गोरी चूत की गर्मी (Gori Choot Ki Garmi)

गोरी चूत की गर्मी
(Gori Choot Ki Garmi)

सुधा से मैंने कहा कि मुझे आने में देर हो जाएगी सुधा मुझसे पूछने लगी आपको आने में भला देर क्यों होगी तो मैंने सुधा को बताया कि आज पटेल साहब रिटायर हो रहे हैं और उनके रिटायरमेंट के बाद मुझे ही अपने दफ्तर का सीनियर बनाया जा रहा है उनके जगह अब मैं ही कार्यभार संभालूंगा आज उनका विदाई समारोह है इसलिए मुझे आने में देर हो जाएगी। सुधा मेरी तरफ देखते हुए कहने लगी शादी के इतने वर्ष पता नहीं कैसे निकल गए कुछ पता ही नहीं चला कि कब हमारी शादी को 30 वर्ष होने आए हैं। 

सुधा भावुक हो गई थी सुधा मेरी तरफ देखते हुए कहने लगी आपके बाल भी अब सफेद होने लगे हैं, मैंने सुधा से कहा समय से बड़ा बलवान कोई नहीं होता और समय ने बड़ी तेजी से करवट ली है। रोहित की परवरिश में हमने कोई कमी नहीं रखी और उसे हमने विदेश से एमबीए करवाया और अब हम लोग उसके लिए सुशील और सुंदर बहू की तलाश में हैं।

मैंने सुधा से कहा अभी मैं चलता हूं सुधा अब भी हर रोज की तरह टिफिन बांध कर दिया करती थी इतने वर्ष हो जाने के बाद भी सुधा ने आज तक मेरी बहुत देखभाल की है। मैं अपनी कार से दफ्तर पहुंचा तो पटेल साहब भी तब तक पहुंच चुके थे और हमारे दफ्तर के अन्य लोग भी आ चुके थे पटेल साहब की विदाई को लेकर सब लोग दुखी थे। 

पटेल साहब ने अपने 3 वर्ष के कार्यकाल में किसी के साथ भी कभी ऊंची आवाज में बात नहीं की और वह सब को एक समान देखा करते। पटेल साहब ने हमेशा से ही मुझे बहुत ही इज्जत दी है इसलिए मुझे उनके जाने का थोड़ा दुख तो हो रहा था लेकिन मुझे इस बात की खुशी हुई कि अब उनकी जगह मैं उनके पद को संभालने वाला हूं। पटेल साहब ने मुझे अपने केबिन में बुलाया और कहने लगे विभूति जी आज के बाद आप ही यहां पर मेरी जगह बैठेंगे मैं आपसे उम्मीद करता हूं कि आप भी मेरी तरह ही बड़े अच्छे से काम करें। 

मैंने पटेल साहब से कहा साहब आप मेरे सीनियर हैं और आपकी बात को मैं जरूर अमल में लाऊंगा और अपना 100% देने की कोशिश करूंगा। सब कुछ ऐसा लग रहा था जैसे कल की ही बात हो जब पटेल साहब पहले दिन ऑफिस में आए थे तो उनका व्यक्तित्व ही कुछ ऐसा था कि सब लोग उनकी तरफ खिंचे चले गए और उनकी बातों से सब लोग बहुत प्रभावित रहते थे।

मुझे भी पटेल साहब बहुत अच्छे लगते हैं ऑफिस में अब सारी तैयारियां हो चुकी थी और पटेल साहब की विदाई समारोह में सब लोगों ने फूल मालाओं से पूरी की। पटेल साहब बहुत ज्यादा गदगद थे क्योंकि उन्होंने कभी उम्मीद नहीं की थी कि उनके जाने पर कुछ लोगों की आंखों में आंसू तक आ जाएंगे पटेल साहब भी अपने आप को रोक न सके। मैंने पटेल साहब को कहा साहब अब मैं आपसे क्या मांगू आप अपने अनुभव को हम लोगों से साझा कीजिए। पटेल साहब ने भी अपने अनुभवों को हमारे पूरे स्टाफ के सामने साझा किया और सब लोग बहुत ही खुश थे पटेल साहब को सब ने उनकी कार में बैठाया और उसके बाद वह अपने घर चले गए। 

