एक भाई ने सील तोड़ी दुसरे ने हवस मिटाई (Ek Bhai Ne Seal Todi Doosre Ne Hawas Mitayi)

एक भाई ने सील तोड़ी दुसरे ने हवस मिटाई
(Ek Bhai Ne Seal Todi Doosre Ne Hawas Mitayi)

मेरा नाम राधिका है। मैं हिमाचल की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र 19 साल है। ब्रदर सिस्टर के सेक्स की यह बात करीब 2 साल पहले की है जब मैंने 12वीं के एग्जाम दिया था।

यह घटना मेरी और मेरे भाई की है। मेरे घर में मेरे अलावा मेरे पापा और ममा, मेरी निकिता दीदी जिनकी उम्र 21 साल है और 23 साल का मेरा भाई परम है। मेरी दीदी पापा की लाड़ली हैं और वो पापा के साथ ही रहती हैं। मेरी निकिता दीदी तभी घर आती है जब मेरे पापा घर आते हैं।

मेरी दीदी साड़ी और खुले गले का ब्लाउज पहनती हैं जिसमें उनका भूरा पेट, गहरी नाभि और आधी चूचियाँ साफ दिखती हैं। पापा और ममा उनको कभी मना नहीं करते हैं, बल्कि खुश होते हैं। मेरे पापा दिल्ली में जॉब करते हैं और मेरा भाई पंजाब में।
मेरे भाई परम की हाइट 5 फ़ीट 9 इंच और बॉडी बिल्डर जैसी बॉडी है।

मेरी हाइट 5 फ़ीट 3 इंच है और मेरा रंग गोरा है। मेरी चूचियों की साइज़ 32 कमर 28 और कूल्हे 36 के हैं।

मेरे स्कूल में लड़के मेरे कूल्हों के दीवाने हैं। मैं लड़कों की तरह छोटे बाल रखती हूँ। मुझे जीन्स ओर शर्ट टॉप पहनना पसन्द है। मेरी हाइट कम होने के कारण मेरे कूल्हे ज्यादा बड़े दिखते हैं। मेरी चूचियाँ गोल और ब्राउन कलर के निप्पल हैं, चेहरा गोल है।

मेरा भाई कंपनी में जॉब करता है। उनको खाना बनाने में दिक्कत होती थी तो ममा ने मुझसे कहा कि तुम चली जाओ भाई के साथ। वैसे भी मैं घर पर पूरा दिन खाली ही रहती थी तो मेरी भी इच्छा भाई के साथ जाने की थी। मैं भी चाहती थी कि मैं उनके साथ रहूँ क्योंकि मुझे वहाँ आजादी मिल जाती और वहाँ घूमने फिरने का मौका भी मुझे मिलता। और वैसे भी अपने परम भाई के साथ मुझे रहना, उनके साथ सोना, बातें करना- यह मुझे अच्छा लगता है।

घर में भी मेरा और भाई का एक ही कमरा है। मैं भाई के साथ हर बात शेयर कर लेती हूँ। यहाँ तक कि भाई मुझे गिफ्ट में ब्रा और पेंटी भी दे देते हैं। असलियत तो यह है कि मैं परम को ही अपना बॉयफ्रेंड मानती हूँ लेकिन परम को ये पता नहीं है कि उनकी छोटी बहन ही उनकी हमबिस्तर होने को तैयार है।

मैंने ममा की बात पर हाँ कर दिया और और भाई के साथ जाने को तैयार हो गयी। भाई भी खुश हो गए क्योंकि उनको खाना बनाने वाली जो मिल रही थी।

दिन में ममा कुछ बाजार के काम से बाहर चली गयी। मैं और भाई घर पर अकेले रह गए। तब भाई ने कहा कि राधिका तुम अपने कपड़े पैक कर लो और मेरे कूल्हों पर हल्का सा चांटा लगा दिया। भाई ऐसा करते रहते थे।

आखिर हम भाई बहन सुबह घर से चल दिए और शाम को 8 बजे पंजाब भाई के रूम पर पहुँच गए। हम दोनों काफी थक गए थे तो मैंने और भाई ने शॉवर लिया और खाना खाया जो हम अपने घर से पैक करके ले आये थे।

