उस रात वो हसीन मेहबूबा कौन थी (Us Raat Wo Haseen Mehbooba Kaun Thi)

उस रात वो हसीन मेहबूबा कौन थी
(Us Raat Wo Haseen Mehbooba Kaun Thi)

मेरा नाम अरमान है. मैं राजस्थान के कोटा शहर का रहने वाला हूँ। मेरा कद 6 फीट और उम्र 22 साल है. अच्छी बॉडी वाला लड़का हूँ। मैं दूसरों की तरह यह तो नहीं कहूंगा कि मेरा लण्ड 8 इंच का है, मगर यह जरूर कहूंगा कि मेरा लंड किसी भी औरत और लड़की को संतुष्ट कर सकता है।

वो बरसात के दिन थे. मुझे किसी काम से मेरे शहर से 200 किलोमीटर दूर जाना था। मैं शनिवार को आपनी कार से निकल पड़ा। मौसम बहुत सुहाना था तो मैंने रास्ते में वाइन शॉप से एक बीयर ले ली और कार में ही उसे पीने लग गया और कार भी चला रहा था। मैं अपने शहर से करीब 80 किलोमीटर दूर आ गया था. रास्ते में बरसात बहुत तेज हो गयी थी। बीयर भी अपना असर दिखा रही थी. हल्का नशा हो रहा था. बरसात तेज होने के कारण मुझे रोड साफ़ दिखाई नहीं दे रहा था।

रास्ते में बहुत डरावना जंगल था. दूर-दूर तक सुनसान रास्ता था और रोड पर गाड़ियां भी बहुत कम चल रही थीं। रात के करीब 8 बज चुके थे और मुझे भूख लग रही थी, मगर आस-पास दूर-दूर तक कुछ नहीं था। तभी अचानक मेरे सामने जंगल में से भागता हुआ एक नीलगाय (हिरन जैसा जानवर) मेरी कार के सामने आ गया. मैंने एकदम हड़बड़ा कर गाड़ी को साइड में घुमा दिया.

मेरी गाडी स्पीड में ही रोड से नीचे उतर कर झाड़ियों में घुस गयी और पीछे का टायर एक गड्ढे में फंस गया और गाड़ी बंद हो गयी। मैंने मन ही मन ऊपरवाले को कोसा कि कैसे सुनसान रोड पर गाडी ख़राब करवा दी. अब आस-पास दूर-दूर तक इंसान तो दूर, कोई झोपड़ी भी नहीं दिख रही थी. मैंने सोचा चलो जैसे तैसे रात कार में ही गुजारते हैं. सुबह किसी को ढूंढ कर निकलने का जरिया खोज लूंगा। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।

मेरे दिमाग में आया कि चलो रात यहाँ बिताने से अच्छा है कुछ दूर तक चला जाये. क्या पता कोई घर या झोपड़ी मिल जाये? मैंने कार को लॉक किया और चल पड़ा जंगल की ओर.

फिर अचानक से बहुत तेज बिजली कड़की और मुझे एक पुरानी फिल्मों की तरह की एक हवेली नजर आई मैंने सोचा कि चलो रात तो बिताई जा सकती है। मैं उस हवेली की तरफ बढ़ चला.

अंधेरा होने की वजह से मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. मैं हवेली के पास पंहुचा और मैंने आवाज लगाई पर अंदर से कोई आवाज नहीं आई. फिर मैंने जोर से दरवाज़े को बजाया मगर फिर भी कोई आवाज नहीं आई.
मैंने सोचा यहाँ कोई नहीं रहता, तो मैं जैसे ही वापस जाने के लिए मुड़ा, अचानक हवेली की लाइट जली और अंदर से आवाज आई- कौन है?

वो आवाज़ इतनी मधुर थी कि मैं उस औरत की सुंदरता को सिर्फ कल्पना कर रहा था कि इसकी आवाज इतनी सुन्दर है तो यह कितनी सुन्दर होगी? तभी फिर से अंदर से आती आवाज ने मेरी कल्पना को तोड़ा- कौन है?
मैंने जवाब दिया- मेरी कार पास में ही ख़राब हो गयी है और रात भी बहुत हो गयी है इसलिये मैं आपके यहाँ रात गुजार सकता हूं क्या?
अंदर से आवाज आई- मैं तुम पर यकीन क्यों करूं?

