बहन की डॉगी स्टाइल में चुदाई (Bahen Ki Doggystyle Me Chudai)

बहन की डॉगी स्टाइल में चुदाई
(Bahen Ki Doggystyle Me Chudai)

मेरा नाम अंकित पटेल है और मैं गुजरात से हूँ. तो अब मैं अपनी कहानी शुरू करता हूं. ये बात तब की है जब मैं बाहरवीं कक्षा में था. वह अप्रैल का महीना था. सभी स्कूलों की छुट्टी शुरू हो चुकी थी. 

मैं हर साल छुट्टी मनाने के लिए अपने मामा (अंकल) के घर जाता था. इस बार भी मैं उनके घर छुट्टी मनाने चला गया. आगे बढ़ने से पहले मैं आपको बता देता हूं कि मेरे मामा की बहुत साल पहले ही डेथ हो गई थी.

उनके जाने के बाद अब मेरे मामा के घर पर मेरी मामी, उनकी बड़ी बेटी मनीषा और उससे छोटी बेटी जागृति व सबसे छोटा बेटा मनोज रहते थे. यहां पर मैंने लड़कियों के नाम बदल दिये हैं.
मनीषा की उम्र बीस साल, जागृति की 18 साल और उनका बेटा सबसे छोटा था.

मेरी मामी एक कम्पनी में क्लर्क के पद पर काम करती हैं. वो पूरा दिन घर पर नहीं होती हैं. मनोज और जागृति पूरा दिन घर पर खेलते रहते थे जबकि मनीषा घर का छोटा-मोटा काम कर लेती थी. रात को हम सब नीचे फर्श पर गद्दा बिछाकर एक साथ ही सोते थे. जबकि मामी एक अलग बेडरूम में सोती थी.

मामी के घर के पास रहने वाला एक लड़का मेरा दोस्त बन गया था. एक दिन मैंने और मेरे एक दोस्त ने उसके घर पर ब्लू फिल्म चला कर देखी. ब्लू फिल्म देखते हुए मैं बहुत ज्यादा एक्साइटेड हो गया था क्योंकि मैंने उस दिन पहली बार ब्लू फिल्म देखी थी. उस दिन वो फिल्म देखने के बाद मेरे दिमाग में पूरा दिन वो फिल्म ही चल रही थी. बार-बार उस फिल्म के सीन याद आ रहे थे और मेरा लंड खड़ा हो रहा था. उस दिन सेक्स करने का मेरा बहुत मन कर रहा था.

उसी रात की बात है कि जब हम सोने लगे तो मेरे मन में सेक्स के ख्याल आने लगे. बाकी सब को तो नींद आ गई थी लेकिन मैं जाग रहा था, आपको भी पता चल गया होगा कि मैं क्यूं जाग रहा था. मेरी बगल में मेरे मामा की जवान लड़की सो रही थी.

मनीषा के बूब्स बिल्कुल ऊपर उठे हुए थे. मैं बार-बार उसके बूब्स की तरफ देख रहा था. फिर मैंने हिम्मत करके उसके बूब्स पर हाथ रख दिया. हाथ रखने के बाद मैंने धीरे से उनको दबा दिया तो मनीषा की नींद खुल गई. लेकिन मैं सोने का नाटक करता रहा. मैं ऐसे बिहेव कह रहा था जैसे मुझे सच में ही नींद आई हुई है और मैंने नींद में ही उसके बूब्स पर हाथ रख दिया है.
फिर अगले दिन मनीषा मेरी तरफ अजीब सी नजरों से देख रही थी लेकिन मैं बिल्कुल नॉर्मली बर्ताव कर रहा था जैसे कुछ हुआ ही न हो.

फिर जब मामी ऑफिस चली गई तो हम सब आपस में छुपा-छिपी का खेल खेलने लगे. पहले मनोज की बारी आई और हम तीनों छिप गये. उसने 100 तक गिनती गिनकर हमें ढूंढना शुरू किया और हम तीनों अलग-अलग जगह पर जाकर छिप गये. मनीषा बेडरूम में छिपी हुई थी, जागृति दरवाजे के पीछे और मैं बाथरूम में छिपा हुआ था.

