मैं चूत चुदवाने को उतावली थी (Main Choot Chudvane Ko Utawli Thi)

मैं चूत चुदवाने को उतावली थी(Main Choot Chudvane Ko Utawli Thi)

मैं अपने कॉलेज से घर लौटी तो मेरी मां कहने लगी तुम्हारी बहन मधु आ रही है मैंने मां को गले लगा लिया और मां से कहा क्या बात कर रही हो मधु दीदी आ रही है। मां ने उत्तर देते हुए कहा हां सोनिया मधु आ रही है मैं खुशी से झूम उठी थी और मैंने मां को कहा मां तुम देख रही हो मेरी आंखों में कितनी खुशी है। 

दीदी आ रही है दीदी से मिले हुए 6 महीने से ऊपर हो चुका है और अब दीदी आ रही हैं तो मुझे बड़ी खुशी हो रही है और आखिरकार होती भी क्यों नहीं क्योंकि मधु दीदी से मेरा प्यार इतना ज्यादा है कि हम दोनों बहनों कि जब भी फोन पर बात होती है तो हम लोग घंटो तक बात किया करते हैं और ऐसा लगता है कि जैसे हमारी बातें खत्म ही नहीं होने वाली है।

मुझे और मधु दीदी को बात करना बड़ा अच्छा लगता  ऐसा लगता कि जैसे कल की ही बात हो जब मधु दीदी की शादी हुई थी लेकिन मधु दीदी की शादी को हुए दो वर्ष होने को आए हैं और उन्होंने अपने मनपसंद वर के साथ शादी की। वह जिस लड़के से प्यार करती थी उसी से उनकी शादी हुई इसलिए मुझे तो कई बार लगता है दीदी दुनिया की सबसे खुशनसीब लड़की है कि वह जिस से प्यार करती थी उसी से उनकी शादी हुई। 

मैंने मां से पूछा दीदी कब आ रही है तो मां कहने लगी कि वह कह रही थी कि दो-तीन दिन बाद आ जाऊंगी। मैंने अपनी सहेली अंजली को भी अपनी दीदी के आने की खबर दे दी थी मेरे पेट में तो जैसे बात ही नहीं पच रही थी और मैंने अपनी सहेलियों को भी उनके आने की बता दी थी। हर बात में मेरे मुंह से मेरी दीदी का जिक्र आ ही जाता था इसीलिए तो वह मुझे कहते कि तुम अपनी दीदी से बहुत प्यार करती हो मुझे अपने दीदी से बहुत ज्यादा प्यार था। 

दो दिन पता नहीं कैसे बीते कुछ मालूम ही नहीं पड़ा मधु दीदी के घर आते ही घर पहले की तरह ही खुशियों से गूंज उठा था। पापा कहने लगे कि तुम दोनों की शरारते आज भी वैसे ही हैं पापा ने मधु दीदी को कहा अब तो तुम्हारी शादी हो चुकी है दीदी ने जवाब देते हुए कहा शादी ही तो हुई है। हम लोग आपस में बात कर ही रहे थे कि तभी मधु दीदी की पुरानी सहेली गीता भी घर पर आ गई थी और गीता दीदी से मिलकर मुझे काफी अच्छा लगा उनसे भी काफी वर्षों बाद मुलाकात हो रही थी। वह हमारे घर से कुछ दूरी पर ही रहती हैं लेकिन जब मधु दीदी की शादी नहीं हुई थी तो वह लगभग हमारे घर पर आती ही रहती थी।

वह जब हमारे घर पर आई तो वह मुझसे पूछने लगी सोनिया तुम क्या कर रही हो मैंने गीता दीदी को बताया कि मैं तो अभी अपने कॉलेज की पढ़ाई कर रही हूं, गीता दीदी कहने लगी चलो बहुत अच्छा है तुम कॉलेज की पढ़ाई कर रही हो। गीता दीदी घर पर दो-तीन घंटा रुकी और उसके बाद वह चली गई थी जब वह चली गई तो उसके बाद मैंने मधु दीदी से कहा कि दीदी शाम को हम लोग आज शॉपिंग करने के लिए चलेंगे। 

