मुझे मिली अनचुदी चूत (Mujhe Mili Anchudi Choot)

मुझे मिली अनचुदी चूत
(Mujhe Mili Anchudi Choot)

पापा मुझे कहते हैं कि बेटा आजकल अविनाश दिखाई नहीं देता तो मैंने पापा से कहा पापा अविनाश की तो नौकरी लग चुकी है पापा ने कहा लेकिन अविनाश की नौकरी कब लगी मुझे तो इस बारे में कुछ पता ही नहीं है। मैंने पापा को बताया कि अविनाश की नौकरी को लगे हुए एक महीना हो चुका है वह अपने पिताजी की जगह पर लगा है। 

अविनाश के पिता जी का देहांत हृदय गति रुकने से हुआ था जिसके बाद अविनाश उनकी जगह पर नौकरी लग गया पापा कहने लगे चलो यह तो अच्छी बात है कि अविनाश की नौकरी लग चुकी है कम से कम अविनाश अब अपने परिवार का ख्याल तो रख पाएगा। मैंने पापा से कहा हां पापा अविनाश अब अपने परिवार का ख्याल रख पाएगा।

पापा मुझे कहने लगे कि बेटा तुम्हारी भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई अब खत्म हो गई है तुमने भी क्या कहीं अपने इंटरव्यू के लिए तैयारी करनी शुरू की है। मैंने पापा से कहा हां पापा मैंने कुछ कंपनियों में अपना रिज्यूम तो भेज दिया है अब देखते हैं वहां से कब इंटरव्यू के लिए वह लोग बुलाते हैं पापा कहने लगे चलो कोई बात नहीं बेटा। 

पापा वैसे तो मुझे कभी कुछ कहते नहीं थे लेकिन अब मेरी पढ़ाई को भी एक वर्ष पूरा हो चुका है और एक वर्ष से मैं घर पर ही हूं इसलिए पापा को भी अब लगने लगा था कि मुझे नौकरी ज्वाइन कर लेनी चाहिए लेकिन मुझे अभी तक कहीं नौकरी मिल ही नहीं थी। 

मेरी बड़ी दीदी लैपटॉप में अपने ऑफिस का काम कर रही थी मैंने दीदी से बोला दीदी मेरा एक छोटा सा काम है दीदी बोलने लगी हां राहुल बोलो ना तुम्हारा क्या काम है। मैंने दीदी से कहा कि दीदी मुझे अपनी मेल चेक करनी थी क्या आपका लैपटॉप मैं कुछ देर के लिए इस्तेमाल कर सकता हूं। 

दीदी कहने लगी हां क्यों नहीं मैंने दीदी का लैपटॉप लिया और उसमें अपनी मेल आईडी डाल कर अपना मेल चेक किया तो उसमें एक कंपनी से मुझे इंटरव्यू के लिए कॉल लेटर आया हुआ था। मैंने दीदी को उनका लैपटॉप दिया और कहा मुझे इंटरव्यू के लिए कंपनी से लेटर आया है और परसों मेरा इंटरव्यू है तो दीदी कहने लगी चलो तुम अपना इंटरव्यू अच्छे से देना।

दीदी बहुत कम बात किया करती है वह ज्यादातर अपने काम में ही व्यस्त रहती हैं इसलिए मैं भी उनसे कम ही बात किया करता हूं। बचपन से ही उनका ऐसा स्वभाव है कि वह सब से कम ही बात किया करते हैं जब कोई जरूरी काम होता है तो ही वह बात किया करते हैं। 

उसी शाम अविनाश घर पर आया तो मैंने अविनाश से कहा अविनाश तुम्हारी जॉब कैसी चल रही है तो विनाश कहने लगा जॉब तो ठीक ही चल रही है लेकिन अपने लिए समय नहीं मिल पा रहा है। मैंने अविनाश से कहा कोई बात नहीं दोस्त कहीं ना कहीं तो अर्जेस्ट करना ही पड़ेगा अविनाश कहने लगा हां यार तुम बिल्कुल सही कह रहे हो कहीं ना कहीं तो अर्जेस्ट करना ही पड़ेगा। 

अविनाश मुझसे पूछने लगा तुम्हारी जॉब का क्या हुआ तो मैंने अविनाश को बताया कि मुझे भी कंपनी से इंटरव्यू के लिए लेटर आया है तो परसों मेरा वहां इंटरव्यू है। अविनाश कहने लगा चलो तुम्हारा भी वहां हो ही जाएगा मैंने अविनाश से कहा लेकिन तुम्हें कैसे पता कि मेरा वहां हो जाएगा तो अविनाश कहने लगा पता नहीं क्यों मुझे अंदर से आवाज आ रही है कि तुम्हारा वहां जरूरत सिलेक्शन हो जाएगा। 