थोड़ी देर के बाद जागृति आउट हो गई. उसके बाद मनोज मुझे ढूंढने के लिए बाथरूम की ओर आ रहा था लेकिन उससे बचने के लिए मैं भी बेडरूम में मनीषा के पास भाग गया.
मनीषा ने फुसफुसाते हुए कहा- तुम यहां क्यों आ गये? यहां पर हम दोनों एक साथ पकड़े जाएंगे और आउट हो जायेंगे.
मैंने कहा- कुछ नहीं होगा, तुम आराम से यहीं पर छिपी रहो.
उसके बाद मनोज बेडरूम की तरफ आने लगा और हम दोनों पलंग के नीचे जाकर बैठ गये.

जब उसने बेडरूम का दरवाजा खोला तो मैं मनीषा को पलंग की साइड में लेटा कर उसके ऊपर लेट गया. इस पोजीशन में हम मनोज को दिखाई ही नहीं दिये. एक दो बार यहां-वहां झांकने के बाद वो वहां से चला गया. लेकिन मेरी छाती मनीषा के बूब्स को दबा रही थी. वो मेरी आंखों में देख रही थी और मैं उसकी आंखों में देख रहा था. उसकी बॉडी पर लेटे रहने के कारण मेरा लंड तन गया था जो मनीषा की बॉडी से टच होने लगा था. शायद मनीषा को भी मेरे खड़े हुए लंड का अहसास हो गया था.

फिर देखते ही देखते मेरे अंदर हवस जाग गई और मैंने मनीषा के होंठों को चूस लिया. उसने कुछ नहीं कहा. मैंने दोबारा उसके होंठों को चूसा तो उसने भी बदले में मेरे होंठों को चूस लिया. फिर तो हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने में ही लग गये. पलंग की साइड में पड़े हुए हम दोनों एक दूसरे के होंठों को जोर से चूसने लगे. पांच मिनट तक किसिंग करने के बाद मनीषा ने उठने का इशारा किया और बोली- मनोज आ जायेगा, हमें उठ जाना चाहिए.

हम दोनों उठ कर खड़े हो गये. ऐसे ही खेलते-खेलते फिर मेरा टर्न आया. लेकिन मैं 2-3 बार में भी उनको आउट नहीं कर पाया. तब तक शाम के 4 बज गये थे. फिर मैं मनोज के साथ उसके दोस्त के घर क्रिकेट खेलने के लिए चला गया. हम लोग शाम को खाने के टाइम पर वापस आये. तब तक मामी भी आ चुकी थी.

हमने खाना खाया और फिर कुछ देर टीवी देखने लगे. इस दौरान मैंने देखा कि मनीषा मेरी तरफ देख कर मुस्करा रही थी. मैं समझ गया था कि शायद उसका मन भी कर रहा है सेक्स करने के लिए. फिर जब रात काफी हो गई तो सब लोग सोने लगे. लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी. मैं मनीषा को छेड़ने के मकसद से जगा हुआ था.
रात के करीब 11.30 बजे का टाइम था, मैंने मनीषा की तरफ देखा तो वह भी जाग रही थी.

मैं उसकी तरफ देख रहा था और वो मेरी तरफ देख रही थी. हम दोनों ही करीब आना चाहते थे लेकिन जागृति और मनोज भी साथ में सो रहे थे इसलिए दोनों ही आगे नहीं बढ़ रहे थे. फिर मैंने अपने बरमूडा के ऊपर से अपने लंड को सहला दिया. मैंने नीचे से अंडरवियर नहीं पहना हुआ था. मनीषा ने मेरे खड़े हुए लंड को देख लिया.

फिर मैंने धीरे से अपना बरमूडा खोलकर अपनी जांघों तक कर दिया और अपने खड़े हुए लंड को बाहर ले आया. मैंने मनीषा का हाथ पकड़ा और अपने खड़े हुए लंड पर रखवा दिया. मनीषा ने मेरे लंड को सहलाना शुरू कर दिया लेकिन वो बार-बार मनोज और जागृति की तरफ देख रही थी. वह पूरी तरह से मेरा साथ नहीं दे पा रही थी.

