शालू भाभी की गैरमर्द से चुदने की हवस (Shalu Bhabhi Ki Gairmard Se Chudne Ki Hawas)

शालू भाभी की गैरमर्द से चुदने की हवस
(Shalu Bhabhi Ki Gairmard Se Chudne Ki Hawas)

हाय दोस्तो… आपकी शालिनी भाभी एक बार फिर से आप सबके लंड खड़े करने आ गई है अपनी एक नई कहानी लेकर! बात आज से लगभग एक साल पहले की है, सर्दी अपने पूरे चरम पर थी, मेरे पीहर में कोई शादी का प्रोग्राम था, मम्मी पापा का फ़ोन आया और बताया कि मेरे चाचा की लड़के की शादी बारह दिसम्बर को तय हो गई है और मुझे और मेरे पति को बच्चो सहित चार पांच दिन पहले आने के लिए बोला.

बात करते करते मेरी चाची और चाचाजी से भी मेरी बात करवाई तो चाचा और चाची ने कहा- शालू पिछली बार जब तू आई थी तो तूने वादा किया था कि भाई की शादी में पांच दिन पहले आएगी. अब शादी आ गई है तो अपना वादा भूलना नहीं और पूरे परिवार के साथ चार-पांच दिन पहले पहुँच जाना और शादी की जिम्मेदारी संभालो आकर!

मैं भी बहुत उतावली हो रही थी अपने भाई की शादी में जाने के लिए तो मैंने चाचा और चाची को बोला- ठीक है, हम सब पांच दिन पहले पहुंच जाएंगे.

शाम को जब पति ऑफिस से आए तो मैंने उन्हें बताया- कुणाल की शादी तय हो गई है बारह दिसम्बर को. तो आप कल ही छुट्टी की एप्लीकेशन लगा दो, हमें पांच दिन पहले वहां जाना है.
पति ने कहा- नौ और दस दिसंबर को तो हमारे बैंक की दो नई ब्रांच का उद्घाटन अपने शहर में होने वाला है. और बॉस ने सम्पूर्ण जिम्मेदारी मुझे दी है तो मैं तो शादी में ग्यारह दिसंबर को ही आ पाऊंगा और बच्चों के भी पेपर शुरू होने वाले हैं. वो भी पच्चीस दिसम्बर से पहले ख़त्म नहीं होंगे.

और फिर मुझसे बोले- तुम कार लेकर चली जाओ.
मैंने भी सोचा कि पति के कारण में अपने भाई की शादी का प्रोग्राम क्यों कैंसिल करूं.

फिर मैंने मेरी सासूजी को फोन मिलाया और बोली- मम्मी जी, आप प्लीज हमारे घर आ जाइए. मुझे कुणाल की शादी में जाना है और बच्चों के एग्जाम शुरू होने वाले हैं तो बच्चों की देखभाल के लिए आपको यहां आना पड़ेगा.
सासुजी ने कहा- बेटी, तुम आराम से जाओ. मैं और तेरे ससुर जी दोनों कल शाम को ही तुम्हारे घर आ जाते हैं।

अगले दिन जब मेरी सास और ससुर जी दोनों घर पर आए तो मैंने सासू मां से बोला- मम्मी, मुझे कुणाल की बहू के लिए पोशाक और कुणाल के लिए अपने घर की तरफ से कुछ कपड़े और सामान लेना है तो आप मेरे साथ मार्केट चलो.
मैं और मम्मी तैयार होकर शाम को मार्केट चले गए. वहां से मैंने कुणाल की पत्नी के लिए मेरे घर की तरफ से पोशाक और कुणाल के लिए भी कपड़े के लिए और शाम को वापस घर आ गए.
चार-पांच दिन बाद मुझे मेरे पीहर जाना था।

पीहर जाने वाले दिन से पहले वाली रात में मैंने और मेरे पति ने जमकर चुदाई की, मैंने पति को बोला- मैं तुम्हारे लंड के बिना चार-पांच दिन कैसे रहूंगी जानू, मेरी चूत को रोज लंड की जरूरत है और वहां शादी में भी जब तुम आओगे तो रात में मिलना हो पाएगा या नहीं इसलिए आज मुझे जमकर रगड़ दो.

