पडोसी ने मिटाई मेरी जिस्म की प्यास (Padosi Ne Mitayi Meri Jism Ki Pyaas)

पडोसी ने मिटाई मेरी जिस्म की प्यास
(Padosi Ne Mitayi Meri Jism Ki Pyaas)

मेरा नाम रेनू है, मैं मध्य प्रदेश की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र 28 साल है मेरे बूब्स बड़े बड़े हैं जो हर किसी को अपने वश में कर लेते हैं, हर किसी को मेरे बारे में सोचने को मजबूर कर देते हैं. मेरी फिगर की साइज 36 है. मैं कक्षा 9 में थी तब से ब्रा पहनने लगी, जिससे मेरे बूब्स सुडौल बन गए हैं. बूब्स ही औरत की शान होते हैं, यही मर्दों को अपनी और आकर्षित करते हैं.

मैं शादीशुदा हूँ, मेरी शादी 4 साल पहले हुई है। मेरे पति बिजनेस के सिलसिले में बाहर रहते हैं, मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करती हूं, अभी तक मेरी कोई संतान नहीं है, मैं घर पर अकेली रहती हूं, मेरे पति महीनों महीनों में घर आते हैं. सोचो अगर किसी शादीशुदा औरत का पति यदि महीनों महीनों तक घर पर नहीं रहता है तो उसका क्या हाल होता होगा.
वही हाल मेरा है, मुझे रात में नींद नहीं आती है, मैं हमेशा जिस्म की प्यासी रहती हूँ। मैंने पिछले 3 सालों में केवल 25 या 30 बार सेक्स किया होगा, यदि औरत को एक बार सेक्स की लत लग जाए वह फिर सेक्स के बिना नहीं रह सकती, उसका प्यासा जिस्म कुछ भी करवा सकता है.

तो मैं लेकर चलती हूं अपने जीवन की सच्ची घटना की ओर जिसे मैंने कहानी के रूप में प्रस्तुत किया है कि किस तरह मैंने गैर मर्द से अपनी प्यास बुझाई.

मैं जिस फ्लोर में रहती थी, वहाँ पास वाले कमरे में एक आदमी रहता था, उसकी उम्र कोई 30-32 साल होगी। वह भी एक कम्पनी में जॉब करता है। वह बहुत ही हट्टा कट्टा नौजवान था, मैंने सोचा क्यों न इससे अपनी जरूरत पूरी की जाये, क्यों ना इसके लण्ड से अपनी प्यास बुझाई जाये।

मैंने ठान लिया था कि कैसे भी करके इस से चुदना है। मैं उसे अपने वश में करने के लिए प्रयास करने लगी। मैं उसके सामने में हमेशा अपने कंधों पर बिना दुपट्टा डाले ही घूमती थी और बार बार उसके सामने नीचे झुकती थी ताकि वो मेरे बूब्स देख सके। मैं उसके कमरे के दरवाजे के सामने ही अपने कपड़े सुखाने डालने लगी और ब्रा और पैंटी भी उसके दरवाजे के सामने ही डालती थी. शायद वो भी जान गया था कि मैं क्या चाहती हूँ इसलिए वो भी हवस भरी निगाहों से मेरी ओर देखने लगा।

एक दिन वहां बाहर बालकनी में मेरे कपड़े सूख रहे थे तो मैंने देखा कि खिड़की में से वह मेरी पैंटी और ब्रा को हाथ में लेकर सूंघ रहा था और फिर चला गया।
फिर एक दो दिन बाद मैंने देखा कि मेरी ब्रा और पेंटी कोई चुरा ले गया. मैं समझ गई कि उसने ही चुराई होगी. पर एक बात समझ में नहीं आई कि आखिर वह उस ब्रा पेंटी का करेगा क्या?
पर मैं भी समझ गई कि आखिर वह मुझे चोदना तो चाहता है.

एक दिन वह दरवाजे पर खड़ा था, मैं कमरे से बाहर निकली तो उसने स्माइल की, मैंने भी स्माइल की, इस तरह दोनों में धीरे धीरे बात का सिलसिला प्रारंभ हो गया.

