जीजा ने दिया चुदाई का सुख (Jija Ne Diya Chudai Ka Sukh)

जीजा ने दिया चुदाई का सुख (Jija Ne Diya Chudai Ka Sukh)

मेरा नाम अनु है, मेरी उम्र 22 वर्ष है। मेरी दीदी रेशू मुझसे दो वर्ष बड़ी है उसकी शादी को दो साल हो चुके हैं। हमारा घर छोटा ही है सो इन दो सालों में मैंने जीजा जी और दीदी की चुदाई छुप-छुप के कई बार देखी है। जैसे ही उनकी वासना भरी आवाज मेरे कानों से टकराती है, मेरा मन भी तड़प उठता है। मुझे भी ऐसा लगता है कि हाय राम… कोई मुझे भी आकर बजा जाये… सारा जिस्म का रस निकाल दे।

ऐसा नहीं है कि चुदाई का मजा मैंने नहीं लिया है। अपने दोस्तों से मैं आठ-दस बार चुद चुकी हूँ। पर इस जालिम चूत का क्या करें और ये दिल… मानता ही नहीं है। मेरी चूचियाँ भी ठीक ठाक हैं, टाईट बनियाननुमा टॉप पर ये किसी को भी घायल कर कर सकती हैं। 

मेरी सफ़ेद टाईट पैण्ट के तो कॉलेज में सभी दीवाने हैं…और घर पर जीजा जी की तो जैसे आंखें ही नहीं हटती हैं। उनकी ललचाई आंखें मैं खूब पहचानती हूँ। जब तब वो मेरे पर कोशिश भी करते रहते थे। मुझे भी घर में एक ही मर्द नजर आया था सो मैं भी कितनी बार उनसे द्विअर्थी शरारत करती थी, जिससे वो और उत्साहित हो जाते थे।

जब हम घूमने जाते थे तो उनके हाथ अन्जाने में… नहीं जी… काहे के अनजाने में… जान कर के कभी मेरे चूतड़ों पर हाथ मार देते थे और कभी कोहनियों से मेरे स्तन दबा देते थे। मुझे उनकी यह अदा मस्त कर देती थी।

कल ही जीजा जी ने बड़ी हिम्मत की और इत्मिनान से मेरे चूतड़ सहला दिये और फिर हाथ हटा भी नहीं रहे थे। मैंने भी उन्हें गांड सहलाने का पूरा मौका दिया। जीजा जी को ऐसा लगा कि शायद लाईन साफ़ है। पर मैंने जानकर के उसे अनदेखा किया। पर इससे मुझे भी जीजा जी के मन की इच्छा मालूम हो गई। दिल ही दिल में मैं तड़प उठी। घर आने पर भी मैं जीजा जी के सपनों में खोई रही।

Jija Se Chudne Ka Plan Bnaya

आज सवेरे से मौसम बड़ा सुहावना हो रहा था, बरसात होने जैसा हो रहा था। जीजा जी बाज़ार जाने वाले थे, उन्होंने मोटर साईकल बाहर निकाली और मैंने भी जिद पकड़ ली कि मैं भी साथ चलूंगी।
दीदी ने भी मुझे ले जाने को कहा।
मैं तुरंत अन्दर गई और बनियाननुमा टॉप और सफ़ेद टाईट पैन्ट पहन आई। मैं अन्दर ब्रा नहीं पहनती थी।
मैं लपक कर मोटरसाईकल के पीछे बैठ गई।

आगे जाते ही बूंदा-बांदी शुरू हो गई। मौसम मेरे मन को भड़का रहा था। ठण्डी हवा के झोंके मेरे जिस्म को गुदगुदाने लगे थे। मेरी कठोर चूचियाँ और कस गई। मेरे चुचूक कड़े होने लगे। मैं अपनी स्थिति बयान नहीं कर सकती। ऐसे में मैंने प्यार से अपनी कठोर चूचियाँ जीजा जी की पीठ पर गड़ा दी और धीरे धीरे ऊपर नीचे हिलाने लगी। जीजा जी के बदन में मुझे कंपकपी उभरती हुई साफ़ नजर आने लगी।

रास्ते में कई बार मैंने अपनी चूचियाँ जीजा जी की पीठ पर गड़ा कर मस्ती की और जीजा जी को उत्तेजित किया।

