पढ़ाई के बहाने चुदाई (Padhai Ke Bahane Chudai)

पढ़ाई के बहाने चुदाई
(Padhai Ke Bahane Chudai)

सभी दोस्तों को मेरा प्यार भरा नमस्कार। मेरा नाम सचिन है। मेरी उम्र 20 साल है और मैं मुंबई का रहने वाला हूँ। उस वक्त मैं 18 साल का था। हमारे घर में कुछ रद्दोबदल होनी थी इसलिए हम दूसरे घर चले गए, हम वहाँ एक साल रहने वाले थे वो एकदम हरा भरा इलाका था। वहाँ लड़कियों की कोई कमी नहीं थी। वहाँ प्रिया (बदला हुआ नाम) नाम की एक खूबसूरत लड़की रहती थी। मैं तो पहले ही उस पर लट्टू हो गया था। वो ज्यादातर लड़कों से बात नहीं करती थी और घर से बाहर भी नहीं रहती थी। वो जब भी बाहर आती मैं उसे ताकता रहता था। शायद उसे भी यह पता चल गया था।

कुछ दिन बाद वो मेरी एक दोस्त के साथ मेरे घर आ गई। मैं चौंक गया पर उसने मुझसे पूछा- क्या तुम्हारे पास ज्योमेट्री की गाइड है?

मैं तो उसे देखता ही रह गया। उसने फिर से पूछा, मैंने उसे ‘हाँ’ कह दिया और डेस्क में से गाइड निकाल कर उसे दी।

उसने मुझसे कहा- मुझे ज्योमेट्री सब्जेक्ट हार्ड लगता है।

उतने में ही मेरी दोस्त बोली- सचिन को तो बहुत आसान लगता है।

उसने मुझे पूछा- क्या तुम मुझे मदद करोगे?

आज नसीब मुझ पर बहुत खुश था, मैंने झट से हाँ कर दी।

मेरे घर पर दिन भर कोई नहीं रहता था और उसके घर पर भी ! वो दिन भर अकेली रहती थी। मेरे घर पर मेरा दोस्त राहुल और मैं दोनों रोज पढ़ाई करते थे।

दूसरे दिन वो भी आ गई। उसने नीले रंग की पंजाबी ड्रेस पहनी थी, हम तीनों पढ़ने लगे। मैं उसे ज्योमेट्री समझाने लगा। मैं पूरा वक़्त उसे ही देख रहा था। ऐसे हम रोज पढ़ने लगे। कभी कभी उसे समझाते वक़्त उसका हाथ मेरे हाथ में आ जाता और वो भी चौंक जाती। एक दिन मैंने अपनी किताब के पीछे ‘आई लव यू प्रिया’ लिख के रखा। जब हम पढ़ने लगे तब मैंने रफ काम करने के बहाने पन्ने पलटे और आखिरी पेज पर गया। उसकी नजर वहाँ लिखे उन प्यार भरे शब्दों पर गई तो मैंने उसे छुपाने का नाटक किया। लेकिन उसने वो देख ही लिया। वो सिर्फ मुस्कुराई पर कुछ नहीं बोली।

मैं तो समझ गया था। अब हम तीनों पढ़ाई के साथ साथ बगुत बातें, मस्ती करते थे। राहुल कुछ दिन के लिए अपने मामा के घर चला गया था और उस दिन से हम दोनों ही पढ़ने वाले थे। मैं तो इस वक़्त का इंतजार ही कर रहा था और आज मुझे मौका मिला था।

प्रिया मेरे घर आई और घण्टी बजाई। मैंने दरवाजा खोला तो देखता ही रह गया।गुलाबी रंग के टॉप और जींस में वो सुन्दर लग रही थी। उसने बल खुले ही छोड़े थे। मैंने उसे अन्दर लिया और दरवाजा बंद कर दिया। वो अन्दर जाकर बैठ गई। मैं उसके पीछे अन्दर गया और उसे कहा- आज तुम बहुत ही सुन्दर दिख रही हो।

