू अपनी आंखें बंद किये हुए मेरे पानी को जैसे तैसे निगलने की कोशिश कर रही थी और उसकी सांसें भी तेज तेज चल रही थीं.

मैंने धीरे धीरे दोबारा उसके मम्मों को सहलाना शुरू किया तो उसने मुस्कुराते हुए अपनी आंखें खोल दीं और नजरों से ही मेरा शुक्रिया अदा किया.
उसने धीरे से बोला- आज पहली बार मैंने वीर्य का स्वाद चखा है और वो भी तेरा!
मैं खुश हो गया.

उसने यह भी बताया- मेरे हस्बैंड मेरी चूत को मुँह में लेते ही नहीं हैं.

अब हम दोनों बातें कर रहे थे और एक दूसरे के शरीर पर हाथ भी फेर रहे थे. दोस्तों चारू ने बताया कि उसको खुल कर फ़ोरप्ले करना पसंद है, जबकि उसके हस्बैंड को यह सब बिल्कुल भी पसन्द नहीं है.. और वो सेक्स में कोई एक्सपेरिमेंट भी नहीं करते.

मैंने उससे उसकी सुहागरात के बारे में पूछा, तो उसने बताया कि उस रात भी मेरे पति आए और अपने और मेरे कपड़े उतार कर सीधा लंड खड़ा करके घुसा दिया. मुझे दर्द भी बहुत हुआ था लेकिन उसके पति को इसका कोई अहसास तक नहीं हुआ.

तभी मैंने उस से मजाक करते हुए बोल दिया- चारू तुमने अपने पति को तो कुंवारी चूत दी थी, जबकि उसने तुम्हें कुछ खास मज़ा भी नहीं दिया था. पर आज मैं तो तुम्हें पूरा मजा दे रहा हूँ, तो मुझे क्या खास दोगी?
इस पर उसने बोला- मेरे पास अलग से देने के लिए तो कुछ है ही नहीं. अब तुम ही बताओ मैं क्या दूं?

इस बात पर मैंने हंसते हुए अपना हाथ धीरे से उसके उसके चूतड़ों के बीच में घुसाते हुए गांड पर फेरते हुए बोला- ये दे दो.
तभी वह झटकते हुए बोली- छी: वहां पर भी कोई करता है क्या?
मैंने उसको बोला- लड़की के तो दोनों छेद ही लंड डालने के लिए बने होते हैं.
उसने पूछा- तुम ये बात कैसे कह सकते हो??

अब मैंने उसको समझाया कि देखो लड़कियों के चूतड़ इसलिए बड़े होते हैं, ताकि उनको दोनों तरफ से बजाया जा सके.
इस पर वो डरते हुए बोली- सुमित तुम्हारी जो मर्जी हो, वो करो. लेकिन कोई प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए क्योंकि मुझको वापस घर भी जाना है.
मैंने उसको पूरा विश्वास दिलाया- मैं कोशिश करूंगा कि दर्द कम हो. अगर तुमको ठीक नहीं लगेगा, तो नहीं करेंगे.

इस बात पर उसका डर कुछ कम हुआ और वो भी अपनी गांड मरवाने के लिए सहमत हो गयी.

जैसे कि दोस्तो … मैं आपको पहले भी बता चुका हूं कि लड़कियों की बड़ी सी गांड मेरी सदा से ही कमजोरी रही है. आज चारू जैसी हाउसवाइफ, जिसकी गांड पूरे 36 इंच की थी, आज मुझसे चुदवाने को तैयार थी. तो मुझे खुद अपनी किस्मत पर नाज हो रहा था.

मैंने चारू को बताया- आज हम सुहागदिन मनाने जा रहे हैं, जिसको तुम जिंदगी भर याद रखोगी.
हालांकि उसके मन में अभी भी कुछ डर बाकी था, लेकिन साथ ही उसे मुझ पर भी पूरा भरोसा था.
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पुरानी दोस्त की जबरदस्त चुदाई-2 (Purani Dost Ki Jabardast Chudai-2)
अब मैंने चारू को अपने ऊपर लिटा कर उसके होंठों को चूमना शुरू कर दिया और साथ ही साथ मेरे दोनों हाथ उसके भारी भरकम नितम्बों को सहला रहे थे. साथ ही मेरी एक उंगली उसकी गांड पर भी दस्तक दे रही थी.

