शगुन चुदने के लिए मचल गयी (Shagun Chudne Ke Liye Machal Gayi)

शगुन चुदने के लिए मचल गयी
(Shagun Chudne Ke Liye Machal Gayi)

डॉली मेरे पास आई और कहने लगी भैया क्या आप मेरे प्रोजेक्ट में मेरी मदद कर देंगे मेरे कॉलेज का प्रोजेक्ट अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। मैंने डॉली से कहा ठीक है बहन मैं तुम्हारे प्रोजेक्ट में मदद कर देता हूं वह मुझे कहने लगी कि इसी हफ्ते मुझे अपना प्रोजेक्ट कॉलेज में जमा करवाना है। 

मैंने डॉली से कहा तुम बिल्कुल भी चिंता ना करो मैं तुम्हारा प्रोजेक्ट इसी हफ्ते पूरा करवा दूंगा। डॉली के चेहरे पर खुशी थी और वह मुझे कहने लगी कि भैया आपके पास जब भी कुछ समस्या लेकर आओ तो आपके पास जैसे हर समस्या का समाधान होता है। 

मैंने डॉली से कहा यही तो मेरी काबिलियत है डॉली कहने लगी हां भैया तभी तो मैंने आपसे कहा। मेरा कॉलेज कुछ समय पहले ही पूरा हुआ है और डॉली मुझसे दो वर्ष छोटी है हम लोग अब डॉली के प्रोजेक्ट में लगे हुए थे उसका प्रोजेक्ट मैंने जल्दी ही खत्म करवा दिया और उसने अपने कॉलेज में अपना प्रोजेक्ट जमा भी करवा दिया था।

अब डॉली का कॉलेज भी खत्म हो गया था और मैं अपनी प्रशासनिक परीक्षा की तैयारी के चलते कहीं भी बाहर नहीं जाता था मेरे दोस्तों से भी मेरा संपर्क अब कम ही हुआ करता था। कुछ समय बाद मेरी एक अच्छी नौकरी लग गई और मैं एक उच्च अधिकारी के पद पर गोमती नगर चला गया मेरा परिवार लखनऊ में ही रहता है और मैं उनसे मिलने के लिए अपनी छुट्टियों में घर आ जाता था। 

अपने 3 वर्ष के कार्यकाल में मैंने बड़े ही अच्छे से अपनी सेवाएं दी और मेरा ट्रांसफर जब हाजीपुर हो गया तो वहां पर मेरी मौसी भी रहती थी। अपनी मौसी से मैं अक्सर मिलने के लिए उनके घर पर जाया करता था मेरी मौसी स्कूल में अध्यापिका हैं मैं उनसे मिलने चले जाया करता था। 

एक दिन मौसी मुझे कहने लगी कि बेटा कभी दीदी को भी अपने पास बुला लो मैंने मौसी से कहा हां मौसी देखता हूं यदि मां मेरे साथ यहां रहने के लिए आ जाए तो इससे बढ़कर भला क्या होगा। मौसी कहने लगे मैं दीदी से बात करती हूं और वैसे जीजाजी भी तो अब रिटायर हो चुके हैं मैंने मौसी से कहा आपको तो पिताजी के बारे में मालूम ही है ना पिताजी घर से कहीं बाहर जाते ही नहीं है वह ज्यादातर समय घर पर ही बिताते हैं। मैंने मौसी से जब यह कहा तो मौसी कहने लगी चलो कोई बात नहीं राहुल बेटा मैं दीदी से बात करूंगी।

मौसी का बड़ा लड़का विलायत रहता है और छोटा लड़का अभी अपने कॉलेज की पढ़ाई कर रहा है उसका नाम राजू है। एक दिन मैं अपने दफ्तर के लिए जा रहा था उस वक्त यही कोई 9:00 बजे होंगे मैंने देखा राजू एक लड़की के साथ मोटरसाइकिल पर जा रहा था। 

मैंने उस वक्त राजू को कुछ भी नहीं कहा और शायद उस वक्त मेरा राजू को कुछ कहना उचित भी नहीं था इसलिए मैंने उससे उस वक्त तो कुछ भी नहीं कहा लेकिन एक दिन जब मैं मौसी से मिलने के लिए गया तो मैंने राजू से कहा राजू आजकल तुम मोटरसाइकिल की बड़ी सवारी कर रहे हो। वह मुझे कहने लगा भैया लगता है आपको मेरे बारे में सब पता चल चुका है मैंने राजू से कहा अगर तुम मुझे बताओगे नहीं तो क्या मुझे तुम्हारे बारे में पता नहीं चलेगा। 

