सविता भाभी हुस्न की मल्लिका (Savita Bhabhi Husn Ki Mallika)

सविता भाभी हुस्न की मल्लिका
(Savita Bhabhi Husn Ki Mallika)

मेरा नाम मोहन है मैं पटना का रहने वाला हूं मैं एक फैक्ट्री में काम करता हूं और वहां पर मुझे काम करते हुए 15 वर्ष हो चुके हैं इन 15 वर्षों में मैंने अपने जीवन में बहुत उतार-चढ़ाव देखे। मैं एक दिन घर पर ही बैठा हुआ था मैं उस वक्त अपने काम से ही लौटा था तभी मेरी पत्नी मुझे कहने लगी अजी सुनते हो मैंने अपनी पत्नी से कहा हां कहो क्या कुछ कह रही हो। 

वह मुझे कहने लगी अब बरसात का मौसम आने वाला है और घर की छत से पानी  टपकता है मैं तुमसे कह रही थी कि घर की मरम्मत करवा देते तो अच्छा रहता। मैंने अपनी पत्नी लता से कहा ठीक है कुछ समय बाद मैं काम करवा दूंगा अभी तुम्हें मालूम है ना पैसे की कितनी दिक्कत है।

वह कहने लगी हां आप देख लीजिएगा क्योंकि पिछले साल कॉफी पानी टपक रहा था और जैसे तैसे हम लोगों ने झेल लिया लेकिन अब मुझे लगता नहीं है कि छत इस वर्ष इतना दबाव झेल पाएगी। मैंने अपनी पत्नी लता से कहा ठीक है मैं देखता हूं कि मुझे क्या करना है अभी तो मुझे खाना खाने दो, मैंने थोड़ा ऊंची आवाज में उससे बात की तो वह अंदर चली गई। 

मैं सोचने लगा कि पैसो का बंदोबस्त कहां से होगा मेरे लिए तो यह बड़ी समस्या की बात थी आखिरकार इतनी रकम मैं कहां से लेकर आता जिससे कि मैं घर का काम भी करवा सकता। मैंने अगले ही दिन एक घर बनाने वाले मिस्त्री से पूछा यार भैया तुम यह बताओ इसमें कितना खर्चा लग जाएगा वह कहने लगे इसमें कम से कम तुम्हारा एक से दो लाख का खर्चा तो आएगा ही। 

मैं तो यह सुनकर ही घबरा गया क्योंकि मेरे पास इतने पैसे नहीं थे मैं भला कहां से इतने पैसों का बंदोबस्त कर पाता जैसे-तैसे तो मैं अपने घर का खर्चा चला रहा था मेरी तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था। मैं काफी दिनों से परेशान था लेकिन मुझे घर का काम तो करवाना ही था बरसात आने में एक महीना ही बचा हुआ था एक महीने से पहले ही मुझे वह काम करवाना था। उसके लिए मैंने अपने दोस्तों से मदद मांगी लेकिन सब लोगों ने हाथ खड़े कर दिए और कहा मोहन अभी तो हम लोग तुम्हारी पैसे से मदद नहीं कर सकते।

मैं काफी परेशान था लेकिन उसी वक्त हमारे एक दूर के रिश्तेदार हैं जो हमारे घर पर आए हुए थे वह आर्थिक रूप से काफी मजबूत है और मेरा उनके साथ काफी अच्छा संबंध भी है। मैंने सोचा कि क्यों ना मैं उनसे मदद लूँ लेकिन मेरे अंदर हिम्मत नहीं हो रही थी मुझे लग रहा था कि मैं उनसे कैसे कहूं। 

मैंने जब यह बात अपनी पत्नी लता को बताई तो वह कहने लगी देखो आपको मदद तो लेनी ही पड़ेगी बिना मदद के हम लोग घर का काम कैसे करवाएंगे अब आप ही बताइए। मुझे भी लगा कि लता बिल्कुल सही कह रही है तो मैंने भी सुमित भैया से कह दिया कि सुमित भैया मुझे आपसे एक काम था वह मुझे कहने लगे हां मोहन कहो तुम्हें क्या काम था। मैंने उन्हें बताया की मेरे घर की छत से पिछले वर्ष पानी टपकने लगा था और मैं सोच रहा था कि घर का काम करवा देता तो अच्छा रहता लेकिन मेरे पास पैसे नहीं है इसलिए मैं घर का काम नहीं करूंगा पा रहा हूं। 