उसका नाम रोहन(बदला हुआ) था। हम दोनों आपस में दोस्त बन गए.
उसने मेरे बारे में पूछा, मैं बोली- मैं मेरे घर में अकेली रहती हूं, मेरे पति बिजनेस के सिलसिले में बाहर रहते हैं!
तो उसने स्माइल की और बोला- मैं भी अकेला रहता हूं।

इस तरह दोनों की बातों बातों में बात बहुत आगे तक चली गई और हम दोनों ने मिलने का प्लान बना लिया. आखिर मेरी तमन्ना पूरी होने वाली थी, बरसों की प्यास बहुत जल्दी बुझने वाली थी.
रविवार के दिन मैं घर पर ही थी, वह भी अपने घर पर ही था, मैंने उसे अपने घर पर बुलाया, मैंने सफ़ेद गाउन पहन रखा था जिसके अंदर से मेरी लाल ब्रा और काली पेंटी साफ़ दिखाई दे रही थी। वो बार बार मेरे स्तनों को देख रहा था। धीरे धीरे उसका लण्ड टाइट हुआ और खड़ा हो गया।
मेरी नजर उस पर पड़ी तो वो हाथ से छुपाने लगा, मेरी हँसी निकल गई और वो भी हंसने लगा।
मैं बेशर्म होकर बोली- छुपाओ मत, मेरी प्यास बुझा दो, मैं भी प्यासी हूँ।

वह मुझे चूमने लगा. किस करने के बाद उसने मुझे उठा कर बेड पर पटक दिया और फिर से किस करने लगा।
मैं बोली- बुझा दो मेरी प्यास, बहुत प्यासी हूँ बहुत दिनों से।
वो बोला- आज तो मैं तेरी पूरी प्यास बुझा दूंगा।

औऱ उसने मेरा गाउन उतार दिया, मैं उसके सामने लाल ब्रा और काली पेंटी में खड़ी थी। वो भी सिर्फ ब्लू कलर की अंडरवियर में खड़ा था। मैंने उसकी चड्डी खोल दी और उसका लण्ड पकड़ लिया मैं तो घबरा गई ‘बाप रे बाप… क्या मोटा और लम्बा लण्ड था उसका! काफी लंबा था उसका जो मेरे पति से काफी बड़ा था.’

मुझे डर भी था कि कहीं यह बड़ा लण्ड मेरी चूत फाड़ न दे… और ख़ुशी भी थी बहुत दिनों में आज लण्ड मिलेगा वो भी इतना लंबा और मोटा।
उसने अपना मोटा लण्ड मेरे हाथ में पकड़ा दिया, मैं अपने हाथों से उसके लण्ड को सहला रही थी और वह मेरी ब्रा के ऊपर से बोबे दबा रहा था, वह बोला- आप ब्रा में बहुत मस्त लग रही हो। ब्रा भी बहुत सेक्सी है।

उसने एक झटका दिया और मेरी ब्रा के हुक तोड़ दिए, पेंटी भी फाड़ दी।
मैं बोली- क्या किया ये?
वो बोला- नई दे दूंगा।
मैं बोली- उस दिन मेरी ब्रा और पैंटी क्यों सूँघ रहे थे?
वह बोला- मैं आपकी चूत की खुशबू सूँघ रहा था.

मैं बोली- मेरे यहां से एक ब्रा और पेंटी तुम ही ले गए थे क्या?
वह बोला- हाँ, मैं रोज आपकी ब्रा देखता हूं और आपकी पैंटी में अपना वीर्य छोड़ता हूं. मेरे पास बहुत सारी आंटियों की ब्रा और पैंटी पड़ी हैं.

और फिर वह मुझे पागलों की तरह चूमने लगा और मेरी चूत में उंगली करने लगा. मेरी चूत पूरी तरह से गीली हो गई थी, मैं भी जोश में आ गयी थी।
उसने उसका लण्ड मेरे मुंह में दे दिया, मैं उसका लण्ड चूस रही थी, वो मेरे बूब्ज चूस रहा था।

वह बोला- पूरा लण्ड ले ले!
और जोर से एक झटका दिया, अपना पूरा लण्ड मेरे मुंह में घुसा दिया।

फिर साथ ही वो मेरी चूत चाटने लगा. उसने अपने लण्ड का पानी मेरे मुंह में छोड़ दिया, मैं भी सारा पानी पी गई.
थोड़ी देर में उसका फिर से खड़ा हो गया और उसने मुझे बिस्तर पर लिटा दिया और मेरे ऊपर आ गया, जोर जोर से मेरे बूब्स दबाने लगा.
मैं बोली- धीरे दबाओ… दर्द कर रहे हैं!

