चूत से मन नहीं भरा तो गाँड़ चोद दी (Choot Se Man Nhi Bhra To Gaand Chod Di)

चूत से मन नहीं भरा तो गाँड़ चोद दी
(Choot Se Man Nhi Bhra To Gaand Chod Di)

दोस्तो, मैं मोनिका मान उर्फ़ चुलबुली मोनी हिमाचल की रहने वाली हूँ। मेरी चूचियाँ 32 कमर 28 कूल्हे 36 के आकार के हैं। मैं ज्यादातर जीन्स और शर्ट पहनती हूँ। मेरा रंग गोरा और लड़कों की तरह छोटे बाल रखती हूँ। मेरे घर में मेरे पापा, माँ, भाई, मेरी बड़ी बहन निकिता और मैं। मैं पाठकों की इच्छा अनुसार आज जो घटना बताने जा रही हूँ वो मेरी और मेरे बुआ जी के लड़के संजय की है। इस कहानी में मेरी सहेली नवप्रीत भी हमारे साथ है.

मेरी बुआ जी का लड़का मेरे साथ ही पढ़ता है और सरकारी नौकरी की तैयारी भी कर रहा है। नवप्रीत मेरी सबसे अच्छी सहेली है जो मेरे साथ मेरी ही कक्षा में पढ़ती है. मैं और नवप्रीत पहले इक्कठी हॉस्टल में रहती थी।

मैं मामा की लड़की की शादी के बाद घर आ गयी। कुछ दिन घर रुकने के बाद मेरी क्लास शुरू हो गयी तो मुझे वापस कोलेज आना पड़ा। मैंने संजय भाई ने और नवप्रीत ने हॉस्टल को छोड़ कर घरवालो से बात करके अलग कमरा ले लिया। या यूँ कह लो कि पूरा मकान ही ले लिया क्योंकि मकान मालिक और उनका परिवार बाहर रहते थे।

उनकी छोटी लड़की कामना ही उस मकान में रहती थी। कामना दिखने में एकदम सुंदर और मेरी तरह बड़ी चूचियों की मालकिन है. कामना भी जो हमारे कॉलेज के साथ वाले कॉलेज में पढ़ती थी इसलिए उन्होंने पूरा मकान ही हमें दे दिया था ताकि साफ सफाई होती रहे। हमें ऊपर का पोर्शन मिला था, नीचे कामना खुद रहती थी।

मैं और नवप्रीत दोनों मिलकर खाना बना लेती थी। जब मैं घर जाती तो नवप्रीत संजय भाई को खाना बना के देती। नवप्रीत को मेरे और संजय के बारे में पता था लेकिन उसको यह नहीं पता था कि संजय मेरी बुआ का लड़का है।

नवप्रीत को मैं प्रीत नाम से बुलाती थी. प्रीत संजय को भैया बुलाती थी और कभी कभी मजाक में मुझे भाभी बोल देती। हम तीनों आपस में कोई मनमुटाव नहीं रखते थे।
एक दिन खाना खाने के बाद प्रीत ने खुद ही मुझसे कहा कि आप भैया के साथ सो जाना, मैं दूसरे रूम में सो जाऊँगी।
मुझे अच्छा नहीं लगा तो मैंने उनको मना कर दिया कि आप यहीं सोना।

तो प्रीत ने कहा- ठीक है, मैं 10 बजे रूम में आ जाऊँगी, तब तक आपको जो करना है, कर लेना या मुझे कॉल कर देना, मैं आ जाऊँगी।

प्रीत हर रोज 8 से 10 बजे तक बगल वाले रूम में चली जाती। मैं और संजय इन 2 घण्टों का पूरा फायदा उठाते। संजय भाई भी पूरे जोश में मुझे चोदते।

प्रीत किसी काम से तीन दिन के लिए घर जा रही थी। मैंने कॉलेज की छुट्टी कर ली और उसको सुबह बस स्टॉप पर छोड़ कर आ गयी। इन तीन दिनों में मैं खुल कर मजा लेना चाहती थी।

संजय जब दो बजे दोपहर को कॉलेज से आये तो मैंने खाना बनाया. तब तक भाई नहाने के लिए बाथरूम में चले गए। बाथरूम से निकले तो भाई ने सिर्फ तौलिया लपेटा हुआ था। भाई ने खाना खाया और बेड पर लेट गए और टीवी देखने लगे।

मैं भी बाथरूम में चली गयी और नहा कर तौलिया लपेट कर आ गयी। मैंने कमरे को अंदर से बंद कर दिया और अंदर आते ही तौलिया उतार कर बेड पर टांगें खोल कर लेट गयी ताकि कूलर की ठंडी ठंडी हवा चूत को भी खिला सकूं।