मैंने अविनाश से कहा चलो देखते हैं यह तो परसों ही जाकर पता चलने वाला है मैंने अविनाश से कहा खैर यह बात छोड़ो तुम यह बताओ आंटी कैसी है। अविनाश मुझे कहने लगा मम्मी भी ठीक है मम्मी तुम्हें याद बहुत करती हैं और कहती हैं कि तुम घर ही नहीं आते हो। 

मैंने अविनाश से कहा यार तुम अब घर पर रहते ही नहीं हो तो मैं घर आकर क्या करूंगा अविनाश मुझे कहने लगा अरे तुम मम्मी से तो मिलकर आ ही सकते हो। मैंने अविनाश से कहा चलो तो अभी मैं तुम्हारे साथ चल लेता हूं अविनाश कहने लगा तो फिर चलो हम दोनों ही उसके घर चल पड़े। मैंने अविनाश से कहा मैं मम्मी को बोल देता हूं कि मैं तुम्हारे घर जा रहा हूं तो अविनाश कहने लगा हां तुम आंटी को बता दो।

मैंने अपनी मम्मी को बताया और कहा कि मैं कुछ देर में घर लौट आऊंगा तो मम्मी कहने लगी कि ठीक है बेटा और मैं अविनाश के घर चला गया। जब मैं अविनाश की मम्मी से मिला तो मुझे अच्छा लगा क्योंकि काफी समय बाद मेरी उनसे मुलाकात हो रही थी और वह मुझे कहने लगे कि राहुल बेटा तुम तो घर पर आते ही नहीं हो। मैंने  आंटी से कहा अविनाश की नौकरी लग चुकी है इसीलिए मेरा अब कम आना होता है आंटी ने भी मेरे हाल चाल पूछे और उसके बाद मैं कुछ देर अविनाश के घर पर रुका और फिर मैं अपने घर चला आया। 

मैं जब अपने घर आया तो पापा को भी मैंने अपने इंटरव्यू के बारे में बता दिया था और जब मैं इंटरव्यू देने के लिए गया तो मुझे बिल्कुल भी उम्मीद नहीं थी कि मेरा वहां सिलेक्शन हो जाएगा। मेरा उस कंपनी में सिलेक्शन हो चुका था और मैं अब अपनी नौकरी पर हर रोज सुबह जाता और शाम को लौट आता अविनाश से भी मेरी मुलाकात अब कम हो पाती थी हम लोग सिर्फ छुट्टी के दिन ही मिला करते थे। 

एक दिन अविनाश ने मुझे बताया कि उसके लिए अब रिश्ते आने लगे हैं मैंने अविनाश से कहा तुम्हें तो अब शादी कर ही लेनी चाहिए। अविनाश मुझे कहने लगा कि हां यार मुझे भी लगने लगा है कि मम्मी को किसी की जरूरत तो है इसलिए मैं भी अब शादी करने के लिए तैयार हूं लेकिन मुझे कोई अच्छी लड़की तो मिले।

मैंने अविनाश से कहा तुम्हें भी अच्छी लड़की मिल जाएगी अविनाश कहने लगा देखो इंतजार तो कर रहा हूं कि कोई अच्छी लड़की मिल जाए। मुझे क्या मालूम था कि जल्द ही मेरे जीवन में भी संजना आ जाएगी जब संजना मेरे जीवन में आई तो मेरी जिंदगी जैसे पूरी तरीके से बदल चुकी थी। 

संजना के आने से मैं उसकी बहुत ज्यादा फिक्र करने लगा था और मेरे लिए वह सबसे ज्यादा जरूरी थी शायद संजना भी मुझसे उतना ही प्यार करती थी। मैं भी उससे बहुत ज्यादा प्यार करता था मैंने संजना से कहा कि क्यों ना हम लोग इस बारे में घर में बात करें तो संजना कहने लगी मुझे थोड़ा और समय चाहिए राहुल यदि तुम कहो तो मैं घर में बात कर लेती हूं मुझे घर में बात करने से कोई भी आपत्ति नहीं है लेकिन मुझे थोड़ा समय चाहिए। 

