जिम में मिटाई जिस्म की वासना (Jim Me Mitayi Jism Ki Vaasna)

जिम में मिटाई जिस्म की वासना
(Jim Me Mitayi Jism Ki Vaasna)

हाय, मेरा नाम शाजिया शेख है. मेरी उम्र अभी 26 साल की है. मेरी अरेंज मैरिज हुयी है. मैं इस शादी से खुश नहीं थी, क्योंकि मुझे हैंडसम हसबेंड चाहिए था, पर वो नहीं मिला. मेरी शादी को 4 साल हो गए हैं. मुझे अभी तक कोई बच्चा नहीं हुआ है.

मुझे अपनी ससुराल में घर के काफी इन्सट्रक्शन फॉलो करने पड़ते हैं. घर से बाहर अकेले जाना मना था. मेरी ससुराल वाले काफी सख्त नियमों वाले लोग है. वे मुझे जॉब भी नहीं करने देते हैं. हालांकि मैं ग्रेजुएट हूँ. मेरे शौहर जो हैं, वो एक प्राइवेट जॉब करते हैं. उनकी तनख्वाह कम पड़ती है, फिर भी उसी में गुजारा करना पड़ता है.

मैं घर पे बैठे बैठे काफी बोर हो जाती थी. फिर पड़ोस में मेरी एक सहेली बनी. उसका नाम शाहीन (बदला हुआ नाम) था. हम काफी अच्छी सहेलियां बन गई.

उसने मुझे अन्तर्वासना नाम की हॉट वेबसाइट के बारे में बताया. मुझे इस वेबसाइट पे काफी सेक्स स्टोरी पढ़ने को मिलीं, जिन्हें मैंने एक एक करके मजा लेते हुए पढ़ना शुरू कर दीं. इन रंगीन और मदमस्त कामुक रंग बिरंगी देसी सेक्स स्टोरीज को पढ़ कर मुझे बहुत मजा आने लगा.

मेरे शौहर काम में बिजी होने के कारण मेरे साथ थोड़ा कम ही टाइम स्पेंड करते थे. सेक्स स्टोरी पढ़ कर मुझे कुछ ज्यादा ही चुदास चढ़ने लगी थी. ये आग और भी अधिक भड़क गई और इस पर बारिश न होने के कारण मेरे जिस्म की गर्मी बढ़ गयी.

मेरा प्यासा कुंआ काफी वक़्त तक खाली बना रहा, इस भरने मेरे शौहर महीने में 2 या 3 बार ही अन्दर आते. मेरी समझ में ही नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं.

मैं एक अच्छे घर से हूँ, मैंने कभी किसी के साथ रोमांस तो दूर की बात, कभी पराये लड़कों से बात भी नहीं की थी. पर स्टोरी पढ़ पढ़ कर अब मैंने गली के जवान लड़कों को चुपके से देखना सीख लिया था.
मुझे मालूम था कि इन जवान लड़कों को सिर्फ देखके तो कुछ होने वाला नहीं था.

जब मैंने अपनी सहेली शाहीन को ये बताया कि मुझे लड़के देखना अच्छा लग रहा है. तो वो हंसने लगी, उसने कहा- सिर्फ देखो मत, उन्हें भी कुछ दिखाओ, फिर देखो कितना मजा आता है.
उसकी बात को सुनकर मेरे मन में भी ये बात जम गई.

चूंकि मैं जब भी बाहर जाती थी, बुरका पहन कर निकलती थी इसलिए कोई मेरी आंखों के अलावा कुछ नहीं देख सकता था.

इस कहानी में आगे बढ़ने से पहले मैं आपको भी कुछ अपने बारे में बता देती हूँ. मेरा रंग एकदम गोरा दूध की तरह गोरा है. मैं लम्बी और छरहरी देह की एक बहुत ही खूबसूरत बला हूँ. लम्बे काले बाल और आंखें भी एकदम काली हैं. ऊपर और नीचे के होंठ गुलाबी हैं. मेरा फ़िगर 34-28-36 का है.

हमारे पड़ोस में विकी (बदला हुआ नाम) नाम का लड़का रहता था. वो मुझे काफी पसंद था और मैं भी उसको काफी पसंद थी. क्योंकि वो काफी बार मुझे देखता रहता था. उसका एक जिम था, जिसमें कसरत करने कई सारे लड़के आते थे. उसकी ये जगह हमारे घर के ठीक सामने ही थी. उसकी कसरत की क्लास सुबह 4 बजे से शुरू होती थी और 11 बजे तक चलती थी. वो खुद भी काफी कसरत करता रहता था. इसी तरह शाम को 5 बजे से रात के 11 बजे तक उसकी क्लास चालू रहती थी.

वो सुबह सुबह और शाम को पीने का पानी लेने हमारे घर आता था, क्योंकि हमारा घर सामने ही था और वो मेरे शौहर का दोस्त भी बन गया था. उसकी पहलवानी बॉडी देख कर मुझे मन में बड़ी चुदास सी भड़क जाती थी. सेक्स स्टोरीस पढ़ पढ़ के मैं पहले ही गर्म थी.

एक बार पानी देते समय मैंने उसको वो वाली स्माइल दे दी. वो काफी चालक था, तुरंत समझ गया और अगले चक्कर में ही उसने मुझसे मोबाइल नम्बर का इशारा किया. मेरे पास मोबाइल नहीं था इसलिए एक पेपर पर मैंने अपना ईमेल पता दे दिया.
फिर हमारी बातें ईमेल के जरिये होने लगीं.

विकी दिखने में काफी हैंडसम था. वो 22 साल की उम्र का रहा होगा. बॉडी बिल्डर था, लम्बा था, पर कलर में सांवला था. उसके सांवले रंग से मुझे कोई दिक्कत नहीं थी, मैं तो बस उसकी बॉडी पे फिदा थी.

