ट्रेन में मिली हसीना की चुदाई-3 (Train Me Mili Haseena Ki Chudai-3)

ट्रेन में मिली हसीना की चुदाई-3
(Train Me Mili Haseena Ki Chudai-3)

मेरी रोमांटिक कहानी के दूसरे भाग ट्रेन में मिली हसीना की चुदाई-2 (Train Me Mili Haseena Ki Chudai-2) में अब तक आपने पढ़ा कि मैंने अपने प्यार का इजहार अदिति से कर दिया था, जिसको उसने बड़े ही प्यार से स्वीकार कर लिया था. इसके बाद वो मेरे साथ चूमाचाटी में लग गई थी.

अदिति मेरे होंठ चूसने लगी. कुछ देर उसका निचला होंठ चूसने क़े बाद मैंने उसका ऊपर वाला होंठ अपने होंठों क़े बीच ले लिया. इस तरह हम बहुत देर तक लिप किस करते रहे. फिर हमारे होंठ अलग हुए, तो अदिति मेरी तरफ देख क़े मुस्करा दी. उसने मेरे माथे पे और गालों पे किस किया और मेरे ऊपर ही लेट गयी.
अब आगे:

मेरी एक हाथ की उंगलियां उसके बालों को सहला रही थीं, तो दूसरा हाथ उसकी पीठ को सहला रहा था. हम दोनों ही खामोश थे, बस अपने स्पर्श से एक दूसरे को समझ रहे थे.

धीरे धीरे मेरे हाथ उसकी पीठ से नीचे उसकी ड्रेस ऊपर की तरफ हो चले और उसकी जांघों को सहलाने लगे.
थोड़ी देर बाद मैंने अदिति की ड्रेस को और ऊपर खिसका दिया. मेरी उंगलियां अब उसकी पैंटी को छूने लगी थीं. मेरा लंड जीन्स में पूरी तरह तन चुका था. शायद इसका अहसास अदिति को भी हो रहा था, इसलिए उसकी सांसें तेज़ हो रही थीं … वो भी गर्म हो रही थी.

तभी वो थोड़ा ऊपर की तरफ उठी और मेरी आंखों में देखने लगी. उसकी आंखों में वासना दिख रही थी. मैंने उसके होंठों को चूम लिया, तो वो मेरे सर की तरफ खिसक कर मेरे लिप्स पे किस करने लगी. उसके ऊपर की तरफ खिसकने से उसके चूतड़ अब मेरे हाथों में आ गए थे. मैं उसकी ड्रेस के अन्दर हाथ डाल कर उसके उभरे हुए चूतड़ों को सहलाने लगा. कुछ पल बाद जब उसने मेरे होंठ छोड़े, तो मैंने उसे पलट कर अपने नीचे कर लिया और मैं उसके ऊपर आके उसकी गर्दन को चूमने लगा.

फिर मैंने उसकी कान की लौ को जैसे ही चूमा, तो अदिति की आंखें एकाएक सिहरन से बंद हो गईं और उसके मुँह से ‘इस्स अस्स …’ की आवाज़ आने लगी. मैं उसे चूमता हुआ नीचे की तरफ आने लगा. मैंने उसके बूब्स पे उसकी ड्रेस के ऊपर से चूम लिया.
वो बोली- बदमाश!
यह कहते हुए वो मुस्कराने लगी.

मैं चूमता हुआ उसकी जांघों को चूमने लगा. अदिति ‘उह आह …’ करने लगी. मैंने उसकी जांघों के अन्दर वाले हिस्से को चूमा, तो उसने अपनी जांघें ज़ोर से भींच ली. मैं उसके घुटनों को चूमता हुआ उसकी पिंडलियों को चूमने लगा.

फिर नीच होकर जैसे ही मैंने उसके पैर के अंगूठे को मुँह में लेके चूसा, तो अदिति सिसकारियां लेने लगी.