उसके बाद मैंने मनीषा के लहंगे में हाथ डाल दिया और मेरा हाथ सीधा उसकी चूत तक पहुंच गया. मैंने उसकी चूत में उंगली दे दी और अंदर-बाहर करने लगा. थोड़ी ही देर में उसकी चूत ने गीला सा पदार्थ छोड़ना शुरू कर दिया. मनीषा मेरे लंड की मुट्ठ मार रही थी. मैं उसकी चूत में उंगली कर रहा था. कुछ ही देर में मेरे लंड से पानी निकल गया और हम दोनों किस करने के बाद सो गये.

मनीषा के साथ इतना सब कुछ होने के बाद अब मैं उसको चोदने के बारे मैं प्लान करने लगा.
बहन की डॉगी स्टाइल में चुदाई (Bahen Ki Doggystyle Me Chudai)
बहन की डॉगी स्टाइल में चुदाई (Bahen Ki Doggystyle Me Chudai)
अगले दिन जब उन्होंने मेरे साथ छुपा-छिपी खेलने के लिए कहा तो मैंने ये कहकर मना कर दिया कि मेरे पैर में दर्द हो रहा है. मैंने उनके सामने बहाना बना दिया. जबकि मेरे पैर किसी तरह का दर्द नहीं हो रहा था. फिर दोपहर को करीब 2 बजे हम सब सो गये. मैं, मनोज और जागृति हॉल में सो रहे थे और मनीषा बेडरूम में सो रही थी. मनीषा को शायद मेरे प्लान के बारे में पता चल गया था.

तीन बजकर पचास मिनट पर मनोज अपने दोस्त के घर क्रिकेट खेलने के लिए चला गया. जागृति अभी गहरी नींद में सो रही थी. मैं चुपके से उठा और अंदर बेडरूम में चला गया. अंदर जाकर मैंने दरवाजा लॉक कर दिया. मैंने घूम कर देखा तो मनीषा हल्के से मुस्करा रही थी.

ओह! मैं उसके पास गया और बोला- आज ज़रा इत्मिनान से करते हैं.
उसने सिर हिलाकर हां में जवाब दे दिया. उसकी हाँ पाकर मैं एकदम से उत्तेजित हो गया. मैंने उसको बेड से नीचे खड़ी रहने के लिए कह दिया. एक-एक करके मैं उसके कपड़े उतारने लगा. पहले उसकी कमीज और फिर सलवार उतारी. फिर उसकी ब्रा और पेंटी उतार दी.
मनीषा अब मेरे सामने बिल्कुल नंगी हो गई थी. उसके चूचे उसकी छाती पर सेब के जैसे लटके हुए थे. उसने अपनी चूत को अपने हाथों से छिपा लिया था.

मैंने उसके चूचों को हाथों में लेकर उनको आराम से दबाया और फिर उनको प्यार से चूम लिया. बहुत ही सिल्की से चूचे थे मनीषा के. एक दो मिनट तक उसके चूचों को अपने मुंह में भर कर उनका आनंद रस लेता रहा.

मेरा लंड मेरी पैंट में टाइट होकर जैसे घायल होने वाला था. मैंने मनीषा को मेरे कपड़े निकालने के लिए कहा. उसने मेरी टी-शर्ट उतरवाई और फिर मेरी लोअर को भी निकाल दिया. अब मैं केवल अंडरवियर में था और मेरा 4.8 इंच का लंड एकदम नुकीला होकर तंबू बनाकर मनीषा की चूत में घुसने के लिए बेताब हो चुका था. फिर उसने मेरे अंडरवियर को भी नीचे कर दिया. मैंने अपनी टांगों से अपने अंडरवियर को वहीं फर्श पर निकाल कर एक तरफ डाल दिया.

