देवर जी मेरी मोटी गाँड़ पे फ़िदा (Devar Ji Meri Moti Gaand Pe Fida)

देवर जी मेरी मोटी गाँड़ पे फ़िदा
(Devar Ji Meri Moti Gaand Pe Fida)

घर की डोर बेल कोई काफी देर से बजा रहा था मैं बाथरूम में कपड़े धो रही थी मैं जब बाहर आई तो मुझे लगा अभिनव है लेकिन अभिनव बाहर थे ही नहीं मैं जब दरवाजे की तरफ गई तो मैंने जैसे ही दरवाजा खोला तो सामने अभिनव के छोटे भाई राजन थे। 

वह मुझे कहने लगे कि भाभी मैं काफी देर से डोर बेल बजा रहा हूं लेकिन कोई दरवाजा खोल ही नहीं रहा था मैंने राजन से कहा अभिनव पता नहीं कहां है। जब मैं बेडरूम की तरफ आई तो मैंने देखा अभिनव लेटे हुए थे मैंने भी अभिनव को डिस्टर्ब नहीं किया और मैं राजन से कहने लगी कि मैं अभी कपड़े धो रही हूं थोड़ी देर बाद तुमसे बात करती हूं। 

राजन कहने लगा कोई बात नहीं भाभी आप कपड़े धो लीजिए फिर वह हॉल में ही बैठे हुए थे जब मैं कपड़े धोकर बाहर आई तो मैंने देखा अभिनव और राजन आपस में बात कर रहे हैं। मैंने अभिनव से कहा आप कितनी गहरी नींद में थे तो वह मुझे कहने लगे कि आज तो बड़ी मुश्किल से मुझे नींद आई थी इतने दिनों से तो मैं सो भी नहीं पा रहा हूं।

मैंने अभिनव से कहा लेकिन आप को क्यों नींद नहीं आ रही है अभिनव मुझे कहने लगे कि बस ऐसे ही। राजन और अभिनव आपस में बात कर रहे थे मैंने अभिनव से कहा मैं आप दोनों के लिए चाय बना देती हूं तो अभिनव मुझे कहने लगे ठीक है तुम हमारे लिए चाय बना दो। 

मैंने अभिनव और राजन के लिए चाय बना दी अभिनव और राजन के साथ मैं भी बैठ गई राजन हमारे घर पर अब कम ही आया करते हैं राजन की पत्नी सुमन का व्यवहार किसी के साथ भी ठीक नहीं रहता है इसलिए राजन भी सुमन की वजह से अलग अलग ही रहते हैं। 

काफी दिन बाद राजन घर पर आए थे तो मुझे भी अच्छा लग रहा था राजन ने हमारे घर पर आना भी छोड़ दिया था लेकिन इतने दिनों बाद जब राजन घर पर आए तो अभिनव उनसे पूछने लगे राजन तुम बहुत दिनों बाद घर आ रहे हो। वह कहने लगे कि हां भैया बस अपनी नौकरी की वजह से समय नहीं मिल पाता लेकिन शायद कारण वह नही था कुछ और ही बात थी इसलिए राजन हमसे मिलने के लिए आए थे। 

जब राजन ने अभिनव से कहा कि सुमन कुछ दिनों से बीमार है तो अभिनव कहने लगे कि सुमन को क्या हुआ राजन ने बताया कि उसके पेट में कोई समस्या हो गई है जिस वजह से उसका ऑपरेशन करवाना है लेकिन उसके ऑपरेशन के लिए मेरे पास इतने पैसे नहीं है।

अभिनव हमेशा से अपने परिवार को एक साथ रखना चाहते थे लेकिन सुमन की वजह से ही हम लोगों को अलग होना पड़ा। अभिनव यह बात सुनकर थोड़ा घबरा गए थे और कहने लगे की राजन तुम्हें कितने पैसों की आवश्यकता है राजन कहने लगा भैया डॉक्टर ने तो कहा है कि पचास हजार तो कम से कम लगेंगे लेकिन मैं कहां से इतने पैसों का बंदोबस्त कर पाऊंगा। 

अभिनव कहने लगे कि इतने पैसों का तो मैं भी बंदोबस्त नहीं कर पाऊंगा लेकिन फिर भी मैं कोशिश करता हूं कि कितने पैसे मैं तुम्हें दे सकता हूं। राजन को इस बात का सुकून था कि कम से कम उसके भैया ने उसका साथ तो दिया और इस वक्त अभिनव के अलावा राजन का कोई भी साथ नहीं दे सकता था इसलिए अभिनव से मिलने के लिए राजन हमारे घर पर आए थे। 

