चुदने की हवस में जवानी पर काबू नहीं रहा (Chudne Ki Hawas Me Jawani Par Kabu Nahi Rha)

चुदने की हवस में जवानी पर काबू नहीं रहा
(Chudne Ki Hawas Me Jawani Par Kabu Nahi Rha)

मैं और अक्षरा एक ही स्कूल में पढ़ते थे और हमारा घर भी बिल्कुल आमने सामने ही हैं इसलिए अक्षरा मेरी बहुत अच्छी सहेली बन गई और हम लोगों ने कॉलेज में भी साथ में एडमिशन लिया। कॉलेज में एडमिशन लेने के साथ ही हम दोनों की दोस्ती से हमारी क्लास वाकिफ थी लेकिन मेरे लिए एक मुसीबत का सबक उस वक्त बना जब मेरा दिल रजत पर आ गया। 

रजत पर मैं पूरी तरीके से फिदा हो चुकी थी और मुझे इस बारे में पता नहीं था कि अक्षरा को भी रजत पसंद है। हालांकि हम दोनों ने कभी इस बारे में बात नहीं की थी लेकिन जब मुझे यह बात पता चली तो मैंने अक्षरा के लिए रजत से बात बंद कर दी मैं रजत से दूर रहने लगी शायद मैं अपने रिश्ते को कोई नाम नहीं दे पाई लेकिन अक्षरा और रजत का रिश्ता अब आगे बढ़ने लगा।

वह दोनों एक दूसरे को प्यार करने लगे और मैं अक्षरा और रजत की जिंदगी से दूर होने लगी हमारी कॉलेज की पढ़ाई खत्म होने के साथ ही जैसे मेरा अक्षरा से भी अब कोई संपर्क नहीं था। 

हालांकि वह मेरे पड़ोस में ही रहती है लेकिन उसके बावजूद भी मैं अक्षरा से कम ही मिला करती थी मैं एक कॉर्पोरेट कंपनी में जॉब करने लगी और अक्षरा जब भी मुझे मिलती तो उसके साथ बस मैं एक औपचारिकता के तौर पर ही मिलती थी और उससे अधिक शायद अक्षरा से मैं बात नहीं कर पाती थी। 

अक्षरा और रजत का रिश्ता अभी चल रहा था और उन दोनों ने जल्द ही शादी करने के बारे में सोच लिया था। एक दिन अक्षरा मुझे कहने लगी कि रजत और मैंने शादी करने का फैसला किया है तो मैंने अक्षरा को बधाई दी और कहा आखिरकार तुम अपने प्यार को पाने में कामयाब रही। 

अक्षरा मुझे कहने लगी कि सुनैना तुम मुझसे बहुत कम मिलती हो मैंने अक्षरा को कहा कि तुम्हें तो पता ही है ना कि मैं अपने ऑफिस के काम से कितनी बिजी रहती हूं और मुझे अपने लिए भी समय नहीं मिल पाता। अक्षरा कहने लगी कि थोड़ा बहुत समय तो तुम्हें निकाल लेना चाहिए लेकिन मैं शायद जानबूझकर अक्षरा और रजत से मिलना ही नहीं चाहती थी मैं अपनी जिंदगी में ही खुश थी और अपने काम से मैं बहुत खुश थी।

इसी बीच अक्षरा और रजत की सगाई हो गई दोनों की सगाई की बधाइयां मैंने उन दोनों को फोन ही दे दी थी। अक्षरा ने मुझे अपनी सगाई में इनवाइट भी किया था लेकिन मैं उसकी सगाई के प्रोग्राम में नहीं गई अक्षरा मुझसे नाराज थी लेकिन मैंने उसे समझाया और कहा देखो अक्षरा मैं अपने ऑफिस की मीटिंग के चलते तुम्हारी सगाई में नहीं आ पाई। 

अक्षरा कहने लगी कि सुनैना तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो और मैं तुम्हारा इंतजार करती रही मुझे लगा कि तुम जरूर आओगी लेकिन तुम आई ही नहीं तो मुझे इस बात से बहुत बुरा लगा। मैंने अक्षरा को कहा देखो अक्षरा मुझे मालूम है कि मैं तुम्हारी बहुत अच्छी सहेली हूं लेकिन अब हर जगह आ पाना तो संभव नहीं होता है तुम इस बात को तो समझती हो ना। 

अक्षरा कहने लगी कि चलो अब यह बात तुम छोड़ो मैं सोच रही थी कि एक दिन हम लोग मिलते हैं मैं भी अक्षरा की बात को शायद नहीं टाल पाई अक्षरा ने उस दिन रजत को भी मिलने के लिए बुला लिया और हम तीनों काफी समय बाद साथ में मिले। रजत मुझसे पूछने लगा तुम्हारी जॉब कैसी चल रही है तो मैंने रजत को अपनी जॉब के बारे में बताया और रजत की जॉब के बारे में मैंने भी उससे पूछा। 

