टीचर के घर पर चुदाई का खेल-6 (Teacher Ke Ghar Pr Chudai Ka Khel-6)

टीचर के घर पर चुदाई का खेल-6
(Teacher Ke Ghar Pr Chudai Ka Khel-6)

अब तक आपने टीचर के घर पर चुदाई का खेल-5 (Teacher Ke Ghar Pr Chudai Ka Khel-5) में पढ़ा था मैंने और नम्रता ने सारी रात चुदाई के बाद एक दूसरे के हस्तमैथुन के द्वारा निकला हुआ रस भी चाटा. इसके बाद बाजार जाकर खाना आदि खाया. फिर मैंने उधर से एक कुप्पी खरीद ली. जिसका उपयोग हम दोनों अपने अपने मूत्र को एक दूसरे की गांड चूत में करने वाले थे.

अब आगे..

एक बार फिर लोगों की नजरों से बचते हुए मैं नम्रता के घर के अन्दर घुस गया. हम दोनों ही सोफे पर धंस कर बैठ गए और टीवी ऑन कर लिया.

थोड़ी देर तक टीवी देखते रहने के बाद, नम्रता अपनी बुर पर हाथ फेरते हुए बोली- शरद, अपने कपड़े उतारकर पीठ के बल लेट जाओ, तुम्हारी गांड में कुप्पी डालकर मुझे मूतना है.

उसकी बात को मानते हुए मैं नंगा होकर जमीन पर लेट गया. नम्रता भी तब तक अपने कपड़े उतार चुकी थी. वो मेरे पैरों के बीच बैठ गई. उसने मेरे कूल्हे पर तड़ाक-तड़ाक कर के दो तमाचे जड़ दिए और कुप्पी को गांड के अन्दर डालने लगी.

मेरी गांड टाईट थी, तो कुप्पी अन्दर कैसे जाती. नम्रता ने गांड को अच्छे से चाटने लगी और अपने थूक से मेरी गांड को अच्छे से गीला करने के बाद एक बार फिर वो कुप्पी अन्दर डालने लगी. इस बार गांड गीली होने की वजह से कुप्पी का किनारा अन्दर घुस गया.

ये देख कर नम्रता बड़ी खुश हुई और फिर उसके बाद कुप्पी को गोल-गोल घुमाते हुए उसने कुप्पी के लम्बे भाग को पूरा अन्दर पेल दिया.

फिर चहकते हुए बोली- नम्रता खुश हुई तुम्हारी गांड में कुप्पी डालकर, अब मैं तुम्हारी गांड के अन्दर मूतूँगी.

कुछ ही सेकेण्ड्स के बाद मुझे मेरी गांड के अन्दर गर्म-गर्म पानी का अहसास होने लगा. एक अजीब सा अहसास था, उस गर्म गर्म मूत की वजह से मेरी सांस तेजी-तेजी चलने लगी. वो गर्म मूत पूरा मेरी गांड के अन्दर नहीं जा रहा था, कुछ बूंदें ही मेरी गांड के कोमल हिस्से पर लग रही थीं.

कुछ देर बाद बड़ी निर्दयता से नम्रता ने वो कुप्पी को बाहर खींच लिया.. मैं आहह्ह करके रह गया. उसका वो गर्म पानी मेरी कमर पर, कूल्हे पर और आस-पास फैल गया था.

मैं उठा, तो थोड़ा गुस्सा करते हुए नम्रता बोली- तुम्हारी गांड के अन्दर मूत तो गया ही नहीं.
मैंने उसकी बात को काटते हुए कहा- नहीं कुछ बूंदें अन्दर गयी थीं.. और मुझे बहुत मजा आया.
इस पर नम्रता खुश होते हुए पूछने लगी- सही में अन्दर मूत गया है?
मैं- हां यार बिल्कुल, मुझे अन्दर तुम्हारी गर्म गर्म पेशाब का अहसास हुआ था. अभी मैं भी करूंगा, तो तुम्हें भी मजा आएगा.

इसी के साथ मैंने उसे चित्त लेटने के लिए कहा. क्योंकि मैं उसकी उस चूत को चाटने के लिए बेकरार हो रहा था, जिसमें अभी उसके कुछ मूत्र के अंश लगे थे.

जैसे ही नम्रता लेटी, मैंने उसकी बुर में जीभ लगा दी और उसके उस कैसेले स्वाद से भरी हुई चूत को चाटने लगा. फिर मैंने खड़ा होकर उसके दोनों पैरों को पकड़कर अपनी कमर तक उठा लिया. नम्रता ने भी कैंची बनाकर मेरी कमर को जकड़ लिया. अब मैं कुप्पी लेकर धीरे-धीरे उसकी चूत के अन्दर डालने लगा. जब कुप्पी पूरी तरह से चूत के अन्दर चली गयी, तो मैंने उसकी टांगों को ढीला करके नीचे की तरफ सरका दिया.

अब मेरा लंड कुप्पी के अन्दर था और मुझे अपने लंड को पकड़ने की जरूरत भी नहीं थी. इसलिए मैंने नम्रता के दोनों पैरों को पकड़कर रखा था. उसका इशारा पाते ही मेरे लंड ने भी अपनी टोंटी खोल दी. एक तेज धार के साथ कुप्पी मूत से भरने लगी. मैंने मूतना रोक दिया और कुप्पी खाली होने का इंतजार करने लगा. इधर नम्रता को भी जब मेरी गर्म पेशाब का अहसास अपनी चूत में हुआ, तो वो आह-ओह, आह-ओह करने लगी.

