जीजा ने जबरन गाँड़ मार ली (Jija Ne Jabran Gaand Maar Li)

जीजा ने जबरन गाँड़ मार ली
(Jija Ne Jabran Gaand Maar Li)

सुधांशु मुझे ऑफिस जाते वक्त कह गए थे कि आज शाम को बच्चों को हम लोग घुमाने ले जाएंगे क्योंकि कल मेरी छुट्टी है। मैंने सुधांशु से कहा कि ठीक है हम लोग शाम को तैयार हो जाएंगे मैं बच्चों को तैयार कर दूंगी। सुधांशु उसके बाद ऑफिस जा चुके थे और मैं घर पर ही थी मैंने सोचा घर की साफ सफाई कर लेती हूं काफी दिनों से घर की अच्छे से साफ सफाई भी नहीं हुई थी तो मैं वही करने लगी। 

जैसे ही मैं सफाई कर के सोफे पर बैठी थी तो उस वक्त घर की डोर बेल बजी, मैंने तुरंत दरवाजा खोला तो सामने देखा मेरी बहन सुचिता थी। सुचिता दीदी मुझे देखते ही खुश हो गए और मेरे चेहरे पर भी मुस्कान थी मैंने दीदी से कहा दीदी आज आप अचानक से यहां कैसे आ गई तो दीदी ने जवाब दिया कि अचानक से कहां आई हूं रेखा मैं तो सुधांशु को बता कर आई थी।

मेरे कुछ समझ में नहीं आया कि दीदी ने कब सुधांशु को बताया क्योंकि सुधांशु ने मुझे कुछ भी नहीं बताया था मैंने दीदी से कहा दीदी लेकिन मुझे इस बारे में सुधांशु ने कुछ भी नहीं बताया था। दीदी मुझे कहने लगी हो सकता है उनके दिमाग से यह बात निकल गई हो वह तुम्हें बताना भूल गए हो मैंने दीदी से कहा दीदी क्या आपने सुधांशु को बताया था तो दीदी कहने लगी हां मैंने बताया था मुझे तो याद है मैं कैसे भूल सकती हूं। 

दीदी और मैं आपस में बात कर रहे थे मैंने दीदी से दीदी के हाल-चाल पूछे और कहा कि दीदी आप आज अचानक से मुझे मिलने आ गई तो मुझे बहुत खुशी हो रही है। दीदी कहने लगी खुश तो मैं भी बहुत हो रही हूं क्योंकि इतने समय बाद तुम से मेरी मुलाकात जो हो रही है। 

दीदी ने मुझे कहा कि उनके बड़े लड़के अक्षत का विदेश के एक नामी कॉलेज में दाखिला हो गया है। मैंने दीदी से कहा दीदी यह तो बड़ी खुशी की बात है और अक्षत भी तो चाहता था कि वह किसी अच्छे कॉलेज से पढ़ाई करें। दीदी कहने लगे कि हां अक्षत तो चाहता ही था कि वह किसी अच्छे कॉलेज से पढ़ाई करें लेकिन उसने मेहनत की थी और तुम्हारे जीजा जी ने भी पैसों का प्रबंध कर दिया था अब अक्षत कुछ दिनों बाद विदेश जाने वाला है।

मैंने दीदी से कहा चलिए आपके लिए तो यह बहुत ही अच्छा रहा दीदी कहने लगी लेकिन रेखा तुम भी तो काफी दिनों से घर नहीं आई थी। मैंने दीदी से कहा दीदी आप तो जानते ही हैं कि घर में कितना काम हो जाता है मुझे तो बिल्कुल भी समय नहीं मिल पाता इसलिए मैं आपसे मिलने नहीं आ पाती और आज ही देखो ना सुधांशु ने घूमने का प्लान बनाया है और थोड़ी देर बाद बच्चे आते ही होंगे। 

दीदी कहने लगी अच्छा तो आज तुम लोग बाहर घूमने के लिए जाने वाले हो मैंने दीदी से कहा हां दीदी सुधांशु आज सुबह ही मुझे कह गए थे कि कल उनकी छुट्टी है और हम लोग घूमने के लिए चलेंगे। मैंने जब दीदी को यह बात कही तो दीदी कहने लगी मैं भी तुम्हारे जीजा जी को कह देती हूं वह भी अक्षत को अपने साथ ले आएंगे और हम लोग भी आज तुम्हारे साथ ही चल पड़ेंगे। 