मैं भी राजू से मजाकिया अंदाज में बात करने लगा और राजू मुझे घबराकर सारी बात बताने लगा। राजू ने मुझे बताया कि वह जिस लड़की से प्रेम करता है वह उनके कॉलेज में जो प्रोफेसर हैं वह उन्हीं की लड़की है और उसका नाम आशा है। मैंने राजू से कहा तुमने आगे का क्या सोचा है तो राजू कहने लगा भैया आगे का तो मैंने फिलहाल कुछ सोचा नहीं है लेकिन अभी तो अपनी पढ़ाई में ही ध्यान दे रहा हूं और जब समय मिलता है तो आशा को समय दे दिया करता हूं। 

राजू ने मुझे कहा कि भैया आप यह बात मम्मी को मत बताइएगा नहीं तो वह मेरा खाना पीना मुश्किल कर देंगे। मैं ठहाके लगा कर हंसने लगा और कहने लगा कि अरे नहीं राजू मैं किसी को भी नहीं बताऊंगा तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो। 

जब मैंने यह बात राजू से कहीं तो राजू कहने लगा भैया मुझे आप पर पूरा यकीन है और आप पर पूरा भरोसा है कि आप यह बात किसी को भी नहीं बताएंगे। मेरी बात राजू से अक्सर होती ही रहती थी क्योंकि राजू घर में छोटा है तो वह मुझसे मिलने के लिए भी आ जाया करता था राजू कि मेरे साथ बहुत चलती है।

एक दिन राजू मुझे कहने लगा भैया आपको मैं आज अपने कॉलेज ले चलता हूं। मैंने उसे कहा राजू रहने दो तुम्हारे कॉलेज जाकर मैं क्या करूंगा लेकिन उसकी जिद के आगे मुझे कॉलेज जाना ही पड़ा और जब मैं कॉलेज गया तो उसने मुझे अपने दोस्तों से मिलवाया। 

उसके दोस्त मेरा रुतबा और मेरा पद देख कर मुझसे काफी कुछ चीजें पूछने लगे थे मैंने उन्हें अपनी मेहनत के बारे में बताया कि किस प्रकार से मैंने अपने जीवन में मेहनत की और एक अच्छा मुकाम हासिल किया। वह लोग मेरे आगे से घेरा बनाकर बैठे हुए थे राजू के यही कोई दस बारह दोस्त रहे होंगे उनके साथ बात कर के मुझे भी अपने पुराने दिन याद आने लगे थे और मैं सोचने लगा कि हम लोग कैसे कॉलेज में साथ में बैठा करते थे और हमारे साथ में पढ़ने वाले लड़के कैसे मजाक मस्ती किया करते थे। 

उनके साथ भी मैं अपने कॉलेज के दिनों की यादों को साझा कर रहा था और मुझे उनके साथ बात करने में अच्छा लग रहा था। राजू मुझे कहने लगा कि भैया अभी हमारी क्लास शुरू होने वाली है मैंने उनसे कहा चलो मैं भी चलता हूं तो राजू कहने लगा भैया मैं आपसे शाम को मुलाकात करूंगा। मैंने राजू से कहा यह ठीक है तुम मुझे शाम को मिल लेना और मैं वहां से बाहर निकल आया और राजू भी अपनी क्लास में जा रहा था।

मैं कॉलेज के गेट के पास पहुंचा ही था कि सामने से एक लाल रंग का सूट पहने हुए एक लड़की आ रही थी, उसकी तरफ मेरी नजरें गई तो उससे मेरी नजर एक पल के लिए भी नहीं हटती थी। वह भी मेरी तरफ देख रही थी मुझे नहीं मालूम था कि वह लड़की कौन है लेकिन उसकी तस्वीर मेरे दिमाग में छप चुकी थी। 

मेरी मुलाकात उससे नहीं हुई तो मैं दीवानों की तरह हो गया था। मैंने राजू से उसके बारे में सारी जानकारी निकलवा ली राजू ने कहा कि भैया उसका नाम शगुन है और वह बहुत शरीफ लड़की है वह आपकी बातें इतनी आसानी से नहीं मानेगी। मुझे जब शगुन से बात करने का मौका मिला तो जैसे वह मेरा ही इंतजार कर रही थी और मैंने शगुन से अपने दिल की बात कह डाली। 

मैंने जब शगुन से अपने दिल की बात कह डाली तो अब वह मेरी हो चुकी थी क्योंकि मेरे पास किसी भी चीज की कमी नहीं थी उसे भी मेरे जैसा ही कोई लड़का चाहिए था। शगुन और मैं अक्सर मिला करते थे जब एक दिन मैंने उसे अपने पास बुलाया तो वह शरमा रही थी। 