नम्रता- आह.. जानू बहुत गर्म है तुम्हारी पेशाब.

मेरा पूरा ध्यान उसकी चूत पर ही था. उसकी चूत के आस-पास से धार बाहर निकल रही थी, तब तक आधी कुप्पी खाली हो चुकी थी. फिर मैंने एक बार मूतना शुरू किया. कुप्पी भरने के बाद मैं मूतना रोक देता था. ऐसा दो-तीन बार किया.

लेकिन मुझे मजा नहीं आ रहा था, इसलिए मैंने कुप्पी को झटके से बाहर निकाला, तो पेशाब छलकते हुए बाहर आ निकली और थोड़ी बहुत पेशाब, जो उसकी बुर के अन्दर थी, वो भी बाहर आ गयी.

हम दोनों के कमर का हिस्सा गीला हो चुका था.

मैं- नम्रता.. इससे अच्छा तुम्हारी पेशाब लगी हुई चूत चाटना अच्छा लगता है, इसमें ज्यादा मजा नहीं आया.
नम्रता मुझसे चिपकते हुए बोली- यार इससे अच्छा तो तुम्हारे गर्म जिस्म से चिपक कर ऐसे ही खड़ी रहूं और तुम मेरे जिस्म को सहलाओ और गांड में उंगली करते रहो.
मैंने उसके कूल्हे को दबाते हुए कहा- इस बार तुम मुझे प्यार करो, मैं कुछ नहीं करूँगा.

बस मेरे इतना कहते ही वो मेरे होंठों को चूसने लगी और अपनी जीभ मेरे मुँह के अन्दर घुसेड़ कर मेरे तालू में चलाते हुए मजा लेने और देने लगी. वो मेरे होंठों को चूसती, उसके बाद मेरे निप्पल को दांतों के बीच लेकर काटती और अपनी जीभ से गीला कर देती.

इससे मेरे अन्दर हलचल सी होने लगी थी, लेकिन मैं बुत बनकर कमरे के बीचों बीच पैर फैलाये हुए खड़ा था.

नम्रता हल्के-हल्के अपने नाखून गड़ाकर मेरे जिस्म के एक-एक हिस्से को चाटते हुए मुझे सुकून दे रही थी. वो मेरे सीने को, मेरे निप्पल को चाटते हुए मेरी नाभि की तरफ बढ़ रही थी. फिर नाभि के अन्दर ही उसने अपनी जीभ चलाना चालू रखा.

कुछ देर वो नाभि को चाटती रही. फिर नीचे की तरफ बढ़ी और पंजे के बल बैठते हुए उसने अपने दोनों हाथ मेरी जांघों पर गड़ा दिए. मेरी जांघों के कोनों को वो चाटते हुए अंडों को मुँह में भरने की कोशिश करने लगी. इससे मेरे लंड महराज तन चुके थे, सो तने लंड को बिना हाथ लगाये, वो कभी सुपाड़े पर जीभ चलाती, तो कभी गप्प से लंड को अन्दर ले लेती और मजे से चूसती.

इसी के साथ नम्रता ने अपने एक हाथ का प्रयोग अपनी चूत पर करना शुरू कर दिया. वो अपनी उंगली को चूत के अन्दर डालकर अन्दर बाहर करने लगी. वो मेरे तने हुए लंड को भी चूस रही थी और अपनी बुर को भी चोद रही थी.

फिर नम्रता खड़ी हुई और उसने अपनी उंगली को मेरे मुँह के अन्दर डाल दिया. जो भी रस उसकी उंगली में लगा था, वो सब मेरी जीभ पर उंगली चलाकर हटा रही थी.

वो पंजे के बल बैठकर अपना जलवा दिखाने लगी. इस तरह उसने कई बार किया.

जब आगे के हिस्से को उसने अच्छी तरह चाट लिया, तो मेरी टांगों के बीच से होते हुए पीछे आ गयी. मेरे कूल्हे को फैलाकर उंगली से खोदने लगी. फिर उसकी नाक का अहसास मुझे छेद में होने लगा और फिर जीभ चलने का अहसास होने लगा. मेरी गांड काफी गीली हो चुकी थी.

फिर वो आगे आयी और एक बच्चे की तरह मेरी गोदी में चढ़ गयी. उसने अपने पैरों की कैंची बनाकर मेरी कमर में फंसा दी और अपने को एडजस्ट करते हुए लंड को अपनी चूत के अन्दर लेकर मेरे होंठों को चूसते हुए धक्के लगाने लगी.

मैंने भी उसे अपनी बांहों में जकड़ लिया और उसके धक्के का अहसास करने लगा.

धीरे-धीरे उसकी चूत की थाप मेरे लंड पर बढ़ती जा रही थी. चूत और लंड के घर्षण से जो थप-थप की आवाज आ रही थी, वो पूरे कमरे में आराम से सुनाई पड़ रही थी.

काफी देर तक इस तरह वो मुझे चोदती रही. फिर नम्रता गोदी से उतरी और मेरा हाथ पकड़ कर मुझे पलंग तक ले आयी. उसने मुझे पलंग पर लेटाकर मेरे मुँह पर अपनी चूत टिका दी. बाकी का मेरा काम था, सो मैंने भी उसकी गीली चूत को अच्छे से चाटा.

