बाप का बेटी पे दिल आ गया-4 (Baap Ka Beti Pe Dil Aa Gaya-4)

बाप का बेटी पे दिल आ गया-4
(Baap Ka Beti Pe Dil Aa Gaya-4)

मुकुल राय- तू जानती नहीं है परीशा बेटी … मेरा एक सपना था कि मैं किसी भी लड़की के मुँह में अपना पूरा लंड पेलने का। मगर आज तूने मेरा सपना पूरा कर दिया। मैंने तेरी मम्मी के साथ बहुत सेक्स किया है मगर उसने कभी भी मेरे लंड अपने मुँह में पूरा नहीं लिया। बेटी हो तो ऐसी हो!

परीशा- अब तो आप खुश हो ना?
मुकुल राय- हां बेटी … अच्छा तुम मुझे गिफ्ट देने वाली थी ना? क्या है वो तेरी स्पेशल गिफ्ट?
परीशा मुस्कुराकर- आप गेस करके बताइए? आपकी इस समय सबसे बड़ी इच्छा क्या है, मैं वो पूरी करुँगी। वही आपका स्पेशल गिफ्ट होगा।

मुकुल राय- मेरा तो इस समय सबसे ज़्यादा मन तेरी गाण्ड मारने को कर रहा है. अगर तू मुझे इसकी इजाज़त दे तो?

परीशा- चलो पापा आज आपको अपनी गांड आपको गिफ्ट में दिया। आप जैसे चाहो मेरी गांड मार लो।

मुकुल राय झट से परीशा को अपनी बांहों में ले लेता है और उसके लब चूम लेता है।
मुकुल राय- तू सच में बहुत बिंदास है बेटी। मैंने आज तक तेरे जैसे लड़की नहीं देखी. सच में तेरा पति बहुत किस्मत वाला होगा।

परीशा- और आप नहीं हो क्या?
परीशा धीरे से मुस्कुरा देती है।
मुकुल राय- सच में तेरी जैसे बेटी पाकर तो मेरा भी नसीब खुल गया.
और इतना कहकर वो परीशा की गान्ड को कसकर अपने दोनों हाथों से भींच लेता है।

मुकुल राय- बेटी, मेरा लंड को पूरा खड़ा कर ना फिर मैं तेरी गांड मारूँगा।

करीब 5 मिनट तक परीशा मुकुल राय के लंड को पूरा थूक लगाकर चूसती और चाटती है. तब मुकुल राय का का लंड परीशा की कुँवारी गांड को फाड़ने के लिए तैयार हो जाता है।
मुकुल राय- बेटी, पहले तेरी गदराई गांड से तो जी भर के प्यार कर लूँ।

वो बस देखने लगता है अपनी बेटी के गान्ड की खूबसूरती … उफफ्फ़ … क्या नज़ारा था. भारी भारी गोल गोल उभरे हुए गोरे गोरे चूतड़ … जिन्हें अपनी हथेलियों से बड़े ही हल्के से दबाता हुआ अलग करता है … दरार चौड़ी हो जाती है … दरार के बीच थोड़ी सी डार्कनेस लिए गान्ड के छेद की चारों ओर का गोश्त … गांड की सूराख पूरी बंद हुई … पर चारों ओर का गोश्त एकदम टाइट! बन्द सूराख इस बात की गवाही दे रहा था कि गान्ड में कोई लंड अंदर नहीं गया है … और पूरी दरार चिकनी और चमकती हुई.

उसने अपने अंगूठे से गान्ड की दरार को हल्के से दबाया … अंगूठा उसकी चिकनी गान्ड में फिसलता हुआ ऊपर की ओर बढ़ता गया। उफ़फ्फ़ इतनी चिकनी और मुलायम गान्ड मुकुल राय ने आज तक नहीं देखी थी.

परीशा अपने पापा की हरकतों से मस्त थी, मुस्कुरा रही थी.
वो अंगूठे के दबाव से सिहर उठी … उसने अपनी गान्ड थोड़ी सी ऊपर उठाते हुए कहा- हां … हां पापा, अच्छे से छू लो, दबा लो देख लो … आपके लौड़े के लिए सही है ना?
“बेटी … बहुत शानदार, जानदार और मालदार है तेरी गान्ड … उफ … सही में तुम ने काफ़ी मेहनत की है … ज़रा चाट लूँ बेटी?

यह बात सुन कर परीशा और भी मस्ती में आ जाती है और अपनी गान्ड और भी ऊपर उठाते हुए पापा के मुँह पर रखती है- पापा … पूछते क्यूँ हो … आप की बेटी है … आपकी प्यारी बेटी की गान्ड है … जो जी चाहे करो ना … चाटो … चूसो खा जाओ ना … पर लौड़ा पूरा जड़ तक अंदर ज़रूर पेलना!
और अपने पापा के मुँह से अपनी गान्ड लगा देती है.