नेट चैटिंग करते करते एक दिन उसने कह दिया- अब इंतज़ार नहीं होता.. मुझे तुम्हारी लेनी है.
मैं उसको काफी दिनों तक रुकवा रही थी क्योंकि मैं अकेली बाहर जा नहीं सकती. उधर वो भी मेरे बेडरूम में आ नहीं सकता था, क्योंकि हमेशा ही घर के लोग रहते थे. हमारी काफी मजबूरी थी.

आखिरकार हम दोनों की चाहत ने बाजी जीत ली. एक दिन हमें मौका मिल ही गया. मेरे शौहर तो ज्यादातर टाइम हमेशा बाहर ही रहते हैं. पर एक दिन बाहर गाँव में रिश्तेदार की शादी थी, इसलिए घर में से सास ससुर और देवर तीनों चले गए. मैंने बीमारी का बहाना किया और नहीं गयी.

वो मुझे अकेली नहीं रहने देना चाहते थे. इसलिए देवर रुक रहे थे, पर मैंने कह दिया कि आज शाम को ही उनके भैया यानि मेरे शौहर आने वाले हैं, इसलिए मैं अकेली नहीं रहूँगी, वो रहेंगे साथ में.

मेरे शौहर शाम को आने वाले थे. लेकिन इन सबके जाने के बाद उनका कॉल आया कि उन्हें टाइम लगेगा और वो दूसरे दिन दोपहर में आएंगे.

अब ऐसी सिचुएशन में अच्छा मौका मिल चुका था. मैंने दोपहर में ही विकी को ईमेल कर दिया, पर उसने काफी देर बाद चैक किया. तब शाम के 6 बज रहे थे.
वो भी काफी खुश हुआ.

फिर हमने प्लान बनाया. मैं उसे घर में नहीं बुलवा सकती थी क्योंकि अगर कोई जल्दी आ गया या फिर पड़ोस में किसी ने देख लिया, तो दिक्कत हो सकती थी.
वो भी इस बात पर मान गया कि घर के अन्दर नहीं आएगा.

प्लान ये बना कि शाम को 10 बजे ही वो जिम से सबको निकाल देगा और मैं गली में सबकी नजरें बचा कर उसके जिम में आ जाऊंगी. हमारा घर और जिम गली में सबसे लास्ट में है. उसकी जिम काफी बड़ी जगह में है.

रात में वो 10 बजे से मेरा इंतज़ार करने लगा. उसने जिम की लाइटें ऑफ कर रखी थीं, जिससे लगे कि जिम बंद हो गया है.

मौका देख कर मैं रात के करीब 11.30 बजे बुरका पहन के जिम में चली गयी. अन्दर जाते ही उसने दरवाजा क्लोज़ कर दिया. उसने एक एकदम डिम लाइट ऑन कर रखी थी. मेरे आते ही उसने मुझे गोद में उठा लिया और जिम के दूसरे रूम में ले गया. वहाँ पे उसने बेड पहले से ही लगाया हुआ था.

उसने मेरा नकाब हटा दिया और मुझे चुम्बन करने लगा. तभी मुझे कुछ आवाज़ आई, मैंने उसे रोका. तब उसने कहा कि कोई नहीं है. शायद बिल्ली होगी.
जिम में मिटाई जिस्म की वासना (Jim Me Mitayi Jism Ki Vaasna)
जिम में मिटाई जिस्म की वासना (Jim Me Mitayi Jism Ki Vaasna)
पहले बुरके के ऊपर से वो मेरी गांड दबाने लगा, फिर अन्दर हाथ डाल दिया. फिर धीरे धीरे उसने मुझे चुम्बन करते हुए ही नंगी कर दिया.

अब उसने भी खुद के कपड़े उतार दिए. उसकी बॉडी देखके मुझे बहुत नशा चढ़ गया. उसने एक सेकंड भी देर किए बिना अपना लंड सीधे मेरे मुँह में दे दिया. मैं कुछ बोल पाती, इससे पहले ही उसने मेरे बालों को पकड़ कर मेरे मुँह में गले तक लंड पेल दिया और अन्दर बाहर करने लगा. इससे पहले मैंने लंड को कभी मुँह में नहीं लिया था.

दो मिनट तक लंड को मेरे मुँह में अन्दर बाहर करने के बाद उसने लंड बाहर निकाला, तब मैंने राहत की सांस ली. अगले पल उसने मुझे बिस्तर जो कि जमीन पर ही एक गद्दी डाली थी, उसपे लेटा दिया. मेरी टांगें खोल दीं और एक ही शॉट में पूरा लंड मेरी कोमल गोरी पिंक चूत में डाल दिया. मेरी चीख निकलती, इससे पहले ही उसने मेरे होंठ पे अपने होंठ रख दिये.

पहलेपहल तो बड़ा तेज दर्द हुआ, फिर धीरे धीरे दर्द कम होता गया. अब मुझे चुदाई का मजा आने लगा. उसने दोनों हाथ में मेरे दोनों मम्मे पकड़ लिए और चूसने लगा.

चूचे चूसने के साथ ही वो नीचे से चूत में ज़ोर ज़ोर से धक्के मारे जा रहा था. इस वक्त वो मेरे दोनों मम्मों को बड़ी बेरहमी से चूस और काट रहा था. मैं भी सेक्स के नशे में पागल हो गयी थी. काफी दिनों की प्यासी थी, इसलिए काफी गीली हो चुकी थी. उसको मेरी चूत चुदाई में बहुत मजा आ रहा था.

वो बार बार ‘आ जा बे आ जा..’ ऐसा कुछ कहते हुए मुझे चोदे जा रहा था.