इसी उत्तेज़ना में वो पलट गयी. मैं फिर उसकी पिंडलियों को चूमता हुआ उसके चूतड़ों पे पैंटी के ऊपर से ही चूमने लगा. उसने ड्रेस से मैचिंग डार्क ब्लू कलर की पैंटी डाली थी, जो उसके गोरे चूतड़ों से चिपकी हुई थी और बहुत सेक्सी लग रही थी.

फिर मैंने अदिति किए बाल साइड में किये और उसकी गर्दन के पीछे चूमने लगा. फिर उसकी कान की लौ को अपने होंठों में ले के चूसने लगा, तो वो सी सी करने लगी.

मैंने उसकी पीठ के पीछे हाथ ले जाके उसकी ड्रेस की ज़िप खोल दी, तो अदिति ने भी बैठी होकर ड्रेस निकलने में मेरी हेल्प की. अब अदिति मेरे सामने सिर्फ दो कपड़ों ब्रा एंड पैंटी में थी. गहरे नीले रंग की इस पैंटी और ब्रा में अदिति काम की देवी लग रही थी, जिसको देख के कोई भी अपने आप पर से कंट्रोल खो देगा.

मैं ब्रा में झांकते उसके बूब्स के ऊपरी हिस्से को चूमने लगा. फिर मैंने पीछे हाथ ले जाकर उसकी ब्रा की हुक खोलनी चाही, तो वो मुझसे खुल ही नहीं रही थी.

अदिति ने हंसते हुए खुद ही अपने हाथ से ब्रा खोल दी और बोली- अभी एक्सपीरियंस नहीं है तुम्हें!
यह कह कर वो हंसने लगी. उसके मम्मे बिल्कुल टाइट थे. उन पे हल्के भूरे रंग के निप्पल, जो बिल्कुल सख्त हो चुके थे.

मैंने हाथ से उसके मम्मों को मसलना शुरू कर दिया और उंगली और अंगूठे से उसके निप्पल मसलता जा रहा था. इससे अदिति की सीत्कार बढ़ने लगी. मैंने उसके निप्पलों पे बारी बारी किस किया, तो अदिति हम्म … आह करने लगी. मैं उसके एक निप्पल को मुँह में ले के चूसने लगा और दूसरे को उंगली और अंगूठे से मींजने लगा.

अदिति लगातार ‘उफ़ … उम्म्ह… अहह… हय… याह… उह …’ कर रही थी और बोल रही- अर्पित, बहुत मज़ा आ रहा है … प्लीज और चूसो इन्हें.
मैंने बारी बारी उसके दोनों चूचे खूब चूसे, जब तक वो लाल नहीं हो गए.

फिर मैं उसके मम्मों को छोड़कर उसके पेट पे चुम्बन करने लगा, उसकी नाभि में जीभ डाल के घुमाने लगा.
अदिति हंसते हुए बोली- अर्पित … क्या कर रहे हो यार … गुदगुदी होती है.

मैंने उसकी कमर पर, जहां बेल्ट बांधते हैं, वहां होंठ जमा दिए और उसे बेहताशा चूमने लगा. फिर मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पे किस किया, तो वो एकदम से मचल गयी.
अदिति बोली- क्या करते हो?
मैं उसकी पैंटी उतारने लगा, तो उसने अपनी टांगें ज़ोर एक दूसरे के साथ भींच लीं.

मैं बोला- अदिति देखने दो न … ये अनमोल खज़ाना.
वो बोली- न … मुझे शर्म आती है.

मैं उसकी चूत पे ऐसे ही किस करने लगा, तो वो फिर से गर्म हो गयी और उसकी टांगों की पकड़ ढीली पड़ गयी. मैंने उसकी पैंटी उतार दी. मैंने उसकी टांगों को खोला, तो देखा कि उसकी छोटी सी चूत, जिसकी फांकें आपस में जुडी हुई थीं, जो बता रही थीं कि इसे आज तक किसी मर्द ने नहीं छुआ है.

मैंने उसे पहले तो जी भर के चूमा और फिर अपनी एक उंगली चूत की दरार में डाल दी. इससे अदिति चिहुंक पड़ी. मैं धीरे धीरे उंगली उसकी चूत की दरार में ऊपर नीचे करने लगा. इससे उसकी सिसकारियां बढ़ने लगीं.