मधु दीदी कहने लगी ठीक है हम लोग शाम को शॉपिंग करने के लिए चलेंगे और हम लोग शाम के वक्त शॉपिंग करने के लिए चले गए। जब हम लोग शॉपिंग के लिए गए तो उस वक्त मुझे दो तीन कुर्तियां बड़ी पसंद आई लेकिन मैंने दीदी से कहा यह तो बड़ी महंगी है दीदी कहने लगी कोई बात नहीं तुम ले लो मैं तुम्हें पैसे दे देती हूं। मैंने दीदी को मना किया लेकिन दीदी ने मेरे लिए वह कुर्तीयां ले ही ली मैं बहुत खुश थी। शॉपिंग करने के बाद हम लोग घर लौट आये उस वक्त रात के 9:00 बज चुके थे और गली में भी काफी अंधेरा हो चुका था। 

हम लोग अपनी गली में पैदल ही आए तभी आगे से कुछ कुत्ते भोंकते हुए आ रहे थे मैंने दीदी से कहा मुझे बड़ा डर लग रहा है तो दीदी कहने लगी डरो मत। कुछ ही देर में हम लोग अपने घर पहुंच गए जब हम लोग घर पहुंचे तो मां कहने लगी दोनों बहनों ने आज क्या खरीदा होगा। मैंने मां से कहा आज हम लोगों ने काफी अच्छी शॉपिंग की और दीदी ने मुझे कुर्तियां भी दिलाई मां ने बोला जरा मुझे भी तो दिखाओ तुम्हारी बहन ने तुम्हें कैसी कुर्तियां दिलवाई हैं। मैंने मां को दिखाया तो मां भी खुश हो गई और कहने लगी तुम दोनों बहनों का प्यार देखकर मुझे बहुत अच्छा लगता है और कई बार मुझे दोनों से ही ईर्ष्या भी होती है कि मेरी कोई बहन नहीं है।

मैंने मां से कहा मां आपकी बहन नहीं है तो क्या हुआ आपकी बेटियां तो है ना मां कहने लगी हां तुम लोग बिल्कुल ठीक कह रहे हो। पापा ने कहा मुझे तो बड़ी जोरदार भूख लगी है मां कहने लगी बस अभी खाना लगा देती हूं। मां ने खाना लगा दिया था और हम लोगों ने साथ में बैठकर खाना खाया जब दीदी और मैं अपने रूम में बैठे हुए थे तो हम दोनों आपस में बात कर रहे थे। 

मैंने दीदी से जीजा जी के बारे में बात की तो दीदी कहने लगी तुम्हारे जीजा जी मेरा बहुत ध्यान रखते हैं कभी-कभार छोटी मोटी बात को लेकर झगड़े हो जाते हैं लेकिन उसके बावजूद भी हम लोगों के बीच बहुत प्यार है और मुझे इस बात की खुशी है कि तुम्हारे जीजा के रूप में मुझे एक अच्छे साथी मिले जो कि मेरा बहुत ध्यान रखते हैं और मेरी बहुत देखभाल करते हैं। 

मैंने दीदी से कहा लेकिन आप भी तो जीजा जी से बेइंतहा प्यार करती थी और आप लोगों की शादी तो होनी ही थी पिताजी इस रिश्ते से खुश नहीं थे लेकिन अब जब पिता जी आपको देखते हैं तो उन्हें अच्छा लगता है। दीदी मुझे कहने लगी हां सोनिया तू बिल्कुल ठीक कह रही है पिताजी पहले इस बात से तैयार ही नहीं थे लेकिन अब वह बहुत खुश हैं और उन्हें इस बात की खुशी है कि मेरी शादी एक अच्छे घर में हुई। मैं और मेरी दीदी साथ हीं बैठे थे तभी दीदी मुझसे कहने लगी कहीं तुम्हारा भी तो किसी के साथ अफेयर नहीं चल रहा है।

मैंने दीदी से कहा नहीं दीदी लेकिन एक लड़का मुझे बहुत पसंद है परंतु वह मेंरी तरफ देखता ही नहीं है। मैंने दीदी को जब अमित की तस्वीर दिखाई तो दीदी मुझे कहने लगी लड़का तो बहुत अच्छा है और देखने में भी काफी हैंडसम है। मैंने दीदी से कहा लेकिन मुझे उससे बात करने में शर्म आती है इसलिए मैं अब तक उससे बात नहीं कर पाई हूं दीदी कहने लगी यदि ऐसा है तो क्या मैं तुम्हारी मदद करूं। 