फिर उसने मेरे ऊपर आकर टांगें चौड़ी कर दी. मुझे डर लग रहा था कि इतना लंबा लण्ड मेरी चूत के अंदर जाएगा.
मैं बोली- धीरे धीरे घुसाना!
वह बोला- डरो मत, आराम से घुसाऊंगा.

उसने कंडोम लगाया और उसने अपना लण्ड मेरी चूत पर सेट किया और थोड़ा जोर दिया, उसका आधा लण्ड मेरी चूत में चला गया. मुझे दर्द होने लगा, मैं बोली- रुको, बाहर निकालो!
उसने मेरी एक न सुनी और एक झटका और दिया, पूरा लण्ड चूत फाड़ता हुआ अंदर चला गया. मेरी आँखों में आंसू आ गए लेकिन थोड़ी देर में सब नार्मल हो गया, मुझे भी मजा आने लगा, मैं भी गाँड़ उठा उठा कर उसका साथ देने लगी।

पूरा कमरा थप थप की आवाज से गूंज गया, मुझे बहुत मजा आ रहा था, ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं जन्नत की सैर कर रही हूँ, थोड़ी देर में मेरी प्यास बुझ गई और फिर थोड़ी देर में मैं झड़ गयी और उसने अपने झटके तेज कर दिए, उसका पूरा लण्ड मेरी चूत को फाड़ता हुआ अंदर जा रहा था.

थोड़ी देर में वो भी झड़ गया। मैंने उसका कंडोम उतारा, पूरा कंडोम वीर्य से भरा था.

थोड़ी देर मैं ऐसे ही नंगी लेती रही और थोड़ी देर बाद उसका लण्ड फिर से टाइट हो गया.
वह बोला- एक बार और!
मैं बोली- अभी नहीं, आज ही सारी कसर निकालनी है क्या? अब तो रोज ही चुदाई करनी है, अब मैं बहुत थक गई हूं और मेरी चूत में जलन भी हो रही है, इतना लंबा और मोटा पहली बार लिया है मेरे पति का तो बहुत छोटा और पतला है.

वह बोला- अब तो तुझे यही रोज मिलेगा, उसे भूल जाएगी तू!
और उसने अपना लण्ड फिर से मेरे हाथों के पकड़ा दिया, उसका फिर से टाइट हो गया था.
मैं बोली- तुम नहीं मानोगे?
वह बोला- नहीं, एक बार और आ जा!

मैं भी तैयार हो गयी, मैंने बोला- कंडोम कहां है?
वह बोला- अब बिना कंडोम के करूंगा!
और वह सीधा लेट गया, मुझे ऊपर आने को बोला.

उसने मुझे अपने ऊपर बिठाया, मैं भी उसके केले के ऊपर बैठ गई, उसका लण्ड मेरी चूत में घुसता चला गया. क्या मजा आ रहा था!

मैं थोड़ी देर में थक गई, फिर मैं घोड़ी बन गई और उसने पीछे से लण्ड मेरी चूत में डाल दिया, उसका पूरा का पूरा अंदर जा रहा था. मुझे थोड़ा दर्द भी हो रहा था पर दर्द कम और मजा ज्यादा आ रहा था.
फिर उसने अपने झटके तेज किये और अपना पानी मेरे मुंह में छोड़ दिया. मैं भी उसका सारा पानी पी गई.

हमने 4 बार चुदाई की.

अब वह बोला- मुझे कपड़े पहना दो!
फिर मैंने उसे उसकी चड्डी पहनाई, उसने मुझे गाउन पहनाया, मेरी ब्रा और पेंटी तो उसने फाड़ दी थी।
मैं बोली- तूने मेरी ब्रा और पैंटी तो फाड़ दी, मुझे नई ब्रा पेंटी लाकर देना!
वह बोला- ला दूंगा.

