सिनेमा हाल में मिली कमसिन चूत (Cinema Hall Me Mili Kamsin Choot)

सिनेमा हाल में मिली कमसिन चूत
(Cinema Hall Me Mili Kamsin Choot)

मैं एक छोटे से गांव का नौजवान हूं हमारे गांव से करीब पांच किलोमीटर की दूरी पर रेलवे स्टेशन है मैं गांव में बेरोजगारी से जूझ रहा था तो सोचा शहर की चकाचौंध भरी जिंदगी में कुछ कर लूंगा इस उम्मीद को लिए मैं शहर की ओर बढ़ चला। 

मैंने गांव में अपने चचेरे बड़े भाई से पैसे उधार लिए और कहा तुम्हें पैसे कुछ समय बाद लौटा दूंगा यह कहते हुए मैं तांगे से स्टेशन पहुंच गया। हमारे गांव में आज भी तांगे चलते हैं जब मैं स्टेशन पहुंचा तो स्टेशन की स्थिति भी कुछ खास ठीक नहीं थी स्टेशन ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे कि गांव का कोई खंडहर सा हो। मैं ट्रेन का इंतजार करने लगा मैंने अपने पास के ही एक व्यक्ति से पूछा की ट्रेन कितने बजे आएगी तो उन्होंने मुझे ऊपर से लेकर नीचे तक देखा और कहा तुम्हें जाना कहां है।

मैंने उन्हें बताया मैं तो शहर जा रहा हूं वह कहने लगे ट्रेन का तो पता नहीं परंतु सुनने में आया है कि एक दो घंटे बाद ही ट्रेन आएगी। उस स्टेशन पर बहुत कम ट्रेन रुका करती थी मैं अब ट्रेन का इंतजार करने लगा बड़ी मुश्किल से बैठने के लिए एक सीट मिली मैं वहां पर बैठ गया और अपनी कमर सीधी करने लगा। 

करीब दो घंटे से ऊपर हो चुके थे लेकिन अब भी ट्रेन का कोई अता पता नहीं था शहर हमारे गांव से करीब डेड सौ किलोमीटर की दूरी पर है और मैं ट्रेन के इंतजार में ही बैठा रहा। स्टेशन पर अब भीड़ बढ़ती जा रही थी लोगों को चेहरे उतरते जा रहे थे और गर्मी भी अपने पूरे उफान पर थी क्योंकि दोपहर का वक्त था इसलिए बाहर बहुत तेज लू चल रही थी। 

तभी मेरे पास में आकर एक लड़की बैठी मैं उसे देखने लगा लेकिन वह मेरी तरफ नहीं देख रही थी परंतु मैं अपने दिल को सांत्वना दे रहा था, मेरे अंदर से मेरे दिल की धड़कन बहुत तेज होती जा रही थी। वह दिखने में गांव की तो बिल्कुल भी नहीं लग रही थी गांव का स्टेशन ऐसा लग रहा था जैसे कि कोई तबेला हो कोई अपनी गाय को घास खिला रहा था तो कोई गाय के पीछे दौड़ रहा था। आखिरकार कुछ ही देर में ट्रेन का इंतजार खत्म हुआ ट्रेन आई तो सब लोग ट्रेन की ओर ऐसे दौड़े जैसे कि ना जाने उन्हें वहां पर क्या मिलने वाला है।

मैंने भी अपने बल का प्रयोग किया और धक्का देते हुए ट्रेन के अंदर घुस गया काफी ज्यादा भीड़ होने की वजह से वह लड़की मुझे दिखाई नहीं दे रही थी तभी अचानक से एक हाथ मेरी ओर बढा मैंने उस लड़की को भीड़ से खींचते हुए ट्रेन की ओर खींच लिया। सब लोग ट्रेन में बैठ चुके थे लेकिन मुझे ही बैठने के लिए सीट नहीं मिली लेकिन मैंने उस लड़की को सीट पर बैठा दिया और उसने मुझे धन्यवाद कहा। 

वह कहने लगी आपका बहुत बहुत शुक्रिया अपने मुझे बैठने के लिए जगह दी मैंने उसे मुस्कुराते हुए जवाब दिया। मेरे हाथ में मेरा बैग था क्योंकि बैग रखने तक के लिए जगह नहीं मिल रही थी ट्रेन में सब लोग एक दूसरे के ऊपर चढ़ने की कोशिश कर रहे थे। एक व्यक्ति ने तो मेरे पैर पर अपने जूतों को भी रख दिया मैंने उन्हें चिल्लाते हुए कहा अरे भाई साहब तुम्हें दिखाई नहीं देता। वह कहने लगे देख रहे हो कितनी ज्यादा भीड़ है मैंने उन्हें कहा भीड़ तो है लेकिन आप फिर भी आराम से खड़े हो सकते हैं। 

