चुदने को मचल रही थी (Chudne Ko Machal Rhi Thi)

चुदने को मचल रही थी
(Chudne Ko Machal Rhi Thi)

मेरा नाम लक्ष्य है और मैं अन्तर्वासना का एक नियमित पाठक हूँ. मैंने अन्तर्वासना की लगभग सभी कहानियाँ पढ़ चुका हूँ और आज भी सुबह सबसे पहले अन्तर्वासना खोल कर अपने लंड को हिला लेता हूँ. यह कहानी सन 2012 की है. मेरा गाँव दिल्ली एन सी आर में आता है. उस वक़्त मैं अपना कॉलेज खत्म करके जयपुर से घर आ गया था. मैंने मेरे गाँव में ही एक कम्प्यूटर सेंटर खोल लिया था.

जब मैं सुबह अपने सेंटर पे जाता था, तो वहां पर एक लड़की अपने स्कूल बस का इंतजार करती रहती थी. मैं शुरू से ही बाहर पढ़ा था, तो मैं उस लड़की को नहीं जानता था. हम एक दूसरे को देखते और नजर मिलने पर मुस्कुरा देते थे.

ऐसा करते हुए दस दिन निकल गए थे. इसी दौरान उसके छोटे भाई का मेरे पास सेंटर पर आना शुरू हो गया था और मैं उन सबको जानने भी लग गया था. मुझे कोई काम होता, तो मैं सेंटर पर उसके भाई के भरोसे ही छोड़ कर चला जाता था.

लगभग बीस दिन बाद मेरे फ़ोन पर एक ‘हाय’ का एसएमएस आया. मैं उस नंबर को नहीं जानता था, मैंने ध्यान नहीं दिया. लेकिन जब उस नंबर से रोज ही एसएमएस आने लग गए, तो मैंने उस पर कॉल की. मुझे नहीं पता था कि ये नम्बर किसी लड़की का है. उधर से लड़की की आवाज आई तो मैंने उससे बात करना चालू कर दी.

उससे इस तरह बात करते हुए मुझे लगभग दो महीने हो गए. मैं समझ नहीं पा रहा था कि ये लड़की कौन है.

एक दिन मैं दोपहर में किसी काम से बाहर चला गया, तो मैं उसके भाई को अपने सेंटर पर छोड़ आया. थोड़ी देर बाद में काम खत्म करके वापस आया, तो वो वहां नहीं था. मैं सेंटर की चाबी लाने के लिए उसके घर चला गया. उस समय उसके घर पर सभी लोग थे. उसकी मम्मी, उसकी बहन. मैंने उससे चाबी ली और वापस आने लगा.

मैंने उससे कुछ नहीं कहा, हालांकि मुझे मन था कि उस लड़के से पूछ लूँ कि सेंटर क्यों खुला छोड़ आया.

तभी उसकी माँ ने मुझे रोक लिया और वो मुझे अपना फ़ोन दिखाने लगी. उसमें कुछ प्रॉब्लम आ रही थी. मैं फ़ोन देखने लगा, तो उसमें मुझे वो एसएमएस मिल गए, जो मुझे भेजे हुए थे. मुझे पता चला कि ये उसके ही घर का नम्बर है.

उसके बाद में मेरी उससे बातें होनी शुरू हो गईं. उसको भी पता लग गया था कि मैं जान गया हूँ कि मैं किससे बात कर रहा था.

फिर हम दोनों देर रात तक बात करते रहते थे. धीरे धीरे हमारी बातें प्यार में बदलने लगीं और फिर थोड़े दिन बाद हम दोनों सेक्स चैट करने लगे थे. अब हमें जब कभी भी मौका मिलता, तो वो मुझे घर बुला लेती. हम दोनों किस करते या गले मिलते. कभी कभी मैं उसकी चूचियां भी दबा देता था. वो बहुत गर्म माल थी. उसका शरीर बिल्कुल फिट और सेक्सी था. उसके मोटे मोटे चुचे और पीछे की तरफ निकली हुई गांड बहुत मस्त थी. वो एकदम चोदने लायक माल थी.

उस वक़्त वो बारहवीं क्लास में पढ़ती थी. अब हम दोनों चुदाई करने का मौका ढूंढ रहे थे कि कब हमें मौका मिले और कब हमको चुदाई का मजा मिले.

एक दिन उसके घर कोई नहीं था, दिन में सब खेत में काम करने गए हुए थे. उनका खेत दूर था और उसके घर वाले शाम को ही वापस आने वाले थे.