मेरे मुंह से ये सब सुनकर मेरे पति भी जोश में आ गए और हम दोनों ने पूरी रात तीन बार चुदाई की. एक बार तो उन्होंने मेरी गांड भी मारी और गांड मारने के बाद अपने वीर्य को मेरे हलक में उतार दिया.
आपको तो पता ही है मुझे वीर्य पीना तो बहुत ज्यादा पसंद है इसलिए मैंने उनके वीर्य का एक एक कतरा अपने मुंह में गटक लिया और लंड को चाट चाट कर साफ कर दिया.

हमारी तीन बार की चुदाई में सुबह के चार बज गए थे, मुझे चुदाई की थकावट की वजह से नींद आने लग गई.

चुदाई की मस्ती की के बाद सुबह नौ बजे में उठी तो सासु ने बोला- आज तुझे जाना है और इतनी लेट उठी है?
मैंने कहा- मम्मी कल रात में हल्का सा बुखार आ गया था तो गोली लेकर सो गई थी इसलिए आज लेट उठी.
अब सासु मां को कौन समझाए इसने निगोड़ी चूत के लिए रात भर जागना पड़ा और आप के बेटे ने मुझे चोद-चोद कर निहाल कर दिया.

मैंने एक दिन पहले ही सभी सामान पैक कर लिया था जाने के लिए, तो दिन में दो बजे जयपुर से अपने पीहर के लिए मेरी कार लेकर निकल पड़ी अपनी पीहर की तरफ.

मेरे ससुराल जयपुर से मेरा पीहर लगभग साढ़े तीन सौ किलोमीटर दूर है, अभी मैं आधी दूरी ही तय कर पाई थी तब तक शाम के पांच बज चुके थे और मावठ की बरसात की बूंदें गिरनी शुरू हो गई. जिनको पता नहीं है उनकी जानकारी के लिए बता दूँ की जब कश्मीर में बर्फबारी शुरू हो जाती है तो हमारे राजस्थान में भी सर्दियों में बरसात होती है जिसे मावठ की बरसात कहते हैं. उसके बाद से ही राजस्थान में ज्यादा सर्दी पड़नी शुरू होती है.

अचानक से बरसात बहुत तेज की होने लगी तो मैंने हाईवे पर गाड़ी चलाने के बजाय गाड़ी को सड़क के किनारे खड़ा करके पार्किंग लाइट ऑन कर दी और गाड़ी के कांच पर वाइपर चालू कर दिए. लगभग आधा घंटे तक बारिश रुकने का इंतजार किया, जब बारिश कुछ हल्की पड़ी तो मैंने फिर से चलने का प्लान बनाया और जैसे ही गाड़ी स्टार्ट की तो ये क्या … गाड़ी तो स्टार्ट ही नहीं हो रही!

मैंने बार-बार सेल्फ बंद चालू किया लेकिन गाड़ी तो स्टार्ट ही नहीं ही रही थी और बारिश भी हल्की हल्की हो रही थी. मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि अब क्या किया जाए. मैंने सड़क के आसपास नजर दौड़ाई तो मुझे कहीं भी कोई पास में ढाबा या होटल या ऐसा कुछ नहीं दिखा जहाँ से मदद की आशा की जा सकती थी.

शाम के लगभग 6:00 बजने वाले थे और बादलों और बरसात की वजह से अंधेरा होने लग गया था मेरा दिल बैठने लग गया. मैंने सोचा कि बरसात बंद हो तो मैं भी गाड़ी से बाहर निकल के किसी की मदद मांगू.
लेकिन बरसात तो हल्की हल्की अभी भी चालू था बंद होने का नाम ही नहीं ले रही थी.

अचानक मेरी नजर गाड़ी से कुछ दूर पर रोड के किनारे लगे हुए बोर्ड पर पड़ी, बरसात की वजह से उसमें कुछ दिखाई नहीं दे रहा था फिर मैंने गाड़ी के अंदर से कपड़े से शीशे को साफ किया और बाहर भी वाइपर को तेज कर दिया तो मुझे दिखा, वो किसी गैरेज का बोर्ड था.
“*** मोटर गेरेज”
यहा पर सभी प्रकार की गाड़ियों की रिपेयरिंग की जाती है,
डेंटिंग, पैन्टिंग और मेकेनिकल वर्क्स
हाईवे की गाड़ियों के लिए क्रैन की सुविधा उपलब्ध,
मिस्त्री- *** फ़ोन न.- 9×××××××××

