घर में मिली देसी चूत की चुदाई (Ghar Me Mili Desi Choot Ki Chudai)

घर में मिली देसी चूत की चुदाई
(Ghar Me Mili Desi Choot Ki Chudai)

नमस्कार दोस्तो! मेरा नाम अक्षय है। मैंने बी. कॉम. में दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया था। जब कॉलेज में मैंने खूबसूरत लड़कियों को उनके बॉयफ्रेंड या शायद फ्रेंड्स के साथ देखा था तो मुझे भी कोई गर्लफ्रेंड बनाने का मन करने लगा।

माफी चाहता हूँ दोस्तो, पर इन सब बातों में, मैं आपको अपने बारे में बताना तो भूल ही गया। मैं 5’7″ की लंबाई वाला साधारण सा दिखने वाला लड़का हूँ। मेरे अंदर कुछ भी ऐसा खास नहीं है जो मैं आपको बता सकता हूँ। अन्तर्वासना की कहानी और पोर्न फिल्म देख कर हमेशा हाथ से ही किया है। कभी कोई गर्लफ्रेंड नहीं बनी इसीलिए पोर्न फिल्म देख कर ही खुश(या मज़बूर) रहता था। कहानी पर आते हैं।

क्योंकि कॉलेज घर से दूर था इसीलिए घर वालों ने एक बाइक दिलवा दी थी। बाइक से ही रोज़ कॉलेज आना जाना होता था। पर बदकिस्मती से एक बार घर जाते हुए मेरी बाइक फिसल कर गिर गयी जिससे मुझे भी थोड़ी चोट आई और बाइक का भी बहुत नुकसान हो गया था।
इस वजह से मेरी मम्मी और पापा ने मुझे कॉलेज के पास ही कमरा लेकर रहने के लिए बोल दिया।

वैसे जो भी मेरे दोस्त मेरी मम्मी का नाम आने का इंतज़ार कर रहे थे उन्हें बताना चाहता हूँ। मेरे पापा एक सरकारी बैंक में मैनेजर की पोस्ट पर कार्यरत हैं और मम्मी पूनम घरेलू महिला है। पापा की उम्र लगभग 45 साल है पर वो बहुत बूढ़े और थके हुए लगते हैं जबकि मम्मी की उम्र 42 साल है और वो कितनी हसीन है शायद सिर्फ मेरे पापा जानते हैं। गोल गोल चुचे, मोटी गांड, काले घने रेशमी बाल। मतलब हर वो इंसान जिसे जन्नत देखनी है वो मेरी माँ को देख ले। मेरी माँ को देखना ही जन्नत से बड़ा सुख है तो उन्हें पाना तो खुद सोचो क्या है।

मैंने कॉलेज के पास फ्लैट ले लिया और कॉलेज जाने लगा। धीरे धीरे कॉलेज में दोस्त तो बहुत बन गए पर गर्लफ्रैंड एक भी नहीं थी। जब अन्तर्वासना के अलावा मेरे पास कुछ नहीं था तो अन्तर्वासना की माँ बेटे की कहानी पढ़ कर हाथ से करता रहता था पर मुझे नहीं पता था कि किस्मत मुझ पर कुछ ऐसे मेहरबान हो जाएगी।

मैंने फेसबुक पर एक फेक आईडी बनाई जिसमें अपना प्रोफेशन जिगोलो बताया। पहले तो बहुत फेक लोग मिले पर किस्मत से एक दिन सुनिधि नाम की महिला की फ्रेंड रिक्वेस्ट आयी। उससे बात करने पर पता चला कि उसका पति 6 महीने से विदेश में रहता है और वह सेक्स की भूखी है। उसे खुश करने पर वो मुझे 20,000 रूपये भी देगी।
मुझे और क्या चाहिए था मैं उसकी बताई हुई जगह पर दिन में 12 बजे पहुँच गया।

अब कहानी शुरू होती है।

मैं काले रंग के कोट में जब उस महिला के घर पहुँचा तो उस महिला ने ही गेट खोला और मुझे सोफे पर बैठने के लिए बोला। फेसबुक पर वो महिला इतनी खास नहीं लग रही थी पर सामने जब वो बैठी थी तो उसके खुले घुंघराले बाल, नशीली आंखें, कांपते हुए गुलाबी होंठ, सुराही जैसी गर्दन और उनके नीचे 38 साइज के बिल्कुल गोल और मोटे चुचे उसे किसी अप्सरा से कम होने का अहसास नहीं होने दे रहे थे।

उसे देख कर मेरा लन्ड पैंट में ही फटने के लिए तैयार हो गया। मन कर रहा था कि बस अभी पकड़ लूँ पर जानता था कि ये थोड़ी देर में मुझसे ही चुदेगी इसीलिए नार्मल होने का नाटक करने लगा।
सुनिधि- कब से ये कर रहे हो?
मैंने झूठ बोला- 6 महीने हो गए है।
सुनिधि- तो इंतज़ार किसका?

