प्यासी चूत की आग बुझाई (Pyasi Choot Ki Aag Bujhai)

प्यासी चूत की आग बुझाई
(Pyasi Choot Ki Aag Bujhai)

मैं और महेश दिल्ली से शिमला के लिए निकल रहे थे हमारे कॉलेज के और दोस्त हमें शिमला में ही मिलने वाले थे क्योंकि हम दोनों अब दिल्ली में रहते हैं और कॉलेज में पढ़ने वाले ज्यादातर साथी हमारे चंडीगढ़ में ही रहते हैं। हम लोगों ने भी कॉलेज की पढ़ाई चंडीगढ़ से ही की थी और उसके बाद मैं और महेश दिल्ली में आकर बस गए हम दोनों को दिल्ली में 10 वर्ष हो चुके हैं और मेरी शादी को भी 8 वर्ष हो चुके हैं। 

हम दोनों दिल्ली से शिमला के लिए निकले ही थे कि तभी मेरे दोस्त शोभित का फोन आया और वह मुझे कहने लगा कि सुरजीत तुम लोग कहां हो। मैंने उसे बताया कि हम लोग तो अभी दिल्ली से बस में निकल रहे हैं वह मुझे कहने लगा कि लेकिन हम लोग तो यहां से निकल चुके हैं। मैंने उसे कहा बस हम लोग भी अभी निकले ही हैं हम लोग शिमला पहुंचकर तुम्हे कॉल करते हैं। 

शिमला में हमारे एक और दोस्त ने अपना रिजॉर्ट खोला है इसलिए हम लोगों ने वहां पर मिलने के बारे में सोचा था मैंने शोभित से कहा कि तुम अभी फोन रखो क्योंकि बस में काफी शोर हो रहा है मुझे कुछ सुनाई नहीं दे रहा है।

एक फैमिली बस में बैठने के लिए आई तो उनके साथ में छोटे बच्चे भी थे जो कि बहुत ज्यादा शोर शराबा कर रहे थे और अब वह लोग हमारे बगल में ही बैठ चुके थे। जैसे तैसे हम लोग शिमला पहुंच गए लेकिन महेश और मैं पूरे रास्ते भर परेशान हो गए थे क्योंकि छोटे बच्चे बहुत शोर कर रहे थे। 

हम लोग जब शिमला पहुंचे तो वहां पर मुझे शोभित मिला मैंने शोभित से कहा और लोग कहां है तो वह कहने लगा कि सब लोग तो रिजॉर्ट में पहुंच चुके हैं बस तुम ही लोग नहीं आए थे। मैंने शोभित से कहा तो फिर चलो हमें कहां चलना है शोभित हमें रिजॉर्ट तक ले गया क्योंकि उसे रिजॉर्ट की जानकारी थी। 

हम लोग रिजॉर्ट में पहुंचे तो वहां पर हमारे और भी दोस्त मिले सब लोगों से इतने समय बाद मिलना बहुत शानदार रहा सब लोग बहुत खुश भी थे क्योंकि इतने समय बाद सब लोग एक दूसरे से मुलाकात कर रहे थे। मैंने शोभित से कहा क्या हम लोग अभी फ्रेश हो जाए तो शोभित कहने लगा हां क्यों नहीं।

हम लोग वहां से अपने रूम में गये और फ्रेश होने लगे मैं और महेश थोड़ी देर बाद रूम से बाहर आए तो महेश कहने लगा कि यार यहां का मौसम कितना सुहाना है और दिल्ली में तो गर्मी से मेरे शरीर में दाने भी हो गए हैं। मैंने उसे कहा दिल्ली में तो बहुत ज्यादा गर्मी है और यहां आकर ऐसा एहसास हो रहा था है कि हम लोगों को यही रहना चाहिए। 

महेश इस बात से हंसने लगा और कहने लगा कि लगता नहीं है कि हमारी किस्मत अब ऐसी है महेश कहने लगा की चलो अब यह सब बातें छोड़ो अभी हम लोग सब लोगों के साथ बैठने के लिए चलते हैं। लगभग सारे हमारे दोस्त बैठे हुए थे और सब लोग यही बात कर रहे थे कि मौसम बड़ा सुहावना है चंडीगढ़ में भी गर्मी बहुत हो रही थी। 