मुझे उम्मीद की एक किरण नजर आई मैंने तुरंत अपना सेलफोन लिया और बोर्ड पर लिखे नंबरों को डायल कर दिया और घंटी जाने लगी, सामने से कॉल रिसीव हुआ और एक मर्दाना आवाज आई- हेलो.
मैंने कहा- हाँ जी, कौन बोल रहा है?
“पवन मोटर गेरेज से पवन बोल रहा हूं, आप कौन बोल रही हैं?”
“मैं शालिनी बोल रही, यहाँ अजमेर से बाहर बाई पास से आगे मेरी गाड़ी ख़राब हो गई है और सामने आपके बोर्ड पर नंबर लिखा हुआ है, तो क्या प्लीज आप आ जाओगे?”
“हाँ मेडम, मैं बस पहुँचता हूँ.” यह कहकर उसने फ़ोन काट दिया।

लगभर दस मिनट बाद एक कार मेरे कार के पास आकर रुकी, और उसमें से एक आदमी छाता लेकर भागता हुआ मेरी गाड़ी के पास आया तो मैंने अपनी कार का शीशा नीचे किया।
वो बोला- शालिनी जी.
मैंने कहा- जी!
“मैं पवन, आपने कॉल किया था।”
“ओह्ह! पवन जी, सो सॉरी. मैंने आपको इतनी बारिश में बुलाया, पर मेरे पास दूसरा कोई ऑप्शन ही नहीं था।”
“अरे! नहीं नहीं मेडम, इट्स ओके, और वैसे भी कस्टमर को जरूरत के समय सर्विस देना तो तो हमारा काम है। आप गाड़ी का बोनट खोलिए ना मैं देखता हूं प्रॉब्लम कहां पर है।”
मैंने कहा- ओके!

और वह गाड़ी के आगे बोनट की तरफ गया और बोनट खोल कर देखने लगा, बाहर हल्का हल्का अंधेरा होने लगा था और मुझे जल्दी से जल्दी अपने पीहर पहुँचना था. लेकिन अभी तो आधा सफर बाकी था. और यह गाड़ी बीच में ही धोखा दे गई.

आपको तो पता है जैसे कि औरतों की आदत होती है जहाँ मौका मिला वहा सजना और सँवरना शुरू कर देती है, मैंने भी आदत के अनुसार अपने बेग से छोटा सा कांच और लिपिस्टिक निकाली और होंठों पर लिपिस्टिक लगाने लगी तभी मैंने देखा कि उस आदमी का ध्यान गाड़ी सही करने में कम था और मुझे लिपिस्टिक लगाते हुए देखने में ज्यादा था, वह गौर से मेरे होंठों को और मेरे वक्ष स्थल को देख रहा था, यह बात मैंने नोट की की।
शालू भाभी की गैरमर्द से चुदने की हवस (Shalu Bhabhi Ki Gairmard Se Chudne Ki Hawas)
शालू भाभी की गैरमर्द से चुदने की हवस (Shalu Bhabhi Ki Gairmard Se Chudne Ki Hawas)
मैं कांच में से ही उसको देखने लगी, जैसे ही हमारी नज़रे आपस में मिली तो उसने नजरें झुका ली और बोनट के के अंदर झांकने लग गया.

आपको तो पता ही है मैं तो खेली-खाई हुई हूं, मैंने उसकी नजरों को ताड़ लिया कि वह मुझे किस नजर से घूर रहा है. उसकी नजरें साफ साफ यह बयान कर रही थी कि अगर मैं उसको मिल जाऊं तो वो अभी मुझे इस बरसात में बोनट पर ही पटक कर जोर जोर से मुझे चोद दे।

मुझे भी शरारत सूझी, मैंने लिपस्टिक को अपने बैग में रखा और फेस पाउडर निकाल कर लगाने लगी और उसको चोरी नज़रों से उसको देखने लगी, वो भी मुझे तिरछी नज़रों से देखने लगा।
मैंने गाड़ी का दरवाजा खोला और बरसात में ही बाहर आ गई और उसको पूछा- क्या प्रॉब्लम है, कुछ पता चला?
जैसे उसने मुझे बाहर देखा तो अचानक से बोला- अरे मैडम! आप बार क्यों आ गई? प्लीज आप अंदर जाइये में बताता हूं आपको, आप भीग जाएंगी पूरी!
मैंने कहा- कोई बात नहीं!

