प्यासी चूत की चुदाई (Pyaasi Choot Ki Chudai)

प्यासी चूत की चुदाई
(Pyaasi Choot Ki Chudai)

दोस्तो, मेरा नाम आनन्द है मैं जबलपुर, मध्य प्रदेश से हूँ मेरी उम्र 25 साल है। मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ।
आज मैं जो आपको अपनी कहानी सुनाने जा रहा हूँ वह एकदम सच्ची है। बात दिसंबर 2017 की है जब मेरा ट्रांसफर बालाघाट हुआ. वहाँ मेरा कोई फ़्रेंड नहीं था। मैं समय काटने के लिए मैं फ़ेसबुक पर बहुत ऑनलाइन रहता हूँ और पहले भी कई लोगों से मुलाक़ात कर चुका हूँ। साथ में मैं ऑनलाइन सेक्स मूवीज़ भी देखता हूँ।

फ़ेसबुक पर मैं बहुत सी लड़कियों और भाभियों को रिक्वेस्ट भेजता हूँ कि काश़ कोई मिले और मैं मज़े ले सकूँ.
ऐसा ही हुआ जब मैंने एक भाभी को फ्रैंड रिक्वेस्ट सेंड की. वे जबलपुर से ही थी। उन्होंने मेरी फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट कर ली.

फिर धीरे धीरे हमारी बातें शुरू हुई और बात ही बात में पता चला कि उनकी एक लड़की है जो कॉलेज पढ़ती है। उनके पति प्राइवेट जॉब करते हैं, वो खुद एक सरकारी टीचर हैं।
धीरे धीरे हमारी बात आगे बढ़ी और घर परिवार की बातें भी होने लगी.
उनकी बातों से पता चला कि वो भी मेरी ही तरह अकेली थीं … सब होते हुए भी कुछ नहीं।

मुझे बातों बातों में समझ में आने लगा कि वे बहुत परेशान रहती हैं. मेरी परेशानियों को भी वे समझने लगी और धीरे धीरे हमारी फ्रेंडशिप बढ़ने लगी. मुझे बिल्कुल यक़ीन नहीं हो रहा था कि मैं किसी नए इंसान से बात कर रहा हूँ. वे मेरे साथ कंफर्टेबल फ़ील कर रही थी … मैं भी उनके साथ कंफर्टेबल फ़ील कर रहा था. हमने एक दूसरे को अपना फोन नंबर दिया और फिर धीरे धीरे लेट नाइट चैटिग चालू हो गई और फिर बाद में आगे बढ़ने लगी.

उन्होंने बताया कि वे अलग रहती हैं अपने पति और अपने बच्ची के साथ! उनकी जॉइंट फ़ैमिली थी लेकिन परिवार में न बनने के कारण उन्होंने अलग रहने का निर्णय किया. और अलग अपनी मम्मी के घर के आसपास रहने लगी।

ऐसे दस पन्द्रह दिन बीत गए। मेरा जबलपुर जाना हुआ तो उनसे मिलने के लिए पूछा तो वे तैयार हो गई लेकिन मुझे किसी काम के कारण मैं उससे नहीं मिल पाया और वापस आ गया.
मेरी उससे वीडियो कॉल पर बात होने लगी और हम दो दो घंटे रात बात करने लगे. लेकिन मुझे यह समझ नहीं आया कि वे मेरे से लेट नाइट बात कैसे कर लेती हैं जबकि वो अपने पति और बेटी के साथ रहती हैं.

मैंने उनको एक दिन पूछ लिया- तुम्हारे पति साथ होने के बाद भी तुम मेरे से बात कर लेती हो, ऐसा कैसे?
तब उन्होंने बताया कि उसकी उसके पति से नहीं बनती और न ही ऐसा कुछ होता है। हम दिखाने के लिए वह साथ रहते हैं और उनका कहीं और चक्कर है, यह बात मुझे पता है.
तो मैंने उनको कहा- तो आपका कहीं और क्यों नहीं हुआ?
तो उन्होंने बताया- सारे लोग सिर्फ़ सेक्स के लिए ही भूखे रहते हैं इसके आगे कुछ भी नहीं।

मैंने उनको बोला- सारे लोगों के बारे में आप कैसे जानती हैं?
उन्होंने बताया- अभी तुम बच्चे हो, दुनियादारी की तुम्हें समझ नहीं है.
मैंने उनको कहा- मैं बच्चा नहीं हूँ, दुनियादारी बहुत अच्छे तरीक़े से जानता हूँ. यह बात अलग है कि मैं किसी के साथ ग़लत नहीं करता … तो मेरे साथ भी कुछ ग़लत नहीं होता.
तो उन्होंने कहा- हाँ तुम वाक़ई बहुत अच्छे हो तो वैसे अच्छे से बात करते हो.