मैंने फिर अपनी कार ख़राब होने की दास्तान सुनाई. तभी हवेली का दरवाजा खुला और तभी अचानक जो मैंने देखा उसे मैं कभी नहीं भूल सकता. काली साड़ी में मेरे सामने खुद काम की देवी खड़ी थी. वैसी सुंदरता मैंने मेरी जिंदगी में कहीं नहीं देखी थी. जैसे स्वर्ग की अप्सराएं भी इसके सामने फीकी पड़ जायें।

उसके जिस्म को शब्दों में बयां करना नामुमकिन सा था. कद 5 फीट 8 इंच. चेहरा ऐसा जैसे कोई भी देखते ही मोहित हो जाये. होंठ सेब की फ़ांकों की तरह लाल, जिस्म का आकार 34, 30, 34 था. उस काम की देवी के पास से ऐसी खुशबू आ रही थी कि बस मैं उसके वश में होता जा रहा था. ऐसी तराशी हुई हुस्न की मूरत थी कि खुदा ने अपनी सारी सोच इसे बनाने में ही लगा दी हो।
मैंने मन ही मन ऊपरवाले को शुक्रिया कहा कि ऐसी सुंदरी के दर्शन करवाए जिसे असल जिंदगी में देखना ही जिंदगी धन्य कर दे।

तभी उसकी आवाज ने फिर से मेरी कल्पना की दुनिया से मुझे जगाया- यहाँ ही खड़े रहना है या अंदर भी आओगे?
मेरे गले से धीमी सी आवाज निकली- हाँ जी.

उसे देखते ही सारे अरमान जाग गए. मैंने मन ही मन ऊपरवाले को धन्यवाद दिया। मेरे मन में कुछ और सवाल भी थे कि इतने सुनसान जंगल में यह अकेली और यहाँ कोई नहीं?
अचानक मुझे गीले कपड़ों की वजह से छींकें आने लग गयीं तो उसने कहा- जाइये कपड़े बदल लीजिये.
मैंने कहा- मेरे पास कपड़े नहीं है. उसने कहा कि मेरे पति के कपड़े दे देती हूं मैं आपको. आप जाइये फ्रेश हो जाइये।

मैं जाकर फ्रेश हो कर आ गया और मैंने उसके पति का पायजामा और टी-शर्ट पहन ली. फिर भी मेरे मन में बहुत से सवाल थे तो मुझसे रहा नहीं गया. मैंने उनका नाम पूछा तो उन्होंने अपना नाम अक्षिता बताया और मैंने पूछा कि इस सुनसान जंगल में आप अकेली वो भी इतने बड़े घर में?
तो उन्होंने मुस्कुरा कर कहा- ये मेरे पति के पुरखों की हवेली है और वो एक वन विभाग में अफसर हैं उनकी पोस्टिंग इसी जंगल में हो गयी तो हम यहाँ आ गये.
उसने आगे बताया कि घर के नौकर अपने गांव गये हैं और मेरे पति मीटिंग करने कुछ दिनों के लिए बाहर गए हैं.

फिर मैंने उसको अपना नाम बताया।
उन्होंने कहा- मैं अभी खाना लगाती हूं. आप खाने की टेबल पर चलिये.

फिर हमने साथ में खाना खाया. फिर अक्षिता ने बर्तन किचन में रखे. जब वो चलती थी तो ऐसे लग रहा था कि कोई हिरणी अपनी सुंदरता पूरे जंगल में बिखेर कर जा रही हो। मैं बार-बार ऊपरवाले को इस रात के लिये धन्यवाद दिये जा रहा था।
अक्षिता ने फिर मुझसे पूछा- आप कुछ पीएंगे?
मैंने अचानक ही कह दिया- मेरे काम की चीज़ अभी यहाँ नहीं मिलेगी.

तो वो मुस्कुरा दी और उनके पति की एक रम की बोतल ले आयी। जिसे देखते ही ऐसा लगा कि प्यासे को रेगिस्तान में शरबत मिल गया हो। फिर कुछ देर के बाद वो कपड़े बदल कर आई तो मैं उसे देखता ही रह गया.