उसने थैंक्स कहा और मुस्कुराई। मैं तो उसकी मुस्कराहट पर पहले से ही फ़िदा था। मैंने टी-शर्ट और ढीली वाली हाफ़ पैंट पहनी हुई थी। मैं उसके सामने बैठ गया और हम पढ़ने लगे। पर उसका पढ़ने में कुछ ध्यान नहीं था। मैंने उस पर नजर रखी तो समझा कि वो मेरी पैंट में देख रही है। मुझे मजा आने लगा। मैं थोड़ा और खुल कर बैठ गया ताकि उसे मेरी पैंट के अन्दर का नजारा ठीक से दिख सके। वो मुझे देख रही थी और उस माहौल में मेरा लंड भी तन रहा था। फिर उसने ही बात छेड़ दी कि उस दिन तुमने किताब के पीछे आई लव यू क्यों लिखा था?

मैंने कहा- हाँ, मैंने ही लिखा था और तुमने उसका जवाब भी नहीं दिया।

उसने हाँ कह दिया और शरमा कर मेरे अंदर वाले कमरे में भाग गई।

मैं भी उसके पीछे भागा और उसे पकड़ने की कोशिश में हम दोनों ही मेरे बेड पर गिर गए। मैं बेड पर और वो मेरे ऊपर गिर गई। उसके ओंठ मेरे ओठों के बहुत नजदीक थे। उसकी सांसें जोर से चलने लगी और उसने आँखें बंद कर ली। मौके का फायदा उठाकर मैंने भी उसे किस कर दी। उसने कुछ नहीं कहा और एक मिनट बाद वो मेरे ऊपर से उठकर बैठ गई।

मैं भी उठा और उसककी तरफ देखा तो उसकी आँखे नीचे झुकी हुई मुझे पास बुला रही थी। मैं उठकर उसके पीछे चला गया और उसे पीछे से पकड़ लिया, उसके कानों में हल्के से आई लव यू कहा। और उसे फिर से चूमने चाटने लगा।

वो चुप ही बैठी थी। मेरे हाथ धीरे धीरे उसके मम्मों के पास जाने लगे, मैं उन्हें मसलने लगा और वो कसमसाने लगी। मैंने उसकी टॉप के अन्दर हाथ डाला और उसके मम्मे दबाने लगा। वो भी आहें भरने लगी तो मैंने उसकी टॉप उतार फेंकी।

उसने अन्दर कुछ नहीं पहना था। उसके मम्मे इतने बड़े भी नहीं थे पर ज्यादा छोटे भी नहीं थे। मैं उसके दूध को मुँह में लेकर चूसने लगा। वो और जोर से आहें भरने लगी। उसने मुझे जकड़ लिया। मैंने उसकी जींस भी उतार दी और अपने कपड़े भी उतार दिए। मैंने उसका हाथ मेरे लौड़े पर रखा और उसे दबाया। वो भी उसे हाथ में पकड़कर हिलाने लगी। मैं लेट गया और वो मेरा लंड मुँह में लेकर चूसने लगी। शांत दिखने वाली खूबसूरत लड़की बहुत चालू थी। मैं उसका यह नया रूप देख कर चौंक गया। पर मुझे उससे क्या, मुझे जो चाहिए वो मिल रहा था। वो मेरे लण्ड को लॉलीपोप की तरह चूसने लगी। मुझे बहुत मजा आ रहा था। वो ये सब पहली बार कर रही है ऐसा बिलकुल नहीं लग रहा था।

कुछ वक्त बाद मैं झड़ गया और मैंने अपना सारा माल उसके मुँह में ही छोड़ दिया। उसने मेरा लिंग चाट लकर साफ कर दिया। फिर उसने अपनी पैंटी उतारी। उसकी चूत एकदम मस्त थी। उसके ऊपर थोड़े भूरे भूरे झांट थे। मैंने उसे छुआ और उसके अन्दर उंगली डालने की कोशिश करने लगा। वो उछल सी गई।