हम लोग काफी देर तक एक दूसरे से बात करते रहे लेकिन मेरे दिल में शायद अभी भी रजत के लिए वही प्यार और वही इज्जत थी परंतु अब वह मेरी सबसे अच्छी सहेली अक्षरा का होने वाला पति बनने वाला था और उन दोनों की शादी होने वाली थी। जल्द ही अक्षरा और रजत की शादी हो गई जब उन दोनों की शादी हुई तो मैं भी अक्षरा की शादी में गई थी मैंने उन दोनों को शादी की बधाई दी। 

उन दोनों ने अपना नया जीवन शुरू कर लिया मैं भी अपने जीवन में बिजी थी और मैं शायद किसी को भी समय नहीं दे पा रही थी। जब अक्षरा मुझे काफी समय बाद मिली तो मुझे उससे मिलकर अच्छा लगा मैंने अक्षरा से कहा रजत तुम्हारा ध्यान तो रखता है ना तो अक्षरा कहने लगी हां रजत मेरा बहुत ध्यान रखता है और वह मुझे बहुत प्यार करता है। मैंने अक्षरा को कहा चलो यह तो बहुत खुशी की बात है कि रजत तुम्हारा बहुत ध्यान रखता है और तुम्हें वह प्यार भी करता है।

मेरी जिंदगी भी अब आगे बढ़ती जा रही थी और मुझे भी शायद इस बात का अंदाजा नहीं था कि मेरा सूना जीवन अब जल्दी से भरने वाला है क्योंकि मेरी जिंदगी में जब अंकित आने वाला था। जब अंकित मेरी जिंदगी में आया तो अंकित के साथ मैं अच्छा समय बिताती हम दोनों एक दूसरे को अच्छे से समझने लगे थे। 

हालांकि हम दोनों के बीच दोस्ती ही थी दोस्ती से आगे मैंने इस रिश्ते को कोई नाम नहीं दिया था लेकिन अंकित के साथ में समय बिताना मुझे अच्छा लगता और अंकित पर मैं पूरा भरोसा भी करती थी अंकित भी मेरे भरोसे पर खरा उतरा और वहीं दूसरी ओर अक्षरा और रजत की जिंदगी भी अच्छे से चल रही थी। 

जब भी अक्षरा मुझे मिलती तो हमेशा ही खुश नजर आती थी मैं अक्षरा को देख कर भी खुश थी लेकिन मैंने अक्षरा को अपने और अंकित के बारे में कुछ नही बताया था। 

एक दिन ना जाने अक्षरा ने अंकित और मुझे कैसे साथ में देख लिया और जब उसने मुझे फोन कर के यह सब पूछा तो मैंने अक्षरा को सारी बात बता दी। अक्षरा कहने लगी कि तुमने मुझे इस बारे में बताया भी नहीं, तो मैंने अक्षरा को कहा हम दोनों के बीच ऐसा कुछ भी नहीं है। हालांकि अंकित मुझे पसंद है लेकिन मैंने उसके बारे में कभी कुछ सोचा नहीं है अक्षरा को भी अब इस बात की जानकारी हो चुकी थी।

अंकित और मैं अक्सर एक दूसरे से मुलाकात करते रहते थे अक्षरा भी मुझसे इस बारे में पूछने लगी तो मैंने अक्षरा को इतना ही बताया कि सिर्फ हम लोग अच्छे दोस्त हैं। अंकित ने एक दिन मेरे लिए अपने घर पर छोटी सी पार्टी रखी है मैं जब अंकित के घर पर गई तो मैंने अंकित को कहा यहां पर तो कोई भी नहीं है? अंकित कहने लगा आज मैं तुम्हारे साथ तुम्हारा जन्मदिन सेलिब्रेट करना चाहता हूं। 

मैंने अंकित को कहा लेकिन क्या हम दोनों ही जन्मदिन सेलिब्रेट करेंगे। अंकित कहने लगा हमे और किसी की जरूरत थोड़ी है अंकित और में अच्छे दोस्त हैं इसलिए मै अंकित पर पूरा भरोसा करती लेकिन उस दिन मैं ना तो अपने आपको रोक पाई और ना ही अंकित अपनी जवानी पर काबू कर पाया। 

अंकित ने जब मेरे होंठों को चूमना शुरू किया मैं  भी अपने आपको रोक ना सकी और अंकित के साथ में किस करने लगी। मुझे अंकित को किस करना अच्छा लगता और अंकित को भी बहुत अच्छा लग रहा था। 