करीब 5 मिनट की दमदार चुदाई के बाद उसने मुझे उल्टा किया. मेरी गांड पर ज़ोर से चांटे जड़ दिए और पीछे से मेरी चूत में लंड डाल दिया. एक हाथ से मेरे बाल पकड़ लिए और दूसरे हाथ से मेरी गांड पे ज़ोर ज़ोर से मारने लगा. नीचे से लंड से चूत तो चुद ही रही थी.

मैं भी उम्म्ह… अहह… हय… याह… की सीत्कारें ले रही थी. कुछ देर की दमदार चुदाई के बाद उसने मेरे अन्दर ही अपना सारा पानी छोड़ दिया. मेरी चूत उसके वीर्य से भर गयी थी.

फिर कुछ देर यूं ही लम्बी लम्बी सांसें लेते हुए लेटने के बाद उसने उसने एक आवाज़ लगाई- शरद, कहाँ हो? आ जाओ.

मैं हैरान रह गई. एक और लड़का था, जो जिम में रुका हुआ था. शरद भी उसका ही दोस्त था. वो भी गली में ही रहता था, मुझे जानता भी था. अब उसके सामने मैं विकी के साथ नंगी पड़ी थी.
मैंने विकी से कहा- ये तुमने गलत किया विकी, प्लीज ऐसा मत होने दो.
पर विकी ने कहा- वो मेरा जिगरी यार है. हम दोनों को जो भी मिलता है, मिल कर खाते हैं.
साथ ही उसने मुझे गारंटी भी दी कि वो दोनों मेरी चुदाई की बात किसी को नहीं बताएंगे.

अब शरद मेरे ऊपर चढ़ गया. उसने भी पहले मेरे मुँह में लंड दे दिया. फिर उसी तरह चुदाई की. उसका लंड भी मुझे बड़ा सुखद लगा था.

कुछ देर आराम करने के बाद सुबह के 3 बज रहे होंगे. वो मुझे जिम के कसरत करने के मशीन के पास ले गए और पोजीशन बना कर बारी बारी फिर से मेरी चुदाई की.

करीब 4 बजे मैंने अपने कपड़े पहने और बुरका पहन के अपने घर के अन्दर आ गयी. मैं पहले नहाने गयी और जी भरके नहाई, फिर सो गयी.

दूसरे दिन दोपहर में शौहर आ गए. वे थके थे, सो खा पी कर सो गए.

उन्होंने आराम किया. उनके आने के बाद मैं उनको देखकर थोड़ा सा भावुक हो गयी थी. क्योंकि मैंने जो बीती रात किया था, उसका मुझे बहुत अफसोस हो रहा था. मुझे विकी का बुरा नहीं लग रहा था, पर शरद के साथ किया उसका ज्यादा बुरा लग रहा था. क्योंकि विकी के लिए मैं दिल से कन्फ़र्म थी कि करना है. पर शरद का यूं अचानक से वहां आने ने मेरे जज़्बात को मरोड़ दिया था.

दो दिन तक मैं घर के दरवाजे पर भी नहीं गयी. खाना भी ठीक से नहीं खाया. जब भी गुजरा वाकिया याद आता, बाथरूम में शावर चालू करके मुँह पर हाथ रख कर रोने लगती.

फिर एक दिन मैं मार्केट में अपनी सास के साथ गयी. मैं डरते डरते घर से बाहर निकली. विकी और शरद बाहर ही थे खड़े हुए थे. उन्होंने मुझे देख के अंजाना सा लुक दिया. मैंने उन्हें देखा, पर उन दोनों ने कोई भाव नहीं दिया. फिर बाकी गली के लड़के और लोग, जो थे सब हमेशा की तरह नॉर्मल ही रहे.

वापस आते समय विकी ने मेरी सास से बात की- कैसी हो आंटी, बाकी सब ठीक है न?
उसने मेरी तरफ देखा भी नहीं.

क्या बताऊं मुझे बहुत बहुत खुशी हुई कि उन दोनों ने अपना वादा निभाया और उस बारे में किसी को नहीं बताया. अगर वो किसी को बता देते, तो सब लोग मुझे अजीब सी नजर से घूरते, पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. वो दोनों भी ऐसे रहे, जैसे कुछ हुआ ही न हो.

फिर अगले दिन सुबह सुबह विकी पीने का पानी लेने आया, तब उसको मेरी सास ने पानी दिया, तब मैं वहीं हॉल में थी. मैंने उसको देखा, उसने मुझे देखा. वो मुस्कुराया, तो मैंने भी थोड़ा सा मुस्कुरा दिया. फिर मैं नहाने चली गयी.

नहाते वक़्त मैंने उस रात जो भी हुआ, उसे याद किया. उस बात को याद करके बहुत मजा आ रहा था. फिर मैं टॉवल लपेटकर बाहर आई और रूम बंद करके मैंने लैपटाप ऑन कर दिया. सबसे पहले विकी को हैंगआउट ब्लॉक लिस्ट से बाहर निकाला और मैसेज किया. उसका कोई रिप्लाई नहीं आया, तो मैं अन्तर्वासना पर कहानी पढ़ने लगी. मैंने सोचा के क्यों न मैं भी कहानी लिख दूं.

मैंने कहानी लिखना शुरू किया और सिर्फ 20 से 25 मिनट में सब लिख दिया और बिना वापस पढ़े पब्लिशर को ईमेल भी कर दिया.

पहली कहानी (जिस्म की आग बुझाई जिम वाले के साथ) लिखते समय मैंने सिर्फ टॉवल पहना था. मैंने इतना हॉट हो गयी थी कि वापस जाके सर पे पानी डाल दिया.

शाम के वक़्त मैं छत पर गयी, वहां सामने की दूसरी छत पे शरद था. उसने मुझे देखा तो एक पैकेट मेरी तरफ फेंका, मैंने तुरंत उठा लिया. उसमें बहुत सी स्वीट चॉकलेट और एक प्रेम-पत्र था. जिसमें उसने फिर से वादा किया था कि वो किसी को कभी कुछ नहीं बताएगा. मैंने भी स्माइल करके थैंक्स कहा और चॉकलेट खाने लगी.