सुनिधि अपनी बात पूरी भी नहीं कर पायी कि मेरे होंठ और होंठों से चिपक गए थे। उसके शरीर से बहुत मादक सी खुशबू आ रही थी जो मेरे शरीर को बेकाबू कर रही थी। क्योंकि यह मेरा पहला अनुभव था इसलिए मैं किस करते हुए पैंट में ही झड़ गया।

क्योंकि मेरा लौड़ा पूरी तरह से उफान पर था और पैंट के ऊपर से ही सुनिधि के पेट को छू रहा था इसीलिए सुनिधि को मेरे लन्ड के छूटते हुए झटके महसूस होने लगे और वो हँसने लगी जिससे मेरे होंठों की पकड़ उसके होंठों से फिसल गई।

मुझे शर्म आने लगी कि मैं 20 साल की उम्र में नामर्द हूँ क्या? इस 35 साल की हसीन औरत को छूते की मेरा लन्ड पानी छोड़ गया।
सुनिधि- क्या हुआ?
मैं- तुम्हें देख कर रहा नहीं गया बस पता नहीं कैसे पर मेरा पानी निकल गया।
सुनिधि- अगर लौड़ा पानी नहीं छोड़ेगा तो दूध छोड़ेगा क्या?
उसके मुंह से लौड़ा शब्द सुन कर जान में जान आयी।

मैं- नहीं जान, दूध के लिए तो ये हसीन चूची है।
बोलते हुए मैंने उसके चूची दबा दी और हम दोनों हँसने लगे।

पता ही नहीं चला कब हमारी हँसी बन्द हो गयी और हम भूखे भेड़िये की तरह एक दूसरे पर टूट पड़े। हम दोनों की आँखें बंद थी। सांस टकरा रही थी। होंठ से होंठ और जीभ से जीभ लड़ रही थी। मेरा एक हाथ उसके चुचे सहला रहा था और दूसरा हाथ उसके चूतड़ दबा रहा था। उसने भी दोनों हाथ से मेरे शरीर को दबा रखा था। मेरा लौड़ा फिर से तन चुका था।

उसने मुझसे बेड पर चलने के लिए बोला पर मैं तो अलग ही मूड में था। मैंने उसका टॉप गले से पकड़ा और दो टुकड़ों में बाँट दिया और यही हाल उसकी ब्रा के साथ किया। अभी तक हमारे होंठ जुड़े हुए थे और हम अलग ही दुनिया में थे।

जैसे ही मेरा हाथ उसकी नंगी चूची पर पड़ा सुनिधि के मुँह से एक सीत्कार सी निकली- आ आह … रा…हु…ल, खा लो न मुझे।
मैंने फेसबुक पे अपनी आईडी अजय नाम से बनाई थी।

मैंने आँखें खोली और सुनिधि को निहारा। उसका दूध से भी गोरा बदन काँप रहा था। बिल्कुल गोल चुचों पर गुलाबी सी घुंडी पागल कर रही थी। उसकी आंखें बंद थी और मेरे हाथ उसकी पीठ पर थे. वो मदहोशी में अपना शरीर उठा रही थी जिससे उसके चुचे मेरे मुंह के बहुत पास आ चुके थे। मैंने अपने दांतों से उसकी घुंडी को हल्का सा दबाया और उस पर धीरे धीरे जीभ फेरने लगा।

सुनिधि जो अभी तक सिर्फ आंख बंद कर के सीत्कार मार रही थी वो चिल्लाने लगी- आह आ…ह … आजा अजय … जल्दी आजा!
और मेरे पैंट की बेल्ट खोल के अंडरवियर में हाथ डाल कर मेरा लौड़ा अपने हाथ में ले लिया। अचानक उसने आंख खोली और मुझे पीछे की और धक्का दिया। जिससे मैं सामने वाले सोफे पर गिर गया।

मैं- क्या हुआ जान?
सुनिधि- अजय जरा अपना हथियार दिखाना।
“जरा क्यों, पूरा देखो!” मैंने खुश होते हुए अंडरवियर पूरा उतार दिया।

पैंट में ही झड़ने की वजह से वो पूरा गीला था। मैं समझ चुका था कि गीले लन्ड की वजह से सुनिधि गुस्से में आ गयी है।
मैं- सॉरी जान, तुम्हारा शरीर ही ऐसा है कि मैं खुद को रोक नहीं पाया था और पैंट में ही झड़ गया था। आप नाराज़ नहीं होना मैं बस एक मिनट में साफ कर के आ रहा हूँ।