मनीषा मेरे लंड को ध्यान से देख रही थी. मैंने उसने अपनी तरफ खींचा और उसको बांहों में कसते हुए उसके नंगे बदन से लिपट गया. उसका नर्म-मखमली बदन मेरे नंगे बदन से सट गया और मेरा लंड उसकी चूत पर चुम्बन देने लगा. हम दोनों ही अब तक वर्जिन थे.

जब मेरा लंड उसकी चूत से बार-बार छूता रहा तो मुझे खुद पर कंट्रोल करना भारी हो गया और मैं उसे बेड पर लेकर गिर गया. मनीषा की चूचियों को जोर से पीते हुए उसकी चूत को सहलाने लगा. वो भी तड़प उठी. मैंने उसकी चूत में उंगली डाल दी और तेजी के साथ चलाने लगा. आस्स … स्स्स … आह … आह … करते हुए मैं उसकी चूत को अपनी उंगलियों से चोदने लगा.

फिर मैंने उसकी चूत पर लंड रखा और उसकी चूत में लंड को अंदर धकेल दिया. आह … उसकी कुंवारी चूत बहुत गर्म अहसास दे रही थी. मैंने उसकी चूत में अपना लंड पूरा धकेल दिया और उसके ऊपर लेट कर उसके होंठों को पीने लगा. वो कसमसाती हुई मेरे होंठों को काटने लगी. फिर मैंने धीरे-धीरे उसकी चूत में धक्के देने शुरू किये. मैं उसको चोदने लगा और जल्दी ही मेरी स्पीड बढ़ने लगी. मैं तेजी से उसकी चूत मारने लगा और 7-8 मिनट की चुदाई के बाद उसको बिना बताए ही मैंने उसकी चूत में अपना माल गिरा दिया. मैं कुछ देर तक मनीषा के ऊपर गिरा रहा.

मगर अभी तक मनीषा का माल नहीं निकला था. उसने मुझे उठाया और मेरे बदन को सहलाने लगी. वह मेरे होंठों को चूसने लगी और फिर मेरा लंड दोबारा से तनाव में आने लगा. मैंने उसकी चूत में तेजी के साथ उंगली करना शुरू कर दिया. उसकी चूत मेरे लंड से चुद कर बिल्कुल गर्म और चिकनी हो गई थी. वह फूल भी गई थी. फिर उसने एकदम से पिचकारी सी छोड़ दी और वह भी झड़ गई.

उसकी चूत की चुदाई करने के बाद मैं उसकी गांड भी मारने की सोचने लगा. मैंने उसको डॉगी की पोजीशन में आने को कहा और उसकी गांड को रिलेक्स करने के लिए मैंने उसकी गांड के छेद पर उंगली फेरी. कुछ ही देर में उसकी गांड रिलेक्स होने लगी. मैंने अपना लंड उसकी गांड के छेद में लगाया और उसको अंदर घुसाने लगा.

उसकी गांड बहुत टाइट थी इसलिए उसको दर्द होने लगा. मैंने बालों के तेल की शीशी से लंड पर तेल लगा लिया ताकि लंड में कुछ अतिरिक्त चिकनाई चली जाये क्योंकि मेरे लंड में भी दर्द सा हो रहा था. उसके बाद मैंने जोर लगा कर अपना लंड उसकी गांड में धेकेल दिया. उसने पूरा लंड गांड में ले लिया और कराहने लगी.

मैंने ज्यादा देर न करते हुए उसकी गांड को चोदना शुरू किया. मैंने चुदाई शुरू ही की थी कि मुझे उस कमरे के दरवाजे पर कुछ आवाज सी सुनाई दी. मैंने उसकी गांड से लंड को बाहर निकाला और देखने के लिए गया. मैंने की-होल से झांक कर देखा तो जागृति वहां खड़ी थी. मैं डर गया. शायद उसने सारा सीन देख लिया था. फिर हमने अपने कपड़े पहन लिये.

मनीषा को मैंने नहीं बताया कि जागृति ने हमें देख लिया है. फिर उसके बाद शाम के खाने के समय जब सब साथ में बैठ कर खाना खा रहे थे तो जागृति मुझे अजीब सी नजरों से देख रही थी. मैं डर रहा था कि कहीं ये मामी को मनीषा और मेरी चुदाई के बारे में बता न दे.