शायद इस बात को सुमित भैया भी समझ चुके थे वह मुझे कहने लगे मोहन तुम बेवजह परेशान मत हो तुम कल मेरे ऑफिस में आना वहां पर मैं तुम्हें पैसे दे दूंगा यदि तुम्हें और भी मदद की आवश्यकता है तो तुम कह सकते हो। मैंने सुमित भैया से कहा भैया मुझे आपसे पैसे लेने में अच्छा नहीं लग रहा है लेकिन मेरी मजबूरी भी है और आप तो समझ ही सकते हैं कि मेरे पास कोई दूसरा रास्ता भी नहीं है। इस वजह से मुझे आपसे मदद लेनी पड़ रही है आपका एहसान मेरे सर पर जिंदगी भर रहेगा। सुमित भैया मुझे कहने लगे देखो मोहन इसमें कोई एहसान की बात नहीं है जब सही वक्त आएगा तो मैं भी तुमसे जरूर मदद करूंगा। 

मैंने सुमित भैया से कहा भैया आपके लिए तो मेरी जान भी हाजिर है वह मुझे कहने लगे चलो यह तो उसी वक्त पता चलेगा वह कहने लगे कि मैं अभी चलता हूं। मैं उन्हें घर के बाहर तक छोड़ने के लिए गया वह अपनी गाड़ी में बैठे और उसके बाद अपने घर के लिए निकल पड़े मैं भी अपने घर पर आ गया।

मेरी पत्नी कहने लगी चलिए सुमित भैया ने तो हमारी मदद के लिए कहा नहीं तो आप के दोस्तों ने तो हमारी मदद ही नहीं की और आपके सारे रिश्तेदार भी आपसे मुंह फेर कर बैठे हुए हैं। मैंने लता से कहा अब तुम यह बात छोड़ो कल सुबह मैं सुमित भैया के पास पैसे लेने के लिए चला जाऊंगा और दो-चार दिन बाद ही हम लोग घर का काम शुरू करवा देते हैं। लता कहने लगी ठीक है और अगले दिन मैं सुमित भैया के पास चला गया उन्होंने मुझे पैसे दिए और कहा यह पैसे तुम अपने पास रख लो और इससे अपने घर का काम करवा देना। 

मैंने भैया से कहा मैं जल्दी आपको पैसे लौटा दूंगा वह कहने लगे ठीक है, मैं ज्यादा देर उनके साथ नहीं बैठा और वापस अपने घर आ गया। मैंने अपने घर का काम शुरू करवा दिया और कुछ ही दिनों में हमारे घर की मरम्मत हो चुकी थी इस बात को करीब एक महीने से ऊपर हो चुका था और बरसात भी शुरू हो गई थी। मुझे इस बात की खुशी थी कि कम से कम मैं अपने घर की मरम्मत तो करवा पाया लेकिन अब मुझे चिंता भी होने लगी कि मुझे सुमित भैया के पैसे लौटाने हैं। 

इस वजह से मैं उन्हें ज्यादा मिलता भी नहीं था लेकिन मैं अपनी तनख्वाह से थोड़े बहुत पैसे उन्हें देता रहता था। मै एक दिन सुमित भैया के दफ्तर में गया तो वह बहुत ज्यादा परेशान बैठे हुए थे और उनकी परेशानी का कारण मुझे कुछ मालूम नहीं था। मैंने सुमित भैया से पूछा भैया आज आप बहुत परेशान दिख रहे हैं उन्होंने मुझसे कुछ नहीं कहा वह अपनी कुर्सी से खड़े उठे और इधर उधर टहलने लगे।

मेरी तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा था कि आखिरकार वह इतने परेशान क्यों है कुछ देर बाद उन्होंने मुझे कहा मोहन तुम्हारा मुझ पर एक एहसान रहेगा यदि तुम मेरा काम कर दो तो। मैंने उसी वक्त उन्हें जवाब दिया और कहा हां भैया कहिये आपको क्या जरूरत थी वह कहने लगे कुछ दिनों से मैं देख रहा हूं कि मेरी पत्नी सविता ना जाने किसके साथ बात कर रही है मैं नहीं चाहता कि वह मेरे साथ कुछ गलत करें। यदि उसने ऐसा कुछ किया तो मेरा घर पूरी तरीके से बर्बाद हो जाएगा मुझे उस पर पूरा शक है कि वह मुझे बहुत बड़ा धोखा दे रही है लेकिन मैं चाहता हूं कि तुम मेरी मदद करो। 

