गरिमा की गरम चूत की चुदाई (Garima Ki Garam Choot Ki Chudai)

गरिमा की गरम चूत की चुदाई
(Garima Ki Garam Choot Ki Chudai)

मैं छोटे से शहर की रहने वाली एक सामान्य से परिवार से ताल्लुक रखती हूं हम लोग मथुरा में ही रहा करते थे मेरे पिताजी मथुरा में एक दुकान चलाते थे लेकिन पिताजी को काफी नुकसान झेलना पड़ा इसलिए हमारे घर की स्थिति कुछ ठीक नहीं थी। पिताजी ने अपने जीवन में कभी हार नहीं मानी और अपने जीवन में आगे बढ़ते चले गए धीरे धीरे सब कुछ ठीक होने लगा परंतु मेरी मां ने मुझे कहा कि बेटा जीवन में चाहे कितनी भी तकलीफ हो लेकिन कभी भी हार मत मानना। 

उनकी यह बात हमेशा से ही मेरे दिमाग में थी मैं उनकी बात का हमेशा अनुसरण किया करती हूँ। एक दिन जब मेरे लिए दिल्ली से एक रिश्ता आया तो मेरे माता-पिता बहुत खुश हुए वह कहने लगे बेटा क्या तुम्हें यह रिश्ता मंजूर है।

मैं भला अपने माता पिता के सामने क्या कहती मैंने भी रिश्ते के लिए हामी भर दी क्योंकि सूरज एक अच्छे पद पर थे मुझे भी लगा कि मेरा जीवन सुधर जाएगा इसलिए मैंने सूरज के साथ शादी करने के लिए हामी भर दी। जब पहली बार सूरज का परिवार मुझे देखने के लिए आया तो उन्हें मैं इतनी पसंद आई की उन्होंने उसी वक्त कहा कि बस इस महीने की 31 तारीख को हम लोग सगाई करवा देंगे। कुछ ही समय बाद सूरज और मेरी सगाई हो चुकी थी सब कुछ बड़े ही अच्छे से चल रहा था पिताजी और मेरी मां बहुत खुश थे हमारे सारे रिश्तेदार हमें बधाइयां दे रहे थे। 

फोन पर तो जैसे बधाई का सिलसिला ही खत्म नहीं हो रहा था और कुछ ही समय बाद सूरज के पिताजी हमारे घर पर आये और कहने लगे दो चार महीने बाद बच्चों की शादी करवा देते हैं। मेरे पिताजी को शादी की जल्दी नहीं थी लेकिन दो चार महीने बाद ही उन्होंने शादी का सारा रेंजमेंट करवा दिया था और हमारी शादी बड़ी ही धूमधाम से हुई। शादी में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं रखी मेरी मां और मेरे पिताजी मेरी विदाई पर बहुत रोये उनकी आंखों में मेरे जाने का दुख था।

मैं अपने जीवन की नई शुरुआत करने जा रही थी और मुझे इस बात की खुशी थी कि मेरा जीवन अब पूरी तरीके से बदलने वाला है मेरे ऊपर घर की जिम्मेदारी आने वाली हैं और मैं अपनी जिम्मेदारियों को अच्छे से निभा पाऊंगी भी या नहीं इसका मुझे हमेशा डर लगा रहता था। 

मैं जब भी अपनी मां से फोन पर बात करती तो वह मुझे हिम्मत देती और कहती कि बेटा सब कुछ हो जाएगा और सब कुछ बड़े ही अच्छे तरीके से चल रहा था सूरज भी मुझसे बहुत खुश रह थे। मुझे सबके साथ समय बिताना बहुत अच्छा लगता सब कुछ इतना अच्छे से चल रहा था सूरज का प्यार भी मुझे मिल रहा था और शादी को कभी एक वर्ष हो गया कुछ पता ही नहीं चला। एक वर्ष होने के बाद मेरे जीवन में पूरी तरीके से बदलाव आने वाला था सूरज मुझे छोड़कर ना जाने कहां चले गए सूरज का कुछ अता पता ही नहीं चल रहा था हम लोगों ने लाख कोशिश की लेकिन सूरज का कहीं कोई पता नहीं चला। 

सूरज के परिवार वाले भी बहुत दुखी हो चुके थे और मेरा तो जैसे रो रो कर बुरा हाल हो चुका था क्योंकि सूरज कहीं नहीं मिल रहे थे पुलिस ने भी बहुत कोशिश की लेकिन सूरज का कोई पता नहीं चल पाया। इस बात को करीब 7 8 महीने हो चुके थे मेरा जीवन तो जैसे पूरी तरीके से बर्बाद हो चुका था और मैं सिर्फ अपने जीवन को जीने के लिए मजबूर थी। 