मुझे ऐसे देख कर संजय ने अपना तौलिया हटा दिया।
संजय का लण्ड सो रहा था।

पता नहीं ऐसी क्या खास बात थी संजय के लण्ड में … जब भी देखती तो चूसने का मन होता था। संजय मुझसे हर बार कहता था कि बिल्कुल नंगी होकर चल के दिखाओ। मुझे शर्म आ जाती थी। संजय ने मुझसे पीने के लिए पानी माँगा तो मैं समझ गयी थी कि पानी क्यों माँगा है।

मैं उठ कर पानी लेने गयी तो संजय मेरे कूल्हों को देख रहा था।
मैंने भी जानबूझ कर कूल्हों को मटका दिया।

मुझे जब भी किसी लड़के को अपनी तरफ आकर्षित करना होता है तो मैं या तो चूतड़ों को मटकती हूँ या फिर चूचियों को हिला देती हूँ। आज भी मैंने वही किया।

संजय ने पानी पीते ही मुझे बेड पे पटक दिया और मेरे चूतड़ों में लण्ड रगड़ने लगे और पोर्न फिल्मों की तरह मेरे चूतड़ों पर हल्की हल्की चपत लगाने लगे।

दो मिनट में ही उनका लण्ड खड़ा हो गया और मुझे सीधी लिटा कर मेरी टाँगों को मोड़ कर मेरी चूचियों से चिपका दी और लण्ड अंदर डालने लगे।
लेकिन मुझे लण्ड चूसना था ताकि लण्ड अच्छे से गीला हो जाये।

मैंने जब संजय को कहा कि लण्ड को गीला कर लो तो उन्होंने 69 की पोजीशन में आकर लण्ड मेरे मुख में डाल दिया और खुद मेरी चूत को चाटने लगे।
जितना हो सकता था उससे कहीं ज्यादा लण्ड को मैं अपने मुख में ले लेती। इससे उनको भी जोश ज्यादा होता तो वो मेरी चूत में जीभ डाल देते।

5 मिनट बाद मेरे ऊपर से हट कर लेट गए और मुझे अपने ऊपर आने को बोला। मैं भाई की तरफ मुख करके उनके लण्ड पर बैठ गयी और बैठते ही चूतड़ों को गोल गोल घुमा दिया।
भाई के मुख से सिसकारी निकल गयी।

फिर मैंने अपने हाथों को पीछे ले जाकर उनके घुटनों पर रख दिए और चूत को लण्ड पर पटकने लगी। मेरी चुचियाँ जोर जोर से ऊपर नीचे होने लगी।
10 मिनट बाद मैं भाई के ऊपर लेट गयी और पलट गयी ताकि अब भाई ऊपर और मैं नीचे आ सकूं।
चूत से मन नहीं भरा तो गाँड़ चोद दी (Choot Se Man Nhi Bhra To Gaand Chod Di)
चूत से मन नहीं भरा तो गाँड़ चोद दी (Choot Se Man Nhi Bhra To Gaand Chod Di)
भाई के मेरे ऊपर आते ही मैंने नीचे से घुटने मोड़ लिये ताकि मेरी चूत उभर कर सामने आ जाये और लण्ड को पूरा अंदर ले सकूँ. और मैं चुदाई का आनंद लेने लगी।

कोई पन्द्रह मिनट बाद मैं झड़ गयी। भाई ने लण्ड चूत से बाहर निकाल लिया और मुझे घोड़ी बनने को कहा।
मैं घोड़ी बन गयी और पीछे से मेरी गांड के छेद पे थूक डाल कर लण्ड को रगड़ने लगे। अचानक से भाई ने अपने लण्ड का सुपारा मेरी गांड के अंदर डाल दिया।

मुझे बहुत तेज दर्द हुआ लेकिन मैंने कुछ नहीं कहा, बस होंठों को बन्द कर लिया ताकि दर्द होने पर चीख न निकले।

तभी पीछे से भैया ने दूसरा झटका मारा। मैंने जैसे तैसे सहन कर लिया। मुझे ऐसा लगा के कोई लोहे की गर्म छड़ को मेरी गांड में घुसा रहा है।

अभी भाई ने थोड़ा सा लण्ड बाहर खींचा तो मैं समझ गयी कि अभी वार होने वाला है. तो मैंने बेड को जोर से पकड़ कर और दांतों को भींच कर उनके धक्के का जवाब देते हुए अपने चूतड़ों को भाई के लण्ड पर धकेल दिया। पूरा का पूरा तीन इंच मोटा लण्ड मेरी गांड के छोटे से छेद को तहस नहस करता हुआ गांड में घुस गया।