मैंने शोभित से पूछा तुम्हारा काम कैसा चल रहा है तो शोभित कहने लगा सुरजीत मेरा काम तो अच्छा चल रहा है लेकिन तुम बताओ तुम्हारी जॉब ठीक चल रही है ना। मैंने उसे कहा हां यार जॉब तो ठीक चल रही है लेकिन अब सोच रहा हूं कि जॉब छोड़कर अपना ही कोई बिजनेस शुरू कर लूँ। जब यह बात मैंने शोभित से कही तो वह कहने लगा कि मैं भी सोच रहा हूं कि दिल्ली में अपना कोई बिजनेस शुरू करूं यदि तुम मेरे साथ बिजनेस शुरू करना चाहते हो तो हम लोग बिजनेस शुरू कर सकते हैं। 

मैंने शोभित से कहा ठीक है हम लोग इस बारे में सोचेंगे। हम लोग आपस में इस बारे में ही बात कर रहे थे महेश कहने लगा हम लोग यहां आ तो गए लेकिन अब यहां से जाने का क्या प्लान है। शोभित ने कहा कि आज तो हम लोग यहीं पर रुकेंगे और रात को हम लोग यहां पार्टी करेंगे  और कल हम लोग ट्रैकिंग पर जाएंगे। 

मैंने शोभित से कहा अच्छा तो यह प्लान किसने बनाया है तो शोभित कहने लगा कि हम लोग जब चंडीगढ़ से आ रहे थे तो हम लोगों ने इस बारे में आपस में बात की थी। मैंने शोभित से कहा यह तो अच्छा ही है शोभित कहने लगा कि रात को आज पार्टी में पूरा इंजॉय करेंगे। 

मैंने शोभित को कहा हां क्यों नहीं और रात के वक्त हम लोगों ने पार्टी में पूरा इंजॉय किया मुझे ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे कि हम लोग अभी कॉलेज में ही पढ़ाई करते हैं और मुझे कॉलेज की बहुत याद आ रही थी क्योंकि कॉलेज में भी हम लोग ऐसे ही शरारत और पार्टियां किया करते थे। अगले दिन हम लोग ट्रैकिंग पर निकले जब हम लोग ट्रैकिंग पर निकले तो महेश कहने लगा मेरे पैर में तो बहुत दर्द हो रहा है।

मैंने महेश से कहा लेकिन तुम तो मुझे कह रहे थे कि तुम ठीक हो महेश ने मुझे कुछ समय पहले बताया था कि उसके पैर में काफी दर्द है मैंने महेश से कहा क्या तुमने अभी तक अपने पैर का इलाज नहीं करवाया है। महेश मुझे कहने लगा यार मैं डॉक्टर के पास गया तो था लेकिन मैं उनसे अच्छे से ट्रीटमेंट नहीं करवा पाया उसके बाद मुझे समय ही नहीं मिला। 

मैंने महेश को कहा कि कोई बात नहीं तुम धीरे-धीरे चलते रहो। महेश आराम से चल रहा था महेश काफी ज्यादा थक चुका था और महेश की हौसला अफजाई के लिए मैंने और शोभित ने उसे कहा कि तुम हमारे पीछे आते रहो। वह हमारे साथ ही चल रहा था हम लोग वापस रिजॉर्ट में आ चुके थे सब लोग बहुत थक चुके थे इसलिए सब कहने लगे कि हमें तो बहुत नींद आ रही है। मैं अभी रिजॉर्ट के लॉन में बैठा हुआ था मेरे साथ शोभित था महेश भी रूम में आराम करने के लिए जा चुका था।

मैं और शोभित लॉन में बैठे हुए थे तभी आगे से कुछ लोग आकर बैठ गए एक महिला बिल्कुल मेरे सामने बैठी हुई थी और उनकी नजरे मुझसे बार-बार टकरा रही थी। नजरे टकराने तक तो ठीक था लेकिन जब वह मेरी तरफ कुछ ज्यादा ही अपनी प्यासी नजरों से देखने लगी तो मुझे ऐसा लगा जैसे कि मेरी लॉटरी लग गई हो क्योंकि मैंने कभी सोचा नहीं था कि ऐसे किसी टूर के दौरान मेरे साथ ऐसा हो भी सकता है। 

जब मैंने उनको अपने पास बुलाया तो वह मुझे कहने लगी कि मुझे बड़ा अच्छा लगा मैंने तो सोचा था कि आप शायद मुझे अपने पास बुलाएंगे ही नहीं। मैंने उन्हे कहा मैं तो डर रहा था वह मुझे कहने लगी कि मेरे पति भी यहां आए हुए हैं लेकिन आपको देखकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था इसलिए मैं आपको देखे जा रही थी। 