इतना बोल कर बाथरूम में चला गया अच्छी तरह खुद को साफ करके और पूरे कपड़े उतार कर 5 मिनट में सुनिधि के सामने आ गया। जब सुनिधि के सामने पहुँचा तो देखा कि सुनिधि अभी भी सोफे पर वैसे ही बैठी है और कुछ सोच रही है। क्योंकि अब मैं पूरी तरह नंगा था और सुनिधि भी ऊपर से बिना कपड़ों के थी तो मेरा लौड़ा लोहे की रॉड की तरह बिल्कुल टाइट हो गया था।

मैं सोफे पर बैठ गया और सुनिधि को अपनी गोद में बैठा लिया जिससे उसकी और मेरी छाती एक दूसरे से रगड़ खाने लगी.
फिर मैंने उसके होंठों से अपने होंठ सटाते हुये पूछा- परेशान क्यों हो?
वो बोलने लगी- अजय, मैंने बहुत दिनों से सेक्स नहीं किया। मुझे बहुत डर लग रहा है। मैंने बहुत मर्दों के साथ सेक्स किया है पर मैंने कभी इतना बड़ा लन्ड नहीं देखा।

मुझे लगा कि वो मुझे खुश करने के लिए ऐसा बोल रही है तो मैंने भी उसे बांहों में भर कर चूमना शुरू कर दिया।
चूमते हुए वो थोड़ी ऊपर उचक गयी जिससे उसकी चूची मेरे मुँह में आने लगी। उसका शरीर अकड़ रहा था, नहीं … नहीं … आह … की मादक आवाज़ कमरे में गूंज रही थी।

अब हम दोनों से रहा नहीं जा रहा था, वह सोफे पर ही खड़ी हो गयी जिससे उसकी चूत मेरे मुंह के सामने आ गयी। मैंने उसकी जीन्स नीचे की तो देखा उसने पेंटी नहीं पहनी थी और मेरे आंखों की 2 इंच की दूरी पर एक बालो की गुलाबी रंग की चूत थी।
पोर्न मूवीज में तो हर तरह की चूत देख चुका था पर चूत के असली खुशबू आज महसूस हो रही थी। मैंने उसकी चूत में एक प्यारा सा किस किया तो महसूस हुआ कि सुनिधि के दोनों हाथ मेरे सिर पर हैं और वो अपनी चूत पर मेरे मुंह का दबाव बना रही थी।

मुझे भी वो खुशबू अच्छी लग रही थी, मैंने मेरी जीभ निकाली और सुनिधि की चूत में फेरने लगा। मैं चाट रहा था, चूस रहा था, काट रहा था। मन कर रहा था खा जाऊँ इस चूत को!
और चूसते हुए मैंने अपनी बीच वाली उंगली सुनिधि की चूत में डाल दी।

सुनिधि मदहोशी में चिल्लाने लगी। उसने सोफे पर ही लिटा दिया मुझे … और मेरे मुंह पर बैठ कर अपनी चूत रगड़ने लगी। मुझे सांस नहीं आ रही थी पर मैं भी रुकना नहीं चाहता था। आआ … आ … आ..ई … की तेज आवाज के साथ अचानक से हल्की पानी की धार मेरे मुंह में आयी और मैंने बिना वक़्त बर्बाद किये वो पानी पी लिया।
पता नहीं क्यों पर आज सब कुछ अच्छा लग रहा था।

निढाल होकर सुनिधि मेरे शरीर पर गिर गयी, वो थकी हुई लग रही थी, उसके पैर अभी भी काँप रहे थे। वो बिना कपड़ों के मेरे ऊपर आंख बंद कर के लेटी थी।
सुनिधि का थका हुआ बदन, उसके थरथराते होंठ, खुले बाल, नंगी छाती उसकी खूबसूरती में 4 चाँद लगा रहे थे।

सुनिधि अपनी चूत चटवा कर पानी छोड़ चुकी थी पर मेरी तो शुरुआत थी। हम बिना कपड़ों के एक दूसरे से लिपटे हुए थे। छाती से छाती, होंठ से होंठ और साँसों से सांसें टकरा रही थी। मैं उसके कांपते बदन को फिर से चूमने लगा.
घर में मिली देसी चूत की चुदाई (Ghar Me Mili Desi Choot Ki Chudai)
घर में मिली देसी चूत की चुदाई (Ghar Me Mili Desi Choot Ki Chudai)
वो मेरे ऊपर ही लेटी थी तो मैंने अपना लौड़ा उसकी चूत पर टिका दिया। गीली चूत होने की वजह से टोपा अंदर जाने लगा तो मैंने भी सुनिधि के चूतड़ पकड़ के थोड़ा दबाव बनाया जिससे थोड़ा था हिस्सा चूत में चला गया। हमारे होंठ एक दूसरे से जुड़े हुए थे इसीलिए वो कुछ बोल तो नहीं पायी पर मना करते हुए गर्दन हिलाने लगी और मुँह से गूँ … आह … की आवाज़ से उनसे अपनी चूत पीछे कर ली जिससे मेरा थोड़ा सा घुसा हुआ लौड़ा पच्च की आवाज़ के साथ निकल गया।
मैं- क्या हुआ जान?
उसने अपनी चूत हथेली से दबाते हुए इशारे में कुछ नहीं कहा।