बन्दी जब तक मेरे मुँह से नहीं हटी, जब तक कि उसकी चूत की अच्छे से चटाई नहीं हो गयी.

फिर वो नीचे आयी और बारी-बारी से अपने दोनों छेद में मेरे लंड को लेती रही और मुझे कस कर चोदती रही.

मेरे अकड़ते हुए जिस्म पर उसका पूरा ध्यान था, मेरे मुँह से ओह-ओह की आवाज सुनकर वो मेरे लंड से उतरी और 69 की पोजिशन पर आ गयी.

वो भी अब फारिग हो चुकी थी, उसकी मलाई मेरे जीभ पर लग रही थी, जबकि मैं उसके मुँह के अन्दर अपना माल छोड़ रहा था.

उसने अच्छे से मेरी चुदाई की. थकने के बाद हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर लेट गए.
टीचर के घर पर चुदाई का खेल-6 (Teacher Ke Ghar Pr Chudai Ka Khel-6)
टीचर के घर पर चुदाई का खेल-6 (Teacher Ke Ghar Pr Chudai Ka Khel-6)
मैंने उसके बालों को सहलाते हुए कहा- यार एक बात नहीं समझ में आयी, तुम्हारा एक बच्चा भी है, फिर भी तुमको अपने पति से शिकायत क्यों है?
नम्रता- मेरा बच्चा तो मेरी नौकरी के चलते अपनी नानी के घर रहता है. बाकी मुझे अपने पति से कोई शिकायत नहीं है, यार.. पर वो पहले जैसा ध्यान नहीं देता. अब जब उसका मन होता है, तो मेरे साथ चुदाई कर लेता है और जिस दिन मेरी बहुत इच्छा होती है कि वो मुझे रगड़े, मसले, इतनी ताकत से चोदे कि मेरा रोम रोम मस्त हो जाए, तो उस दिन वो मेरी तरफ देखता भी नहीं है. फिर मुझे अपनी चूत से पानी निकालने के लिए उंगली करनी पड़ती है. तुम्हें तो पता ही होगा कि नींद तब तक नहीं आती, जब तक चूत का पानी बाहर न आ जाए.
मैं- कहीं उसका बाहर चक्कर तो नहीं है?
नम्रता- अरे मैं कब मना कर रही हूं. अगर कोई उसको अपनी चूत दे रही है, तो उसकी चूत को खूब चोदे, लेकिन मेरी भी चूत की प्यास भी तो बुझाये.
मैं- हम्म..
नम्रता- देखो कल का दिन ही हमारे लिए है, परसों रात तक सभी आ जाएंगे. तो परसों तुम मेरे घर चलोगी, वहीं पर एक-दो राउन्ड चुदाई का चलेगा और फिर मैं तुम्हें मेरी बीवी की अलमारी दिखाउंगा. मैं उसके लिए अक्सर सेक्सी कपड़े लाता रहता हूं.. तुम देख लेना, जो पसंद आए, पहनकर अपने पति को रिझाने की कोशिश करना. शायद वो तुम्हारे हुस्न का एक बार फिर दीवाना हो जाए.
नम्रता- चलो देखूंगी. ये बताओ क्या तुम्हारी बीवी वो कपड़े नहीं पहनती?
मैं- यार यही तो बात है, तुम चाहती हो कि तुम्हारा आदमी तुमको रगड़ कर चोदे और मैं चाहता हूं कि मेरी औरत को मैं रगड़ कर चोदूं. पर दोनों जगह उल्टा है.

यही सब बात करते हुए मेरी नजर बाहर बदलते हुए मौसम पर पड़ी.

मैंने कहा- आओ छत पर चलें.
नम्रता- यार ये कौन सी सनक है. अभी रोशनी है.
मैं- अरे मैंने कल रात देख लिया है, बाउण्ड्री काफी ऊंची है. आओ मौसम बहुत सुहाना है, उसका मजा लेते हैं.

नम्रता ने भी बाहर नजर डाली और छत पर चलने को तैयार हो गयी. छत पर ठंडी हवा बह रही थी और शायद बारिश भी हो सकती थी. कोई चार पांच मिनट ही बीते थे कि मोटी-मोटी बूंदें हमारे ऊपर गिरने लगीं. दूसरी बिल्डिंग में जो कोई एक-दो लोग दिख भी रहे थे, वो भी बारिश की वजह से छत से चले गए थे. मंत्र-मुग्ध होकर नम्रता उठी और गोल-गोल होकर नाचने लगी, उसकी पायल की झनकार मेरे कानों में रस घोल रही थी.

बारिश और तेज हो गयी थी. मैं तो भीगने के उद्देशय से ही छत पर आया था. मैंने चारों ओर की छतों पर नजर दौड़ाई, पर आस-पास की छत पर कोई नजर नहीं आया. नम्रता बिंदास होकर अभी भी गोल-गोल घूमे जा रही थी. बारिश इतनी तेज हो गई थी कि छत पर बारिश का पानी जमा होने लगा और देखते ही देखते छत तालाब बन चुका था. उधर पानी में छप छप करते नम्रता की नजर मेरे तने हुए लंड पर पड़ी, वो दौड़ते हुए आयी और मेरी गोद में अपनी टांगें कैंची सी कसती हुई चढ़ गयी और लंड को चूत के अन्दर लेकर धक्के पर धक्का पेलने लगी.