खाना खाने के बाद हम दोनों ने सोने की तैयारी की। भाई के रूम में एक ही बेड था जिस पर हम दोनों लेट गए। मैं दीवार की तरफ मुँह करके सो गयी जिससे मेरे कूल्हे भाई की तरफ हो गए। भाई ने अपना लण्ड मेरे कूल्हों से सटा दिया और मेरे पेट पर हाथ रख कर मुझसे चिपक कर सो गए।

थोड़ी देर बाद मुझे अपने कूल्हों के बीच में हलचल महसूस हुई। मैंने सोचा कि भाई नींद में है, रहने दो, जो हो रहा है उसे होने दो … क्योंकि मजा तो मुझे भी आ रहा था।

थोड़ी देर बाद क्या हुआ कि भाई आगे पीछे होने लगे। तो मैंने अपने पैरों को थोड़ा खोल दिया जिस से भाई का लण्ड मुझे मेरी चूत पर महसूस होने लगा। उस समय मैंने लोवर के नीचे पैंटी नहीं पहनी थी। भाई अब थोड़ा तेजी से आगे पीछे होने लगे मगर मैं चुप पड़ी रही।
5 मिनट बाद भाई ने मुझे आवाज़ दी- राधिका!
मैं कुछ नहीं बोली।
भाई ने दुबारा आवाज दी तब मैं बोली- हाँ भाई?
भाई- जाग रही हो?
मैं- हॉं भाई!
भाई- मेरी तरफ मुँह करके सो जाओ।
मुझे मालूम था कि भाई चोदना चाहते हैं मुझे। मैंने भाई की तरफ मुँह कर लिया और अपनी आँखे बन्द कर के सोने लगी।

भाई- राधिका यार, क्या तेरा कोई बॉयफैंड है?
मैं- नहीं भइया, आपके पास कोई लड़का हो तो बताना!
और मैं हँस दी।
भाई भी हँसने लगे।

मैंने भाई से पूछा कि आपकी कोई गर्लफ्रैंड है क्या?
भाई- नहीं, जॉंब से फुर्सत हीं नहीं मिलती जो लड़की पटाऊँ। अब मुझे गर्लफ्रैंड की जरूरत नहीं है।
मै- क्यूँ?
भाई- तुम जो आ गयी हो, आज से तुम हो मेरी गर्लफ्रैंड।

इतना कहते ही भाई ने मेरी दोनों चूचियों के बीच मुँह रख दिया और अपना लण्ड मेरी बुर से सटा दिया।

मैं भी भाई से यही चाहती थी क्योंकि भाई मेरे बचपन से ही स्मार्ट रहे हैं। मैंने अपनी टांगें थोड़ी सी खोल क़र भाई के कूल्हों पर हाथ रख कर उनको अपनी तरफ खींच लिया।

तभी भाई पीछे हट गए।
मैं घबरा गयी कि अब क्या हो गया।
भाई- राधिका, मुझे फुल मज़ा करना है।

यह कह कर भाई ने अपनी लोअर और टीशर्ट उतार दी। भाई ने नीचे अंडरवियन नहीं पहना था। भाई का लण्ड करीब 6 या 7 इंच लम्बा और करीब 3 इंच मोटा था। मुझे लगा कि मैं इसे नहीं ले पाऊँगी।

अपने कपड़े उतारने के बाद भाई मेरे भी कपड़े उतारने लगे। मेरी टीशर्ट उतारते ही चूचियॉं उनके सामने लहराने लगी। मुझे बहुत शरम महसूस हो रही थी।
तभी भाई मेरी चूचियों को हाथ में ले कर दबाने लगे।
भाई ने चूची को मुँह में भर लिया। मेरी सिसकारियाँ छूटने लगीं.. आह.. सीईईईईई ईईईई
मुझे इतना मजा आ रहा था कि मैं बता नहीं सकती। सच पूछो तो मेरी चूत से पानी निकलने लगा था।

तभी भाई ने मेरी लोअर निकाल दी। मेरी क्लीन चूत भाई के सामने थी। भाई ने चूत पर हाथ रखा और 1 उंगली अंदर डाल दी।