राजन काफी देर तक घर पर रहे और उसके बाद वह कहने लगे कि अब मैं चलता हूं राजन अब जा चुके थे मैंने अभिनव से कहा कि क्यों ना तुम सुमन को मिल आते। अभिनव मुझे कहने लगे कि तुम भी मेरे साथ चलो हम लोग सुमन को देख आते हैं मैंने अभिनव से कहा हम लोग शाम के वक्त सुमन से मिलने के लिए चलते हैं। 

अभिनव और मैं इस बारे में बात कर रहे थे की आखिर कैसे सुमन की तबीयत खराब हो गई और जब हम लोग सुमन से मिलने के लिए गए तो सुमन की हालत वाकई में खराब थी वह अच्छे से बोल भी नहीं पा रही थी। राजन कहने लगे कि भैया देखे ना सुमन कितनी बीमार है और अच्छे से वह बोल भी नहीं पा रही है अभिनव ने राजन को हिम्मत देते हुए कहा कि तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो सब कुछ ठीक हो जाएगा तुम खुद पर भरोसा रखो और अपने हौसले को टूटने मत दो। 

अभिनव और मैं आपस में ही बैठे हुए थे सुमन कुछ बोल तो नहीं पा रही थी लेकिन उसकी बेबसी मैं समझ पा रही थी। हालांकि सुमन ने भी कुछ ठीक नहीं किया था लेकिन उस वक्त उसे देख कर मुझे लग रहा था कि काश सुमन के साथ यह सब हुआ नहीं होता और वह जल्दी से ठीक हो जाए।

मेरे पास भी किसी बात का जवाब नहीं था थोड़ी देर बाद हम लोग अपने घर लौट चुके थे लेकिन मैं सुमन को देख कर बहुत ज्यादा परेशान थी। मैंने और अभिनव ने इस बारे में बात की तो अभिनव कहने लगे कि सुमन जल्दी ही ठीक हो जाएगी तुम चिंता मत करो सब कुछ ठीक हो जाएगा। 

अभिनव ने भी पैसों का बंदोबस्त कर दिया था और थोड़े बहुत पैसे राजन ने भी कर लिए थे अब वह सुमन का इलाज करवाना चाहते थे और सुमन के इलाज के लिए हम लोग उसे अस्पताल में ले गए। सुमन के भी परिवार से उसके भैया भाभी और उसके पापा मम्मी आए हुए थे सुमन का इलाज अच्छे से हुआ और अब वह पहले से अच्छा महसूस कर रही थी। 

धीरे-धीरे सब कुछ ठीक होने लगा और जब सुमन ठीक हो गई तो उसके व्यवहार में भी बदलाव आ गया था। सुमन पहले की जैसी बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन उसकी तबीयत ठीक भी नहीं रहती थी वह ज्यादातर बीमार ही रहती थी राजन इस बात से बहुत परेशान रहते थे। हमेशा ही वह यह बात कहते रहते थे कि सुमन पता नहीं कब ठीक होगी, अभी सुमन पूरी तरीके से ठीक भी कहां हो पाई थी।

सुमन भी पूरी तरीके से ठीक नहीं थी और वह घर पर ही रहती थी। राजन उसकी बीमारी से परेशान रहने लगे थे और वह मुझे कहते कि भाभी जी सुमन तो बहुत ज्यादा बीमार रहने लगी है। मैंने राजन से कहती आप चिंता मत कीजिए। राजन के अंदर की परेशानी उसके चेहरे पर साफ दिखने लगी थी वह काफी दुबले पतले भी हो गए थे। 

सुमन की तबीयत खराब रहती थी तो मैं कभी कभार राजन के घर खाना बनाने के लिए चली जाती। एक दिन मै खाना बनाने गई तो उस दिन राजन ने मुझे कसकर पकड़ लिया और कहने लगे भाभी जी आज आपकी बड़ी गांड देखकर मैं अपने आपको रोक नहीं पा रहा हूं। मैंने राजन से कहा आप तो ऐसे नहीं थे लेकिन आपको क्या हो गया है? वह कहने लगे भाभी जी आपको क्या बताऊं इतने दिनों से मैंने कुछ भी नहीं किया है आप ही मेरे लिए कुछ कीजिए। 