मुझसे दर्द सहन नहीं हो पा रहा था; मेरी आँखों से आंसू निकल रहे थे. लेकिन संजय की खुशी के लिए मैंने कुछ नहीं कहा और अपने चेहरे को बिस्तर में छुपा लिया।
मुझे दर्द हो रहा था तो मैंने जल्दी से लण्ड बाहर निकलवाने के चक्कर में गांड को हिला दिया।

भाई से सोचा कि मुझे दर्द नहीं हो रहा. अब वो मुझे चोदने लगे। मेरी गांड ज्यादा टाइट होने की वजह से 5 मिनट में ही भाई ने लण्ड से गर्म गर्म वीर्य की धार मेरी गांड में छोड़ दी और मेरे ऊपर लेट गए.
मैं भी अब भाई के वजन से आगे की तरफ बेड पर मुंह के बल लेट गयी।

भाई के लण्ड को अपने चूतड़ों में लिए हुए 10 मिनट तक आराम किया। जैसे जैसे भाई का लण्ड सिकुड़ता गया, मुझे आराम मिलता गया।

मुझमें उठने की हिम्मत नहीं थी। मैं जब उठने लगी तो मुझसे उठा नहीं गया। संजय भाई ने मुझे सहारा देकर उठाया और बाथरूम में ले गए। मैं और भाई दोबारा नहाकर बैडरूम में आकर नंगे ही लेट गए और बाते करते रहे।

3 दिन हमने पूरा खुलकर मज़ा किया और मैंने दोबारा अपनी गांड में कभी भी लण्ड नहीं लिया।

तीन दिन बाद प्रीत ने सुबह मुझे कॉल किया कि वह दोपहर 1 बजे तक आ जायेगी।
मैंने सारा काम खत्म किया और भाई के साथ चुदाई की और हम दोनों भाई बहन चुदाई के बाद नंगे ही लेट गए।

मैं भाई के ऊपर एक टांग डाल कर उनसे चिपक कर बाते करने लगी, मेरी एक चूची भाई की छाती पर थी। पता नहीं कब हमारी आँख लग गयी।

हमारे कमरे का एक दरवाजा दूसरे कमरे में भी खुलता है, मैंने वो बन्द नहीं किया था।

तभी प्रीत आई और उसने चुपचाप मेरी टांग को हिलाया तो मैं जाग गयी। उस दिन प्रीत ने हम दोनों को बिल्कुल नंगा देख लिया।

मैंने जब भाई की तरफ देखा तो वो भी बिल्कुल नंगे ही सो रहे थे. मैं प्रीत के साथ दूसरे कमरे में चली गयी.

जाते वक्त प्रीत ने भाई के लण्ड को छूकर देखा और मुझसे कहा- आपकी तो बहुत अच्छी किस्मत है।
प्रीत को सब पता था कि हम चुदाई करते हैं।

मैं कभी कभी प्रीत की चूचियों को दबा देती, कभी चूतड़ों पर अपनी चूत से धक्का मार देती।

हम मजाक करती रहती थी।

मैंने अपने सहेली से पूछा- संजय का लण्ड चाहिए क्या प्रीत?
प्रीत ने कहा- आप अपने बॉयफ्रेंड को क्यों शेयर करोगी मेरे साथ? और मेरी किस्मत में नहीं है संजय जैसा लड़का।
मैंने कहा- मैं संजय से बात करुंगी।

कोई पांच या छ दिन बाद भाई को सरकारी नौकरी मिल गयी। मैंने उनसे प्रीत को चोदने के बारे में बात की तो उन्होंने हाँ कर दी. प्रीत के साथ भी मैंने उनकी बात करवा दी।

लेकिन 2 दिन बाद भाई को घर जाना था और अपनी जरूरत के कागजात बनवाने थे। तो भाई ने कहा- मैं 20 दिन बाद एक सप्ताह के लिए आऊंगा, तब एन्जॉय करेंगे।
दो दिन बाद भाई चले गए।

और जब वापस आये तब प्रीत की चुदाई की वो अगली कहानी में बताउंगी।
चूत से मन नहीं भरा तो गाँड़ चोद दी (Choot Se Man Nhi Bhra To Gaand Chod Di) चूत से मन नहीं भरा तो गाँड़ चोद दी (Choot Se Man Nhi Bhra To Gaand Chod Di) Reviewed by Priyanka Sharma on 12:30 PM Rating: 5

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