पडोसी से चुदने की हवस (Padosi Se Chudne Ki Hawas)

पडोसी से चुदने की हवस
(Padosi Se Chudne Ki Hawas)

संजय मुझे कहने लगे कि समीक्षा आज बच्चे नहीं दिखाई दे रहे हैं मैंने संजय से कहा बच्चे आज सुबह ही नानी के घर चले गए थे। संजय कहने लगे कि तुमने मुझे कुछ बताया भी नहीं मैंने उनसे कहा भैया आज सुबह यहां आए थे और कहने लगे कि मैं बच्चों को अपने साथ लेकर जा रहा हूं। 

संजय मुझसे पूछने लगे कि भैया कितने बजे आए थे तो मैंने संजय को बताया कि भैया तो सुबह ही आ गए थे। संजय मुझे कहने लगे कि तुमने मुझे सुबह क्यों नहीं उठाया तो मैंने संजय से कहा आप सुबह सो रहे थे मुझे लगा आप को उठाना ठीक नहीं रहेगा। 

मैंने संजय से कहा आप तैयार हो जाइए मैं आपके लिए नाश्ता लगा देती हूं आरविंद कहने लगे ठीक है मैं तैयार हो जाता हूं तुम मेरे लिए नाश्ता लगा देना। मैं अब रसोई में चली गई और संजय के लिए नाश्ता बनाने लगी घर में बहुत ही शांति थी क्योंकि बच्चे भैया के साथ चले गए थे मेरा मायका मेरे ससुराल से कुछ दूरी पर ही है।

हमारे परिवार एक दूसरे के परिवार को पहले से ही जानते थे इसलिए हम लोगों की शादी में ज्यादा परेशानी नहीं हुई हम दोनों के परिवार की सहमति से हम दोनों ने शादी कर ली। मैं भी संजय को पहले एक दो बार मिल चुकी थी हमारी शादी को 10 वर्ष होने वाले हैं इन 10 वर्षों में मैंने काफी कुछ बदलते हुए देखा। 

संजय भी पहले से ज्यादा बदल चुके हैं वह अब पहले जैसे बिल्कुल भी नहीं रह गए हैं संजय कभी कभी मुझ पर गुस्सा भी हो जाया करते हैं लेकिन यह छोटी-छोटी नोक झोंक तो अक्सर हर परिवार के बीच में होती रहती है। संजय और मेरे बीच में भी कभी कबार झगड़े हो जाते हैं  परंतु उसके बाद सब कुछ ठीक हो जाता है। 

मैं संजय के लिए नाश्ता बना चुकी थी और संजय नाश्ता करने के लिए आए तो वह मुझे कहने लगे कि तुमने मेरे लिए नाश्ता बना दिया है तो मैंने संजय से कहा हां मैंने तुम्हारे लिए नाश्ता बना दिया है आप नाश्ता कर लीजिए। संजय ने नाश्ता कर लिया था और उसके बाद वह मुझे कहने लगे कि मैं अपने ऑफिस के लिए निकल रहा हूं हो सकता है आज आने में देर हो जाए। 

मैंने संजय से कहा क्या कोई जरूरी काम है तो वह कहने लगे कि जरूरी काम तो नहीं है लेकिन मुझे अपने ऑफिस के एक दोस्त के घर पर जाना है मैंने उनसे कहा ठीक है।

बच्चे मां के पास थे और संजय भी ऑफिस चले गए थे मैं घर की साफ सफाई का काम करने लगी और जब मैं फ्री हुई तो मैंने सोचा मैं भी मां के पास चली जाती हूं और फिर मैं मां के पास चली गई। जब मैं मां के पास गई तो बच्चे खेल रहे थे मैंने बच्चों से कहा तुम लोग यहां भी शरारत कर रहे हो तो वह कहने लगे कि मम्मी हमें खेलने दो। मेरी मां भी कहने लगी बच्चों को खेलने दो अभी उनकी उम्र ही क्या है मैंने मां से कहा यह लोग बहुत बिगड़ रहे हैं तो मां कहने लगी कोई बात नहीं बेटा बचपन में सब लोग ऐसे ही होते हैं धीरे-धीरे समय के साथ सब ठीक हो जाता है। 

मैं और मां साथ में बैठ कर बात कर रहे थे मैंने मां से कहा मां भाभी कहीं दिखाई नहीं दे रही है मां कहने लगी कि वह राघव के साथ गई है। मैंने मां से कहा भैया और भाभी क्या कुछ काम से गए हुए हैं तो मां कहने लगी हां वह लोग काम से गये हुए है। 