उन्होंने मेरी पतली कमर को पकड़कर मेरी गांड को अपने हाथों से दबाना शुरू किया मैं भी शायद उनकी बातों में आ गई मैंने कहा कि आप अपने लंड को बाहर निकालो मुझे देखना है आपका लंड कितना मोटा है। राजन ने अपने लंड को बाहर निकाला हम दोनों रसोई में ही थे जिस प्रकार से राजन के मोटे लंड को मैंने अपने मुंह के अंदर बाहर लेना शुरू किया तो वह बिल्कुल भी रह नही पा रहे थे।
देवर जी मेरी मोटी गाँड़ पे फ़िदा (Devar Ji Meri Moti Gaand Pe Fida)
देवर जी मेरी मोटी गाँड़ पे फ़िदा (Devar Ji Meri Moti Gaand Pe Fida)
वह मुझे कहने लगे मुझसे अब रहा नहीं जा रहा है काफी देर तक तो मैंने राजन के लंड को अपने मुंह के अंदर बाहर किया जब उनके लंड से पानी टपकने लगा तो वह मुझे कहने लगे भाभी जी आपकी बुर को मुझे चाटना है। मैंने उन्हें कहा क्यों नहीं और यह कहते ही मैंने उनके सामने अपने कपड़े उतारने शुरू किए वह मेरे बदन को देखकर मेरी तारीफ आए बिना रह ना सके। मेरा नंगा बदन राजन के सामने था उन्होंने मेरी चूत को चाटना शुरू कर दिया मुझे बड़ा अच्छा लग रहा था।

वह मेरी बुर को अच्छे से चाटे जा रहे थे उन्होंने काफी देर तक मेरी बुर का रसपान किया। राजन ने मेरी बुर से पानी बाहर निकाल लिया मैंने उनसे कहा कि अब मुझसे रहा नहीं जाएगा। वह कहने लगे मैं आपकी बुर में लंड को घुसा देता हूं मैंने राजन से कहां आप अपने लंड को मेरी चूत में घुसा दो। 

राजन ने अपने लंड को मेरी बुर पर लगाया और अंदर की तरफ धकेलना शुरू किया राजन ने मेरी चूत के अंदर अपने लंड को प्रवेश करवा दिया था। मेरे मुंह से बड़ी तेज चीख निकलने लगी मुझे बड़े अच्छे तरीके से सेक्स का मजा आने लगा राजन मुझे बड़े ही अच्छे तरीके से सेक्स का मजा दे रहे थे। 

मैं अपने दोनों पैरों को चौड़ा कर रही थी मैं अपने पैरों को चौड़ा करती तो राजन भी आपनी पूरी ताकत के साथ अपने लंड को अंदर बाहर करते रहते जिससे कि मुझे भी मज़ा आ रहा था और राजन को भी बड़ा आनंद आ रहा था।

काफी देर तक उन्होंने ऐसा ही किया जब राजन मुझे कहने लगे कि भाभी जी अब मैं रह नहीं पाऊंगा तो मैंने उन्हें कहा आप अपने माल को मेरी चूत मे गिरा दो राजन ने अपने वीर्य को मेरी चूत के अंदर ही गिरा दिया तो मैंने राजन कहने लगे मुझे बहुत अच्छा लगा। जब राजन ने अपने वीर्य को अंदर गिरा दिया तो राजन के लंड से अब भी वीर्य भी टपक रहा था। 

मैंने राजन के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसना शुरू किया राजन का लंड मैने खड़ा कर दिया था। खड़े हो चुके लंड पर मैंने तेल की मालिश की और राजन से कहा कि मुझे काफी दिनों से अपनी गांड मरवानी थी लेकिन आज बड़ा अच्छा मौका है। वह कहने लगे आप तो बड़ी ही बेशरम है। मैने राजन से कहा इसमें शर्म वाली क्या बात है राजन ने भी मेरी चूतडो को पकडते हुए धीरे से मेरी गांड के अंदर अपने लंड को डालना शुरू किया तो राजन का लंड मेरी गांड के अंदर जा चुका था और मुझे बहुत दर्द होने लगा था। 

मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कि राजन मेरी गांड मार नहीं रहा बल्कि फाड रहा है क्योंकि राजन का 10 इंच मोटा लंड मेरी गांड के अंदर तक जा रहा था और राजन के अंडकोष मेरी गांड की दीवार से टकरा रहे थे। 5 मिनट के बाद जब राजन ने अपने वीर्य से मेरी गांड के छेद को भर डाला तो मैंने उनसे कहा आज तो बड़ा मजा आ गया। राजन कहने लगा आप मुझे हमेशा ऐसे ही खुश करते रहिएगा।
देवर जी मेरी मोटी गाँड़ पे फ़िदा (Devar Ji Meri Moti Gaand Pe Fida) देवर जी मेरी मोटी गाँड़ पे फ़िदा (Devar Ji Meri Moti Gaand Pe Fida) Reviewed by Priyanka Sharma on 10:31 PM Rating: 5

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