मुकुल राय उसकी गान्ड नीचे पलंग पर कर देता है, दरार को फिर से अलग करता हुआ अपनी जीभ उसके सूराख पर लगाता है और पूरी दरार की लंबाई चाट जाता है..जीभ को अच्छे से दबाता हुआ … उफ्फ़ उसकी गान्ड की मदमस्त महक और एक अजीब ही सोंधा सोंधा सा स्वाद था.

दो चार बार दरार में जीभ फिराता है … जीभ के छूने से और जीभ की लार के ठंडे ठंडे टच से परीशा सिहर उठती है … और फिर मुकुल राय उसकी गान्ड के गोश्त को अपने होंठों से जकड़ लेता है और बुरी तरह चूसता है … मानो गान्ड के अंदर का पूरा माल अपने मुँह में लेने को तड़प रहा हो.

परीशा मज़े में चीख उठती है- आआआह … पापा … उईईई … देखो ना मेरी गान्ड कितनी मस्त है? अब देर ना करो … बस पेल दो ना अंदर … प्लीज्ज।

मुकुल राय किचन में जाकर तेल की शीशी लेकर आता है।

परीशा जब अपने पापा के हाथ में तेल की शीशी देखती है तो उसकी हालत बिगड़ जाती है। उसने बोल तो दिया था कि वो अपने पापा से अपनी गान्ड मरवायेगी मगर इतना मोटा और लंबा लंड वो अपनी गान्ड में कैसे बरदाश्त कर पाएगी ये उसकी समझ में नहीं आ रहा था।

मुकुल राय तेल की शीशी खोलता है और थोड़ा सा तेल लेकर परीशा की गान्ड के छेद पर गिरा देता है. अपनी दोनों उंगलियों में अच्छे से तेल लगाकर वो उसकी गान्ड में धीरे धीरे उंगली पेलना शुरू कर देता है। कुछ देर के बाद वो अपनी दोनों उंगली को परीशा की गान्ड में डालकर अच्छे से आगे पीछे करने लगता है।
बाप का बेटी पे दिल आ गया-4 (Baap Ka Beti Pe Dil Aa Gaya-4)
बाप का बेटी पे दिल आ गया-4 (Baap Ka Beti Pe Dil Aa Gaya-4)
परीशा फिर से गर्म होने लगती है। उसको समझ में नहीं आ रहा था कि उसे क्या हो गया है; भला वो बार बार कैसे गर्म हो रही है।

मुकुल राय फिर तेल की शीशी को अपने लंड पर लगाता है और कुछ परीशा की गान्ड में भी डाल देता है। फिर अपना लंड को परीशा की गान्ड पर रखकर धीरे धीरे उसे परीशा की गान्ड में पेलने लगता है।
परीशा के मुँह से चीख निकलने लगती है मगर वो अपने पापा को रोकने का बिल्कुल प्रयास नहीं करती।

जैसे ही मुकुल राय का सुपारा अंदर जाता है, परीशा की आँखों से आँसू निकल जाते हैं। उसे इतना दर्द होता है, लगता है की किसी ने उसकी गान्ड में जलता हुआ सरिया डाल दिया हो।
वो फिर भी अपने पापा के लिए वो दर्द को बरदाश्त करती है।

परीशा – उफ पापा, आप कितने बेरहम हो … पूरा घुसा दिया … उम्म्ह… अहह… हय… याह… इतना मोटा लौड़ा पूरा मेरी गान्ड में डाल दिया.
मुकुल राय- हां बेटी … पूरा ले लिया है तूने … ऐसे ही बेकार में डर रही थी.

परीशा- बेकार में … उउफ्फ़ … मेरी जगह आप होते तो मालूम चलता … अभी भी कितना दुख रहा है … धीरे करो पापा!
मुकुल- बेटी, अब तो चला गया है ना पूरा अंदर … बस कुछ पलों की देर है. देखना तू खुद अपनी गान्ड मेरे लौड़े पर मारेगी.
वो बेटी की पीठ चूमता बोला।

“धीरे पेलो पापा … हाय बहुत दुख रही है मेरी गान्ड …” परीशा सिसिया रही थी।
मुकुल राय का तेल वाला सुझाव वाकई में बड़ा समझदारी वाला था। तेल से लंड आराम से अंदर बाहर फिसलने लगा था। जहाँ पहले इतना ज़ोर लगाना पड़ रहा था लंड को थोड़ी सी भी गति देने के लिए अब वो उतनी ही आसानी से अंदर बाहर होने लगा था।

हालाँकि परीशा ने अपने पापा धीरे धीरे धक्के लगाने के लिए कहा था मगर पिछले आधे घंटे से किए सब्र का बाँध टूट गया और मुकुल राय ना चाहता हुआ भी अपनी कमसिन बेटी की गान्ड को कस कस कर चोदने लगा।