और इस तरह हमारे बीच में बहुत सी बातें होने लगी. इस तरह से वो मेरे से इमोशनल अटैच भी हो गयी और फिर अपने परिवार की बारे में बताने लगी कि क्या क्या परेशनियाँ हुईं.

मैं उनसे पूरी तरह खुल चुका था। मैं कुछ डबल मीनिंग बाद भी करने लगता था। मैंने उनको सामने से नहीं देखा था लेकिन कॉलिंग में और वीडियो कॉल में हमारी बातें होती थी।

एक दिन उन्होंने मुझसे पूछा- तुम्हारी कोई गर्लफ़्रेंड नहीं है?
मैंने उनको बताया- गर्लफ़्रेंड भी है और बहुत सारी फ्रेंडज़ भी तुम्हारी तरह जिनसे मैं बात करता हूँ इसी तरह।

शायद उन्हें मेरी बात का बुरा लगा और तीन चार दिन बात नहीं हुईं.
फिर मैंने उनको पूछा तो उन्होंने बोला- तुम्हारे पास तो कमी नहीं है तो मुझे क्यों बात कर रहे हो?
मैंने उनको बोला- ग़लत मत समझो. मैंने तुम्हें जो भी बताया हैं वो सब सही है और मैं किसी को तकलीफ़ नहीं देना चाहता कि कोई मेरे कारण दुखी हो. शायद यही वजह है कि मेरे साथ कभी बुरा नहीं होता।
मैंने उनको बहुत अच्छे से समझाया और फिर सब नॉर्मल हों गया।

ऐसे ही तीन महीने बीत गए और हमारे बीच में मुलाक़ातों का भी दौर चालू हो गया. बहुत सी बात होने लगी, सेक्स चैट भी होने लगी. लेकिन मुझे डर था कि गई उनका मोबाइल कोई देख न ले इसलिए मैंने उनका आईडी और पासवर्ड ले लिया. जब हमारी चैट होती थी तो मैं डिलीट कर देता था ताकि किसी प्रकार की कोई समस्या ना हो।

आखिरकार हमने मिलने का एक प्लान बनाया. उन्होंने कहा- कहीं बाहर चलो!
लेकिन क्लोज़िंग होने के कारण मुझे छुट्टी नहीं मिल पा रही थी.

फिर आख़िर में प्लान बन ही गया और मैंने उनसे पूछा- कहाँ चलना है?
उन्होंने बताया- ‘मैहर कटनी’ चलते हैं, वहाँ होटल कर लेंगे.
मैंने उनको बोला- ठीक है, मैं स्टेशन पर मिल जाऊँगा.

अगले दिन वे स्टेशन आयी और मैं उन्हें स्टेशन में मिल गया. फिर हम लोग साथ में मैहर के लिए निकले. रास्ते में बहुत सारी बातें और हँसी मज़ाक होती रही दिन में!

मेहर उतरते ही मेरा मूड बदल गया … या यू कहूँ तो डर सा लग रहा था। मैंने उनको कहा- होटल नहीं जाएंगे.
तो वे बोलीं- तो तुम यहाँ पर आए क्यों?
मैं बोला- एक काम करो, लगे हाथ दर्शन कर लो और पाँच बजे की ट्रेन से वापस चलते हैं.
उन्होंने मना कर दिया क्यूँकि वो भगवान को नहीं मानती थी और मैं भी नहीं मानता हूँ।

इसी तरह हमारी थोड़ी देर बहस हुई लेकिन आखिर मैं उनकी बात को मान गया और हम होटल में रूम लेने गए लेकिन वहाँ पर कोई भी ढंग का होटल मुझे समझ नहीं आया.
लेकिन उनकी ज़िद के आगे एक न चली … आख़िरकार वे सेक्स की भूखी जो थी।