सुनिधि मुझे और भी खूबसूरत लगती जा रही थी। मैंने उसे गोद में उठाया और बेडरूम में ले जाने लगा। हम दोनों के जिस्म नंगे होने की वजह से उसके चूतड़ों में मेरा लौड़ा टकरा रहा था जो हम दोनों को मदहोश कर रहा था। वो अपने नाखून मेरी छाती में चुभा रही थी उसकी आंखें बंद थी। मैंने उसे बेड पर लिटाया और लौड़ा उसकी चूत पर टिका दिया।

मैं बेकाबू था और एक झटके में आधा लौड़ा उसकी चूत में डाल दिया। वो बहुत तेज़ चिल्लाई और मुझे पीछे धकेलने लगी। पर मैं खुद को रोक नहीं पाया और उसके होंठ अपने होंठों में दबा कर दूसरा झटका मारा। मेरा लौड़ा उसकी चूत को चीरते हुए जड़ में समा गया। उसका शरीर काँप रहा था वो मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थी। उसकी आंसू भारी आँखें मुझे रहम की भीख मांग रही थी। पर मेरा लौड़ा रहम शब्द का मतलब भूल चुका था। मैं एक हाथ से उसका सिर और एक हाथ हाथ से उसका गाल सहला रहा था।

जब उसने छूटने की कोशिश करनी बंद की तो मैंने उसके होंठ छोड़ कर धक्के लगाने शुरू किए। उसकी चूत बहुत टाइट थी जो हर धक्के पर उसे चिल्लाने के लिए मजबूर कर रही थी।

18-20 धक्के लगते ही उसने पैरों से मुझे बांध लिया। अपने नाखून मेरी पीठ में गाड़ दिए और अपनी गांड उठा के पूरा लौड़ा अपनी चूत में समाने लगी। उसके पैर फिर से कांप उठे और पानी की हल्की सी धार मेरे लौड़े को भिगोते हुए मेरे पैरों को भिगाने लगी। उसका बदन काँप रहा था जो मुझे और भी ज़्यादा उत्तेजित कर रहा था। वो निढाल हो कर गिरी थी पर मेरे धक्के तेज़ हो गए।
सुनिधि के शरीर और चेहरे पर कोई भाव नहीं था। पर मैं फच्च फच्च की आवाज़ के साथ लगातार उसे चोद रहा था।

15 मिनट की घमासान चुदाई के बाद अचानक से मैं और वो तेज़ सीत्कार के साथ एक साथ पानी छोड़ गए।
मैं उसकी चूत पर सिर रख के उसकी गीली चूत की खुशबू का अहसास ले रहा था और वो प्यार से मेरे बालों को सहला रही थी। उसके बाद बाथरूम में एक बार और हमने चुदाई का खेल खेला।

शाम के 5:30 बज चुके थे। मैंने कपड़े पहने और अपने रूम के लिए में जाने लगा तो सुनिधि ने मेरे होंठ चूमते हुए 25,000 रुपये दिए। मैं तो भूल ही चुका था कि मैं यहाँ जिगोलो बन कर आया था।
इसके बाद सुनिधि ने अपनी बहुत सहेलियों को मुझसे चुदवाया और तब मुझे पता चला कि मुझमें भी कुछ खास है। मेरे लौड़े का साइज थोड़ा बड़ा होने की वजह से सुनिधि बोलने लगी कि तुम्हारा शरीर आम इंसान जैसा है पर लौड़ा किंग साइज का है इसीलिए आज से तुम ही मेरे किंग हो।
उसकी सारी सहेलियाँ भी मुझे किंग बोलती थी। सुनिधि लगभग रोज़ मुझसे चुदाई करवाती थी। अब मैं सुनिधि से पैसे भी नहीं लेता था। उसकी सारी सहेलियाँ ही मेरे खर्चे निकाल देती थी।

ऐसे ही मेरी ग्रेजुएशन पूरी हो गयी और वापिस अपने घर आ गया।
एक महीना भी नहीं बीत पाया पर मुझसे रहा नहीं गया और मैंने सुनिधि को फ़ोन किया तो उसने बताया कि उसे किसी शादी में जाना है इसीलिए आज नहीं कर पायेगी और न ही आज उसकी कोई सहेली से मिलवा पाएगी।

मैं दुखी मन से हाथ से करने के लिए बाथरूम में जा रहा था तो देखा कि मेरी माँ सज रही थी कहीं जाने के लिए। मेरी माँ बिल्कुल घरेलू महिला थी। सिर्फ घर के काम करती थी और दिन में सोया करती थी। मुझे अपने बाप से जलन हो रही थी कि इस क़यामत औरत को बेकार कर दिया। ऐसी औरत तो दिन रात चुदाई के लिए होती है पता नहीं मेरे पापा खुद को कैसे रोकते होंगे।