फिर मैंने उसकी चूत की एक फांक को अपने होंठों से खोला और उसे मुँह में ले कर चूसने लगा. फिर दूसरी के साथ भी ऐसा किया.

अदिति बोली- हाय अर्पित बहुत मज़ा आ रहा है … मुझे कुछ हो रहा है.

तभी मैंने अपनी जीभ उसकी चूत की दरार में डाल दी और उसकी चूत चाटने लगा. तो वो अपना सर इधर उधर मारने लगी. वो मेरा सर अपनी चूत पे दबा रही थी और साथ साथ अपनी गांड को भी मेरी जीभ के साथ साथ हिला रही थी, साथ में वो बड़बड़ा रही थी- अर्पित … यू आर सो गुड … मैं मर जाऊंगी … मुझे कुछ हो रहा है.

मैंने अपना मुँह उसकी चूत से हटाया और उसके ऊपर आके उसके मम्मों को चूमने और चूसने लगा. अदिति मेरी शर्ट के बटन खोलने लगी, जब उससे खुले नहीं, तो उसने तोड़ डाले. वो पलट के मेरे ऊपर आ गयी, मेरी चेस्ट पे बेहताशा किस करने लगी.

तभी उसने मेरी जीन्स का बटन खोला और जीन्स उतारने लगी. मैंने जीन्स और अपना अंडरवियर साथ ही उतार दिया. अदिति मेरे लंड को देखने लगी और उसने हाथ में पकड़ा.
वो बोली- मैंने पहली बार छुआ है … ये तो बहुत सख्त है.
मैंने बोला- हां ये तुम्हारे मस्त टच के कारण ही इतना सख्त हो गया है.
वो मुस्करा दी.

मैंने उसे लिटा लिया और खुद उसकी टांगों के बीच में आ गया. उत्तेज़ना के कारण उसकी चूत पूरी गीली हुई पड़ी थी. मैंने अपना लंड उसकी चूत पे सैट किया और हल्का सा धक्का लगाया, तो लंड चूत में चला गया. पर अदिति की चूत टाइट थी, तो उसे दर्द हुआ.
ट्रेन में मिली हसीना की चुदाई-3 (Train Me Mili Haseena Ki Chudai-3)
ट्रेन में मिली हसीना की चुदाई-3 (Train Me Mili Haseena Ki Chudai-3)
उसकी हल्की आह से मैं रुक गया और अदिति के होंठ चूसने लगा.
वो बोली- नीला ने बताया था कि पहली बार में बहुत दर्द होता है.
मैंने बोला- थोड़ा दर्द तो होगा, अगर तुम नहीं चाहती हो, तो मैं बाहर निकाल लेता हूँ.
वो बोली- नहीं यार, कभी न कभी तो ये दर्द सहना ही है … तो आज क्यों नहीं … और फिर मैं तुमसे ही ये दर्द लेना चाहती हूँ.

मैंने अदिति को चूमा और धीरे धीरे अपना लंड अन्दर करने लगा. फिर थोड़ा सा ज़ोर लगाया, तो मेरा पूरा लंड अन्दर चला गया. अब अदिति थोड़ा ज़ोर से चिल्लाई. मैं समझ गया कि अदिति की चूत की झिल्ली फट गयी है. मुझे नीचे कुछ गीला गीला सा भी महसूस हुआ, जो कि अदिति की चूत में से उसकी झिल्ली फटने के कारण थोड़ा सा खून निकल रहा था.

मैं अदिति का ध्यान दर्द से हटाने के लिए बातें करने लगा.
वो बोली- जब तुम मेरी चूत चाट रहे थे, तो मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.
मैंने बोला- मुझे भी तुम्हारी चूत और बूब्स चूसने में बहुत मज़ा आया.

इन बातों से अदिति फिर गर्म हो गयी और अब उसे दर्द भी नहीं था. मैंने अपनी हसीं गर्लफ्रेंड की चुदाई शुरू कर दी. मैं उसे बड़े प्यार से धीरे से चोद रहा था.
अदिति को मज़ा आने लगा, तो वो बोली- मुझे कुछ हो रहा है. नीचे चूत में से कुछ निकलने वाला है, पर निकल नहीं रहा है.

