भाभी को चोदने के लिए दबोच लिया (Bhabhi Ko Chodne Ke Liye Daboch Liya)

भाभी को चोदने के लिए दबोच लिया
(Bhabhi Ko Chodne Ke Liye Daboch Liya)

अक्षित मुझसे मिलने के लिए घर पर आता है जब वह घर पर आता है तो उस वक्त मैं घर पर ही था अक्षित मुझे कहने लगा राजेश मुझे तो बहुत डर लग रहा है। मैंने उसे कहा लेकिन तुम्हें किस चीज का डर लग रहा है तो वह कहने लगा कि यार मैं एग्जाम की तैयारी कर ही नहीं पाया हूं और मुझे लग रहा है कि कहीं मेरा एग्जाम खराब ना हो जाए। 

मैंने अक्षित को कहा तुम घबराओ मत सब ठीक हो जाएगा तुम आराम से बैठकर अपनी पढ़ाई में ध्यान दो अक्षित मुझे कहने लगा कुछ दिनों से घर का माहौल ठीक नहीं है इसलिए मेरा मन पढ़ाई में लग ही नहीं पा रहा है। मैंने अक्षित को कहा तो तुम मेरे घर पर आ जाया करो अक्षित कहने लगा हां राजेश तुम ठीक कह रहे हो लगता है मुझे तुम्हारे घर पर ही पढ़ने के लिए आना पड़ेगा। 

जब अक्षित ने मुझे यह बात कही तो मैंने अक्षित को कहा ठीक है तुम घर पर ही आ जाना अक्षित कहने लगा अभी मैं चलता हूं मैं तुमसे मिलने के लिए कल आता हूं।

अक्षित अपने घर चला गया हमारे एग्जाम कुछ दिनों बाद ही शुरू होने वाले थे अक्षित अगले दिन मेरे घर पर पढ़ने के लिए आ गया हम दोनों ने साथ में पढ़ाई की और अब अक्षित रोज मेरे घर पर ही पढ़ने के लिए आ जाया करता था। 

हम दोनों के एग्जाम भी अच्छे हुए और अक्षित और मैं अपने एग्जाम खत्म कर के घर पर ही थे अक्षित मुझे कहने लगा कि राजेश हम लोग कहीं घूमने चलते हैं। मैंने अक्षित को कहा अक्षित मेरे पास तो पैसे नहीं है अक्षित कहने लगा मैंने कुछ पैसे जमा किए थे यदि तुम कहो तो हम लोग क्या घूमने के लिए चलें मैंने उसे कहा ठीक है। हम दोनों ने अब घूमने का प्लान बना लिया मैंने अक्षित को कहा लेकिन हम लोग घूमने के लिए कहां जाएंगे तो अक्षित कहने लगा मैं सोच रहा हूं कि हम लोग मेरे चाचा जी के घर चंडीगढ़ चलें। 

मैंने अक्षित को कहा ठीक है हम लोग चंडीगढ़ चलते हैं हम लोग कुछ दिनों के लिए चंडीगढ़ चले गए क्योंकि हमारे एग्जाम खत्म हो चुके थे और हम लोग जब चंडीगढ़ गए तो अक्षित के चाचा जी से मैं पहली बार ही मिला। हम लोग उनके घर पर ही रहे और अक्षित के चाचा जी का लड़का जो कि हम से उम्र में दो वर्ष छोटा है लेकिन वह बहुत ही अच्छा है उसने हमें चंडीगढ़ में घुमाया। 

हम लोग चंडीगढ़ कुछ दिन रूके उसके बाद हम लोग अहमदाबाद वापस लौट आए हम लोग अब अपने रिजल्ट का इंतजार कर रहे थे हम लोगों का रिजल्ट कुछ दिनों बाद आने वाला था।

अक्षित का मुझे फोन आया और कहने लगा यार मुझे बहुत डर लग रहा है मैंने अक्षित को कहा तुम डरो मत, अक्षित कहने लगा मुझे तो लग रहा है कि कहीं मैं इस बार फेल ना हो जाऊं। मैंने अक्षित को कहा तुम ऐसा क्यों सोच रहे हो तुम अच्छा सोचोगे तो अच्छा ही होगा, जब हम लोगों का रिजल्ट आया तो अक्षित भी पास हो चुका था। 

हालांकि अक्षित को बहुत डर लग रहा था और वह बहुत घबराया हुआ था लेकिन आखिरकार हम लोग पास हो गए। जब हम लोग पास हो गए तो अक्षित मुझे कहने लगा राजेश तुमने आगे क्या सोचा है मैंने अक्षित को कहा मैं तो प्रशासनिक परीक्षाओं की तैयारी कर रहा हूं। 