हम दोनों के अंदर की गर्मी इतनी ज्यादा बढ़ने लगी थी कि अंकित ने जैसे ही अपने लंड को बाहर निकाला तो मैं उसके लंड को अपने हाथ में लेकर हिलाने लगी मैं जिस प्रकार से उसके लंड को अपने हाथ में लेकर हिला रही थी उससे मुझे मजा आ रहा था और अंकित को भी बड़ा अच्छा लग रहा था। 

अंकित ने बहुत देर तक मेरे स्तनों का रसपान किया मुझे अंकित के सामने नंगे खडे होने मे शर्म नहीं आ रही थी अंकित के लंड को मैंने अपने मुंह के अंदर लिया और उसे बड़े ही अच्छे तरीके से मैं सकिंग करने लगी, थोड़ी ही देर बाद मैंने अंकित का लंड को अपने गले के अंदर तक उतार लिया था मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जिस प्रकार से मे अंकित के लंड को अपने गले के अंदर तक ले रही थी अंकित ने जब अपने लंड को मेरी चूत पर रगडना शुरू किया तो मेरी चूत से पानी बाहर की तरफ से निकलने लगा।

मैं अपने आपको बिल्कुल रोक नहीं पा रही थी मैंने अंकित को कहा तुम मेरी चूत के अंदर अपने लंड को घुसा दो लेकिन अंकित कहने लगा मैं तुम्हारी चूत के अंदर इतनी आसानी से अपने लंड को कैसे घुसा दूं तुम्हारी चूत का मुझे रसपान तो करने दो। 
चुदने की हवस में जवानी पर काबू नहीं रहा (Chudne Ki Hawas Me Jawani Par Kabu Nahi Rha)
चुदने की हवस में जवानी पर काबू नहीं रहा (Chudne Ki Hawas Me Jawani Par Kabu Nahi Rha)
मैने अपने दोनों पैरों को खोलो और अंकित मेरी चूत चाट रहा था मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था अंकित ने मेरी चूत बहुत देर तक चाटी जब मेरी चूत से गर्म पानी बाहर निकल आया तो उस ने मेरे दोनों पैरों को खोल कर अपने लंड को मेरी चूत पर सटाया तो मैं चिल्लाने लगी और धीरे धीरे अंकित ने अपने लंड को मेरी चूत के अंदर घुसाया और कहने लगा सुनैना तुम्हारी चूत के अंदर मेरा पूरा लंड जा चुका है। 

मैंने अंकित को कसकर पकड़ लिया और कहा हां तुम्हारा पूरा लंड मेरी चूत के अंदर जा चुका है वह मुझे धक्के देने लगा मुझे दर्द हो रहा था।

मैं अपने पैरों को खोल रही थी थोड़ी देर बाद मेरी चूत से कुछ ज्यादा ही गर्म पानी निकल रहा था और मेरी चूत पूरी तरीके से चिकनी हो चुकी थी मैं अपने आपको रोक नहीं पा रही थी मैं अंकित को अपने पैरों के बीच में जकडने लगी, मेरी चूत से कुछ ज्यादा ही खून बाहर की तरफ को निकल रहा था। 

अंकित के साथ शारीरिक संबंध बनाकर मुझे अच्छा लगा जिस प्रकार से अंकित मेरे साथ संभोग कर रहा था उससे मैं बहुत ही ज्यादा खुश हो गई थी और अंकित भी बहुत खुश था। 

उसने मेरी चूतड़ों को पकड़ा मुझे घोडी बनाते हुए मेरी चूत के अंदर धीरे से अपने लंड को प्रवेश करवाया तो उसका मोटा लंड मेरी चूत के अंदर जा चुका था अब वह मुझे लगातार तेजी से धक्के मार रहा था और उसे बहुत मजा आ रहा था। 

जब वह मुझे धक्के मारता तो मेरे मुंह से चीख निकल जाती वह मुझे कहता मुझे तुम्हारी टाइट चूत मारने में मजा आ रहा है और तुम्हारी चूत से लगातार पानी और खून निकलता जा रहा है। 

मैं उसे अपनी चूतड़ों को मिला रही थी तो मेरे चूतड़ों से आवाज निकल रही थी अंकित ने मेरी चूत का भोसडा बना कर रख दिया था और पहली ही बार में मैं सेक्स का इतना अच्छा मजा ले पाई मैंने कभी कल्पना नहीं की थी लेकिन मेरी इच्छा पूरी हो चुकी थी और अंकित का वीर्य भी मेरी चूत के अंदर प्रवेश हो चुका था। मैंने उसे गले लगा लिया मेरी चूत से उसका वीर्य टपक रहा था।
चुदने की हवस में जवानी पर काबू नहीं रहा (Chudne Ki Hawas Me Jawani Par Kabu Nahi Rha) चुदने की हवस में जवानी पर काबू नहीं रहा (Chudne Ki Hawas Me Jawani Par Kabu Nahi Rha) Reviewed by Priyanka Sharma on 11:09 PM Rating: 5

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