वो बोला- प्लीज आप अंदर जाइये, बरसात बहुत तेज है, आप भीग जाओगी पूरी।
उसने मेरी कार का गेट खुला और मुझे अंदर जाने का बोला. मैं वापस कार के अंदर आ गई, लेकिन इतनी तेज बरसात के कारण में पूरी तरह भीग चुकी थी।

वो वापस बोनट की तरफ गया, मैंने कांच में अपना चेहरा देखा तो मेरा फेस पाउडर पूरी तरह भीग चुका था तो मैंने छोटा सा तौलिया अपने बैग से निकाला और मुंह को साफ किया. मेरी साड़ी पूरी तरह भीग चुकी थी और मेरे बदन से चिपक गई थी. एक तो सर्दी की शाम और ऊपर से बारिश के कारण में पूरी भीग चुकी थी तो मुझे तेज सर्दी लगने लगी और मेरा शरीर कांपने लगा. मैंने अपने कांच में से उसको देखा और अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिर लिया और तौलिए से अपने बूब्स के ऊपर का भाग पौंछने लग गई.

मेरी इस हरकत को वह बड़े गौर से और तिरछी नजरों से देख रहा था. मैंने उसकी चोरी पकड़ ली वह एकदम सकपका गया और बोनट नीचे करके मेरे पास आया और बोला- मेडम गाड़ी के कार्बुरेटर में कुछ प्रॉब्लम है.
“ओह्ह! अच्छा अब क्या होगा पवन?”
पवन बोला- तो अभी गाड़ी को गेरेज ले जाना पड़ेगा.
मैंने कह दिया- ठीक है.

फिर उसने अपनी कार से मेरी कार को टोचन किया और धीरे-धीरे करके मेरी गाड़ी को अपने गैरेज लेकर आ गया.

जब तक हम गैरेज पहुंचे तब तक काफी अंधेरा हो चुका था और बरसात भी बंद हो चुकी थी. उसके गैरेज में काम करने वाले सभी जा चुके थे उसका मकान या यूं कह लो कि रूम भी गेरेज के अंदर ही था।

वो गैरेज में गाड़ी छोड़ कर बाहर निकला और मेरी गाड़ी का दरवाजा खोला. उसने मुझे बाहर आने को बोला और खुद अपने रूम की तरफ गया, बाहर बरामदे की लाइट ऑन की और रूम का ताला खोलने लगा.
मैं जैसे ही बाहर आई और दो कदम चली ही थी कि अचानक वहां पड़े हुए सामान से मुझे ठोकर लगी और मैं गिरते गिरते बची, मेरी साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया.

मेरे मुंह से जैसे ही उसने आहहह … की आवाज सुनी तो एकदम पीछे की तरफ देखा अचानक मेरे गिरे हुए पल्लू से उसे मेरे बड़े बड़े बड़े बूब्स नजर आए. उसकी आंखें फटी की फटी रह गई और वह बिना आंख झपकाये मेरे बूब्स को देखता रहा.
मैंने फिर एक बार उसकी चोरी पकड़ ली लेकिन अबकी बार उसने नजर नीचे नहीं की बल्कि मेरे बूब्स को घूर कर देखता रहा. मेरे बूब्स की घाटी में नजर गड़ा दी. मैंने भी अपना पल्लू सही नहीं किया और उसे यह नजारा देखने दिया.

वो मेरे बूब्स को घूर रहा रहा था तो मैंने नोटिस किया उसकी पैन्ट में उसका मोटा हथियार बड़ी तेजी से अपना आकार ले रहा है, उसके पैंट में उसका लंड पूरी तरह आकार ले चुका था।
हम दोनों की आपस में नजरें मिली, उसके चेहरे पर चमक आ गई और वह अचानक से मेरे पास आया, बोला- शालिनी जी, आपको कही लगी तो नहीं?
मैं भी खड़ी हो गई तो और पल्लू से वापस अपने बड़े बड़े बूब्स को ढक दिया और उसकी पैन्ट के ऊपर लंड पर नजर गड़ा कर सामने मुस्कुरा कर बोली- लगी तो मेरे है पर हलचल कहीं और हुई शायद!
वह भी मुस्कुरा कर बोला- चलिए अंदर!
उसके बोलने का अंदाज ऐसा था जैसे मुझे चुदाई के लिए अंदर आने का बोल रहा हो.