कुछ ही देर में बड़ी सब्जी मण्डी आ गई। हमने सब्जियाँ और फ़ल बैग में भरे और सामने हेन्डल पर लटका दिये। तभी बरसात आने लगी। जीजा जी और मैं भाग कर मोटरसाईकल पर बैठ गये और रवाना हो गये।

हम दोनों ही लगभग भीग चुके थे… जीजा जी एक बन्द दुकान के सामने रुक गये और हम शेड में खड़े हो गये। मेरी बनियान में से मेरी चूचियाँ और चुचूक यू साफ़ नजर आने लगे थे, जीजा जी की नजरें वहाँ से हट ही नहीं रही थी।
उनके घूरने से मुझे लगा कि आज ये तो गये काम से… बस उन्हें खोलने की आवश्यकता थी। मेरी सफ़ेद पैन्ट में से मेरे चूतड़ और सामने के कट नजर आने लगे थे।

मैं जान कर के बाहर आकर बरसात में भीगने लगी। आस पास मैंने नजर दौड़ाई, वहाँ कोई नहीं था।

‘अरे, बिल्कुल भीग जाओगी… यहाँ आ जाओ…!’ जीजा जी ने हाथ बढ़ाया तो मैंने जीजा जी का हाथ खींच लिया और उन्हें भी बरसात में खड़ा कर दिया।

‘जीजा जी, भीगने का मजा तो लो, अब नहीं भीगोगे तो कब भीगोगे?’ मैंने उन्हें नशीली आवाज में कहा।
जीजा जी भी अब भीगने लगे थे। मुझे देख कर उनका लन्ड भी खड़ा होने लगा था जो भीगे हुये पैन्ट से साफ़ नजर आ रहा था।

लोहा गर्म था… मैंने मौका चूकना उचित नहीं समझा- जीजा जी, रास्ते में आपने जाने मुझे क्या कर दिया… मैं तो अपने काबू में ही नहीं रही थी!’
मैं अपनी भीगी हुई चूचियाँ और आगे उभार कर उन्हें रिझाने लगी।

‘अनु, ये तेरे कठोर मस्त पहाड़ मेरी पीठ पर गुदगुदी कर रहे थे, बड़े ही कठोर हैं!’ जीजा जी ने भी अपना पत्ता डाल दिया।

अब मेरी बारी थी- नहीं जीजा जी, ये ये कठोर नहीं, नरम हैं… भले ही ही छू कर देख लो!
मुझे उन्हें अपने कब्जे में लेने के लिये न्योता देना ही पड़ा। मैंने अपनी बनियान-नुमा टॉप को ऊपर से खींचते हुये कहा।

 Jija Ke Sath Foreplay Ki Shuruaat

बारिश की बूंदें मेरे उरोजों पर गिर कर आग पैदा कर रही थी। जीजा जी ने मेरे पास आकर मेरी चूचियों को स्पर्श किया और फिर हौले से दबा दिया। मैं दिल दी दिल में खुशी से भर गई।

सारा बदन पानी में तर हो चुका था। तेज बारिश में सड़क का दूसरा किनारा भी दिखाई नहीं दे रहा था।

जीजा जी मुझे खींचते हुये दुकान के एक सुरक्षित कोने में ले गए और मुझे लिपटा कर मेरे चूतड़ों को मसलने लगे। उनका जोश देखते ही बनता था। कभी मेरे स्तनों को मसलते और फिर मेरे चूतड़ों की शामत आ जाती…

मुझसे भी अब रहा नहीं गया- जीजा जी, मुझे भी तो कुछ करने दो ना…
मैंने झिझकते हुए कहा।

उन्होंने प्रश्नवाचक निगाहों से मुझे देखा…

इतना तो बहुत था। जगह पाते ही मेरा हाथ उनके नीचे पैन्ट पर उभरे हुये लन्ड से जा टकराया। एक ही झटके में मैंने उनकी पैन्ट की ज़िप खोल दी और हाथ भीतर पहुंचा दिया। उसका भारी लन्ड चड्डी के ऊपर से ही मेरे हाथों में था। जीजा जी का लन्ड दबते ही उनके मुख से एक प्यारी सी कसक भरी सिसकारी निकल पड़ी। पंछी पूरी तरह से मेरे काबू में था।