शरद के साथ मेरा ऐसा ही रिश्ता चल पड़ा, जब भी स्वीट खाने को दिल करता, मैं छत पे चली जाती और वहां से 5 से 10 मिनट में ही पैकेट आ जाता. उसके फ्री के गिफ्ट ने मेरा वो गुस्सा ठंडा कर दिया था, जो उसको लेकर था.

मुझे खुद पर हंसी आ रही थी.

फिर अभी कुछ दिन पहले का किस्सा है, अप्रैल 2019 का ही है. वो एक दिन आया, जब वोट करने जाना था. घर में से शौहर, देवर, सास, ससुर और मैं एक साथ निकले. मैंने बुरका पहन लिया था. दोपहर के 12 बजे होंगे.

बाहर निकलते ही विकी, जो एक पार्टी का कार्यकर्ता भी था. वो हमें पिक करने के लिए कार लाया था. उसकी कार में बैठकर हम लोग स्कूल पहुंचे, जहां वोटिंग बूथ बनाया गया था. मेरा नंबर अलग रूम में था और वहां पे कोई भीड़ नहीं थी. कोई 5 मिनट में मेरा वोट गिर गया. मैंने किसको वोट दिया, ये तो नहीं बता सकती, दान किया है न … इसलिए जता नहीं सकती.

लेकिन बाकी घरवाले जो थे, उनके रूम में बहुत बड़ी बड़ी लाइन थी. मेरे घर के लोग, जहां लाइन में खड़े थे, वहां पे मैं आ गई और उनके साथ बाजू में खड़ी हो गयी. उस समय धूप बहुत थी और मैंने उस दिन टॉप लेगीस और बुरका पहन रखा था, मुझे पसीना आना शुरू हो गया था.

विकी आया और उसने कहा- शाजिया दीदी … आपका वोट हो गया हो, तो मैं आपको घर छोड़ आता हूँ … क्योंकि धूप बहुत है और अभी भैया, अंकल आंटी को टाइम लगेगा.

उसने जब मुझे सबके सामने दीदी कहा, तो मैं नकाब के अन्दर मुस्करा दी. पर नकाब की वजह से मेरा मुस्कुराना किसी को पता नहीं चला. उसके मुँह से दीदी सुनकर मुझे बहुत हंसी आ रही थी. उसके मुझे दीदी कहने से ससुराल के लोग थोड़े अपनेपन में आ गए.

मेरे ससुर विकी से बोले- ठीक है बेटा, तुम दीदी को छोड़ आओ, फिर हमें लेने आ जाना.
मेरी सास मुझसे बोलीं- नींबू पानी फ्रीज़ में बनाकर रखना, थोड़ी देर में हम भी आते हैं.
मैंने ‘हां..’ कहा और उनके पास से घर की चाबी ले ली.

विकी ने मेरे लिए कार का दरवाजा खोला और मेरे बैठने के बाद बंद किया. हम दोनों घर की तरफ निकल गए. मैं सामने की सीट पे बैठी थी.

उसने कहा- अब तो नकाब हटा दो, चेहरा तो दिखा दो.

मैंने स्माइल देते हुए नकाब हटा दिया और फिर हमारी बातें चालू हुईं. रास्ते में उसने मुझे पानीपूरी (गोलगप्पा) खिलाया. वो मेरी बहुत इज्जत कर रहा था.

घर पहुंचकर मैंने उसको चाबी दी और दरवाजा उसने ही खोला. वो बाहर ही खड़ा था. फिर मैं अन्दर गयी और उसको अन्दर आने का इशारा किया. दोपहर का समय था, इस वक्त ज्यादातर गली के लोग वोटिंग करने गए थे और जो रहे होंगे, वो धूप के वजह से अपने अपने घर में थे.

हमारे घर में पहले हॉल, फिर किचन, फिर मेरा बेडरूम है. बाजू में देवर का बेडरूम, फिर ऊपर छत पे जाने के लिए बाथरूम के पास से सीढ़ियां हैं. फिर ऊपर छत पे 2 रूम हैं, जो पहले किराये पे दिये थे, पर अभी खाली हैं. ऊपर के रूम के लिए किराएदार अच्छे मिलें, तो ही रखते हैं.

मैं सीधा किचन में गयी, जाते ही पानी की बोटल फ्रीज़ से निकली और पानी पीने लगी. विकी भी पीछे पीछे किचन में आया.

मैंने उसको पानी दिया, तो उसने बोटल हटा दी और मुझे अपनी बांहों में भरके किस करने लगा. दरवाजा खुला ही था, पर हम हॉल में नहीं किचन में थे.
एक मिनट किस करने के बाद मैंने उससे कहा- बस … अब कोई आ जाएगा, तुम जाओ.
विकी बोला- कुछ देर करने दो.

फिर उसने मेरे पीछे हाथ लगाया और बुरके के ऊपर से मेरी 36 नाप की गांड दबाने लगा. सामने से अपना लंड बिना बाहर निकाले, मेरे बुरके के ऊपर से ही मेरी चुत के पॉइंट पे रगड़ने लगा. मैं दरवाजे पर ध्यान दे रही थी. दरवाजे पे हल्का हरे रंग का पारदर्शी पर्दा था इसलिए बाहर का दिखाई देता था.

वो मेरी गांड दबाने में लगा था और मैं बाहर ध्यान रख रही थी.

फिर उसने बुरके को ऊपर किया और मेरी लेगीस थोड़ा नीचे सरका के अन्दर हाथ डाल दिया और मेरी मुलायम गांड को दबाने लगा. गर्मी की वजह से मैंने पेंटी नहीं पहनी थी.