खैर ये सब सोचते हुए मैंने माँ से पूछा- कहाँ जा रही हो?
वो बोली कि हर रोज़ किसी न किसी रिश्तेदार की शादी है तो आज तुम्हारे पापा नहीं जा पाएंगे इसीलिए उन्होंने हम दोनों को साथ जाने के लिए बोला है।
मेरा मन नहीं था पर कार मुझे ही चलानी थी इसीलिए मैं भी तैयार हो गया माँ के साथ जाने के लिए।

शादी रोहिणी में मेरी बुआ की लड़की पूजा की थी। मैं अपने ज़्यादा रिश्तेदारों को नहीं जानता था इसीलिए मैं वहाँ पर एक साइड में बैठ गया और मेरी माँ सब लोगों से मिलने लगी।

अचानक पीछे से किसी ने मेरी आँखों को बंद कर दिया। वो मुलायम हाथ इतने खुशबूदार थे कि मेरे शरीर में गुदगुदाहट होने लगी। मैं नहीं जानता था कि किसने मेरी आँखें बंद की थी पर मैं जल्दी से जल्दी उस मुलायम हाथों की मालकिन को देखना चाहता था।
तभी आवाज़ आयी- मेरा पीछा करते करते यहाँ तक क्यों आ गए?

सुनिधि!
मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
यह सुनिधि थी जिसने मेरी आँखें बंद की थी। मैं खड़ा हुआ उसे गले लगाने के लिए पर उसने बोला- यहाँ सब जानते हैं, बाहर चलते हैं।

मैं उसे लेकर अपनी कार में आ गया और उसके होंठों को अपने होंठों में कैद कर लिया।
पर उसने कहा- यह सही वक्त और सही जगह नहीं है. और तुम्हारे लिए खुशखबरी है। मेरे दूर के रिश्ते की भाभी तुमसे चुदने के लिए बेताब है पर वो 5000 से ज़्यादा रुपये नहीं दे पाएगी। जब लन्ड में आग लगती है तो पैसा दिखता ही नहीं और वैसे भी मैं किस्मत वाला हूँ जिसे चूत मारने के पैसे मिलते हैं। नहीं तो लोग तो पैसे देकर भी ठीक से नहीं चोद पाते।

मैं तैयार था तो उसने बोला कि वो उसे लेकर एक घंटे बाद अपने घर पर मिलेगी।
मैंने मम्मी को फ़ोन किया और बताया कि मेरे कॉलेज के दोस्त यहाँ पास में रहते है उनके पास जा रहा हूँ थोड़ी देर में आऊंगा।
मम्मी भी किसी रिश्तेदार के साथ मार्किट जा रही थी तो उन्होंने भी मना नहीं किया।

मैं जब एक घंटे उसके घर पहुँचा तो सुनिधि ने गेट खोला और मुझसे कहा कि तेरी आज की बेगम बैडरूम में तेरा इंतज़ार कर रही है। पर उसने आज तक अपने पति के अलावा किसी से नहीं किया तो शर्माती है और बोल रही है कि लाइट न नहीं करेंगे अंधेरे में करना होगा।

पहले तो गुस्सा आया- कौन इतनी शर्त मानेगा. उसे भगाते हैं, हम दोनों करते हैं.
तो सुनिधि बोलने लगी- हम तो हमेशा करते ही हैं. भाभी पहली बार बोल रही है तो आज कर लो।

मैं बैडरूम में गया तो लाइट बन्द थी। मैं ऊपरी मन से उसकी भाभी की बगल में लेटा और साड़ी उठा कर सीधा उसकी चूत छेड़ने लगा। वो कोई भाव नहीं दे रही थी, बस चूत छूते ही उन्होंने अपनी टाँगों को चिपका लिया जिससे मैं ठीक से चूत का नाप नहीं ले पाया।

मेरा मन नहीं कर रहा था उसके साथ करने का इसीलिए मैंने समय बर्बाद न कर के सीधा लौड़ा उनकी चूत में डालने की सोची और अपने कपड़े उतारने लगा कि जल्दी से इसे चोद कर भेज दूंगा फिर सुनिधि को चोदूँगा।

मैंने अपना लौड़ा उस भाभी की गीली चूत पे लगाया और धक्का दिया। उसकी गीली चिकनी चूत बहुत टाइट थी इसलिए मुझे थोड़ी ताकत लगानी पड़ी। अभी सिर्फ टोपा ही अंदर गया था कि वो भाभी दर्द से चिल्ला उठी।
मेरे हाथ उसके गाल सहला रहे थे जो मुझे उनके आंखों से निकलने वाले आंसुओं का अहसास करवा रहे थे। मुझे लगा नई शादीशुदा लड़की है जिसका पति ठीक से संतुष्ट नहीं कर पाता इसीलिए इतनी टाइट चूत है।