इस तरह मैंने भरपूर आनंद उठाया अपनी चूत चुदाई का… मैं बहुत खुश थी क्योंकि बहुत दिनों बाद मेरी चूत में लण्ड गया तो भी मोटा और लम्बा। मेरे पति का तो इनका आधा लण्ड ही है. सच मानो तो आज ही टूटी है मेरी सील 3 साल में।

फिर तो जब भी मौका मिलता रोज चुदाई करती, हम रोज चुदाई करने लगे, कभी रात में तो कभी दिन में, कभी बाथरूम में!
उसने अब तक मुझे करीबन 15 दिन में 40 बार चोद दिया होगा. हम रोज नई नई पोजीशन में सेक्स करने लगे, उसके हथियार ने मुझे जन्नत की सैर करा दी. सबसे ज्यादा मजा मुझे ऊपर बैठकर चुदाई में आता है.
अपने पड़ोसी से चुदने के बाद मुझे अब और ज्यादा सेक्स की आग लग गई थी उसका लण्ड रोज मेरी चूत के दरबार में हाजिर होने लगा. वो रोज मेरे घर पर ही अपना लण्ड लेकर हाजिर हो जाता था. हम रोज ही नई नई पोजीशनों में सेक्स करने लगे.

एक दिन उसने मुझे अपने घर पर बुलाया. मैंने शाम के समय जल्दी खाना बना लिया. चूंकि मेरी झांटें कुछ बड़ी हो गई थीं, इसलिए मैं बाथरूम गयी और बालसफा क्रीम लगा कर मेरी चूत पर उग आए छोटे छोटे बाल साफ़ कर दिए. बाल साफ़ करके मैंने चूत को चिकनी चमेली बनाया. फिर नहा धो कर बाहर आ गई. मैंने पर्पल कलर का सलवार सूट पहना. आज मैंने जानबूझ कर अन्दर ब्रा नहीं पहनी थी. क्योंकि वो छोकरीचोद मेरी हर बार ब्रा फाड़ देता था. अब तक उसने मेरी करीबन 5 या 6 ब्रा फाड़ दी होंगी. हालांकि उसने मुझे 4 नयी मस्त सेक्सी ब्रा लेकर भी दी थीं.

मैं तैयार हुई और लण्ड के दरबार में हाजिर होने चल पड़ी. आज मेरे बिना ब्रा के चूचे कमीज के ऊपर से उछल उछल कर बाहर आने को हो रहे थे. आज कबूतर ब्रा की कैद से आजाद जो थे.

मैं उसके घर में उसके कमरे के करीब गई, उसके कमरे का दरवाजा खुला था. मैं अन्दर गई, तो मैंने देखा उसके कमरे में एक नौजवान बैठा था. जिसकी उम्र लगभग 32 साल थी. वो नौजवान एकदम हट्टा-कट्टा गठीले बदन वाला था. उसे देखकर मेरे अन्दर अजीब सी हलचल होने लगी. मैं मन ही मन सोचने लगी कि काश मैं इसकी जवानी लूट सकूं.

फिर मैंने उससे पड़ोसी के बारे में पूछा- वह कहां है?
तो उसने कहा- वह अभी नहा रहा है.
मैं बाथरूम की तरफ गई, तो दरवाजा अन्दर से बंद था. मैंने दरवाजा खटखटाया, तो उसने अन्दर से आवाज दी- कौन?
मैंने कहा- मैं हूँ.

वह हंसने लगा … और उसने झट से दरवाजा खोल कर मुझे हाथ पकड़ कर अन्दर खींच लिया.

मैं बोली- ये क्या कर रहे हो?
वह बोला- कुछ नहीं … बस वही, जो रोज करता हूं.

उसने दरवाजा अन्दर से बंद कर लिया. मैं बोली- तुम्हारे कमरे में कोई बैठा है, मुझे जाने दो, अच्छा नहीं लगेगा.
वह बोला- वह मेरा दोस्त है, वह भी मेरी तरह ही है … डरो मत, उसे सब पता है. वो तेरे और मेरे बारे में सब जानता है.
मेरा मन तो हुआ कि कह दूं कि इसके लण्ड से भी मुझे चुदवा दो, पर कुछ संकोच करके रह गई.