शर्म ही तो औरत का गहना होती है उसी में वह सुंदर लगती है मैंने जब शगुन के गाल पर अपने हाथ को रखा तो शगुन कहने लगी मैं आपसे बहुत प्यार करती हूं। उसकी सांसे भी चढ रही थी वह मेरी बाहों में आ गई जब वह मेरी बाहों में आई तो मैंने उसके स्तनों को दबाना शुरू किया उसके स्तनों को दबाने में मुझे बढ़ा ही मजा आता। 
शगुन चुदने के लिए मचल गयी (Shagun Chudne Ke Liye Machal Gayi)
शगुन चुदने के लिए मचल गयी (Shagun Chudne Ke Liye Machal Gayi)
मैं उसके नरम और पतले होठों पर जब जीभ को लगाता तो मुझे और भी मजा आता उसने मेरे होठों को पूरी तरीके से काट दिया था उससे उसके अंदर सेक्स भावना का पता चल रहा था वह कितनी सेक्स के लिए तड़प रही है। मैंने शगुन के बदन से उसके कपडे उतार दिए वह मेरे सामने अब नंगी खड़ी थी जिस प्रकार से मैंने उसके नंगे बदन को अपने हाथों से सहलाया तो वह मुझसे अपनी चूत मरवाने के लिए तैयार बैठी हुई थी।

मैं एक फ्रेश हो टाइट माल को चोदना चाहता था जब मैंने शगुन को लेटाकर उसके स्तनों को दबाना शुरू किया तो मुझे अच्छा लग रहा था और मुझे शगुन के स्तनों को दबाने में भी मजा आ रहा था। मैंने उसके स्तनों को बहुत देर तक चूसा मैंने शगुन की चूत पर जीभ को लगाया तो वह मचलने लगी। 

मैं उसकी चूत के अंदर अपनी जीभ को कर रहा था जैसे ही मैंने शगुन की चूत के अंदर अपने लंड को घुसाना चाहता था उसकी चूत में मेरा लंड अंदर की तरफ को जा ही नहीं रहा था। मैंने ताकात लगाते हुए अंदर की तरफ अपने मोटे लंड को घुसाया ही दिया और जिस प्रकार से मैं अपने लंड को धक्का मार रहा था तो वह चिल्लाने लगी। 

वह अपनी गर्मी से मेरी गर्मी को और भी बढ़ने लगी थी उसके बदन मैं एक भी बाल नहीं था उसके स्तनों को मैं अपने मुंह में लेकर चूस रहा था। उसकी उत्तेजना बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी मैंने उसे कहा थोड़ा धीरे से तुम सिसकिया लो लेकिन वह कहां मानने वाली थी वह बहुत तेजी से अपनी मादक आवाज में सिसकिया ले रही थी। मैंने जब शगुन को उल्टा लेटाया तो शगुन कहने लगी थोड़ी देर मुझे आपके लंड को दोबारा से चूसने दीजिए।

शगुन ने मेरे लंड को अपने मुंह में लिया और उसको चूसने लगी उसकी चूत से पानी बहुत ही ज्यादा मात्रा में निकलने लगा इसलिए वह बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी। मैंने उसकी चूत के अंदर जैसे ही लंड को घुसाया तो उसकी चूत के अंदर तक मेरा लंड घुस चुका था। 

जब मेरा लंड उसकी चूत के अंदर घुसा तो मैंने शगुन से कहा मुझसे तुम अपनी चूतडो को मिलाते रहो। शगुन अपनी चूतडो को मुझसे मिलाए जा रही थी और मैं उसे लगातार तेज गति से धक्के मार रहा था उसे मुझे धक्का मारने में मजा आता। 

मैंने उसकी चूत की गर्मी को पूरा बढ़ा कर रख दिया था उसकी चूत से पानी बाहर निकाल कर दिया था। वह अपनी चूतडो को आगे पीछे करती तो उसे मै भी बड़ी तेजी से धक्के देता। मुझे उसे धक्के मारने मे मजा आ रहा था मैंने बहुत देर तक शगुन को धक्के दिए। कुछ क्षणो बाद मैने अपने वीर्य को उसकी चूत के अंदर ही समा दिया।
शगुन चुदने के लिए मचल गयी (Shagun Chudne Ke Liye Machal Gayi) शगुन चुदने के लिए मचल गयी (Shagun Chudne Ke Liye Machal Gayi) Reviewed by Priyanka Sharma on 9:46 PM Rating: 5

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