उस लड़की की निगाहें मुझे बार-बार देख रही थी लेकिन मैंने उससे बात नहीं की मैंने उससे इसलिए बात नहीं की क्योकि मैंने सोचा कहीं उसे ऐसा ना लगे कि मैं उसे देख कर उसका दिल जीतने की कोशिश कर रहा हूं। मैंने उसकी तरफ नहीं देखा परंतु उसने कुछ देर बाद मुझे कहा आपको काफी देर हो चुकी है आप कब से खड़े हैं आप बैठ जाइए मैंने उसे कहा नहीं रहने दीजिए। 

अब वह मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी मैंने उसे कहा आपका नाम क्या है तो वह कहने लगी मेरा नाम कोमल है कोमल ने मुझसे पूछा आप क्या करते हैं। मैंने उसे बताया मैं तो अभी नौकरी की तलाश में हूं और मैं नौकरी के लिए ही शहर जा रहा हूं। मुझे क्या पता था कि मेरी राह आसान होने वाली थी क्योंकि कोमल ने मुझे कहा कि आप की नौकरी मैं लगवा दूंगी। कोमल शहर की रहने वाली थी और वह मुझे कहने लगी तुमने कितनी पढ़ाई की है मैंने उसे बताया कि मैंने ग्रेजुएशन किया है कोमल कहने लगी ठीक है जब हम लोग शहर पहुंच जाएं तो तुम अपना बायोडाटा मुझे दे देना।

मैंने कोमल से कहा ठीक है हम लोग रास्ते पर बात करते रहे और सफर कैसे कट गया कुछ मालूम ही नहीं पड़ा। अब शहर की रौनक दिखने लगी थी तो उसे इस बात का अंदाजा लग गया था कि हम लोग शहर की तरफ पहुंचने वाले हैं जैसे ही हम लोग ट्रेन से उतरे तो कोमल ने मुझे कहा यदि तुम मुझे बैठने के लिए सीट नहीं देते तो मुझे बड़ी परेशानी हो जाती। मैंने कोमल से कहा कोई बात नहीं यह तो मेरा फर्ज था मैंने कोमल से पूछा लेकिन आप गांव से कहां आ रही थी। 

वह कहने लगी मैं अपने ननिहाल गई थी और वहीं से वापस लौट रही थी मेरी नानी गांव में अकेले रहती है तो उनसे मिलने के लिए ही मैं गई थी मैंने कोमल से कहा अच्छा तो आपका ननिहाल हमारे गांव के पास ही है। वह कहने लगी हां उसके बाद उसने मुझे नंबर दिया लेकिन मेरे पास मोबाइल नहीं था तो उसने मुझे एक कागज में लिख कर अपना नंबर दिया और कहा तुम मुझे इस नंबर पर कॉल करना। 

मैंने सबसे पहले तो अपने लिए रहने के लिए जगह देखी, मैंने एक छोटा सा कमरा किराए पर ले लिया उसका किराया 15सौ रुपए था और मेरे पास अब सिर्फ पांच हजार ही बचे हुए थे उसमें से मैंने एक पुराना मोबाइल खरीद लिया। करीब दो दिन बाद मैंने कोमल को फोन किया कोमल कहने लगी तुम मुझे मिलने के लिए आ जाओ कोमल ने मुझे एक पता भेजा और कहा तुम इस पते पर मुझसे मिलने के लिए आ जाना।

मैंने कोमल से कहा ठीक है फिर मैं कोमल से मिलने के लिए चला गया जब मैं कोमल से मिलने गया तो उसने मुझे कहा तुम मुझे अपना बायोडाटा दे दो। मैंने कोमल से कहा मुझे इस बारे में बिल्कुल भी नहीं पता कोमल कहने लगी ठीक है चलो मैं ही तुम्हारा बायोडाटा बना देती हूं। 

कोमल ने मुझसे मेरी कुछ जानकारी ले ली और उसके बाद उसने मेरा बायोडाटा बना दिया उसने मुझे कहा मैं तुम्हें फोन करूंगी। कोमल ने मुझे चार दिन बाद फोन किया चार दिन तक मैं कमरे में ही पड़ा हुआ था क्योंकि मेरे पास पैसे भी कम बचे हुए थे इसलिए मैं नहीं चाहता था कि बेवजह ही पैसे खर्च हो जाएं। कुछ ही दिन में कोमल ने मेरी नौकरी की बात कर ली अब मेरी नौकरी लग चुकी थी। उस वक्त मेरी तनख्वाह पांच हजार ही थी मैं अपने पूरे दिलो जान से काम करने लगा। 
सिनेमा हाल में मिली कमसिन चूत (Cinema Hall Me Mili Kamsin Choot)
सिनेमा हाल में मिली कमसिन चूत (Cinema Hall Me Mili Kamsin Choot)
कोमल का मेरे ऊपर एहसान था इसलिए मैंने उसे कहा तुम्हारी वजह से ही मुझे नौकरी मिली है। कोमल कहने लगी देखो सुरजीत हो सकता है मेरी वजह से तुम्हें नौकरी मिली हो लेकिन अब आगे तुम्हें ही मेहनत करनी है। कोमल के साथ मेरे मुलाकातों का दौर बढ़ता चला गया और धीरे-धीरे मैं भी अब शहर में काफी कुछ चीजें सीखने लगा था। 