हम दोनों जबरदस्त तरीके से एक दूसरे को नोच रहे थे…

जीजा जी ने मेरी पैन्ट के अन्दर हाथ डाल कर मेरी चूत दबा दी। फिर उनकी एक अंगुली चूत में अन्दर सरक गई। मेरे दाने को सहलाते हुये मेरी चूत में अंगुली हिलने लगी। मैं सिसक उठी और उसी समय मैं झड़ने लगी।

जीजा जी का लन्ड भी मैंने खूब मसला और खींच खींच कर मस्त कर दिया, तभी जीजा जी के लन्ड ने अपना रस छोड़ दिया। मेरा हाथ वीर्य से चिकना हो उठा। उसके लन्ड को मसलते हुए मैंने पूरा निचोड़ दिया और फिर हाथ बाहर निकाल लिया।

जीजा जी ने मुझसे लिपटे हुये मेरे अधरों से अधर मिला लिये। कुछ देर तक अधरपान किया फिर हंसते हुये मैंने जीजा जी को पिंजरे में कैद करते हुये कहा- जीजा जी, आम रास्ते पर अब क्या क्या करोगे… चलो घर चलते हैं…’ मैंने सड़क पर ये सब करना उचित नहीं समझा।

‘अनु मेरा तो माल निकल गया… अब…?’

‘सारा बारिश में धुल कर साफ़ हो जायेगा… अब खुश हो जाओ… क्या इरादा है?’

‘ऐसी घनघोर बारिश में… फिर ऐसा मौका फिर कहा मिलेगा…चलो और करें!’ जीजा जी का मन नहीं भरा था।
‘घर पर तो मौके ही मौके है ना…अब चलो…’ मैंने जिद की।
जीजा जी ने अपनी बाईक स्टार्ट की और हम भीगते हुये जिस्म की आग को ठण्डा करने का प्रयत्न करने लगे।

घर पहुंचते ही दीदी ने हमारी हालत भांप ली और उन्हे कुछ शक सा हो गया। उन्होंने मुझ से तो नहीं पर जीजा जी को कहा- जल्दी से कपड़े बदल लो… अपनी जवान साली से अब चिपकना बन्द करो!’
दीदी ने कटाक्ष किया।
जीजा जी सुनते ही घबरा गये और अपनी सफ़ाई देने लगे। शायद उनका दीदी से कुछ कहासुनी भी हुई।
मैं सावधान हो गई। जीजा जी कहीं मिलते भी तो मैं बस आंख मार देती और उन्हें भी सावधान रहने को कहती थी।

Mauka Dekhkar Jija Ne Ki Chudai Ki Shuruaat

एक दिन ऐसा हुआ कि मैं कॉलेज से जल्दी आ गई। दीदी बाजार गई हुई थी। मैंने तुरन्त मोबाईल से जीजा जी को बात की। दूसरे ही क्षण जीजा जी मेरे कमरे में थे। मैं बिना कुछ सोचे समझे जीजा जी से लिपट गई। जीजा जी की लुंगी मैंने खींच दी। जीजा जी ने अन्दर कुछ भी नहीं पहना था। उनका खड़ा लन्ड बाहर आ गया। हाय गोरा गोरा, चिकना सा, खूबसूरत सा सलोना, लाल चमकदार सुपारा देख कर मैं तो निहाल हो गई।

मैंने भी अपनी पैन्ट उतार दी… और नीचे से नंगी हो गई। मैंने जीजा जी को धक्का मार कर बिस्तर पर गिरा दिया और उनके मुख पर अपनी चूत का द्वार रख दिया। मेरी चिकनी चूत पर उसकी जीभ घूमने लग गई। मेरा दाना उनकी जीभ से हिल उठा।

‘जीजा जी, आज मौका मिला है… मेरी चूत को चाट चाट कर साफ़ कर दो… बहुत तरस रही है!’
मेरी उत्तेजना से भरी आवाज को वो समझ गए। मैं अपनी चूत उनके मुख पर दबाने लगी। जीजा जी का हाथ मेरे टॉप के भीतर घुस पड़ा। मैंने अपना टॉप भी उतार दिया और और पूरी नंगी गई। अब मैंने अपनी चूत नीचे सरकाई और लन्ड से टकरा दी।

जीजा जी के सब्र के बांध टूटने लगा था। मैंने उनका लन्ड पकड़ा और तीर को निशाने पर लगा दिया। बस कमान छोड़ने भर की देर थी… और तीर चूत के अन्दर…