कुछ 10-12 धक्के लगाने के बाद नम्रता नीचे उतरी और झुकते हुए उसने अपनी चूत का मुँह मेरे लंड की ओर कर दिया. मैं भी उसको चोदने लगा, लेकिन यह क्या, फिर वही कहानी, 10-12 धक्के के बाद वो अलग हुई और जमीन पर नागिन की भाँति लेटकर रेंगने लगी और अपनी जीभ को छत पर भर चुके पानी पर चलाने लगी.

मैं भी जमीन पर बैठ गया. मेरा लंड भी अपना कोण बना कर खड़ा हुआ था. उधर नम्रता अपनी जीभ से पानी की धार को काटते हुए मेरी तरफ बढ़ रही थी और बढ़ते-बढ़ते उसने गप से लंड को मुँह के अन्दर ले लिया. उसके बाद उसने अपने मुँह में पानी को भरा और लंड में पानी को उड़ेल दिया और सुपाड़े को वो दांत से काटने लगी.

फिर अचानक वो एकदम से मेरे ऊपर चढ़ी, जिससे मैं संभल नहीं पाया और धड़ाम से जमीन पर लेट गया. मेरे जनीन पर लेटते ही वो 69 की पोजिशन में आ गयी. मैंने अपनी जीभ बाहर की और उसकी चूत से होता हुआ, जो पानी की बूंदें टपक रही थीं, उनको जीभ पर लेने लगा. पर वो अपनी गांड मटका-मटका कर मुझे चूत और गांड चाटने के लिए इशारा कर रही थी.

पहले तो मैंने उसकी फांकों के आस-पास जीभ चलाना शुरू किया, फिर फांकों को फैलाकर अन्दर लालिमा युक्त घेरे पर अपनी जीभ चलाने लगा. बरसात के पानी के साथ साथ उसकी चूत को चाटने लगा.

थोड़ी देर बाद मैंने अपने ऊपर से नम्रता को हटाया और उसको सीधा लेटाते हुए, उसके मुँह पर अपनी गांड टिका दी और उसके दोनों चूचों को भींचने लगा. नम्रता भी मेरे कूल्हे को फैलाकर मेरी गांड चाटने में मस्त हो गयी.

भारी बरसात में इस तरह का सेक्स एक अलग सा रोमांच पैदा कर रहा था. मैं जब उसके चुचे कसकर दबाता, तो वो मेरे कूल्हे को काट लेती और अंडों को कसकर भींच लेती. अच्छी तरह से गांड चटवाने के बाद मैं नम्रता की टांगों के बीच आ गया और लंड को चूत में पेलकर चुदाई करना शुरू कर दिया.

नम्रता खूब तेज-तेज चिल्ला रही थी, उस भरी बरसात में कोई सुनने वाला नहीं था.

नम्रता- आह फाड़ दो मेरी बुर को.. साले भोसड़ी के और चोद.. और कस कर चोद मादरचोद..

वो मुझे गाली बक रही थी और मैं उसे चोदे जा रहा था. जितना तेज वो चिल्लाती, उतना ही तेज मैं उसकी बुर को चोद रहा था.

अचानक उसने मेरी कमर को अपने पैरों से जकड़ लिया. मेरा लंड उसकी बुर में फंसा था और मैं हिल नहीं पा रहा था. इसलिए मैं उसके ऊपर झुककर उसके निप्पल को बारी-बारी मुँह में भरकर चूसने लगा. मेरा लंड चूत के अन्दर हुंकार भरे जा रहा था. नम्रता के झड़ने से जो पानी निकल रहा था, वो मेरे लंड को गीला कर रहा था. नम्रता पूरी तरह झड़ चुकी थी, लेकिन मेरे लंड की खुजली मिट नहीं रही थी. सो मैं अभी भी नम्रता को चोदे जा रहा था.

थोड़ी देर तो उसने बर्दाश्त किया, पर अन्त में चिल्ला पड़ी- अबे भोसड़ी के तेरा लंड क्या पूरी ताकत मेरी चूत चोदने में लगाएगा, लौड़े के.. चूत के छेद के अलावा भी और छेद हैं.

अब मैं भी चिल्ला उठा- हां मादरचोदी.. मैं सोच रहा हूं अब तेरे मुँह को चोदूं.

मेरा इतना कहना था कि वो बड़े प्यार से बोली- मेरे राजा, मैं भी कह रही हूं. आजा, मेरे राजा मेरा मुँह चोद कर मुझे अपना रस भी चखा दे हरामी.

इतना सुनने के बाद मैं उसके मुँह की तरफ आया और उसके सिर को अपनी हथेली पर लेकर उठाया और लंड को उसके मुँह पर ले गया. उसने भी लंड की गोलाई में अपने मुँह को खोलकर मेरे लंड को अन्दर ले लिया. मैं भी उसके मुँह को चोदकर अपने लंड की खुजली मिटाने लगा.

कुछ ही देर में मेरे लंड की खुजली मिट गयी और मेरे लंड ने उसके मुँह के अन्दर ही उल्टी कर दी. नम्रता ने पूरे इत्मिनान के साथ मेरे रस को पीया.