वो घर में अकेली थी, उसने मुझे फ़ोन करके बुला लिया. मैं थोड़ी देर में क्लास खत्म करके उसके घर गया, तब वो नहा कर निकली थी और अपने बाल सुखा रही थी. मेरे अन्दर आते ही उसने गेट बंद कर लिया. मैंने उसे जोर से अपनी बांहों में भर लिया और उसे गोद में उठा कर अन्दर कमरे में ले आया. मैंने उसको बेड पर पटक दिया, उसने मेरे गले में अपना हाथ डाल कर मुझे भी अपने ऊपर खींच लिया. मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसे किस करने लगा.

क्या मस्त मुलायम होंठ थे उसके … वो भी मेरे मुँह में अपनी जीभ डाल के किस करने लगी थी. यूं ही दस मिनट तक हम दोनों किस करते रहे. मैं साथ ही उसके मौसम्मी जैसे कड़क मम्मों को भी दबा रहा था. वो गर्म होती जा रही थी.

मैंने फिर उसकी टी शर्ट के अन्दर हाथ डाल दिया, तो पाया कि उसने अन्दर ब्रा नहीं पहन रखी थी. मैं उसकी टी-शर्ट के नीचे से हाथ डाल कर उसके नंगे मम्मों को दबाने लगा और किस करने लगा.

फिर मैंने उसकी टी-शर्ट को उतार दिया और उसके मम्मों को चूसने लगा. वो और ज्यादा गर्म होने लगी.

वो ‘स्सस्स … स्सीईईईई … आआह्ह..’ की आवाजें निकालने लगी.

उसने मेरी शर्ट के बटन खोल दिए और मेरी छाती पे हाथ फेरने लगी. अपने पैरों से वो मेरे लंड को दबाने लगी.

मैं भी गर्म हो गया था. इधर मेरा लंड भी पैन्ट के अन्दर खड़ा हो गया था और दर्द करने लगा था. उसने मेरी पैन्ट का हुक खोल कर मेरे लंड को बाहर निकाल दिया. मुझे बहुत आराम मिला. उसके नाजुक हाथों में मेरा लंड और जोर से ठुमके मारने लगा. वो मेरे लंड को हिला रही थी … जिससे मुझे बहुत अच्छा लग रहा था. मैं उसके मम्मों को चूसते हुए एक हाथ उसके पजामा के ऊपर ले गया, तो देखा कि वो गीला हो गया था.

मैं ऊपर से ही उसकी गर्म चूत को रगड़ने लगा, तो वो और ज्यादा गर्म होने लगी. मुझे अपने ऊपर खींचने लगी. मैं उसके ऊपर पूरा छा कर उसके मम्मों को चूस और दबा रहा था और उसे किस कर रहा था. वो नीचे मेरे लंड के साथ खेल रही थी. फिर मैंने उसका पजामा भी उतार दिया. नीचे उसने पिंक कलर की पैंटी पहन रखी थी, जो कि उसकी चूत के रस से बिल्कुल गीली हो गई थी.

मैं अपना चेहरा उसकी दोनों पैरों के बीच चूत की जगह ले आया और उसकी जांघों को चूमते हुए नई ताजा चूत की खुशबू लेने लगा. मैंने चूत को सूंघते हुए पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर अपने होंठ रख दिए और उसके नमकीन और स्वादिष्ट चूत रस का मजा लेने लगा. उसकी चूत का बहुत ही मादक करने वाला रस था. उसकी खुशबू भी बहुत मादक थी.

फिर मैंने उसकी पैंटी निकालने के लिए उसमें अपनी उंगलिया फंसाईं, तो उसने अपनी गांड को ऊपर उठा कर पैंटी को निकल जाने में मेरी मदद की. मैंने उसकी पैंटी को एक झटके में निकाल कर फ़ेंक दिया. अब मैं उसकी कुंवारी चूत को चाटने लगा … बिल्कुल साफ गुलाबी चूत थी उसकी … एक भी बाल नहीं था.

मैंने उसकी तरफ देखा तो वो हंस दी. उसने मुस्कुरा कर मुझे बताया कि आज अभी नहाते वक़्त ही मैंने बाल साफ कर लिए थे. मुझे पता था कि तुमको साफ चूत पसंद है.