एक दिन संजना के हॉट फिगर को देखकर मैं अपने आपको ना रोक सका संजना की जांघ पर मैंने हाथ रखा तो वह भी जैसे मुझे मना नहीं कर पाई और उसे कोई भी आपत्ति नहीं थी। संजना ने जब मेरे होठों को चूमा तो मैंने उससे कहा मुझे तुम्हारे साथ किस करना है। 
मुझे मिली अनचुदी चूत (Mujhe Mili Anchudi Choot)
मुझे मिली अनचुदी चूत (Mujhe Mili Anchudi Choot)
संजना ने कहा तो फिर कर लो जब मैंने उसके होंठों को चूमा तो हम दोनों के शरीर में पूरी गर्मी पैदा होने लगी थी और हम दोनों अपने आपको ना रोक सके। हम लोग संजना के घर पर चले गए उसके घर पर जाते ही हम दोनों ने चुम्मा चाटी शुरू कर दी संजना को भी ना जाने क्या हो गया था। वह भी अपने पूरे रंग में दिखाई दे रही थी जैसे वह मुझसे चुदने के लिए तैयार बैठी हुई थी। 

मैंने उसके होठों को तो चूमा ही उसके बाद जब मैंने उसके गोरे और कोमल स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया तो मुझे बड़ा अच्छा लगा। मैंने जब उसके होठों को और उसके स्तनों को चूमा तो उसके स्तनों से मैंने दूध भी निकाल दिया था संजना ने मुझे कहा कि तुम मेरी चूत को भी चाटो।

मैंने उसकी चूत को भी बहुत देर तक चाटा और उसकी चूत से पानी बाहर निकाल आया तो वह मुझे कहने लगी तुम अपनी जीभ को थोड़ा सा और अंदर डालो। मैंने अपनी जीभ को उसकी चूत के अंदर डाल दिया और वह मुझे कहने लगी अब मुझसे बिल्कुल नहीं रहा जा रहा। मैंने उसे कहा लो तुम भी मेरे लंड को थोड़ी देर चूसो उसने मेरे लंड को मुंह मे लिया और उसे चूसने लगी। 

वह मेरे लंड को बड़े ही अच्छे से चूस रही थी और उसे मजा आ रहा था मैंने जब अपने लंड को संजना की योनि पर लगाया तो उसकी योनि गिली हो चुकी थी। गीली चूत के अंदर लंड आसानी से चला गया मेरा लंड उसकी योनि के अंदर घुसा तो उसके मुंह से चीख निकली और उसने मुझे कसकर पकड़ लिया। उसने अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर लिया था और मैंने उसे तेज गति से चोदना शुरू कर दिए था। 

मैं जिस गति से संजना को धक्के मार रहा था उससे वह भी बिल्कुल रह नहीं पा रही थी वह मुझे कहने लगी मुझे और तेजी से चोदो मुझे मजा आ रहा है। संजना की चूत से खून बाहर निकल रहा था लेकिन उसके बावजूद भी वह मुझसे कह रही थी कि मुझे और चोदो। मैंने उसकी चूतडो को कसकर अपने हाथों से पकड़ा मैने उसे अब और भी तेज गति से धक्के मारने शुरू कर दिए थे।

मेरे धक्के लगातार तेज होते जा रहे थे वह मुझे कहने लगी कि शायद मुझसे रहा नहीं जाएगा। मैंने उसे कहा लेकिन मुझे तो बड़ा आनंद आ रहा है और उसी के साथ मैंने उसे घोड़ी बनाते हुए चोदना शुरू किया। उसकी चूतडे मुझसे टकराने लगी और मेरा लंड उसकी चूत के अंदर तक जा रहा था। मेरा लंड उसकी चूत के अंदर घुसता तो उसके मुंह से चीख निकालती वह मुझे कहती अब नही हो पाएगा। 

संजना अपनी चूतडो को मुझसे लगातार मिलाए जा रही थी और मैं भी उसे तेजी से धक्के मार रहा था काफी देर ऐसा करने के बाद जब मैंने अपने वीर्य को उसकी चूत के अंदर गिराया तो वह कहने लगी अभी भी मेरी गर्मी बुझी नहीं है। मैंने उसे कहा तो फिर तुम रुको मैं तुम्हारी गर्मी आज बुझा ही देता हूं मैंने संजना की चूत के अंदर दोबारा से लंड को घुसाया और पूरी तेज गति से पेलना शुरू कर दिया अब वह पूरी तरीके से हिल चुकी थी। उसका शरीर गर्मी बाहर छोड़ने लगा था वह कहने लगी अब मैं नहीं झेल पाऊंगी और कुछ समय बाद मेरा वीर्य दोबारा उसकी योनि में जा गिरा।
मुझे मिली अनचुदी चूत (Mujhe Mili Anchudi Choot) मुझे मिली अनचुदी चूत (Mujhe Mili Anchudi Choot) Reviewed by Priyanka Sharma on 11:13 PM Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.