ब्लैक कलर की जालीदार नाईटी में वो किसी नामर्द का भी लण्ड खड़ा करवा दे. उसके सेंट की खुशबू मुझे मदहोश कर रही थी. एक तो बरसात की रात. ऊपर से काम की देवी मेरे साथ में … बहुत मुश्किल से खुद पर काबू करके बैठा था मैं। वो 2 गिलास ले कर आई और कुछ आइस क्यूब भी साथ में ले आई.

मैंने पूछा- आप भी ड्रिंक लेती हैं?
तो उसने कहा- हां कभी-कभी ले लेती हूं.

मैं खुद की किस्मत पर यकीन नहीं कर पा रहा था। बस कामदेव से यही कह रहा था कि कोई प्यार का तीर इस पर भी चला दीजिये।

उसने टीवी चालू किया और मैंने 2 छोटे पेग बनाये। हम दोनों ने ड्रिंक खत्म की और टीवी पर कोई रोमांटिक मूवी चल रही थी. दोनों पर रम अपना असर दिखा रही थी.

तभी अचानक बहुत तेज बिजली की आवाज आई और वो डर कर मेरी बांहों में आ गयी. डर से दुबक कर उसका मुंह मेरी छाती पर आ गया था. मेरा एक हाथ उसकी कमर पर था। मैं धीरे-धीरे उसकी कमर सहलाने लग गया और वो भी मेरे आगोश में आ रही थी। मेरी बढ़ी हुई धड़कन की आवाज बिल्कुल साफ़ सुनाई दे रही थी।

बड़े ही प्यार से मैंने उसे उठाया और उसके साथ खड़ा हो गया. तभी अचानक फिर बिजली की आवाज हुई. वो फिर मुझसे चिपक गयी और मेरा लिंग महाराज, जो कि तन गया था, उसके बदन से सट गया था. वो भी उस पल का मजा ले रही थी। मैंने उसके फूल जैसे कोमल चहरे को उठाया.

उसकी आँखों में कामवासना की झलक साफ दिख रही थी. मैंने अपने होंठ उसके लाल होंठों पर धीरे से रखे और दोनों के होंठ एक दूसरे से रेस लगा रहे थे कि कौन किसे सबसे ज्यादा प्यार करता है! मैं मन ही मन सोच रहा था कि बस ये समय यहीं रुक जाये और वो एक ऐसा सुखद अनुभव था जिसे मैं शब्दों में बयान नहीं कर सकता।

जैसे ही मैंने उसे खुद से अलग किया तो उसने एक सवाल वाली निगाह से मुझे देखा। मैं उसकी नाइटी को धीरे-धीरे ऊपर करने लगा और मैं उसकी सुंदरता का गुलाम बनता जा रहा था. मैंने उसकी नाइटी पूरी उतार दी. वो अंदर लाल रंग की ब्रा और पेंटी में संगमरमर की मूरत के समान चमक रही थी। मैं ऊपरवाले से मन ही मन कह रहा था कि मैं इस रात के लिए हमेशा तेरा गुलाम रहूँगा।

उसके वक्ष बिल्कुल सुडौल, गोल आकार के, सपाट पेट, गोल और गहरी नाभि. उसके तन पर कहीं भी अतिरिक्त मांस नहीं था. साक्षात प्रकृति की खूबसूरती का नमूना थी वो. मैं सोच रहा था कि देवताओं के पास ऐसी ही अप्सराएं थीं जिनसे वो तपस्या में लीन मुनियो में भी कामवासना जगा देते थे। मैं सारी उम्र इसका गुलाम बन कर रहने को तैयार था.

कहने को शब्द नहीं हैं उसकी सुंदरता की तारीफ में … मैं सोच रहा था कि देवता भी इसे धरती पर भेज कर पछता रहे होंगे. तभी उसकी आँखें मुझे फिर सवाल भरी निगाहों से देख रही थीं. मैं फिर अपनी कल्पना से बाहर आया और धीरे से उसकी ओर बढ़ा. उसके पीछे जाकर उसके सुनहरे बालों को आगे कर दिया. फिर मैंने एक किस उसकी गर्दन पर किया तो उसके मुँह से प्यारी सी आह्ह निकली।

मैंने फिर 3-4 किस उसके कंधों और गर्दन पर जड़ दिए. मैंने उसकी ब्रा की डोरी को धीरे से खोला और ब्रा को हटा दिया. फिर मैं आगे की तरफ गया और उसके उरोजों को देखा तो बस मेरे मुँह से एक आह्ह निकली. बिल्कुल संगमरमर जैसे सफ़ेद गोल वक्ष थे. उन पर गुलाबी रंग के तने हुए निप्पल और उसका एलोरा भी गुलाबी कलर का. बस मन हुआ कि सारी उम्र इन्हें चूसता रहूं। मैंने आगे बढ़ कर उन्हें अपने हाथों में पकड़ा.