मैंने दीदी से कहा नहीं दीदी आप रहने दीजिए मैं खुद ही अमित से बात कर लूंगी और अमित मेरी क्लास में ही तो है लेकिन मेरे अंदर अमित से बात करने की हिम्मत ना थी और मैं अमित से बात कर ही नहीं पाई। मुझे मेरी दीदी मधु ने कहा कि तुम्हे अमित से बात करनी पड़ेगी उनके कहने पर मैंने अमित से अब नजदीकिया बढ़ानी शुरू कर दी थी। अमित और मेरी नजदीकिया बढ़ने लगी थी हम दोनों एक दूसरे से मिलते तो कम थे लेकिन फोन पर मै अमित के साथ बात किया करती थी। 

अमित के लिए मेरा दिल में पहले से ही जगह थी लेकिन अब अमित के दिल में भी मेरे लिए जगह बनने लगी थी। हम दोनों ही एक दूसरे से मिलने के लिए उत्सुक रहने लगे थे हम दोनों जब पहली बार मिले तो उस दौरान मुझे घबराहट सी हो रही थी क्योंकि मैं किसी लड़के से पहली बार अकेले मे मिल रही थी। हम दोनों पार्क में मिले थे और पार्क में मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा था लेकिन फिर भी हम दोनों ने एक दूसरे के साथ समय बिताया। जब पहली बार अमित ने मेरा हाथ पकड़ा तो मुझे बड़ा अच्छा लगा जिस प्रकार से अमित ने मेरा हाथ पकड़ा उससे मैं उसकी हो चुकी थी और अमित भी मुझसे बहुत ज्यादा खुश था।

हम दोनों एक दूसरे से अकेले में मिलने लगे थे और हम दोनों के बीच वह घड़ी आ गई जब हम दोनों एक दूसरे से मिले तो हम दोनों के बीच में किस हो गया। मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगा और मुझे बड़ा डर लग रहा था लेकिन मैं जब घर आई तो मुझे महसूस हुआ की यह भी जिंदगी का एक अहम हिस्सा है और मैंने इस बारे में अमित से भी बात की तो वह कहने लगा तुम भी कैसी बचकानी बात करती हो। 
मैं चूत चुदवाने को उतावली थी (Main Choot Chudvane Ko Utawli Thi)
मैं चूत चुदवाने को उतावली थी (Main Choot Chudvane Ko Utawli Thi)
मुझे भी लगा कि अमित बिल्कुल सही कह रहा है और मैंने फिलहाल इस बारे में अपने दिमाग से ख्याल निकाल दिया था। अमित और मै एक दूसरे से मिले तो हम दोनों अपने अंदर की भावनाओं को रोक न सके और अमित मुझसे अपने होठों को टकराने लगा। अमित ने अपने नरम होठों को मुझसे टकराना शुरु किया तो मेरे होंठ गीले हो चुके थे। 

मेरे अंदर से भी गर्मी बाहर की तरफ निकल आती मेरे अंदर से इतनी गर्मी निकलने लगी कि मैं उस गर्मी को बिल्कुल भी झेल नहीं पा रही थी और जब वह मेरे स्तनों पर अपने हाथ को लगाता तो मुझे अधिक गर्मी महसूस होती लेकिन कुछ देर बाद अच्छा लगने लगा। अमित मेरे स्तनों को बहुत देर तक दबाता रहा जब अमित मेरे स्तनों को दबा रहा था तो उससे मेरे अंदर एक अलग ही बेचैनी जाग रही थी।

अमित ने जब अपने लंड को बाहर निकाला तो अमित मुझसे उम्मीद कर रहे थे कि मैं अपने मुंह में लंड को लू लेकिन मुझे अच्छा नहीं लगा। अमित कहने लगे तुम्हें लंड को लेना ही पड़ेगा मैंने भी अमित के लंड को अपने मुंह के अंदर समा लिया और उसे बहुत देर तक चूसती रही। 

जैसे ही अमित ने अपने लंड को मेरी योनि के अंदर डाला तो मेरी चूत से खून निकलने लगा और मेरी योनि से इतना ज्यादा खून बाहर की तरफ को निकल आया था कि मुझे डर भी लग रहा था लेकिन कुछ देर बाद मुझे मजा आ रहा था। मैं अमित का साथ बड़े अच्छे से देती रही आखिरकार अमित ने भी अपने वीर्य की पिचकारी से मेरी योनि को अपना बना लिया और हम दोनों एक हो गए। उसके बाद तो ना जाने कितनी बार हम दोनों के बीच में शारीरिक संबंध बने।
मैं चूत चुदवाने को उतावली थी (Main Choot Chudvane Ko Utawli Thi) मैं चूत चुदवाने को उतावली थी (Main Choot Chudvane Ko Utawli Thi) Reviewed by Priyanka Sharma on 9:54 PM Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.