मुझे उसका खुरदुरा हाथ मेरी गांड पर बहुत अच्छा लग रहा था. फिर एक मिनट के बाद पोजीशन बदल कर वो मेरे पीछे आया और मेरे 34 के बूब्स को बुरके के ऊपर से ही दबाने लगा. पीछे से मेरी गांड पे लंड रगड़ने लगा.

मैं बार बार बाहर की तरफ ध्यान दे रही थी और वो मुझे दबाने में मस्त था. उसको पता था कि मैं कितनी चालाक हूँ, बाहर ध्यान दे सकती हूँ, इसलिए वो मेरे जिस्म के उभार के मजे ले रहा था.

फिर बाहर कुछ हलचल दिखी, तो मैंने उसको बस बस कह दिया. वो भी साइड में हो गया और बाहर हॉल में चला गया. मैंने लेगीस ऊपर की और बुरका नीचे किया. उसको पानी की बोतल दी और दरवाजे का पर्दा बाजू में किया, जिससे बाहर वाले किसी को गलतफहमी न हो … क्योंकि अगर घर का दरवाजा खुला हो, तो गली के लोग शक नहीं करते.

उसने पानी पिया और प्यार से मेरी गांड पे चुमटी काट के कार लेके मेरे घर वालों को लाने चला गया.

विकी ने बहुत कम वक़्त साथ में गुजारा, पर दिल की धड़कन बहुत बढ़ गई थी. मुझमें बहुत हिम्मत आ चुकी थी. मैंने दरवाजा बंद किया. बेडरूम में जाके बुरका निकाल कर मैं पलंग पे लेट गयी और उसकी हरकतों को याद करके स्माइल करने लगी. फिर याद आया कि नींबू पानी बनाकर रखना है.

मंद मंद हंसती हुई मैंने वापस किचन में आकर नींबू पानी बनाया. कुछ देर के बाद घर वाले भी आ गए, उनके साथ में विकी भी था. घर वालों ने उसको नीम्बू पानी पीने के लिए रोक लिया और फिर घर में वोटिंग किसने किसको की, नींबू पानी पीते हुए इस पर चर्चा शुरू हुई.

विकी खामोश बैठा रहा, मेरे हाथ का नींबू पानी था, इसलिए वो बड़े प्यार से पी रहा था. पीने के बाद ‘नींबू पानी बहुत अच्छा था शाजिया दीदी..’ कहते हुए ग्लास मुझे दे दिया. इस बार मैंने भी उसको ‘शुक्रिया विकी भैया..’ ऐसा कह दिया, उसका चेहरा देखने लायक बन गया था.

कुछ दिन विकी के साथ ऐसे ही हैंगआउट पे चैटिंग करते करते गुजर गए … क्योंकि कोई मौका नहीं मिल रहा था. शरद के चॉकलेट और चिप्स के पैकेट छत से मिल रहे थे. शरद ने मेरी खूबसूरत जिस्म का जबर्दस्त इस्तेमाल किया था, इसलिए अब मैं दिमाग से उसके पैसे का इस्तेमाल कर रही थी.

एक दिन मौका मिला, रमज़ान शुरू होने वाले थे और हर साल की तरह मैं मायके जाने वाली थी. मैं हर साल जाती हूँ और फिर ईद करके ही वापस आती हूँ.
अब्बू भी काफी दिन से बुला रहे थे कि तुम आई नहीं.
मैंने शौहर से कहा कि मुझे जाना है.
वो बोले- ठीक है, तुम चली जाओ, पर मैं नहीं आ सकता. तुम मेरी अम्मी के साथ चली जाना.

मैंने ये बात विकी को बताई, तो उसके खुराफाती दिमाग में एक प्लान आया. वो प्लान सुनकर मैंने भी हां कह दिया. फिर हमने डिटेल्स में जाके स्टडी की और कैसे अंजाम देना है, इसका होमवर्क कर लिया.

अगले सुबह प्लान के मुताबिक जब विकी पानी लेने आया, तब बातों बातों में उसने मेरी सास से कहा कि वो एक काम से बाहर जा रहा है. उसने उसी शहर का नाम लिया, जहां मेरा मायका है. मेरे ससुर और शौहर घर में ही थे … उन्होंने भी सुन लिया.

मेरे ससुर ने पूछा- बेटा तुम कैसे जा रहे हो? साथ में इनको भी ले जाओ.

उनका मतलब मुझे और मेरी सास को ले जाने से था. क्योंकि शौहर और ससुर को काम था, इसलिए मेरे साथ मेरी सास आने वाली थीं. देवर तो घर में किसी की सुनता ही नहीं है, तो उसको बोलने का तो सवाल ही नहीं था.

विकी ने कहा- ठीक है मैं आंटी और दीदी के टिकेट भी बनवा लेता हूँ.
वो सोफ़े पे बैठ गया और पेटीएम से उसने मेरी और मेरे सास की दूसरे दिन रात की बस ट्रावेल्स की स्लीपर क्लास टिकट बना लीं.

वो जब टिकेट बना रहा था, तब मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था क्योंकि सब प्लान के हिसाब से हो रहा था.

मेरे शौहर ने टिकट देखे और फिर पैसे देने लगे, पर विकी ने लेने से मना किया. फिर भी जबर्दस्ती से मेरे शौहर ने दे दिए, तो फिर उसने वो पैसे मेरी सास को दे दिए और कहा कि बेटा कभी माँ से पैसे नहीं लेता.
मेरी सास फुल फॉर्म में आ गईं और खुश हो गईं.
उसकी इसी प्यारी प्यारी चिकनी बातों से उसने मेरे घरवालों का दिल और भरोसा जीत लिया.

अब मुझे विकी का लंड लेने की जल्दी पड़ी हुई थी. उस रात चैटिंग पे उसने मुझे कुछ ख़ास निर्देश दिए और मैंने भी उसको बताया कि कैसे सब हैंडल करना हैं. हम दोनों का दिमाग बहुत चलता है क्योंकि हम बात बहुत कम करते हैं, बस इशारे में ही समझ जाते हैं.