जैसे तैसे कर रूम लिया और ऊपर चले गाए लेकिन उधर पर जाकर मेरा मन नहीं था तो मुझे अटपटा लग रहा था. फिर मैं नहाने चला गया लेकिन सोच रहा था कि बहुत दिन से किया भी नहीं है. मुझे डर था कि कहीं बनी बनाई बात बिगड़ न जाए … न जाने फिर मौक़ा आए न आए! यही सब दिमाग़ में था और मैं नहा कर वापस आया.
इसके बाद वे भी नहाने चली गई।

वापस आकर हम बैठे और बात शुरू हुई. कुछ देर बाद उन्होंने कहा- लेट जाओ, सर दबा देती हूँ.
मुझे भी इंतज़ार था कि कहीं से तो पहल हो.
मैं हिचकिचाहट में था.

उन्होंने मेरे सर को दबाया और फिर आगे बढ़ती गयी मेरे फिर हाथों से होते हुए सीने को सहलाने लगी. मैंने भी उनकी गोद में सर रख लिया तो उनकी बड़ी बड़ी चूचियाँ मेरे चेहरे पर स्पर्श करने लगी थी।
फिर हम लेट गए. धीरे धीरे मैंने अपना हाथ बढ़ाया और उनकी कमर पर रखा और अपनी ओर खींचा. सामने से कोई विरोध नहीं था, उनका बदन बहुत गठीला था, हाईट में थोड़ी कम थी. बदन बहुत ही मस्त था.
प्यासी चूत की चुदाई (Pyaasi Choot Ki Chudai)
प्यासी चूत की चुदाई (Pyaasi Choot Ki Chudai)
मैंने उन्हें अपनी ओर खींचा, उनके सीने में हाथ रखा और दबाया. उनकी आँखों में देखा तो वे मुझे अजीब तरीक़े से देख रही थी और मेरी पीठ पर हाथ फेर रही थी. धीरे धीरे मैं अपने हाथों को उनकी सलवार की तरफ़ ले गया और ऊपर से ही सहलाने लगा. उन्होंने अपनी टाँगें खोल दी. मैं उनकी चूत का अहसास साफ़ साफ़ महसूस कर रहा था, साथ ही उनकी चूत के दाने को भी ऊपर से छूने का प्रयास कर रहा था.

वे मुझे अपनी ओर खींच रही थी. मैं उनके पैरों में पैर फंसाकर उनकी चूत पर हाथ फेरता रहा.

फिर मैं उठा और उनकी सलवार को नीचे खींचकर उतार दिया और साथ में उनकी पेंटी को भी! मैंने देखा कि उनकी चूत गीली थी. मैंने देर न करते हुए अपनी अंगुली चूत के अंदर डाल दी और अंदर बाहर करने लगा. वे बहुत उत्तेजित होने लगी लेकिन मैं भी उन्हें तड़पाना चाह रहा था. उनकी चूत में मैंने अपनी दो उंगली डाल दी. फिर तो वे और पागल हो गई.
मुझे डर लग रहा था कि कहीं कोई परेशानी न खड़ी हो जाए क्योंकि यह जगह सही नहीं लग रही थी.

मैंने अब देर ना की और अपने कपड़े खोल दिए, अपना लंड उनके सामने रख दिया. अब हम दोनों पूरी तरह से नंगे थे. उन्होंने मेरे लंड को छुआ तो मेरे शरीर में सनसनी सी मच गई।
उन्होंने मेरी तरफ़ देखा और मैंने उनकी तरफ़ देखा और इशारे में बात समझ गई. झट से उन्होंने मेरा लंड मुँह में डाल लिया. क़रीब सात आठ मिनट बाद मेरे लाड़ले ने पानी छोड़ दिया.

मैं बाथरूम जाकर वापस आया और फिर हम दोनों एक दूसरे से लिपट कर एक दूसरे के नंगे बदन का अहसास करते रहे। वे धीरे धीरे मेरे लंड को हिला रही थी.

मेरा लंड कुछ देर बाद खड़ा हो गया. मैंने उनको इशारा किया तो झट से सीधी हो गई और मैं उनके ऊपर हो गया. उन्होंने अपनी टाँगें फैला ली और अपनी जन्नत का दरवाज़ा खोल दिया।
मैं अपने लंड को उनकी चूत के ऊपर रगड़ने लगा, वे मुझे अपनी ओर खींच रही थी, उन पर चुदाई का नशा छाने लगा, उन्हें मजा लगा.