मैंने मां से पूछा भैया और भाभी कब तक लौटेंगे तो मां कहने लगी उन्हें तो आने में शाम हो जाएगी। मैं भी घर में अकेली थी इसलिए मैं मां से मिलने के लिए आ गई मां और मैं साथ में बैठकर बात कर ही रहे थे कि तभी पड़ोस में रहने वाली शांता आंटी आ गई। शांता आंटी बातों को बढ़ा चढ़ाकर कहने में बहुत यकीन रखती हैं और जब वह आई तो वह मुझसे कहने लगी कि समीक्षा तुम कैसी हो मैंने उन्हें कहा आंटी मैं तो ठीक हूं आप बताइए आप कैसी हैं। 

वह कहने लगी मैं भी ठीक हूं, मैंने आंटी से कहा लेकिन आंटी आपके चेहरे को देखकर तो लग नहीं रहा कि आप ठीक हैं वह कहने लगी नहीं ऐसा तो कुछ भी नहीं है। उन्होंने मुझे कहा हां आजकल तबीयत ठीक नहीं है इस वजह से तुम्हें लग रहा होगा मैंने आंटी से कहा बताइए और घर में सब कुछ ठीक है। 

वह कहने लगे कि हां घर में तो सब कुछ ठीक है सोचा तुम्हारी मम्मी से आज मिल आती हूं काफी दिन हो गए थे जब दीदी से मिली नहीं थी। मम्मी और शांता आंटी आपस में बात कर रहे थे मैंने शांता आंटी से पूछा कि आंटी आजकल भैया कहां है।

वह कहने लगी कि वह तो विलायत में एक अच्छी नौकरी कर रहा है और कुछ महीने पहले ही तो वह गया था। आंटी ने भैया के बारे में बढ़ा चढ़ाकर बात करनी शुरू की वह मुझे कहने लगे कि तुम यहां कब आई मैंने उन्हें बताया कि आंटी मैं तो अभी ही थोड़ी देर पहले आई हूं। 

आंटी और मम्मी बात कर रहे थे मैं बच्चों को कहने लगी की तुम आराम कर लो बच्चे भी अब सोने की तैयारी में थे और वह थोड़ी देर बाद सो गए। जब बच्चे सो गए थे तो उसके बाद मैंने मां से कहा मां मैं घर जा रही हूं मां कहने लगी बेटा तुम घर जाकर क्या करोगी अभी तो संजय भी ऑफिस से नहीं आए होंगे। 

मैंने मां से कहा हां मां संजय तो अभी ऑफिस से नहीं आए होंगे लेकिन मैं सोच रही हूं कि घर चली जाती हूं और बच्चों को भी घर लेकर जाती हूं। मां कहने लगी ठीक है बेटा तुम देख लो। मैं बच्चों को अपने साथ घर ले आई और मैंने उन्हें कहा तुम बिल्कुल भी शरारत मत करना वह  कंप्यूटर में गेम खेलने में मस्त हो चुके थे मैंने संजय को फोन किया तो वह कहने लगे समीक्षा मुझे अभी ऑफिस से निकलने में थोड़ा टाइम हो जाएगा। 

मैंने संजय से कहा क्या आप अपने दोस्त के घर जा रहे हैं तो वह कहने लगे हां वहां तो मैं जाऊंगा ही मैंने तुम्हें कहा नहीं था कि मुझे आने में लेट हो जाएगी। संजय देर रात घर लौटे तो मैंने उन्हें कहा आपने खाना तो खा लिया है संजय कहने लगे हां मैंने खाना खा लिया है संजय कहने लगे कि मुझे नींद आ रही है।

संजय सो चुके थे संजय के हाव भाव बदलने लगे थे वह बिल्कुल भी पहले जैसे नहीं रह गए थे हम दोनों के बीच शायद अब समय का अभाव था कि हम दोनों एक दूसरे को बिल्कुल भी समय नहीं दे पाते थे। मैंने संजय से इस बारे में बात की और कहा हम लोगों को एक दूसरे को समय देना चाहिए। 