मैं चूत चाटने लगा. तो उसका हाथ मेरे सर पे आ गया और वो मेरे सर को अपनी चूत में दबाने लगी. वो अपनी गांड को हिला हिला कर मुझे अपनी चूत चटवाने लगी. मैं भी मस्ती से उसकी चूत चाट रहा था और अपनी जीभ उसकी चूत में अन्दर तक घुसा देता. उसकी चूत बहुत ज्यादा पानी छोड़ रही थी और वो बहुत तेज आवाज निकाल कर अपनी चूत चटवा रही थी.

कोई दो मिनट बाद ही वो अकड़ने लगी और मेरे बालों को पकड़ कर मेरा सर अपनी चूत में दबाने लगी. मैं समझ गया कि अब ये झड़ने वाली है. तभी वो झड़ गई, मैंने उसका सारा पानी चाट लिया और उसकी चूत चाट कर साफ कर दी.

वो निढाल हो गई थी, तो मैं उससे अलग हो गया. अब मैंने अपने कपड़े उतारे और अपना लंड उसके मुँह के आगे कर दिया.

वो लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाने लगी. मैंने उसे लंड चूसने को कहा, तो उसने मना कर दिया.

मैंने उससे दो तीन बार कहा, तो वो लंड चूसने लगी. लंड चुसाई से मेरा भी बुरा हाल हो रहा था, तो मैं उसके बालों को पीछे से पकड़ कर उसके मुँह को चोदने लगा. उसके मुँह की गर्मी में मेरा लंड पिघल गया. दो मिनट बाद ही मैं उसके मुँह में झड़ गया, वो मेरा सारा रस पी गई … क्योंकि मैंने उसके मुँह से लंड निकाला ही नहीं था, तो उसे मेरे लंड से निकला वीर्य पीना पड़ा.

झड़ने के बाद मैं उसके बगल में लेट गया और वो उठ कर बाथरूम में भाग गई. वो कुल्ला करके वापस आई और मेरे सीने पर सर रख के लेट गई.

कुछ देर बाद मैं फिर से उसके मम्मों को चूसने लगा. वो फिर से गर्म हो गई थी और मेरे लंड को हाथ में पकड़ कर हिलाने लगी.

मेरा लंड भी तुरंत खड़ा हो गया. अब वो मुझसे चोदने के लिए कहने लगी- अब बर्दाश्त नहीं होता … मेरी चूत में अपना लंड डाल दो.

मैंने उसकी चूत के नीचे तकिया लगा दिया, जिससे उसकी चूत और ऊपर की ओर उठ गई. मैं उसके ऊपर आ गया और उसकी चूत पर अपना लंड रगड़ने लगा. वो बेहद गर्म हो रही थी और चुदने को तड़प रही थी. उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था. वो खुद अपने हाथ से मेरा लंड पकड़ कर चूत में अन्दर डालने लगी. मैं समझ गया था कि अब इसकी चूत में खुजली बढ़ गई है और लंड डालना ही पड़ेगा.

मैं चूत में लंड डालने लगा. चूत पहले से पानी छोड़ कर बहुत चिकनी हो रही थी. मैंने थोड़ा सा दबाव डाला, तो मेरा लंड उसकी कुंवारी चूत में सैट हो गया. मैं धक्का मारने ही वाला था, तो उसने मुझे रोका और एक रुमाल अपनी चूत के नीचे लगा लिया.
फिर बोली- अब करो.

मैंने फिर से लंड सैट किया और हल्का सा धक्का मारा, तो लंड उसकी चूत में सैट हो गया. जिससे उसे दर्द होने लगा. मैं समझ गया था कि इसको चोदना इतना आसन नहीं होगा. इसकी चूत में आराम आराम से लंड डालना होगा.

मैं उसके ऊपर चढ़ गया और उसे किस करने लगा. मैंने उसके कुछ नार्मल होते ही धक्का दे मारा, तो मेरा आधा लंड उसकी चूत को चीरता हुआ अन्दर चला गया.
चुदने को मचल रही थी (Chudne Ko Machal Rhi Thi)
चुदने को मचल रही थी (Chudne Ko Machal Rhi Thi)
उसका दर्द से बड़ा बुरा हाल हो गया था. उसने दर्द के मारे चीखने की कोशिश की, लेकिन मैंने उसे होंठ बंद कर रखे थे … जिससे उसकी चीख ज्यादा जोर से नहीं आ पाई. मैं उसका ध्यान हटाने के लिए उसके मम्मों को हाथ से सहला रहा था और किस कर रहा था.

दर्द की वजह से उसकी आंखों में आंसू आ गए थे. मैंने उसे समझाया- एक बार दर्द होगा … फिर सब ठीक हो जाएगा. फिर जिन्दगी भर मजे ही मजे हैं.