हम लोगों की रात के 10 बजे स्लीपर कोच की बस की बुकिंग हुई थी. खाना खाने के बाद शाम को 8.30 बजे मैं नहाने गयी, नहाकर मैं तौलिये में बाहर आई.
मैंने उसको ईमेल से पूछा था कि क्या पहनना है. उसने जो बताया फिर वो मैंने अलमारी से निकाला.

सबसे पहले मैंने तौलिया हटाया, अपने नंगे बदन पर परफ्यूम लगाया और गुलाबी रंग की ब्रा और पेंटी पहनी, फिर गुलाबी रंग का पेटीकोट और ब्लाउज़, फिर मैंने गुलाबी रंग की साड़ी पहनी. सब गुलाबी रंग की चॉइस थी उसकी.

फिर मैंने ऊपर काला बुर्का पहना और बाहर हॉल में आ गई.

मेरे शौहर मुझे और मेरी सास को छोड़ने साथ में आए. विकी पहले से ही ट्रावेल्स पॉइंट पे था. उसने सफ़ेद रंग का टीशर्ट और नीली शॉर्ट पहनी थी.

वो मुझे दीदी दीदी … और इनको भैया भैया कहके बात करने लगा. दस मिनट में बस आ गयी. हम सब बस के अन्दर गए.

मेरी सीट साइड लोअर सिंगल बर्थ थी अकेली की, उसके ठीक ऊपर मेरी सास की साइड अपर सिंगल बर्थ थी. मेरे सामने जो डबल बेड लोअर थी, उसमें विकी और कोई और पैसेंजर था.

मैंने शौहर को विदा किया और फिर सास ऊपर के बर्थ पे जाके लेट गईं. बस एसी स्लीपर थी. मैंने बैग रखा और अपना बुर्का निकाल दिया. बुर्का निकालते ही विकी ने मुझे देखा और वो खुश हो गया क्योंकि मैं उसके चॉइस के कपड़े पहन के आई थी.

मैं बैग रखने के लिए झुकी, तो पीछे से वो मेरी गांड देख रहा था. मैंने काफी टाइट साड़ी पहनी थी. फिर मैं अपने साइड लोअर बर्थ पे लेट गयी. मैंने पर्दा बंद किया, सिर्फ चेहरा दिखे, इतने खुला रखा. विकी भी पड़ोस में चेहरा दिखे, इतना ही खुला रखके लेट गया.

वो सामने की तरफ था और उसके पीछे कोई और पैसेंजर था. बस निकाल चुकी थी. हम एक दूसरे को सिर्फ देख के स्माइल कर रहे थे. थोड़ी देर चलने के बाद लाइट ऑफ हो गईं और मैं सो गई. कुछ देर आराम से सोने के बाद करीब करीब एक बजे बस की लाइट ऑन हो गई.

कंडक्टर आवाज देते हुए कहा कि जिसको बाथरूम जाना है या नाश्ता करना है, कर लो … फिर बस नॉन स्टॉप जाएगी.

मैंने मेरी सास को आवाज़ देकर उठाया, पर वो गहरी नींद में थीं, इसलिए नहीं जगीं. सिर्फ हम दोनों ही बाहर निकले, बाहर हमें कोई नहीं जानता था, इसलिए जब उसने मेरी कमर पे हाथ रखा, तो मुझे कोई एतराज नहीं हुआ.

हम साथ में ऐसे चल रहे थे, जैसे पति पत्नी हों. पहली बार मैं बिना बुर्के के पब्लिक प्लेस में थी. कुछ लोग मुझे देख रहे थे, उनकी नजरें मेरे जिस्म के उभार पे पड़ रही थीं, मुझे ये अहसास बहुत अच्छा लगा.

फिर मैं बाथरूम में जाके फ्रेश हो गयी और हमने चाय पी. चाय पीते पीते उसने कहा कि मैंने अपने साथ वाले पैसेंजर से बात कर ली है और वो तुम्हारी सीट पे शिफ्ट हो जाएगा.

मैं भी खुश हो गयी कि चलो मौका मिल गया.

फिर वापस जब आई, तो वो पैसेंजर मेरी सीट पे लेटा था. मैंने वापस एक बार सास को चैक किया, वो गहरी नींद में थीं. फिर हम दोनों डबल बेड वाली बर्थ के अन्दर गए और पर्दे लगा दिये.

बस चालू होते ही लाइट ऑफ हो गईं. फिर मैंने उसे अपनी बांहों में ले लिया. जिस्म से जिस्म मिले. हम दोनों लेट गए और एक दूसरे के अंग पे इधर से उधर होने लगे. वो मेरे ब्लाउज़ के ऊपर से मेरे दोनों 34 के बूब्स दबाने लगा. फिर साड़ी के ऊपर से मेरी 36 की गांड दबाने लगा. मुझे नशा सा चढ़ने लगा और उसे भी.

फिर मैं नीचे लेटी और विकी मेरे ऊपर आ गया. मेरी साड़ी, पेटीकोट को उसने ऊपर किया और पेंटी को नीचे किया, मेरी चुत में उंगली डाली और मजे से अन्दर बाहर करने लगा. मैंने भी उसकी टी-शर्ट निकाल दी.

उसने मेरी चुत से उंगली निकाली और अपना मुँह मेरी चुत पर रख दिया. वो मेरी चूत सूंघने चाटने लगा.

ओहह ओहह ऊहह मुझे बहुत मजा आ रहा था, आज तक ऐसा किसी ने नहीं किया था. मैंने तुरंत मेरे मुँह पे हाथ रख दिया ताकि ज़ोर की सिसकारियों की आवाज़ ना आए. मैंने एक हाथ से अपना मुँह दबाया और दूसरे हाथ से उसके सर पे प्यार से बालों को सहलाने लगी.