खाना खाकर मैं चुपचाप उठ कर चला गया. उस रात मुझे नींद भी नहीं आयी. मैं यही सोचता रहा कि जागृति हमारे बारे में कहीं मामी को न बता दे. मगर अगली सुबह उसने ऐसा कुछ भी नहीं किया. मैं खुश था कि जागृति ने मामी को कुछ नहीं बताया. लेकिन वह भी बदले में कुछ मुझसे चाहती थी.

अगली सुबह मैं जागृति से बचता फिर रहा था. मगर मैंने देखा कि जागृति मुझे देख कर मुस्करा रही थी.

उस दिन हम लोगों ने कोई खेल नहीं खेला क्योंकि जागृति को मनीषा और मेरे बीच में पक रही खिचड़ी के बारे में शक हो गया था. इसलिए दोपहर में आराम करने के बाद मैं मनोज के साथ उसके दोस्त के घर चला गया. मनीषा ने भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

शाम को सब लोगों ने खाना खाया और साथ में हॉल में बैठ कर मूवी देखने लगे. मामी भी हम चारों के साथ ही फिल्म देख रही थी. फिर जागृति कहने लगी कि उसको टीवी सीरियल देखना है लेकिन मनीषा मूवी देखने की बात कर रही थी. मैं भी मूवी ही देखना चाह रहा था और मनोज भी.

मामी हम चारों भाई-बहनों के बीच में कुछ नहीं बोल रही थी. जागृति ने मनीषा के हाथ से टीवी का रिमोट छीन लिया. इस पर मनीषा भड़क गई और उसने जागृति के हाथ से रिमोट दोबारा छीनने की कोशिश की. मगर मनीषा ने रिमोट नहीं दिया और वो रिमोट लेकर भागने लगी. जागृति उसके पीछे दौड़ी और दोनों बहनें एक दूसरे से लड़ती हुई रिमोट हासिल करने के लिए मशक्कत करने लगीं. इतने में ही पावर कट हो गया. बिजली गुल होते ही पूरे घर में अंधेरा हो गया. मामी ने फोन की टॉर्च से इमरजेंसी लाइट जला दी.

मनीषा बोली- ये ले, अब देख ले सीरियल. जागृति इस बात पर चिढ़ गई और मामी से शिकायत करने लगी. मामी उन दोनों का झगड़ा देख जोर जोर से हंसने लगी.
मामी बोली- अगर तुम दोनों अगर लड़ाई नहीं करती तो शायद बत्ती भी गुल न होती. चलो अब किचन में जाकर बचा हुआ काम निपटा लो दोनों.
जागृति बोली- मैं कोई काम-वाम नहीं करने वाली इसके साथ.

मामी ने डांटते हुए कहा- चल जा किचन में और मनीषा का हाथ बंटा. कल को तेरी शादी होगी तो ससुराल में भी यही सब करना पड़ेगा.
जागृति झल्लाती हुई किचन में चली गई.

मगर बिजली के कारण अंधेरे में क्या काम होता. मनीषा किचन से चिल्लाई- मनोज, ज़रा इमरजेंसी लाइट देकर जा. यहां पर कुछ दिखाई नहीं दे रहा है.
मनोज ने हॉल में रखी इमरजेंसी लाइट उठा ली और किचन में जाने लगा. तभी मामी उठ कर गेट के पास जाती हुई बोली- मैं ज़रा पड़ोस वाली शीला आंटी के यहां होकर आती हूं. यहां गर्मी में बैठ कर क्या करना है. जब लाइट आएगी तो मैं आ जाऊंगी.

मनोज बोला- मां, मैं भी आपके साथ चल रहा हूं. बाहर थोड़ी ठंड भी है और मैं भी शीला आंटी के बेटे के साथ टाइम पास कर लूंगा.
मामी बोली- तू यहीं पर अंकित के साथ रह.
मनोज जिद करने लगा- मां, ले चलो न अपने साथ.
मामी बोली- ठीक है आ जा.
मामी और मनोज दोनों गेट से बाहर जाते हुए दरवाजा ढाल कर चले गये.