‘मेरे जीजा जी … चलो शुरू करो…’ हम दोनों ने खुमारी में आंखे बंद कर ली और मैंने उनके लन्ड पर हल्का सा दबाव डाला… लन्ड भीतर समाता चला गया।
दोनों ही सिसक उठे।
‘अनु, जरा धीरे से, झिल्ली फ़टेगी तो दर्द होगा!’ उसने आशंका जताई।
‘जीजा जी, ऐसा मत कहो ना… मैं तो कई बार चुदा चुकी हूँ… बस आपका लन्ड लेना था!’ मैंने कसकती आवाज में कहा।
‘क्या?… क्या कहा… फिर कोई बात नहीं…’ वो अब इत्मिनान से था।
‘चल ना… मस्ती से चोद यार… लगा अपना लौड़ा पूरी ताकत से कि मैं अच्छी तरह से चुद जाऊँ!’
‘अनु, मैं तो तुम्हें मन ही मन प्यार करने लगा था…’ उसने आह भरते हुये कहा।
‘नहीं जीजा जी … मेरी बहन बहुत प्यारी है… उसका आप ध्यान रखो… और प्यार करना है ना… मैं तो यही हूँ ना… खूब करना!’
जीजा ने दिया चुदाई का सुख (Jija Ne Diya Chudai Ka Sukh)
जीजा ने दिया चुदाई का सुख (Jija Ne Diya Chudai Ka Sukh)
हमारी चुदाई तेज हो गई थी। मैं ऊपर से उसके लन्ड पर चूत पटक रही थी और भरपूर आनन्द ले रही थी।
‘अनु, नीचे आ जा, जरा जोर से चोदना है मुझे, चल पलट जा!’ जीजा जी को अब घमासान करने की लग रही थी।

मुझे नीचे लेकर अब वो ऊपर आ गया था। उसका पहला धक्का ही मुझे मस्त कर गया। भीतर तक या जड़ तक ठोकर मार गया। अब दूसरा उससे भी जोर का था… मैं हिल उठी… पर मस्ती में झूम गई। ऐसा जबरदस्त चोदा मारा कि मेरा सारा जिस्म जैसे जीजा जी का गुलाम हो गया।

‘मार और जोर से चोदा मार मेरे राजा… चूत को अन्दर से भी फ़ाड दे…’ वासना के नशे में मैं पसीने पसीने हो रही थी। जीजा जी का पसीना भी मेरे जिस्म पर टपक रहा था। जीजा जी मेरी चूचियों का दुश्मन हो गया था। पूरे मन से और तरीके से उन्हें मसलते हुये मुझे जन्नत की ओर ले जा रहा था। धकाधक लन्ड पेल रहा था। मेरी चूत उसका लन्ड उछल उछल कर गपागप ले रही थी।

अचानक मुझे लगा कि बस अब मुझे कोई नहीं रोक सकता। चूत में लहरें उठने लग गई थी। मुझे लगा कि मैं अब सीमा तोड़ कर झड़ने वाली हूँ।

‘ज्ज ज ज्ज जीजा जी… अह्ह्ह्ह्ह… मैं हाय… जीजा जी… मुझे सम्भाल रे… मेरा रस निकला रे…जोर लगा कर चोद दे रे…’

‘मैं भी अनु… आह्ह माल निकलने वाला है!’ और जीजा जी ने अपना मेरी चूत में एक भरपूर शॉट मारा और लन्ड चूत में जोर से गड़ा दिया। मेरी चूत चू पड़ी… और झड़ने लग गई। गड़े हुए लौड़े ने भी जड़ के पास गहराई में वीर्य छोड़ दिया और दोनों ही झड़ने का लुत्फ़ लेने लगे। चुदाई मस्त थी, मैं तो पूरी संतुष्ट थी। हम दोनों ने सफ़ाई की और कपड़े पहन लिये। ज़ीजू ने तुरन्त फ़रमाईश की- अनु, तेरी गांड मस्त है यार… अगली बार तेरी गांड का नम्बर लगाते हैं!
‘धत्त… अभी नहीं…’
‘तुम आज से ही गांड में तेल लगा कर दो अंगुलियों को गांड में चलाओ, देखो तीन दिन में शानदार मराने लायक तैयार हो जायेगी।’
मैं हंस दी।

