जवान चूत की दहकती आग बुझाई (Jawan Choot Ki Dahakti Aag Buhai)

जवान चूत की दहकती आग बुझाई
(Jawan Choot Ki Dahakti Aag Buhai)

मैं एक 25 वर्षीय युवक हूं घर की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के चलते मुझे कभी भी अपनी जिम्मेदारियों का एहसास नहीं हुआ और मैं हमेशा ही अपने पैसे के घमंड से सब कुछ खरीदने के बारे में सोचता रहता था। मुझे ऐसा लगता था कि पैसे से सब कुछ खरीदा जा सकता है लेकिन यह भ्रम मेरा उस वक्त टूट गया जब मेरी मुलाकात राधिका से हुई उसने मेरा सारा घमंड चकनाचूर कर के रख दिया। 

मैं उसके पीछे पागलों की तरह दीवाना होता चला गया पहली बार राधिका मुझे कॉलेज में दिखी थी जब वह मुझे कॉलेज में दिखी तो मुझे पहले ही नजर में उससे एक तरफा प्यार हो गया लेकिन यह सब इतना आसान होने वाला नहीं था। 

राधिका पढ़ने में हमेशा ही आगे रही वह कॉलेज में आती और अपनी पढ़ाई कर के चली जाया करती थी लेकिन मैं और मेरे दोस्त हम लोग कॉलेज में सिर्फ आवारागर्दी करने के लिए जाया करते थे हमें पढ़ाई से कोई लेना देना नहीं था क्योंकि शायद हमारे लिए पढ़ाई का कभी कोई मोल था ही नहीं। हम लोगों को लगता था कि हमारे पिताजी सब कुछ कर लेंगे इसी के चलते हम लोगों ने पढ़ाई में कभी भी ध्यान नहीं दिया और उसका खामियाजा मुझे उस वक्त भुगतना पड़ा जब मैं अंतिम वर्ष में था।

उस वक्त मेरे अच्छे नंबर नहीं आए और मैं फेल हो गया मेरे पिताजी ने मुझे कहा कि बेटा यदि तुम्हारा पढ़ाई में मन नहीं लगता तो तुम मेरा काम ही संभाल लो। मैंने उन्हें कहा पिताजी ऐसा कुछ भी नहीं है मैं अभी अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहता हूं लेकिन मेरे ऊपर तो पैसे का भूत सवार था। एक दिन मैं अपनी गाड़ी से जा रहा था तभी मौसम बड़ा सुहाना हो गया और अचानक से झमाझम बारिश शुरू हो गई। अचानक से हुई बारिश से रोड पर पड़े गड्ढे में पानी भर चुका था और मैं अपनी गाड़ी बड़ी तेजी से लेकर जा रहा था। 

मैं कॉलेज के अंदर अपनी गाड़ी को पार्क कर रहा था तभी एक गड्ढे में तेजी से मेरी गाड़ी का टायर पड़ा और सारा पानी राधिका के ऊपर गिर गया राधिका को लगा कि मैंने यह सब जानबूझकर किया है लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं था। 

उसने मुझे कहा कि क्या तुम कार सही से नहीं चला सकते, मैं भी अपनी गाड़ी से उतरा और मैंने राधिका से कहा मैंने जानबूझकर नहीं किया मैं उसके लिए तुमसे माफी मांगता हूं। राधिका कहने लगी तुम्हें तो कोई फर्क ही नहीं पड़ता तुम आखिरकार अपने पैसों के घमंड में चूर चूर हो मैंने राधिका से कहा तुम्हें शायद गलतफहमी हुई होगी मैंने यह जानबूझकर नहीं किया यदि मुझे जानबूझकर करना होता तो मैं क्या तुमसे माफी मांगता। 

राधिका को तो मेरी गलती ही नजर आ रही थी उसने मुझे काफी कुछ भला बुरा कह दिया था मैंने भी चुपचाप उसकी बात सुनी और मैं वहां से अपनी क्लास में चला गया। जब मैं अपनी क्लास में गया तो मैंने देखा मेरे दोस्त मेरा इंतजार कर रहे थे मैं क्लास में बैठा ही था कि तभी मेरा दोस्त मोंटू आ गया मोंटू कहने लगा यार आज तुमने बहुत अच्छा किया जो उस सिरफिरी लड़की के ऊपर पानी गिरा दिया। मैंने मोंटू से कहा लेकिन तुम्हें कैसे पता कि वह सिरफिरी है मोंटू कहने लगा मेरे साथ भी उसने पहले एक दो बार ऐसा ही किया है पता नहीं उसे क्या लगता है। 