जागृति और मनीषा किचन में बर्तन साफ कर रही थीं. मैं वहीं हॉल में गद्दे पर अकेला पड़ा हुआ था. हॉल में पूरा अंधेरा था और कुछ भी नज़र नहीं आ रहा था.
फिर दो मिनट बाद अचानक ही मेरे बदन पर एक गीला सा हाथ आकर फिरने लगा. वह हाथ मेरे शरीर को टटोलने लगा. मैं समझ गया कि मनीषा अंधेरे का फायदा उठा कर चुदाई करवाना चाहती है. उसने मेरी छाती से होकर अपना हाथ नीचे ले जाते हुए मेरी लोअर पर रख कर मेरे लंड को सहला दिया. मेरे लंड में तुरंत तनाव आना शुरू हो गया.

चूंकि अंधेरे में किसी लड़की के इस तरह से छूने से मेरे अंदर भी सेक्स की भावना जाग गई थी इसलिए मैं भी उत्तेजित हो गया था. फिर उसने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे उठाने के इरादे से हाथ को ऊपर खींचने लगी. मैं उठ कर उसके साथ चल दिया. वह मेरा हाथ पकड़ कर आगे-आगे चल दी और मैं अंधेरे में अपने खड़े लंड की भूख मिटाने के इरादे से उसके पीछे-पीछे. मैं सोच रहा था कि जागृति की नजरों से बचने का यह अच्छा तरीका है कि मनीषा अंधेरे में चुदाई करवाने का प्लान कर रही है.

धीरे-धीरे चल कर हम दोनों बाथरूम में घुस गये. हल्के से दरवाजा बंद कर लिया और उसने मुझे दीवार के साथ सटा दिया. मेरी पीठ दीवार पर लगी थी और उसका हाथ मेरे लंड को मसलने और सहलाने लगा. मैं बेकाबू सा होकर उसके सूट के ऊपर से उसके चूचों को दबाने लगा. फिर उसने मेरे गालों को टटोलते हुए मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया. सब कुछ अंधेरे में हो रहा था इसलिए मजा भी दोगुना आ रहा था. मैंने उसकी गांड को दबाना शुरू कर दिया और उसकी चूत की तरफ अपने लंड को धकेलता हुआ उसके कपड़ों के ऊपर से चोदने की कोशिश सी करने लगा.

उसने मेरी लोअर को नीचे करवा दिया और मेरे तने हुए लौड़े को हाथ में लेकर सहलाने लगी. मेरा लंड तड़प उठा. मैंने उसकी सलवार को खोल कर नीचे खींच दिया और उसे अपनी वाली जगह पर दीवार के साथ सटा दिया. फिर मैंने उसकी चूत पर हाथ फिराया तो मेरे हाथ को उसकी चूत की गर्मी महसूस होने लगी. मैंने उसकी चूत को तेजी के साथ सहलाना शुरू कर दिया और वो मेरे चूतड़ों को दबाते हुए मुझे अपनी तरफ खींचने लगी.

मैं सोच रहा था कि आज मनीषा कुछ ज्यादा ही चुदासी हो गई है.

उसने अपना हाथ नीचे ले जाकर मेरे लंड को पकड़ा और अपनी चूत पर रगड़ दिया. वह शायद लंड को अंदर लेने के लिए मचल उठी थी. उसने खुद ही मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर लगा दिया और मैंने बिना देर किये उसकी चूत में लंड को धकेल दिया. उसके सीने से एक दबी हुई ऊंह … की आवाज निकलने को हुई. शायद लंड ज्यादा ही जोश में डाल दिया था मैंने उसकी चूत में.

मगर उसने मेरे होंठों को चूसना शुरू कर दिया और मेरे मुंह में जीभ डाल कर मेरी लार को पीने लगी. मेरा लंड उसकी चूत में घुस गया था और मैंने दीवार की तरफ धक्के देते हुए उसकी चूत को चोदना शुरू कर दिया. मैं उसके होंठों को पी रहा था और वो मेरे होंठों को चूस रही थी. लंड उसकी चूत में चल रहा था. आह्ह … बहुत मजा आ रहा था.