मैंने उसके पेट पर चूमा और ऐसे ही चूमते चूमते उसकी चूत पर आ गया। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में घुसा दी। वो सिसकारियाँ भर रही थी। उसके मुँह से आ..अ..अ..अ…अ..आह.. ऐसी आवाज आने लगी। पाँच-छह मिनट बाद वो भी झड़ गई। वो फिर से मेरे लंड को चूसने लगी। मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और उसके चूत को सलामी देने लगा।

उसने कहा- अब देर मत करो, जल्दी से डाल दो।

मैं अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा तो उसने कहा- अन्दर भी डालोगे? मेरी जान निकले जा रही है।

मैं लंड उसके चूत में घुसाने की कोशिश कर रहा था। पर अब तक उसकी सील नहीं टूटी थी। मैंने धीरे धीरे अपना लंड अन्दर डाला। और एक जोर का ज़टका लगा दिया।

वो जोर से चिल्लाई- …मर गई…

उसकी चूत से खून निकलने लगा पर मैंने धीरे धीरे धक्के चालू रखे। पाँच मिनट बाद उसे भी मजा आने लगा और वो उछल उछल कर मेरा साथ देने लगी।

उसके मुँह से आह…आह… आ.. की आवाजें जारी थी।फिर मैंने उसे घोड़ी बना कर थोड़े वक़्त चोदा और हम दोनों साथ में ही झड़ गए। मैंने आपना माल उसकी चूत में ही छोड़ दिया।

फिर हम दोनों साथ में ही नहाये।

उसने जाते वक्त मुझे कहा- कल से ज्योमेट्री के साथ सेक्स की भी पढ़ाई करेंगे। उस दिन प्रिया चली गई पर दूसरे दिन आने का वादा उसने किया। मैं उस दिन उसके ही सोच में डूबा रहा। वो सब पल मुजे याद आते रहे और में दूसरे दिन का इंतजार करने लगा। वह आनंद फिर से मिलेगा इस बात से मैं फ़ूला नहीं समा रहा था।

दूसरे दिन मैं उसकी राह देख रहा था और डोर-बेल बजी। मैं झट से उठा और दरवाजा खोला।

“हाय..!!” उसने कहा।

वाह !! क्या माल लग रही थी। उसने पीले रंग की टॉप और काले रंग का मिनी स्कर्ट पहनी हुई थी जो उस पर बहुत जंच रही थी। उसके बालों का बो उस पर चार चाँद लगा रहा था। मैंने उसे अन्दर ले लिया और दरवाजा बन्द किया। वो अन्दर चल ही रही थी कि मैंने जाकर उसे पीछे से पकड़ लिया पर उसने मेरे गाल पर एक किस किया और मुझसे खुद को छुड़वा लिया।

उसने कहा- जरा सब्र करो, इतनी भी जल्दी क्या है?

मैं उसकी बात को समझ ही नहीं पाया पर फिर भी मैं चुप रहा।

वो अन्दर वाले कमरे में चली गई और मुझे न आने को कहा। मैं बस सोचता रहा। यह सब क्या हो रहा है, मेरे तो कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था।

पाँच मिनट बाद अन्दर से उसकी आवाज आई- अब आ जाओ अन्दर !

मैं अन्दर गया और देखता ही रह गया। वो आज काली ब्रा और पेंटी में मेरे सामने खड़ी थी। मैं उसे बस देखता ही रह गया और मेरा मुँह खुला का खुला रह गया। वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी। मेरे मुँह से कुछ लफ्ज ही नहीं निकल रहे थे।

वो मेरे पास आई और मुझे ओंठों पर चूम लिया। साथ ही साथ वो मेरे शर्ट के बटन खोलने लगी। उसने सारे बटन खोल दिए और मेरे पजामे के तरफ बढ़ी। उसने मेरे पजामे का नाड़ा खोल दिया और पजामा निचे गिर गया। मैं बस अंडरवियर में खड़ा था। उसने उसे भी झट से नीचे सरका दिया और मेरे लंड को हाथ में लेकर सहलाने लगी।