मैं उसके पीछे पीछे उसके रूम में गई और अंदर जाते ही उसने बोला- सॉरी थोड़ा गंदा है.
मैंने कहा- ईट्स ओके.
उसने अपने बेड को साफ किया और बोला- आप यहां बैठिए, तब तक मैं देखता हूं कि कार्बोरेटर में क्या प्रॉब्लम है.

उसके बाहर जाते ही मैंने अपनी साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया और अपने बालों को सुखाने लगी. मैं पूरी तरह भीग चुकी थी, मैं धीरे धीरे अपने बालों को सुखा रही थी और साड़ी के पल्लू को भी सुखा रही थी.
वह बाहर से धीरे धीरे मुझे देख रहा था, मेरी नजरें एक बार फिर उससे मिली और मैंने उससे पूछा- गाड़ी कितनी देर में सही हो जाएगी?
वह मुझसे बोला- मैडम इंजन में कुछ प्रॉब्लम है, नया ऑयल डालना पड़ेगा।

मुझे उसकी यह द्विअर्थी बातें समझ में आ गई थी, मुझे पता चल गया वो किस इंजन और किस ऑयल की बात कर रहा है.
मैंने भी उसके सामने मुस्कुराते हुई द्विअर्थी बाण छोड़ा और बोली- तुम मेरी गाड़ी के इंजन में अपना नया ऑयल डाल दो. जो भी खर्चा होगा, मैं मैं दे दूंगी।
शायद वह भी मेरी इस द्विअर्थी बात का मतलब समझ चुका था।

मैं वापस से अपने बालों को सुखाने लगी और अचानक से वो अंदर आया और बोला- अरे मैडम! आप तो बहुत गीली हो चुकी हो।
मैंने कहा- हां, वो तो है.
वो बोला- तो एक मिनट रुकिए, आपको तौलिया देता हूं.

उसने मुझे तौलिया दिया और जाते समय पूरा दरवाजा खोल कर चला गया. शायद अब वह भी मेरे शरीर की सुंदरता के दर्शन करना चाहता था।

मैं अब उसके सामने ही तौलिए से अपने शरीर को पौंछने लगी और बालों को सुखाने लगी. फिर मैंने उसकी तरफ देखा और अपनी साड़ी को अपने घुटनों से ऊपर कर लिया अपने पैरों को भी पौंछने लगी.

हमारी नजरें बार बार मिल रही थी. वह भी मुझे देख कर भी मुझे देख देख कर मुस्करा रहा था और मेरी नजरों से बचाकर अपने टाइट लंड को अपनी पैंट के अंदर एडजेस्ट कर रहा था.
लेकिन मैंने उसको ऐसा करते हुए देख लिया और एक कातिल मुस्कान उसकी तरफ छोड़ दी.

मैं अपना शरीर धीरे-धीरे पौंछ रही थी ताकि वह मेरे शरीर के दर्शन ठीक से कर सके. मैं भी रह रह कर उसके टाइट लंड को निहार रही थी.

अचानक मुझे जोर से छींक आई तो वो बोला- शालिनी जी आप ठीक तो हो?
मैं बोली- हाँ!
उसने कहा- लगता है बारिश में भीगने की वजह से आपको जुकाम हो गया है, आप कहो तो मैं आपको आपके घर छोड़ सकता हूँ, आपकी गाड़ी मैं सुबह पहुँचा दूंगा।
मैं जोर से हँसी और बोली- घर?
“हाँ घर … आप कहो तो?”
“पता है … मेरा घर यहाँ से डेढ़ सौ किलोमीटर दूर है, चलोगे?”
वो चौंका और बोला- डेढ़ सौ किलोमीटर?
मैंने कहा- ह्म्म्म!