अक्षित कहने लगा मेरी तो कुछ समझ में नहीं आ रहा है मैंने अक्षित को कहा यदि तुम भी मेरे साथ तैयारी करो तो मुझे भी मदद मिल जाएगी। हम दोनों प्रशासनिक परीक्षा की तैयारी करने लगे और हम लोग पूरी मेहनत के साथ तैयारी कर रहे थे अक्षित और मैं चाहते थे कि हम लोग किसी अच्छी सरकारी सेवा में निकल जाएं। हम दोनों ने पूरी मेहनत की और आखिरकार वह दिन भी आ गया जब हम लोग अपनी मेहनत को रूप दे पाए हम दोनों का ही सिलेक्शन हो चुका था। 

अक्षित और मैं बहुत खुश थे और हमारे परिवार वाले भी बहुत खुश थे अक्षित मुझे कहने लगा राजेश यह सब तुम्हारी वजह से ही हुआ है यदि तुम मुझे सही रास्ता नहीं दिखाते तो शायद मैं इतनी मेहनत कर ही नहीं पाता। मैंने अक्षित को कहा अक्षित इसमें मेरी कोई मेहनत नहीं है तुमने भी तो बहुत मेहनत की है उसी का फल तुम्हें मिला है। 

अक्षित हमेशा से ही मेरा एहसान मानता था और वह मुझे अपना सच्चा दोस्त मानता था अब हम दोनों की पोस्टिंग अलग अलग राज्यों में हो चुकी थी मैं बंगाल में अपनी सेवाएं जारी रख रहा था और अक्षित झारखंड में चला गया था।

हम दोनों की फोन पर अक्सर बातें होती रहती थी मैं जब बंगाल में गया तो मुझे अपने घर की बहुत याद आती क्योंकि अपने घर से पहली बार ही मैं इतनी दूर काम करने के लिए गया था लेकिन धीरे-धीरे मुझे आदत पढ़ने लगी थी। 

कुछ दिनों के लिए मैंने छुट्टी ली तो मैं अपने घर चला आया जब मैं अपने घर पर आया तो मैंने अक्षित को कहा क्या तुम भी घर आने वाले हो तो अक्षित कहने लगा यार मुझे तो छुट्टी नहीं मिल पा रही है लेकिन मैं तुमसे मिलूंगा जरूर। 

अक्षित और मेरी फोन पर बातें होती रहती थी और कुछ दिन मैं घर पर ही था घर पर होने की वजह से हमारे रिश्तेदार और आस-पड़ोस के लोग भी मुझे मिलने के लिए आए क्योंकि मैं उन लोगों से मिल नहीं पाया था। पापा मुझे कहने लगे कि बेटा क्या तुम अपनी बहन को मिल आओगे मैंने पापा से कहा हां पापा मैं दीदी को मिलाता हूं। 
मैं अपनी दीदी को मिलने के लिए गया और वहां पर मैं एक दिन रुका उसके बाद मैं वहां से घर लौटा और कुछ दिनों बाद मुझे अपनी जॉब पर वापस लौटना था। जब मैं वापस लौटा तो अक्षित का मुझे फोन आया और कहने लगा कि मैं तुम्हें मिलने के लिए आ रहा हूं। अक्षित मुझे मिलने के लिए आया और वह मेरे पास दो दिन रुका उसके बाद वह अहमदाबाद के लिए निकल चुका था।

अक्षित भी अब लौट चुका था मैं अब अकेला ही था मेरे अकेलेपन को दूर करने के लिए हमारे पड़ोस में रहने वाली भाभी मेरे पास आती और मुझसे बहुत देर तक बातें किया करती थी। मुझे उनका चाल चलन और चरित्र पर पहले से ही शक था लेकिन जब मैंने उन्हें उनके ही देवर के साथ में अंतरंग संबंध बनाते हुए देखा तो मैंने भी सोचा कि मैं भी उनके साथ सेक्स कर ही लेता हूं। 

मेरा लंड भी पूरी तरीके से खड़ा हो चुका था जब मैंने उन्हें अपने पास बुलाया वह तुरंत ही मेरे पास आ गई मैंने उन्हें अपनी बाहों में लिया। भाभी मुझे कहने लगी राजेश आज आप कुछ ज्यादा ही जोश में लग रहे हैं मैंने उन्हें कहा भाभी जी जोश तो आपके अंदर है मैं तो सिर्फ अपनी गर्मी को मिटा रहा हूं। 