इतने कोमल जैसे कोई स्पंज दबाया हो. मैंने धीरे से उन्हें दबाया. फिर अक्षिता के मुँह से एक आह्ह निकली। अक्षिता ने मेरी टी-शर्ट उतार दी मैंने उसके एक उरोज के एलोरा पर अपनी जीभ फिराई तो अक्षिता के मुँह से फिर एक कामुक सिसकारी स्स्स … करके निकली. मैंने उसके निप्पल को होंठों में दबाया और एक छोटे बच्चे की तरह उसे चूसने लगा.

अक्षिता भी कामवासना के सागर में गोते लगाने लगी. मैं जब उन्हें काटता तो अक्षिता के मुँह से सिसकारी निकल जाती. अक्षिता भी जोर जोर से कह रही थी- जोर से चूसो … आह्ह … मैंने चूस-चूस कर उसके दोनों उरोजों को लाल कर दिया था. फिर मैं उसे उठा कर बेडरूम में ले आया. वहां मैंने उसे किसी फूल की तरह लेटाया और उसके ऊपर खुद भी लेट कर किस करने लग गया। मैं किस करते-करते नीचे की ओर जाने लगा.

उसकी गर्दन पर किस किया. फिर दोनों उरोजों के बीच से उसके पेट को चाटते हुए उसकी गहरी नाभि पर पहुंचा. मैंने उसमें अपनी जीभ घुसा दी. अक्षिता ने फिर वही प्यारी सी सिसकारी भरी. मैंने उसके पेट को चाट चाट कर गीला कर दिया।
अब मैं बेड से नीचे उतर कर खड़ा हो गया और उसके पैरों को हाथो में लेकर चाटने लगा. वो लगातार वासना में बहती जा रही थी और सिसकारियां भर रही थी.

मैंने उसकी पैर की उंगलियों को चूसना शुरू किया. फिर धीरे-धीरे उसकी टांगों को चाटते-चूमते उसकी जांघों पर पहुंचा. वहाँ भी अपने प्यार की निशानियां दे रहा था. हम दोनों अपनी वासना में बहे जा रहे थे। अब मैं धीरे से उसकी पैंटी की तरफ बढ़ा. उसे जैसे ही मैंने छुआ तो अक्षिता ने फिर एक आहहह … भरी.

उसकी पैंटी पूरी तरह से गीली हो गयी थी. उसके कामरस की बहुत ही मोहक गंध मुझे पागल किये जा रही थी। फिर मैं धीरे धीरे उसकी पैंटी उतार रहा था और चूमता भी जा रहा था. उसकी चूत के ऊपर की बालों वाली जगह बिलकुल क्लीन थी. वहाँ रोम छिद्रों के अलावा कोई निशान नहीं था. मैंने उस जगह को चूमा. मैं उसके हर हिस्से पर अपने प्यार की निशानी छोड़ रहा था।
उस रात वो हसीन मेहबूबा कौन थी (Us Raat Wo Haseen Mehbooba Kaun Thi)
उस रात वो हसीन मेहबूबा कौन थी (Us Raat Wo Haseen Mehbooba Kaun Thi)
फिर मैंने पूरी पेंटी उतार दी और उसकी चूत बिल्कुल छोटी सी, गुलाब की पंखुड़ियों की तरह लग रही थी. उसकी फांकों को मैंने प्यार से किस किया और चुम्बनों की झड़ी लगा दी उसकी कोमल चूत पर. अक्षिता मेरे इस प्यार से पागल होती जा रही थी। मैंने अपनी उंगलियों से उसकी फ़ांकों को फैलाया. अंदर से ऐसी जैसे खून उतर आया हो. बिल्कुल लाल थी उसकी चूत. ऐसी चूत मैंने कहीं नहीं देखी.