मुझे बहुत मजा आ रहा था। हम दोनों लोग नंगे ही एक दूसरे को गले लगाने लगे।

कुछ देर बाद भाई अपना लण्ड मेरे मुँह में डालने लगा। मैं उसको मना कर रही थी- नहीं, मैं यह नहीं करूंगी।
तो वो बोला- इसमें मज़ा आता है।

मैंने थोड़ा नानुकुर के बाद भाई का लण्ड चूसना शुरू कर दिया। मुझे लण्ड चूसना इतना अच्छा लग रहा था कि मैं बेशर्मों की तरह उसका लण्ड चूसती रही।

वह 69 पोजीशन में होकर मेरी चूत को सहलाने लगा फिर मैंने पाया कि उसकी जीभ मेरी चूत को चाट रही है। मैं मदहोश होकर आहें भरने लगी। हम दोनों भाई बहन पूरा चुदाई के खेल में लग गये थे। वह मेरी बुर को अपनी जीभ से चोद रहा था और मैं आहें भर रही थी।

तभी वह उठा और अपनी मेज की दराज से एक कंडोम निकाल कर ले आया। मैं बिस्तर पर थी। उसने मेरे सामने खड़े होकर अपने लण्ड पर कंडोम चढ़ाया। मैं चुपचाप लेटी उसके खड़े लण्ड को देख रही थी।

कंडोम लगाने के बाद वह बिस्तर पर मेरे ऊपर चढ़ गया और अपने जिस्म से मेरे जिस्म को रगड़ने लगा। मैं भी एकदम चुदासी हो गयी थी, मैं कह रही थी- मुझे चोदो मेरे भाई!
मेरा भाई भी अब चुदाई करने के लिए बेचैन हो गया था। अपने लण्ड पर उसने कंडोम लगाया हुआ था। उसका खड़ा लण्ड कंडोम की वजह से चमक रहा था।

वह अपना लण्ड मेरी बुर पर रगड़ रहा था। वह मेरी टांगों को फैला कर मेरे जांघों के बीच में आ गया और अपना लण्ड मेरी चूत में घुसाने लगा। मैं भी कसमसा रही थी कि यह जल्दी से अपना लण्ड मेरी चूत में डाल दे और चोद चोद कर मेरा बुरा हाल कर दे। मैं भाई के लण्ड से चुदवाने के लिए इतनी गर्म और चुदासी हो गयी थी कि जब वह अपना लण्ड मेरी बुर में डाल रहा था तो उसके लण्ड को चूत पर फिसलता देख कर मैंने खुद उसका लण्ड पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर लगा दिया।

लण्ड को चूत के छेद पर सेट करने के बाद मैंने भाई को इशारे से कहा- अब मेरी चूत में लण्ड डालो।
भाई ने एक जोरदार धक्का लगाया तो उसका पूरा लण्ड एक बार में ही मेरी गीली चूत में पूरा समा गया। भाई का लण्ड इतना मोटा और बड़ा था कि मुझे बेइंतहा दर्द हुआ और मेरी चूत से खून निकलने लगा।

तभी भाई ने एक और धक्का मारा और भाई का लण्ड मेरी वर्जिन चूत के खून से लथपथ होकर चूत में गहराई तक समा गया। मैंने भाई को रुकने के लिए बोला तो भाई ने मेरे होठों को चूसना शुरू कर दिया।
होठों के चूसने से जब मेरा दर्द कम हुआ तो मैंने अपने कूल्हे हिला कर भाई को इशारा किया। तब भाई ने फिर से अपना लण्ड आगे पीछे करना शुरू कर दिया। मुझे अब हल्का हल्का सा दर्द हो रहा था लेकिन कुछ देर बाद मैं भी अपनी गांड को नीचे से उछाल कर उसका लण्ड अपनी चूत में लेने लगी।

बहुत मस्त चुदाई हो रही थी; मैं भाई का पूरा साथ दे रही थी और वह भी अपनी बहन की बुर को बहुत अच्छे से चोद रहा था। हम लोग बहुत देर तक चुदाई करते रहे। हम दोनों लोग चुदाई करते करते एक दूसरे से चिपट कर एक दूसरे को कस कर गले भी लगा लेते थे।