कल तक इतनी शरमाने वाली लड़की आज इतनी कैसे खुल गई, मैं तो कुछ समझ ही नहीं पा रहा था। इतने में उसने मुझे खींच लिया और बेड पर बैठने को कहा। उसके कहने के मुताबिक मैं बैठ गया। वो अब मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी। महाराज तो पहले से ही खड़े हो चुके थे जिससे वो मेरा लंड पूरा मुँह में नहीं ले पा रही थी। फिर भी वो हार मानने वालो में से नहीं थी। थोड़ा चाटने के बाद वो उसको गले तक निगलने का प्रयास कर रही थी पर उस बीच उसे खासी आ रही थी। फिर भी वो नहीं रुकी, उसका प्रयास चालू था। वो अगर ऐसे ही चाटती और चूसती रही तो मेरा तो ऐसे ही निकल जायेगा यह मैं समझ गया और दूसरी बार जब उसने मेरे लंड को मुँह में लेने की कोशिश की उस वक़्त मैंने उसका सर पकड़ के थोड़ा धक्का दिया। उसे जोर से खांसी आई पर उसकी मन की मुराद पूरी हो गई। उसके चेहरे पर ख़ुशी साफ झलकी पर अभी तो सच्ची ख़ुशी बाकी थी।

उसने मुझसे बेड से उतरने को कहा और खुद जाकर बैठ गई। फिर उसने अपने दोनों टांगें मोड़ ली और फैला दी जिससे उसकी गुलाबी चूत जिसका एक दिन पहले ही उद्घाटन हुआ था, वो साफ दिख रही थी, भूरे छोटे बाल उसकी शोभा और बढ़ा रहे थे। मैं उसका इशारा समझ गया और उसके पास जाकर बैठ गया।

मैंने पहले तो उसकी चूत पर हाथ फेरना शुरू किया और बीच में उसकी चूत में उंगली डाल दी। वो थोड़ा कसमसा गई पर फिर भी शांत थी। मैंने उसकी गोरी-गोरी टांगें चूमते हुए उसकी चूत को चूम लिया। उसकी चूत से पानी निकलने लगा, एकदम सी चिपचिपी हो गई। पानी का स्वाद बड़ा ही नमकीन था। मैं उसे चाटने लगा और जीभ अन्दर-बाहर करता रहा। बीच-बीच में उसमें उंगली डाल कर उसे उछाल रहा था। वो भी इसका पूरा आनंद ले रही थी।

वो सिसकारियाँ भरने लगी और उसके मुँह से अह… अह… अह… की आवाजें आने लगी। जब मैं उंगली घुसाता तो यह आवाज बढ़ जाती।

दो ही मिनट में उसने कहा- बस अब आगे भी कुछ हो सकता है?

मैं उठ गया और अपने शेर से कहने लगा- आज तो अपनी गुफा में ज्यादा मजा करना है।

मैंने उसे थोड़ा आगे खींच लिया और लंड उसकी चूत पर रगड़ने लगा। वो और उतावली हो जा रही थी और मुझे उसे देखने में बड़ा ही मजा आ रहा था। मैंने लण्ड को चूत में घुसाया और वो एकदम से उछल गई। आज भी उसे थोड़ा दर्द हुआ लेकिन कुछ ही समय में फिर वो चुदाई-आनंद लेने लगी।

आह… ओह… आह… ओह… आह… यही आवाजें कमरे में गूंज रही थी। मैं कभी धीरे कभी जोर से हिल रहा था और धक्के दे रहा था। वो भी ‘जोर से, और जोर से करो !’ ऐसे कहकर मुझे प्रोत्साहित कर रही थी। मैं भी उत्तेजना से उसे फाड़ रहा था।

फिर मैंने उसे उठाया और घोड़ी बनने को कहा। मैंने पीछे से उसकी चूत में लण्ड डाला और धक्के देने लगा। इतने में मेरा ध्यान उसके उठे हुए चूतड़ों पर गया, मेरे दिमाग में खयाल आया। मैंने पहले ब्लू फिल्म में ऐसा देखा हुआ था और आज करने की सोचने लगा। इतने में उसने आवाज लगाई- जोर से करो।

मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और जोर से धक्के देने लगा। मेरा निकलने ही वाला था कि मैंने उसे बता दिया। उसने बस करते रहने को कहा और मेरा सारा माल उसकी चूत में ही छुट गया। मेरे धक्के रुक गए और वो भी झड़ गई।
पढ़ाई के बहाने चुदाई (Padhai Ke Bahane Chudai)
पढ़ाई के बहाने चुदाई (Padhai Ke Bahane Chudai)
फिर हम दोनों ऐसे ही नंगे लेट गए और बातें करने लगे। उसने मुझे बताया कि उसने अपनी सहेली रीना के घर पर ब्लू फिल्म देखी थी। रीना उसे ब्लू फिल्म देखने बुलाती पर वो कभी-कभी ही वक़्त निकाल कर जाती है और ज्यादा देर तक उसके घर नहीं रुकती थी। रीना भी सेक्स करना चाहती थी।

मैंने पूछा- अगर मैं तुम्हारी सहेली की मदद कर दूँ तो तुम्हें कैसा लगेगा?

उसका कोई जवाब नहीं आया.. वो नाराज हो गई है यह समझ कर मैंने भी फिर से नहीं पूछा।

उसने फिर से एक बार मेरा लंड मुँह में ले लिया, उसे चूसने और सहलाने लगी। मेरा लंड भी जल्द ही सलामी देने लगा और तैयार हो गया।

मैंने कहा- कुछ नया करते हैं।

उसने कहा- नया??? मैं समझी नहीं?

मैं फिर बोला- मुझे तुम्हारी गांड में करना है, तुमने ब्लू फिल्म में तो देखा ही होगा।

ना ना करते हुए वो मान गई। मैंने भी जैसे पढ़ा था वैसे उसे उलटा लेटाया और उसकी गांड के खड्डे पर तेल डाला और थोड़ा मेरा लंड को भी मल लिया। फिर मैंने लंड उसकी गांड के मुँह पर रखा और धक्का देने की कोशिश करने लगा। उसे बहुत दर्द हो रहा था और मुझे भी। फिर भी उसने अपनी गांड को थोड़ा खोल दिया और मैंने मेरे लंड की जगह बना ली। थोड़ा थोड़ा करते हुए मेरा लंड उसकी गांड को चीरते हुए अन्दर चला गया। वो पहले तो कसमसाई पर फिर उसका आनंद लेने लगी।

थोड़ी देर बाद जब मैं झड़ने वाला था मैंने उसे बताया, उसने मुझे उठने को कहा और मेरा लण्ड अपने मुँह में लेकर चूसने लगी जैसे मेरे वीर्य को वो चूस कर ही निकाल रही हो। मैं उसके मुँह में ही झड़ गया वो सारा वीर्य निगल गई।

हम दोनों उठकर ठीक हो गए और पढ़ने लगे पर हम दोनों का भी मन नहीं लग रहा था, उसने कहा- कल पढ़ते हैं, आज पढ़ने का मूड नहीं है।

मैं भी मान गया।

वो उठकर चलने लगी और कहा- आज ज्योमेट्री तो नहीं पढ़ी पर सेक्स की बहुत पढ़ाई हुई। कल सेक्स नहीं ज्योमेट्री ही पढ़ेंगे !

कहकर वो चली गई।

मैं रात को सोते वक़्त उसके ही ख्यालों में डूबा रहा। इतने में ख्याल आया कि उसकी सहेली रीना भी सेक्स की तलाश में हैं। क्यों न उसको भी पटाया जाये???

पर फिर खायाल आया कि अगर यह बात प्रिया को पता चल गई तो नाराज हो जाएगी और कभी यहाँ नहीं आएगी। मैंने रीना का ख्याल दिलोदिमाग से निकाल दिया और सो गया। अगले दिन मैं फिर उसकी राह देखने लगा। समय पर वो आ गई। मैंने उसे अन्दर लिया और पकड़कर चूमने लगा।