संजय कहने लगे समीक्षा तुम्हें तो मालूम है ना की जिम्मेदारियां कितनी बढ़ चुकी है और घर के खर्चे भी कम नहीं है। संजय ने जब मुझे यह कहा तो मैंने संजय से कहा हां कह तो आप ठीक रहे हैं लेकिन फिर भी हम दोनों को एक दूसरे के लिए समय तो निकालना चाहिए। संजय कहने लगे ठीक है समीक्षा मैं देखता हूं लेकिन हम दोनों एक दूसरे के लिए समय ही नहीं निकाल पाए। हम दोनों एक दूसरे के लिए समय नहीं निकाल पा रहे थे और इस बात से मुझे कई बार बुरा भी लगता था कि संजय मेरे लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं। 

हमारे पड़ोस में मिश्रा जी रहते हैं वह बड़े ही हंसमुख और अच्छे व्यक्ति हैं उनसे मेरी मुलाकात भी होती रहती है। जब उनसे मेरी मुलाकात होती तो मिश्रा जी मुझे कहने लगे भाभी जी आप कैसी हैं वह मेरे हाल चाल पूछते रहते थे। मैं अपने बदन को मिश्रा जी को दिखाने लगी और अपने आपको ना रोक सकी। 

वह मुझ पर डोरे डालने लगे मुझे भी अपनी इच्छाओं को पूरा करवाना था तो मिश्रा जी को मैंने घर पर बुला लिया। जब वह घर पर आए तो उन्होंने मेरा हाथ थाम लिया और कहने लगे भाभी जी आप बड़ी सुंदर है वह मेरी सुंदरता की तारीफ कर रहे थे। जब उन्होंने मुझे अपनी बाहों में लिया तो वह मेरी गांड पर अपने हाथ को लगाने लगे और उन्होंने मेरे होंठों को चूमना शुरू कर दिया।
पडोसी से चुदने की हवस (Padosi Se Chudne Ki Hawas)
पडोसी से चुदने की हवस (Padosi Se Chudne Ki Hawas)
मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था जिस प्रकार से वह मेरे होठों का रसपान कर रहे थे काफी देर ऐसा करने के बाद जब वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो गए तो उन्होंने मुझे कहा अब मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है। मैंने उनसे कहा मैं भी नहीं रह पा रही हूं मैंने उनकी पेंट की चैन को खोलते हुए लंड को अपने हाथ में लिया और उसे मै अच्छे से हिलाने लगी जिस प्रकार से मैं उनके लंड को हिला रही थी उससे उनके चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी। 

मैंने उनके मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर समाया तो वह पूरी तरीके से उत्तेजित हो गए और मुझे कहने लगे कि अब मैं रह नहीं पाऊंगा। मैंने उन्हें कहा रह तो मैं भी नहीं पा रही हूं मैंने उनके मोटे लंड से पानी भी बाहर निकाल कर रख दिया था उन्होंने मेरे बदन से कपड़े उतारकर मेरी काली रंग की ब्रा को उतारा और वह मेरे स्तनों का रसपान करने लगे। मुझे अच्छा लगने लगा काफी देर ऐसा करने के बाद उन्होंने मेरे स्तनों को अपने मुंह के अंदर लेकर अच्छे से चूसना शुरू किया तो वह कहने लगे कि आपके स्तनों से दूध निकल रहा है।

मैंने कहा आपने मेरे दूध को बाहर निकल दिया है उन्होंने अपने मोटे लंड को मेरी चूत पर सटाते हुए अंदर की तरफ को धक्का देना शुरू किया तो उनका लंड धीरे धीरे मेरे योनि के अंदर प्रवेश हो चुका था मेरे मुंह से बड़ी तेज चीख निकली और मै अपने पैरों को चौड़ा करने लगी जिससे कि उनका मोटा लंड आसानी से मेरी चूत मे चला गया मुझे बहुत ही खुशी हो रही थी। 

मेरी चूत का वह मजा ले रहे थे काफी देर तक उन्होने ऐसा ही किया, जब उनका माल बाहर की तरफ को निकलने लगा तो उन्होंने मुझे कहा भाभी जी अब मेरा वीर्य गिरने वाला है। उनका वीर्य मेरी योनि में गिरते ही उन्होंने मेरे होठों को चूम लिया और मुझे कहने लगे कि आप मेरे लंड को चूसो, मैने उनके लंड को चूसा वह मेरी चूत मारकर बहुत ही ज्यादा खुश थे और मुझे भी बहुत खुशी थी।
पडोसी से चुदने की हवस (Padosi Se Chudne Ki Hawas) पडोसी से चुदने की हवस (Padosi Se Chudne Ki Hawas) Reviewed by Priyanka Sharma on 10:25 PM Rating: 5

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