मेरे धक्के का जोर बढ़ रहा था जिससे उसके नंगे चूतड़ बाथरूम की दीवार पर लग जाते थे और फट्ट की आवाज सी हो जाती थी. इस आवाज को रोकने के लिए उसने अपने एक हाथ को पीछे अपने चूतड़ों पर लगा लिया जिससे उसकी चूत थोड़ा और आगे आ गई. अब पीछे की आवाज भी बंद हो गई थी.

मेरा लंड पूरा का पूरा उसकी चूत में घुसने लगा. अब चुदाई में वाकई मजा आ रहा था. मैं तेजी के साथ उसकी चूत की चुदाई करता हुआ आनंद में डूबने लगा. वो एक हाथ से मुझे अपनी तरफ खींचने की कोशिश करती हुई पूरा लंड चूत में उतरवा रही थी.

उसकी चूत को चोदने में इतना मजा मुझे पहले दिन भी नहीं आया था. फिर उसने मुझे पीछे धकेला और लंड को चूत से बाहर निकलवा दिया. उसने मुझे नीचे बैठने के लिए अपने हाथों से मेरे कंधे पकड़ कर नीचे की तरफ धकेला. मैं घुटनों के बल बैठ कर उसकी चूत को चूसने और काटने लगा. उसने टांग उठाकर मेरे कंधे पर रख दी और मेरे सिर को पकड़ कर अपनी चूत में धकेलते हुए मेरे बालों को सहलाने लगी.

उसकी चूत का नमकीन सा पानी मेरे मुंह में स्वाद देने लगा. मैंने उसकी चूत में जीभ डाल दी और अपनी जीभ से उसकी चूत की चुदाई करने लगा. वो अपनी गांड को आगे की तरफ धकेलते हुए चूत को मेरे होंठों की तरफ फेंकने लगी. मेरी जीभ तेजी से उसकी चूत के अंदर-बाहर हो रही थी.

कुछ देर तक उसने मजे से चूत चटवाई और मुझे दोबारा से खड़ा होने के लिए ऊपर की तरफ खींचा. मेरा लंड अब तक थोड़ा डाउन हो गया था. उसने मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़ कर सहलाया और फिर से मेरा लौड़ा तन गया. मैंने दोबारा से उसकी चूत में लंड को डालकर उसे चोदना शुरू कर दिया.

उसकी चूत को चोदते हुए मैं उसके सूट के ऊपर से उसके चूचों को दबाने लगा. उसके चूचे आज पहले से ज्यादा टाइट लग रहे थे. उनके साइज में भी थोड़ा फर्क लग रहा था. मैंने सोचा कि शायद सूट की वजह से ऐसा लग रहा है.
मैं तेजी से उसकी चूत को पेलता रहा और दस मिनट में मेरे लंड ने उसकी चूत में अपना माल गिरा दिया. मैं हाँफने लगा और उसके कंधे पर सिर रख कर वहीं खड़ा हो गया. मेरी सांसें तेजी से चल रही थीं. एक तो गर्मी का मौसम था और ऊपर से इतनी गर्मा-गरम चुदाई हो गई. पूरे बाथरूम में उमस सी भर गई.

फिर किचन में बर्तन गिरने की आवाज हुई तो हम दोनों हड़बड़ा गये. मैंने सोचा कि अगर किचन का काम खत्म हो गया और जागृति बाहर आ गई तो आज उसे फिर से हमारी चुदाई का पता लग जाएगा.