फिर जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत से बाहर आया, मैं लस्त होकर उसके बगल में लेट गया. कुछ देर तक दोनों एक-दूसरे के अगल बगल लेटे हुए थे. नम्रता मेरे ऊपर चढ़ गयी और मुझसे बोली- थैक्स शरद.
मैं- किस बात का थैंक्स नम्रता.
नम्रता- तुमने मुझे बहुत बड़ा सुख दिया है, मुझे जिस सेक्स की चाहत थी, वो तुमने पूरी कर दी.
मैं- अरे यार, अगर ऊपर वाला चाहेगा, तो तुम्हारा मर्द भी तुम्हें मजा देगा.

नम्रता मेरी नाक पकड़ते हुए बोली- शरद अगर तेरी बात सही निकली, तो तुझे मेरे मर्द ने मेरी किस तरह चुदाई की, पूरी कहानी बताउंगी.
मैं- चल ठीक है, पर तू गाली बहुत बकती है.
नम्रता- अरे यार क्या लड़कियों वाली बात करते हो, तुम्हारे जैसे पार्टनर के साथ गाली बककर अपनी चूत चुदवाने का मजा अलग है.
मैं- चल अब नीचे चलें. अंधेरा भी हो रहा है और मुझे भूख भी खूब लगी है.
नम्रता- चलो नहा धोकर कुछ खाना बनाती हूं, उसके बाद थोड़ा आराम भी करेंगे.
मैं- हां यार थक तो मैं भी गया हूं.

फिर हम दोनों नीचे आ गए. नम्रता के फोन की घंटी बज रही थी, फोन उसके पति का आ रहा था. फोन रिसीव करके नम्रता हैलो बोली.

इधर मैंने नम्रता को पीछे से जकड़कर उसकी फांकों को सहलाना शुरू किया, तो वो आह-आह करने लगी.

इस बीच नम्रता ने फोन स्पीकर मोड में कर दिया.
उधर से उसके पति महोदय बोले- नम्रता ये आह-आह क्या हो रहा है?
नम्रता भी बड़ी मादक आवाज में बोली- जान, मेरी चूत तुम्हारे लंड के इंतजार में बेसब्र हुई जा रही थी, सो मैं अपनी उंगली को तुम्हारा लंड समझकर अपनी चूत में डाल रही हूं. उसी अहसास के साथ आह-आह निकल रहा है.

पति- क्या बात है तुम्हें मेरी बहुत याद आ रही है?
नम्रता- मैं कहां तुम्हें याद कर रही हूं, अगर मेरे जिस्म में चूत नाम की चीज नहीं होती, जिसे तुम्हारे लंड की जरूरत महसूस होती रहती है, तो मैं तुम्हें हरगिज याद नहीं करती.
उधर से फिर आवाज आयी- नम्रता, तुम ऐसी बात करके मुझे उत्तेजित मत करो.
नम्रता- मैं तो चाहती हूं कि तुम उत्तेजित हो, जिससे मेरी चूत को तुम्हारा लंड मिले.
पति- देख नम्रता ऐसी बात मत कर, नहीं तो मैं सब छोड़-छाड़ कर आ जाऊँगा और तुझे पटक-पटक कर चोदूंगा.
नम्रता- अरे मेरे राजा, तुम उड़कर आ जाओ और अपना लंड मेरी चूत में पेल दो.
पति- यार तुमने आज सेक्सी आवाज के साथ मुझे उत्तेजित कर दिया, मुझे भी आज तुमने आज सड़का मारने के लिए मजबूर कर दिया.
नम्रता- चल मेरे राजा, बर्दाश्त कर लो, पर सड़का मत मारो, अपना यह पूरा गुस्सा मेरी चूत के लिए बचाकर रखो, परसों मेरी चूत चोद-चोदकर पूरा गुस्सा निकाल लेना.

उधर से फिर पति महोदय की आवाज आयी- अच्छा मैं फोन काट रहा हूं. तुम्हारी ये सेक्सी आवाज और सेक्सी बात सुनकर मैं अपना लंड मसल रहा हूं, कहीं मेरा माल निकलकर मेरी पैंट न खराब कर दे.
नम्रता- ठीक है तुम फोन बंद करो, मैं भी अपनी चूत में उंगली डालकर माल नहीं निकालूंगी, बस मुझे परसों का इंतजार रहेगा. अब तुम्हारा लंड ही मेरा माल निकालेगा.

इतना कहकर नम्रता ने फोन काट दिया. उसके फोन काटते ही मैं बोल उठा- अब तो मेरी जरूरत खत्म.. मैं घर चलूं?
नम्रता- नहीं मेरे राजा, तुम्हारे साथ मुझे मेरे पति के आने तक पूरा समय नंगी रहकर ही बिताना है. तुम्हारे कारण ही तो मैं इतना सोच पायी कि कैसे अपने पति को रिझाना है. तुमने तो मेरे मर्म को समझते हुए मेरा साथ दिया. आओ चलो नहा लिया जाए.

ये कहकर मेरा हाथ पकड़कर वो मुझे बाथरूम में ले गयी. शॉवर ऑन करके मेरे साथ चिपककर नहाने लगी. फिर हम दोनों ने एक दूसरे को साबुन लगाकर अच्छे से मलने के बाद फिर शॉवर के नीचे नहाने लगे. मुझे पता नहीं कि मेरे जिस्म की गर्मी का अहसास उसको था कि नहीं, लेकिन शॉवर के नीचे नहाते हुए भी वो मुझसे जब-जब चिपकती, मुझे उसके जिस्म की गर्मी का अहसास हो जाता था.