मैं धीरे से उसके पास गया और उसे चाटने लग गया. अक्षिता जोर-जोर से आहें भर रही थी और अपने हाथ को मेरे सिर पर रख कर जोर से अपनी चूत पर दबा रही थी. उसका दबाव मुझ पर बढ़ता जा रहा था. वो जोर-जोर से सिसकी भर रही थी. वो झड़ने के करीब थी. मैंने अपनी चाटने की स्पीड और बढ़ा दी और उसके क्लीट को भी चूसने लग गया. उसकी सिसकारियां और तेज हो गयीं और उसने अपनी टांगों को मेरे सिर पर जोर से दबा दिया.

वह जोर से झड़ने लग गयी. उसकी चूत के अमृत रस से मेरा पूरा चहरा गीला हो गया। वो अपनी सांसों पर काबू कर रही थी. मैं ऊपर जा कर उसे फिर किस करने लग गया। अब उसने मुझे नीचे लेटाया और मुझे किस करने लग गयी. वह धीरे धीरे नीचे की ओर बढ़ रही थी. उसने मेरे पाजामे और अंडरवियर को एक साथ उतार दिया और मेरा लिंग महाराज पूरे जोश में उसे सलामी दे रहा था।

अक्षिता ने मेरे लिंग महाराज को एक प्यारी सी निगाह से निहारा. फिर उसने अपने कोमल से होंठों से किस किया. फिर मेरे लिंग महाराज को अपने मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लग गयी. उसका यह प्यार मुझे दीवाना किये जा रहा था. वो पूरा नीचे तक लिंग महाराज मुँह में लेती और फिर ऊपर आते वक्त मेरे लिंग के टोपे को जोर से चूसती.

उसकी इस अदा ने मुझे उसका गुलाम बना लिया. बस मैं मन ही मन कामदेव को धन्यवाद दे रहा था और कह रहा था कि अब मौत भी आ जाये तो कोई गम नहीं. ऐसी सुंदर काया वाली अप्सरा को पाकर मेरी जिंदगी तो धन्य हो गयी।

मैंने उससे कहा- मैं झड़ने वाला हूं.
तो उसने मेरी बात को नजर अंदाज किया और वो और जोर-जोर से मेरे फटने को हो चुके लौड़े को चूसने लग गयी.

मेरी वासना का ज्वार भी एक तूफ़ान की तरह फूट पड़ा.
पहले एक धार, फिर दो, फिर तीन-चार-पांच और न जाने कितनी ही बार मेरे लिंग ने मेरा वीर्य को पिचकारी दर पिचकारी करके उसके मुंह में उड़ेल दिया. वह उसको पी गई. कुछ वीर्य उसको उरोजों पर गिर गया और कुछ उसके मुंह पर लग गया. इतना वीर्य मेरे लिंग से पहले कभी नहीं निकला था. मगर हैरानी की बात ये थी कि अब भी मेरा लिंग बैठने को राजी नहीं था.

अब मैंने अक्षिता को वापस अपने नीचे लेटा दिया. अब बारी थी लिंग महाराज के मिलन की. मैंने अक्षिता के होंठों पर किस किया. जैसे उसे इस सुख के लिए धन्यवाद कह रहा हूं. उसने भी किस में पूरा साथ दिया। अब अक्षिता का भी सब्र जवाब दे रहा था. वो बोली- जान … अब डाल दो अपने लण्ड को मेरी चूत में … अब और नहीं सहा जा रहा।

मैंने भी रुकना उचित नहीं समझा. उसकी टांगें फैलाईं और अपने लिंग महाराज को उसकी चूत की गुलाबी फ़ांकों पर रख कर एक धक्का मारा तो लिंग का मुंड अंदर फंस गया और अक्षिता के मुँह से एक हल्की चीख निकली- उइई माँ … मैंने सोचा कि ये काम की देवी तो नाम की तरह ही अक्षत है. मैंने फिर अपने लिंग को बाहर निकाल कर एक जोरदार धक्का मारा. उसकी एक जोर की चीख निकली. आआईई … उम्म्ह… अहह… हय… याह… मर गयी।

फिर मैंने उसे प्यार से किस किया और धीरे-धीरे धक्के लगाने लग गया.

