मुझे बातों में फ़सा के चोद दिया (Mujhe Baaton Me Fansaa Ke Chod Diya)

मुझे बातों में फ़सा के चोद दिया
(Mujhe Baaton Me Fansaa Ke Chod Diya)

मेरे जीवन में सब कुछ तो था एक अच्छा परिवार एक अच्छी नौकरी और मेरे माता-पिता भी मुझे बहुत प्यार करते थे उन्होंने कभी भी मुझ में और मेरे बड़े भैया में कोई अंतर नहीं समझा। वह हमेशा ही मुझे कहते की तुम्हें जो करना है तुम कर लो उन्होंने मुझे पूरी आजादी दी थी और शायद इसीलिए मैं उनसे इतना प्यार करती थी। मैं उनके बिना एक पल भी नहीं रह सकती थी मेरे माता-पिता ही दुनिया में मेरे सब कुछ हैं और उन्ही की वजह से आज मैं एक अच्छी कंपनी में जॉब कर पा रही हूँ। मेरे पिताजी कॉलेज में प्रोफेसर हैं और उन्ही से हमेशा मुझे प्रेरणा मिलती है। उन्होंने हमेशा ही मुझे कहा है कि बेटा कभी भी हिम्मत मत हारना अपने जीवन को हमेशा अपने तरीके से ही जीना।

एक बार एक मेरे जीवन में केके घटना हुई, जब मैं कोलकाता से कुछ दूरी पर वर्धमान स्टेशन पर गई हुई थी तो वहां  स्टेशनों में गहमागहमी रहती है लेकिन वहां पर बिल्कुल भी भीड़ नहीं थी। ना जाने उस दिन क्यों रेलवे स्टेशन पर इतना सन्नाटा था कुछ लोग आसपास से गुजर रहे थे एक व्यक्ति अपने हाथ में सूटकेस लिए और कंधे पर बैग लटकाए हुए मेरे पास आकर बैठ गए और वह मेरी तरफ देख रहे थे। मुझे उनकी नस्लें बिल्कुल भी ठीक नहीं लग रही थी इसलिए मैं वहां से उठकर दूसरी जगह बैठ गई जिस जगह मैं बैठी वहां पर मच्छर इतना तंग कर रहे थे कि मन कर रहा था कि वहां से भी उठ कर चले जाऊँ लेकिन बार-बार भला मैं कहां उठती। 

मैं ट्रेन का इंतजार कर रही थी ज्यादा लोग तो स्टेशन पर नहीं थे लेकिन कुछ लोगों को आते जाते देखकर थोड़ा हौसला अफजाई हो जाता। गर्मी भी काफी ज्यादा हो रही थी और जिस सीट पर मैं बैठी थी वहां पर पंखा तक नहीं था इसलिए मैं पसीना पसीना हो रही थी और मन ही मन में घबराहट सी हो रही थी। मैं ना जाने अकेले ही कितनी बार सफर कर चुकी थी लेकिन उस वक्त थोड़ा अजीब सा महसूस हो रहा था और अंदर भय की भावना थी ट्रेन ना जाने क्यों इतना लेट थी।

मेरे पास पानी रखा था वह भी खत्म होने वाला था और मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था मैंने दुकान में जाकर पानी की बोतल ले ली मेरे दिमाग में ना जाने कैसे कैसे ख्याल पैदा हो रहे थे और मुझे डर लग रहा था। धीरे धीरे स्टेशन में लोगों की संख्या भी कम होने लगी थी और उंगलियों पर गिने चुने ही कुछ लोग रह गए थे। 

मैंने अपने बैग को उठाया और थोड़ा सा आगे जाकर देखा तो वहां पर कुछ लोग शराब पी रहे थे मुझे डर लगने लगा और वह लोग भी मेरी तरफ देख रहे थे। मैं वहां से छठ से पीछे पलटी और वेटिंग रूम की तरफ आ गई लेकिन ट्रेन अब तक नहीं आ पाई थी और मेरे हाथ पैरों से पसीना भी निकलने लगा था। मैंने जब उन लोगों को अपने सामने देखा तो मेरे हाथ पैर फूलने लगे और मुझे बहुत घबराहट होने लगी मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि ऐसी परिस्थिति में मुझे क्या करना चाहिए। कुछ लोग थे जो वहां पर लेटे हुए थे और वह शराबी लोग मेरे पास में आकर बैठ गए मेरे चेहरे से मेरा रंग उड़ चुका था और मेरा चेहरा फीका पड़ चुका था। 