नहाने के बाद नम्रता रसोई में गयी और खाना बनाने की तैयारी करने लगी. मैं उसके साथ ही रसोई में था, हालांकि हम दोनों के बीच कोई बात नहीं हो रही थी. पर एक बात थी कि खाना बनाने की तैयारियों के बीच वो मुझसे चिपकती, फिर पलटी मार के अपनी पीठ को मेरे सीने से चिपकाती और फिर मुझे पीछे से पकड़ लेती.

यह क्रम तब तक चलता रहा, जब तक उसने पूरा खाना नहीं बना लिया. उसके बाद भी जब खाना खाने की बारी आयी, वो मेरी एक जांघ पर बैठ कर खाना खाने लगी. खाना खत्म होने के बाद दो घंटे हम लोग बैठकर टीवी देखते रहे. मेरा लंड तना हुआ था, पर चुदाई का मूड नहीं हो रहा था. लेकिन जो बात मुझे समझ में नहीं आ रही थी, वो ये कि वो बार-बार मुझसे चिपक क्यों रही थी. दिमाग खपाने से अच्छा नम्रता से पूछना ही था.

सो मैंने नम्रता से पूछ ही लिया- जान ये बताओ कि तुम खाना बनाते समय भी बार-बार मुझसे चिपक रही थी और फिर तुमने मेरी जांघ पर बैठकर खाना खाया, क्या बात थी?
नम्रता- कुछ नहीं, खाना बनाते समय बरसात के कारण मुझे बीच-बीच में ठंडक लग रही थी, सो अपने जिस्म को गर्म करने के लिए मैं तुम्हारे जिस्म से चिपक जाती और फिर अपना काम करने लगती. दो तीन बार ऐसा करने के बाद मुझे मजा आने लगा, तो मजे के लिए मैं तुम्हारे जिस्म से चिपक जाती.

नम्रता की बात सुनकर मैंने मन में कहा कि बुर चुदाने जाए साला मूड. मैंने नम्रता को गोद में उठाया और पलंग पर पटककर उसके बगल में लेटते हुए उसके निप्पल को मुँह में भर लिया और चूची को मसलने लगा.

नम्रता भी मेरे सर को सहलाते हुए बोली- जान ऐसे ही मेरी चूची चूसो.

मैं बारी-बारी उसकी चूची पी रहा था और दबा रहा था. उसके दूध को पीते हुए मैं लगभग उसके ऊपर चढ़ चुका था. नम्रता ने अपनी टांग फैलायी और लंड पकड़ के चूत के मुहाने पर घिसने लगी.

इधर मैं उसके मम्मों के साथ खेल रहा था और उसके होंठों पर अपनी जीभ चला रहा था, नम्रता भी मेरी जीभ को अपने अन्दर लेकर जोर से चूसती. मेरे लंड को नम्रता अभी भी चूत के मुहाने पर रगड़ रही थी. मैं थोड़ा ऊपर सरक गया, इससे लंड सीधा उसकी चूत के अन्दर चला गया.

बस अब क्या था, अब चूत चुद रही थी और मैं धक्के लगा रहा था. कभी मैं नम्रता के ऊपर चढ़कर बुर चोदता, तो कभी नम्रता मेरे ऊपर चढ़ाई करते हुए मेरे लंड के साथ खेलती. इसी खेला खेली दोनों के अन्दर का वीर्य रूपी ज्वार निकलने को मचलने लगा. हम दोनों इतनी तेज-तेज गुत्थम-गुत्था कर रहे थे कि दोनों एक दूसरे के अन्दर समा जाने के लिए बेकरार हुए जा रहे थे. वीर्य की धारा छूटने को तैयार थी, लेकिन मैं लंड को चूत से निकालने को तैयार नहीं था और नम्रता भी नहीं चाह रही थी. इसलिए वो अपनी कमर उचका-उचका कर लंड को जितना अन्दर ले सके, लेने का प्रयास कर रही थी. तभी वो पल आ गया, जब दोनों का जिस्म शिथिल हो गया. मैं नम्रता के ऊपर लेट गया और नम्रता ने मुझे चिपका लिया, मेरा लावा बहते हुए नम्रता की चूत को गीला कर रहा था और उसका लावा मेरे लंड को गीला कर रहा था.

जैसे-जैसे दोनों का माल बाहर आ रहा था, दोनों की ही एक-दूसरे पर पकड़ ढीली पड़ती जा रही थी और जैसे ही नम्रता की बांहों का बन्धन खुला, मैं लुढ़कते हुए उसके बगल में लेट गया. हम दोनों के जिस्म को शांति मिल चुकी थी. दोनों ने करवट ली और एक दूसरे को अपने आगोश में ले लिया और पता ही नहीं चला कि कब नींद आ गयी.

सुबह नींद नम्रता के पति देव के फोन आने के बाद खुली. घड़ी पर नजर पड़ी तो 9 बज रहे थे. हड़बड़ाते हुए उसने मोबाईल उठाया.

नम्रता जम्हाई लेते हुए हैलो बोली, तो दूसरी तरफ से आवाज आयी- नम्रता तुम आज स्कूल नहीं गयी क्या.. और क्या तुम नींद में हो?
नम्रता- हां, नहीं..
पति- ये हां, नहीं क्या है?

