ऑफिस के लड़के ने की जबरदस्त चुदाई (Office Ke Ladke Ne Ki Jabardast Chudai)

ऑफिस के लड़के ने की जबरदस्त चुदाई
(Office Ke Ladke Ne Ki Jabardast Chudai)

मेरे पति रजत कहते हैं कि लता आज पड़ोस के सुरजीत जी को मैंने घर पर डिनर के लिए इनवाइट किया है तुम रात का डिनर तैयार कर देना मैंने रजत को कहा ठीक है रजत मैं रात का डिनर तैयार कर दूंगी। रजत कहने लगे मैं अभी ऑफिस जा रहा हूं मुझे ऑफिस से आने में देर हो जाएगी तुम मैनेज कर लोगी ना मैंने रजत को कहा हां रजत मैं मैनेज कर लूंगी आप चिंता ना करें। 

सुरजीत जी और मेरे पति एक ही दफ्तर में काम करते हैं और कुछ समय पहले ही वह हमारे घर के पास रहने के लिए आए तो हमारी उनसे अच्छी बातचीत हो गई। रजत और सुरजीत के बीच बहुत अच्छी दोस्ती हो चुकी थी इसलिए वह लोग अक्सर हमारे घर पर आते थे। 

मैं सामान लेने के लिए घर के पास ही डिपार्टमेंटल स्टोर है वहां पर चली गई जब मैं वहां पर गई तो वहां पर मुझे मेरी सहेली रचना दिखाई थी मैंने रचना को कहा रचना तुम कैसी हो। वह कहने लगी मैं तो ठीक हूं तुम सुनाओ तुम कैसी हो मैंने रचना को कहा मैं भी ठीक हूं।

रचना कहने लगी काफी दिनों से तुम मुझे दिखाई नहीं दी मैंने रचना को कहा यार घर के काम से बिलकुल भी फुर्सत नहीं मिल पाती है इसलिए मैं कहीं भी बाहर नहीं जा पाती आज घर में सामान खत्म हो गया था तो सोचा कि डिपार्टमेंटल स्टोर से सामान ले आऊं। 

रचना मुझे कहने लगी चलो इस बहाने कम से कम तुम से मेरी मुलाकात तो हो पाई मैंने रचना को कहा तुम्हारे घर में सब लोग कैसे हैं तो वह कहने लगी घर में सब लोग ठीक हैं। रचना मुझे कहने लगी अभी मैं चलती हूं, मैंने भी अपना सामान सारा रखवा लिया था मैंने बिल काउंटर पर बिल कटवाया और कहा कि आप इसे घर पर भिजवा दीजिए तो वह कहने लगे कि थोड़ी देर में सामान आपके घर पर पहुंच जाएगा। 

थोड़ी देर के बाद ही सामान घर पर पहुंच गया अब मैं रात के लिए तैयारी करने लगी क्योंकि मैं अकेली थी इसलिए मुझे ही सारा काम अकेले करना था। धीरे धीरे मैं काम करती रही और पता ही नहीं चला कि कब शाम हो गई अब मैं रसोई में चली गई और रसोई में खाना बनाने की तैयारी करने लगी। मुझे रजत का फोन आया और वह कहने लगे लता तुमने खाना बनाना शुरू तो कर दिया है ना तो मैंने रजत को कहा हां रजत मैंने खाना बनाना शुरू कर दिया है।

रजत मुझे कहने लगे कि चलो ठीक है मैं भी थोड़ी देर बाद आ ही जाऊंगा कुछ लेकर आना तो नहीं है मैंने रजत को कहा नहीं रहने दीजिए मैं सारा सामान ले आई थी। एक घंटे बाद रजत भी कर आ गए और मैंने भी लगभग खाने की तैयारी कर ही ली थी रजत मुझे कहने लगे कि यदि तुम्हें कुछ आवश्यकता हो तो तुम बता दो। मैंने उन्हें कहा नहीं रजत रहने दीजिए मैं और रजत आपस में बात कर रहे थे तभी रजत के फोन पर सुरजीत जी का फोन आया और वह भी थोड़ी देर बाद घर पर आ गए। 

मैंने भी लगभग सारा खाना तैयार कर लिया था सुरजीत और उनकी पत्नी घर पर आए हुए थे और वह लोग रजत के साथ बात कर रहे थे। मैंने उन्हें पानी पिलाया और उसके बाद मैं रसोई में चली गई कुछ देर तक मैं भी सुरजीत और उनकी पत्नी मीनाक्षी के साथ बैठी रही रजत मुझे कहने लगे कि लता चलो खाने की तैयारी कर लेते हैं। 