मैंने दीदी से कहा दीदी इससे अच्छी और क्या बात हो सकती है आप लोग आज हमारे घर पर ही रुक जाइएगा दीदी कहने लगे ठीक है मैं तुम्हारे जीजा जी से इस बारे में बात कर लेती हूं। दीदी ने जीजा जी को फोन किया जीजा जी ने उस वक्त तो फोन नहीं उठाया लेकिन थोड़ी देर बाद उन्होंने कॉल किया तो वह दीदी से पूछने लगे की क्या कोई जरूरी काम था। 

दीदी ने उन्हें बताया कि हम लोगों ने आज शाम को घूमने का प्लान बनाया है तो अक्षत को अपने साथ रेखा के घर पर ले आना जीजा जी कहने लगे ठीक है जब मैं ऑफिस से आऊंगा तो अक्षत को अपने साथ लेता हुआ आऊंगा। बच्चे भी दोपहर में अपने स्कूल से लौट चुके थे और वह दीदी के साथ खेल रहे थे शाम के 5:00 बज रहे थे उस वक्त मैंने दीदी से कहा कि दीदी मैं आपके लिए चाय बना देती हूं। 

दीदी कहने लगी ठीक है तुम मेरे लिए चाय बना देना लेकिन ज्यादा मत बनाना मैंने दीदी से कहा ठीक है दीदी मैं आप के लिए थोड़ी सी चाय बना देती हूं। मैंने दीदी के लिए चाय बना दी और हम दोनों साथ में बैठकर चाय पी रहे थे और बच्चे भी हमारे पास आ गए कुछ देर बाद जब बच्चे हमारे पास आए तो मैंने उन्हें कहा बेटा तुम लोग तैयार हो जाओ लेकिन मुझे मालूम था कि मुझे ही उन्हें तैयार करना पड़ेगा और उन्हें तैयार करना भी कोई आसान खेल नहीं था।

उन्हें तैयार करने में मुझे समय लगने वाला था उसके बाद मैंने उन्हें तैयार करना शुरू किया मैं उन्हें कपड़े पहना चुकी थी मैंने उन्हें कहा कि तुम हमारे साथ ही हॉल में बैठ जाओ। वह लोग हमारे साथ ही हॉल में बैठे हुए थे और वह दीदी के साथ बात कर रहे थे सुधांशु भी अपने ऑफिस से लौट चुके थे मैंने जब सुधांशु को बताया कि जीजा जी और अक्षत भी आ रहे हैं तो वह कहने लगे चलो यह तो बहुत अच्छा है कि कम से कम सब लोग साथ में तो घूमने के लिए जा पाएंगे। 

सुधांशु भी तैयार होने के लिए रूम में चले गए और कुछ देर बाद जीजा जी और अक्षत भी आ चुके थे जब वह लोग आए तो हम लोगों ने तैयार होने की सोची और फिर हम लोग तैयार हो गए। हम लोगों को तैयार होने में थोड़ा समय जरूर लग गया था लेकिन अब हम तैयार हो चुके थे और हम लोग घर से निकल चुके थे। 

पहले तो हम लोग बच्चों को मॉल में ले गए और वहां पर बच्चों ने जमकर मॉल में गेम का मजा लिया उसके बाद हम लोगों ने वहीं मॉल में डिनर करने की सोची। डिनर हम लोगों ने साथ में किया और उसके बाद हम लोग घर लौट आए हम लोगों को घर लौटने में रात के 12:00 बज चुके थे।

हम लोग घर पहुंच चुके थे मुझे नींद आ रही थी। मैंने दीदी से कहा दीदी आप लोग भी सो जाइए दीदी जीजाजी और अक्षत एक ही रूम में सो गए थे। सुधांशु और मैं एक साथ सोए हुए थे लेकिन अचानक से रात को मेरी नींद खुल गई। मैंने जब घडी मे देखा तो उस वक्त 2:00 बज रहे थे। 

मैं उठकर अपनी रसोई में गई वहां मैंने फ्रिज से पानी निकाला तो मैंने देखा मेरे पीछे जीजाजी भी खड़े थे। मैं उन्हें देखकर डर गई और उनकी बाहों में जाकर गिरी। जब मैं उनकी बाहों में गिरी तो वह मुझे कहने लगे रेखा क्या हुआ? मैंने उन्हें बताया कि जीजा जी मुझे नींद नहीं आ रही थी मैं पानी लेने के लिए आई थी। मेरे स्तनों के स्पर्श से जीजा जी के अंदर आग लग चुकी थी और उनकी आग को बुझाने के लिए मुझे कुछ करना था। 