मैंने धीरे से उससे पूछा- कुछ क्रीम वगैरह है क्या?
उसने बोला कि हां उसके पर्स में सन क्रीम रखी होगी.

मैंने वो क्रीम निकाली और अपने एक उंगली पर थोड़ी सी लेकर उसकी गांड के अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया. हालांकि शुरू में उसको थोड़ा दर्द हुआ, लेकिन थोड़ी देर बाद ही उसको इसमें मज़ा आने लगा और वह खुद भी अपनी गांड हिलाने लगी.

अब मैंने उसको गर्म करने के लिए उसका एक बोबा मुँह में लेकर चूसना शुरू किया और उसका निप्पल भी दांत से काटना शुरू किया.
उसके मुँह से ‘आह उह आह.. मम्मी..’ जैसी आवाजें निकलनी शुरू हो गईं.
उसका एक हाथ मेरे लंड को सहला रहा था, जिसके चलते मेरा लंड भी अब एकदम कड़क हो गया था.

मैंने धीरे से चारू के कान में पूछा कि क्या तुम गांड मरवाने के लिए तैयार हो?
उसने मेरी आंखों में झाँक कर हां का जवाब दिया.

अब मैंने उसको पकड़ कर पलंग के किनारे कुतिया की पोजीशन में खड़ा कर दिया. मैं खुद पलंग के नीचे खड़ा होकर अपने लंड को उसके चूतड़ों के बीच गांड के बीच में सैट करके रगड़ने लगा. अब तो मेरी जान चारू भी अपने चूतड़ों को हिला कर मुझे गांड मारने के लिए आमंत्रित करने लगी.

दोस्तो, मेरे सामने एकदम गोरी गोरी और भारी-भरकम गांड आज खुद चुदने को तैयार थी. मुझे अपनी किस्मत पर नाज भी हो रहा था.

मैंने चारू की गांड की गोलाइयों को अपने दोनों हाथों से कस कर पकड़ा औऱ अपने कूल्हों का जोर का उसके पिछवाड़े पर देने लगा. मेरा आधा लंड गप से उसकी गांड में घुस गया और एक जोर की चीख चारू के मुँह से निकल गई जो उसने तकिये पर अपने मुँह ढक कर दबा दी.

उसकी घुटी हुई चीखें अभी भी मेरे कानों में पड़ रही थीं लेकिन मैंने अपने लंड को ज्यों का त्यों ही फंसाए रखा और उसके गोरे गोरे चूतड़ सहलाने लगा.

फिर मैंने अपने दोनों हाथों को आगे ले जाकर उसके बोबे मसलने शुरू किए और निप्पलों को भी उंगलियों से उमेठने शुरू कर दिया.

इससे उसको कुछ आराम मिला. तभी उसने अपना बांया हाथ चूतड़ों पर ले जाकर लंड को छू कर देखा कि कितना अन्दर गया है.
फिर वो मुझसे धीरे से बोली- सुमित प्लीज और आगे मत डालना और अभी इसी को आगे पीछे करो.

अब मैंने उसके गोल गोल दूधों को पकड़ कर लंड को आगे पीछे करना शुरू कर दिया. हालांकि उसकी गांड एकदम कसी हुई थी, लेकिन फिर भी मेरे लंड से निकली चिकनाई की वजह से लंड धीरे धीरे आसानी से अन्दर बाहर होना शुरू हो गया.

उसके मुँह से अभी भी ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह… ओह मम्मी.. मर गई..’ जैसी सीत्कारें निकल रही थीं.

दोस्तो, उसकी गांड की गर्मी से मेरा भी लंड अब अभी भी पिघल सकता था, इसलिए मैंने ठान लिया कि मेरा काम खत्म होने से पहले इसकी गांड में मेरा पूरा लौड़ा डालना ही है.