दीदी अभी तक नहीं आई थी। मैंने अपनी स्कूटी उठाई और बाज़ार में निकल गई, ताकि दीदी को शक नहीं हो। रात को जीजा जी की बात को सोचती रही। फिर मैं उठी और तेल ले कर अपनी गांड के आस पास लगाने लगी। अपनी अंगुली को गांड के छेद पर दबाने लगी। मुझे गुदगुदी सी हुई। फिर एक अंगुली गांड की छेद में घुसा कर अन्दर भी तेल लगाने लगी। पर ऐसा करने से मुझे बड़ी उत्तेजना हुई। चूत में पानी तक उतर आया, यह एक अलग तरह का ही मजा था।

मैंने मन में सोचा कि यदि ऐसे इतना मजा आता है तो फिर जब लन्ड जायेगा तो कितना मजा आयेगा।

सुबह उठ कर भी मैंने गांड में फिर से तेल लगाया। गांड के छेद को दबाया और मस्ती ली। फिर गांड में अंगुली डाल कर तेल लगाया और दो अंगुलियो से उसमें घुसा कर छेद बड़ा करने के लिये घुमाया भी।

Jiju Ne Diya Dildo

इन्हीं दिनों मुझे जीजा जी ने एक डिल्डो लाकर दिया। उससे मैं अब मैं गांड के छेद को चौड़ा करने कोशिश करती थी। बहुत दिन हो गये गांड चुदाई का मौका ही नहीं मिला, पर इतने दिनों में मैं अपने आप को गांड मरवाने लायक बना चुकी थी। मेरी गांड में एक डिल्डो आराम से चला जाता था। मैं धीरे धीरे उससे अपना अच्छा अभ्यास कर लेती थी।

एक दिन हमें मौका आखिर मिल ही गया। एक दिन सवेरे ही जीजा जी ने मुझे बताया कि रेशू की एक सहेली आई है वो उससे मिलने जायेगी। मतलब मुझे रेशू दीदी से पहले निकल जाना था। मैंने अपनी स्कूटी उठाई और अपनी सहेली के यहाँ चली गई। कुछ ही देर में जीजा जी का मिसकॉल आ गया। मैं जल्दी से घर पहुंच गई।

‘आज तो बहुत समय मिलेगा, रेशू तो दिन को लंच के बाद आयेगी!’ जीजा जी ने खुश होते हुये कहा।

Jiju Gaand Maarne Ke Liye Tayyar Hue

‘आज गांड मार कर मुझे मस्त कर देना जीजा जी… ये देखो मेरी गांड कितनी चमकदार और मस्त हो गई है।’ मैंने अपनी पैन्ट उतार कर गांड दिखाई। जीजा जी भी अपने कपड़े उतार कर तैयार हो गए। मैंने भी अपना टॉप उतार दिया। जीजा जी ने मुझ प्यार से बिस्तर पर बैठा दिया और मुझे अपनी बाहों में कस लिया। उनके अधर मेरे अधरों को चूमने लगे।

मर्द का स्पर्श मुझे इतने दिनों बाद मिला था, सो मैं तो आनन्द में खो सी गई। मेरी चूचियाँ कड़ी हो गई थी, चुचूक फ़ूल कर कड़े हो गये थे। उनके हाथों ने मेरे जिस्म के उभारों को दबाना और मसलना आरम्भ कर दिया। मेरी चूत पानी से तर हो उठी।

जीजा जी ने मुझे बिस्तर पर सबसे आसान आसन यानी चूतड़ों को ऊपर उठा कर नीचे झुक जाना… यानि कुतिया स्टाईल बना दिया। मेरे चूतड़ के दोनों पट खिल गये… अन्दर गुलाब का फूल जो बंद था, जीजा जी को नजर आ रहा था। जीजा जी ने अपनी एक अंगुली से गुलाब को सहलाया और धीरे धीरे दबाव भी डाला। मुझे मर्दों के हाथ वाली गुदगुदी हुई। पास पड़ा तेल लेकर जीजा जी ने गुलाब के फूल पर लगाया… और फिर से दबाव बनाते हुये अंगुली अन्दर घुसा दी।