उसने खुद को छुड़ा लिया और कहा- दो दिन पढ़ाई नहीं हुई है, आज हमें पढ़ना चाहिए।

मैं नाराज हो गया और अन्दर जाकर बैठ गया। हम पढ़ने लगे पर मेरा मन नहीं लग रहा था। यह बात उसने पहचान ली और अपनी जगह से उठकर मेरे गोद में आकर बैठ गई। वो मेरे ओठों का चुम्बन करने लगी। दस मिनट तक किस करने के बाद मैंने उसके उरोजों को छूना चाहा पर उसने मना कर दिया और कहा- फिर कभी करेंगे, आज पढ़ते हैं।

पढ़ने के बाद मैंने फिर उसे किस किया और उसने मेरा लंड हाथ से ही सहलाया और सारा माल निकाल दिया।

फिर कुछ दिन ऐसा ही चला। हम पढ़ते और वो निकल जाती पर मैं इस बात से खुश नहीं था, मैंने एक दिन उसे कह ही दिया- आज मुझे सेक्स करना है पर तुम करने ही नहीं देती, क्यों?

उसने कहा- सबर करो, चलो कल करते हैं।

मैं मान गया पर मुझे विश्वास नहीं था कि वो कुछ करने देगी। फिर भी मैंने रत को उसके बारे में सोचा और मुठ मारी।

दूसरे दिन मैं उसका इंतजार करने लगा। वक़्त पर वो आ गई और मैंने उसे अन्दर लिया। मैं आज उससे कुछ कहने वाला नहीं था।

वो आकर बैठ गई और पढ़ने लगी। मैं भी पढ़ने का नाटक करने लगा हालांकि मेरे दिमाग में कुछ और ही चल रहा था, दिल तो कर रहा था कि उसे पास खींच लूँ और उसके मम्मे दबाऊँ, उसके लबों को चूस लूँ, खा जाऊँ उसे ! पर मैं ऐसा करने वाला नहीं था।

थोड़े ही देर में मेरे घर के दरवाजे पर घण्टी बजी और मैं उठने लगा।

पर उसने कहा- मैं खोलती हूँ, तुम इस प्रॉब्लम को सोल्व करो।

उसने जाकर दरवाजा खोला और वहीं किसी से बात करने लगी। मुझे ठीक से कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। उसने दरवाज़ा बंद किया और अन्दर आकर बैठ गई।

मैंने पूछा- कौन था?

उसने कहा- कोई नहीं।

इतने में फिर से आवाज आई- प्रिया, यहाँ आ जाओ, मुझे शर्म आ रही है।

मैं चौंक गया !

आवाज तो कहीं सुनी हुई लग रही थी। पर मैं कुछ कहता उससे पहले ही प्रिया झट से उठी और बाहर चली गई।

जाते जाते मुझसे कहा- यहीं रुकना, बाहर मत आना।

मुझे कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था। पाँच मिनट बाद वो अन्दर आई, उसके पीछे पीछे रीना थी। मैं तो एक बार फिर से चौंक गया। उसने सफ़ेद कुर्ती और जीन्स पहनी हुई थी। उसके बड़े बड़े तने हुए कुच और आगे साफ दिखते हुए कुचाग्र जैसे बाहर आने को तरस रहे हों।

क्या सेक्सी लग रही थी रीना !

प्रिया ने मुझसे कहा- इसे भी ज्योमेट्री सिखनी है और उसके साथ वो एडिशनल सब्जेक्ट भी। तुम इसे सिखाओ, तब तक मैं घर जाकर आती हूँ।

इतना कहकर वो चली गई। मैं और रीना एक दूसरे को देखते ही रह गये। मैंने उसे बैठने को कहा और खुद भी बेड पर बैठ गया।

उसने बात शुरू की- प्रिया ने मुझे सब बताया कि तुम यहाँ कैसे पढ़ते हो।

मैंने कहा- तो तुम्हें भी एन्जॉय करना है?