परीशा- हाए उउफफ्फ़ … आआह मार … डाअल्ल आआअ … ईईईईई … ओह माआआअ … हे भगवान … मेरी गान्ड … उफ फट गईईई।

बेटी चीख रही थी, चिल्ला रही थी मगर अपने पापा को रुकने के लिए नहीं कह रही थी। साफ था कि उसे इस बेदर्दी में भी मज़ा आ रहा था। वैसे भी वो रोकती तो भी मुकुल राय रुकने वाला नहीं था।
दाँत भींचे वह बेटी की गान्ड में पेलता जा रहा था और वो पेलवाती जा रही थी।

मुकुल राय- हाय … अब बोल बेटी … मज़ा आ रहा है ना गान्ड मरवाने में?
परीशा- आ रहा है पापा … हाए बहुत मज़ा आ रहा है … ऐसे ही ज़ोर लगा कर चोदते रहिए पापा … हाए मारो अपनी बेटी की कुँवारी गान्ड!

मुकुल राय- आह्ह बेटी … क्या मस्त गांड है तेरी इतनी गर्म और टाइट। मेरे लन्ड को बिलकुल जकड़ लिया है तेरी गांड ने। आज तेरी गांड को पूरी खोल दूंगा साली रंडी।
परीशा- छी पापा … कितनी गन्दी गाली देते हो अपनी बेटी को।
मुकुल- अरे बेटी, सेक्स के टाइम गाली देने से ज्यादा मज़ा आता है और उतेजना और बढ़ती है।
परीशा- ओह्हह पापा।

मुकुल राय- आअह्ह्ह बेटी तेरी गांड दुनिया की सबसे अच्छी गांड है अब तो मैं रोज अपना लौड़ा पेलूँगा। बेटी गांड में लण्ड पेलने का सबसे बड़ा फायदा क्या है तू जानती है।
परीशा- नहीं पापा, आप बताओ?

मुकुल राय- गांड हमेशा कुँवारी चूत का मज़ा देती है। गांड को छेद फिर से सिकुड़ जाता है जबकि चूत का छेद ज्यादा चुदाई या बच्चे पैदा करने से फ़ैल जाता है और कम मज़ा आता है। गांड मारने से गर्भ ठहरने का डर नहीं रहता है।

परीशा- हाँ पापा, ये बात तो है। पापा अब दर्द कम हो रहा है पूरा पेल दो अपना लंड मेरी गांड में!
मुकुल राय- ले बिटिया … ले … यह ले … मेरा लौड़ा अपनी गान्ड में!

मुकुल राय ने पूरी रफ़्तार पकड़ते हुए परीशा के चूतड़ों पर तड़ तड़ चान्टे मारने शुरू कर दिए।

परीशा- हाय … उउफ्फ़ … मारो … पापा … मारो अपनी बेटी की गान्ड … फाड़ो अपनी बेटी की गान्ड … हाय मारो फाड़ डालो। इसे … उफफ़ … हे भगवान … ले लो मेरी गान्ड … ले लो मेरे पापा।

और फिर मुकुल राय पूरी रफ़्तार से अपना लंड अंदर और अंदर पेलना शुरू करता है. वो तब तक नहीं रुकता जब तक उसका लंड परीशा की गान्ड की गहराई में पूरा नहीं उतर जाता।

परीशा की हालत बहुत खराब थी; वो दर्द से उबर नहीं पा रही थी।

करीब 5 मिनट तक वो ऐसे ही अपना लंड को परीशा के गान्ड में रहने देता है। फिर धीरे धीरे वो उसकी गान्ड को चोदना शुरू करता है। परीशा के मुंह से दर्द और सिसकारी का मिश्रण निकलने लगता है और मुकुल राय तब तक नहीं रुकता जब तक वो परीशा की गान्ड से खून नहीं निकाल देता।

करीब 20 मिनट तक ज़बरदस्त गान्ड मारने के बाद आख़िरकार परीशा का बदन भी जवाब दे देता है और वो भी चिल्लाते हुए ज़ोर ज़ोर से झड़ने लगती है। साथ में मुकुल राय भी परीशा के गांड में अपनी मलाई छोड़ देता है।

वही दोनों बाप बेटी वही बिस्तर पर एक दूसरे की बांहों में समा जाते हैं और परीशा अपने पापा को अपने सीने से चिपका लेती है। मुकुल राय भी उसके सीने पर अपना सिर रखकर लेट जाता हैं।
अगला भाग: बाप का बेटी पे दिल आ गया-5 (Baap Ka Beti Pe Dil Aa Gaya-5)
बाप का बेटी पे दिल आ गया-4 (Baap Ka Beti Pe Dil Aa Gaya-4) बाप का बेटी पे दिल आ गया-4 (Baap Ka Beti Pe Dil Aa Gaya-4) Reviewed by Priyanka Sharma on 6:28 PM Rating: 5

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