मेरी मां ने मुझे कहा कि बेटा तुम दूसरी शादी कर लो लेकिन मैंने मां से कहा ऐसे कैसे मैं दूसरी शादी कर लूँ सब लोग इसी दुविधा में थे की सूरज कहां चला गया है। सूरज का कुछ पता नहीं चल रहा था मुझे अब भी उम्मीद थी कि सूरज एक दिन जरूर लौटकर आएगा लेकिन मैं सिर्फ उम्मीद पर ही टिकी हुई थी और अपने जीवन में आगे बढ़ने की कोशिश करने लगी।

 मैंने एक नौकरी ज्वाइन कर ली थी लेकिन दिल्ली की रोड पर सरपट चलता हुआ ट्रैफिक जैसे मुझे चिड़ाने की कोशिश किया करता था क्योंकि मैं हमेशा ही ऑफिस से जल्दी घर लौट आती थी मेरी ऑफिस की शिफ्ट सुबह 7:00 बजे से लेकर 4:00 बजे तक की होती थी। 4:00 बजे बहुत गर्मी होती थी और मैं बस का इंतजार कर रही होती हर रोज मैं उसी बस स्टॉप पर बैठकर वहां से आती-जाती गाड़ियों को देखा करती थी गाड़ियों की और उनके शोर से मेरे सर में दर्द हो जाया करता था लेकिन गाड़ियां जैसे टस से मस होने का नाम नहीं लेती थी काफी देर हो जाती थी तब जाकर बस आती थी।

जब बस आती तो मैं बस में बैठते ही सबसे पहले अपने पानी की बोतल से दो-चार घूंट पानी पी लिया करती थी मेरा हर रोज का बस यही रूटीन बना हुआ था। मैं सुबह जल्दी घर से निकल जाती और शाम को जल्दी घर लौट आती थी लेकिन सूरज की याद अभी भी मेरे दिल में थी और मुझे वह अंदर से हिला कर रख देती थी। मैं हर रोज सोचती की सूरज का कभी मुझे फोन आएगा और सूरज कहेगा कि मैं घर आ रहा हूं लेकिन मैं सिर्फ ख्वाबों में जी रही थी यह सब होने वाला नहीं था। 

सूरज के साथ ना जाने क्या हुआ था इसका कुछ भी पता अब तक चल नहीं पाया था हम लोगों ने पता नहीं कितने चक्कर पुलिस स्टेशन के लगाए होंगे लेकिन अब सूरज का वापिस आ पाना बहुत ही मुश्किल था। सूरज निहायती शरीफ और नेक इंसान थे लेकिन उनके साथ ऐसा क्या हुआ मैं यह हर रोज सोचा करती थी। एक दिन मेरी सासू मां ने मुझे अपने पास बैठाया और कहने लगे बेटा सूरज की आने की कोई उम्मीद नजर नहीं आती और मेरे ससुर जी भी कहने लगे बेटा तुम्हें दूसरी शादी कर लेनी चाहिए। 

मैंने उन्हें कहा कि नहीं मैं आप लोगों के साथ ही रहूंगी और आप लोगों की देखभाल करूंगी वह कहने लगे बेटा लेकिन तुम अपने पूरे जीवन को हमारे चक्कर में क्यों बर्बाद कर रही हो बुढ़ापे में भी किसी की जरूरत पड़ती है और तुम इस बात को भली-भांति समझ लो कि तुम्हें भी किसी न किसी की जरूरत तो पड़ेगी ही तो बेटा तुम दूसरी शादी कर लो। मेरे सास ससुर ने मुझे हमेशा ही अपनी बेटी के रूप में स्वीकार किया है सूरज उनका एकलौता लड़का था उसके बावजूद भी मुझे उन्होंने हमेशा वही प्यार दिया जो वह सूरज को देते थे।

मैं उन्हें छोड़कर नहीं जाना चाहती थी मैं हमेशा ही सोचती कि क्या पता कभी सूरज वापस लौट आये इसी के चलते मैंने सूरज का इंतजार करना ही बेहतर समझा। मैंने उनसे साफ तौर पर कह दिया था कि मैं दूसरी शादी के बारे में सोच भी नहीं सकती मैं अपने जीवन को अकेले ही जी लूंगी। 