मोंटू अंदर ही अंदर अपने मुंह में पता नहीं क्या कह रहा था लेकिन मैंने मोंटू से कहा यार मैंने जानबूझकर नहीं किया वह तो अचानक से हो गया। मुझे जब भी राधिका दिखाई देती तो मैं उससे अपनी नजरें बचाने की कोशिश किया करता मुझे राधिका को देख कर मेरी गलती नजर आ जाती थी। 

जब मैंने राधिका के बारे में पता करवाना शुरू किया तो राधिका एक सामान्य से परिवार की लड़की है और वह गरीब बच्चों को भी फ्री में ट्यूशन दिया करती थी मुझे यह सब सुनकर बहुत ही अच्छा लगा और मैंने उसकी मदद करने के बारे में सोचा। मैंने उससे एक दिन इस बारे में बात की तो राधिका ने मुझे कहा लगता है तुम दोबारा से मुझे परेशान करने आ गए हो इसमें जरूर तुम्हारी कोई चालाकी होगी। 

मैंने राधिका से कहा तुम मेरे बारे में ऐसा क्यों सोचती हो राधिका मुझे कहने लगी देखो अक्षत मुझे तुम्हारे बारे में सब कुछ मालूम है तुम एक बड़े बाप की औलाद हो और तुम्हारे पापा के पास बहुत पैसा है तुम शायद इसी घमंड में अब तक जी रहे हो लेकिन पैसे से ही सब कुछ नहीं खरीदा जा सकता।

मेरे भी दिल पर अब यह बात लग चुकी थी लेकिन मैंने लाख कोशिश की कि वह मेरे साथ दोस्ती कर ले लेकिन ऐसा हुआ नहीं। राधिका से दोस्ती करने के लिए मैंने पहले उसकी सहेली से दोस्ती कर ली अब उसकी सहेली से तो मेरी अच्छी दोस्ती हो चुकी थी और हम लोगों के बीच अच्छी बातचीत भी होती थी लेकिन राधिका को इससे कुछ भी लेना-देना नहीं था वह तो अपनी ही दुनिया में मस्त थी। 

मुझे भी कई बार लगता कि राधिका शायद अपनी जगह बिल्कुल ठीक है लेकिन मैं राधिका को पाना चाहता था। हम लोगों का कॉलेज पूरा हो चुका था मैंने तो अपने पापा का बिजनेस संभाल लिया था लेकिन राधिका भी नौकरी की तलाश में थी और फिर राधिका की एक कंपनी में नौकरी लग गई लेकिन वहां पर उसने ज्यादा दिन तक काम नहीं किया। 

जब मैंने उसकी सहेली से यह बात पूछी तो उसने मुझे बताया कि वहां पर जो बॉस थे उनकी नीयत कुछ ठीक नहीं थी इसलिए राधिका ने वहां से काम छोड़ दिया है और अब वह घर पर ही है। मैंने भी राधिका की नौकरी लगवा दी लेकिन मैंने यह बात राधिका को पता नहीं चलने दिया और ना हीं मैं उससे यह बात पता चलने देना चाहता था लेकिन उसकी सहेली ने राधिका को सब बात बता दी। राधिका बहुत ही स्वाभिमानी है और जब उसे यह बात पता चली तो उसने मुझे फोन कर दिया और कहने लगी तुम्हें क्या लगता है मुझे मेरी मेहनत के बलबूते नौकरी नहीं मिल सकती थी।

मैंने राधिका से कहा देखो राधिका ऐसा बिल्कुल भी नहीं है तुम ना जाने मेरे बारे में इतना गलत क्यों सोचती हो मैंने कभी तुम्हारे बारे में ऐसा नहीं सोचा राधिका कहने लगी देखो अक्षत मुझे मालूम है इसमें भी तुम्हारी जरूर कोई चाल होगी। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि राधिका आखिरकार मुझ पर भरोसा क्यों नहीं करती है उसका भरोसा जीतने के लिए मुझे क्या करना होगा और उसका भरोसा जीतने के लिए मैंने क्या कुछ नहीं किया लेकिन वह तो जैसे मेरी बात तक सुनने को तैयार नहीं रहती थी। 

एक दिन मैंने राधिका मैंने उसके लिए वह किया जो उसने कभी सोचा भी नहीं था राधिका के पिताजी बहुत ही ज्यादा बीमार हो गए थे और उनके घर की आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं थी। मैंने उस वक्त राधिका की बहुत मदद की जिससे कि उसे एहसास हुआ कि मैंने उसके बारे में कभी गलत नहीं सोचा लेकिन मैंने उसके बदले राधिका को अपने दिल की बात नहीं कही नहीं तो उसे लगता कि शायद मैंने इसीलिए उसकी मदद की है मैं चाहता था कि राधिका को लगे की मैंने उसकी मदद निस्वार्थ भाव से की है। 