मैंने अपना लंड उनकी चूत के छेद पर रखा और धीरे से अंदर डाला तो हल्की सी सिसकारी उनके मुँह से निकली. मैंने उनकी टांगों को पकड़ा और एक ही झटके मैं उनकी चूत के अंदर पूरा समा दिया. वह छटपटाई उम्म्ह… अहह… हय… याह… लेकिन मेरी पकड़ मज़बूत थी।

पूरा मेरा पूरा सात इंच लंबा, ढाई इंच मोटा लंड उनकी चूत में जगह बना चुका था. फिर मैंने उनके मम्मों को दबाया और चूसा, साथ ही ज़ोर ज़ोर से प्रेस भी करने लगा. वे भी मेरा साथ दे रही थी और नॉर्मल हो चुकी थी और मेरे लंड मज़ा ले रही थी.

मैं भी उन्हें 15-20 मिनट तक नॉन स्टॉप चोदता रहा. पूरे कमरे में फच फच उह ओह की आवाज़ आने लगी. वे अपनी आँखें बंद करके चुदाई की मस्ती में डूबी थी और मैं मन ही मन ये सोच रहा था कि आज रजिया फँस गयी है.

उनकी टाँगों को मैंने अपने कन्धे पर रखा जिससे उनकी चूत की गहराई में मेरा लंड गोता लगा सके और वह यहा वहाँ न हिले जिससे मेरी लय ख़राब न हो. मैंने देर न करते हुए उनकी चूत में हाथ से लंड सटाया और एक ही झटके में चूत में उतार दिया. इस बार वार बहुत तगड़ा था, उनकी चीख़ निकल गयी, वो बोली- धीरे कर!

मैंने उनकी एक न सुनी, मैंने कहा- अभी मुझे अपनी मर्जी कर लेने दो, आपको मज़ा न आए तो कहना!
उन्होंने कुछ नहीं कहा और मैं उनकी चुदाई करता रहा.

सच बताऊँ दोस्तो, चुदाई का असली मज़ा मुझे तब आता है जब तक सामने वाले को चरम तक न पहुँचा दूँ. वे बहुत ही संतुष्ट लग रही थी।
मैंने उन्हें अपनी बात मनवा ली और कहा- आज के लिए इतना काफ़ी है. यह जगह सेफ नहीं लग रही है लेकिन आपकी ख़ुशी के कारण मैंने ऐसा किया है.
वे बोली- कोई और होटल में चलते हैं अगर ऐसा लगता है तो?

फिर मैंने उन्हें कहा- नहीं आज इतना काफ़ी है, फिर कभी करेंगे.
और मैं जिद करने लगा तो उन्हें मानना पड़ा.

फिर शाम को हम वहाँ से निकले और रात में 9 बजे वापस जबलपुर आ गए.
उन्होंने मुझसे कहा- बहुत भूख लगी रही है.
मैंने कहा- मुझे भी!
मैंने कहा- बस स्टेण्ड चलते हैं. वहाँ पर रेस्टोरेंट, ढाबे खुले होंगे, खाना ख़ाकर आप निकल जाना!

हमने एक रेस्टोरेंट में खाना खाया, फिर मैंने उनको कहा- मैं तुम्हें घर छोड़ देता हूँ.
लेकिन उन्होंने कहा- रात हो चुकी है, तुम थक चुके हो. मैं ऑटो करके चली जाऊंगी.
फिर मैंने उन्हें ऑटो कर दिया फिर हम अपने अपने रास्ते चले गए.

उनके बाद हमारी मुलाक़ात और बढ़ गई. मैं आज भी जब घर जाता हूँ मैं तब तब मौक़ा निकालकर उनके घर जाता हूँ और उनको मजे देता हूँ।

उम्मीद है आपको यह चोदन कहानी पसंद आयी होगी. यह मेरी रीयल स्टोरी है आप को कैसी लगी, मुझे बतायें।
प्यासी चूत की चुदाई (Pyaasi Choot Ki Chudai) प्यासी चूत की चुदाई (Pyaasi Choot Ki Chudai) Reviewed by Priyanka Sharma on 7:26 PM Rating: 5

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