मैंने रजत को कहा ठीक है रजत, रजत ने भी मेरी मदद की और हम लोगों ने डाइनिंग टेबल पर खाना लगा दिया। अब हम लोग साथ में बैठकर खाना खाने लगे तो सुरजीत खाने की बड़ी तारीफ कर रहे थे और मीनाक्षी भी कहने लगी कि दीदी आप खाना बहुत अच्छा बनाती हैं। मैंने सुरजीत को कहा आप मीनाक्षी को भी कभी घर पर भेज दिया कीजिए तो सुरजीत कहने लगे कि मीनाक्षी आजकल जॉब करने लगी है। 

मैंने मीनाक्षी से कहा मीनाक्षी तुम कहां जॉब कर रही हो तो मीनाक्षी मुझे कहने लगी कि दीदी मैं एक प्राइवेट स्कूल है वहीं पर पढ़ाने के लिए चली जाती हूं मैं घर पर खाली बैठी हुई थी तो सोचा कुछ कर ही लूँ इसीलिए मैं स्कूल में पढ़ाने के लिए जाने लगी उससे मेरा टाइम भी कट जाया करता है और घर पर अकेले रहने से अच्छा है कि बाहर चले जाओ। 

मैंने मीनाक्षी को कहा हां मीनाक्षी तुमने ठीक किया जो तुम स्कूल में पढ़ाने लगी वह लोग रात के वक्त चले गए थे मैंने रजत को कहा रजत मैं भी कुछ दिनों से सोच रही थी कि मैं भी कुछ करूं लेकिन मुझे अपने लिए समय ही नहीं मिल पाता घर के काम से बिल्कुल भी अपने लिए समय नहीं निकाल पा रही हूं।

रजत मुझे कहने लगे कि लता यदि तुम्हें कुछ करना है तो तुम मुझे कह देती मैंने रजत को कहा मैं कहने के बारे में काफी समय से सोच रही थी लेकिन मैं आपसे कह ना सकी। मैंने जब रजत को यह बात कही तो रजत मुझे कहने लगे कि क्या तुम जॉब करना चाहती हो तो मैंने रजत को कहा हां रजत मैं सोच रही हूं कि मैं भी जॉब करूं। 

रजत ने कहा ठीक है मैं तुम्हारे लिए कहीं जॉब की बात कर लेता हूं कुछ दिनों बाद रजत ने मेरे लिए जॉब की बात कर ली उनके किसी परिचित के यहां पर मैं रिसेप्शनिस्ट की जॉब करने लगी। मेरा भी अब समय कट जाया करता था और मैं अपना खर्चा खुद ही उठाने लगी थी मुझे वहां पर काम करते हुए करीब एक महीना हो चुका था। 

मीनाक्षी से जब मेरी मुलाकात हुई तो मैंने मीनाक्षी को कहा तुम काफी दिनों से घर पर नहीं आई मीनाक्षी मुझे कहने लगी कि दीदी मैं कुछ दिनों पहले ही तो आपकी घर पर आई थी लेकिन घर पर ताला लगा हुआ था। मैंने मीनाक्षी को बताया हां दरअसल मैं भी जॉब करने लगी हूं इसलिए हो सकता है कि घर पर ताला लगा हो मीनाक्षी कहने लगी के दीदी आप कहां जॉब कर रही है।

मैंने मीनाक्षी को बताया कि मैं रिसेप्शनिस्ट की जॉब कर रही हूं मीनाक्षी कहने लगी दीदी आपने यह बहुत ही अच्छा फैसला लिया। मैंने मीनाक्षी को कहा हां मीनाक्षी मैं भी घर पर अकेले बोर हो गई थी तो सोचा कुछ कर लूं इसीलिए मैंने सोचा कि कहीं जॉब ही कर ली जाए। मैंने जब इस बारे में रजत से बात की तो रजत भी मेरी बात मान गये और उन्होंने अपने ही किसी परिचित से मेरी जॉब की बात की। 

उस वक्त उनके यहां पर रिसेप्शनिस्ट की वैकेंसी खाली थी तो मैंने वहीं पर ज्वाइन करने के बारे में सोच लिया था। मैं और मीनाक्षी काफी देर तक बात करते रहे हम लोग अपने घर के बाहर ही मिले थे तो मैंने मीनाक्षी को कहा मीनाक्षी तुम घर पर चलो। मीनाक्षी कहने लगी कि नहीं दीदी मैं कभी और आऊंगी अभी मैं घर जा रही हूं। 