कहने में तो यह सब आसान था परंतु हकीकत में बहुत ही मुश्किल था सच्चाई बिल्कुल इसके उलट थी। मेरे जीवन में जब निखिल आया तो मुझे उससे बड़ी उम्मीदें थी निखिल मुझे हर बात पर हंसाया करते और वह मेरा हर जगह साथ दिया करते मुझे बहुत अच्छा लगता कि निखिल के साथ में समय बिताती थी। निखिल हमारे पड़ोस में ही रहते थे लेकिन हम दोनों के बारे में किसी को भी नहीं मालूम था क्योंकि मैं चाहती ही नहीं थी कि निखिल और मेरे बारे में किसी को कुछ पता चले।
गरिमा की गरम चूत की चुदाई (Garima Ki Garam Choot Ki Chudai)
गरिमा की गरम चूत की चुदाई (Garima Ki Garam Choot Ki Chudai)
 इसी वजह से मैंने कभी किसी को अपने और निखिल के बारे में कुछ नहीं बताया हालांकि निखिल मेरे बहुत अच्छे दोस्त है लेकिन इतने समय से मैं सूरज का इंतजार कर रही थी और मेरे अंदर भी उम्मीद की किरण धुमिल होने लगी थी मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या करना चाहिए। मैं दुविधा मे थी एक दिन मैं अपने घर पर अकेली बैठी हुई थी उस दिन निखिल आए और कहने लगे क्या हुआ?

निखिल को मेरी सासू मां और ससुर जी दोनों ही पहचानते थे इसलिए निखिल हमारे घर पर आ जाया करते थे परंतु उस दिन घर पर कोई भी नहीं था और हम दोनों ही घर पर बैठे हुए थे। मैंने निखिल से सूरज के बारे में कहा तो उन्होंने मेरी जांघ पर हाथ रखते हुए कहा आप अपने दिल को छोटा ना करें आप बड़ी ही अच्छी हैं और आप बड़ी हिम्मत वाली महिला है। 

निखिल कि बात मुझे बहुत अच्छी लगी और मैंने निखिल को गले लगा लिया मुझे उस दिन सूरज की बहुत याद आ रही थी मैं उसे याद कर के सोच रही थी कि काश सूरज मेरे पास होते तो कितना अच्छा रहता लेकिन ऐसा संभव ही नहीं हो पाया था सूरज भी मुझसे बहुत दूर जा चुके थे। मेरे सामने सिर्फ निखिल थे और मैने निखिल के होंठो को चूम लिया निखिल अपने आपे से बाहर हो गया था। 

निखिल ने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया जब निखिल ने मुझे बिस्तर पर लेटाया तो मुझे भी अंदर से कुछ बेचैनी होने लगी मैंने अपने कपड़ों को उतारना शुरू किया। निखिल ने काफी देर तक मेरे होठों का रसपान किया और मेरे स्तनों को अपने मुंह में लेकर चूसते रहे मुझे बहुत ही मजा आ रहा था। जिस प्रकार से निखिल ने मेरे अरमानों को दोबारा से जगा दिया था उससे मेरे अंदर सेक्स की भावना पैदा होने लगी थी।

निखिल ने जब मेरी योनि को सहलाना शुरु किया तो मै मचलने लगी थी जैसे ही उन्होंने अपने लंड को बाहर निकाला तो मैंने उसे अपने हाथों में हिलाते हुए कहा मुझे आपके लंड को मुंह में लेना है? निखिल को भी कोई आपत्ति नहीं थी उन्होंने मेरे मुंह के अंदर अपने लंड को डाल दिया जैसे कि निखिल का लंड मेरे मुंह में प्रवेश हुआ तो मैं उसे अच्छे से चूसने लगी और काफी देर तक चूसती रही। 

जब निखिल ने मेरे दोनों पैरों को चौड़ा करते हुए मेरी योनि के अंदर लंड डाला तो ऐसा लगा जैसे कि कई सालों बाद मेरी सेक्स की इच्छा पूरी हो पा रही है। निखिल मुझे बड़े जोर से प्रहार कर रहे थे और कह रहे थे कि गरिमा बहुत अच्छा लग रहा है। 

मेरे योनि की लगातार चिकनाई बढ़ती जा रही थी मेरी मादक आवाज में भी बढ़ोतरी हो रही थी। वह भी लगातार तेजी से मुझे धक्के मारते और मजे लेते जा रहे थे लेकिन ज्यादा देर तक वह मेरी चूत की गर्मी को बर्दाश्त ना कर सकी जैसे ही उन्होंने अपने वीर्य को मेरी योनि के अंदर प्रवेश करवाया तो मैंने भी उन्हें जकड लिया और कहा आप मुझे छोड़ कर तो नहीं जाएंगे। वह मुझे कहने लगे नहीं आपको छोड़कर कहीं नहीं जाऊंगा।
गरिमा की गरम चूत की चुदाई (Garima Ki Garam Choot Ki Chudai) गरिमा की गरम चूत की चुदाई (Garima Ki Garam Choot Ki Chudai) Reviewed by Priyanka Sharma on 9:57 PM Rating: 5

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