मैंने थोड़ा सा सहलाते हुए उनके होंठों को अपने होंठों में दबा लिया और सोच रहा था कि मैं फालतू में सुनिधि की चूत के बारे में सोच रहा था। इतनी टाइट चूत रोज़ मिलने लगे तो सुनिधि का क्या करूँगा।
उसके मम्मे मेरी छाती को छू रहे थे और मैं उनकी गोलाई और मोटाई दिमाग में नाप रहा था। मैं उनके बदन की गर्मी और आकार को महसूस कर रहा था जो मुझे बहुत उत्तेजित कर रहा था।

मैंने दोबारा धक्का दिया और इस बार आधे से ज़्यादा लन्ड अंदर चला गया।
उम्म्ह… अहह… हय… याह…
पहली बार उसकी आवाज़ सुनाई दी मुझे … वो दर्द से चिल्लाने की आवाज़ थी। वह दर्द में भी बहुत मादक आवाज़ थी। पर आवाज़ इतनी तेज थी कि सुनिधि बैडरूम में आ गयी और गेट खटखटाने लगी- भाभी ठीक हो न? क्या हुआ?
उन्होंने मुझे धक्का दिया और गेट के पास जाकर धीरे से कहा- मैं ठीक हूँ, आप जाओ।

खिड़की से निकली हल्की रोशनी में मुझे चेहरा तो नहीं दिखा पर उसके शरीर के उभार समझ में आ रहे थे। सुनिधि से बहुत खूबसूरत शरीर था उसका और उतनी ही मादक आवाज़ थी। खैर, मुझे यह तो पता चल चुका था कि भाभी जी खुश हैं मेरे लौड़े से!

तो मैं उनके पास गया और उनके होंठों को चूसने लगा। वो भी पूरी तरह गर्म थी जो उनकी सांसें मुझे मुझे बता रही थी।

अचानक से वो नीचे बैठी और मेरा लौड़ा मुँह में लेकर चूसने लगी। पर वो ठीक से मुंह में नहीं ले पा रही थी क्योंकि मेरा लौड़ा उनकी उम्मीद से बड़ा था। मैंने उन्हें खड़ी किया और दीवार के सहारे लगा दिया।
इस बार मैंने कोई रहम न दिखाते हुए पूरा लौड़ा एक बार में डाल दिया।

वो काँप उठी पर चिल्लाने की जगह अपनी चूत आगे करके मेरा साथ देने लगी। इतनी टाइट चूत होने की वजह से मैं जल्दी ही चरम सीमा पर पहुंच गया और पानी छोड़ने के लिए जैसे ही अपना लौड़ा बाहर निकाला तो वह समझ गयी और मुँह में पानी लेने के लिए झुक गयी।
दिखा तो नहीं पर पहली धार उसकी छाती पर गिरी होगी और अगली धार तक वह मेरा लौड़ा अपने मुँह में ले चुकी थी।

अब वो पहले से ज़्यादा खुल चुकी थी और आधे से ज़्यादा लन्ड को मुँह में ले रही थी। उसके मुँह की गर्मी ने तुरंत ही मेरे किंग को किंग साइज का बना दिया। मैंने उसे खड़ा किया और फिर से दीवार पे लगा दिया. पर इस बार मैंने उसकी पीठ अपनी तरफ की, पीछे की तरफ से उसकी चूत में अपना लौड़ा डालने लगा।

वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थी, वो दबी आवाज़ में आह … आ…ह की आवाज़ निकाल रही थी। उसकी गोल मोटी गांड मेरे शरीर से टकरा कर मुझे और तेज़ धक्के लगाने के लिए मजबूर कर रही थी।
मैंने एक हाथ में उसके बाल पकड़े हुए थे और मेरा दूसरा हाथ उसके चुचों को गोलाई नाप रहा था कि तभी भाभी की शरीर अकड़ने लगा। उन्होंने अपनी गांड मेरी तरफ तेज़ी से धकेली। ऐसा लग लन्ड के साथ दोनो गोटियां भी अपने अंदर ले लेंगी। इतनी टाइट चूत और उनकी इस हरकत ने मुझे भी पानी छोड़ने को मजबूर कर दिया। मैं उनकी पीठ से चिपक गया और उनको दोनो चुचे अपने हाथ में कैद कर लिए।

फिर वो कपड़े पहनने लगी। मेरा मन अभी और कर रहा था, मैं इस भाभी को जाने नहीं देना चाहता था। पर उनकी शायद सुनिधि से सिर्फ एक बार पानी निकालने की बात हुई थी। मैं भी कपड़े पहन रहा था.
इतनी देर में वो गेट खोल कर बाहर चली गयी।

तब तक सुनिधि आ गयी और बोली- मैं भाभी को छोड़ने जा रही हूँ। तुम जहाँ शादी है, वहाँ ही मिलना।