इसलिये मैंने धीरे से उसके दोनों चूतड़ों को अपने हाथों से कस कर पकड़ा और एक जोर का धक्का उसकी गांड में दे मारा, जिससे मेरा पूरा का पूरा लंड उसकी गांड में समा गया. साथ ही साथ चारू भी अपनी गांड में उठे दर्द की वजह से एकदम से रो पड़ी.
लेकिन उसने दर्द को सहते हुए अपने मुँह को तकिये में छुपा लिया.

अब आगे का रास्ता मेरे लिए एकदम क्लियर था. इसलिए मैंने धीरे धीरे से लंड की अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया. मेरी चारू अब सिसकारियां करते हुए ‘आह मम्मी.. ओह गॉड.. ओह सुमित..’ जैसे बड़बड़ाती जा रही थी.

दोस्तो, अब मुझसे मेरी चारू की भारी भरकम गांड देख कर सब्र करना बहुत मुश्किल हो गया था और मेरा लंड भी एकदम रॉड की तरह उसकी गांड में फिट लग रहा था.

मैंने उसकी गांड को कसकर धक्के मारने शुरू किए, तो चारू की जोरदार वाली सिसकियां ‘आह.. औह सुमित.. आह मम्मी.. आउच मम्मी.. आह.. सुमित फक माय आस.. आह कम ऑन सुमित..’ जैसी आवाज निकलनी शुरू हो गईं.

मैंने चारू की गोरी गोरी गांड पर हथेली से जोरदार वाले चाटें मारने भी शुरू कर दिए, जिससे उसकी गांड एकदम लाल हो गयी थी. मैंने उसके चूतड़ों को कसके पकड़ा और जोर जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए जिससे होटल का पलंग भी चूँ चूँ की सेक्सी आवाजें करने लगा.

इसके बाद मेरा चारू की गरमागरम गांड में टिक पाना मुश्किल हो गया था. इसलिए मैंने जोर जोर से चारू की गांड मारनी शुरू कर दी.

कुछ मिनट बाद मैंने चारू को बताया- मेरा पानी निकलने वाला है.
उसने बोला- मेरी गांड में ही निकाल दो … मैं इसको और इस पल को महसूस करना चाहती हूं.

मैंने जोर जोर से कसकर धक्के मारते हुए अपने लंड का पूरा पानी उसकी गांड में उड़ेल दिया. मेरे पस्त होते ही चारू भी एकदम पस्त होकर बेड पर पड़ गयी थी और अपनी सांसों को कंट्रोल कर रही थी.

मैं भी उसकी पीठ पर पेट के बल लेट गया और मैंने अपने हाथों से उसके नितंबों को सहलाना शुरू कर दिया था.

थोड़ी देर बाद ही मैंने देखा कि चारू को गहरी नींद आ गयी थी. आज पहली बार उसकी चुदाई की तसल्ली उसके चेहरे पर साफ दिखाई दे रही थी.

मैंने धीरे से से उसको सीधा सुलाने की कोशिश की, तो वो किसी मासूम बच्चे के जैसे मुझसे और जोर से चिपक कर सोने लगी. मुझे उसकी मासूमियत पर तरस आया और उसको कसके अपने गले लगा कर सुला लिया.

मेरा एक हाथ अभी भी उसकी पीठ और गांड पर धीरे धीरे घूम रहा था, लेकिन मेरी चारू तो अभी भी दुनिया से बेखबर होकर चैन की चुदाई वाली नींद में सो रही थी.

तो दोस्तो, यह थी मेरी कॉलेज फ्रेंड चारू की पहली गांड चुदाई की कहानी.
पुरानी दोस्त की जबरदस्त चुदाई-2 (Purani Dost Ki Jabardast Chudai-2) पुरानी दोस्त की जबरदस्त चुदाई-2 (Purani Dost Ki Jabardast Chudai-2) Reviewed by Priyanka Sharma on 7:22 AM Rating: 5

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