थोड़ी देर में वो नार्मल होने लगी. मैंने अपना लंड धीरे से थोड़ा सा बाहर निकाल कर एक जोरदार धक्का मार दिया. इस बार मेरा पूरा लंड उसकी चूत में चला गया था और वो एक बार फिर दर्द से बिलबिला उठी थी. लेकिन मेरे समझाने की वजह से उसने अपने ऊपर कंट्रोल किया और अपने होंठों को भींच कर दर्द को सहन करने लगी.

थोड़ी देर में मैंने उसके मम्मों को सहलाया और चूसा तो उसको राहत मिली. तभी उसकी कमर में कुछ हलचल हुई, तो मैं समझ गया कि लौंडिया नार्मल हो गई है. अब मैंने धीरे धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए. शुरू में तो उसे थोड़ा दर्द हुआ, लेकिन बाद में उसे भी मजे आने लगे और वो जोर जोर से गांड उठाते हुए चुदवाने लगी.

थोड़ी देर ऐसे ही चोदने के बाद उसका पानी छूट गया और वो जोर जोर से ‘उम्म्ह… अहह… हय… याह…’ की आवाज करते हुए झड़ गई. वो मुझे रुकने के लिए कहने लगी, तो मैं रुक गया. मैंने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाल लिया. उसकी चूत और मेरे लंड पर खून लगा हुआ था और थोड़ा खून बाहर रुमाल पे भी लग गया था.

मेरे लंड बाहर निकलते ही उसकी चूत का रस और थोड़ा खून सा मिल कर बाहर बहने लगा. उसने रुमाल को साइड में रख दिया और बाथरूम में चली गई. एक मिनट बाद वो अपनी चूत अपनी साफ करके आ गई. मैं फिर से उसके ऊपर चढ़ गया और फिर उसे चोदने लगा.

वो फिर से गर्म होने लगी और अब वो नीचे से अपनी गांड हिला हिला कर चुदवाने लगी थी. कुछ देर बाद मैंने उसे घोड़ी बनने को कहा. वो झट से बन गई, तो उसे पीछे से लंड पेल कर चोदने लगा. चूंकि वो एक बार और झड़ चुकी थी.

अब मेरा भी लंड का पानी छूटने वाला था. मैंने उससे पूछा- कहां निकालूँ?
तो उसने कहा- पहली बार मेरी चूत में ही छोड़ो … मैं इसे महसूस करना चाहती हूँ.
मैं उसकी चूत में जोर से धक्के मारता हुआ झड़ने लगा. मेरे साथ साथ वो भी झड़ गई.

मैं ऐसे ही उसके ऊपर लेट गया और थोड़ी देर तक उसके ऊपर ही पड़ा रहा. फिर मेरा लंड बाहर निकल आया, तो उसके साथ उसका और मेरा रस भी उसकी चूत से बाहर निकलने लगा. उसकी हालत खराब हो गई थी, चूत भी सूज गई थी और उससे चला भी नहीं जा रहा था.

मैं उसे उठा कर बाथरूम में लेकर गया. वहां पर उसने मूत कर अपनी चूत की सफाई की और फिर मेरे लंड को भी साफ कर दिया.

फिर रूम में आकर समय देखा, तो हमें ये सब करते हुए 2 घंटे हो चुके थे.

हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहन लिए. मैं वहां से आने लगा, तो उसने मुझसे कहा कि उसे पेनकिलर गोली और गर्भ धारण को रोकने वाली गोली चाहिए.
मैंने कहा- ठीक है, मैं थोड़ी देर में ला दूंगा.

फिर मैं उसको किस करके वहां से निकल आया. मेरा आने का मन तो नहीं कर रहा था, लेकिन आना जरूरी था.

थोड़ी देर बाद मैंने उसे गोलियां दीं और चला आया.

अब जब भी हमें मौका मिलता है, हम दोनों चुदाई कर लेते हैं.

अगली कहानी में मैं बताऊंगा कि कैसे मैंने उसकी गांड मारी. मेरी ये कहानी आपको कैसी लगी, जरूर बताइए. ये मेरी सच्ची सेक्स कहानी है, उम्मीद है कि आपको पसंद आई होगी. अपनी राय जरूर दें.
चुदने को मचल रही थी (Chudne Ko Machal Rhi Thi) चुदने को मचल रही थी (Chudne Ko Machal Rhi Thi) Reviewed by Priyanka Sharma on 1:06 PM Rating: 5

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