मैंने टाइम देखा शाम के 6:30 बज चुके थे। मम्मी का फ़ोन भी आ सकता था तो मैंने सुनिधि के होंठ चूमते हुए कहा- हम कल ही मिल पाएंगे अब।
पर सुनिधि भी उत्तेजित हो चुकी थी हमारी चुदाई की आवाज़ सुन कर … तो मैंने कहा- रात में टाइम मिला तो आ जाऊँगा।

जब शादी में पहुँचा तो माँ अभी तक मार्किट से नहीं आई थी। मैंने मम्मी को फ़ोन किया तो उन्होंने बताया कि मेरी किसी दूर की बुआ के साथ अभी भी मार्किट में है, आधा घंटा लगेगा अभी।
तो मैंने आस पास लड़कियां देख कर टाइम पास करने का निर्णय लिया।

मैं वहाँ खूबसूरत लड़कियों को निहार रहा था कि थोड़ी देर में मम्मी भी आ गयी। वो थोड़ा लंगड़ा रही थी तो मैंने पूछा- क्या हुआ?
वो कहने लगी- इतने दिन बाद ऑटो में बैठी थी, उतरते वक़्त जांघ की नस खिंच गयी।
मैं बोला- आप आराम करो, मैं आपकी मालिश कर देता हूं।

इतने में सुनिधि भी वहाँ आ गई। वह मुझे नहीं देख पायी पर मैं मम्मी को कुर्सी पर बैठा कर सुनिधि के पास गया।
मुझे देख वह बोला- तुम अंदर क्यों आये? मैंने बोला था न शाम को मिलेंगे।
तो मैंने बताया- मेरी बुआ की लड़की की शादी है और मैं अपनी मम्मी के साथ आया हूँ।
उसने पूछा- कौन है तुम्हारी मम्मी?

तो मैंने मम्मी की तरफ इशारा किया और बताया कि वो है पर आज उनके पैर में चोट लग गयी।

तो वो मुझे लेकर मेरी मम्मी के पास आ गयी और मज़ाक में हँसते हुए पूछने लगी- कहाँ टांग खिंचवा कर आ रही हो भाभी जी?
“भाभी जी? मतलब सुनिधि और मेरी मम्मी जानती है एक दूसरे को?”
“क्या दीदी आपको तो सब पता है फिर भी हमेशा मज़ाक करती रहती हो बच्चो के सामने।” मम्मी ने नज़र झुका के जबाव दिया और मेरी तरफ देख कर बोली- बुआ जी के पैर छुए तूने?
सुनिधि मेरी बुआ?? मैं सकपका गया.

पर सुनिधि खुश थी, बोलने लगी- जब आपके पैर में चोट लगी ही है तो आप मेरे घर ही आराम कर लो। मेरा घर पास ही है, इस बहाने अक्षय भी घर घूम लेगा।
मैंने भी मम्मी से कहा- हाँ मम्मी, बुआ के घर ही चलते हैं. वैसे भी यहाँ पर इतनी भीड़ है कि कुछ अच्छा नहीं लग रहा। रात को संगीत ही होगा. आपकी तबियत भी ठीक नहीं है।

मम्मी को भी मेरा विचार ठीक लगा और हम कार में बैठकर सुनिधि(बुआ) के घर चलने लगे।

घर पहुंच कर चाय नाश्ता करने के बाद सुनिधि(बुआ) ने मम्मी से कहा- भाभी, आप आराम करो. तब तक मैं अक्षय को घर दिखा देती हूँ।

मैं और सुनिधि ऊपर रूम में आये तो सुनिधि ने मुझे पकड़ लिया और मेरे होंठों को चूमते हुए बोली- कैसी लगी मेरी भाभी की चूत?
मैंने भी उसके निचले होंठ पे काटते हुए कहा- रात को तेरे पास रुका हूँ तो अपनी उन भाभी को भी बुला लो। आज रात को तीनों लोग साथ में करते हैं।
मेरी गर्दन पर जीभ फेरते हुए सुनिधि बोली- क्या मेरी भाभी मेरे से भी अच्छी है?
मैंने भी सुनिधि की चूची दबाते हुए कहा- तुझसे अच्छा तो कुछ नहीं है. पर मैं उसे ठीक से नहीं चोद पाया।

सुनिधि बोली- ठीक है, मैं दोबारा भाभी से मिलवा दूंगी पर वो पैसे नहीं देंगी और शर्त ये है कि मैं तुम दोनों की चुदाई देखूँगी।
हमने रात को खाना खाया और मम्मी को सोने के लिए बोल दिया।

सुनिधि ने मुझसे बताया- तुम्हारी मम्मी सो गई है और तुम भी ऊपर वाले रूम में सो जाओ। मैं उन भाभी को बुला के ला रही हूँ, रात में तुम्हारे साथ लिटा दूंगी।
मैं ऊपर रूम में गया और उनका इंतज़ार करने लगा।