उसकी चूत किसी भट्टी की तरह गर्म थी और मेरे लण्ड को अंदर की ओर खींचे जा रही थी, जैसे मुझे पूरा ही अपने अंदर समा लेना चाहती हो. अब उसकी सिसकारियां बढ़ गयीं. मैंने भी अपने धक्कों की रफ़्तार बढा दी.
वो जोर-जोर से ऊह्ह आह्ह … कर रही थी और बोल रही थी- और जोर से चोदो जान … बहुत मजा आ रहा है! और तेज … और तेज चोदो … और चोदो … आज मुझे अपनी बना लो. मैं भी तेज धक्के मार रहा था.

चुदाई का खेल अपनी पूरी रफ़्तार पर चल रहा था. लेकिन मैं थक चुका था जिसे वो समझ गयी थी. फिर मैं उसके नीचे आ गया और वो मेरे लिंग को हाथ में पकड़ कर उस पर कूदने लग गयी. कुछ देर ऐसे ही रफ़्तार से चुदाई चलती रही. तभी उसकी आवाजें तेज हो गयीं और वो जोर से झड़ने लग गयी।

लेकिन मैं पहले लंड चुसाई से एक बार झड़ चुका था तो मेरा नहीं हुआ था. वो धम्म से मेरी छाती पर गिर गयी। मैंने वापस अपना पोज़ बदला. मैं उसके ऊपर आ गया और वो भी एक कातिल निगाह से मेरी ओर देख कर मुस्करा दी.
उसका कहना था- तुम नहीं थके तो आ जाओ, मैं भी तैयार हूं जंग के लिये।

फिर मैंने अपना लिंग एक ही झटके में अंदर डाल दिया और अक्षिता के मुँह से फिर एक सिसकारी निकली. हमने रफ़्तार पकड़ ली और दोनों एक दूसरे को बराबर टक्कर दे रहे थे. मेरा लिंग महाराज भी झड़ने को था तो मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी.

अक्षिता भी जोर-जोर से धक्के मार कर बोल रही थी- जोर से चोदो जान … मैं झड़ने वाली हूं. तेज चोदो जान … और तेज!
मैं भी झड़ने वाला था और उसके हाथ मेरी कमर पर दबाव बनाये जा रहे थे. फिर अचानक ही दोनों का शरीर अकड़ गया और दोनों की वासना का ज्वार उमड़ पड़ा.
मैं भी थक कर उसके ऊपर गिर गया. मेरी पूरी ताकत खत्म हो चुकी थी. मैं उसके ऊपर ही लेट गया.

जब सुबह मेरी आँख खुली तो मैं अपनी ही कार में था. अचानक मुझे एक झटका लगा कि जो भी बीती रात मेरे साथ हुआ वो क्या कोई सपना था? लेकिन मेरी कमर पर जलन महसूस हुई तो मैंने कार के मिरर में देखा तो मेरी कमर पर नाखूनों के कई निशान थे. मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया. मेरी कार भी सड़क किनारे सही सलामत खड़ी थी।

मुझे कुछ समझ नहीं आया कि ये कोई डरावना सपना था या हकीकत? मैंने कार स्टार्ट की और अपनी मंजिल की ओर बढ़ चला. मगर मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वहाँ ना कोई हवेली थी ना कोई मकान तो फिर मैं किस अक्षिता से मिला और कौन सी थी वो हवेली। कैसी अजीब पहेली थी ये जो आज तक मेरे लिए एक सवाल बनी हुई है. आखिर उस रात मेरे साथ हुआ क्या था. मैं आज भी सोच कर सहम जाता हूँ.

तो दोस्तो, यह मेरी पहली कहानी थी. अगर कोई गलती हुई हो तो माफ़ कीजियेगा. फिर जल्द ही लौटूंगा एक नई कहानी लेकर. मुझे कमेंट करके बतायें कि आपको कहानी कैसी लगी।
उस रात वो हसीन मेहबूबा कौन थी (Us Raat Wo Haseen Mehbooba Kaun Thi) उस रात वो हसीन मेहबूबा कौन थी (Us Raat Wo Haseen Mehbooba Kaun Thi) Reviewed by Priyanka Sharma on 3:28 PM Rating: 5

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