अब तक नम्रता संभल चुकी थी. उसने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराने लगी, मुझे समझ में आ गया कि नम्रता फिर अपने पति महोदय की अच्छे से बजाने जा रही है.

फिर वो बोली- नहीं ऐसी बात नहीं है, स्टॉफ रूम में सब लोग थे, सो मैं बाहर आने के लिए ऐसा कर रही थी. लेकिन क्या बताऊं.. रात में तुमसे बात करने के बाद तुम्हारी उंगलियों को अपने जिस्म पर महसूस कर रही थी और मेरी आंखों से नींद उड़ चुकी थी. बहुत बेचैनी हो रही थी.
पति- हां यार तुमसे बात करने के बाद मुझे भी बेचैनी बहुत होने लगी थी.
नम्रता- तो तुमने क्या किया? तो तुमने क्या किया?

नम्रता ने दो बार पूछा.

पति- कुछ नहीं.. यार
नम्रता- देखो तुम झूठ बोल रहे हो.

दो-तीन बार दोनों तरफ से हां.. हां और ना-ना हुआ. अन्त में नम्रता बोली- ठीक है मत बताओ, मैं फोन काटने जा रही हूं.
पति- अरे रूको यार बताता हूं. मेरा मन नहीं लग रहा था और तुमसे बात होने के बाद मेरा लंड ढीला होने के नाम नहीं ले रहा था और सबके सामने मैं इस तरह रह भी नहीं सकता था, बार-बार तुमसे हुई बात मेरे जहन में आ रही थी, इसलिए मैं तुरन्त होटल आया और नंगा होकर तुम्हारा नाम लेते हुए मुठ मारने लगा.
नम्रता बात काटते हुए बोली- देखो तुमने वादा तोड़ दिया. मेरी चूत तुम्हारे लंड के इंतजार में थी.
पति- सॉरी यार, अगर मुठ नहीं मारता, तो मैं शांत नहीं हो सकता और वादा करता हूं कि घर आने पर तुमको बहुत खुश कर दूंगा.

पति देव की बात खत्म होते ही नम्रता ने मुझे आंख मारकर कहा- मेरे प्यारे पति देव तुम भी मुझे माफ कर दो, मैं भी कल तुमसे बात करने के बाद बहुत बेचैन हो गयी थी और नींद नहीं आ रही थी, सो मैंने भी तुम्हारा नाम लेकर अपनी उंगली से ही अपने बुर की चुदाई कर ली.
पति- मतलब तुमने भी वादा खिलाफी की.
नम्रता सॉरी कहते हुए बोली- तुम जो सजा दोगे, मैं स्वीकार करती हूं.
पति- ठीक है, सजा तो दूंगा मैं.. वापस आकर तुम्हारी गांड भी मारूंगा.
नम्रता- अरे नहीं, तुम मेरी गांड में अपना लंड डालोगे.
पति- हां मेरी रानी, तुमको मैं बहुत प्यार करूँगा.
नम्रता- मेरे राजा जल्दी आ जाओ, मेरी चूत तुम्हारे लंड के इंतजार में मरी जा रही है.
पति- मेरी रानी चिंता मत करो, तुम्हारी अब मैं सब ख्वाहिशें पूरी करूँगा. आई लव यू मेरी जान.
नम्रता बोली- आई लव यू टू जान.

फिर नम्रता ने फोन काट दिया. अब तक मैं टेक लगाकर दोनों की बात सुन रहा था. मेरे पैरों पर बैठ कर नम्रता मुझे भी ‘आई लव यू’ बोली और साथ ही उसने कहा- ये सब तुम्हारी वजह से हुआ है.

ठीक इसी वक्त मेरा पेट गरड़ गरड़ करने लगा, जिससे मेरी पाद छूट गयी. मेरे पादते ही नम्रता भी पादने लगी. जब वो अच्छे से पाद चुकी, तो मुझसे बोली- मेरे पादने का तुम बुरा तो नहीं माने न?

मैं- नहीं मैं क्यों बुरा मानूंगा. यार पेट-वेट मेरे पास भी है, तो तुम्हारे पास भी तो है.

उसके बाद हम दोनों बारी-बारी से फ्रेश हुए. फिर नम्रता चाय बनाकर लायी और मुझे देते हुए बोली- शरद मैं तुम्हारा अहसान जिंदगी भर तक नहीं भूलूंगी. अगर तुम मेरी जिंदगी में नहीं आए होते, तो जो मुझे अब मिलने जा रहा है, कभी नहीं मिलता.

मैं- अरे कोई बात नहीं मेरी जान, बीच-बीच में जब तुम्हें मौका मिले, तो अपना दूध मुझे पिला देना.
नम्रता- अरे नहीं मेरे राजा, तुम जब कहोगे, मैं तुम्हें अपना दूध और चूत सब पिलाने आ जाऊँगी.
मैं- नहीं जान, अगर मैंने बुलाया और तुम नहीं आईं, तो वो अच्छा नहीं लगेगा मुझे. इसलिए जब तुम्हारा मन करे तब ही.
नम्रता- ठीक है शरद.

चाय पीने के बाद हम दोनों एक दूसरे से चिपक कर बैठे रहे. थोड़ी देर बाद नम्रता ही कटोरी में तेल लेकर आयी.