थोड़ी देर बाद वह अलग हो गया; अब वह मुझसे घोड़ी बनने के लिए बोल रहा था। मैं उसके लिए तुरन्त घोड़ी बन गयी। वह मेरे पीछे से आकर मेरी चूत में लण्ड पेलना शुरू किया। हम दोनों इस तरह चुदाई कर रहे थे जैसे हम दोनों एक अरसे से चुदाई करते चले आ रहे हों। हम दोनों चुदाई के साथ साथ एक दूसरे को किस भी करते जा रहे थे।

थोड़ी देर तक घोड़ी बना कर चोदने के बाद उसने मुझे अपने लण्ड पर बैठने के लिए इशारा किया। मैं तैयार हो गयी। मैं अपनी दोनों टांगे दोनों तरफ करके भाई के लण्ड पर बैठ गयी। भाई ने नीचे से धक्का लगाना शुरू किया। हर धक्कें के साथ लण्ड चूत में समाता चला गया।
करीब आधा घंटा गरमागरम चुदाई के बाद हम दोनों झड़ने को हो गये।

मैंने भाई को कस कर पकड़ लिया और झड़ने लगी तभी भाई के लण्ड ने भी वीर्य छोड़ दिया। इसके बाद हम दोनों ने एक दूसरे को किस करना शुरू किया। उसने मुझे आई लव यू बोला और मैंने भी उसे आई लव यू बोला।

हम दोनों ब्रदर सिस्टर नंगे ही आपस में चिपटे रहे। थोड़ी देर बाद हम दोनों की पता नहीं कब आँख लग गयी। कुछ देर बाद भाई का लण्ड सिकुड़ कर बाहर आ गया। सुबह उठ कर हम दोनों ने फिर एक बार चुदाई की।

मैं अपने भाई परम के साथ दो महीने रही और हमने एक दिन भी ऐसा नहीं गंवाया जिस दिन हमने चुदाई न की हो।
पता नहीं सेक्स में ऐसी क्या बात है कि 2 महीने में मेरे शरीर में निखार आने लगा।

दो महीने बाद मैं घर आ गयी और मैंने हिमाचल में एक कॉलेज में एड्मिशन ले लिया। उसी कॉलेज में ही मेरी बुआ जी का लड़का अजय पढ़ता था। मेरा कॉलेज मेरी बुआ जी के घर से 50 किलोमीटर दूर था। लेकिन न उनको पता था और न ही मुझे पता था के हम दोनों एक ही कॉलेज में पढ़ते हैं, वो भी हॉस्टल में रहता था और मैंने भी हॉस्टल ले लिया।

जब मैं हॉस्टल में गयी तब मुझे राजन नाम की लड़की के साथ कमरा मिल गया। एक-दो दिन में ही हमारी अच्छी दोस्ती हो गयी। हम सब बातें शेयर करने लगी।
मैंने कभी मेरे भाई के साथ सम्बन्धों के बारे में उसे नहीं बताया।

एक दिन मैं जब अकेली क्लास से हॉस्टल जा रही थी तो मेरी मुलाकात मेरी बुआ के लड़के अजय से हो गयी। वो मुझे देखकर अचम्भित हो गए और मुझसे बोले- राधिका तुम यहाँ?
मैंने अजय भैया को बताया- भैया, मैं यहीं पढ़ती हूं.
फिर उनसे पूछा- और आप यहाँ कैसे?
तब उन्होंने भी बताया कि मैं भी यहीं पढ़ता हूं।

तब एक दूसरे से हमने बहुत सी बातें की।

भाई दिखने में बहुत ही स्मार्ट था। अक्सर हम जब भी मिलते तो मुस्कुरा देते।

एक दिन राजन ने हमें एक साथ देख लिया। तब मेरी रूममेट हॉस्टल में जाकर मुझसे बोली- यार, जीजू तो स्मार्ट हैं।
मैं एकदम से हैरान हो गयी और पूछा- कौन जीजू? किसकी बात कर रही है तू?
उसने कहा- आज तू कॉलेज में जिस से बातें कर रही थी … वही जीजू और कौन?
मैंने पता नहीं क्यों राजन को कुछ भी नहीं बताया कि वो मेरा बॉयफ्रेंड नहीं मेरी बुआ का बेटा, मेरा भाई है।