मेरे ऊपर ही अब दफ्तर की सारी जिम्मेदारी थी मैंने पटेल साहब से फोन पर भी उसके बाद बात की थी और उस शाम जब मैं घर लौटा तो रोहित और सुधा साथ में बैठ कर बात कर रहे थे। मैंने सुधा से कहा क्या बात है आज दोनों मां-बेटे साथ में बैठ कर बात कर रहे हैं रोहित कहने लगा पापा समय ही कहां मिल पाता है जो आप लोगों के साथ बात करूं लेकिन आज मेरे पास समय था तो सोचा मां कुछ बात कर लूँ। मैंने रोहित से कहा बेटा तुमने यह तो बहुत अच्छा किया कि जो अपनी मां के साथ तुम कुछ समय बिता रहे हो। 

सुधा पूछने लगी कि पटेल साहब का विदाई समारोह कैसा रहा तो मैंने सुधा से कहा उनका विदाई समारोह तो बड़ा शानदार रहा वह बहुत ज्यादा खुश थे और उनकी आंखों में ऑफिस से जाने का थोड़ा दुख था। सुधा कहने लगी मैं आपके लिए कॉफी बना लाती हूं मैंने सुधा से कहा ठीक है मेरे लिए तुम कॉफी बना लाओ। सुधा रसोई में चली गई मैं और रोहित सोफे पर बैठ कर एक दूसरे से बात कर रहे थे। मैंने रोहित से कहा बेटा अब तुम्हारी अच्छी नौकरी तो लग ही चुकी है और हम तुम्हारे लिए लड़की भी देख रहे हैं रोहित कहने लगा पापा अभी कहां मेरी उम्र हुई है।

रोहित ना जाने क्यों अपनी शादी से बचने की कोशिश कर रहा था मैंने उसकी आंखों में पढ़ लिया था की कोई तो बात है मैं चाहता था कि रोहित हमें वह सब बता दे लेकिन रोहित ने मुझसे बचने की कोशिश की और कुछ भी नहीं कहा। तब तक सुधा भी रसोई से कॉफी बना कर ले आई थी उसने मुझे और रोहित को कॉफी दी हम दोनों कॉफी पी रहे थे और आपस में बात कर रहे थे तभी हमारे किराए पर रहने वाले लड़की माधुरी आ गई। माधुरी भी एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करती है और वह एक अच्छी लड़की हैं माधुरी कहने लगी सुधा आंटी आज तो पूरा परिवार साथ में बैठा हुआ है। 

माधुरी के इस मजाकिया अंदाज को मैंने कहा माधुरी सब लोग साथ में बैठे हुए हैं तो तुम भी हमारे साथ आकर बैठ जाओ, माधुरी भी हमारे साथ आ कर बैठ गई। मैंने सुधा से कहा तुम माधुरी के लिए भी कॉफी बना लाओ तो सुधा काफी बनाने के लिए चली गई। हम लोग आपस में बात कर ही रहे थे की रोहित कहने लगा पापा मुझे कुछ काम है मैं अभी रूम में चलता हूं रोहित अपने कमरे में चला गया और मैं माधुरी से पूछने लगा की बेटा तुम्हारा ऑफिस कैसा चल रहा है। वह कहने लगी बस अंकल सब कुछ बहुत अच्छा चल रहा है तब तक सुधा भी कॉफी बना कर ले आई थी और माधुरी कॉफी पी रही थी माधुरी करीब आधे घंटे तक मेरे और सुधा के साथ बैठी रही उसके बाद वह चली गई।

कुछ दिनों बाद जब मुझे रोहित के बारे में पता चला कि वह किसी लड़की से प्यार करता है तो मुझे इस बात का थोड़ा बुरा लगा लेकिन मैंने फिर भी अपने दिल पर पत्थर रखते हुए रोहित से कहा तुम जिस लड़की से प्यार करते हो हमें भी उससे मिला दो, रोहित कहने लगा हां पापा मैं आपको उससे मिला दूंगा। रोहित ने हमें पूनम से मिलवाया पूनम में मुझे ऐसी कोई कमी नहीं लगी पहली नजर में तो वह मुझे ठीक ही लगी से देखने में भी उसका रंग गोरा था वह बहुत सुंदर थी और वह एक अच्छे परिवार से भी थी। 

मैंने रोहित की शादी की बात पूनम के परिवार से की तो वह लोग भी तैयार हो गए जल्द ही मैंने उन दोनों की शादी करवाने का फैसला कर लिया था। कुछ ही समय बाद पूनम और रोहित की शादी हो चुकी थी सब कुछ बहुत ही अच्छे से चल रहा था कुछ महीनों तक तो घर में बड़ा ही खुशी का माहौल रहा। हमारे घर में पूनम के आने से कुछ अच्छा माहौल तो बन ही चुका था लेकिन जब पूनम ने सुधा के साथ झगड़ा किया तो मुझे बहुत बुरा लगा। मैंने रोहित को समझाया और कहा देखो पूनम को तुम्हारी मां के साथ ऐसा नहीं करना चाहिए था। रोहित के पास भी कोई जवाब नहीं था उसने सिर्फ मुझे इतना कहा कि पापा मैं पूनम से बात कर लूंगा। 