थोड़ी देर में उसके दोस्त ने आवाज दी- मैं जा रहा हूं.
वह चला गया.

अब वह मेरे होंठों पर किस करने लगा.
मैं बोली- यार मेरे कपड़े गीले हो जायेंगे.
इस बात पर उसने मेरे कपड़े खोल दिए उसने पहले मेरी कमीज खोली. मेरे चूचे झट से उछल कर बाहर आ गए.
वह बोला- ब्रा कहां है?
मैं बोली- आज नहीं पहनी, तू फाड़ देता है.

फिर उसने एक ही झटके में मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया.
मैं उसके सामने काली पैंटी में खड़ी थी. वह मेरी पेंटी के ऊपर से मेरी चूत को सहला रहा था. पेंटी के ऊपर से चूत चाट रहा था. उसने पेंटी के एक साइट से हाथ अन्दर डाल दिया. मेरी चूत पर हाथ घुमा रहा था.

वो बोला- आज बहुत चिकनी चूत है तेरी, बिल्कुल गुलाब की पंखुड़ियों जैसी चमक रही है.
मैं बोली- हां आज ही शेव की है … तुम पैंटी भी जल्दी से खोल दो, वरना वो गीली हो जाएगी.
वह बोला- कोई बात नहीं, रात में सूख जाएगी.

वह मेरे सामने नीले कलर की चड्डी में खड़ा था और मुझे पागलों की तरह किस कर रहा था. फिर उसने फव्वारा चालू किया. हम दोनों के ऊपर पानी की बूंदें पढ़ रही थीं. वो मेरे होंठों पर किस कर रहा था. उसकी बांहों में पानी की बूंदों के नीचे चूमाचाटी करने में मुझे बड़ा मजा आ रहा था. मुझे ऐसा लग रहा था, मानो सावन आ गया हो.
पडोसी ने मिटाई मेरी जिस्म की प्यास (Padosi Ne Mitayi Meri Jism Ki Pyaas)
पडोसी ने मिटाई मेरी जिस्म की प्यास (Padosi Ne Mitayi Meri Jism Ki Pyaas)
उसने एक हाथ अन्दर करते हुए मेरी पैंटी में डाल दिया. वो मेरी चूत में उंगली कर रहा था. मैंने भी उसकी चड्डी खोल दी, उसका लंबा लण्ड मेरे सामने था. फिर उसने भी मेरी पैंटी खोल दी.

मैं अपने हाथ से उसके लण्ड को सहला रही थी. वह मेरी चूत में उंगली कर रहा था. अब मैं नीचे बैठ गई और उसका लण्ड मुँह में ले लिया. मैं उसका लण्ड केले की तरह चूसने लगी. उसका पूरा लंबा लण्ड मेरे मुँह में अन्दर बाहर हो रहा था. लण्ड चुसाई से उसके मुँह से आह … आह … की आवाजें आ रही थीं.

वो एकदम से गर्म हो गया और उसने मेरा सर पकड़कर जोर का धक्का लगा दिया. उसका पूरा लण्ड मेरे मुँह में घुस गया. इस झटके से उसका लम्बा लण्ड मेरे गले तक पहुंच गया था. मुझे मजा आ रहा था. मैं उसके लण्ड को बड़ी मस्ती से चूसती रही. थोड़ी देर में उसने सारा पानी मेरे मुँह में छोड़ दिया.

मैं खड़ी हुई और उसके होंठों पर किस करने लगी. वह मेरी चूत में उंगली कर रहा था. मैंने भी उसके लण्ड को हाथ में पकड़ लिया और धीरे धीरे हिलाने लगी. उसका लण्ड फिर टाइट होने लगा.

मैंने एक बार फिर से उसका लण्ड मुँह में ले लिया. मैं लण्ड चूस कर खड़ा कर रही थी. जब उसका लण्ड पूरी तरह से खड़ा हो गया … तो उसने मेरे मुँह से लण्ड निकाल लिया. अब मेरी चूत की प्यास भी बढ़ गई थी.

