प्यासी चूत को दमदार लंड की तलाश (Pyaasi Choot Ko Damdaar Lund Ki Talash)

प्यासी चूत को दमदार लंड की तलाश
(Pyaasi Choot Ko Damdaar Lund Ki Talash)

दोपहर में धूप की किरण सर पर पढ़ रही थी और गर्मी इतनी ज्यादा हो रही थी कि ऐसा लग रहा था मानो अभी चक्कर आ जाए। मैं गर्मी से बेहाल बस का इंतजार कर रहा था लेकिन बस आने का नाम नहीं ले रही थी मुझे आधा घंटा हो चुका था और गर्मी से पूरा शरीर भीगा हुआ था। 

जब मैंने जेब से रुमाल निकालकर माथे पर लगाया तो रुमाल भी पूरी तरीके से गीला हो चुका था तभी पास में खड़े पानी वाले से मैंने कहा कि अरे भैया एक पानी का पाउच दे देना। 

उसने मुझे पानी का पाउच दिया तो मैंने पानी को एक ही बार में पी लिया मुझे थोड़ी देर के लिए राहत तो मिली लेकिन फिर वही हाल था। मैं अभी गाड़ी का इंतजार कर रहा था और वहां पर कुछ लोग और भी थे जो गाड़ी का इंतजार कर रहे थे लेकिन बस अभी तक आई नहीं थी।

जैसे ही बस आई तो सब लोग बस में चढ़ने लगे बस में जगह पाने की होड़ में मेरे पैर पर किसी व्यक्ति ने अपना पैर भी रख दिया मैं पूरी तरीके से तिल मिला गया था लेकिन मैं कुछ कह भी नहीं सकता था इसलिए अपने मुंह पर मौन धारण किए हुए मैंने उन व्यक्ति की तरफ़ देखा तो वह चुपचाप से अपनी नज़रें झुका कर मेरी तरफ देखने लगे। 

मुझे बहुत ज्यादा क्रोध आ रहा था लेकिन उस वक्त मुझे अपने गुस्से को पीना पड़ा, बस पूरी तरीके से खचाखच भरी हुई थी और पसीने की बदबू से सर में दर्द होने लगा था। जब अगला स्टॉप आया तो कुछ लोग उतर गए और जब बस की खिड़की से हवा मेरे माथे को चूमती हुई निकली तो मुझे बहुत ही अच्छा लगा ऐसा लगा मानो अंधेरे में कोई उजाले की किरण जैसे जाग गई हो मैं बहुत ही खुश हो  गया था। 

करीब आधे घंटे बाद मेरा भी स्टॉप आ गया और मैं वहां पर उतरा जैसे ही मैं उतरा तो मैं सीधा ही अपने घर की तरफ निकल पड़ा। मैं जब अपने घर के लिए निकला तो मैंने देखा सामने से रहीम चाचा आ रहे थे मैंने उनसे कहा चाचा आप कहां से आ रहे हैं वह कहने लगे बेटा बस तुम्हारी कॉलोनी में ही एक छोटा सा काम था वही कर के आ रहा हूं। 

रहीम चाचा मिस्त्री हैं और उन्होंने ही हमारा घर बनवाया था वह अक्सर हमारी कॉलोनी में आते जाते रहते हैं जब भी किसी को कोई छोटा बड़ा काम होता है तो वह उनसे ही करवाते हैं।

चाचा मुझे कहने लगे दीपक बेटा कितनी गर्मी हो रही है देखो तो गर्मी से बुरा हाल है और पसीने से तो ऐसा लग रहा है कि जैसे कितनी बार भी नहा लो लेकिन कोई फर्क ही नहीं पड़ने वाला। जब उन्होंने यह बात मुझसे कहीं तो मैंने उन्हें कहा चाचा मैं भी यही सब तो देख रहा हूं मेरी भी हालत खराब है अभी मैं बस में आ रहा था तो बस में पसीने की बदबू से सर में दर्द था और पूरा शरीर ही मेरा पसीने से गीला हो चुका है। 

चाचा कहने लगे चलो बेटा अभी मैं चलता हूं और रहीम चाचा वहां से चले गए, मैं घर आया तो मेरी मां कहने लगी आज तुम्हारा चेहरा इतना उतरा क्यों है। मैंने मां से कहा मां चेहरा उतरेगा नहीं देखो तो कितनी गर्मी है और इस गर्मी में भला कोई कैसे काम कर सकता है बस में आते वक्त तो हालत खराब थी मां कहने लगी जाओ तुम नहा लो। मैं भी जल्दी से बाथरूम में गया और नहाने लगा जैसे ही पानी की बूंद मेरे शरीर पर गिरी तो ऐसा लगा मानो शरीर से सारी गंदगी दूर हो गई हो और शरीर में ताजगी आ गई। 