वो एकदम चुप होकर गाड़ी में अपना काम वापस करने लग गया.
कुछ देर बाद वो वापस बोला- लेकिन आपके कपड़े? वो तो पूरे गीले हो चुके हैं.
मैंने कहा- हाँ वो तो है.
“अगर आप ज्यादा देर के इन्ही कपड़ों में रही तो आपको सर्दी लग जाएगी.”

मैं बोली- मेरी गाड़ी में बैग पड़ा है, क्या तुम वह मुझे दे सकते हो?
तो उसने गाड़ी में से बैग निकाला और मुझे देने आया.

मैंने नोटिस किया कि उसका लंड अभी तक पूरे विकराल रूप में पैन्ट से बाहर आने को बेताब हो रहा था, मैंने उसकी पैन्ट पर नजर गड़ाई, उसने भी मुझे अपने लंड को ताड़ते हुए देख लिया और बोला- आप चेंज कर लीजिए.
मैंने अपने बैग से टीशर्ट निकाला जो बहुत लंबा था, मेरे घुटनों तक आता था. मैं घर में ज्यादातर ऐसे टीशर्ट पहनकर ही रहती थी.

वो अभी तक वहीं खड़ा था. हम दोनों की आंखें मिली तो उसको पता चल गया कि मैं चेंज करने वाली हूं इसलिए बोला- मैं बाहर जाता हूं आप चेंज कर लीजिए.
उसने जाते समय आधा ही गेट बंद किया और वह भी धीरे-धीरे थोड़ा खुल गया.

मैं वहीं पर खड़ी होकर अपने कपड़े बदलने लगी, सबसे पहले साड़ी उतारी फिर अपने शरीर को पौंछने लगी. फिर अपने ब्लाउज को उतारा, ब्रा और पेटीकोट में खड़ी थी, अचानक मेरी नजर उस पर पड़ी वह केवल मुझे ही बाहर से देख रहा था और अपने लंड को पैन्ट के ऊपर से मसल रहा था, मेरे बूब्स भी जोर जोर से ऊपर नीचे होने लगे.

मैंने भी उससे आंखें मिलाई और मुस्कुराती रही और कुछ देर वहीं खड़ी रही. फिर धीरे-धीरे आगे बढ़कर ब्रा और पेटीकोट में उसके सामने दरवाजे पर आई और मुस्कुरा कर जोर से दरवाजा बंद कर दिया.
फिर थोड़ी देर बाद टी-शर्ट पहनकर दरवाजा खोला. मैंने टी शर्ट के नीचे पैरों में कुछ नहीं पहना था, मैंने उससे कहा- मेरे पास कोई भी ट्राउजर नहीं है. क्या तुम्हारे पास कोई ट्राउजर है जो मैं पहन सकूं?
उसने कहा, हां शालिनी जी, मैं आपको देता हूं.
और उसने अपना एक ट्राउज़र मुझे दिया.

मैंने फिर दरवाजा बंद किया और ट्राउजर पहनने की कोशिश की, मगर ट्राउज़र मुझे फिट नहीं आया, बहुत लंबा था.
तो मैंने दरवाजा खोल कर पूछा- तुम्हारा कुछ ज्यादा ही लंबा नहीं है?
उसने कहा- क्या?
मैंने कहा- ट्राउजर बहुत लंबा है.

फिर एक और द्विअर्थी बाण छोड़ा और उसको पूछा- वैसे तुम्हारा साइज क्या है?
वो एकदम चौंक कर बोला- मतलब?
मैंने कहा- अरे मैं यह पूछ रही हूं कि L है, XL है या XXL है?
उसने कहा- शालिनी जी, यह तो मुझे नहीं पता लेकिन हम लड़के लोग मॉल में जाते हैं वहां पर पहनते है और जो फिट आता है उसको लेकर आ जाते हैं.
“तुम लड़कों का सही है, कुछ भी पहन लिया, हम औरतों और लड़कियों की फिटिंग का हमेशा प्रॉब्लम होता है, ब्लाउज का एक इंच भी कम ज्यादा हो गया तो दिक्कत हो जाती है।”
“चलो टीशर्ट ही सही है, यह भी काफी लंबा है.”

“यह साड़ी कहां सुखाऊँ?”
वह बोला- दूसरे रूम में आप सुखा दीजिए और पंखा ऑन कर दीजिए. बाहर तो बहुत नमी है सर्दी में नहीं सूख पाएगी.