अगले दिन मैं जब अजय भैया से मिली तो उनको बताया कि मेरी रूममेट राजन ये कह रही थी।
वो हंसने लगे।
इतने में राजन भी आ गयी और बोली- लगे रहो … लगे रहो।
उसे देख कर हम हंस दिये।

पता नहीं क्यों, अजय ने भी उसे नहीं बताया कि हम भाई बहन हैं।

एक महीना ही हुआ था कि अजय ने मुझे कॉल किया और पूछने लगे- राधिका, आज मूवी देखने चलोगी? मैं अकेला हूं।
मैंने ‘हां; कर दी और राजन को भी साथ ले चलने को पूछा।
तब उन्होंने कहा- जैसा तुमको ठीक लगे।
तो मैंने कहा कि हम दोनों ही चलेंगे, राजन को रहने देते हैं.

मैं तैयार हो गयी मैंने उस दिन ब्लू जीन्स और स्काई शर्ट पहनी, और पैरों में जूती डाली ही थी कि तभी अजय का कॉल आ गया। जब मैं हॉस्टल से बाहर आई तो देखा अजय मेरा इंतजार कर रहा था। मैं जाकर उसके साथ बाइक पैर बैठ गयी, और सिनेमा पहुंच गए।

जब मूवी शुरू हुई तो अजय ने मेरी सीट के पीछे हाथ रख लिया और धीरे धीरे मेरे कन्धे पर हाथ रख दिया। मुझे अजीब सा लगा परन्तु मैंने कुछ नही कहा. फिर उन्होंने अपना हाथ हटा लिया पर मेरे पैर पर रखकर सहलाने लगे।
मैंने मना नहीं किया क्योंकि मुझे भी अपने बदन पर उनके हाथ की सरसराहट अच्छी लग रही थी।

इंटरवल तक यही चलता रहा और इंटरवल के बाद उन्होंने मेरे बूब्स पर हाथ रखकर धीरे से मेरे कान में कहा- राधिका, अगर तुमको अच्छा नहीं लगा तो बता दो, मैं कुछ भी नहीं करूँगा।
मैंने कुछ नहीं कहा तो वो समझ गए कि इसमें मेरी भी मौन सहमति है और भैया मेरी चुचियों को दबाने लगे।

मैं गर्म होने लगी थी, 10 मिनट बाद मैंने उनका हाथ हटा दिया तो उन्होंने पूछा- क्या हुआ?
असल में तो मैं नहीं चाहती थी कि भिया मुझे गर्म करके यूं ही छोड़ दें तो मैंने बहना बना कर उनके कान में कहा- भैया कोई देख लेगा, तो अच्छा नहीं लगेगा।

मूवी खत्म होते ही मैं उनसे नजर नहीं मिला पा रही थी और चुपके से उनके पीछे बाइक पर बैठ गयी।

वहां से भैया मुझे एक पार्क में चले गए। वहां बैठकर अजय ने मुझसे कहा- देख राधिका, मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है। इसलिए मैं तुमको यहां ले आया था और मैं तुमसे प्यार करता हूं। प्लीज मना मत करना।
मुझे भी अब लण्ड की जरूरत थी तो मैंने भी कहा- ठीक है!
और मेरी हां सुनते ही उन्होंने मुझे गाल पर किस कर दिया।
मैंने कहा- यहां नहीं भैया, यहाँ कोई देख लेगा!
और हम वापिस हॉस्टल चले गए।

अब हम रोज फ़ोन पर सेक्सी बातें करते और मैं हर रोज सुबह बाथरूम में जाकर नंगी होकर अजय भाई को वीडियो कॉल करके नहाती, उन्हें अपना बदन दिखाती।
एक दिन अजय ने कहा- चलो, कल मेरे घर चलें। कल मां सोनाक्षी (बुआ की लड़की) के साथ तुम्हारे घर जा रही है।
तो मैंने हां कर दी।