वो बस शरमा गई और मुझे हरी झंडी मिल गई। मैं उसके पास सरक कर बैठा और उसके चेहरे को ऊपर उठाया। उसने आँखें बंद कर ली और यह भी इशारा समझ कर मैं उसके ओंठों पर चुम्बन करने लगा, वो भी मेरा साथ देने लगी। मैं अपना हाथ उसके खरबूजों पर ले गया और उन्हें ऊपर से सहलाने लगा।

वो आँखें खोल ही नहीं रही थी। मैंने उसकी कुर्ती उसके बदन से अलग की और देखा तो उसने अन्दर ब्रा-शमीज आदि कुछ भी नहीं पहना था।

मैं उसके खरबूजों के साथ खेलने लगा, उनको चूसने लगा। वो भी इसका आनन्द ले रही थी- सी…सीई…सीय…अह…अम्म…सीह… ऐसे सिसकारियाँ भर रही थी। मैंने उसका हाथ उठाकर मेरे लंड पर रख दिया। वो उसे ऊपर से ही सहलाने लगी। फिर मैंने उसे जीन्स उतारने को कहा।मैंने अपने कपड़े भी उतार दिए। वो मेरा तना लंड देखती ही रह गई। मैं आगे गया और उसके सामने खड़ा होकर उसे नीचे झुकाया।

वो मेरा इशारा समझ गई और उसने प्यार से मेरे लौड़े की चुम्मी ली, उसके साथ खेलने लगी उसे चूसने लगी, जैसे प्रिया ने उसे पूरा पाठ पढ़ाकर भेजा हुआ था।

मैंने भी उसकी चूत को छुआ और उसे सहलाने लगा। उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था। हम 69 की अवस्था में हो गए और एक दूसरे को आनन्द दे रहे थे, वो मजे से मेरा लंड चूस रही थी और मुँह के अन्दर बाहर कर रही थी जिससे कमरे में पुच्च पुच्च की आवाजें गूंज रही थी।

वक़्त ज्यादा नहीं था तो मैं उठ गया और लंड उसकी बुर पर रगड़ने लगा। वो जोर जोर से सिसकारियाँ भरने लगी और मुझे लंड अन्दर डालने को कहने लगी। मैंने भी देर न करते हुए लण्ड का दबाव उसकी चूत पर बनाया, उसकी चूत अब तक कुंवारी थी तो उसे दर्द होने लगा।

मैंने उसे उठाया और उसके चूतड़ों के नीचे एक तौलिया बिछाया, उसे लिटा कर फिर से प्रयास किया।

पर वो ‘हाय्य्य्य्य मर गई… ! मत करो ! बहुत दर्द हो रहा है। मैं मर जाऊँगी !’ ऐसे करके चिल्लाने लगी।

मैंने कहा- बस हो गया !

और उसके मुख को अपने होंठों से दबा कर एक जोर का धक्का मारा। वो कसमसा उठी, दर्द के मारे मेरे पीठ पर नाख़ून गड़ाने लगी। मुझे अपने लिंग पर कुछ गीला गीला सा अहसास हुआ तो देखा कि उसकी योनि से खून बह रहा था। मैं रुक गया और उसकी चूत सहलाने लगा। उसे थोड़ा सुकून मिलता नजर आया तो मैंने फिर से अपना लंड उसकी चूत में डाल दिया और हल्के हल्के धक्के देने लगा। उसे भी मजा आने लगा और वो उछल उछल कर मेरा साथ देने लगी।

जब मैं झड़ने वाला था, मैंने उसे बताया तो उसने ‘फेस शॉवर’ देने को कहा। मैंने अपना माल उसके चहरे पर डाल दिया। वो उसे आईने में देखने लगी और खुश हो गई। उसने मुझे प्यार से गले लगाया।

मैं ऐसा ही पड़ा रहा, वो अपना चेहरा साफ करके आई और जाने के लिए कहने लगी।

मैंने कहा- प्रिया के आने तक रुक जाओ।

उसने कहा- जब तक मैं नहीं जाऊँगी, वो नहीं आएगी।

वो चली गई।

आगे क्या हुआ जानने के लिए अगले पाठ का इंतजार करें।

आपकी राय भेजना ना भूलना।
पढ़ाई के बहाने चुदाई (Padhai Ke Bahane Chudai) पढ़ाई के बहाने चुदाई (Padhai Ke Bahane Chudai) Reviewed by Priyanka Sharma on 1:15 PM Rating: 5

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