मैंने दूसरे रूम में पंखा ऑन करके अपनी साड़ी सूखने डाल दी और फिर टी-शर्ट में ही बाहर आ गई और उससे बोली- अच्छा हुआ आज कपड़े चेंज कर लिए. नहीं तो गीली ही मर जाती?
तो पवन बोला- नहीं नहीं मैडम, मैं आपको ऐसे नहीं मरने देता. कस्टमर का ध्यान रखना हमारा काम है.

मैंने उससे कहा- पवन यार, सर्दी बहुत लग रही है.
तो उसने कहा- मैडम, सर्दी उड़ाने का इलाज है मेरे पास कहो तो?
मैंने कहा- क्या?

तो वह अचानक रूम में आया और अलमारी में से वोदका की बोतल और गिलास लेकर आया और बोला- लीजिए शालिनी जी, उड़ाइये अपनी सर्दी।
मैंने उसके हाथ से गिलास और बोतल पकड़ी, वो भी बोतल पकड़े रहा और हम दोनों के हाथ एक दूसरे के हाथों से टच हुए. उसके हाथ का टच होते ही मेरे शरीर में सनसनी दौड़ गई उसकी आंखों में देखने लगी.
वह भी मेरी आंखों में देख रहा था और बोला- शालिनी जी एक और इलाज भी है सर्दी उड़ाने का।
मैं उसकी बातों का मतलब अच्छे से समझ गई थी लेकिन अनजान बनते हुए उसको कहा- अभी तो ये वोडका ही सही है, बाकी वाला इलाज तो बाद में देखेंगे अगर ये इलाज काम नहीं किया तो।

मैंने उससे पूछा- शराब पीते हो?
तो वो बोला- कभी कभी, लेकिन काम के वक्त तो कभी नहीं!
मैंने कहा- तुम्हारी मर्जी, वैसे यह वक्त काम का तो नहीं! अगर बुरा न मानो तो क्या तुम मुझे गिलास धोकर दे सकते हो?
उसने हाँ भरी और एक गिलास धो कर लाया.

“एक गिलास ही क्यों लाये हो? तुम क्या चाहते हो कि मैं ना पीयूं?”
मेरे ये कहते ही वो बोला- अरे नहीं नहीं मेडम, ये आपके लिए ही है, आप लीजिए, मैं अभी ड्यूटी पर हूँ न … तो मैं नहीं पी सकता।

मैंने उसके हाथ से गिलास ली और उसमें एक पेग बनाया और पानी डालकर घूंट लेने लगी लगी, वह भी वापस बाहर कार के बोनट पर जाकर कार सही करने लगा.
“मैंने उससे पूछा- और कौन-कौन है तुम्हारे घर में?
तो वह बोला- अभी तो सभी मामू की शादी में गए हुए हैं।
मैंने उसको कहा- ईडियट और कौन-कौन रहता है तुम्हारे घर में यह पूछ रही हूं.
“ओह्ह! माँ, पिताजी और एक छोटा भाई है।”

“शादी नहीं हुई तुम्हारी?” मैंने उससे पूछा.
“अरे! इतनी जल्दी कहा मेडम जी, अभी पैरों पर तो खड़ा हो जाऊँ पहले!”

अब मैंने भी जबरदस्त तीर मारा और बोली- अब तो सब कुछ खड़ा होने लग गया है और तुम अभी पैरों पर ही अटके हुए हो।
वो भी कोई बच्चा नहीं था, एक दम मेरी बात पर सकपका गया और गाड़ी से चिपक कर खड़ा हो गया जैसे कि मुझसे अपने लंड की छुपाने की कोशिश कर रहा हो।

अब मैंने भी उसको उकसाना शुरू कर दिया और बातों का टॉपिक दूसरी तरफ कर दिया- गर्लफ्रैंड … गर्लफ्रैंड तो पक्की होगी तुम्हारे?
पवन- नहीं मेडम, काम से फुर्सत ही कहाँ मिलती है।
मैं- मतलब ड्राइविंग के नाम पर सिर्फ गाड़ियों पर ही चढ़े हो. गुड, कैरी ऑन!