वह भी मेरी बाहों में आ गई मैं उनके स्तनों को दबाने लगा वह मेरे लंड को दबा रही थी मैं अपने आपको रोक नहीं पा रहा था मैंने अपनी पैंट को खोलते हुए अपने अंडरवियर को भी निकाल दिया उन्होंने पहले लंड चूसना शुरू किया तो मुझे बहुत ही अच्छा लगने लगा। 

वह मेरे लंड को बड़े ही अच्छे तरीके से अपने मुंह के अंदर बाहर कर रही थी मुझे बहुत अच्छा लग रहा था जैसे ही मैंने उनके बड़े और भारी भरकम स्तनों को अपने मुंह में लेकर उनका रसपान करना शुरू किया तो वह भी उत्तेजित हो गई और मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था। 
भाभी को चोदने के लिए दबोच लिया (Bhabhi Ko Chodne Ke Liye Daboch Liya)
भाभी को चोदने के लिए दबोच लिया (Bhabhi Ko Chodne Ke Liye Daboch Liya)
मैंने उनके स्तनों का रसपान बहुत देर तक किया जैसे ही मैंने उनके स्तनों पर अपने दांत के निशान मारे वह मुझे कहने लगी आप तो पूरे जोश में आ चुके हैं मैंने उन्हें कहा आपने जिस प्रकार से मेरे लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर लिया है उस से मेरे अंदर का जोश बहुत ज्यादा बढ चुका है। 

वह कहने लगी अब आप मेरी चूत के अंदर अपने लंड को डाल दीजिए? जब उन्होंने यह बात कही तो मैंने उनकी चूत की तरफ देखा तो मेरा मन उनकी चूत को चाटने का होने लगा मैंने जैसे ही उनकी चूत पर अपनी जीभ को लगाकर चाटना शुरू किया तो उन्हें अच्छा लग रहा था और वह बहुत खुश हो गई थी।

वह मेरी चूत को चाटे जा रही थी मुझे बहुत आनंद आता मैंने उनकी चूत से पानी बाहर निकाल कर रख दिया था और उन्हें मैंने खुश कर दिया था। जब मैंने अपने लंड को उनकी चूत के अंदर डालना शुरू किया तो मेरा लंड उनकी चूत के अंदर प्रवेश हो गया था वह चिल्ला उठी और मुझे कहने लगी आज तो आपके साथ मुझे मजा ही आ गया। 

मैंने उन्हें कहा मजा तो मुझे भी बड़ा आ रहा है मैं उन्हें तीव्र गति से धक्के मारता तो मेरा लंड उनकी चूत की दीवार से जाकर टकराता और उनके मुंह से मादक आवाज निकल जाती। जब उनके मुंह से मादक आवाज निकलती तो मैं अपने आपको बिल्कुल रोक नहीं पा रहा था वह अपने पैरों को खोलने लगी और मुझे अपनी ओर आकर्षित करने लगी।

वह जिस प्रकार से अपने दोनों पैरों को खोल कर मुझे अपनी ओर बुलाने की कोशिश करती मैं जिस प्रकार से उन्हें धक्के मारता उससे मेरे अंदर एक अलग ही सेक्स की भावना जाग रही थी मैं पूरी तरीके से उनके साथ संभोग का आनंद ले रहा था। 

उन्हें भी बड़ा मजा आता वह मेरा साथ बड़े अच्छे से दे रही थी मैंने बहुत देर तक उनके साथ संभोग का आनंद लिया जब मेरा वीर्य पतन हो गया तो भाभी और मैं साथ में बैठे रहे। 

उनकी योनि से वीर्य बाहर की तरफ को निकल रहा था वह मुझे कहने लगी आपने तो मेरे अंदर की आग को पूरी तरीके से बुझा दिया है लेकिन मैं उनकी आग को और महसूस करना चाहता था मेरा लंड जब दोबारा से खड़ा हुआ तो मैंने दोबारा से उनके साथ शारीरिक सुख का आनंद लिया। 

उनके साथ जिस प्रकार से मैंने शारीरिक सुख आनंद लिया उससे वह बड़ी खुश हो गई थी और उनकी चूत मैंने आधे घंटे तक मारी आधे घंटे में मैंने उनके साथ तीन बार शारीरिक संबंध बनाए और तीनों ही बार मुझे बड़ा मजा आया। जब भी मेरा मन करता तो मैं उन्हें बुला लिया करता वह मुझसे चुदने के लिए हमेशा तैयार रहती थी।
भाभी को चोदने के लिए दबोच लिया (Bhabhi Ko Chodne Ke Liye Daboch Liya) भाभी को चोदने के लिए दबोच लिया (Bhabhi Ko Chodne Ke Liye Daboch Liya) Reviewed by Priyanka Sharma on 12:26 AM Rating: 5

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