मैंने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी. अब मैं अदिति को पूरे वेग से चोद रहा था और अदिति भी अस्स आह उह कर रही थी.
तभी वो मुझे अपनी ओर खींचने लगी. उसकी टांगें अकड़ने लगीं, तो मैं समझ गया कि वो झड़ने वाली है. मैंने अपनी स्पीड और भी बढ़ा दी.

तभी अदिति ज़ोर से चिल्लाई और ज़ोर से मेरे से लिपट गयी. मैं भी उसके साथ ही उसकी चूत में झड़ गया और उसके ऊपर ही गिर गया. जब थोड़ी सांस ठीक हुई, तो मैं अदिति के बगल में लेट गया. अदिति भी मेरे से लिपट गयी. मैं धीरे धीरे उसे सहलाने लगा.

वो बोली- अर्पित मैंने अपना सब कुछ तुम्हें दे दिया है, अब मुझे छोड़ना मत!
मैंने बोला- नहीं अदिति, मैं तुमसे शादी करना चाहता हूँ, बोलो तो कल ही अपनी माँ पापा को तुम्हारे घर भेज दूँ.
वो बोली- नहीं मुझे पहले अपना एम बी ए पूरा करना है … फिर शादी करूंगी.
मैंने बोला- ओके मुझे कोई दिक्कत नहीं है. मैं तुम्हारा इंतज़ार करूंगा.

फिर यूं ही बात करते करते हम दोनों की आंख लग गयी. जब आंख खुली तो अदिति बिस्तर पे नहीं थी. मैं उठा, अंडरवियर और अपनी जीन्स पहन के अदिति को आवाज़ लगाई, तो वो बालकनी में खड़ी बारिश को निहार रही थी.

उसने अपनी ड्रेस न पहन कर वार्डरोब से मेरी एक शर्ट पहन ली थी और नीचे सिर्फ पैंटी में थी. वो बेहद सेक्सी लग रही थी. उसके चेहरे पे बहुत मासूमियत थी और हवा से उड़ उड़ के बाल बार बार उसके फेस पे आ रहे थे.
उसके हाथ में शैम्पेन का ग्लास था, वो धीरे धीरे सिप कर रही थी.

मैं उसके पास गया, तो उसने अपना सर मेरे कंधे पे टिका लिया. वो बोली- अर्पित मुझे बारिश देखना बहुत अच्छा लगता है, देखो आज बादल भी धरती पे ऐसे बरस रहा है, जैसे ये दोनों एक दूसरे से मिलने के लिए जन्मों के प्यासे हों, जैसे हम तुम. जैसे तुमने आज मुझे अपने प्यार में भिगो दिया, डुबो दिया और मैं इसी तरह सारी ज़िन्दगी तुम्हारी प्यार में डूबी रहना चाहती हूँ.

मैंने प्यार से उसके माथे को चूमा और उसे और न पीने के लिए बोला.
तो वो बोली- अर्पित प्लीज आज मैं तुम्हें पा के बहुत खुश हूँ, आज मुझे मत रोको मुझे और शैम्पेन पीनी है, चलो और ले के आएं.

मैंने मुस्करा के उसे हां बोला, तो वो मुझसे लिपट गयी और चूमने लगी. उसने अपनी ड्रेस पहनी और हम शैम्पेन लेने चल दिए … एक नयी शुरुआत करने.

दोस्तो, यह थी मेरी और अदिति की प्रेमकहानी … इसके बाद हमारे बीच कई बार सेक्स हुआ, उसकी कहानी फिर कभी लिखूंगा. हम लिव इन रिलेशनशिप में भी रहे और हमारी अब शादी भी होने वाली है.
ट्रेन में मिली हसीना की चुदाई-3 (Train Me Mili Haseena Ki Chudai-3) ट्रेन में मिली हसीना की चुदाई-3 (Train Me Mili Haseena Ki Chudai-3) Reviewed by Priyanka Sharma on 3:12 PM Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.