वो नीचे बिछौना बिछाते हुए बोली- आओ शरद, आज मैं तुम्हारी मालिश भी कर दूं.
मैं- हां ये आईडिया सही है. तुम मेरी मालिश करो, मैं तुम्हारी मालिश करता हूँ.

इतना कहने के साथ ही मैं बिछौने पर लेट गया और नम्रता ने मेरे सीने पर थोड़ा तेल गिराते हुए मेरी मालिश शुरू कर दी. उसके कोमल हाथ जब मेरे सीने पर पड़े हुए तेल को लगाने के लिए चलने लगे, एक अलग ही आनन्द की अनुभूति होने लगी. विशेष रूप से जब जब वो मेरे निप्पल को अपनी चुटकियों से बीच-बीच में मसलती. उसके कोमल हाथ ऊपर से नीचे फिसल रहे थे, तो नीचे से ऊपर की तरफ भी बड़े आराम से बढ़ रहे थे.

दोस्तों जानबूझकर नम्रता ने अपनी चूतड़ ठीक मेरे सोये हुए लंड के ऊपर रखे हुए थी. जाहिर है कि उसके छेदों से निकलती हुई गर्म हवा मेरे लंड को कब तक सोने देती. धीरे-धीरे लंड भी फुंफकार के साथ तनने लगा और एक झटका लेते हुए उसकी गांड से लड़ जाता.

नम्रता अभी भी उसी तरह बैठे हुई थी और उसने मेरी मालिश करना चालू रखी थी. उसकी उंगलियों का मेरे निप्पलों को चुटकियों से मसलना जारी था. बीच-बीच में अंगूठे से वो मेरी नाभि को भी खुरच देती थी.

इधर लंड महराज भी टन्नाते हुए उसकी गांड से टकरा जाते. तभी नम्रता लंड को हाथ में पकड़ कर बोली- तुम्हारा लंड बहुत फड़फड़ा रहा है, जरा इसको फांक की सैर करा दूं.

ये कहकर अपनी चूत द्वार से लेकर फांकों के बीच रगड़ते हुए दो बार ऊपर नीचे किया.

फिर लंड छोड़ते हुए नम्रता बोली- अब बेचारे को राहत मिली होगी.

लेकिन यह क्या, लंड महाराज एक बार फिर से उसकी गांड से टकरा गए.

नम्रता- शरद, तुम्हारा लंड मान नहीं रहा है.
मैं- उस बेचारे की कोई गलती नहीं है, तुम्हारी गांड और चूत से जो गर्म हवा निकल रही है, वो ये बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है.
नम्रता- हम्म.. फिर तो दूसरा इलाज करना पड़ेगा.

ये कहकर नम्रता ने लंड को अपनी चूत के अन्दर कैद कर लिया और पाल्थी मार कर मेरी जांघों के ऊपर बैठ गयी.

नम्रता बोली- अब तुम्हारे लंड को कैद की सजा मिल गयी है.. अब बेचारा अंधेरे में नहीं फड़फड़ायेगा.
मैं- नहीं, अब तो ज्यादा फड़फड़ायेगा, क्योंकि कैद इसको पसंद नहीं है.
नम्रता- हां यार तुम सही कह रहे हो, अन्दर तो और फड़फड़ा रहा है.

फिर नम्रता पालथी खोलते हुए आगे झुककर लंड की चुदाई करने लगी. चुदाई करते हुए अचानक नम्रता ने लंड को चूत से बाहर निकाला और बोली- पहले इसकी अच्छे से मालिश कर दूं, फिर इससे अपनी चूत की मालिश करवाऊंगी.

इतना कहकर उसने अपनी हथेली पर तेल लिया और लंड पर प्यार से मालिश करने लगी. बीच में ही वो सुपाड़े पर पप्पी ले लेती. काफी देर तक और अच्छे से मालिश करने के बाद उसने गप्प से लंड को अन्दर लिया और अपनी दोनों हथेलियों को मेरे सीने पर रखते हुए धक्के लगाने लगी.

आह-आह, ओह-ओह करते हुए नम्रता अपनी चुदाई की गति को तेज करने लगी.

काफी देर तक नम्रता की चूत के अन्दर मेरा बेचारा लंड अपने माल को न निकलने देने के लिए संघर्ष करता रहा, पर चूत के आगे अन्त में हार ही गया और माल छोड़ने लगा.

नम्रता भी धक्के लगाते हुए काफी थक चुकी थी, पर लंड पर विजय पाने के बाद वो मेरे ऊपर लेट गयी. मैं भी नम्रता की नंगी पीठ को सहलाता रहा. मैं दयनीय हालत में आए हुए अपने लंड के बारे में सोचता रहा, जो कुछ देर पहले तक इतना जोश में था कि चूत भी उसको कस कर जकड़े हुए थी. फिर जैसे ही लंड महाराज की अकड़न ढीली क्या हुई, चूत ने भी उसे बाहर निकलने का रास्ता दे दिया.
अगला भाग : टीचर के घर पर चुदाई का खेल-7 (Teacher Ke Ghar Pr Chudai Ka Khel-7)
टीचर के घर पर चुदाई का खेल-6 (Teacher Ke Ghar Pr Chudai Ka Khel-6) टीचर के घर पर चुदाई का खेल-6 (Teacher Ke Ghar Pr Chudai Ka Khel-6) Reviewed by Priyanka Sharma on 12:55 PM Rating: 5

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