मैं पहले तो यह बात सुनकर थोड़ा अचंभित रह रह गया क्योंकि मैं सविता भाभी को बड़े अच्छे तरीके से जानता हूं और उनका नेचर भी बहुत अच्छा है लेकिन यह बात सुनकर मुझे थोड़ा अचम्भव जरूर हुआ। मैंने सुमित भैया से कहा भैया आप बिल्कुल फिक्र ना करें मैं जरूर इस बारे में पता कर के आपको बताऊंगा आप मुझ पर पूरा भरोसा कर सकते हैं। मैंने जब सविता भाभी के बारे में पता लगाना शुरू किया तो मुझे काफी सारी बातें उनके बारे मे पता चली। 
सविता भाभी हुस्न की मल्लिका (Savita Bhabhi Husn Ki Mallika)
सविता भाभी हुस्न की मल्लिका (Savita Bhabhi Husn Ki Mallika)
मुझे यह पता चला कि वह न जाने आज कल किस-किस के साथ मुंह मार रही हैं यदि मैं यह बात सुमित भैया को बताता तो उन्हें बहुत बुरा लगता इसलिए मैंने उनसे यह बात नहीं बताई। मैने सोचा  पहले यह बात में सविता भाभी को कहता हूं मैंने उन्हे फोन किया और कहा मुझे अपने बारे में सब कुछ पता चल चुका है। वह मुझसे कहने लगी तुम्हें मेरे बारे में क्या मालूम पड़ा है मैंने उन्हें सारी बात बता दी। 

वह मुझे कहने लगी मुझे तुमसे मिलना है क्या तुम अभी मुझसे मिल सकते हो। मैंने उन्हें कहा ठीक है मैं अभी आपको मिलता हूं मैं उनसे मिलने के लिए घर पर गया घर पर उस वक्त सुमित भैया नहीं थे वह अपने काम से कहीं बाहर गए हुए थे। सविता भाभी मेरे पास आकर बैठी और मैं बदन को सहलाने लगी उन्होंने मेरे ऊपर जैसे जादू सा कर दिया था।

मैं उनके बस में आ चुका था मैं उनके यौवन का स्वाद चखना चाहता था इसलिए मैंने उनके बदन को सहलाना शुरु किया पहले तो मैं उनके बड़े स्तनों को अपने हाथ में लेता रहा। उनके स्तनों को अपने हाथ में लेने में ऐसा लगता जैसे कि कोई नरम चीज को अपने हाथ में पकड़ रखा हो उनके स्तनों का रंग इतना गोरा था कि मैं बिल्कुल भी अपने आप पर काबू नहीं कर पा रहा। 

वह मुझे कहने लगी तुम अपने मुंह से मेरे  स्तनो का रसपान करो मैंने अपने मुंह से उनके स्तनों का रसपान करना शुरू किया तो मेरे अंदर उत्तेजना और भी ज्यादा अधिक होने लगी। उनके स्तनों से कुछ हल्का सा बाहर की तरफ निकल रहा था मैंने जब उनकी चिकनी योनि को देखा तो मैं और भी ज्यादा उत्तेजित हो गया अब मैं बिल्कुल भी नहीं रह पा रहा था। मैंने जैसे ही अपने लंड को उनकी योनि के अंदर प्रवेश करवाया तो मुझे ऐसा लगा जैसे कि मैं किसी हुस्न की मल्लिका को चोद रहा हूं और मैं उसे महसूस कर रहा हूं।

वह पूरी तरीके से तड़प रही थी वह अपने बदन को ऊपर नीचे करती जाती जिससे कि मेरे अंदर की गर्मी और बढती जा रही थी। उन्होंने अपनी चूत से मेरे लंड को कसकर पकड़ लिया था मुझे ऐसा प्रतीत होता जैसे कि मैं कुछ देर बाद ही झडने वाला हूं लेकिन फिर भी मैं उन्हें बड़ी तेजी से धक्के देता रहा। 

उनके मुंह से बड़ी मादक आवाज निकल रही थी जिससे कि मैं बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था परंतु फिर भी मैंने सविता भाभी के साथ उस दिन बड़े ही अच्छे से संभोग किया। जब उन्होने कपड़े पहने तो वह मुझे कहने लगी मैं तुम्हें कुछ पैसे दूंगी लेकिन तुम यह बात सुमित से मत कहना और उसे तुम्हें कुछ भी बताने की जरूरत नहीं है। मुझे भी लगा कि मुझे सविता भाभी पैसे तो दे ही रही है और मैं अपने पैसे भी सुमित भैया को लौटा दूंगा तो मैंने उन्हें कुछ नहीं बताया।
सविता भाभी हुस्न की मल्लिका (Savita Bhabhi Husn Ki Mallika) सविता भाभी हुस्न की मल्लिका (Savita Bhabhi Husn Ki Mallika) Reviewed by Priyanka Sharma on 1:52 PM Rating: 5

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