जब मैंने उससे कहा- इधर अँधेरा सा है बाहर चलते हैं.
तो उसने बाथरूम की लाइट चालू कर दी. उसका मन मुझे बाथरूम में ही चोदने का था.
मैं बोली- जल्दी से लण्ड घुसा दे मेरी चूत में, मैं बहुत तड़प रही हूँ.
वह बोला- साली रंडी … आज तेरी चूत फाड़ दूंगा.
मैं बोली- हां फाड़ दे साले … डाल दे पूरा लण्ड मेरी चूत में … मैं भी देखती हूं, तेरे लण्ड में कितना दम है.
वह बोला- दम की बात मत कर, कुतिया आज तेरी चूत का भोसड़ा ना बना दिया तो, मेरा नाम बदल देना. आज तुझे रुला दूंगा.

मुझे भी पूरी तरह सेक्स चढ़ गया था. वह भी पूरी तरह सेक्सी मूड में आ गया था. उसने मुझे दीवार के सहारे खड़ा कर दिया और मेरी एक टांग ऊंची कर मेरी चूत को चाटने लगा. वो बहुत धीरे-धीरे मेरी चूत को चाट रहा था. पूरी जीभ को चूत के अन्दर तक डाल कर वो मेरी चूत को चूस रहा था.

मैं तड़फ कर बोली- साले डाल दे मेरी चूत में लण्ड … मुझे मत तड़पा.
उसने अपना 8 इंच का लण्ड मेरी चूत पर सैट किया और धीरे से धक्का दे दिया. उसका पूरा लण्ड मेरी चूत में घुसता चला गया.

लण्ड घुसते ही मेरे मुँह से उम्म्ह… अहह… हय… याह… की आवाज निकल गई. मैं बोली- धीरे डाल साले कुत्ते … साले अपने लंबे लण्ड से क्या मेरी चूत फाड़ देगा?
वह बोला- रुक जा मेरी रंडी … अभी तो शुरूआत है, आगे आगे देख क्या होता है.

वो और जोर जोर से झटके देने लगा. पूरा बाथरूम चुदाई की पचक पचक की आवाज से भर गया. मेरे मुँह से मादक चीखें निकल रही थीं.

फिर उसने मुझे अपने लण्ड पर बिठाया, मुझे भी जोश चढ़ गया था. मैं गाँड़ उछाल उछाल कर उसका पूरा लण्ड अपनी चुदासी चूत में ले रही थी.

थोड़ी देर में उसने मुझे नीचे लेटा दिया और वह हमारे ऊपर आ गया. उसने मेरी टांगें चौड़ी की और धीरे से अपना लण्ड मेरी चूत में घुसा दिया. वो झटके पर झटके दिए जा रहा था. मेरी चूत में उसका लंबा लण्ड सटासट जा रहा था. मुझे बहुत आनन्द आ रहा था. वह एक हाथ से मेरे मम्मे दबा रहा था तथा गंदी गंदी गालियां दे रहा था, मुझे बोल रहा था- मेरी रंडी चुद रही है … आह ले मेरी रंडी. … मेरा लण्ड ले.
मैं भी बोल रही थी- जितना दम है, चोद ले साले.
वो- आज तेरी चूत फाड़ दूंगा हरजाई.

वो जोर जोर से झटके देने लगा. बीस मिनट तक लगातार लण्ड रगड़ने से मेरी चूत में दर्द होने लगा, मैं बोली- धीरे चोद साले कुत्ते … बहुत दम लगा कर चुदाई कर रहा है. तेरा घोड़े जैसा लण्ड है … कमीने धीरे धीरे चोद.

उसके लण्ड की चोटों से मेरे मुँह से जोर-जोर से चीखें निकल रही थीं. थोड़ी देर में मुझे भी मजा आने लगा, मैं भी गाँड़ उछाल उछाल कर उसका साथ देने लगी.

अब मैं झड़ने वाली थी. मैं गाँड़ अड़ाते हुए बोली- डाल दे साले पूरा लण्ड मेरी चूत में … तूने ही मेरी चूत की प्यास बुझाई. मैंने एकदम से ऐंठते हुए अपनी सारी ताकत लगा दी और मैं झड़ गई.

मैं बोली- आह मेरा निकल गया … लण्ड बाहर निकालो.
वह बोला- थोड़ी देर और रुक जा.
उसने अपने झटके तेज कर दिए और मुझे कसकर पकड़ लिया.
मैं समझ गई कि ये भी झड़ने वाला है, मैं बोली- अपने लण्ड का रस मेरी चूत में मत छोड़ना.