अगले दिन दोपहर में जब हम दोनों उनके घर पहुंचे तो बुआ भी जा चुकी थी।
मैं बहुत रोमांचित थी क्योंकि आज मुझे एक नया लण्ड जो मिलने वाला था।

घर जाकर मैंने अजय और मेरे लिए चाय बनाई और अजय से पूछा- बाथरूम कहां है? मुझे कपड़े बदलने हैं।
तब अजय भी मौके का फायदा उठाते हुए बोले- बाथरूम की क्या जरूरत है, लाओ मैं तुम्हारे कपड़े चेंज कर देता हूं।
और भैया ने मुझे अपनी बांहों में भर लिया और मेरे होंठों को चूमने लगे।
एक भाई ने सील तोड़ी दुसरे ने हवस मिटाई (Ek Bhai Ne Seal Todi Doosre Ne Hawas Mitayi)
एक भाई ने सील तोड़ी दुसरे ने हवस मिटाई (Ek Bhai Ne Seal Todi Doosre Ne Hawas Mitayi)
मुझे बहुत अच्छा लग रहा था और मैं भी अजय का साथ देने लगी। अजय ने धीरे से मेरी चूचियों पर हाथ रख दिया और दबाने लगा। मेरे निप्पल तन गए। मेरा मन कर रहा था कि एकदम से भाई का लण्ड पकड़ लूं। लेकिन ऐसा करती तो उनको गलत लगता।

उन्होंने धीरे धीरे मेरी शर्ट के बटन खोल दिए और शर्ट को निकाल दिया, और मेरी पीठ पर हाथ फिराने लगे। कभी कभी जोर से अपनी बाँहों में भर लेते तो मेरी चुचियां उनके चोड़े सीने से दब जाती। मुझे बहुत मजा आ रहा था।
फिर भाई ने मेरी ब्रा खोल दी मेरी बड़ी बड़ी चूचियां कूद कर उसके सामने आ गयी थी। अजय मुझे उठा कर अपने बैडरूम में ले गये और बेड पर लिटा दिया. फिर अपनी शर्ट उतारकर मेरे ऊपर लेटकर मेरे होंठों को चूमने लगे। मुझे बहुत मजा आ रहा था.

तभी अजय ने उठकर मेरी जीन्स उतार दी, मैं सिर्फ ब्लैक पैंटी में उनके सामने बेड पर लेटी थी। मुझसे रहा नहीं जा रहा था तो अब मैंने भी अजय को पैंट उतारने के लिए बोला।
उन्होंने भी अपनी पैंट उतार दी।

उनके पैंट उतारते ही मैंने उनका अंडरवियर नीचे खींच दिया।

मैं अजय का लण्ड देखकर हैरान रह गयी; 8 या 9 इंच लम्बा और 3 इंच से भी मोटा … मेरी आँखों में चमक आ गयी। मुझे भी चुदाई करवाये हुए बहुत दिन हो गए थे, मैं भैया के लण्ड को देख रही थी तभी अजय ने कहा- सिर्फ देखोगी या इसे पकड़ोगी भी?
इतना सुनते ही मैंने उनका लण्ड हाथ में पकड़ लिया। भाई का लण्ड एकदम कठोर और गर्म था।

अजय ने कहा- राधिका, चूसोगी क्या?
मुझे और क्या चाहिए था … इतना कहते ही मैंने उनके लण्ड पर अपने होंठ रख दिए। लेकिन लण्ड मेरे मुंह में नहीं जा रहा था।

कुछ देर बाद अजय ने कहा- राधिका यार अब पैंटी तो उतार दो।
मैंने खड़ी होकर उनको ही मेरी पैंटी उतारने का आफर दिया।

उन्होंने आगे बढ़ कर मेरी पैंटी उतारी और मेरी चूत पर मुंह रख दिया और मेरी चूत को चूसने लगे. मुझे बहुत आनन्द आ रहा था। कभी जीभ को अंदर डाल देते तो कभी मेरी क्लिट को मसल देते। अपने हाथों को मेरे कूल्हों पर ले जाकर सहलाते तो कभी कभी हल्के हल्के थप्पड़ से मारते जिससे मेरे कूल्हे लाल हो गए।