आज तक सिर्फ पॉर्न मूवी में देखा था, पर अब उस पल को महसूस कर रही थी. मेरी दोनों मुलायम गोरी जाँघ को उसने चूसा चाटा और धीरे धीरे काटा. साइड में आके उसने मेरी गांड को सूंघा और किस की बारिश कर दी. फिर वो सीधा हो गया और उसने खुद का शॉर्ट नीचे किया और लंड बाहर निकाला.

मैंने तुरंत उसका बड़ा सा लंड मेरे हाथ में ले लिया और सहलाने लगी. मैं नीचे से लंड को सहला रही थी. तभी ऊपर से उसने मेरे ब्लाउज़ के हुक खोल दिए और ब्रा भी खोल दी. वो मेरे दोनों बूब्स चूसने लगा … मुझे मजा आने लगा. मैं नीचे से उसका लंड सहला रही थी.

फिर उसने पोजीशन बदली और अपना लंड मेरे मुँह के पास लाया. मैं काम के नशे में चूर थी, उसने कब मेरे मुँह के अन्दर लंड डाला और कब मैं लंड चूसने लगी, कुछ पता ही नहीं चला क्योंकि ये काफी जल्दी हुआ.

उसने मेरी चुत और गांड चाटी थी इसलिए उसका लंड चूसने में मुझे कोई गंदी बात नहीं लगी. कुछ भी गलत महसूस नहीं हुआ, बल्कि ऐसा करके मुझे उसे खुश करने का दिल किया. उसकी खुशी मेरे लिए अहम थी, क्योंकि उसने मुझे वो खुशी दी थी, जो आज तक मेरे शौहर ने नहीं दी थी.

मैं बहुत मजे से आइसक्रीम की तरह लंड चूस रही थी और वो मेरे सर के ऊपर से प्यार से हाथ फेर रहा था.

फिर कुछ देर ऐसा करने के बाद उसने बाहर निकाला और मेरी टांगें खोल दीं. मेरी साड़ी खोली नहीं थी, बस कमर के ऊपर की हुई थी और ब्लाउज़ खुला हुआ था. वो मेरी चुत पे लंड को सैट कर रहा था.
मैंने उसको रोका और कहा- एक मिनट रुको.

वो साइड में हुआ, फिर मैंने अपने हाथ से मेरे पैर में जो पायल थी, वो निकाल के उसके शॉर्ट के पॉकेट में रख दी. पायल इसलिए निकाली, क्योंकि लंड चूत की धकापेल में पायल बजने की आवाज़ ना आए.

उसने मेरी तरफ देखा और स्माइल देते हुए थम्सअप किया. मैंने स्माइल दी और टांगें खोल दीं. मैंने अपने हाथ से उसका लंड पकड़ा और बिना कंडोम ही अन्दर ले लिया. उसने भी बहुत धीरे धीरे से अन्दर डाला, जिससे कि आवाज़ ना हो.

लंड चुत के अन्दर आने के बाद 30 सेकंड हम दोनों रुके, फिर उसने धीरे धीरे धक्के देना शुरू किए. मेरी चुत बहुत गीली हो चुकी थी, इसलिए बड़ा लंड भी बड़े आराम से मेरी चुत को चोद रहा था.

मैं गुलाबी रंग की साड़ी ऊपर उठा के ब्लाउज़ खोलके चुद रही थी. वो मेरे बूब्स को बारी बारी चूस रहा था. मैं उसके सर को अपने हाथ में लेके उसके बालों को सहला रही थी.

कुछ देर बाद मैंने दोनों हाथ उसकी गांड पे रख दिए और उसके धक्के में मदद करने लगी. नीचे से मैं भी मेरी गांड धीरे धीरे उठा उठा कर चुदवा रही थी. चलती बस में लेटे लेटे बिना आवाज़ किए ये सब हो रहा था. अंधेरा था पर हम एक दूसरे को देख सकते थे, इतनी रोशनी थी.

थोड़ी देर ऐसा करने के बाद वो नीचे लेट गया और मैं ऊपर आ गयी. ज़िंदगी में पहली बार मैं किसी मर्द के ऊपर थी, शौहर ने मुझे कभी ऊपर नहीं आने दिया. शर्म की वजह से मैंने भी कभी नहीं कहा, पर विकी ने मुझे वो मौका दिया. मैंने शर्म का दामन छोड़ दिया. मैंने अपने हाथों से उसका लंड अपनी चुत पे सैट किया और धीरे धीरे अपने मजे की स्पीड से चुदवाने लगी. सही तरीके से पूरे इमोशन से चुदने की वजह से चुत बार बार गीली हो रही थी.

बस स्पीड से दौड़ रही थी और हम धीरे धीरे उसी स्पीड का फाइदा उठा के एक दूसरे के अरमान पूरे कर रहे थे.

फिर थोड़ी देर में वो फिर से ऊपर आ गया और अपने हिसाब से थोड़ी स्पीड बढ़ा दी. उसका लंड मेरी चुत की अन्दर की दीवार पे बहुत रगड़ रहा था और मीठे दर्द के साथ खुशी ही खुशी मिल रही थी. लंड लंबा और मोटा होने की वजह से काफी अन्दर तक जा रहा था.

वो बहुत मजे लेके मेरी चुत को चोद रहा था. उसने अपना मुँह मेरे कान के पास लाया और मेरी चुत की तारीफ में कुछ कहने लगा और कुछ ऐसी बातें कहीं, जो मैं यहां नहीं लिख सकती. मैं चुदाई के नशे में चूर थी, मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया.

उसने चोदते समय बहुत ही गंदी गंदी बातें बोलीं, वो भी ठीक मेरे कान में कहीं. उस वक़्त मुझे भी चुदाई का नशा था इसलिए सुनके मजा ही आया.