पूनम और सुधा के बीच ना जाने क्यों आपस में झगड़ा होता रहता था मैं काफी ज्यादा परेशान हो गया था मैंने बहुत कोशिश की और रोहित ने भी पूनम को बहुत समझाया लेकिन ना जाने किस बात को लेकर दोनों के बीच में झगड़ा होता रहता था। एक दिन वह घड़ी आई जब मैं और सुधा घर में अकेले हो चुके हैं रोहित घर छोड़कर चला गया। रोहित मेरा इकलौता बेटा था इसलिए मुझे बहुत ज्यादा दुख हुआ और सुधा का तो रो-रो कर बुरा हाल था माधुरी ने हमें कुछ सहारा तो दिया लेकिन मुझे कई बार लगता रोहित ने हमारी परवरिश का यही नतीजा दिया।

रोहित हमें फोन तक नहीं किया करता था लेकिन माधुरी ने हम लोगों को बहुत ज्यादा सपोर्ट किया और हम लोग धीरे-धीरे अपने जीवन में पहले की तरह छोटी-छोटी खुशियों से खुश होने की कोशिश किया करते। माधुरी का हमारे साथ कुछ ज्यादा ही उठना बैठना हो चुका था वह हमारे साथ ही खाना खाया करती थी। मैं एक दिन माधुरी के कमरे में चला गया जब मैं उसके कमरे में गया तो मैंने दिखा वह लेटी हुई थी वहां जिस प्रकार से लेटी हुई थी उससे मेरी नियत डोलने लगी। मैंने अपने आपको बहुत रोकने की कोशिश की लेकिन फिर भी मै अपने आपको रोका नहीं पाया आखिरकार मैंने भी माधुरी की जांघ पर हाथ फेरना शुरू कर दिया। उसकी कोमल टांगे बड़े ही मुलायम थी ऐसा प्रतीत होता था जैसे उसने कुछ दिन पहले ही अपनी टांगों पर वैक्स किया हो।

उसकी टांगों में एक भी बाल नहीं था माधुरी को भी शायद यह सब अच्छा लग रहा था आखिरकार वह भी 25 वर्ष की जवान और कमसिन लड़की थी वह भी अपने आपको ना रोक सकी। उसने मुझे अपनी बाहों में ले लिया मैंने भी उसके कोमल और गुलाबी होठों को चूसना शुरू किया धीरे धीरे मेरा हाथ उसके स्तनों की तरफ बढ़ा और मैंने जब उसके सुडौल स्तनों का रसपान किया तो वह बहुत मचलने लगी थी। उसने अपने पैरों से मुझे जकड़ना शुरू कर दिया था मैं समझ चुका था कि उसकी योनि से पानी निकल आया है। 
गोरी चूत की गर्मी (Gori Choot Ki Garmi)
गोरी चूत की गर्मी (Gori Choot Ki Garmi)
मैंने जब अपने लंड को उसकी योनि पर सटाया तो उसकी योनि से पानी टपक रहा था। मैंने एक ही झटके में अपने लंड को माधुरी की योनि के अंदर प्रवेश करवा दिया उसकी टाइट चूत में जैसे ही मेरा लंड प्रवेश हुआ तो मैं पूरी तरीके से मचलने लगा। मैं उसे बड़ी तेज गति से धक्के दिए जा रहा था मेरे धक्के अब इतनी तेज हो रहे थे कि वह भी उत्तेजना में आ गई। उसने अपनी योनि को बहुत ज्यादा टाइट कर लिया मैं उसे लगातार तेज धक्के दे रहा था और उसके दोनों पैरों को मैंने चौड़ा कर लिया था। उसके दोनों पैरों को चौड़ा कर के मुझे उसे धक्के मारने मे मजा आता। मेरा लंड उसकी चूत की दीवार से टकरा रहा था उसकी चूत बहुत ज्यादा टाइट थी। मैं ज्यादा देर तक उसकी चूत की गर्मी को ना झेल सका जैसे ही मेरे वीर्य की बूंदो को मैंने माधुरी के स्तनों पर गिराया तो उसने मुझे कहा आज तो आपने मुझे अपना बना लिया।
गोरी चूत की गर्मी (Gori Choot Ki Garmi) गोरी चूत की गर्मी (Gori Choot Ki Garmi) Reviewed by Priyanka Sharma on 11:05 AM Rating: 5

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