लगभग 15 मिनट बाद वो भाभी मेरे कमरे में आ गयी। मैं बैचेन था उनके लिए … उनके आते ही मैंने उन्हें बेतहाशा चूमना शुरू कर दिया और अपने कपड़े उतारने लगा। वो भी शायद घर जाने की जल्दी में भी तो उन्होंने भी अपने कपड़े उतार दिए। मैंने उनकी गांड के नीचे तकिया लगाया और ज़ोर से धक्का मारा क्योंकि उनकी दर्द भरी आवाज़ मुझे और भी ज़्यादा उत्तेजित करती है। मैं भूल गया था नीचे मम्मी सो रही है।
घर में मिली देसी चूत की चुदाई (Ghar Me Mili Desi Choot Ki Chudai)
घर में मिली देसी चूत की चुदाई (Ghar Me Mili Desi Choot Ki Chudai)
अचानक लौड़ा अंदर जाने से उनकी दर्द भरी आवाज़ निकल गयी जिससे मेरे रूम में कोई आ गया। मैं जानता था कि सुनिधि ने बोला था कि वो मुझे चुदाई करते हुए देखना चाहती है तो वो ही आयी होगी।

और उसने कमरे की लाइट जला दी।

“मम्मी … !?!” और मैंने मेरे नंगे शरीर को चादर से ढकने की कोशिश की।

सुनिधि दूर खड़ी हँस रही थी। मतलब सुबह भी हम तीनों को नहीं पता था पर वो भाभी मेरी माँ पूनम थी। अब भी मैं अपनी माँ को चोद रहा था। मेरी इतनी अच्छी प्यारी माँ को ऐसा करने की क्या ज़रूरत पड़ गयी।

जो भाव मेरे थे, वो ही भाव मेरी माँ के थे। वो रोते हुए सुनिधि को गाली दे रही थी- तेरे सारे भाई कम थे क्या जो मुझे मेरे बेटे से चुदवा दिया। मतलब सुबह भी तेरा किंग मेरा बेटा ही था?
और रोये जा रही थी।

पर सुनिधि हँस रही थी और मैं सोच में था कि जिस माँ को मैं इतना अच्छा समझता था वो मेरे दोनों चाचा से चुद चुकी है?

तो सुनिधि हमारे पास आई और बोलने लगी- भाभी, मैं और अजय मेरा मतलब अक्षय पिछले 4 साल से रोज़ सेक्स करते थे। मुझे आज तक नहीं पता था कि अजय ही आपका अक्षय है। आपको उदास देख कर मैंने आपको अपने किंग से मिलवाया था। उसके बाद जब शादी वाले घर में मिले तब मुझे अपनी गलती का अहसास हुआ। पर आपको भी शरीर की ज़रूरत थी और अजय भी आपके बारे में पूछ रहा था। तो मैंने सोचा जो एक बार हो सकता है वो तो बार बार भी हो सकता है। अक्षय बड़ा हो गया है जब घर में ही चुदाई मिल जाएगी तो बाहर क्यों जाएगा? ये तो अच्छी बात है कि इसने मेरी आग भी बुझा दी और आपकी भी। नहीं तो शायद हम तीनों बाहर किसी से सेक्स करते और पकड़े जाने पर बदनाम होते।

मम्मी को भी बात ठीक लगी और लगती भी क्यों नहीं, बेटे के सामने पोल खुल चुकी थी तो अब तो चुदने के सिवा कोई रास्ता भी नहीं बचा था।

उस पूरी रात हमने चुदाई की और तीनों लोग तीन तीन बार झड़े।
माँ ने ही बताया कि मेरे पापा बेकार है वो कुछ नहीं कर पाते। मैं दोनो में से किसी चाचा का लड़का हूँ पर कौन से चाचा का ये तो वो भी नहीं जानती।

अब रोज़ मेरे घर में चुदाई होती है और मेरी माँ भी मुझे किंग बोलने लगी। मुझे लगता था मेरे अंदर कुछ भी खास नहीं है पर मेरी माँ और सुनिधि ने बताया ऐसा लौड़ा सिर्फ पोर्न मूवीज में होता है और हमारी चूत टाइट नहीं है तुम्हारा लौड़ा ज़्यादा बड़ा है। कभी कभी सुनिधि भी घर आती है और हम तीनों एक साथ करते हैं। तो दोस्तो, यह मेरे जीवन की बिल्कुल सच्ची घटना है। धन्यवाद.
घर में मिली देसी चूत की चुदाई (Ghar Me Mili Desi Choot Ki Chudai) घर में मिली देसी चूत की चुदाई (Ghar Me Mili Desi Choot Ki Chudai) Reviewed by Priyanka Sharma on 11:41 AM Rating: 5

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