मैंने सबसे पहले तो कंप्यूटर के बारे में जानकारी ली उसके लिए मैं 3 महीने तक एक कंप्यूटर सेंटर में गया। मैं अब पूरी तरीके से शहर का वसींदा हो चुका था क्योंकि मैं शहर के तौर तरीके सीख चुका था कोमल के साथ भी मेरे नजदीकियां बढ़ती जा रही थी। एक दिन मैंने कोमल से कहा मुझे आज मूवी देखने के लिए जाना है क्या तुम मेरे साथ चलोगी? कोमल भी मेरी बात को मना ना कर सकी क्योंकि उसका मुझ पर पूरा भरोसा था वह मेरे साथ मूवी देखने के लिए आ गई।

हम दोनों मूवी देखने के लिए चले गए जब हम दोनों मूवी देखने के लिए गए तो वहां पर हमारे आस पास और भी प्रेमी जोड़े बैठे हुए थे। मैं उन प्रेमी जोड़ों को देखकर अपने दिल में यह ख्याल बुन बैठा की काश कोमल भी मेरी प्रेमिका होती लेकिन यह आग एक तरफा ही नहीं थी कोमल के दिल में भी मेरे लिए कुछ जो चल रहा था। कोमल ने मुझे अपने प्रेमी के बारे में बताया था लेकिन उन दोनों के बीच पहले जैसा प्यार नहीं था इसलिए कोमल ने उससे अलग होने का फैसला कर लिया। 

कोमल मेरे नजदीक आ चुकी थी एक शाम फोन पर मैंने कोमल से उसके फिगर का साइज पूछ लिया। कोमल पहले तो शर्माने लगी लेकिन उसने आखिरकार मुझे बता ही दिया उसके गोरे और छरहरे बदन को देखकर मै उसकी तरफ खींचा चला गया। जब मैंने कोमल को पहली बार चुंबन किया तो वह मेरे बिना ना रह सकी उसके दिल में भी आग लगने लगी थी और आखिरकार हम दोनों एक होने के लिए तैयार हो गए। 

मैंने कोमल के होठों को चूमा तो वह पूरी तरीके से उत्तेजित होने लगी थी और जैसे ही मैंने कोमल के कपड़े खोलकर उसे नग्न अवस्था में किया तो वह मेरी बाहों में आने लगी। मैंने कोमल को अपने नीचे लेटा दिया जब मेरा लंड कोमल की चूत से टकरा रहा था तो मेरे अंदर से एक करंट सा दौड़ रहा था।

मैने काफी देर तक कोमल के बदन को ऊपर से लेकर नीचे तक महसूस किया जब हम दोनों एक दूसरे के बदन की गर्मी को बर्दाश्त ना कर सके तो मैंने आखिरकार अपने 9 इंच मोटे लंड को पहली बार किसी लड़की की योनि में डाला। जिसके साथ ही मुझे भी बहुत ज्यादा दर्द हुआ कोमल के मुंह से भी चीख निकल पडी। कोमल की योनि मुझे आभास दिला रही थी कि वह बहुत टाइट है लेकिन मेरा लंड भी पूरी तरीके से छिल चुका था मैं कोमल को बड़ी तेजी से चोद रहा था। 

काफी देर तक मैंने कोमल की योनि के मजे लिए जब कोमल ने अपने पैरों  से मुझे जकड़ना शुरू किया तो मैंने अंदजा लगा लिया कि अब कोमल पूरी तरीके से संतुष्ट हो चुकी है, आखिरकार मेरे वीर्य की पिचकारी से मैंने कोमल को नहला दिया। उसके बाद तो जैसे कोमल और में एक हो चुके थे कोमल जब भी मेरे साथ होती तो उसके चेहरे पर मुस्कुराहट होती। वह कहती जबसे तुम मेरी जिंदगी में आए हो तब से मैं बहुत ज्यादा खुश हूं।
सिनेमा हाल में मिली कमसिन चूत (Cinema Hall Me Mili Kamsin Choot) सिनेमा हाल में मिली कमसिन चूत (Cinema Hall Me Mili Kamsin Choot) Reviewed by Priyanka Sharma on 10:55 PM Rating: 5

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