अब मैं अपने आप पर कंट्रोल नहीं कर पा रही थी और उनसे मुझे चोदने की रिक्वेस्ट करने लगी और बेड पर लेट गयी। भैया मेरे ऊपर आ गए और बूब्स को चूसने लगे, फिर नाभि को चूमा और चूत पर लण्ड को फिराने लगे.
मुझसे रहा नहीं गया और उनका लण्ड पकड़कर चूत पर लगा दिया और अपने कूल्हों को ऊपर की तरफ धकेल दिया जिससे उनका लण्ड का थोड़ा सा हिस्सा चूत में चला गया।

तभी उन्होंने अचानक से मेरी चूत में लण्ड को पूरा डाल दिया। मुझे थोड़ा दर्द हुआ तो मैंने भैया को कुछ देर रुकने को बोला तो भाई रुक गए और मुझे किस करने लगे. जब मेरा दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने अपने कूल्हों को हिलाया और भाई को अपनी बांहों में भरकर ऊपर नीचे होने लगी।

भाई ने भी सब समझकर मेरी बुर को चोदना चालू कर दिया. मैं चिल्लाने लगी ‘आअहह… हह्ह्ह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… हम्मम्म… आअहह… ‘
और वो तेज़ी से धक्के मारते रहे।

मैं पहले भी एक भाई के लण्ड से चुद चुकी थी लेकिन इस बुआ के बेटे के चोदने के तरीके से मैं बिल्कुल मदहोश हो गयी थी और इतनी अच्छी चुदाई मेरी आज तक मेरे भाई ने भी नहीं की थी। उसका जोश इतना ज़्यादा था कि वो मुझे आधे घंटे से भी ज़्यादा समय से वो मुझे अलग-अलग स्टाइल में लेकर चोदता रहा। कभी घोड़ी बनाकर तो कभी मुझे अपने लण्ड पर बैठने को बोलते।
मैं 3 बार झड़ चुकी थी।

आधा घण्टा तक चुदाई चली और तब हम दोनों एकसाथ झड़ गए। मुझे बहुत अच्छा लगा अजय से चुदवाकर … मेरी तो जैसे तृप्ति हो गई।
तभी भाई बोला- राधिका, तुम्हारी गांड मुझे बहुत पसंद है!
और मेरे ऊपर से उतर कर साइड में लेट गए.

कुछ देर बाद हम दोनों ने शावर लिया और नंगे ही बेड पर आकर लेट गए। पता नहीं कब हमें नींद आ गयी।

जब मेरी नींद खुली तो शाम के 8 बज चुके थे। मैंने अजय को उठाया, हमें भूख भी लगी थी तो मैं खाना बनाने के लिए जाने वाली थी और जब कपड़े पहनने लगी तो भाई ने कहा- राधिका, कल शाम तक कोई कपड़ा नहीं पहनना।
मुझे अजीब लगा।

खैर मैंने खाना बनाया और डाइनिंग टेबल पर लगा दिया और अजय को बुला लिया- भैया, आ जाओ, खाना तैयार है, खा लो!
अजय भाई नंगे ही आये, मैंने देखा तो अजय का लण्ड खड़ा था।

वो कुर्सी पर बैठ गए और मुझे अपने पास बुलाकर अपने लण्ड पर बैठा लिया और खाना खाने लगे। बीच बीच में भाई मेरी चूचियों को दबा देते थे।

खाना खाकर हम फिर से बिस्तर पर चुदाई की दुनिया में खो गए।
अगले दिन और रात को भी हमने बहुत बार चुदाई की और दिन रात हम दोनों नंगे रहे।
एक भाई ने सील तोड़ी दुसरे ने हवस मिटाई (Ek Bhai Ne Seal Todi Doosre Ne Hawas Mitayi) एक भाई ने सील तोड़ी दुसरे ने हवस मिटाई (Ek Bhai Ne Seal Todi Doosre Ne Hawas Mitayi) Reviewed by Priyanka Sharma on 12:59 PM Rating: 5

No comments:

Powered by Blogger.