अब शायद वो भी मेरी बातों के उत्तेजित हो गया था पूरा, और मुझे अपने पास बुलाने के लिए बोला- अरे मेडम! जरा यहाँ आ सकती हो आप? पकड़ना है.
मैंने उसकी ओर देखा तो वो एकदम बोला- पाना!
मैंने कहा- क्या?
“पाना पकड़ना है पाना!” वो हिम्मत करके बोला।
:पाना?” मैं उसकी ओर देख कर बोली.
“वो क्या है ना कि नट बोल्ट खुल नहीं रहा है तो …”

मैंने शराब की गिलास नीचे रखी और बाहर गाड़ी के पास आ गई और उसके नज़दीक आकर धीरे से बोली- जब एक नट भी नहीं खुल रहा है तो …
वो मेरी तरफ देख कर मुस्कुराया और मुझे पाना पकड़ाते हुए बोला- मेडम थोड़ा कस कर पकड़ना, बहुत टाइट है.

मैंने पाना पकड़ा और उसके पैन्ट के अंदर खड़े लंड की ओर देखते हुए मुस्कुरा कर बोली- चिंता मत करो, मेरी पकड़ बहुत मजबूत है, मैं एक बार पकड़ने के बाद छोड़ती नहीं. चाहे पाना हो या …
फिर मैंने नट में पाना लगाया और वो दूसरे पाने से नट खोलने लगा, ऐसे ही में गाड़ी सही करने में उसका साथ देने लगी और हमारे हाथों की अठखेलियां होने लगी.

अब काम कम हो रहा था और एक दूसरे की अंगुलियों और हाथों से छूने का काम ज्यादा हो रहा था. अब हमारे दोनों के बीच का फ़ासला कम हो गया था, शरीर आपस में सट चुके थे और दोनों एक दूसरे के शरीर की गर्मी महसूस कर रहे थे.

उसने अपने एक पैर को मेरे दोनों पैरों के बीच डाल दिया और अब उसका खड़ा लंड मेरे हिप्स पे महसूस हुआ, जैसे ही उसका लंड मेरे हिप्स में टच हुआ मेरी मुँह से सिसकारियां निकलने लगी,
अब ‘पहले उसका पैर, फिर मेरा पैर, फिर उसका और अंत में मेरा …’ इस पोजिशन में खड़े थे हम.

पवन अपना हाथ मेरी कमर के पीछे से निकालते हुए मेरे हाथ पर रखते हुए बोला- मैडम, आपने तो कहा था कि आप एक बार पकड़ने के बाद छोड़ती नहीं पर आपने तो बहुत ढीला पकड़ा हुआ है, आज थोड़ा टाइट पकड़ लो नहीं तो फिर गाड़ी तेज कैसे दौड़ेगी.

मैं अपनी गांड पर उसके लंड को महसूस करते हुए और अपने हाथ को उसके हाथों में मिलते हुए बोली- तुम जैसे पकड़ाना चाहो मैं वैसे पकड़ लूंगी पर मेरी गाड़ी तेज दौड़नी चाहिए.
“मैडम, आप गाड़ी किसी स्पीड में दौड़ाना पसंद करती हैं?”

मैंने अपने टी-शर्ट को पीछे से हल्का सा थोड़ा ऊपर किया अब मेरे हिप्स पीछे से पूरे नंगे हो गए थे और उसके लंड को अपनी गांड की दरार में एडजेस्ट करते हुई बोली- जितनी तुम रेस कर दो कि मैं उतना दौड़ा दूंगी.
अब शायद उसे भी मेरी उत्तेजना का पता चल गया और वह भी अपनी पैंट में खड़े हुए लंड को मेरी नंगी गांड में जोर से दबा रहा था.

कहानी जारी रहेगी.
आपको मेरी कहानी कैसी लगी जरूर बताना!
अगला भाग : शालू भाभी की गैरमर्द से चुदने की हवस-2 (Shalu Bhabhi Ki Gairmard Se Chudne Ki Hawas-2)
शालू भाभी की गैरमर्द से चुदने की हवस (Shalu Bhabhi Ki Gairmard Se Chudne Ki Hawas) शालू भाभी की गैरमर्द से चुदने की हवस (Shalu Bhabhi Ki Gairmard Se Chudne Ki Hawas) Reviewed by Priyanka Sharma on 12:19 PM Rating: 5

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