मुझे छेद के आस पास बहुत ही मजा आया। यह मर्द का स्पर्श था… सुहाना और उत्तेजना से भरा हुआ। एक बारगी तो मेरी गांड कस गई, फिर मैंने उसे ढीला छोड़ दिया। जीजा जी की अंगुली और आगे बढ़ गई। अब जीजा जी ने अपनी अंगुली मेरी गांड के छेद को बड़ा करने के घुमाई तो गांड बड़े आराम से खुल गई… जीजा जी घुटने के ऊपर बैठ गये और चूतड़ों के गालों को अलग करते हुये अपने लन्ड का निशाना बनाया और गुलाब पर रख दिया। छेद तो पहले ही खुला हुआ था। सुपारा उसमें आराम से चला गया।

‘अनु, तुमने अपनी गांड खूबसूरती से तराशी है… पर अब धीरे धीरे गांड मारेंगे… जीजा जी का लौड़ा जोर लगाने से अन्दर घुसने लगा। टाईट छेद का असर था… जीजा जी को मजा आने लगा था। मुझे भी अभ्यास के कारण अन्दर उनके कसते हुये लन्ड का मजा आ रहा था। अब जीजा जी ने धीरे से अपनी दो अंगुलियों को मेरी चूत में घुस दिया। मैं आह कर उठी। उन्होंने अपने हाथों से मेरे दाने की कली को सहलाना आरम्भ कर दिया। अब जीजा जी ने मेरी गांड में नपे तुले अन्दाज में लन्ड अन्दर बाहर करना चालू कर दिया।

‘मुझे आज मार डलोगे क्या… इतना मजा तो चुदने भी नहीं आया था… हाय राम रे…!’

‘यह अभ्यास का मजा है… सोच समझ कर चुदाई की है… मजा तो खूब आयेगा।’

मर्द से गांड मराने का मजा डिल्डो से कहीं प्यारा होता है… यह मुझे आज पता चला। मेरी कसी हुई गांड जीजा जी को असीम आनन्द दे रही थी। उनका लन्ड कड़क हो कर आराम से मेरी गांड चोद रहा था। कोई दर्द नहीं, कोई खतरा नहीं, बस मजा ही मजा।

कुछ देर तक तो जीजा जी ने मेरी गांड मारने का मजा लिया फिर उन्होंने अपना लन्ड बाहर निकाल लिया और एक मुझे अजीब लगने वाली बात कह दी।

‘अनु, तेरी दीदी की गांड मैंने आज तक नहीं मारी, वो मुझे मारने ही नहीं देती है।’

‘हाय जीजा जी, सच में बडा मजा आता है रे… दीदी की गांड जबरदस्ती मार देना…’

जीजा जी हंस दिया फिर बोला- अनु, वो डिल्डो से अब मेरी गांड मार दे… मुझे भी मजा लेने दे…
मेरी आंखे आश्चर्य से फ़ैल गई- जीजा जी आप ठीक तो हैं ना… आप मर्द हो कर…?
‘अरे हूँ तो इन्सान ही ना… मुझे भी तो मजा लेने का हक है…!’ उनकी आवाज में कसक भरी थी।
‘अरे चलो, डोगी बनो… वाह मेरे दिल की कर दी यार… मेरे दिल में भी आपको डिल्डो से चोदने का ख्याल आता था… चलो चलो हाय रे जीजा जी… मुझे तो मजा आ जायेगा आपको चोद कर…’

ज़ीजू बिस्तर पर डोगी बन गए और अपनी गांड ऊपर उभार ली। इतनी सुन्दर और गोल गांड, एक भी बाल नहीं, चिकनी और दोनों चूतडों की दरार के बीच एक चमकता हुआ काला फूल… मैंने तेल लगा कर उसके छेद के आस पास अंगुली को स्पर्श किया और घुमाती रही। फिर और तेल लेकर उस फ़ूल में अंगुली रगड़ने लगी, वो आह भरने लगा।

‘जीजा जी, आपको भी मजा आता है इसमें…’
‘हाँ बहुत ही… सभी मर्दों को आता है…’

मेरी अंगुली जीजा जी की गांड के छेद में घुस गई। उसका छेद तो ढीला था, लगता था कि वो डिल्डो से गांड मार लिया करते थे। मैंने डिल्डो को तेल से भिगा दिया और उनकी गांड के काले फ़ूल पर रख कर दबा दिया। वो आराम से अन्दर घुस गया। उन्हें बहुत मजा आया। मैंने उनकी गांड में डिल्डो पूरा घुसा दिया। उसका लन्ड नीचे उत्तेजना से फ़ूल उठा। जैसे जैसे डिल्डो गांड में चलता उसका लन्ड कड़कता जाता। मैंने उनके लन्ड का यह हाल देख कर उसे दूसरे हाथ से थाम लिया। सच में लन्ड की उत्तेजना असाधारण थी। लन्ड और मोटा हो गया था, फ़ूल गया था… मैं उनके लन्ड को धीरे धीरे हाथ से आगे पीछे करने लगी।