उसने अपना लण्ड बाहर निकाला और मेरी पैंटी उठा कर उस पर ही छोड़ दिया. मेरी पूरी पैंटी उसके लण्ड के पानी से भर गई हम थोड़ी देर ऐसे ही पड़े रहे.

फिर हम नहा धोकर फ्रेश होकर बाहर आ गए. अब तक रात के 10:00 बज गए थे हम बाथरूम से बाहर कमरे में नंगे ही आ गए.
वह बोला- किचन में दूध रखा है, चाय बना कर ले आओ.

मैं नंगी ही किचन में गई चाय बना कर लाई. हम दोनों ने चाय पी कर टीवी ऑन कर दिया और बैठ कर टीवी देखने लगे.
हमने चाय पी.

थोड़ी देर बाद उसका लण्ड फिर से टाइट हुआ. हम दोनों नंगे ही थे. मैं एक हाथ से उसका लण्ड हिला रही थी. कभी मुँह में तो कभी हाथ में. मैं उसके लण्ड से खेल रही थी. वह भी मेरे मम्मों से खेल रहा था. वह मेरे निप्पल को दांतों से काट रहा था.

धीरे धीरे उसका मौसम फिर से बना, तो उसने मुझे सोफे पर टांगें चौड़ी कर लिटा दिया. वो मेरी चिकनी चूत को जीभ से चाट रहा था. बड़ा आनन्द आ रहा था. मेरी ख़ुशी चरम सीमा पर पहुंच गयी थी.

तभी फिर उसने अपना घोड़े के लण्ड जैसा लण्ड मेरी चूत पर रखा और जोर से धक्का लगा दिया. उसका पूरा लण्ड मेरी चूत फाड़ता हुआ अन्दर चला गया.
मेरी चूत में जलन हो रही थी, मैं बोली- धीरे धीरे से डाल.

मेरे मुँह से चीखें निकल रही थी, उसने मेरे होंठों पर होंठ रख दिए और जोर जोर से झटके देने लगा.
थोड़ी देर में मुझे भी आनन्द आने लगा था, मैं रंडी सी बोलने लगी- डाल साले कुत्ते … मेरी चूत में पूरा लण्ड डाल दे … दिखा दे अपना लण्ड का दम … मिटा दे मेरी चिकनी चूत की प्यास.

पूरा कमरा थप-थप की आवाज से गूंज रहा था. मेरे मुँह से आह … आह … की आवाजें निकल रही थीं. थोड़ी देर में उसके लण्ड ने पानी छोड़ दिया. उसने सारा पानी मेरी चूत में ही छोड़ दिया. मेरी पूरी चूत उसके लण्ड के रस से भर गई थी.

थोड़ी देर हम ऐसे ही पड़े रहे, फिर बिस्तर पर जाकर सो गए. अब तक रात के 2:00 बज गए थे.

फिर हमारी सुबह 8:00 बजे नींद खुली हम दोनों नंगे ही थे. उसने कपड़े पहने और बाथरूम जाकर मेरे कपड़े लेकर आया. उसने मुझे पेंटी पहनाई. उसने अपनी अलमारी खोली और अलमारी में से एक मस्त सेक्सी पर्पल कलर की नई ब्रा निकाली और मुझे पहनाई.
वह बोला- कैसी है?
मैं बोली- बहुत ही मस्त सेक्सी ब्रा है.

इसके बाद उसने मुझे सलवार और कमीज पहनाई. मेरे गाल और होंठ पर किस किया.

फिर मैं अपने घर चली गई. आज मुझसे सही से नहीं चला जा रहा था. मेरी चूत दर्द कर रही थी.
इस तरह हमने रात भर चुदाई का आनन्द उठाया.
पडोसी ने मिटाई मेरी जिस्म की प्यास (Padosi Ne Mitayi Meri Jism Ki Pyaas) पडोसी ने मिटाई मेरी जिस्म की प्यास (Padosi Ne Mitayi Meri Jism Ki Pyaas) Reviewed by Priyanka Sharma on 4:42 PM Rating: 5

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