हम दोनों बात कर ही रहे थे कि तभी मैंने उनके होठों को अपने होंठो में लेकर चूसना शुरू कर दिया और उन्हें भी बड़ा मजा आने लगा वह अच्छे से मेरे होठों को चूस रही थी मुझे भी ऐसा करने में आनंद आ रहा है। काफी देर तक ऐसा ही चलता रहा लेकिन जब मैंने उन्हें अपने नीचे लेटाकर चुम्मा चाटी करनी शुरू कर दी तो वह मुझे कहने लगी कि अब मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जाएगा। 

मैंने उन्हें कहा मैं भी नहीं रह पा रहा हूं लेकिन जब उनके बदन से मैंने कपड़े उतारने शुरू कर दिए तो वह पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगी थी और मुझे बड़ा अच्छा लगने लगा था काफी देर तक ऐसा ही मैं करता रहा। जब मैंने उनके स्तनों पर अपने हाथ का स्पर्श किया तो वह मेरी तरफ देखने लगी और कहने लगी आप अपने मुंह मे मेरे स्तनो को ले लीजिए मैं उनके स्तन को अपने मुंह के अंदर समा लिया और बड़े ही अच्छे से उनके स्तनों का रसपान किया। काफी देर तक यह सिलसिला चला जब मैंने अपने लंड को अपने पजामे से बाहर निकाला तो उन्होंने उसने मुंह के अंदर समाते हुए कहा कि मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है।

मुझे भी अच्छा लग रहा था और वह काफी देर तक ऐसे ही करते रही उन्होंने अपने गले के अंदर तक मेरे लंड को समा लिया था और मुझे भी बहुत अच्छा लगा। जब मैं पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगा तो मैंने उन्हें कहा मुझे अब आपकी योनि को चाटना है तो उन्होंने अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया। 

मैंने जैसे ही उनकी योनि पर अपने जीभ का स्पर्श किया तो मुझे बड़ा अच्छा लगने लगा और काफी देर तक मैंने उनकी चूत को चाटना जारी रखा हम दोनों ही उत्तेजित हो गए थे। उनकी चूत को चाटकर से मैने गिला बना दिया था। 
प्यासी चूत की आग बुझाई (Pyasi Choot Ki Aag Bujhai)
प्यासी चूत की आग बुझाई (Pyasi Choot Ki Aag Bujhai)
मैं तो बहुत ही ज्यादा खुश हो चुका था मैंने जैसे ही उनकी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया तो उनके मुंह से आवाज निकलने लगी थी मुझे अच्छा लग रहा था काफी देर तक ऐसा ही चलता रहा लेकिन जब मेरा लंड उनकी चूत के अंदर बाहर होता तो वह सिसकिया लेनी लगी।

वह मुझे कहने लगी आपका लंड तो बहुत ही ज्यादा मोटा है मैंने उन्हें कहा कि हां लेकिन मुझे तो बड़ा अच्छा लग रहा है जिस प्रकार से मै आपकी चूत के मजे ले रहा हूं उससे तो मैं आपका दीवाना हो गया। वह मुझे कहने लगी कि मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा है और काफी देर तक हम दोनों ने एक दूसरे के साथ शारीरिक संबंध का मजा लिया। 

वह पूरी तरीके से मजे मे आने लगी तो उन्होने अपनी योनि को टाइट करते हुए मुझे कहा कि आप मुझे सतुष्ट कर दीजिए क्योंकि मैं अब बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रही हूं। मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था ऐसा ही काफी देर तक मैं करता रहा जब मैंने अपने वीर्य को गिराया तो वह मुझे कहने लगी कि आज मुझे बहुत अच्छा लगा इतने समय बाद मैं पूरी तरीके से सेक्स का आनंद ल पाई हूं। वह वहां पर ज्यादा दिन तक नहीं रुकी लेकिन हम लोग अब भी शिमला में ही थे मेरे दिल में अब भी उनकी यादें ताजा है। मैं अब अपने घर लौटने की तैयारी में था और जब हम लोग दिल्ली लौट आए तो मुझे उनकी बड़ी याद आ रही थी।
प्यासी चूत की आग बुझाई (Pyasi Choot Ki Aag Bujhai) प्यासी चूत की आग बुझाई (Pyasi Choot Ki Aag Bujhai) Reviewed by Priyanka Sharma on 10:09 PM Rating: 5

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