मैंने अपनी लोअर को ऊपर की तरफ खींच कर अपनी कमर पर बांधा और बाथरूम के दरवाजे से बाहर निकलने लगा. मैं गद्दे पर जाकर लेटने ही वाला था कि तभी लाइट आ गई. लाइट आते ही मैंने पंखा चलाया और अपने माथे का पसीना पोंछने लगा.
मैंने टीवी का रिमोट उठा कर टीवी ऑन करने के लिए हाथ आगे ही किया था कि मुझे किचन से मनीषा आती हुई दिखाई दी. मैं उसकी तरफ ऐसे देख रहा था जैसे मैंने कोई भूत देख लिया हो. मेरे हिसाब से मनीषा को बाथरूम में होना चाहिए था तो फिर वह किचन से कैसे बाहर आई?
मैंने बाथरूम की तरफ देखा तो जागृति बाहर हॉल की तरफ चली आ रही थी. उसने मुंह धो लिया था और उसको पौंछते हुए वो हॉल की तरफ बढ़ रही थी. इधर मनीषा मेरे बगल में आकर बैठ गई थी.

इसका मतलब वह जागृति थी जो मुझे बाथरूम में लेकर गई थी? अंधेरे का फायदा उठा कर उसने अपनी चूत चुदवा ली मेरे लंड से? मैं उसकी चालाकी पर हैरान था. वह मेरे पास आकर बैठ गई. मैंने उसकी तरफ देखा तो वह मुस्करा रही थी. मैंने फिर मनीषा की तरफ देखा और फिर सीधा टीवी देखने लगा.

कुछ ही देर में मामी और मनोज भी घर में दाखिल होते हुए दिखाई दिये. मामी सीधे अपने कमरे में चली गई और मनोज हमारे साथ बैठ कर टीवी देखने लगा.

अब जागृति आराम से बैठ कर हमारे साथ फिल्म देख रही थी. रात को सोते समय मैंने अनजाने में हुई जागृति की गर्मा-गर्म चुदाई के बारे में सोचकर मुट्ठ मार डाली. उन दोनों बहनों ने एक दूसरे के साथ लुकाछिपी करते हुए अपनी चूतें चुदवा लीं. मगर मेरी तो जैसे लॉटरी लग गई थी. इस बारे में मैंने मनीषा से भी कोई जिक्र नहीं किया कि जागृति भी मेरे लंड के नीचे से चुद कर निकल चुकी है. एक ही घर में दो-दो जवान चूतें मिल गईं मुझे.

अगले दिन जब मनीषा बाथरूम में नहाने गयी हुई थी और घर मे कोई नहीं था तो मैंने जागृति से पूछा- तुम्हें डर नहीं लगा रात को ऐसे बाथरूम में चुदाई करवाते हुए?
वो बोली- जब मेरी बहन को अपनी चूत में तुम्हारा लंड चोरी से लेते हुए डर नहीं लगा तो मैं कैसे पीछे रहती. वो मजे ले सकती है तो मैं क्यों नहीं?

उस दिन के बाद से वो दोनों बहनें अपनी चूतें मुझसे चुदवाने लगीं. मगर अभी तक उन्होंने एक दूसरे को इस बात की भनक नहीं लगने दी कि मैं दोनों की ही चूतों के मजे लेता हूं. जागृति तो मनीषा के बारे में जानती थी लेकिन मनीषा अभी भी यही सोच रही थी वो छिपते-छिपाते हुए ही अपनी चूत मुझसे चुदवा रही है.
उन दोनों बहनों के साथ लुक्का-छिपी का ये खेल मैंने काफी दिनों तक खेला और फिर मैं अपने घर आ गया.

दोस्तो, ये थी मेरी कहानी. आपको ये कहानी कैसी लगी. क्या मैंने उन दोनों बहनों की चूत मारकर सही किया? या मुझे मनीषा को बता देना चाहिए था कि उसकी छोटी बहन जागृति भी मुझसे चुदाई करवा रही है? आप इस बारे में अपने विचार जरूर साझा करें. कहानी पर कमेंट करें या फिर मेल के द्वारा अपनी राय दें.
बहन की डॉगी स्टाइल में चुदाई (Bahen Ki Doggystyle Me Chudai) बहन की डॉगी स्टाइल में चुदाई (Bahen Ki Doggystyle Me Chudai) Reviewed by Priyanka Sharma on 12:49 PM Rating: 5

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