अब मैं अपने बदन को अच्छे से रगड़ कर नहा रहा था जब मैं नहा कर बाहर निकला तो मां कहने लगी अब तो तुम्हें अच्छा लग रहा होगा। मैंने मां से कहा हां अब अच्छा महसूस हो रहा है मां मुझे कहने लगी बेटा मैं तुम्हारे लिए जूस ले आती हूं, मां मेरे लिए जूस ले आई वह जूस जब मैंने पिया तो मुझे काफी राहत मिली। अब में फैन खोलकर अपने रूम में ही बैठा हुआ था मुझे काफी अच्छा लग रहा था और इस बात की भी खुशी थी कि कम से कम मैं घर तो पहुंच गया। 

मैं ऑफिस से जल्दी घर के लिए निकल गया था मैंने घड़ी की तरफ देखा तो घड़ी में उस वक्त 6:30 बज रहे थे और तभी मेरे फोन पर मेरे दोस्त रमन का फोन आया वह कहने लगा मैं तुम्हें कोई खुशखबरी देना चाहता हूं। मैंने उससे कहा ऐसी क्या खुशखबरी है तो रमन कहने लगा तुम सोचो तो जरा कि ऐसी क्या खुशखबरी होगी।

मैंने रमन से कहा तुम्हारे जीवन में ऐसी क्या खुशखबरी हो सकती है तुम्हारी शादी बबीता से होने वाली होगी वह कहने लगा हां तुम बिल्कुल ठीक कह रहे हो बबीता का परिवार मान चुका है और मैंने सबसे पहले तुम्हें ही फोन किया। मैंने रमन से कहा अच्छा तो आखिर वह मान ही गये वह कहने लगा हां यार बड़ी मुश्किल से मैंने उन्हें मनाया है वह लोग तो मेरी शादी किसी भी सूरत में बबीता से करना नहीं चाहते थे लेकिन मैंने भी बहुत मेहनत की और आखिरकार मुझे उसका फल मिल ही गया। 

मैंने रमन से कहा चलो भाई तुम्हे भी बधाई हो रमन कहने लगा कल मेरी सगाई तय हुई है तो तुम्हें जरूर आना है। मैंने उसे कहा ठीक है दोस्त देखता हूं कोशिश करूंगा आने की और यह कहते हुए मैंने फोन रख दिया लेकिन रमन की सगाई में मुझे जाना ही था क्योंकि रमन मेरा बचपन का दोस्त है और वह हमारे पड़ोस में भी रहता है। 

मैं जब रमन की सगाई में गया तो रमन के पापा ने बहुत ही अच्छे तरीके से अरेंजमेंट किया हुआ था उन्होने सारी व्यवस्थाएं बड़े ही अच्छे से की थी सारे मेहमान बड़े खुश थे मैं भी बहुत खुश था। मैंने रमन और बबिता को बधाई दी मैंने उन दोनों को बधाई देते हुए कहा कि चलो आखिरकार तुम दोनों के परिवार वाले मान ही गए। रमन कहने लगा तुम्हें तो मालूम है ना कि कितनी मुश्किल से मैंने दोनों परिवारों को मनाया है बबीता कहने लगी हां रमन ने वाकई में बहुत मेहनत की है यदि रमन की जगह कोई और होता तो शायद अब तक हम दोनों अलग हो चुके होते हैं।

मैं बबीता और रमन से बात कर रहा था जब मैं उन दोनों से बात कर रहा था तो रमन के पापा भी वहां पर आ गए और कहने लगे दीपक बेटा तुमने खाना तो खा लिया। मैंने अंकल से कहा हां अंकल मैं खा लूंगा वह कहने लगे बेटा पहले तुम कुछ खा लो, मैंने भी सोचा कुछ खा लेता हूं। 

मैं खाना खाने लगा जब मैं खाना खा रहा था उस वक्त मुझे हमारे पड़ोस में रहने वाले गोविंद भैया दिखे वह मेरे पास आये और कहने लगे दीपक तुम तो दिखाई नहीं दिये। मैंने गोविंद भैया से कहा भैया मैं भी तो आपको अभी देख रहा हूं वह कहने लगे चलो साथ में बैठकर ही खाना खाते हैं। हम दोनों ने साथ में बैठकर खाना खाया और गोविंद भैया की चटपटी बातों से खाने का मजा और भी चटपटा हो गया। 