मेरा गला भी खुखने लगा था लेकिन मैंने अभी तक पानी की एक बून्द नहीं पी थी और मेरे दिल की धड़कन तो बहुत तेज होने लगी थी लेकिन मेरे पास अब शायद उसका कोई जवाब नहीं था। मैं चुपचाप अपनी सीट पर बैठी रही तभी एक व्यक्ति मेरे पास आकर बैठे ना जाने उन्होंने मुझे कहां से देख लिया था और उन्होंने मुझे कहा धैर्य रखिए आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए। 

वह बिल्कुल मेरे सामने वाली सीट में बैठे हुए थे तो मेरी जान में जैसे जान आई वह पढ़े लिखे और समझदार इंसान लग रहे थे। उन्होंने चश्मा पहना हुआ था और उनके घुंघराले बाल थे जो मुझे अपनी ओर देखने को विवश कर रहे थे मैंने उनकी तरफ देखा तो वह कहने लगे आप चिंता ना कीजिए। वह लोग जो मेरा पीछा कर रहे थे वह भी वहां से उठकर चले गए मेरी जान में जैसे जान आई उसके बाद उन व्यक्ति का नाम मैंने पूछ ही लिया उनका नाम अमितेश है। 

अमितेश ने मुझसे कहा आपका नाम क्या है तो मैंने उन्हें बताया मेरा नाम शर्मिष्ठा है वह कहने लगे आप अभी कहां जा रही हैं। मैंने उन्हें बताया मुझे कोलकाता जाना है लेकिन ना जाने आज कोई ट्रेन आ ही नहीं रही है वह कहने लगे कुछ लोगों ने आंदोलन कर दिया है जिस वजह से ट्रेनें देरी से आ रही है वह लोग पटरी पर धरना दे रहे हैं।

मैंने उन्हें कहा अच्छा तो इसीलिए यहां पर भी आज इतनी भीड़ नहीं दिखाई दे रही है अमितेश मुझे कहने लगे कि आप क्या कुछ काम से यहां आई हुई थी। मैंने उन्हें कहा हां मैं अपने दफ्तर के काम से यहां आई हुई थी लेकिन मेरी रात की ट्रेन थी तो मैं जब यहां पहुंची तो मुझे कुछ अजीब सा महसूस हुआ और मुझे इस बात की बिल्कुल जानकारी नहीं थी कि ट्रेन देर से आएगी वैसे तो मैं इससे पहले भी कई बार यहां आ चुकी हूं लेकिन आज यहां पर काफी सन्नाटा सा है। अमितेश मुझे कहने लगे कि कोई बात नहीं कुछ देर बाद शायद ट्रेन आती होगी आप घबराइए मत मैंने अमितेश को धन्यवाद देते हुए कहा कि मैं आपका धन्यवाद देना ही भूल गई क्योंकि आपने मेरी मदद की वह शराबी मेरे पीछे यहां तक आ गए थे और मुझे बहुत डर लग रहा था। 

अमितेश मुझे कहने लगे काफी देर से मैं आपको देख रहा था आप काफी घबराई हुई लग रही थी तो मुझे लगा कि मुझे आपकी मदद करनी चाहिए इसलिए मैं आपकी मदद के लिए यहां पर आ गया। मैंने अमितेश से कहा लेकिन आप कहां जा रहे हैं वह कहने लगे कि मैं कोलकाता ही जा रहा हूं मेरे पापा कोलकाता में जॉब करते हैं और उनकी तबीयत ठीक नहीं है इस वजह से मुझे उनके पास जाना पड़ रहा है।

कुछ ही पलों में मैंने अमितेश को अपना अच्छा साथी बना लिया और हम दोनों आपस में बात करने लगे और मेरे अंदर से मेरा डर भी खत्म होने लगा था क्योंकि अमितेश अब मेरे साथ बैठे हुए थे। ट्रेन का अब तक कोई अता-पता नहीं था मुझे लगने लगा था कि शायद आज ट्रेन नहीं आने वाली उस वक्त घड़ी में 12:10 हो चुके थे और मुझे नींद भी आने लगी थी। 

अनाउंसमेंट बार-बार होता जा रहा था कि ट्रेन देरी से चल रही है लेकिन यह पता नहीं चल पा रहा था कि कितनी देरी से चल रही है। हम लोगों के पास भी अब कोई दूसरा रास्ता नहीं था इसलिए हम दोनों वेटिंग रूम में ही बैठ कर बात करते रहे। मेरी आंखों में नींद थी परंतु मुझे लगा कि सोना भी ठीक नहीं रहेगा क्या मालूम ट्रेन आ जाए इसलिए मैं अमितेश के साथ बात करती रही। 