मैंने मीनाक्षी को कहा चलो ठीक है जब तुम आओगी तो मुझे फोन कर देना मीनाक्षी कहने लगी ठीक है दीदी जब मैं आपसे मिलने के लिए आऊंगी तो आपको फोन कर दूंगी। मैं अब अपने घर आ गई मैं घर पहुंची ही थी कि थोड़ी देर बाद रजत भी आ गए। जॉब करने के दौरान मेरी मुलाकात अमित के साथ हुई मै अमित से जब भी बात करती तो उसकी नजर सिर्फ मेरे स्तनों पर ही होती थी। 

मैं अमित को कई बार कह चुकी थी तुम मेरी तरफ अपनी गंदी नजरों से मत देखा करो लेकिन अमित को इन सब बातों से कोई फर्क नहीं पड़ता था। मैंने एक दिन अमित से पूछ लिया तुम चाहते क्या हो? वह मुझे कहने लगा लता जी आप अपने दिल से पूछ कर देखिए आपको क्या चाहिए। अमित ने जैसे मेरे अंदर के तार छेड़ दिए थे मुझे नहीं मालूम था कि अमित मेरे अंदर की गर्मी को इतना ज्यादा बढ़ा देगा। 

अमित ने जब इस प्रकार की बात मुझसे की तो मैंने अमित से कहा क्या अभी हम लोग कहीं चले? अमित कहने लगा क्यों नहीं हम लोग अपने ऑफिस के छत पर चले गए उस वक्त लंच टाइम था। अमित ने मेरे होंठों को चूमना शुरू किया तो मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था जिस प्रकार से वह मेरे होठों का रसपान कर रहा था उससे मै बहुत ही ज्यादा उत्तेजित होने लगी थी।
ऑफिस के लड़के ने की जबरदस्त चुदाई (Office Ke Ladke Ne Ki Jabardast Chudai)
ऑफिस के लड़के ने की जबरदस्त चुदाई (Office Ke Ladke Ne Ki Jabardast Chudai)
मैंने जब अमित के लंड को अपने मुंह में लिया तो अमित का मोटा लंड पानी बाहर की तरफ को छोड़ने लगा था मैं लगातार उसके मोटा लंड को अपने मुंह में अंदर बाहर कर रही थी मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था और अमित को भी बड़ा मजा आता। वह मुझे कहने लगा अब मैं ज्यादा देर तक रह नहीं पाऊंगा मैने अमित के मोटे लंड को अपनी चूत पर सटा दिया। 

जब उसने मेरी चूत के अंदर अपने लंड को घुसाया तो अमित का मोटा लंड मेरी चूत के अंदर प्रवेश हो चुका था जैसे ही उसका मोटा लंड मेरी चूत के अंदर गया तो वह चिल्लाने लगी और मुझे बहुत ही मज़ा आने लगा। अमित मुझे तेजी से धक्के मारे जा रहा था मैं उस से अपनी चूतड़ों को मिलाए जा रही थी मैंने अमित को कहा मुझे बड़ा मजा आ रहा है। अमित कहने लगा लता जी आपने तो आज मुझे खुश कर दिया है जिस प्रकार से आपने आज मेरी इच्छा को पूरा किया उस से मैं अपने आपको बिल्कुल भी रोक नही पा रहा हूं।

मैंने अमित को कहा लेकिन तुमने भी तो मेरे अंदर की गर्मी को बढ़ा दिया था और तुम ही बताओ यदि मैं तुमसे अपनी चूत नही मरवाती तो क्या करती। उस वक्त मुझे अमित से अपनी चूत मरवाने में बहुत मजा आ रहा था और अमित ने मेरी चूत के मजे बहुत  देर तक लिए जिस प्रकार से अमित मुझे धक्के मारता उससे मैं बहुत ज्यादा खुश हो गई थी और काफी देर तक अमित मेरी चूत के मजे लेता रहा। 

जब अमित का वीर्य उसके अंडकोषो से बाहर की तरफ को निकल आया तो अमित ने अपने वीर्य को मेरी चूत के अंदर ही गिरा दिया। उसके बाद यह सिलसिला अक्सर चलता रहा मेरा जब भी मन होता तो मैं अमित को कह देती है और अमित मेरी इच्छा को पूरा कर दिया करता था हालांकि रजत ने भी सेक्स में कोई कमी नहीं रखी थी। लेकिन अमित के साथ भी शारीरिक संबंध बनाने में एक अलग ही मजा आता था।
ऑफिस के लड़के ने की जबरदस्त चुदाई (Office Ke Ladke Ne Ki Jabardast Chudai) ऑफिस के लड़के ने की जबरदस्त चुदाई (Office Ke Ladke Ne Ki Jabardast Chudai) Reviewed by Priyanka Sharma on 10:40 PM Rating: 5

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