गोविंद भैया और मैं साथ में बैठकर खाना खा ही रहे थे कि तभी उनकी पत्नी सामने से आई और वह मुझे देखकर कहने लगी दीपक तुम आजकल क्या कर रहे हो कहीं दिखाई भी नहीं देते? मैंने भाभी से कहा नहीं भाभी ऐसी तो कोई बात नहीं है मैं तो यही हूं मैं भला कहां जाऊंगा लेकिन उनकी नजरें मुझे लेकर हमेशा से ही हवस भरी रही है और मैं उनसे हमेशा बचने की कोशिश किया करता हूं शायद इस वक्त उन से बच पाना मुश्किल था। 
प्यासी चूत को दमदार लंड की तलाश (Pyaasi Choot Ko Damdaar Lund Ki Talash)
प्यासी चूत को दमदार लंड की तलाश (Pyaasi Choot Ko Damdaar Lund Ki Talash)
उन्होंने अपनी हवस भरी नजरों से मेरे कपड़े उतार दिए थे मुझे उन्होने अपने बदन को महसूस करने के लिए मजबूर कर दिया था। एक दिन यह मौका आ ही गया मैं कोमल भाभी के पास उनके घर पर चला गया जब मैं कोमल भाभी के पास गया तो वह मुझे कहने लगी दीपक तुम आ ही गए मैं तुम्हारा इंतजार कर रही थी। मैंने भी उनके बदन को महसूस करना शुरू किया तो वह उत्तेजित होने लगी और मुझे बड़ा मज़ा आने लगा।

मैं उनके स्तनो को जिस प्रकार से चूस रहा था वह भी पूरी तरीके से उत्तेजित हो जाती। मैंने उनकी योनि से पानी निकाल दिया था कोमल भाभी तो मेरे लिए तड़प रही थी और उन्होंने कहा कि तुम अपने लंड को मेरी चूत पर लगा दो मैंने जैसे ही अपने मोटे लंड को उनकी योनि पर लगाया तो वह चिल्लाने लगी। 

मेरा लंड उनकी योनि के अंदर प्रवेश हो चुका था मैंने अब पूरी ताकत के साथ धक्के देने शुरू कर दिए थे। वह पूरी तरीके से मेरी बाहों में आ जाती उन्होंने मुझे कसकर पकड़ लिया था और जिस प्रकार से मैंने उनके साथ संभोग का आनंद लिया उससे मुझे बड़ा मजा आने लगा और मैं बहुत ज्यादा खुश हो गया था। उन्होंने मुझसे कहा दीपक मेरा इतने से मन नहीं भरने वाला तुम्हे कुछ अलग करना पड़ेगा और उस अलग करने की चाह में मैंने जब अपने मोटे लंड को उनकी गांड पर लगाया तो वह मचलने लगी।

अब वह पूरी तरीके से मचलने लगी थी मैं भी बहुत ज्यादा खुश हो गया था मैंने भी उन्हें तेजी के साथ धक्के मारना शुरू कर दिया जिस प्रकार से मै धक्के मार रहा था उससे उनकी गांड से खून बाहर निकल रहा था और वह मुझसे अपनी चूतडो को टकराए जा रही थी। उनकी चूतड़ों का रंग लाल हो गया था मुझे कोमल भाभी की गांड मारने में भी बड़ा मजा आ रहा था मैंने उन्हें बड़े ही अच्छे तरीके से धक्के दिए और उनकी गांड के मजे लिए।

उनकी गांड मारने में जो आनंद आया वह बडा ही मजेदार था मुझे बहुत मजा आया। कोमल भाभी पूरी तरीके से संतुष्ट हो चुकी थी वह मुझे कहने लगी मुझे बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है उनकी गांड से खून भी निकलने लगा था। वह मचलने लगी थी वह दर्द को बर्दाश्त नहीं कर पा रही थी और ना ही मै उनकी गांड से निकलती हुई आग को झेल पा रहा था। मैंने भी उनकी गांड के अंदर अपने वीर्य को गिरा दिया जैसे ही मेरा वीर्य उनकी गांड के अंदर गिरा तो वह मुझे कहनी लगी आज मजा आ गया। मैंने उन्हें कहा भाभी आपके बदन को महसूस कर कर के तो मैं बहुत ही ज्यादा खुश हूं।
प्यासी चूत को दमदार लंड की तलाश (Pyaasi Choot Ko Damdaar Lund Ki Talash) प्यासी चूत को दमदार लंड की तलाश (Pyaasi Choot Ko Damdaar Lund Ki Talash) Reviewed by Priyanka Sharma on 9:43 PM Rating: 5

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