मुझे अमितेश के बारे में काफी कुछ जानने को मिला मैंने भी अमितेश को अपने बारे में काफी कुछ बताया। हम दोनों वेटिंग रूम में ही बैठे हुए थे और एक दूसरे से बात कर रहे थे लेकिन अब भी ट्रेन के आने की फिलहाल कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही थी और बातों बातों में अमितेश ने मुझे कहा आपके होठों पर जो तिल है वह बड़ा ही अच्छा है। मेरे होठों के ऊपर एक तिल है जिसकी काफी लोग तारीफ करते हैं लेकिन जिस अंदाज में अमितेश ने मेरे उस तिल को बयां किया उससे मुझे उन्होंने अपनी ओर आकर्षित कर लिया था। 
मुझे बातों में फ़सा के चोद दिया (Mujhe Baaton Me Fansaa Ke Chod Diya)
मुझे बातों में फ़सा के चोद दिया (Mujhe Baaton Me Fansaa Ke Chod Diya)
मुझे नहीं मालूम था कि उन्होंने अपनी बातों में मुझे फसा लिया है मैंने भी अमितेश से कहा आपकी बातों का जवाब नहीं है। वह कहने लगे लेकिन आपके होंठ देखकर मुझे लग रहा है कि जैसे मुझे उन्हें अपना बना लेना चाहिए। जब उन्होंने मुझसे यह कहा तो मैं शर्माने लगी। रात भी काफी हो चुकी थी और आस पास अब कोई नजर भी नहीं आ रहा था हम दोनों ही अकेले थे और जिस प्रकार से मैंने अमितेश के होठों को चूसना शुरू किया तो मेरे अंदर भी एक अलग ही बेचैनी पैदा होने लगी।

अमितेश ने भी मुझे अपनी गोद में बैठा लिया वेटिंग हॉल में कुछ ही लोग थे और वह भी सो रहे थे। हम दोनों ने अपने ऊपर चादर ओढ़ ली अमितेश मेरे स्तनों को दबाए जा रहे थे जिस प्रकार से वह मेरे स्तनों को दबा रहे थे उससे मुझे भी बड़ा अच्छा लग रहा था और अमितेश भी बहुत खुश थे। 

अमितेश और मैंने एक दूसरे के साथ काफी देर तक चुंबन किया लेकिन अब हम दोनों रह नहीं पा रहे थे और जैसे ही अमितेश ने अपने मोटे लंड को बाहर निकाला तो मैंने उसके मोटे लंड को अपने मुंह के अंदर समा लिया और उसे में चूसने लगी। मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था मैं बहुत खुश थी जिस पर से मै अपने मुंह के अंदर बाहर उनके लंड को कर रही थी उससे उनके लंड से पानी भी बाहर निकलने लगा। उन्होंने मुझे कहा कि अब मैं रह नहीं पाऊंगा हम दोनों ही अब रह नहीं पा रहे थे और जैसे ही अमितेश ने मेरी योनि के अंदर डाला तो मुझे अच्छा लगने लगा और बड़ा मजा आ रहा था।

मुझे अमितेश ने वेटिंग हॉल के कोने में घोड़ी बना दिया और मेरे सलवार को नीचे उतारते हुए मेरी चूत के अंदर उन्होंने अपने लंड को प्रवेश करवाया तो मैं चिल्लाने लगी और अमितेश का मोटा लंड मेरी चूत के अंदर बाहर हो रहा था। मुझे बड़ा ही अच्छा लग रहा था और अमितेश को भी बहुत मजा आ रहा था काफी देर तक हम दोनों एक दूसरे के साथ सेक्स का मजा लेते रहे। जब उन्होंने मुझे कहा कि शर्मिष्ठा जी मुझे आपकी योनि में अपने वीर्य को गिराना है तो मैं मना ना कर सकी क्योंकि हम दोनों ही पूरी चरम सीमा में थे। 

जैसे ही उन्होंने अपने वीर्य को मेरी योनि के अंदर गिराया तो मैं खुश हो गई थी और मेरी खुशी का ठिकाना ना था। हम दोनों ही सीट में जाकर बैठ चुके थे और ट्रेन अभी नहीं आई थी। मैंने अमितेश के पैरों पर अपने सर को रख लिया और मुझे बड़ी अच्छी नींद आ गई। जब सुबह मेरी आंख खुली तो उस वक्त उजाला हो चुका था और ट्रेन आने ही वाली थी।
मुझे बातों में फ़सा के चोद दिया (Mujhe Baaton Me Fansaa Ke Chod Diya) मुझे बातों में फ़सा के चोद दिया (Mujhe Baaton Me Fansaa Ke Chod Diya) Reviewed by Priyanka Sharma on 10:21 PM Rating: 5

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