‘अनु… साली जोर से कर यार… मुझे बहुत ही आनन्द आ रहा है… रगड़ यार जोर से…’ वो लगभग चीख से उठे। ये आनन्द लन्ड का था या गांड का… जो भी हो मेरे हाथ डिल्डो पर भी तेजी से चल रहे थे और अब लन्ड पर भी जोर आजमा रहे थे…’

‘मर गया रे… साली अनु… मेरी माँ चोद देगी क्या… अरे मरा रे… मेर निकला, जोर से मुठ मार… साले को मरोड़ दे… उखाड़ दे यार… मैं गया…!’

उनका लन्ड बुरी तरह कड़क रहा था। मैंने ज्योंही उनके लौड़े को घुमा कर पूरा दम लगा कर खींचा, तभी उनका ढेर सारा वीर्य निकल पड़ा। मैंने पूरी कोशिश की कि पूरा ही पी जाऊँ पर हाय री किस्मत पिचकारी लम्बी और जबरदस्त तेज थी। फिर भी जो मेरे मुँह में आया वो भी बहुत सारा था। उसका मोटा लन्ड फूलता पिचकता रहा और वीर्य की धार पेशाब की तरह निकाल रहा था। जब पूरा निकल गया तब उसे मेरी सुध आई, मैं अभी तक नहीं झड़ी थी।

उन्होंने मुझे फिर से कुतिया की तरह झुकाया और अपनी जीभ से मेरा गुलाबी फ़ूल चाटने लगा मुझे फिर से तरावट आने लगी। जीभ को मेरी गांड का छेद खोल कर अन्दर भी डाल देता था। उसके हाथ की दो अंगुलियाँ मेरे दाने को सहला रही थी फिर चूत की गहराइयों में भी उतर जाती थी।

दाना रगड़ने से और गांड की मीठी गुदगुदी ने मुझे जल्दी ही सीमा पार करा दी। मेरी चूत को जोर से दबाते ही मेरा भी वही हाल हुआ जो जीजा जी का हुआ था। मेरा रस निकल पड़ा और ढेर सारा रस निकला। मेरी चूत से जैसे पानी टपकने लगा। जीजा जी नीचे लेट गये और मेरी चूत से उनका मुख चिपक गया। मुझे लगा कि मेरी चूत में जैसे चूसने से एक वेक्यूम पैदा हो गया हो। मैं झड़ती जा रही थी और सारा रस जैसे जीजा जी खींच कर पी रहे थे। मैं एक अजीब सी संतुष्टि महसूस कर रही थी। चुदाई का यह पहलू मेरे लिये एक दम नया था।

‘जीजा जी, ये इतना सारा माल कैसे निकला…?’
‘पीछे से करने से औरत हो या मर्द, डोगी स्टाईल में, लन्ड भी खूब तन्नायेगा और फिर माल भी ढेर सारा निकलेगा, ऐसा ही तुम्हारा माल भी खूब निकला है ना…’
‘जीजा जी, इतना प्यारा सुख मिला… प्लीज दीदी को भी बताओ ना… उन्हें भी ऐसा ही सुख दो!’
‘अरे बाप रे… तेरी दीदी… भाग… तू कॉलेज जा… वर्ना तेरी दीदी को कौन समझायेगा कि मैंने तुझे नहीं चोदा…’ जीजा जी को एक दम रेशू का ख्याल आ गया।

मैं मुस्कराई- तो आपने मुझे चोदा ही कहाँ था… सच बोल देना… कि नहीं चोदा यार… बस जम कर गांड ही मारी थी… अब शक मत कर!’ और हंस कर तैयार होने लगी।

कुछ ही क्षणों में मैं घर के बाहर थी। अपनी स्कूटी उठाई और कॉलेज रवाना हो गई।
जीजा ने दिया चुदाई का सुख (Jija Ne Diya Chudai Ka Sukh) जीजा ने दिया चुदाई का सुख (Jija Ne Diya Chudai Ka Sukh) Reviewed by Priyanka Sharma on 3:19 PM Rating: 5

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