जीजा जी ने मुझे कहा हम लोग यहीं बैठ जाते हैं हम दोनों बैठक में बैठे हुए थे और आपस में बात कर रहे थे लेकिन तभी मेरे अंदर से आग निकलने लगी थी और मुझे बड़ा अजीब सा महसूस होने लगा था। जीजा जी ने अपने मोटे लंड को बाहर निकाला और मुझसे उन्होंने कहा कि तुम इसे अपने मुंह के अंदर लेकर चूसने शुरू करो। मैंने भी उनके मोटे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया काफी देर तक मैंने उनके लंड को रसपान किया। 

जब उनके लंड से मैंने पानी बाहर निकाल दिया तो वह मुझे कहने लगे कि मुझे बड़ा अच्छा लग रहा है। उन्होंने मेरी चूत को चाटना शुरू किया तो वह मेरे पैरों को खोल कर मेरी चूत को चाट रहे थे और मुझे भी बड़ा अच्छा लग रहा था। जब मैंने उनके लंड को दोबारा से अपने मुंह में लिया तो मेरे चूत गिली होने लगी थी और मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था। 

जीजा जी ने मुझे बिस्तर पर लेटाकर मेरी योनि के अंदर अपने लंड को घुसाना शुरू किया तो मेरे अंदर से भी अब गर्मी बाहर निकलने लगी थी। अब मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था और जीजा जी ने जिस प्रकार से मुझे चोदना जारी रखा उससे तो मेरी चूत छिलकर रह गई थी वह मुझे बडी तेजी से धक्के मार रहे थे।
जीजा ने जबरन गाँड़ मार ली (Jija Ne Jabran Gaand Maar Li)
जीजा ने जबरन गाँड़ मार ली (Jija Ne Jabran Gaand Maar Li)
जब मैंने अपनी चूतडो को उनकी तरफ किया तो उन्होंने अपने लंड को मेरी योनि के अंदर घुसाया और जब उनका लंड मेरी योनि के अंदर गया तो मेरे अंदर करंट दौडने लगा और उस करंट को उन्होंने और भी ज्यादा बढ़ा दिया जब वह मुझे तेज गति से धक्के देने लगे। अब वह मुझे बड़ी तेजी से चोदते उनके धक्के लगातार बढते जा रही थी वह मेरी चूत  पर इतनी तेजी से प्रहार कर रहे थे कि मुझे बहुत अच्छा लग रहा था। 

उन्होंने मेरे चूतड़ों का रंग लाल कर दिया था और मेरी चूतडे उनके लंड से बडी तेज टकराती। मै अच्छे से उनके लंड को अपने अंदर समा रही थी थोड़ी देर बाद जीजा जी ने लंड को बाहर निकालते हुए अपने लंड पर थूक लगाया। उन्होंने मेरी गांड के छेद के अंदर अपने लंड को घुसा दिया उनका मोटा लंड मेरी गांड के अंदर घुसते ही मेरे मुंह से तेज चीख निकली।

यह पहला ही मौका था जब मैं किसी से अपनी गांड मरवा रही थी क्योंकि इससे पहले मैंने आज तक कभी भी किसी से अपनी गांड नहीं मरवाई थी और ना ही मैंने अपने पति को कभी अपनी गांड मारने दी थी। जीजा जी ने अपने लंड को मेरी गांड मे घुसा दिया था मैं बहुत चिल्ला रही थी और मुझे उनसे अपनी गांड मरवाना अच्छा लग रहा था। पहले तो मुझे दर्द का आभास हो रहा था लेकिन धीरे-धीरे वह दर्द भी अब गायब हो चुका था और मुझे उनके साथ बढ़ा ही मजा आ रहा था। 

मैं अपनी गांड को उनसे टकराए जा रही थी और मुझे इतना ज्यादा मजा आता मेरे चूतड़ों का तो बुरा हाल हो चुका था। मुझे लगा कि मैं शायद अपने जिंदगी में कभी किसी से गांड नहीं मरवा पाई लेकिन जब जीजा जी ने मेरी गांड में लंड को डाला तो मुझे महसूस हुआ कि एनल सेक्स करने में भी बड़ा मजा आता है। मैंने जीजा जी के साथ सेक्स का भरपूर मजा लिया जब जीजा जी का वीर्य गिरा तो मुझे बहुत अच्छा लगा और हम दोनों अपने कमरों में सोने के लिए चले गए।
जीजा ने जबरन गाँड़ मार ली (Jija Ne Jabran Gaand Maar Li) जीजा ने जबरन गाँड़ मार ली (Jija Ne Jabran Gaand Maar Li) Reviewed by Priyanka Sharma on 2:00 AM Rating: 5

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