अब राधिक और मेरे बीच में सब कुछ ठीक हो चुका था उसे भी एहसास हो गया था कि मैंने उसकी मदद की है इस वजह से वह भी मुझसे बात करने लगी थी। राधिका के दिल में मेरे लिए काफी प्यार जागने लगा था और मुझे भी बहुत अच्छा लगता क्योंकि मैं राधिका को पहले से ही चाहता था। उसके पिताजी की बीमारी ने हम दोनों को एक साथ लाकर खड़ा कर दिया था राधिका एक दिन मुझसे बात कर रही थी मैंने राधिका से अपने दिल की बात कह दी। मैंने राधिका से अपने दिल की बात कही तो वह मुझे कहने लगी अक्षत मैं तुम्हारे बारे में बिल्कुल गलत सोचती थी लेकिन तुम ऐसे नहीं हो मुझे जब तुम्हारे बारे में पता चला कि तुमने पिताजी की किस प्रकार से निस्वार्थ भाव से सेवा की और हमारी तुमने आर्थिक रूप से मदद की उसे मेरे दिल में तुम्हारे लिए जगह बन गई है।

यह कहते हुए राधिका ने मुझे गले लगा लिया पहली बार ही मै राधिका से गले मिला था हम दोनों जिस प्रकार से एक दूसरे से गले मिल रहे थे उससे मेरे अंदर राधिका को लेकर कुछ अलग ही भावना पैदा होने लगी थी। उस वक्त यह सब करना ठीक नहीं था अब हम लोगों का मिलना अक्सर होता रहता था कुछ ही समय बाद जब राधिका को पहली बार मैंने किस किया तो हम दोनों ही ना सके और एक दूसरे को बहुत देर तक हमने चुंबन किया। 
जवान चूत की दहकती आग बुझाई (Jawan Choot Ki Dahakti Aag Buhai)
जवान चूत की दहकती आग बुझाई (Jawan Choot Ki Dahakti Aag Buhai)
अब हम दोनों एक दूसरे के हो चुके थे मैंने राधिका के स्तनों पर स्पर्श करते हुए उन्हें दबाना शुरू किया मेरे हाथों के स्पर्श से वह मचलने लगी थी। मैंने राधिका की गांड पर भी अपने हाथ को लगा दिया था अब हम दोनों ही पूरे रोमांटिक मूड में आ चुके थे और हम दोनों ही एक दूसरे के साथ सेक्स संबंध बनाना चाहते थे। राधिका ने मुझे बहुत ही अच्छे से किस किया जब मैंने राधिका के कपड़े उतारने शुरू किया तो राधिका का नंगा बदन देखकर मैं अपने आपको बिल्कुल भी ना रोक सका जिस प्रकार से मैने राधिका के स्तनों का रसपान किया उससे वह मचलने लगी थी और मुझे भी बड़ा अच्छा लग रहा था। मैंने राधिका की योनि को बहुत देर तक चाटा राधिका की योनि को चाटने में मुझे बड़ा मजा आ रहा था राधिका की योनि से पानी बाहर निकलने लगा था।

मैंने उसकी योनि पर अपने लंड को सटाया तो वह मचलने लगी और मैंने जैसे ही उसकी योनि के अंदर अपने लंड को धक्के देते हुए अंदर की तरफ घुसाया तो वह पूरी तरीके से मचलने लगी थी और उसके अंदर से गर्मी बाहर निकलने लगी। मेरे धक्को मे लगातार तेजी आती जा रही थी और उसी तेजी के साथ राधिका के मुंह से भी मादक आवाजो में बढ़ोतरी होती जा रही थी उसके मादक आवाज को सुनकर मैं और भी ज्यादा उत्तेजित हो जाया करता और उसके दोनों पैरों को खोलकर मैं उसे धक्के देता जिस से राधिका को बड़ा आनंद आ रहा था और मुझे भी बड़ा मजा आता। काफी देर तक हम दोनों एक दूसरे के साथ ऐसा ही करते रहे लेकिन जब उसकी टाइट चूत कुछ ज्यादा ही टाइट होने लगी तो मैं बिल्कुल भी बर्दाश्त ना कर पाया और मेरा वीर्य पतन हो गया। मेरा वीर्य पतन होते ही मैंने राधिका को गले  लगा लिया।
जवान चूत की दहकती आग बुझाई (Jawan Choot Ki Dahakti Aag Buhai) जवान चूत की दहकती आग बुझाई (Jawan Choot Ki Dahakti Aag Buhai) Reviewed by Priyanka Sharma on 11:04 PM Rating: 5

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