अचानक उसके धक्कों की बहुत स्पीड बढ़ गई थी. मैंने एक हाथ से वापस अपना मुँह दबा दिया क्योंकि आवाज़ न निकले. वो जोरदार झटके के साथ वो झड़ गया, उसने मेरे अन्दर ही अपना सारा वीर्य छोड़ दिया.

ये मेरे सुरक्षित दिन थे इसलिए पेट से रहने का डर नहीं था. मैंने इसी लिए उसका पानी अन्दर ले लिया.

कुछ देर उसका लंड अन्दर ही रहा, फिर उसने लंड बाहर निकाल के मुझे अपनी बांहों में दबा लिया और वो सो गया. लेकिन मैं जाग रही थी, उस हर लम्हे को महसूस कर रही थी, उसको सहला रही थी. उसकी छाती पे किस कर रही थी.

करीब दस मिनट ऐसे ही रहने के बाद मैंने चुत को साफ किया, वहां एक कम्बल रखा हुआ था, उसी से चूत की साफ़ सफाई की.

मैंने उसको जगाया, फिर उसने मेरा बैग मेरे पुराने वाले बर्थ से बाजू से लिया. मैंने साड़ी खोल दी अन्दर और पूरी नंगी होके एक टॉप और लेगीस पहन ली.

उसने और मैंने भी थोड़ा सा पानी पिया.

फिर करीब आके सो गए. मैंने सुबह के 5 बजे का अलार्म लगाया था. सुबह 5 बजे उठने के बाद मैंने उसके नंगे बदन को खूब सहलाया और उसके लंड और टट्टों से खेलने लगी. पहली बार मैं अपने हिसाब से इतने देर तक लंड से खेल रही थी. मेरे हाथ को उसके पूरे लंड का शेप याद हो गया था.

वो जागा और फिर मेरी लेगीस नीचे सरका के साइड से एक राउंड हुआ.

इस बार 30 मिनट तक ये राउंड चला. फिर उसने बाहर ही पानी छोड़ा, जैसा मैंने उसको कहा क्योंकि पेंटी नहीं पहनी थी और पानी से मेरी लेगीस खराब हो जाती.

फिर 6 बजने आए थे, मैं उसके बेड से बाहर निकली और उस पैसेंजर को फिर से जगा कर उठाया. मैं अपनी बर्थ पे लेट गई. उस पैसेंजर का नाम तो मुझे पता नहीं, पर उस भाई को मेरा शुक्रिया करने का बहुत मन था, पर नहीं कर पायी, अपना लिहाज रखा.

सुबह 7 बजे थे, मैंने फिर से बुर्का पहन लिया. मैंने अपने पर्स से दो हजार का नोट निकाला और विकी को दे दिया. उसने टिकेट्स के पैसे नहीं लिए थे इसलिए मैंने उसको दिये. वो नहीं ले रहा था, पर मैंने अपने जान की कसम देकर उसको दे दिये.

उसने एक साड़ी का पैकेट मुझे दिया और कहा कि मायके में कोई परेशानी तो नहीं होगी ना?

मैंने कह दिया कि कोई परेशानी नहीं, मायके में मैं मेरी ज़िंदगी अपने हिसाब से जी सकती हूँ, शादी के बाद थोड़ी आज़ादी हो गयी है मायके में. हालांकि शादी के पहले मायके में भी बंदिशें थीं.

उसने कहा- शरद ने भी तुम्हारे लिए कुछ दिया है.

उसने एक साड़ी दी, मैंने भी खुश होते हुए साड़ी ले ली और ‘थैंक्स कहना शरद को …’ ऐसा कहा.

फिर मैंने मेरी सास को उठाया, वो अब भी सोयी हुई थीं. थोड़ी देर में वो उठीं और तब तक हमारा शहर भी आ गया.

बस से उतरने के बाद विकी ने हमको अलविदा किया. वो वापस कौन सी बस से लौट गया, पता नहीं. पर उसने और मैंने आज तक ऐसा सफर कभी नहीं किया था.

थोड़ी देर में मेरे चाचू हमें लेने आ गए. घर जाकर मैं जी भरकर मादक सेक्स वाली सिसकारियां देते हुए नहाई और अपनी यादें ताजा कीं.

तभी मुझे याद आया कि मेरी पायल तो उसके शॉर्ट के पॉकेट में ही रह गयी. ससुराल जाने पे उससे ले लूँगी.

मेरे मायके में यहां जाइंट फैमिली है इसलिए बड़े से घर में बहुत सारे रिश्तेदार साथ में रहते हैं. वैसे भी जब से शादी हुई है, तबसे मेरी ज्यादा कोई रखवाली नहीं करता. मैं कहां जाती हूँ, बाहर से कब आती हूँ, कोई ध्यान नहीं देता. पर हां सब मुझे खुश रखने की कोशिश करते हैं. सब मुझे बहुत लाड़ करते हैं. मैं मेरे अब्बू अम्मी की इकलौती बेटी हूँ ना.

उस घर में मेरी शादी करवा कर आज वो भी पछता रहे हैं, पर मैं उन्हें खुश हूँ, ऐसे दिखा देती हूँ.

वैसे आजकल मैं खुश तो हूँ ही … हाहाहाहा

आज सुबह के 6 बजे हैं. मैंने नहाकर आज शरद की दी हुई साड़ी पहनी और मेरे मिनी लैपटाप पे ये कहानी लिख दी.

आगे अगर कुछ होता है विकी, शरद या किसी और के साथ, तो लिखूँगी वरना ये मेरी आखिरी कहानी होगी.
विदा दोस्तो
जिम में मिटाई जिस्म की वासना (Jim Me Mitayi Jism Ki Vaasna) जिम में मिटाई जिस्म की वासना (Jim Me Mitayi Jism Ki Vaasna) Reviewed by Priyanka Sharma on 11:14 AM Rating: 5

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